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डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री

चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना से छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई शक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ₹755 करोड़ की परियोजना को मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री मोदी सरकार के विशेष फोकस से छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली नई ऊंचाई : रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प – मुख्यमंत्री साय रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय रेल द्वारा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत ₹755 करोड़ की लागत से चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे विकास को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण पहचान रखता है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयले की आपूर्ति होती है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) तथा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना के पूर्ण होने से कोयला परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक आधार और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में  तीसरी रेल लाइन का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया दूरदर्शी निर्णय है। इससे अतिरिक्त माल परिवहन को सुगम बनाया जा सकेगा और रेल परिचालन अधिक दक्ष एवं प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को मजबूती मिलेगी, निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क, सुदृढ़ लॉजिस्टिक व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ को रेल अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रदेश के रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी-चौथी लाइन और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के विकास के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना भी इसी विकास दृष्टि का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में स्वीकृति मिलना जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरांचल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल एवं शहरी परिवहन अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विकास पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1853 से 2014 तक 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 रूट किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  प्रदेश का रेल नेटवर्क बढ़कर  2200 रूट किलोमीटर से अधिक होने जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश की रेल परियोजनाओं के लिए जहां लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को 1,680 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

उज्जैन दौरे पर CM मोहन यादव, 207 करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले की झारड़ा तहसील में 188.42 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सामाकोटा बैराज का लोकार्पण करेंगे। छोटी कालीसिंध नदी पर बने इस बैराज से क्षेत्र के 18 गांवों के करीब 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है और इससे 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि में पाइप लाइन पद्धति से सिंचाई हो सकेगी। सामाकोटा बैराज परियोजना से नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी और झारड़ा सहित कई गांवों के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। मुख्यमंत्री इस दौरान 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य विकास कार्यों का भी लोकार्पण करेंगे। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के 4.35 करोड़ रुपए लागत के महाविद्यालय भवन, लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में कन्या स्कूल भवन, मोचीखेड़ा में 33/11 केवी उपकेंद्र तथा झारड़ा क्षेत्र के 13 उप स्वास्थ्य केंद्र भवन शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य जनता को समर्पित किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने खारिज की HCS परीक्षा परिणाम चुनौती, कहा- HPSC की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी

चंडीगढ़. हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा-2026 की उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतें शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय का स्थान नहीं ले सकतीं। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब तक उत्तर कुंजी में त्रुटि प्रत्यक्ष, स्पष्ट और संदेह से परे साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर यदि संदेह या अस्पष्टता हो तो उसका लाभ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को दिया जाना चाहिए, न कि अभ्यर्थी को। हाईकोर्ट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने 26 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या पाया? उनका कहना था कि सामान्य अध्ययन और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं तथा प्रमाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परीक्षा के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने 28 अप्रैल को अस्थायी उत्तर कुंजी वेबसाइट पर अपलोड कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया, जिनकी राय के आधार पर कुछ उत्तरों में संशोधन किया गया और 2 मई को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। इसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किया गया।हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश देकर यह भी जानकारी मांगी थी कि कुल कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं। आयोग ने जवाब में बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों से दोबारा राय ली गई, लेकिन उन्होंने अंतिम उत्तर कुंजी में किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने से पहले उन्हें अन्य अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसा कोई नियम, विनियमन या विज्ञापन की शर्त नहीं है जो आयोग को ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य करती हो। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी पर यह साबित करने का दायित्व होता है कि त्रुटि इतनी स्पष्ट है कि उसके लिए किसी अनुमान या विस्तृत तर्क की आवश्यकता न पड़े। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार किए गए उत्तर प्रत्यक्ष रूप से गलत हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय को प्रतिस्थापित करने का कोई आधार नहीं बनता। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर आपत्ति पर पुन आपत्ति और फिर पुनर्विचार की अनुमति दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकेगी। चूंकि यह केवल प्रारंभिक परीक्षा थी और मुख्य परीक्षा इसी माह के अंत में प्रस्तावित है, इसलिए कुछ असफल अभ्यर्थियों की मांग पर पूरी चयन प्रक्रिया रोकना सार्वजनिक हित और सफल उम्मीदवारों दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

गोंद कतीरा का सेवन हर किसी के लिए नहीं है फायदेमंद, इन लोगों को हो सकता है गंभीर नुकसान

 गर्मियों के इन दिनों में अपने शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए अक्सर हम घरेलू उपाय अपनाना पसंद करते हैं. इन्हीं उपायों में से एक है गोंद कतीरा. लोग इसे काफी ज्यादा पसंद करते हैं और अक्सर इसका सेवन पानी में मिलाकर या फिर शर्बत में डालकर करते हैं. वैसे तो गोंद कतीरा को काफी फायदेमंद माना जाता है लेकिन, फिर भी इसका सेवन हर किसी को नहीं करना चाहिए. कुछ लोगों के लिए इसका सेवन करना हानिकारक भी साबित हो सकता है. आज की इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं लोगों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, ताकि आपको भी समझ में आ जाए कि किसे इसका सेवन करना चाहिए और किसे नहीं. जिन लोगों को है डाइजेशन से जुड़ी प्रॉब्लम्स अगर आपको पेट से जुड़ी प्रॉब्लम्स जैसे कि गैस, अपच या फिर कमजोर डाइजेस्टिव सिस्टम की प्रॉब्लम है, तो आपको गलती से भी गोंद कतीरा का सेवन नहीं करना चाहिए. जिन लोगों को इस तरह की प्रॉब्लम रहती है अगर वे गोंद कतीरा का सेवन कर लें, तो उन्हें भारीपन या फिर ब्लोटिंग जैसी प्रॉब्लम्स भी हो सकती है. अगर आप फिर भी गोंद कतीरा का सेवन करना चाहते ही हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरुर ले लें. लो ब्लड प्रेशर वाले लोग गोंद कतीरा सिर्फ आपके शरीर को ठंडा ही नहीं करता है, इसका काफी गहरा असर आपके ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है. अगर आप उन लोगों में से हैं जिनका ब्लड प्रेशर पहले से ही कम रहता है, तो इसके सेवन से आपको चक्कर आ सकते हैं या फिर कमजोरी भी महसूस हो सकती है. इसलिए लो ब्लड प्रेशर वालों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए. प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाएं गोंद कतीरा का सेवन उन महिलाओं को कभी नहीं करना चाहिए जो प्रेग्नेंट हैं या फिर स्तनपान करवाती हैं. इस समय आपको अपना खास ख्याल रखना चाहिए. गोंद कतीरा का असर आपके शरीर पर ठंडा होता है, जो इस समय में शरीर के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं माना जाता है. अगर आप इसका सेवन कर लेते हैं, तो हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ सकता है. अगर आप प्रेग्नेंट हैं या फिर स्तनपान करवा रही हैं, तो इसके सेवन से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें.

क्राइम कंट्रोल के लिए चंडीगढ़ का बड़ा प्लान, शिमला में पड़ोसी राज्यों संग बनेगी साझा रणनीति

चंडीगढ़. चंडीगढ़ में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन 19 जून को शिमला में होने वाली उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा। इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शहर में अपराध करने के बाद कई आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की तलाश और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समिति के सदस्य राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की जाएगी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन रिंग रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का मुद्दा भी बैठक में उठाएगा। इससे अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना बाहरी मार्ग से ही आगे भेजा जा सकेगा। मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कम दूरी वाले मार्ग का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है। बैठक में सुखना वन्यजीव सेंचरी के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भी उठाया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से पंजाब सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग करता रहा है। पंजाब ने अभयारण्य की सीमा से 2 से 2.75 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जबकि पहले केवल 100 मीटर क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में 1 से 1.5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने की मंशा जताई है। बैठक में चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा चंडीगढ़ शामिल हैं। स्थायी समिति की बैठक का उद्देश्य मुख्य परिषद बैठक के लिए एजेंडा तैयार करना है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने केवल चंडीगढ़ क्षेत्र के लिए ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन लगातार यह मांग करता रहा है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए पंजाब और हरियाणा के हिस्सों को भी ईएसजेड के दायरे में लाया जाए। प्रशासन का मानना है कि इससे झील और अभयारण्य के आसपास अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

कोसा सिल्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर, हजारों घरों में पहुंच रही खुशहाली और आय

जगदलपुर. बस्तर का रैली कोसा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है. महज पांच ग्राम वजन वाले एक कोसा से करीब एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है. हर वर्ष करोड़ों की संख्या में कोसा उत्पादन यहां के गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है. साल वनों से घिरे बस्तर में रेशम पालन की समृद्ध परंपरा आज भी कायम है. रेशम विभाग द्वारा संचालित प्रगुणन केंद्र इस उद्योग को मजबूती दे रहे हैं. बस्तर में उत्पादित कोसा का प्रसंस्करण प्रदेश के कई जिलों में किया जाता है. यहीं से तैयार वस्त्र देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचते हैं. जापान, सिंगापुर, यूएई सहित कई देशों में इसकी मांग बनी हुई है. कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक बनावट और आरामदायक गुणों के कारण पसंद किए जाते हैं. धागे के अपशिष्ट से भी गलीचे और दरियां तैयार की जाती हैं. महिला समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और सशक्त बनाया है. कालीपुर क्षेत्र में महिलाएं धागा निर्माण से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं. बस्तर का कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

मोहन सरकार का बड़ा ऐलान! मानसून सत्र में पेश होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉमन सिविल कोड की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इसे पारित कराया जाए। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की पुष्टि करते हुए बड़ा बयान दिया है। सीएम ने कहा कि इसी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा रहा है और महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। बता दें कि मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। विधानसभा में यूसीसी प्रस्ताव लाने को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह पूरे हिंदुस्तान की डिमांड है और यह कानून देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस कानून के लागू होने से जनसंख्या पर भी नियंत्रण लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश के कई राज्यों ने इसे लागू करने की पहल की है और अब मध्य प्रदेश में भी इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मध्य प्रदेश में यूसीसी कमेटी का गठन और प्रस्तावों की समय-सीमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता जांचने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मध्य प्रदेश सरकार के विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा इस 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन इसी वर्ष 27 अप्रैल को किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह को शामिल किया गया है। राज्य का दौरा कर लोगों से ली राय कमेटी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर समाज के सभी वर्गों से राय ली और आम नागरिकों के सुझाव ऑनलाइन दर्ज करने के लिए एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी शुरू किया था। जनता और विभिन्न संगठनों से यूसीसी को लेकर प्रस्ताव और सुझाव लेने की अवधि 15 मई से शुरू होकर 15 जून तक तय की गई थी। हालांकि, अभी भी पब्लिक को एसएसएम भेजकर ऑनलाइन सुझाव मंगाए जा रहे हैं कमेटी को गठन के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। जनता के सुझावों और अलग-अलग वर्गों से संवाद के बाद अब इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा पटल पर रखकर पारित कराया जाए और इस साल दिवाली तक मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाए। 20 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय मानसून सत्र मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही विधायकों द्वारा प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय सूचनाएं देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट माना जा रहा है। सरकार अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों का प्रस्ताव सदन में रख सकती है। इससे विभिन्न विभागों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित स्वामित्व योजना भी इस सत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती है। सरकार इस योजना से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधनों पर विचार कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।  इस पांच दिवसीय सत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। सत्र के लिए अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 जून 2026 तक तथा अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 9 जुलाई 2026 तक विधानसभा सचिवालय में प्रस्तुत की जा सकेंगी। वहीं, स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा नियम 267-क के अंतर्गत सूचनाएं 14 जुलाई 2026 से विधानसभा सचिवालय में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 4 बजे तक प्राप्त की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का यह 11वां सत्र होगा।  सदन में यूसीसी को लेकर हो सकती है चर्चा  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति प्रदेशभर से सुझाव प्राप्त कर रही है। सुझावों के परीक्षण के बाद समिति अपना प्रारूप (ड्राफ्ट) सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि यूसीसी विधेयक इसी सत्र में आएगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वहीं प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण को लेकर तैयार किए जा रहे मसौदे को भी सदन के समक्ष रखा जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है।  वहीं, विपक्ष इस सत्र में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मुद्दे के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने पर काम कर सकती है। दूसरी ओर सरकार अपनी विकास योजनाओं, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी उपलब्धियों को सदन में प्रमुखता रखने की योजना बना सकती है। इस मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा, बहस और महत्वपूर्ण निर्णय देखने को मिल सकते हैं।    यूसीसी पर अंतिम तैयारी में सरकार प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति लगातार विभिन्न जिलों में जाकर लोगों और … Read more

मस्जिद से मदरसे तक प्रशासन की सख्ती, वाराणसी-गाजियाबाद-आगरा में क्या-क्या हुआ?

लखनऊ यूपी में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले एक साथ चर्चा में हैं. कहीं मस्जिद को नोटिस मिला है, कहीं मदरसे पर बुलडोजर चला है, तो कहीं सड़क के बीच स्थित मजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है. वहीं बहराइच में हाईवे किनारे स्थित एक मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है. चारों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं. वाराणसी में रेलवे स्टेशन के विस्तार का मामला है, गाजियाबाद में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का आरोप है, आगरा में सड़क सुरक्षा और यातायात का मुद्दा सामने आया, जबकि बहराइच में प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कार्रवाई रोकने का फैसला लिया है।  वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन के पास मस्जिद को मिला नोटिस न्यूज एजेंसी के मुताबिक सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी की हो रही है. यहां काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर रेलवे प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है. नोटिस में संबंधित पक्षों को 20 जून तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कदम काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना के तहत उठाया गया है. स्टेशन का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाना है, जिसके लिए रेलवे अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता के मुताबिक प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता है और इसी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है।  कुछ दिन पहले भी हुई थी कार्रवाई गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस दिए जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर स्थित अजगैब शहीद मजार और एक मस्जिद को हटाया गया था. 3 जून को हुई इस कार्रवाई के पीछे भूमि स्वामित्व विवाद में न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया था. रेलवे अधिकारियों का कहना था कि पुनर्विकास परियोजना के लिए कराए गए सर्वे में संबंधित ढांचे रेलवे भूमि पर पाए गए थे. इसके बाद नोटिस जारी किए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर कार्रवाई की गई।  गाजियाबाद: 30 साल पुराने मदरसे पर चला बुलडोजर उधर गाजियाबाद में प्रशासन ने कुशालिया गांव में स्थित एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह मदरसा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर बना हुआ था. कार्रवाई से पहले कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं. मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत रैपिड रिस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और चार थानों की पुलिस तैनात की गई थी. कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध या तनाव सामने नहीं आया. सदर एसडीएम अरुण दीक्षित के अनुसार यह मदरसा लगभग 30 वर्षों से संचालित हो रहा था. जिस भूमि पर यह बना था उसका क्षेत्रफल करीब 880 वर्ग मीटर था और उसकी बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. जांच में पाया गया कि भूमि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते और खाद निस्तारण स्थल के रूप में दर्ज थी. प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया।  आगरा: बातचीत से निकला रास्ता, दूसरी जगह पहुंची मजार आगरा का मामला बाकी दोनों मामलों से कुछ अलग रहा. यहां प्रशासन ने किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण नहीं किया, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला. आगरा कॉलेज के निकट व्यस्त एमजी रोड पर स्थित एक मजार को उसकी प्रबंधन समिति की सहमति से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया. प्रशासन का कहना है कि मजार सड़क के बीच स्थित थी, जिससे यातायात प्रभावित होता था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा हो रही थीं. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हिमांशु गौरव के मुताबिक मजार प्रबंधन समिति के साथ कई दौर की बातचीत हुई. इसके बाद आपसी सहमति से मजार को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया. पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई और कहीं किसी प्रकार का तनाव नहीं देखा गया. आगरा प्रशासन इस मॉडल को संवाद आधारित समाधान के तौर पर देख रहा है।  बहराइच: फिलहाल रुकी कार्रवाई वहीं बहराइच में स्थिति कुछ अलग है. यहां बहराइच-नेपाल राजमार्ग के किनारे स्थित एक मस्जिद को लेकर कार्रवाई की चर्चा जरूर हुई, लेकिन प्रशासन ने फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामला तब चर्चा में आया जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पत्र में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. पत्र वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. मामले को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पहले संबंधित पक्षों को नोटिस दिया जाए, जमीन की पैमाइश कराई जाए और सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए. इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। 

झारखंड सरकार ने रेलवे को सौंपी 150 एकड़ जमीन, दो चरणों में पूरा होगा गोड्डा–पीरपैंती रेल कॉरिडोर

 भागलपुर आजादी के लंबे कालखंड के बाद भी बिहार और झारखंड के सीमावर्ती प्रक्षेत्र गोड्डा से पीरपैंती के बीच सीधे रेल संपर्क न होने से स्थानीय आबादी पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर थी. हालांकि, अब पूर्व रेलवे के निर्माण विभाग की सक्रियता से इस कमी को दूर करने का प्रयास तेज कर दिया गया है. कुल 1,393 करोड़ रुपये की लागत वाली इस नई रेल लाइन परियोजना के प्रथम चरण का काम वर्तमान में गति पकड़ चुका है. इसी कड़ी में, प्रथम चरण का निर्माण पूरा होने से पहले दूसरे चरण के लिए आवश्यक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि तकनीकी विसंगतियों के कारण परियोजना के काम में कोई रुकावट न आए. झारखंड सरकार ने रेलवे को सौंपी 150 एकड़ जमीन; दो चरणों में बंटा है पूरा प्रोजेक्ट इस रेल परियोजना के प्रशासनिक और भौगोलिक विस्तार की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं. कुछ महीने पहले इस परियोजना की कमान संभालते हुए झारखंड सरकार ने रेलवे को 150 एकड़ भूमि आधिकारिक रूप से उपलब्ध करा दी थी. गोड्डा के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने इस संबंध में पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत को भूमि आवंटन का आधिकारिक पत्र सौंपा था, जिसके बाद से रेलवे की तकनीकी टीम धरातल पर मुस्तैद है. यह पूरी 62 किलोमीटर की रेल योजना दो अलग-अलग चरणों में पूरी की जा रही है. पहले फेज के तहत गोड्डा से महागामा तक रेल ट्रैक बिछाने का काम तेजी से चल रहा है, जबकि दूसरे फेज में महागामा से पीरपैंती तक की दूरी को रेल कड़ियों से जोड़ा जाएगा. एनटीपीसी फरक्का को कोयला आपूर्ति में मिलेगी राहत; व्यापार को मिलेगा संबल “इस नए रेलखंड के पूरी तरह संधारित हो जाने के बाद एनटीपीसी (NTPC) फरक्का को ललमटिया माइंस से कोयले की आपूर्ति के लिए एक नया और छोटा मार्ग मिल जाएगा, जिससे वर्तमान में कहलगांव होकर जाने वाले रूट का अतिरिक्त दबाव कम होगा. इसके अतिरिक्त, मिर्जाचौकी, पाकुड़ और साहेबगंज प्रक्षेत्र से स्टोन चिप्स के परिवहन के लिए यह ट्रैक सबसे मुफीद साबित होगा. साथ ही, सरकार द्वारा पीरपैंती में प्रस्तावित नए पावर प्लांट के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भी यह रेल परियोजना गेम-चेंजर साबित होगी.” पहले फेज के काम के साथ ही दूसरे फेज के भूमि अधिग्रहण की रूपरेखा तैयार पूर्व रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के कनिष्ठ और वरिष्ठ अधिकारी इस परियोजना की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि समय सीमा के भीतर कली-मजदूरों और निर्माण एजेंसियों को फील्ड में उतारा जा सके. रेल मार्ग के चालू होने से न केवल आम यात्रियों को सुगम सफर की सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती जिलों के व्यापारिक प्रक्षेत्र को भी एक नया आर्थिक संबल प्राप्त होगा. इस संबंध में आधिकारिक बयान साझा करते हुए पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत ने बताया कि गोड्डा से पीरपैंती नई रेल लाइन योजना के लिए झारखंड सरकार से 150 एकड़ भूमि प्राप्त हो चुकी है. पहले फेज के तहत गोड्डा से महागामा तक निर्माण कार्य पूरी मुस्तैदी से जारी है. पहले चरण की कड़ियों को आपस में जोड़ने के साथ ही, दूसरे फेज के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी जल्द ही धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा ताकि पूरी परियोजना को बिना किसी प्रशासनिक विसंगति के समय पर पूरा किया जा सके.

पाकिस्तान पर बड़ी जीत के बाद भारत का दूसरा मुकाबला नीदरलैंड्स से आज

लीड्स  पाकिस्तान के विरुद्ध पहले मैच में शानदार जीत से आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम बुधवार को यहां नीदरलैंड्स के विरुद्ध होने वाले महिला टी-20 विश्व कप के अपने दूसरे ग्रुप मैच में बल्लेबाजी में और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी। पाकिस्तान के विरुद्ध पहले मैच में स्मृति मंधाना ने शीर्ष क्रम में और रिचा घोष ने निचले क्रम में अच्छी बल्लेबाजी की थी जिससे भारत 64 रन से जीत हासिल करने में सफल रहा था। प्रारंभिक बल्लेबाज शेफाली वर्मा और कप्तान हरमनप्रीत कौर सहित बाकी बल्लेबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। भारती फुलमाली मध्य क्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन पहले मैच में वह खाता भी नहीं खोल पाई थी। खास चुनौती नहीं मिलेगी भारत को टूर्नामेंट में आगे और भी कड़े मैच खेलने है और इसलिए बल्लेबाजी में निरंतरता बेहद महत्वपूर्ण है। भारत को नीदरलैंड्स से किसी तरह की खास चुनौती मिलने की संभावना नहीं है लेकिन उसे सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए लीग चरण में ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका में से किसी एक को हराना होगा। पाकिस्तान के विरुद्ध शुरू में फील्डिंग अच्छी नहीं थी, लेकिन पारी आगे बढ़ने के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ अच्छे कैच लिए। गेंदबाजी विभाग में तेज गेंदबाज अरुंधति रेड्डी और क्रांति गौड़ कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं। लेकिन स्पिनरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। दीप्ति शर्मा और श्री चरणी की स्पिन जोड़ी ने मिलकर आठ विकेट लिए। दीप्ति शर्मा ने चार ओवर में केवल 10 रन देकर पांच विकेट लिए और फार्म में वापसी की। भारत के लिए दीप्ति का फार्म में लौटना काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे पहले वह दो सीरीज में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। नीदरलैंड की टीम अपने पहले मैच में बांग्लादेश से हार गई थी। भारत के सामने चुनौती पेश करने के लिए उसे खेल के सभी विभागों में सुधार करना होगा। दोनों टीम इस प्रकार हैं     नीदरलैंड्स: बैबेट डी लीडे (कप्तान), कैरोलीन डी लैंग, फ्रेडरिक ओवरडिज्क, हन्ना लैंडहीर, हीथर सीजर्स, आइरिस जविलिंग, इसाबेल वान डेर वोनिंग, लारा लीमहुइस, मायरथे वान डेन राड, फेबे मोल्केनबोअर, राबिन रिजके, रोजाली लारेंस, सान्या खुराना, सिल्वर सिल्वर, स्टेरेलिस।     भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, रिचा घोष, श्रीचरणी, यास्तिका भाटिया, नंदनी शर्मा, अरुंधति रेड्डी, रेणुका सिंह, क्रांति गौड़, श्रेयंका पाटिल, राधा यादव।