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राजस्थान में इंडिया स्टोनमार्ट 2028 की तैयारियां शुरू, वैश्विक भागीदारी पर जोर

जयपुर  इंडिया स्टोनेमार्ट 2028 के आयोजन के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) और लघु उद्योग भारती के मध्य मंगलवार को त्रि-पक्षीय एमओयू हस्ताक्षर किया गया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के विश्नोई, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, रीको एमडी सुरेश ओला, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र, संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव नरेश पारीक, इंडिया स्टोन मार्ट के संयोजक नटवर अजमेरा तथा सिडोस के उपाध्यक्ष श्री दीपक अजमेरा सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति मौजूद रहे।  उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान को औद्योगिक हब बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि इंडिया स्टोन मार्ट 2026 सर्वश्रेष्ठ आयोजनों में से एक है। वर्ष 2028 के आयोजन को इससे भी भव्य रूप में आयोजित किया जाए। अभी से इसकी तैयारी शुरू की जाए और देश-विदेश में पत्थर से जुड़े उद्यमियों से चर्चा की जाए। साथ ही, पिछले संस्करण में आर्किटेक्ट्स को आयोजन से जोड़ा गया था, अगले आयोजन में देश के साथ ही विदेश के आर्किटेक्ट्स को राजस्थान के पत्थर के बारे में जानकारी दी जाए।  कर्नल राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले आयोजन में अधिक से अधिक देशों की भागीदारी, रिकॉर्ड विदेशी खरीददारी, वैश्विक निवेशकों की सहभागिता, आधुनीकीकरण और स्टार्टअप्स पर जोर होना चाहिए। साथ ही, चीन, लंदन और इटली सहित अन्य देशों में होने वाली स्टोन प्रदर्शनियों की खूबियों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। पत्थर उद्योग से जुड़े मशीन, डिजाइन आदि क्षेत्रों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए  एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई के विश्वास का संगम—  कर्नल राठौड़ ने कहा कि सिडोस पत्थर से जुड़ी तकनीक, डिजाइन और टेस्टिंग से जुड़ा है। रीको के पास इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सामर्थ्य है। वहीं, लघु उद्योग भारती के एमएसएमई सेक्टर विश्ववास है। इसलिए यह एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के विश्वास का संगम है। इससे इंडिया स्टोन मार्ट-2028 का ऐतिहासिक आयोजन होगा और राजस्थान का पत्थर पूरी दुनिया में पहुंचेगा।  अब राजस्थान में भी बनेंगी सेमीकंडक्टर चिप्स: उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री  उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के. के. विश्नोई ने कहा कि राजस्थान में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लागू की गई है। राजस्थान में भी शीघ्र ही सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू होगा। राज्य सरकार द्वारा हर वो छोटे से छोटा कदम उठाया जा रहा है, जिससे निवेश की प्रक्रिया आसान हो और अधिक से अधिक उद्योग लगें। इसी क्रम में करीब 34 नई नीतियां लागू की गई हैं। उन्होंने कहा स्टोन मार्ट-2026 का आयोजन ऐतिहासिक था। लघु उद्योग भारती सरकार के साथ मिलकर देशहित में नीति-निर्माण का कार्य कर रहा है।  इस अवसर पर एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें इंडिया स्‍टोन मार्ट – 2028 की तैयारियों के  साथ स्‍टोन इंडस्ट्री में नई तकनीक, नवाचार, वैश्‍विक बाजार की संभावनाओं, निर्यात संवर्धन और चुनौतियों पर सरकार और प्रदेश की स्‍टोन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच  चर्चा की गई।  17-20 फरवरी को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट  स्टोन मार्ट के अगले संस्करण का आयोजन 17-20 फरवरी, 2028 को होगा। इसमें अधिक से अधिक देशों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, 11 देशों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे। इंडिया स्टोनमार्ट 2026 में लगभग 45,000 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र विकसित किया गया, जिसमें 450 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें 59 विदेशी कंपनियां शामिल थीं तथा तुर्किये, चीन एवं ईरान सहित 3 अंतरराष्ट्रीय कंट्री पवेलियन स्थापित किए गए। विश्व के 8 देशों तथा भारत के 15 राज्यों से सहभागिता प्राप्त हुई। गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड एवं ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार संगठित राज्य पवेलियन के रूप में भागीदारी की। इस आयोजन में 27,000 से अधिक आगंतुक आए, जिनमें 21,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल थे। विश्व के 58 देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि इंडिया स्टोनमार्ट अब केवल भारत का आयोजन नहीं, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुका है। इसके अतिरिक्त 400 से अधिक आर्किटेक्ट्स एवं डिजाइन पेशेवरों की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि भविष्य में प्राकृतिक पत्थरों की मांग और उपयोग की संभावनाएं और अधिक बढ़ने वाली हैं।  प्रमुख तथ्य : इंडिया स्टोनमार्ट 2026 कुल प्रदर्शनी क्षेत्र : लगभग 45,000 वर्गमीटर कुल प्रदर्शक : 450 विदेशी प्रदर्शक : 59 अंतरराष्ट्रीय पवेलियन : 3 सहभागी देश : 8 भारतीय राज्य : 15 कुल आगंतुक : 27,256 व्यापारिक आगंतुक : 21,431 विदेशी प्रतिनिधि : 58 देशों से सहभागिता आर्किटेक्ट एवं डिजाइन विशेषज्ञ : 429

सरकार का बड़ा फैसला, न्यायिक आदेश के बिना रजिस्ट्री पर प्रतिबंध को नहीं माना जाएगा वैध

भोपाल  प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है।  बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता।  कलेक्टरों को निर्देश  आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है।  संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी  इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है। वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है। कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है। रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है। प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा। विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।     खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।     रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।     रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।     रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है। कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है। इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, … Read more

15 करोड़ किसान परिवारों के लिए खुशखबरी, होर्मुज मार्ग से आ रहे 34 जहाज; ईंधन संकट की आशंका टली

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है।  आखिर क्यों खास है ‘दिशा’? दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे।  किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।  भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज? भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है।  कब तक खत्म हो सकेगा संकट? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।  भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं।  सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

उन्नाव और कानपुर में विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

 कानपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को उन्नाव और कानपुर के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पहले उन्नाव में जनसभा को संबोधित करेंगे, इसके बाद कानपुर पहुंचकर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री कानपुर में सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में प्रतिभाग करेंगे। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और रसायन मुक्त कृषि को लेकर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री किसानों से संवाद भी कर सकते हैं। कृषि विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीडब्ल्यूडी में करेंगे समीक्षा बैठक इसके बाद मुख्यमंत्री लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दे सकते हैं। गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। डीएम ने की तैयारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक तय होने से प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने देर शाम विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़े सभी इंतजाम समय से पूरे कर लिए जाएं।  

94 गांवों के पुनर्वास, अधोसंरचना और शहरी विकास योजनाओं को मिली हरी झंडी

 भोपाल भोपाल के बाद सरकार ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत में वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 19,472 करोड़ रुपये होगी। इसमें 6,582 करोड़ रुपये की ऋण राशि भी शामिल है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना की लागत में भूमिगत लाइन सहित अन्य कारण से वृद्धि हुई है। इसकी मूल लागत 7,500 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889 करोड़ रुपये होगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6,582 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। प्रोजेक्ट टाइगर, एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ की स्वीकृति बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा संबंधी योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक चलाने की स्वीकृति दी गई। इस अवधि में 2,381 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इससे प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाई क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था के काम होंगे। संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी टाइगर रिजर्व के साथ ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों का पुनर्वास किया जाएगा। श्रमिक कल्याण, शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना रहेगी निरंतर बैठक में श्रमिक कल्याण, जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन तथा 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण, बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास, असंगठित शहरी व ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।  

दिल्ली में यमुना घाटों का पुनर्विकास, गंदगी-बदबू खत्म करने की योजना

नई दिल्ली  यमुना के किनारे स्थित राजधानी के 32 ऐतिहासिक घाटों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन घाटों पर न गंदगी नजर आएगी और न ही बदबू की समस्या होगी। घाटों को इस तरह डिवेलप करने की योजना है कि लोग यहां सुबह-शाम सैर कर सकें और सूर्योदय व सूर्यास्त के सुंदर नजारों का लुत्फ उठा सकें। अगले 6 महीने के भीतर इन 32 घाटों के विकास का काम शुरू होने की उम्मीद है। एलजी वीके सक्सेना ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के लिए डीडीए को निर्देश दिए हैं। एलजी ने यमुना के दोबारा जिंदा करने और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े काम का जायजा लिया। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई बैठक में डीडीए ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में चल रहे कामों की रिपोर्ट भी पेश की। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1700 हेक्टेयर इलाके में नदी तट को सुधारने का काम किया गया है। इसके तहत लगभग 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही करीब 1,425 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए डीडीए के अनुसार, यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए हैं। नदी इलाके से जुड़ी घास और वैटलैंड प्रजातियां लगाई गई हैं। यमुना कॉरिडोर में 35 वैटलैंड तैयार किए गए हैं। इससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज, जैव विविधता और बाढ़ नियंत्रण क्षमता मजबूत होने का दावा किया गया है। एलजी ने नदी किनारे बनाए गए प्रमुख इकोलॉजिकल स्थलों की भी जायजा लिया। बैठक में यमुना बाजार इलाके के 32 ऐतिहासिक घाटों के दोबारा जिंदा करने की योजना पर भी चर्चा हुई। एलजी ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए इंटैक की ओर से स्टडी कराई गई है। कवायद     छह महीने में शुरू होगा घाटों के पुनर्विकास का काम     LG ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए क्यों ज़रूरी है ये प्रोजेक्ट? बीते दो साल में यमुना किनारे असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसे पार्क बनाए गए हैं। इससे जैव विविधता में सुधार हुआ है। ऐतिहासिक घाटों की स्थिति ज्यादा नही सुधरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन घाटों के विकास से लोगों का यमुना से जुड़ाव बढ़ेगा। पहले दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ यमुना को कचरामुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने जो जनभागीदारी अभियान शुरू किया है, उसके तहत एक दिन में ही यमुना से करीब 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ किया गया। सिंचाई व बाढ़ विभाग मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पहले दिन 15 हजार लोगों ने इस अभियान में भाग लिया। यमुना के 28 घाटों पर एक साथ सफाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि अभियान में नागरिकों के अलावा वॉलंटियर्स, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, RWA के पदाधिकारी तथा सरकारी विभागों और एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान कुछ ही घंटों की सफाई में 116.6 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया। यमुना की सफाई के लिए नागरिकों की भागीदारी के अलावा 8 ट्रैश स्कीमर और वीड हार्वेस्टर, 28 बोट, 28 JCB मशीनें, 84 PWD मेंटेनेंस वैन तथा हॉर्टिकल्चर विभाग की 28 गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया। राय ने कहा कि यमुना की सफाई को लेकर सालों से चर्चा होती रही है, लेकिन अब सफाई सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामूहिक प्रयासों से नदी को साफ किया जाएगा।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व हुआ “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में प्रतिष्ठित पुरस्कार से पुरस्कृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश के गौरव एवं विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026'' में “Editor's Choice Award – Best Wildlife Destination” श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को वन्यजीव संरक्षण, उत्कृष्ट पर्यटन प्रबंधन, पर्यटकों को उच्च स्तरीय अनुभव प्रदान करने तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत एवं मुख्यमंत्री गोवा, डॉ. प्रमोद सावंत द्वारा गोवा में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की ओर से फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय, बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व तथा अपर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव  एल. कृष्णमूर्ति ने प्राप्त किया। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य एवं प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। पुरस्कार बाँधवगढ़ में कार्यरत समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय समुदायों तथा संरक्षण सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। पुरस्कार न केवल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है तथा राज्य की पहचान को देश के अग्रणी वन्यजीव पर्यटन गंतव्यों में और अधिक सुदृढ़ करता है। 

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभा का आयोजन, विकास योजनाओं पर होगी चर्चा

रायपुर. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास, पंचायतों की वित्तीय स्थिति, आवास योजनाओं, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय विकास कार्यों जैसे जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची होगी तैयार ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। ग्राम सभा द्वारा शासन की मार्गदर्शिका एवं एसओपी के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर निराकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। वीबी जी राम जी के संबंध में दी जाएगी जानकारी ग्राम सभा में पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति, तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी तथा इसके क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने, बेरोजगारी भत्ते के बेहतर प्रावधान, समय पर मजदूरी भुगतान और ग्राम सभा आधारित विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। ग्राम सभा में ज्यादा से ज्यादा सहभागिता की अपील प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा ग्राम विकास से जुड़े निर्णयों में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। ग्राम सभा में पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों की समीक्षा, पंचायतों के आय-व्यय का अनुमोदन, विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची तथा पंचायत संपत्तियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 के परिणामों को भी ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय के निर्देश

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की अध्‍यक्षता में पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक की वीडियों कॉफ्रेंस आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि मोहर्रम, ताजिया जुलूसों, अन्य धार्मिक आयोजनों, महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण तथा वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि आगामी त्योहारों एवं आयोजनों के दौरान परंपरागत रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, जुलूस मार्गों, धार्मिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। शांति समितियों, धर्मगुरुओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता एवं आपसी सौहार्द का वातावरण बनाए रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों एवं आपत्तिजनक सामग्री पर सतत निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की भड़काऊ अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि के विरुद्ध त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया तंत्र को सक्रिय रखते हुए संभावित चुनौतियों का समय रहते आकलन कर आवश्यक निवारक कदम उठाए जाएं। डीजीपी ने कहा कि उपलब्ध पुलिस बल, दंगा नियंत्रण उपकरणों, वाहनों, संचार संसाधनों, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा कर उन्हें पूर्णतः सक्रिय एवं तैयार रखा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं, वहां उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी स्थिति में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों एवं पुलिस प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था बाधित न होने पाए। बैठक में महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित मध्यप्रदेश भ्रमण सहित अन्य वीआईपी एवं वीवीआईपी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल, रूट सुरक्षा, एंटी-सबोटेज जांच, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं समन्वित सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर बल दिया गया। बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।  

झारखंड सरकार का बड़ा कदम, JSW स्टील को खनन पट्टा; बोकारो-धनबाद बेल्ट में बढ़ेंगी संभावनाएं

बोकारो. झारखंड सरकार ने जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टा को स्वीकृत कर लिया है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं में नई आशा जगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कोयला खनन शुरू होने से चंदनकियारी में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विधायक उमाकांत रजक ने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला चंदनकियारी को विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा। विधायक का कहना है केि विकास के कार्यो से संबंधित फाइलों की धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं। विदित हो कि यह दोनों कोल ब्लाक जेएसडब्ल्यू स्टील को वर्ष 2023 में नीलामी के माध्यम से दिया गया था। तब से खनन पट्टा एवं अन्य स्वीकृति को लेकर उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। अब खनन पट्टा मिलने के बाद जल्द ही उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। अब निवेश, रोजगार और विकास पर नजर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के 2174.52 एकड़ तथा सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। खनन कार्य शुरू होने के साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, छोटे व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से कागजों में अटकी परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी और चंदनकियारी कोयला आधारित औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्षों के इंतजार के बाद खुला रास्ता: पर्वतपुर कोल ब्लॉक का सफर पिछले कई वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को सौंपने का निर्णय लिया था। उस समय यह माना गया था कि बंद पड़ी खदान के चालू होने से करीब चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन के रूप में विकसित करने की योजना थी ताकि आसपास के गांवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हालांकि, कोल ब्लॉक आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रियाओं और स्वामित्व हस्तांतरण की जटिलताओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले सेल इसकी देखरेख करता रहा, बाद में ब्लॉक बीसीसीएल के पास पहुंचा और अंततः वर्ष 2023 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने नीलामी के माध्यम से इसे हासिल कर लिया। पर्वतपुर-सीता नाला परियोजना को संचालन की मंजूरी, दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला सरकार से संचालन की अनुमति मिलने के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील की पर्वतपुर एवं सीता नाला कोकिंग कोल परियोजना में उत्पादन शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। परियोजना से निकाले जाने वाले कोकिंग कोयले का उपयोग दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा, जिसका संचालन भी हाल ही में जेएसडब्ल्यू स्टील को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों से अधिक समय से बंद पड़ी दुगदा कोल वाशरी को पुनः चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है। वाशरी की वर्तमान क्षमता सालाना दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर चार मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। पर्वतपुर और सीता नाला परियोजना से मिलने वाला कच्चा कोयला दुगदा वाशरी के लिए स्थायी फीड का काम करेगा। इससे वाशरी के नियमित संचालन में मदद मिलेगी और कोकिंग कोल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खदान और वाशरी दोनों के संचालन की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। दुगदा वाशरी के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध होगा। इससे आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट में इसे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।