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चार गुना मुआवजे और ऋण अदायगी की तिथि बढ़ाने के निर्णय प्रशंसनीय कृषकों ने माना मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर किसान कल्याण के निर्णयों के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों के कल्याण के कार्य निरंतर होंगे। अन्नदाता को सम्मान के साथ उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधि मंडल ने गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश की उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए किसानों के लिए की गई बेहतर व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। किसान संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम है। उपार्जन की दृष्टि से पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में 9अप्रैल से 28 मई की अवधि में उपार्जन किया गया। समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ ही 40रुपए बोनस राशि मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भुगतान की व्यवस्था करवाई गई। किसानों को 27 हजार 196.48 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान प्रदेश में किया जा चुका है। किसानों ने ऋण अदायगी के लिए 31 मार्च की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई किए जाने और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णय प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर किसानों ने कृषक हित से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। इनमें मूंग खरीद व्यवस्था और मूंग-उड़द के लिए पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण करवाने, नहरों को तालाबों से जोड़ने के सुझाव शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में  कमल सिंह आंजना,  चंद्रकांत गौर के साथ  सर्वज्ञ दीवान,  लक्ष्मी नारायण पटेल,  प्रह्लाद पटेल आदि शामिल थे।  

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ में बोले सीएम योगी, उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से निकलकर देश की टॉप-3 इकोनॉमी में शामिल

लखनऊ/नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से सोमवार को वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर को एक नया और आधुनिक एयरपोर्ट मिल गया है। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट से पहली वाणिज्यिक उड़ान इंडिगो एयरलाइंस की रही। सुबह लखनऊ से आई पहली फ्लाइट का स्वागत किया गया, जबकि इसके बाद बेंगलुरु के लिए पहली उड़ान रवाना हुई। इंडिगो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है। पहली उड़ान के साथ शुरू हुआ नया अध्याय नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत इंडिगो की उद्घाटन उड़ान से हुई। सोमवार सुबह लखनऊ से उड़ान भरकर पहली फ्लाइट जेवर एयरपोर्ट पहुंची, जबकि इसके बाद पहली प्रस्थान उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ एयरपोर्ट ने नियमित वाणिज्यिक सेवाओं के नए दौर में प्रवेश कर लिया। इंडिगो ने घोषणा की है कि वह चरणबद्ध तरीके से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक प्रमुख शहरों से जोड़ेगी। इनमें लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, अमृतसर, चंडीगढ़, श्रीनगर, धर्मशाला और पंतनगर जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक हवाई सेवाएं मिलेंगी। जल्द शुरू होंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें एयरपोर्ट से फिलहाल घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू किया गया है, जबकि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं भी शुरू करने की योजना है। इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वैश्विक कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनकर उभरेगा और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। यहां यात्रियों को डिजीयात्रा, सेल्फ चेक-इन, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एयरपोर्ट का डिजाइन उत्तर प्रदेश की संस्कृति और परंपरा से प्रेरित है। टर्मिनल परिसर में वाराणसी के घाटों और भारतीय स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी। प्राकृतिक रोशनी और खुले स्थान यात्रियों को बेहतर अनुभव देंगे। यात्रियों के लिए मजबूत मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को विभिन्न परिवहन सेवाओं से जोड़ा गया है। यहां एयरपोर्ट टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली बस सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में रेल और रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क से भी इसकी कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाएगा। कार्गो हब से व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यात्री सेवाओं के साथ-साथ एक बड़े कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया गया है। एयर इंडिया सैट्स द्वारा विकसित कार्गो सुविधा की शुरुआती क्षमता दो लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 लाख मीट्रिक टन तक किया जाएगा। इससे ई-कॉमर्स, निर्यात और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई गति मिलेगी। 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता एयरपोर्ट के प्रथम चरण को प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुविधाओं और विस्तार की संभावनाओं के साथ विकसित यह एयरपोर्ट भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यात्री अनुभव को बनाया गया खास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस चेयरमैन क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने कहा कि यह केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और बेहतर यात्री अनुभव की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि हर यात्री को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिल सके। योगी सरकार के विकास मॉडल का अहम हिस्सा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं में शामिल है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ यह एयरपोर्ट प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति देगा। सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट के संचालन से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद करेगा।

डीजीपी ने सभी पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर तैयारियों की समीक्षा की, प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था के दिए निर्देश

भोपाल प्रदेश में 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के सुरक्षित, पारदर्शी एवं निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। बैठक में परीक्षा से संबंधित संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था, अंतर-विभागीय समन्वय, साइबर निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तथा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा प्रश्नपत्रों के प्राप्त होने से लेकर उनके सुरक्षित भंडारण, परीक्षा केंद्रों तक परिवहन, परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं एवं सामग्री की सुरक्षित वापसी तक संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्णतः सुरक्षित एवं त्रुटिरहित बनाए रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी जिलों में पुलिस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA), शिक्षा विभाग, बैंकिंग संस्थाओं तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पुलिस अधीक्षक 20 जून तक परीक्षा केंद्रों, प्रश्नपत्र भंडारण स्थलों एवं संबंधित बैंकों का स्वयं निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण करें। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD), सुरक्षा बलों की तैनाती तथा अभ्यर्थियों की प्रवेश व्यवस्था का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए। डीजीपी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने जिले के प्रत्येक परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करें तथा प्रश्न-पत्रों के परिवहन, स्ट्रांग रूम, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समुचित समीक्षा कर सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करें। उन्‍होनें कहा कि साइबर माध्यमों से होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रदेश के 38 साइबर कमांडो सक्रिय रहेंगे। उन्होंने पेपर लीक, अफवाहों एवं अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने के लिए साइबर निगरानी को और सुदृढ़ करने, सोशल मीडिया गतिविधियों पर सतत नजर रखने तथा पूर्व में परीक्षा संबंधी अपराधों में संलिप्त रहे व्यक्तियों एवं संदिग्ध तत्वों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। डीजीपी ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी अधिकारी पूर्ण संवेदनशीलता, समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना, पेपर लीक संबंधी दुष्प्रचार अथवा अनुचित गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई की जाए। उन्होंने "पेपर लीक के प्रति शून्य सहिष्णुता" (Zero Tolerance) की नीति अपनाने के निर्देश दिए। पुलिस महानिदेशक ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि परीक्षा अवधि के दौरान होटल, लॉज, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों की आवश्यक जांच की जाए। जिला स्तरीय समन्वय समितियां लगातार सक्रिय रहें तथा अंतिम 72 घंटों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाए। परीक्षा समाप्ति के बाद प्रश्नपत्रों एवं अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षित वापसी प्रक्रिया को भी उतनी ही गंभीरता से संचालित किया जाए जितनी गंभीरता से परीक्षा पूर्व सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जाती है। बैठक में बताया गया कि मध्‍यप्रदेश में 283 परीक्षा केन्‍द्रों पर लगभग 1 लाख 18 हजार अभ्‍यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इंदौर, भोपाल, ग्‍वालियर एवं जबलपुर में सर्वाधिक परीक्षा केन्‍द्र बनाए गए हैं। बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।  

खेत में बैल चराते समय दर्ज कराई शिकायत, प्रशासन ने घर पहुंचकर खुलवाया बैंक खाता और बनवाया किसान क्रेडिट कार्ड

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सराईटीकरा निवासी किसान  राजनाथ राजवाड़े का अनुभव इसका सशक्त उदाहरण है, जहां एक फोन कॉल पर प्रशासन ने महज 24 घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान कर दिया।  राजनाथ राजवाड़े आगामी खरीफ फसल के लिए खाद की व्यवस्था को लेकर चिंतित थे। खेत में बैल चराने के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और मात्र दो घंटे के भीतर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली तथा सीधे उनके घर पहुंच गए। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि शासकीय व्यवस्था के माध्यम से खाद-बीज प्राप्त करने के लिए किसान का सहकारी बैंक में खाता और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना आवश्यक है। अधिकारियों ने स्वयं पहल करते हुए किसान को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग दिया। बैंक का समय समाप्त हो जाने के कारण अगले दिन सहकारी बैंक में उनका खाता खुलवाया गया, पासबुक जारी की गई और आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए। इसके बाद अल्प समय में ही किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया। केसीसी बनने के साथ ही  राजवाड़े को आवश्यक खाद और बीज उपलब्ध करा दिए गए तथा भविष्य में कृषि कार्यों के लिए ऋण एवं नकद सहायता प्राप्त करने का रास्ता भी आसान हो गया। बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए समस्या का समाधान मिलने से किसान ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के 24 घंटे के भीतर ही उनका पूरा काम हो गया। उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा और कृषि विभाग के अधिकारियों ने घर पहुंचकर हर संभव सहायता प्रदान की।  राजनाथ राजवाड़े ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसानों और आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए जा रहे संवेदनशील और जनहितकारी प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

राजस्थान में इंडिया स्टोनमार्ट 2028 की तैयारियां शुरू, वैश्विक भागीदारी पर जोर

जयपुर  इंडिया स्टोनेमार्ट 2028 के आयोजन के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) और लघु उद्योग भारती के मध्य मंगलवार को त्रि-पक्षीय एमओयू हस्ताक्षर किया गया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के विश्नोई, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, रीको एमडी सुरेश ओला, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र, संयुक्त राष्ट्रीय महासचिव नरेश पारीक, इंडिया स्टोन मार्ट के संयोजक नटवर अजमेरा तथा सिडोस के उपाध्यक्ष श्री दीपक अजमेरा सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति मौजूद रहे।  उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान को औद्योगिक हब बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि इंडिया स्टोन मार्ट 2026 सर्वश्रेष्ठ आयोजनों में से एक है। वर्ष 2028 के आयोजन को इससे भी भव्य रूप में आयोजित किया जाए। अभी से इसकी तैयारी शुरू की जाए और देश-विदेश में पत्थर से जुड़े उद्यमियों से चर्चा की जाए। साथ ही, पिछले संस्करण में आर्किटेक्ट्स को आयोजन से जोड़ा गया था, अगले आयोजन में देश के साथ ही विदेश के आर्किटेक्ट्स को राजस्थान के पत्थर के बारे में जानकारी दी जाए।  कर्नल राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले आयोजन में अधिक से अधिक देशों की भागीदारी, रिकॉर्ड विदेशी खरीददारी, वैश्विक निवेशकों की सहभागिता, आधुनीकीकरण और स्टार्टअप्स पर जोर होना चाहिए। साथ ही, चीन, लंदन और इटली सहित अन्य देशों में होने वाली स्टोन प्रदर्शनियों की खूबियों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। पत्थर उद्योग से जुड़े मशीन, डिजाइन आदि क्षेत्रों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए  एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई के विश्वास का संगम—  कर्नल राठौड़ ने कहा कि सिडोस पत्थर से जुड़ी तकनीक, डिजाइन और टेस्टिंग से जुड़ा है। रीको के पास इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सामर्थ्य है। वहीं, लघु उद्योग भारती के एमएसएमई सेक्टर विश्ववास है। इसलिए यह एमओयू तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के विश्वास का संगम है। इससे इंडिया स्टोन मार्ट-2028 का ऐतिहासिक आयोजन होगा और राजस्थान का पत्थर पूरी दुनिया में पहुंचेगा।  अब राजस्थान में भी बनेंगी सेमीकंडक्टर चिप्स: उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री  उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के. के. विश्नोई ने कहा कि राजस्थान में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लागू की गई है। राजस्थान में भी शीघ्र ही सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू होगा। राज्य सरकार द्वारा हर वो छोटे से छोटा कदम उठाया जा रहा है, जिससे निवेश की प्रक्रिया आसान हो और अधिक से अधिक उद्योग लगें। इसी क्रम में करीब 34 नई नीतियां लागू की गई हैं। उन्होंने कहा स्टोन मार्ट-2026 का आयोजन ऐतिहासिक था। लघु उद्योग भारती सरकार के साथ मिलकर देशहित में नीति-निर्माण का कार्य कर रहा है।  इस अवसर पर एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें इंडिया स्‍टोन मार्ट – 2028 की तैयारियों के  साथ स्‍टोन इंडस्ट्री में नई तकनीक, नवाचार, वैश्‍विक बाजार की संभावनाओं, निर्यात संवर्धन और चुनौतियों पर सरकार और प्रदेश की स्‍टोन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच  चर्चा की गई।  17-20 फरवरी को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट  स्टोन मार्ट के अगले संस्करण का आयोजन 17-20 फरवरी, 2028 को होगा। इसमें अधिक से अधिक देशों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, 11 देशों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे। इंडिया स्टोनमार्ट 2026 में लगभग 45,000 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र विकसित किया गया, जिसमें 450 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें 59 विदेशी कंपनियां शामिल थीं तथा तुर्किये, चीन एवं ईरान सहित 3 अंतरराष्ट्रीय कंट्री पवेलियन स्थापित किए गए। विश्व के 8 देशों तथा भारत के 15 राज्यों से सहभागिता प्राप्त हुई। गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड एवं ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार संगठित राज्य पवेलियन के रूप में भागीदारी की। इस आयोजन में 27,000 से अधिक आगंतुक आए, जिनमें 21,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल थे। विश्व के 58 देशों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि इंडिया स्टोनमार्ट अब केवल भारत का आयोजन नहीं, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुका है। इसके अतिरिक्त 400 से अधिक आर्किटेक्ट्स एवं डिजाइन पेशेवरों की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि भविष्य में प्राकृतिक पत्थरों की मांग और उपयोग की संभावनाएं और अधिक बढ़ने वाली हैं।  प्रमुख तथ्य : इंडिया स्टोनमार्ट 2026 कुल प्रदर्शनी क्षेत्र : लगभग 45,000 वर्गमीटर कुल प्रदर्शक : 450 विदेशी प्रदर्शक : 59 अंतरराष्ट्रीय पवेलियन : 3 सहभागी देश : 8 भारतीय राज्य : 15 कुल आगंतुक : 27,256 व्यापारिक आगंतुक : 21,431 विदेशी प्रतिनिधि : 58 देशों से सहभागिता आर्किटेक्ट एवं डिजाइन विशेषज्ञ : 429

सरकार का बड़ा फैसला, न्यायिक आदेश के बिना रजिस्ट्री पर प्रतिबंध को नहीं माना जाएगा वैध

भोपाल  प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है।  बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता।  कलेक्टरों को निर्देश  आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है।  संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी  इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है। वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है। प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है। कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है। रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है। प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा। विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।     खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।     रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।     रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।     रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है। कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है। इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, … Read more

15 करोड़ किसान परिवारों के लिए खुशखबरी, होर्मुज मार्ग से आ रहे 34 जहाज; ईंधन संकट की आशंका टली

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है।  आखिर क्यों खास है ‘दिशा’? दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे।  किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।  भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज? भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है।  कब तक खत्म हो सकेगा संकट? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।  भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं।  सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

उन्नाव और कानपुर में विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी

 कानपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को उन्नाव और कानपुर के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पहले उन्नाव में जनसभा को संबोधित करेंगे, इसके बाद कानपुर पहुंचकर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री कानपुर में सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में प्रतिभाग करेंगे। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और रसायन मुक्त कृषि को लेकर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री किसानों से संवाद भी कर सकते हैं। कृषि विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीडब्ल्यूडी में करेंगे समीक्षा बैठक इसके बाद मुख्यमंत्री लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। मुख्यमंत्री अधिकारियों को विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दे सकते हैं। गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री गोविंद नगर और कल्याणपुर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। डीएम ने की तैयारियों की समीक्षा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक तय होने से प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने देर शाम विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़े सभी इंतजाम समय से पूरे कर लिए जाएं।  

94 गांवों के पुनर्वास, अधोसंरचना और शहरी विकास योजनाओं को मिली हरी झंडी

 भोपाल भोपाल के बाद सरकार ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत में वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 19,472 करोड़ रुपये होगी। इसमें 6,582 करोड़ रुपये की ऋण राशि भी शामिल है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना की लागत में भूमिगत लाइन सहित अन्य कारण से वृद्धि हुई है। इसकी मूल लागत 7,500 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889 करोड़ रुपये होगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6,582 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। प्रोजेक्ट टाइगर, एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ की स्वीकृति बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा संबंधी योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक चलाने की स्वीकृति दी गई। इस अवधि में 2,381 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इससे प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाई क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था के काम होंगे। संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी टाइगर रिजर्व के साथ ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों का पुनर्वास किया जाएगा। श्रमिक कल्याण, शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना रहेगी निरंतर बैठक में श्रमिक कल्याण, जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन तथा 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण, बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास, असंगठित शहरी व ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।  

दिल्ली में यमुना घाटों का पुनर्विकास, गंदगी-बदबू खत्म करने की योजना

नई दिल्ली  यमुना के किनारे स्थित राजधानी के 32 ऐतिहासिक घाटों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन घाटों पर न गंदगी नजर आएगी और न ही बदबू की समस्या होगी। घाटों को इस तरह डिवेलप करने की योजना है कि लोग यहां सुबह-शाम सैर कर सकें और सूर्योदय व सूर्यास्त के सुंदर नजारों का लुत्फ उठा सकें। अगले 6 महीने के भीतर इन 32 घाटों के विकास का काम शुरू होने की उम्मीद है। एलजी वीके सक्सेना ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के लिए डीडीए को निर्देश दिए हैं। एलजी ने यमुना के दोबारा जिंदा करने और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े काम का जायजा लिया। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई बैठक में डीडीए ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में चल रहे कामों की रिपोर्ट भी पेश की। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1700 हेक्टेयर इलाके में नदी तट को सुधारने का काम किया गया है। इसके तहत लगभग 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही करीब 1,425 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए डीडीए के अनुसार, यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए हैं। नदी इलाके से जुड़ी घास और वैटलैंड प्रजातियां लगाई गई हैं। यमुना कॉरिडोर में 35 वैटलैंड तैयार किए गए हैं। इससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज, जैव विविधता और बाढ़ नियंत्रण क्षमता मजबूत होने का दावा किया गया है। एलजी ने नदी किनारे बनाए गए प्रमुख इकोलॉजिकल स्थलों की भी जायजा लिया। बैठक में यमुना बाजार इलाके के 32 ऐतिहासिक घाटों के दोबारा जिंदा करने की योजना पर भी चर्चा हुई। एलजी ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए इंटैक की ओर से स्टडी कराई गई है। कवायद     छह महीने में शुरू होगा घाटों के पुनर्विकास का काम     LG ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए क्यों ज़रूरी है ये प्रोजेक्ट? बीते दो साल में यमुना किनारे असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसे पार्क बनाए गए हैं। इससे जैव विविधता में सुधार हुआ है। ऐतिहासिक घाटों की स्थिति ज्यादा नही सुधरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन घाटों के विकास से लोगों का यमुना से जुड़ाव बढ़ेगा। पहले दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ यमुना को कचरामुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने जो जनभागीदारी अभियान शुरू किया है, उसके तहत एक दिन में ही यमुना से करीब 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ किया गया। सिंचाई व बाढ़ विभाग मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पहले दिन 15 हजार लोगों ने इस अभियान में भाग लिया। यमुना के 28 घाटों पर एक साथ सफाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि अभियान में नागरिकों के अलावा वॉलंटियर्स, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, RWA के पदाधिकारी तथा सरकारी विभागों और एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान कुछ ही घंटों की सफाई में 116.6 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया। यमुना की सफाई के लिए नागरिकों की भागीदारी के अलावा 8 ट्रैश स्कीमर और वीड हार्वेस्टर, 28 बोट, 28 JCB मशीनें, 84 PWD मेंटेनेंस वैन तथा हॉर्टिकल्चर विभाग की 28 गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया। राय ने कहा कि यमुना की सफाई को लेकर सालों से चर्चा होती रही है, लेकिन अब सफाई सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामूहिक प्रयासों से नदी को साफ किया जाएगा।