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PM जनमन आवास योजना से बदली सरिता बैगा की जिंदगी, कच्चे घर की जगह मिला पक्का आशियाना

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक : पीएम जनमन आवास योजना ने सरिता बैगा के जीवन में भरी खुशियों की नई रोशनी साय सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर असर; पीएम जनमन आवास और महतारी वंदन योजना से आदिवासी परिवार को मिला सुरक्षित घर, आर्थिक संबल और सम्मानपूर्ण जीवन रायपुर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तब वह केवल एक योजना नहीं बल्कि किसी परिवार के जीवन में परिवर्तन की नई कहानी बन जाती है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और महतारी वंदन योजना के समन्वित लाभ से उनका परिवार आज सुरक्षित आवास, आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।       पहले सरिता बैगा का परिवार एक कच्चे मकान में रहता था। बरसात शुरू होते ही पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल की छत से पानी टपकता था, दीवारों में नमी भर जाती थी और हर वर्ष छत की मरम्मत तथा खपरैल बदलने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छोटे बच्चों के साथ बारिश के दिनों में सुरक्षित रहना भी एक बड़ी चुनौती थी।      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप सरिता बैगा के परिवार को पीएम जनमन आवास योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से योजना का लाभ समय पर मिला और आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त पक्के घर में रह रहा है।     नए आवास ने केवल उनके रहने की व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। अब बारिश का मौसम उनके लिए चिंता नहीं, बल्कि राहत और सुकून लेकर आता है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।      सरिता बैगा को राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से परिवार के दैनिक खर्चों, बच्चों की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आया है।     सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका परिवार भी पक्के घर में रहेगा। आज शासन की योजनाओं ने उनके सपनों को साकार कर दिया है। वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की जनहितैषी योजनाओं ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास, आर्थिक सहयोग और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है।     ग्राम पंडरीपानी में पीएम जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला, ग्राम पंचायत तथा संबंधित मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका रही। योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल रहा है, जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। सरिता बैगा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाकर उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विकास की नई दिशा भी प्रदान करता है।

बेथ मूनी और लिचफील्ड की शानदार साझेदारी, ऑस्ट्रेलिया ने जीता रिकॉर्ड सातवां खिताब

लंदन ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में टीम की भिड़ंत इंग्लैंड से थी। दोनों टीमों अजेय रहते हुए फाइनल तक पहुंची थी। खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया ने 7वीं बार खिताब अपने नाम किया है। अन्य कोई भी टीम एक बार से ज्यादा खिताब नहीं जीत पाई है। इंग्लैंड को चौथी बार फाइनल में हार मिली है। हर बार उसके सामने ऑस्ट्रेलिया की ही टीम थी। पहले बैटिंग करते हुए फाइनल में इंग्लैंड ने 4 विकेट पर 150 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने आसानी से 18वें ओवर में मैच अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ने पावरप्ले में दो विकेट गंवाए ऐतिहासिक लॉर्डस मैदान में खेले जा रहे मुकाबले में टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत खराब रही थी। इंग्लैंड ने अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों को सस्ते में गंवा दिया। एमी जोंस 6 और डैनी व्याट 8 रन बनाकर आउट हुईं। 32 रन पर 2 विकेट गंवा चुकी इंग्लैंड को कप्तान नैट सीवर-ब्रंट और एलिस कैप्सी ने संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 35 रन की साझेदारी की। कैप्सी 20 गेंदों पर 23 रन बनाकर आउट हुईं। इसके बाद इंग्लैंड को हेदर नाइट के रूप में चौथा झटका 70 के स्कोर पर लगा। नाइट महज 2 रन बनाकर आउट हो गईं। 70 पर 4 विकेट गंवा चुकी इंग्लैंड को कप्तान ब्रंट और छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आईं फ्रेया केम्प ने संभाला। दोनों ने नाबाद 80 रन की साझेदारी कर टीम को 150 तक पहुंचाया। केम्प ने 28 गेंदों पर 1 छक्का और 4 चौकों की मदद से 44 रन बनाकर नाबाद लौटीं। ब्रंट 53 गेंदों पर 5 चौकों की मदद से 58 रन बनाकर नाबाद रहीं। ऑस्ट्रेलिया के लिए किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, कप्तान सोफी मोलिनक्स और एनाबेल सदरलैंड ने 1-1 विकेट लिए। मूनी और लिचफील्ड के बीच शतकीय साझेदारी ऑस्ट्रेलिया को जॉर्जिया वोल के रूप में दूसरे ही ओवर में पहला झटका लग गया। लेकिन इसके बाद बेथ मूनी और फोएबी लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों पर 100 रनों की साझेदारी कर दी। लिचफील्ड के बल्ले से 35 गेंदों पर 48 रनों की पारी निकली। उन्होंने 6 चौके और दो छक्के मारे। वहीं मूनी ने अपनी फिफ्टी पूरी की। वह महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में दो फिफ्टी लगाने वाली पहली क्रिकेटर बन गई हैं। 49 गेंदों पर मूनी 64 रन बनाकर आउट हुई। एलिस पेरी ने 13 और एश्ले गार्डर ने 3 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी।  

NQAS मूल्यांकन में चमका PHC चेरपाल, मरीजों को अब मिलेंगी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल NQAS मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएं रायपुर बीजापुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल अब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए बाह्य मूल्यांकन में स्वास्थ्य केंद्र ने सफलतापूर्वक सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। दो दिनों तक हुआ विस्तृत मूल्यांकन 03 और 04 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने PHC चेरपाल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान सामान्य प्रशासन, ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला, लेबर रूम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निभाई जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के नेतृत्व में पूरी स्वास्थ्य टीम ने मूल्यांकन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों तथा अन्य कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए मूल्यांकन दल को सभी आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराए। गुणवत्ता सुधार की दिशा में मजबूत पहल स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन दल द्वारा दिए गए सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। इन सुझावों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर इलाज PHC चेरपाल की यह उपलब्धि केवल एक मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा। बेहतर व्यवस्थाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। इससे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा। गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ता बीजापुर PHC चेरपाल की सफलता यह साबित करती है कि समर्पित टीमवर्क, बेहतर प्रबंधन और निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह उपलब्धि बीजापुर जिले में गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई औद्योगिक पहचान, CM डॉ. मोहन यादव करेंगे स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का शिलान्यास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन और शिलान्यास – भोपाल को मिलेगा 25 एकड़ क्षेत्रफल का विश्वस्तरीय कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर – ग्रीन और स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिये औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, निवेश-अनुकूल वातावरण के निर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 जुलाई को सतगढ़ी में विकसित किए जा रहे 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क' का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करेंगे। राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के लगभग 200 से अधिक प्रमुख उद्योगपति, निवेशक और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। लगभग 173 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का नया आधार बनेगा। परियोजना में आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, उत्कृष्ट सड़क एवं परिवहन संपर्क, आईटी एवं एआई आधारित सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स तथा भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण उपलब्ध हो सके। यह परियोजना 'वर्क-लिव-ग्रो' मॉडल पर आधारित होगी, जहां उद्योगों के साथ कौशल विकास, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं का समन्वित विकास किया जाएगा। पार्क में उच्च मूल्य विनिर्माण, गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स तथा उभरती तकनीकों से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इससे राजधानी में विविध औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा और नए निवेश के अवसर सृजित होंगे। 25 एकड़ में बन रहा परिसर सतगढ़ी में विकसित हो रहा यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क कोलार क्षेत्र के विकास की दिशा भी बदलेगा। अब तक मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कोलार आने वाले समय में निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनेगा। परियोजना से 15 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है, जिनका लाभ विशेष रूप से भोपाल और आसपास के युवाओं को मिलेगा। इसके साथ ही बढ़ती औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी। परियोजना की एक विशेष उपलब्धि यहां विकसित किया जाने वाला विश्वस्तरीय कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर होगा। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परिसर 10 हजार से अधिक लोगों की क्षमता वाला होगा, जहां राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निवेशक सम्मेलन, औद्योगिक प्रदर्शनियां, व्यापारिक आयोजन और वैश्विक व्यवसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेन्टिव्स, कॉन्फ्रेंसेस एण्ड एग्जिबिशन) गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। कुशल प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा  रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतगढ़ी क्षेत्र राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, कोलार रोड तथा प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास से बेहतर संपर्क के कारण निवेशकों के लिए सुविधाजनक औद्योगिक गंतव्य के रूप में विकसित होगा। यह कनेक्टिविटी उद्योगों की स्थापना, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्क को पर्यावरण अनुकूल एवं स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एससीएडीए आधारित जल प्रबंधन प्रणाली, जल एवं सीवेज शोधन संयंत्र, ऑटोमेटेड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यूटिलिटी कॉरिडोर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण-संरक्षण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क राजधानी भोपाल में औद्योगिक निवेश, आधुनिक विनिर्माण और रोजगार सृजन के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना औद्योगिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ प्रदेश की निवेश क्षमता को और मजबूत करेगी तथा भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पौधरोपण महाभियान-2026: 12 जुलाई को योगी सरकार का मेगा अभियान, हरियाली के नाम बनेगा नया इतिहास

पौधरोपण में 12 जुलाई को फिर नया इतिहास रचेगी योगी सरकार  पौधरोपण महाभियान-2026  जनसहभागिता से रविवार को पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे अभियान की सफलता के लिए बैठक कर जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री, अधिकारियों को भी देंगे दिशा निर्देश  वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे, ग्राम्य विकास 10 करोड़ पौधरोपण करेगा लखनऊ  योगी सरकार 12 जुलाई (रविवार) को फिर नया इतिहास रचेगी। पौधरोपण महाभियान-2026 के तहत जनसहभागिता से पूरे प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए नोडल (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग) ने तैयारी शुरू कर दी है। अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री सोमवार से जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और अधिकारियों की भी निरंतर बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। वहीं वन मंत्री भी अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक कर इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे।  जनसहभागिता से फिर होगा अभूतपूर्व आयोजन मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्र-प्रदेश सरकार के विभागों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों-कॉलेजों समेत व्यापक जनसहभागिता से उत्सव के रूप में महाभियान चलेगा। व्यापक जनसहभागिता के साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार के विभाग मिलकर इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण करेंगे। वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधरोपण करेगा। ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़,  कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान 1.50 करोड़, पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी 5.50 लाख पौधे लगेंगे। नोडल विभाग (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन) होगा। इसे लेकर जिला वृक्षारोपण समिति की नियमित बैठकें भी चल रही हैं।  कई विशिष्ट वनों की होगी शुरुआत, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगेंगे छायादार पौधे योगी सरकार प्रत्येक वर्ष नवीन विशिष्ट वन स्थापित करती है। इस थीम के अंतर्गत पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन तैयार किए जाएंगे। महर्षि चरक औषधि वन की शुरुआत 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) पर की गई है। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी होगा। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाएगा।  52.44 करोड़ पौधे कराए जा रहे तैयार  वृहद पौधरोपण के लिए वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग निरंतर बैठक व संवाद स्थापित कर रहा है। इसके साथ ही पौधों को लेकर भी विभाग की तैयारी चल रही है। वन विभाग की लगभग दो हजार नर्सरी में इस वर्ष 52.44 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को भी अब वितरित किया जाएगा।  गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगेंगे 5.50 लाख पौधे  प्रदेश के एक्सप्रेसवे के किनारे भी पौधरोपण किया जाएगा। इस बार विशेष रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। 594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर वन विभाग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.50 लाख पौधरोपण करेगा। दोनों पटरी पर हर एक किमी. पर हरिशंकरी रोपा जाएगा, जबकि बीच-बीच में पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, गूलर, महुआ, आम, अर्जुन, चिलबिल, अमलतास, कचनार, जकरकंडा, गुलमोहर आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनकी सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग व सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सुनिश्चित की जाएगी।  मुख्यमंत्री का निर्देश- जनसहभागिता से मनाया जाए उत्सव  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महाभियान-2026 की तैयारी को लेकर निरंतर बैठक करेंगे। वहीं वन मंत्री अन्य विभागों के मंत्रियों, अधिकारियों के साथ ही इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनसहभागिता पर विशेष जोर देते हुए इसे उत्सव के रूप में मनाने का निर्देश दिया है। सीएम योगी ने महाभियान में सभी जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक-महिला मंगल दल, रोटरी-लायंस, इको क्लब, एफपीओ, व्यापार मंडल आदि की भी सहभागिता अनिवार्य रूप से करने के लिए वन विभाग को निर्देश दिया है। कृषि विभाग की देखरेख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीकृत किसान भी महाभियान का हिस्सा बनेंगे।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 का आयोजन होगा। वन विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। इस बार भी एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण होगा। सभी विभागों, संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठनों आदि के सहयोग से व्यापक जनसहभागिता के साथ इस महाभियान को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। विभागों, मंडलों व जनपदों के लक्ष्य प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट वनों की शुरुआत होगी।  सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष  वन विभाग, उत्तर प्रदेश

समुद्री सुरक्षा पर संकट गहराया: होदेइदाह के पास जहाज पर हमले से वैश्विक चिंता बढ़ी

नई दिल्ली लाल सागर में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली है। यमन के पश्चिमी तट के निकट एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन, समूह या गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई है। UKMTO केंद्र ने एक आधिकारिक सूचना में बताया कि हमला तटीय शहर होदेइदाह के पास हुआ। होदेइदाह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मजबूत नियंत्रण वाले इलाके में स्थित है। जहाज होदेइदाह से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम दिशा में था, जब अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने उस पर हमला किया। UKMTO ने स्पष्ट किया कि जहाज के चालक दल ने तुरंत हमले की सूचना दी। फिलहाल संबंधित अंतरराष्ट्रीय अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। हूती विद्रोहियों की धमकी बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर और अदन की खाड़ी में गुजरने वाले जहाजों पर हमले दोबारा शुरू करने की खुली धमकी दी थी। हालांकि, उन्होंने अभी तक इन धमकियों को अमली जामा नहीं पहनाया है। हूती प्रवक्ता ने इस घटना पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि हूतियों ने अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध के समर्थन में लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित संकरे बाब अल-मंडाब के आसपास अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था। उन्होंने ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए। इन हमलों के कारण वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) का लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ा। सोमाली समुद्री लुटेरों भी हैं ऐक्टिव लाल सागर संकट के बीच सोमाली समुद्री डाकू भी अदन की खाड़ी और आसपास के दूरवर्ती इलाकों में फिर से सक्रिय हो गए हैं। एक जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित बलहाफ बंदरगाह शहर से 76 समुद्री मील (लगभग 140 किलोमीटर) दक्षिण में एक और घटना हुई थी। UKMTO के अनुसार, चार सशस्त्र व्यक्ति छोटी नाव पर सवार होकर आए और एक जहाज के ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) को मामूली नुकसान पहुंचाया। इस घटना को संदिग्ध समुद्री लुटेरों का काम माना जा रहा है। बता दें कि लाल सागर और अदन की खाड़ी विश्व व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से रोजाना लाखों टन तेल, गैस, कंटेनर माल और अन्य सामान गुजरता है। आये दिन हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों के युद्धपोत क्षेत्र में गश्त बढ़ाए हुए हैं, इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।

सीमा पार संघर्ष तेज: तालिबान ने पाकिस्तान में ISIS नेटवर्क पर कार्रवाई की

नई दिल्ली अफगानिस्तान में ISIS के बढ़ते खतरे ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना, ISIS को संरक्षण दे रही हैं। इसी के जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर कथित ISIS ठिकानों पर सीमा पार ड्रोन हमले किए हैं। बता दें कि यह भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। तालिबान सरकार का कहना है कि ISIS उसके शासन और अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। काबुल ने पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर आरोप लगाया है कि वह ISIS को समर्थन देकर अफगानिस्तान के भीतर आतंकी हमलों को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में ड्रोन से किए गए हमले ISIS की बढ़ती गतिविधियों के बीच तालिबान ने इस सप्ताह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सरानान और खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में सीमा पार कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, इन अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ऑपरेशन में ISIS और उसके सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें उसने 'बुराई और भ्रष्टाचार के समूहों' का अड्डा बताया। कई आतंकियों के मारे जाने का दावा अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कार्रवाई बेहद सटीक तरीके से की गई, जिसमें कई ISIS लड़ाके मारे गए और उनके ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। मंत्रालय ने दावा किया कि पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी आम नागरिक को नुकसान न पहुंचे। यह कार्रवाई 28 जून को अफगानिस्तान सीमा के पास पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब के रूप में भी देखी जा रही है। चीन की मध्यस्थता भी नहीं कर सकी तनाव कम काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस साल यह दोनों देशों के बीच दूसरा बड़ा सैन्य टकराव है। चीन की ओर से दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हो सकी हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद और हमलों को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं। भारत, रूस और मध्य एशिया की बढ़ी चिंता, रक्षा समझौते पर भी नजर विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में ISIS और उसकी कट्टरपंथी विचारधारा का विस्तार भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। आशंका है कि यह संगठन स्थानीय आतंकी समूहों के साथ मिलकर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है। अगले सप्ताह भारत-रूस संयुक्त आतंकवाद कार्य समूह की बैठक में सीमा पार आतंकवाद प्रमुख मुद्दा रहेगा। वहीं, पाकिस्तान भी मॉस्को के साथ काबुल के हालिया रक्षा समझौते के बाद अफगानिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमता को लेकर चिंतित बताया जा रहा है  मई में रूस और तालिबान ने हथियारों के आदान-प्रदान, लाइसेंसिंग, सैन्य तकनीक और संयुक्त विकास परियोजनाओं से जुड़े सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह तालिबान सरकार का किसी भी देश के साथ पहला रक्षा समझौता था, जिसे पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है  

तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल: पुराने मंत्रिमंडल का लगभग अंत, संगठनात्मक संकट गहराया

कोलकाता  चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने और विरोधी खेमे की ओर बढ़ने से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस पुराने मंत्रिमंडल का अध्याय लगभग समाप्त हो गया है, जिसने पिछले डेढ़ दशक तक सरकार और पार्टी संगठन, दोनों की कमान संभाली थी। कभी ममता की सबसे भरोसेमंद टीम का हिस्सा रहे मंत्री या तो विरोधी खेमे में जा चुके हैं, पार्टी से दूरी बना चुके हैं अथवा राजनीतिक रूप से हाशिये पर हैं। चंद्रिमा का जाना ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ममता के साथ अब केवल पूर्व मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय रह गए हैं। फिरहाद हकीम, अरूप बिश्वास अरूप राय व जावेद खान समेत अधिकांश पहले ही ममता का साथ छोड़ चुके हैं। ब्रात्य बसु और शशि पांजा फिलहाल चुप हैं। सूत्रों का कहना है कि ममता-चंद्रिमा के मजबूत रिश्ते में दरार गत 22 जून को पड़ी थी, जब न्यूटाउन के एक होटल में ऋतब्रत गुट की बैठक में चंद्रिमा के पुत्र सौरव बोस शामिल हुए थे। उस समय चंद्रिमा ने कहा था कि यह उनके बेटे का व्यक्तिगत निर्णय है। चंद्रिमा 2009 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल हुई थीं। उन्हें पहले महिला तृणमूल की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2012 में वह विधि राज्य मंत्री बनीं और बाद में स्वास्थ्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाला। 2016 में उत्तर दमदम सीट से हारने के बाद ममता ने 2017 के उपचुनाव में उन्हें कांथी दक्षिण से लड़ाकर विधानसभा पहुंचाया। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य राज्य मंत्री के साथ-साथ ई-गवर्नेंस विभाग का स्वतंत्र प्रभार भी सौंपा गया। सत्ता गंवाने के बाद ममता ने चंद्रिमा को सुब्रत बक्सी की जगह तृणमूल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। गत शुक्रवार को ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में फिरहाद हाकिम, संदीपन साहा समेत कई नेता अस्थायी तृणमूल भवन पहुंचे और उसपर अपना नियंत्रण जताया। उस समय चंद्रिमा भी वहां मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद बिना किसी प्रतिरोध के वहां से चली गईं। इसके बाद ऋतब्रत गुट ने भवन पर ताला लगा दिया। सूत्रों के अनुसार, चंद्रिमा के बिना विरोध जताए कार्यालय छोड़ने से ममता बेहद नाराज हुईं। इस्तीफा देने के बाद चंद्रिमा ने बताया कि ममता ने फोन पर उनसे कहा, 'तुमने पूरा भवन ही उनके हवाले कर दिया। चंद्रिमा का कहना है कि जब विश्वास ही समाप्त हो गया तो पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं था। इसके बाद उनका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत के कक्ष में जाने ने नई अटकलों को जन्म दे दिया, हालांकि चंद्रिमा का कहना है कि उन्होंने अभी तक ऋतब्रत गुट की औपचारिक सदस्यता नहीं ली है और आगे का फैसला समय पर छोड़ दिया है।  

ब्रिटेन-जापान-इटली की साझेदारी तेज: ‘एजविंग’ को मिला एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट फंड

लंदन  ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) को आगे बढ़ाने वाले ज्वाइंट वेंचर, 'एजविंग' को छठी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए 6.1 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह दुनिया के सबसे महत्वकांक्षी अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एविएशन प्रोग्राम में से एक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP एजेंसी ने दिया है, दो UK,जापान और इटली की सरकारों की ओर से इस प्रोग्राम को मैनेज करती है। यह कॉन्ट्रैक्ट फाइटर जेट के डिटेल्ड डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए फंड देगा। उम्मीद है कि यह एयरक्राफ्ट 2035 कर सर्विस में आ जाएगा। ब्रिटेन-इटली और जापान का ज्वॉइंट वेंचर एजविंग, ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स, इटली की लियोनार्डो और जापान एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल एन्हांसमेंट कंपनी का एक ज्वॉइंट वेंचर है। यह अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को विकसित करने के लिए तीनों देशों के प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियों को एक साथ लाता है। अप्रैल 2026 में हुए शुरुआती £686 मिलियन के समझौते के बाद GCAP एजेंसी द्वारा एजविंग को दिया गया यह दूसरा इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट है। यह नया कॉन्ट्रैक्ट यूके द्वारा अपना डिफेंस इन्वेस्टमेंट प्लान पेश करने के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें अगले चार सालों में GCAP प्रोग्राम के लिए अरबों पाउंड का निवेश करने का वादा किया गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों के भरोसे को दर्शाता है- एजविंग एजविंग के सीईओ मार्को जोफ ने कहा, "यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों और हमारे GCAP एजेंसी पार्टनर्स द्वारा हम पर दिखाए गए भरोसे को दर्शाता है। यह भरोसा पहले इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट के तरह हुई तेजी से प्रगति से बना है।" उम्मीद है कि इस फंडिंग से डेवलपमेंट में तेजी आएगी, प्रोग्राम को लंबे समय कर फाइनेंशियल निश्चितता मिलेगी और पार्टनर देशों के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूती मिलेगी, क्योंकि एडवांस्ड मिलिट्री एविएशन में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। यह समझौता प्रोग्राम के कॉन्सेप्ट फेज से डिटेल्ड इंजीनियरिंग और डिजाइन फेज में जाने का भी संकेत देता है, जिससे यह 2035 में सर्विस में शामिल होने की राह पर बना रहेगा। GCAP छठी पीढ़ी का फाइटर जेट ज्वॉइंट प्रोग्राम GCAP छठी पीढ़ी के फाइटर जेट का एक ज्वॉइंट प्रोग्राम है जिसमें UK, जापान और इटली शामिल हैं। यह ब्रिटेन के 'टेम्पेस्ट' प्रोग्राम और जापान के 'F-X' फाइटर प्रोजेक्ट को मिलाकर एक कॉमन अगली पीढ़ी का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की कोशिश है। यह विमान रॉयल एयर फोर्स के 'यूरोफाइटर टाइफून' और जापान के 'मित्सुबिशी F-2' की जगह लेगा। F-35 और चीन के J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के उलट, छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को एक नेटवर्क वाले कॉम्बैट सिस्टम के मुख्य हिस्से के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने की प्रतिबद्धता GCAP फाइटर में एडवांस्ड स्टील्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मिशन मैनेजमेंट, सेंसर फ्यूजन, लंबी दूरी तक ऑपरेशन, सुरक्षित हाई-स्पीड डेटा शेयरिंग और ऑटोनॉमस लॉयल विंगमैन ड्रोन के साथ मिलकर काम करने की क्षमता जैसी खूबियां होने की उम्मीद है। इसमें ओपन-आर्किटेक्चर डिजाइन भी होगा, जिससे इसके सर्विस के समय के दौरान नए हथियार,सेंसर और सॉफ्टवेयर को तेज से जोड़ा जा सकेगा। 4.6 अरब पाउंड का यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP के लिए अब तक के सबसे बड़े डेवलपमेंट माइलस्टोन्स में से एक है। यह 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने के लिए तीनों पार्टनर देशों की प्रतिबद्धता को दिखाता है, क्योंकि देश अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की होड़ में लगे हैं।

विकास का नया सेतुः जब पिनगुंडा नाला पर बनी पुलिया ने बदली ओरछा की तकदीर

​रायपुर अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में जब मानसून दस्तक देता था, तो वह अपने साथ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए दुश्वारियों का दौर भी लेकर आता था। हर साल बारिश के चार महीने यहाँ के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते थे। लेकिन इस साल तस्वीर जुदा है। नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में पिनगुंडा नाला पर बनी नई बॉक्स पुलिया ने विकास की एक नई इबारत लिख दी है। यह पुलिया सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खुशहाली और कनेक्टिविटी का एक नया 'लाइफलाइन' बन चुकी है। ​संकट का सबब था पिनगुंडा नाला ​पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला सालों से नारायणपुर और ओरछा के बीच एक अभेद्य दीवार बना हुआ था। मानसून के आते ही नाला उफान पर आ जाता, जिससे तहसील मुख्यालय ओरछा सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता था। उफनते नाले के कारण एम्बुलेंस नहीं आ पाती थी और गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे। नदी-नाले पार करने के जोखिम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई हफ्तों बाधित रहती थी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती थी और स्थानीय ग्रामीणों की कृषि उपज मंडियों तक नहीं पहुँच पाती थी। ​ 258 लाख रुपए की लागत से मिला स्थायी समाधान ​ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बुनियादी समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए शासन द्वारा यहाँ एक सुदृढ़ पुलिया निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। इस आधुनिक बॉक्स ब्रिज के बन जाने से बारिश के दिनों में भी नारायणपुर से ओरछा तक का मार्ग पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित हो गया है। घंटों का इंतजार और मीलों लंबा वैकल्पिक सफर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। ​बदलाव की बयार: बहुआयामी लाभ  ​ इस एकल परियोजना ने ओरछा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षित और सुगम मार्ग मिलने से ग्रामीणों के ईंधन और कीमती समय, दोनों की बचत हो रही है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ अब बिना किसी रुकावट के सीधे गांवों तक पहुँच रही हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी आसान हुआ है। इसके साथ ही कृषि उपजों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन आसान होने से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिली है। स्थानीय ​ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल नहीं, हमारा बेहतर भविष्य है। यह निर्माण उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। सालों से हम इस नाले के सामने बेबस थे। बीमारों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ता था। अब इस पुलिया के बनने से हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा डर दूर हो गया है। यह पुल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य का रास्ता है।