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सीएम योगी का बड़ा कदम: नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर, 4 बॉर्डर जिलों में हाई अलर्ट

लखनऊ  नेपाल में दो दिनों से हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. राजधानी काठमांडू से लेकर छोटे कस्बों तक Gen-Z आंदोलनकारियों का विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है. पथराव, आगजनी से शुरू हुआ ये बवाल अब बढ़ता ही जा रहा है. नेपाल की इस अस्थिरता का असर अब खासकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक भी महसूस किया जाने लगा है. नेपाल सीमा से सटे बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर और महाराजगंज को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है. व्यापार, पढ़ाई और रोजमर्रा की आवाजाही के कारण नेपाल से लगे जिले हमेशा से संवेदनशील रहे हैं. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा को कड़ा कर दिया है योगी सरकार की सख्त तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण को निर्देश दिया कि नेपाल से सटी पूरी सीमा पर 24 घंटे पुलिस अलर्ट पर रहे. आदेश मिलते ही सभी संबंधित जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गश्त बढ़ा दी गई है, सीमा चौकियों को और मजबूत किया गया है और सुरक्षा एजेंसियों को हर छोटी-बड़ी सूचना पर सतर्क रहने को कहा गया है. बताया जा रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों को विशेष रूप से यह हिदायत दी गई है कि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने में देरी न हो. इसके लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) को सक्रिय कर दिया गया है. इसके अलावा ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके. नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए मदद का इंतजाम नेपाल में जारी उथल-पुथल की वजह से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक फंस गए हैं. इनमें व्यापारी, छात्र, तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल हैं. इनकी सुरक्षा और वापसी के लिए यूपी पुलिस मुख्यालय लखनऊ में एक विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) बनाया गया है. यह कंट्रोल रूम अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) की देखरेख में काम करेगा और 24×7 सक्रिय रहेगा. हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर फंसे नागरिक सीधे संपर्क कर सकते हैं. हेल्पलाइन नंबर जारी हुए: – 0522-2390257 – 0522-2724010 – 9454401674 – WhatsApp नंबर: 9454401674 इन नंबरों पर आने वाली कॉल्स को हैंडल करने के लिए प्रशिक्षित टीम लगाई गई है, जो तुरंत संबंधित विभागों से संपर्क कर मदद पहुंचाएगी. अधिकारियों ने कहा है कि नेपाल में मौजूद भारतीयों को किसी भी हाल में असहाय नहीं छोड़ा जाएगा. सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी नेपाल में हालात बदलते ही अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया है. गलत सूचनाओं से माहौल बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए यूपी पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया इकाई को सख्त निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नेपाल से जुड़ी किसी भी संवेदनशील सूचना या पोस्ट पर लगातार नजर रखी जाए. अगर कोई भ्रामक पोस्ट या अफवाह सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे. नेपाल की स्थिति और बढ़ती चिंता नेपाल में सोमवार तक आंदोलन का चेहरा छात्रों और युवाओं का था, जो सोशल मीडिया बैन का विरोध कर रहे थे. लेकिन मंगलवार को स्थिति ने अचानक करवट बदली. हथियारबंद लोग भीड़ में शामिल हो गए और विरोध हिंसा में बदल गया. इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की यह अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है, क्योंकि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव अब खुला संघर्ष बन चुका है. ऐसे में भारत के लिए विशेष सतर्कता जरूरी है, क्योंकि दोनों देशों की खुली सीमाएं सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकती हैं. मुख्यमंत्री योगी की सख्त निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ले रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती जिलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कहा गया है कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की हर संभव मदद की जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि सीमा पर आवागमन को नियंत्रित किया जाए और जरूरत पड़ने पर अस्थायी तौर पर आवाजाही बंद कर दी जाए. यही कारण है कि कई जगह स्थानीय प्रशासन ने बॉर्डर पर चेकिंग सख्त कर दी है और संदिग्ध लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. नागरिकों के लिए संदेश पुलिस और प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक हेल्पलाइन या प्रशासनिक चैनल से मिली जानकारी पर भरोसा करें. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों से कहा गया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें.

चारपाई पर तीन बेटियों की लाशें, पंखे से लटकी मिली मां… बागपत के एक घर में सनसनी

बागपत उत्तर प्रदेश के बागपत में एक ही घर से चार लाशें उठी तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई. सबकी जुबान पर यही सवाल है कि कैसे एक महिला  पति से विवाद में अपनी मासूम बेटियों को मौत के घाट उतार सकती है. फिर खुद भी फांसी के फंदे से झूल गई. आइए जानते हैं पूरी कहानी…  बता दें कि दोघट थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में एक मां ने अपनी तीन बेटियों का गला घोंटने के बाद खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतक बच्चियों में एक उसकी सौतेली बेटी थी. उसका 12 सितंबर को जन्मदिन था. महिला उसे बुआ के घर से बुलाकर लाई थी. लेकिन जन्मदिन से पहले उसने ऐसा कांड कर दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया.     मृतकों की पहचान तेज कुमारी उर्फ ​​माया (29) और उसकी बेटियों गुंजन (7), कीतो (2) और मीरा (4 महीने) के रूप में हुई है.गुंजन उसकी सौतेली बेटी थी. दरअसल, तेज कुमारी के पति विकास ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी से तलाक के बाद उसने तेज कुमारी से लव मैरिज की थी. गुंजन पहली पत्नी की बेटी है, जो बुआ के यहां रह रही थी.  घटना के बाद बड़ौत के क्षेत्राधिकारी विजय कुमार ने बताया कि पुलिस को दोघट थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में मंगलवार देर शाम इस घटना की सूचना मिली. मौके पर जाकर देखा गया तो वहां चार शव मिले. पूछताछ में पता चला कि महिला ने पहले अपनी तीन बेटियों का गला घोंट दिया और फिर दुपट्टे से पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली.  घटना के समय उसका पति घर के बाहर एक पेड़ के नीचे सो रहा था. बाद में, जब उसने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की और उसे बंद पाया, तो उसने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंचकर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और तीनों बच्चों के शव चारपाई पर और माया पंखे से लटकी हुई पाई गई. खुद एसपी सूरज कुमार राय ने भी अन्य अधिकारियों के साथ रात में घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने बताया कि दंपति के बीच कथित तौर पर इस बात को लेकर विवाद था कि महिला अपने बेटियों की पढ़ाई के लिए शहर जाना चाहती थी. जबकि, पति राजी नहीं हो रहा था. इसी को लेकर पति-पत्नी में आए दिन झगड़ा होता था. आरोप है कि पति विकास ने पत्नी से बात करना भी बंद कर दिया था. इसी से नाराज होकर तेज कुमारी ने पहले तीनों बच्चियों का गला दबाया और फिर खुद भी मौत को गले लगा लिया. 

पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर  कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे।  पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया।  श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतकी रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे।  पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी … Read more

योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति

दिव्यांगजनों की योजनाओं को लेकर प्रदेश के सभी पात्रों तक पहुंचेगी योगी सरकार   योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने तैयार की व्यापक रणनीति  – सोशल मीडिया से लेकर प्रदेश भर के विद्यालयों, पंचायतों व नगरीय निकायों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान   दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन पर जोर दे रही योगी सरकार लखनऊ  योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, विद्यालयों, पंचायतों, नगरीय निकायों और स्थानीय शिविरों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले मिलेगी छात्रवृत्ति  आगामी 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब छात्रवृत्ति का वितरण समय से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योगी सरकार ने प्रत्येक पात्र लाभार्थी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।  दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार ने रोजगार मेलों के आयोजन पर भी जोर दिया है। ये मेले विभागीय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं। सोशल मीडिया के माध्यम से योजनाओं की जानकारी को वायरल करने और स्थानीय स्तर पर शिविरों के आयोजन से जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जाएगा, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता को समाज में एक नई पहचान भी मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा चेक-बाउंस केस में नहीं हुए हाजिर, कोर्ट ने जारी किया अरेस्ट वारंट

रायसेन  मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे और रायसेन जिले की भोजपुर सीट से बीजेपी एमएलए सुरेंद्र पटवा की मुश्किलें बढ़ गई है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। यह वारंट इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने जारी किया है। उन पर चेक बाउंस के कई मामले चल रहे हैं। कोर्ट ने सुरेंद्र पटवा को गिरफ्तार कर 24 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश सीबीआई और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भेजा गया है। पटवा के खिलाफ यह वारंट तीसरी बार जारी हुआ है। इससे पहले भी कोर्ट ने 29 अगस्त 2025 को वारंट जारी किया था। इसमें 8 सितंबर को पेश होना था। लेकिन वह नहीं गए। इसके बाद 9 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इस मामले में दर्ज हुआ मामला दरअसल, यह कार्रवाई चेक बाउंस से जुड़े मामले में की गई है। इस मामले में सुरेंद्र पटवा के अलावा उनकी पत्नी मोनिका पटवा और फर्म 'पटवा इंटरप्राइजेस' के खिलाफ भी केस दर्ज है। पटवा इंटरप्राइजेस ने इंदौर की एक फर्म से 67.5 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस कर्ज के भुगतान के लिए पटवा ने 10-10 लाख रुपए के चेक दिए थे। लेकिन बाद में बाउंस हो गए। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी कोर्ट में पेश नही हुए। 10 दिन के भीतर दूसरा वारंट जारी विधायक सुरेंद्र पटवार के खिलाफ इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने वारंट जारी किया है. CBI ने सुरेंद्र पटवा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. बीजेपी विधायक सुरेंद्र पटवा के SBI समेत कई बैंकों में फर्जी खातों की जानकारी मिली थी. पटवा के खिलाफ 10 दिनों के भीतर दूसरी बार वारंट जारी किया गया है. इससे पहले 29 अगस्त को पहला वारंट जारी किया गया था. इसके मुताबिक बीजेपी विधायक पटवा को 8 सितंबर को पेश होना था, लेकिन कोर्ट में पेश नहीं हुए. पेश न होने पर 9 सितंबर 2025 को पटवा के खिलाफ फिर से वारंट जारी किया गया है. पटवा के खिलाफ लगभग 100 के करीब चेक बाउंस के मामले जिला कोर्ट में चल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट भी लग चुका है झटका पटवा पर कई फर्जी बैंक अकाउंट खोलने का आरोप है. करीब 7 साल पहले कोर्ट ने उनके खिलाफ कुर्की का भी आदेश जारी किया था. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. कौन हैं सुरेंद्र पटवा? सुरेंद्र पटवा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं. वे रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. इसके साथ ही शिवराज सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं. उनकी गितनी बीजेपी के दिग्गज नेताओं में की जाती है. सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश बार बार आदेश के बाद पेश नहीं होने पर विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने पटवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश दिया है कि वे पटवा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करें। कोर्ट की तरफ जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आरोपी कोर्ट में 16 सितंबर को उपस्थित नहीं होता है तो बिना जमानत के गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। पूर्व सीएम के भतीजे हैं विधायक विधायक पटवा पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं और भोजपुर सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। वे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन और संस्कृति मंत्री भी रह चुके हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई और ईओडब्ल्यू इस गिरफ्तारी वारंट को कैसे तामील करती है। इस मामले में आगे क्या होता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

सीएम योगी ने दी यूपी के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की 138वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि

यूपी के विकास को सकारात्मक कदम उठाए पंडित पंत ने : मुख्यमंत्री सीएम योगी ने दी यूपी के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की 138वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि सीएम ने सराहा पंडित पंत की पहल, कहा- राज्य के विकास को दिया नई दिशा गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के गृहमंत्री रहे भारत रत्न, पंडित गोविंद वल्लभ पंत की 138वीं जयंती के अवसर पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गोरखनाथ मंदिर के कार्यालय परिसर में पंडित पंत के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पंडित पंत जी ने उत्तर प्रदेश के विकास के विकास के लिए सकारात्मक कदम उठाए।  सीएम योगी ने प्रदेश सरकार और प्रदेश की 25 करोड़ जनता की तरफ से पंडित गोविंद वल्लभ पंत की जयंती पर उनकी पावन स्मृतियों को नमन किया और उन्हें भारत मां का सच्चा सपूत बताते हुए श्रद्धाजंलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंत जी का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ था। देश की आजादी के आंदोलन में उन्होंने बढ़चढ़कर भाग लिया। वह महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। भारत के स्वतंत्र होने के बाद तत्कालीन संयुक्त प्रांत और प्रथम आम चुनाव के बाद यूपी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।   प्रथम मुख्यमंत्री होने के नाते उत्तर प्रदेश के विकास की कार्ययोजना बनाने में पंत जी की अविस्मरणीय भूमिका रही। सैकड़ों वर्ष की गुलामी के चलते उस समय काफी चुनौतियां थीं। व्यवस्था अस्त व्यस्त थी लेकिन उसे ठीक करने और यूपी को विकास के अग्रणी पायदान पर पहुंचाने के लिए पंडित गोविंद वल्लभ पंत ने सकारात्मक कदम उठाए थे। यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा देने के बाद पंत जी को 1954 में देश के गृहमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राजभाषा सूत्र देने के साथ ही सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा देश की एकता और अखंडता के लिए किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाया।

सीएम योगी का खास नजरिया: गोसेवा करते हुए भवानी और भोलू को किया दुलारा, पुंज को खिलाया गुड़

सीएम योगी ने की गोसेवा,भवानी और भोलू को दुलारा, पुंज को भी खिलाया गुड़ सीएम योगी का खास नजरिया: गोसेवा करते हुए भवानी और भोलू को किया दुलारा, पुंज को खिलाया गुड़ सीएम योगी ने किया प्यार भरा काम, गायों भवानी, भोलू और पुंज के साथ बिताए खास पल गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पशु-पक्षी प्रेम जगजाहिर है। इसका एक नजारा बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में एक बार दिखा। प्रातःकाल मंदिर परिसर भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने गोशाला में गोसेवा की और मोर को भी गुड़ खिलाया।  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान गोसेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। इसी क्रम में बुधवार सुबह भी उन्होंने मंदिर की गोशाला में समय बिताया और गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गोवंश को गुड़ खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए। गोसेवा के दौरान उन्होंने पिछले साल आंध्र प्रदेश के येलेश्वरम स्थित गोशाला से गोरखनाथ मंदिर लाए गए नादिपथि मिनिएचर नस्ल (पुंगनूर नस्ल की नवोन्नत ब्रीड) के गोवंश भवानी और भोलू को खूब दुलारा। गोवंश के ये नाम सीएम योगी ने ही रखे हैं। उन्होंने भवानी और भोलू को गुड़ भी खिलाया। सीएम योगी के स्नेह से गोवंश भाव विह्वल दिख रहे थे। मंदिर की गोशाला में एक मोर भी विचरण करता है। उसका नाम पुंज रखा गया है। विगत कई माह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब गोशाला में होते हैं तो पुंज उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री उसे भी खूब स्नेह और भोजन देते हैं। बुधवार को भी उन्होंने पुंज को दुलारा और अपने हाथों से उसे गुड़ खिलाया।

भू-जल स्तर बचाने पर जोर, डेका बोले- किसानों को डबरी निर्माण के लिए करें प्रोत्साहित

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज जल संसाधन एवं कृषि विभाग के सचिव की बैठक लेकर राज्य में घटते भू-जल स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल डेका ने कहा कि वर्षा का जल संचयन ही भविष्य की कृषि और जल संकट का समाधान है। उन्होंने कहा कि किसानों को विभिन्न योजनाओं  में अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। उन्हें अपने खाली पड़े जमीनों पर डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने से भूजल स्तर बढ़ेगा। राज्यपाल ने जल संसाधन और कृषि विभाग को मिलकर ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि यह पहल न केवल किसानों की सिंचाई की समस्या को हल करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का मजबूत आधार भी बनेगी। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो और कृषि विभाग की सचिव सुशहला निगार उपस्थित रहे।

परिवहन, विभाग राजस्व बढ़ाने निगरानी प्रणाली को करें और अधिक मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए अंतरविभागीय बैठक हो नियमित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव परिवहन, विभाग राजस्व बढ़ाने निगरानी प्रणाली को करें और अधिक मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क हादसों पर लगेगा ब्रेक, CM डॉ. यादव ने दिए नियमित अंतरविभागीय बैठक के निर्देश बस स्टॉप पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं देने पर दें ध्यान मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा इंदौर से होगी शुरू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवहन विभाग की बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सड़क पर बने बस स्टॉप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत किए जाने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन भी मौजूद थे।  मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा जल्द हो शुरू, मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा इंदौर से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और किफायती किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिकल व्हीकल और उससे जुड़े अधोसंरचना के कार्य को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि परिवहन सेवा के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन हो, यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शीघ्र प्रारंभ की जा रही है। इसकी शुरूआत बसों की आवाजाही के प्रदेश के सबसे बड़े केंद्र इंदौर नगर से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों में शहरों एवं गांवों के नाम फ्रंट ग्लास पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही बस स्टॉप पर भी गांव और नगरों के नाम अनिवार्य रूप से लिखवाए जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण किया जाना बेहद जरूरी है। इसी के साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग के आधुनिकीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। परिवहन अमले को उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नशे की हालत मं  गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाही की जा रही है। परिवहन से प्रदेश में बढ़ा है 6 प्रतिशत राजस्व बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार से अधिक इलेक्ट्रिकल व्हीकल का पंजीयन किया गया है। प्रदेश में ऑन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024-25 में 4 हजार 874 करोड़ रुपए की राजस्व आय हुई है। इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि राजस्व संग्रह में विशेष तौर पर चालान से प्राप्त की जाने वाली राशि के अधिकार प्रधान आरक्षक को सौंपे जाने की भी अधिसूचना शीघ्र जारी की जाएगी। बैठक में कैश लेस उपचार योजना, राहवीर योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को मिले इसके लिए नागरिकों में जागरूकता अभियान चलाने संबंध में भी चर्चा हुई। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और आवश्यक सर्वे भी लगभग पूरा किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि 6 बिंदुओं पर प्राथमिकता पूर्वक ध्यान दिया जा रहा है। इनमें संस्थागत व्यवस्था एवं स्टॉफ, नियम एवं करों में संशोधन, रूट सर्वे एवं स्कीम की अधिसूचना, आईटी प्लेटफार्म एवं एजेंसी का चयन, परिवहन अधोसंरचना की योजना और ऑपरेटर से चर्चा एवं कैपेसिटी बिल्डिंग पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। बैठक में परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     बसों के संचालन में और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने नई तकनीक का प्रयोग करें।     बसों के साथ ही बस स्टैंड और बस स्टॉप पर स्वच्छता रहे। वातावरण सुविधाजनक हो।     यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे।     दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए।     बसें फिट हों, स्टॉफ का व्यवहार अच्छा हो।     अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं।     बड़े शहरों की तरह कस्बों, गांवों के नाम मार्ग के किनारे बोर्ड पर अंकित किए जाएं।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का किया भूमि पूजन व शिलान्यास

शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का किया भूमि पूजन व शिलान्यास मुख्यमंत्री ने पौधरोपण व पुस्तक का किया विमोचन   पड़ोस की आग नहीं बुझाई तो हमें भी उसकी चपेट में आना होगाः सीएम योगी  जब पैसा विदेशी कंपनी के पास जाता है तो इसका मुनाफा पहलगाम जैसी आतंकी वारदात में होता हैः योगी  समाज का नेतृत्व और मार्गदर्शन कर रहे शिशु मंदिर से निकले छात्रः सीएम  विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया, जबकि भारत ने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनायाः मुख्यमंत्री  बोले-दो दिन में छह हजार युवाओं को दिया नियुक्ति पत्र  सुहेलदेव को हम भूल गए और सालार मसूद को पूजने लगेः योगी बस्ती/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शिक्षा कैसी होनी चाहिए। आजादी के पांच साल के बाद जब तत्कालीन सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पाईं, तब नाना जी ने गोरखपुर से इस प्रयास को बढ़ाया था। उसके पीछे का ध्येय था कि भारत, भारतीयता, परंपरा,  संस्कृति और मातृभाव से ओतप्रोत ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना आवश्यक है, जो देश को फिर से विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सके। इसकी शुरूआत शिक्षा के मंदिरों से ही होती है। शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान के माध्यम ही नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। शिक्षा यदि संस्कार, मूल्यों-आदर्शों, मातृभूमि, महापुरुषों, राष्ट्रीयता के प्रति समर्पण का भाव पैदा नहीं कर पा रही है तो वह कुशिक्षा और भटकाव है। आजादी के तत्काल बाद उसका समाधान सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुआ।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का भूमि पूजन, शिलान्यास, पौधरोपण व पुस्तक का विमोचन भी किया। आरएसएस के तत्कालीन प्रचारक नाना जी देशमुख के नेतृत्व में सरस्वती शिशु मंदिर की पहली शाखा गोरखपुर में स्थापित की गई थी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के मातृभूमि होने का सौभाग्य गोरक्ष प्रांत को प्राप्त है। विद्या भारती के अंतर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण के जिस अभियान के साथ जुड़े हैं, उसकी ताकत देश-दुनिया समझती है।  शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज का नेतृत्व भी कर रहे और मार्गदर्शन भी सीएम योगी ने कहा कि पाठ्यक्रम सरकार तैयार करती है। सरकार सहयोग करे या न करे। बिना सरकार की सहायता के अपने दम और स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीयता के प्रति अनुराग रखने वाले नागरिकों के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। गोरखपुर के पक्कीबाग में जब पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित हुआ तो उस समय मात्र पांच छात्र थे, लेकिन आज शिशु मंदिर के 12 हजार विद्यालय हैं। यह संस्थान बच्चों के अंदर भारत व भारतीयता के प्रति नागरिक के रूप में कर्तव्यों का बोध कराने और सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज को नेतृत्व भी दे रहे और मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।   शिक्षा से होती देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत   सीएम योगी ने कहा कि देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत शिक्षा से होती है। दुनिया में समृद्धि की चर्चा होती है तो पहला पैरामीटर शिक्षा, फिर स्वास्थ्य, उसके बाद कृषि-जल संसाधन, तब कौशल विकास व रोजगार होता है। फिर पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास की बात होती है। यह पैरामीटर तय करते हैं कि समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। इस मंशा के साथ जब कोई अभियान बढ़ता है तो वह न केवल देशहित, बल्कि मानवता का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आज का कार्यक्रम सुयोग्य नागरिकों को गढ़ने, तलाशने और तराशने का महत्वपूर्ण मंच शुरू करने जा रहा है। इसके माध्यम से भारत के सुयोग्य नागरिक विकसित करने का मंच विकसित हो रहा है।  बिना प्लानिंग कार्य करने से चूक जाते हैं सीएम ने कहा कि जब बिना किसी प्लानिंग कार्य करते हैं तो चूक जाते हैं। हर व्यवस्था, प्रबंधन, सरकार, कॉरपोरेट घराना वर्ष भर की योजना बनाता है, फिर लघु, मध्यम व दीर्घ अवधि के कार्यक्रम तय करता है। इसके माध्यम से आगे के लक्ष्यों को प्राप्त करके हम भी सशक्त होंगे और भावी पीढ़ी, संस्थान को भी समर्थ भी बना पाएंगे। सरकार हर साल बजट प्रस्तुत करती है। इसमें विजन होता है कि एक वर्ष, फिर पांच वर्ष, दस वर्ष, 25 वर्ष की योजना क्या होगी। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर पीएम मोदी ने आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।  भारत को विकसित बनाने के लिए पंच प्रण को जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।   विरासत का करना होगा सम्मान सीएम ने कहा कि विरासत का सम्मान करना होगा। हमारे पूर्वजों (1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी) ने संकल्प लिया था कि एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे। कश्मीर में शेष भारत का कानून लागू करने का शंखनाद किया था। उन्हें बलिदान भी देना पड़ा। 1952 में कांग्रेस ने बाबा साहेब के न चाहने के बावजूद जबरन लागू किया, लेकिन पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को साकार कर आतंकवाद व भारत विरोधी गतिविधियों-साजिशों को समाप्त करके कश्मीर को भारत के कानून के साथ जोड़ा। 500 वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ और अयोध्या में रामललाा के मंदिर का निर्माण हुआ। विपक्षी दल चाहते थे कि यह नहीं होना चाहिए। सीएम ने कहा कि प्रभु श्रीराम आदर्श व भारतीयता के प्रतीक है। जब महर्षि वाल्मिकी ने नारद जी से पूछा कि मुझे कुछ लिखना है, ऐसा कौन सा आदर्श है। तब उन्होंने कहा कि इस धरती पर एक ही चरित्र है, आप श्रीराम पर लिखें। हमें महर्षि वाल्मीकि, प्रभु राम,  श्रीकृष्ण की परंपरा पर गौरव की अनुभूति है। भारत और भारतीयता के लिए जिन महापुरुषों व स्वतंत्र भारत में सीमाओं की रक्षा करते हुए जिन्होंने बलिदान दिया, वे सभी हमारे आदर्श हैं। उनका सम्मान और विरासत का संरक्षण करना हर भारतीय का दायित्व है।  विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया, जबकि भारत ने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया सीएम ने गुलामी के अंशों को सर्वथा समाप्त करने पर भी चर्चा की। बोले कि गुलामी की मानसिकता देश … Read more