samacharsecretary.com

निगम व्यवस्था में बदलाव: भोपाल में बनेंगी चार नई बिल्डिंग परमिशन सेल्स

भोपाल  भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन (metropolitan region) बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल (metropolitan region) बनाई जानी हैं जिसके लिए सिविल केडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी। अभी नगर निगम 85 वार्ड में काम चलाउ व्यवस्था पर टिका हुआ है। एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम एक इंजीनियर के भरोसे तमाम काम छोड़ दिए गए हैं। उसमें भी योग्यता का ध्यान नहीं रखा गया है। निगम के सभी विभागों में बरसों से काम करने वाले इंजीनियरों के विभाग आपस में बदल दिए गए हैं। आदेश में स्वच्छ भारत, सीवेज प्रबंधन, झील संरक्षण, सिविल डिपार्टमेंट, भवन अनुज्ञा शाखा, वाटर सप्लाई डिपार्टमेंट, हाउङ्क्षसग फॉर ऑल, सड़क, बिजली पानी से जुड़े अन्य विभागों के इंजीनियरों को आपस में बदला है। बिजली वालों को सीवेज का काम भोपाल नगर निगम में आरके त्रिवेदी मूलपद(उपयंत्री) विद्युत थे। इन्हें प्रभारी कार्यपालन यंत्री, सीवेज एवं एसबीएम शाखा बनाया गया। अजय मालवीय, मूलपद उपयंत्री मेकेनिकल को प्रभारी कार्यपालन यंत्री जलकार्य, सुरेश कुमार राजेश सिविल इंजीनियर हैं लेकिन इन्हें हुजूर विधानसभा में बिजली प्रभार दिया गया है। एनके डेहरिया कार्यपालन यंत्री उखार विस में सिविल इंजीनियर हैं। डेहरिया से अभी भी भवन अनुज्ञा शाखा में सहायक यंत्री का काम जी टू कंसोल के जरिए करवा रहे हैं। अनिल कुमार साहनी, सिविल इंजीनियर हैं।

इंडियाज गॉट टैलेंट लौट रहा है, सिद्धू के साथ रंगारंग जज पैनल की उम्मीद

मुंबई  टीवी पर इन दिनों रियलिटी शोज की भरमार है. टेलीविजन पर 'बिग बॉस', 'छोरियां चली गांव', 'सुपर डांसर' जैसे रियलिटी शो की धूम मची हुई है. इस बीच एक और पॉपुलर शो 'इंडियाज गॉट टैलेंट' भी वापस लौट रहा है. शो का प्रोमो रिलीज हो गया है, जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू नजर आ रहे हैं. जल्द आएगा इंडियाज गॉट टैलेंट नवजोत सिंह सिद्धू की प्रोमो में दमदार लाइन 'दुनिया में सबसे बड़ा रोग, मेरे बारे में क्या कहेंगे लोग',  उन लोगों की परेशानियों को दिखाती है जिन्हें समाज की सोच रोकती है. ये लाइन टैलेंट्स को प्रेरित करती है कि वो ऐसे बंधनों से ऊपर उठकर बिना किसी डर अपने सपनों का पीछा करें. इंडियाज गॉट टैलेंट के पहले प्रोमो में आने वाले सफर की बस एक झलक दिखाई गई है, जिसमें टैगलाइन 'जो अजब है, वो गजब है' इस सीजन की असली रूह को बखूबी पेश करती है. शो के बारे में बात करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू कहते हैं, 'मैं उन टैलेंट्स को देखने के लिए उत्साहित हूं जो अनोखे, क्रिएटिव हैं और इतनी हिम्मत रखते हैं कि आम सोच को चैलेंज कर सकें. ये कमाल के टैलेंट्स न सिर्फ पूरे देश को हैरान करने वाले हैं बल्कि अनगिनत लोगों को अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित भी करने वाले हैं.' 'इंडियाज गॉट टैलेंट' का प्रीमियर 4 अक्टूबर 2025 से, हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे, सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और सोनी लिव पर होगा. इन दिनों रियलिटी शो 'बिग बॉस' के सीजन 19 का बोलबाला टीवी पर है. इस शो को सलमान खान एक बार फिर होस्ट कर रहे हैं. इसमें रोज हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिलता है. इसके अलावा अमिताभ बच्चन का 'कौन बनेगा करोड़पति' सीजन 17 और ओटीटी पर 'राइज एंड फॉल' भी चल रहा है. ऐसे में देखना होगा कि इतने रियलिटी शो की भीड़ में इंडियाज गॉट टैलेंट क्या कमाल करता है.

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों को मुफ्त बिजली का लाभ

राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी से उपभोक्ताओं को मिल रहा दोगुना फायदा, बिजली बिल में राहत और पर्यावरण संरक्षण की सौगात रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राही हो रहे लाभान्वितप्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत न केवल बिजली बिल में भारी बचत हो रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी के साथ अब राज्य सरकार द्वारा भी अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने से यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए और भी लाभप्रद सिद्ध हो रही है। योजना के अंतर्गत 5 किलोवाट तक के सोलर रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस पहल से आमजन के बिजली बिल लगभग शून्य हो रहे हैं और अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। सक्ती जिले के ग्राम पोरथा निवासी श्री कुलदीप कुमार राठौर ने अपने घर की छत पर 2 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसकी कुल लागत लगभग 1 लाख 40 हजार रुपए रही, जिसमें उन्हें केंद्र सरकार से 60 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री राठौर का कहना है कि राज्य सरकार की सब्सिडी मिलना उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभप्रद है। अब उनके घर का बिजली बिल पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे आर्थिक बोझ घटा है और वे बचत की राशि अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग कर पा रहे हैं। इसी तरह महासमुंद जिले के पीटियाझर निवासी श्री महेश पाल, जो राज्य पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सौर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। पिछले दो माह से उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और उन्हें क्रेडिट यूनिट का भी लाभ मिल रहा है। श्री पाल का कहना है कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से राहत दे रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करने का अवसर प्रदान कर रही है। प्रदेश में अब तक हजारों उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। केवल महासमुंद जिले में ही 583 उपभोक्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं।

अब शैम्पू, साबुन और जैम होंगे सस्ते, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने किया दामों में बड़ा कटौती

नई दिल्‍ली  आप भी अगर हर महीने डव शैम्पू, हॉर्लिक्स, किसान जैम या लाइफबॉय साबुन खरीदते हैं तो आपका खूब पैसा आने वाले समय में बचने वाला है. देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने इन लोकप्रिय प्रोडक्ट्स के दाम घटाने का ऐलान कर दिया है. नई कीमतें 22 सितंबर से लागू हो जाएगी. यह कदम सरकार के जीएसटी में कटौती करने के बाद उठाया गया है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अखबारों में विज्ञापन देकर यह रेट कम करने की जानकारी दी है. एचयूएल का कहना है कि संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) वाले नए पैक जल्द ही बाजार में पहुंच रहे हैं. कहीं-कहीं पर ग्राहकों को बढ़े हुए ग्राम वाले पैक भी मिल सकते हैं, यानी या तो आपको सस्ता दाम मिलेगा या फिर ज्यादा मात्रा उसी दाम में. नई रेट लिस्‍ट प्रोडक्ट                                                   पुराना रेट           नया रेट डव शैम्पू (340 एमएल)                           ₹490           ₹435 हॉर्लिक्स (200 ग्राम)                                     ₹130           ₹110 किसान जैम (200 ग्राम)                           ₹90                  ₹80 लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक)          ₹68                 ₹60 डव से लेकर लाइफबॉय तक सब सस्‍ता 22 सितंबर से 340 एमएल की डव शैम्पू की बोतल ₹490 की जगह ₹435 में मिलेगी. बच्चों और बड़ों की पसंद हॉर्लिक्स का 200 ग्राम जार पहले ₹130 में मिलता था, वह ₹110 में उपलब्ध होगा. सुबह के नाश्ते में अक्सर इस्तेमाल होने वाला 200 ग्राम किसान जैम भी सस्ता हो गया है. इसकी कीमत ₹90 से घटाकर ₹80 कर दी गई है. इसके अलावा, हर घर में इस्तेमाल होने वाला लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक) भी अब ₹68 की बजाय ₹60 में मिलेगा.

14 सितंबर से MP में मॉनसून फिर होगा सक्रिय, मौसम विभाग ने दिया भारी बारिश का चेतावनी संदेश

भोपाल मध्यप्रदेश में मॉनसून एक बार फिर से जोर पकड़ने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बारिश का दौर थम सा गया है। आज से मध्यप्रदेश फिर से बारिश में भीगने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि कल से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा।। मौसम विभाग की भविष्यवाणी मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 14-15 सितंबर से मध्यप्रदेश में मॉनसून फिर से रफ्तार पकड़ेगा। इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभागों में तेज बारिश की संभावना है, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रीवा, सागर और शहडोल संभागों में भी भारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण यह बारिश का दौर 17 सितंबर तक जारी रह सकता है। इस साल जमकर बरस रहा मॉनसून आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में इस साल मॉनसून ने उम्मीद से ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 36.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 33.4 इंच से 9% अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 6% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12% ज्यादा बारिश हुई है। मंडला जिला 47.56 इंच बारिश के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि भोपाल में 43 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।

नया नियम: लोन डिफॉल्ट पर बैंक कर सकेंगे आपके मोबाइल को लॉक — जानें क्या होगा असर

मुंबई  लोन पर लिए गए मोबाइल फोन्स को जल्द ही लॉक करने की मंजूरी मिल सकती है. RBI लोन देने वालों को ये सुविधा देने पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स की मानें, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपने फेयर प्रैक्टिस कोड्स को अपडेट कर सकता है. लोन डिफॉल्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए बैंक ये सुविधा लेंडर्स को दे सकता है.  इसके बाद से लोगों की डेटा प्राइवेसी और अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. 2024 में आई होम क्रेडिट फाइनेंस की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में एक तिहाई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स को छोटे लोन पर लिया जाता है. इसमें स्मार्टफोन्स भी शामिल हैं.  1.4 अरब की आबादी वाले इस देश में 1.16 अरब मोबाइल कनेक्शन हैं. ऐसा नहीं है कि पहले लेंडर्स पहले ऐसा नहीं करते थे. पहले भी कई लेंडर्स लोन पर लिए गए फोन्स को लॉक करने के लिए ऐप का इस्तेमाल करते थे. पिछले साल RBI ने लेंडर्स की प्रैक्टिस पर रोक लगा दिया था. लोन ना चुकाने पर लेंडर्स कंज्यूमर्स का फोन लॉक कर देते थे.  RBI दे सकता है मंजूरी इसके लिए वे एक ऐप का इस्तेमाल करते थे, जो फोन में इंस्टॉल किया जाता था. लेंडर्स से बातचीत के बाद RBI इस प्रक्रिया को मंजूरी दे सकता है. इसके लिए केंद्रीय बैंक एक गाइडलाइन जारी कर सकता है, जो आने वाले कुछ महीनों में जारी होगी.  बैंक चाहता है कि छोटे लोन देने वालों के पास भी उन्हें रिकवर करने की शक्ति हो. साथ ही बैंक का फोकस लोगों की डेटा को सुरक्षित रखना भी है. इसलिए बैंक एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार कर रहा है, जिससे लेंडर्स को यूजर्स का डेटा एक्सेस करने से रोका जा सके. हालांकि, इस पूरे मामले में RBI ने आधिकारिक तौर पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है.  कैसे लॉक होगा लोन पर चल रहा फोन?  इसके लिए बैंक और NBFC एक ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप को डिवाइस खरीदने के वक्त कंज्यूमर के फोन में इंस्टॉल किया जाएगा. Google Device Lock Controller, Samsung Finance+ ऐप (सिर्फ सैमसंग यूजर्स के लिए) और दूसरे ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.  कब लॉक किया जाएगा फोन?  रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐप को इंस्टॉल करने से पहले लेंडर्स को कंज्यूमर की परमिशन लेनी होगी. लेंडर्स किसी भी यूजर के पर्सनल डेटा को एक्सेस नहीं कर पाएंगे. किसी फोन को तभी लॉक किया जा सकेगा, जब कंज्यूमर्स लोन अमाउंट नहीं चुकाएंगे.

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में 0-9 वर्ष के बच्चों का अनुपात घटकर 42.2% से 24.2% हुआ

भोपाल  मध्य प्रदेश में 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है. बीते 52 सालों में प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि बच्चों की संख्या में यह गिरावट अचानक से नहीं है. मध्य प्रदेश में 0-9 साल तक के बच्चों की संख्या में गिरावट का दौर 1971 से चल रहा है. इसका खुलासा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम स्टेटिकल रिपोर्ट 2023 में हुआ है. साल 1991 के बाद तेजी से कम हो रही संख्या एसआरएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में 0 से 14 साल के बच्चों की जनसंख्या में क्रमिक रूप से गिरावट आ रही है. साल 1971 में इस उम्र वर्ग के बच्चों की संख्या कुल जनसंख्या की 42.2 प्रतिशत थी. वहीं साल 1981 में कुल जनसंख्या की 38.1 प्रतिशत पर पहुंच गई. 1991 में 0 से 14 साल तक के बच्चों की जनसंख्या 36.3 प्रतिश थी, लेकिन साल 2023 में ऐसे बच्चों की संख्या 24.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यानि कि 1971 से 2023 के बीच में 0 से 9 साल तक के बच्चों की जनसंख्या में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी एसआरएस 2023 की रिपोर्ट में भले ही मध्य प्रदेश में बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन युवाओं और बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. 15 से 59 वर्ष के आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का अनुपात साल 1971 में 53.4 प्रतिशत था, जो साल 1981 में बढ़कर 56.3 प्रतिशत हो गया. वहीं साल 1991 से 2023 के दौरान ऐसे आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या का प्रतिशत 57.7 से बढ़कर 66.1 हो गया है. वहीं 60 प्लस और 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. महिला-पुरुष दोनों की जनसंख्या में सुधार यदि 15 से 59 साल तक के महिला और पुरुष की बात करें तो दोनों की जनसंख्या में सुधार देखा गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों का प्रतिशत साल 2022 में 7.7 की तुलना में साल 2023 में बढ़कर 7.8 हो गया है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिशत साल 2022 में 8.2 था, जो साल 2023 में 9.0 प्रतिशत हो गया है. इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 15 से 59 साल तक के पुरुषों की संख्या साल 2022 में 8 प्रतिशत की तुलना में साल 2023 में 8.5 प्रतिशत बढ़ गई है. जबकि इसी आयु वर्ग की महिलाओं की संख्या में साल 2022 की तुलना में 2023 में 8.6 की तुलना में 9.5 प्रतिशत हो गई है. बच्चों के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश में भले ही क्रमिक रूप से 0 से 14 वर्ष के बच्चों की संख्या में गिरावट हो रही है. इसके बावजूद मध्य प्रदेश बच्चों की संख्या के मामले में देश में उत्तर प्रदेश के साथ सयुंक्त रूप से तीसरे स्थान पर है. देश में सबसे अधिक बच्चों की संख्या बिहार में 11.3 प्रतिशत, दूसरे नंबर पर राजस्थान में 9.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या का प्रतिशत 9.2 है. वहीं मध्य प्रदेश के बाद तमिलनाडु में 5.7 प्रतिशत, पंजाब में 6 प्रतिशत और केरल में 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों की संख्या का प्रतिशत 6.2 है.  

अक्टूबर से शुरू हो सकती है नई इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन, मुंबई से आए 16 नए कोच

 इंदौर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने अब इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन को 16 कोचों के साथ चलाने का फैसला किया है. मुंबई से सभी नए कोच इंदौर पहुंच चुके हैं और इंदौर रेलवे डिपो में इनके मेंटेनेंस का काम चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर से यह ट्रेन नए और बढ़े हुए कोचों के साथ चल सकती है. फिलहाल यह ट्रेन 8 कोचों के साथ चल रही है, जिनमें कुल 530 सीटें हैं, लेकिन 16 कोच होने के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 1150 से ज़्यादा हो जाएगी, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी.रतलाम मंडल इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को अपग्रेड करने के साथ ही इसे अब आठ की जगह 16 कोच के साथ चलाएगा। इसके लिए पिछले सात से आठ दिन पहले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से 16 रैक इंदौर आ चुके हैं, जिनका रखरखाव का कार्य इंदौर रेलवे डिपो पर जारी है। फिलहाल ये 16 रैक लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं। रतलाम मंडल के एक वरिष्ठ ने बताया कि संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला इंदौर से भोपाल होकर नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और सीटों की भारी मांग को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने की तैयारी चल रही है। रेलवे बोर्ड कमेटी ने पिछले दिनों वंदे भारत ट्रेन की ऑक्यूपेंसी (ट्रेन में कितनी सीटें भरी हुई हैं) और यात्रियों की मांग के संबंध में सभी जोन और मंडलों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद देशभर में चल रही सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला लिया गया था। 52 सीटें एक्जीक्यूटिव और शेष चेयरकार कोच में रतलाम रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार मंडल ने बढ़ती संख्या में यात्रियों और टिकट की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया था। वर्तमान में इंदौर-नागपुर वंदे भारत आठ कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास और शेष चेयरकार कोच में हैं। नए सिरे से कर रहे रखरखाव रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले सात से आठ दिन पहले सेंट्रल रेलवे के तहत आने वाले मुंबई के वाड़ी बंदर डिपो से वंदे भारत के लिए 16 रैक आ चुके हैं, जो फिलहाल लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के तीन नंबर प्लेटफार्म के पास वाले ट्रैक पर खड़े हैं। इन रैक का नए सिरे से रखरखाव कर रहे हैं। 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन इंदौर-नागपुर के पुराने आठ कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलेगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 8 कोच कहां भेजेंगे, इस पर निर्णय नहीं वर्तमान में इंदौर-नागपुर के पुराने 8 कोच को कहां भेजा जाएगा, इस विषय पर रेलवे बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच के साथ इंदौर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन चलना शुरू हो जाएगी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड कमेटी ने लिया है। कोच संख्या आठ बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। 1150 से अधिक होगी सीटों की संख्या इंदौर-भोपाल वंदे भारत 8 कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास में और शेष चेयरकार कोच में हैं। सी-1 और सी-7 कोच में कुल 88 सीटें हैं। सी-2 से सी-6 तक के पांच कोच में प्रत्येक कोच में 78 सीटें हैं, कुल 390 सीटें। बी-1 कोच (एक्जीक्यूटिव क्लास) में 52 सीटें हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कोच संख्या बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। इन रूटों पर कोच का अपग्रेडेशन मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, सिकंदराबाद-तिरुपति, चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली, मदुरै-बेंगलुरु कैंट, देवघर-वाराणसी, हावड़ा-राउरकेला, इंदौर-नागपुर। पश्चिम मध्य रेल के यात्रियों को भी मिलेगा लाभ पश्चिमी मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस (20911/12) में कोच की संख्या बढ़ने से इस मार्ग पर अधिक सीटें उपलब्ध होंगी। इसका सीधा लाभ भोपाल, नर्मदापुरम और इटारसी के यात्रियों को भी मिलेगा। इस विस्तार से न केवल वेटिंग लिस्ट कम होगी, बल्कि यात्रियों का सफर भी और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। यह दिखाता है कि वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ अपनी गति और तकनीक के लिए ही नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों के अनुसार लगातार बेहतर होती सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है। 27 जून से हुई थी इंदौर-भोपाल ट्रेन की शुरुआत इंदौर और भोपाल के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत 27 जून को हुई थी। ट्रेन इंदौर से भोपाल तक के सफर में सिर्फ उज्जैन में 5 मिनट के लिए रुकती है। इससे पहले इंदौर-भोपाल के बीच सबसे तेज़ ट्रेन इंदौर–जबलपुर एक्सप्रेस थी, जो 3 घंटे 55 मिनट में यह दूरी तय करती थी। रेल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत के एक महीने में इस ट्रेन में औसतन रोजाना 75 फीसदी सीटें खाली रहीं। केवल 25 फीसदी यात्रियों के साथ ही ट्रेन का संचालन हुआ। रेल अधिकारियों ने यात्रियों की कम संख्या को लेकर इसका रिव्यू भी किया। ट्रेन का नियमित संचालन 28 जून से शुरू हुआ, जिसके बाद यात्रियों ने पूरी सीट क्षमता के साथ सफर किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आग्रह पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ट्रेन को नागपुर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद इंदौर–भोपाल वंदे भारत अब नागपुर तक चलने लगी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में कोच बढ़ाने के मामले में 16 रैक मिल चुके हैं। इन कोच का रखरखाव इंदौर रेलवे डिपो में जारी है। इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कुल 90 फीसदी और कुछ सेक्शन में 100 प्रतिशत आक्यूपेंसी है। संभवत: अक्टूबर के पहले सप्ताह से 16 कोच … Read more

गोल्फ कार्ट सेवा, किराया तय इस महीने से वन विहार में निजी वाहनों की एंट्री बंद, गोल्फ कार्ट सेवा से होगी सुविधा

भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित नेशनल पार्क वन विहार में अब आप अपना निजी वाहन लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। वन विभाग इसी महीने निजी वाहनों पर रोक लगा देगा। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। दरअसल वन विहार नेशनल पार्क को पॉल्यूशन फ्री करने की तैयारी की जा रही है। वन विहार के अधिकारियों के अनुसार यहां पर अब 40 गोल्फ कार्ट चलाया जाए। जिनका पर्यटकों से 50 से 60 रुपए तक किराया वसूला जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि वन विहार नेशनल पार्क नेट जीरो पॉल्यूशन वाला प्रदेश का पहला नेशनल पार्क बनने जा रहा है।    जानवरों के प्रजनन क्षमता पर पड़ता है असर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निजी वाहनों की तेज रफ्तार और हॉर्न की आवाज से जानवरों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। जिससे उनके प्राकृतिक रहवास में भी व्यवधान होता है। वाहनों के शोर की वजह से वन जीवों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे वो तनाव ग्रस्त होते हैं और इसका असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इसीलिए अब वन विहार में पेट्रोल-डीजल वाले निजी वाहनों में प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि वन विहार में सिंगल यूज पालीथिन और प्लास्टिक बोतलें पहले से प्रतिबंधित है। पर्यटक यहां खाने-पीने का सामान नहीं ले जा सकते हैं। अब वन विहार में वन्य प्राणियों और परिसर में निकलने वाले कचरे का 100 प्रतिशत निष्पादन किया जाएगा।  मुख्यमंत्री करेंगे गोल्फ कार्ट का शुभारंभ  वन विहार के 40 ई गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बाइक और साइकिल भी वन विहार की सफारी के लिए पर्यटकों को दी जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोल्फ कार्ट वन विहार में चलने को तैयार है। इसके शुभारंभ के लिए सीएम डॉ.मोहन यादव से समय मांगा गया है। संभवतः सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में ई गोल्फ कार्ट को सीएम डॉ. यादव हरी झंडी दिखा सकते हैं। वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डायरेक्टर डॉ.रुही हक ने बताया कि विभाग वन विहार में पेट्रोल-वाहनों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। लेकिन इससे नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या प्रभावित न हो और उन्हें मामूली शुल्क में सफारी कराई जा सके। इसके लिए गोल्फ कार्ट मंगवाए गए हैं। पर्यटकों के लिए ऐसी रहेगी व्यवस्था डॉ.रुही हक ने बताया कि पर्यटकों को एक ही स्थान पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए गोल्फ कार्ट का संचालन ऐसे किया जाएगा, जिससे हर 10 मिनट में वन विहार के सभी बाड़े के सामने गोल्फ कार्ट पहुंच सके। वन विहार में 4 पहिया वाहनों से आने वाले पर्यटकों के लिए गेट नंबर दो पर पार्किंग बनाई जा रही है। जबकि दो पहिया वाहन चालकों के लिए एक और दो दोनों गेट पर पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। पर्यटकों को पार्किंग स्थल के सामने से ही नेशनल पार्क की सफारी के लिए गोल्फ कोर्ट मिलेंगे। 

प्राकृतिक खेती से सजेगा नर्मदा का किनारा, MP सरकार ने बनाई नई कार्ययोजना

 भोपाल  नर्मदा नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है। नदी के दोनों किनारों के पांच-पांच किमी तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे कीटनाशक व अन्य रसायनों के नर्मदा नदी में जाने से रोकने में मदद मिलेगी। नदी के दोनों ओर स्थित जनजातीय बहुल क्षेत्र में साल और सागौन का पौधारोपण और जड़ी-बूटियों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। समृद्ध बायोडायवर्सिटी के संरक्षण व प्रोत्साहन गतिविधियों में वनस्पति शास्त्र और प्राणी शास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। नर्मदा तट पर बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग कड़ाई से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा अमरकंटक में उद्गम स्थल से दूर भूमि चिह्नित कर सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। ड्रोन के जरिए रखी जाएगी नजर बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक समीक्षा बैठक में यह विषय आया था। मुख्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाने के निर्देश दिए थे। यही विभाग योजना बनाएगा और क्रियान्वित करेगा। इसके तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। एमपी में 1079 किमी लंबी है नर्मदा नदी विभिन्न शासकीय विभागों के साथ स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक मंचों और जनसामान्य की सक्रिय सहभागिता से कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। मप्र में अमरकंटक से आंरभ होकर खम्बात की खाड़ी(अरब सागर) में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी नर्मदा नदी की प्रदेश में लंबाई 1079 किलोमीटर है। नर्मदा के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 ग्राम और 1126 घाट हैं। नर्मदा किनारे 430 प्राचीन शिव मंदिर और दो शक्तिपीठ विद्यमान हैं।