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बीमा बनाम अस्पताल: जंग का खामियाज़ा भुगत रहे मरीज

नई दिल्ली देश में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर इन दिनों गहरे विवाद में फंस गया है. कैशलेस इलाज को लेकर अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच चल रही खींचतान का सबसे बड़ा खामियाजा पॉलिसीधारकों को उठाना पड़ रहा है. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (AHPI), जिसमें 15 हजार से अधिक अस्पताल जुड़े हैं, ने हाल ही में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के पॉलिसीधारकों को 22 सितंबर से कैशलेस सुविधा बंद करने की चेतावनी दी थी. यह फैसला 12 सितंबर को लिया गया, हालांकि अब इसे फिलहाल टाल दिया गया है. पहले भी दी जा चुकी हैं धमकियां स्टार हेल्थ से पहले भी अस्पताल संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया था. 22 अगस्त 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस और केयर हेल्थ इंश्योरेंस को चेतावनी जारी की गई थी कि उनके ग्राहकों को कैशलेस सर्विस नहीं दी जाएगी. दरअसल, टैरिफ दरों को लेकर असहमति इस जंग की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है. बीमा कंपनियों का पलटवार केवल अस्पताल संगठन ही नहीं, कई बीमा कंपनियां भी कुछ अस्पतालों को अपनी सूची से बाहर कर रही हैं. उदाहरण के लिए, निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने 16 अगस्त 2025 को मैक्स हेल्थकेयर को अपने पैनल से हटा दिया. इसी तरह, केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने 17 फरवरी 2025 को दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों के साथ करार समाप्त कर दिया था. मरीज बन रहे बीच का शिकार बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच खिंची इस रस्साकशी का सीधा असर मरीजों पर हो रहा है. कई जगह पॉलिसीधारकों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल रही, जबकि कुछ को पूरा बिल एडवांस में चुकाना पड़ रहा है. कई बार रीइंबर्समेंट भी नहीं मिल पाता, जिससे बीमा होने के बावजूद लोग आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. बढ़ रही पॉलिसीधारकों की मुश्किलें भारत में अभी भी स्वास्थ्य बीमा धारकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच चल रही यह खींचतान नए ग्राहकों को बीमा पॉलिसी लेने से हतोत्साहित कर सकती है. बढ़ते विवाद ने लोगों के मन में बीमा की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. पुराना है यह विवाद अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच यह टकराव नया नहीं है. इसकी जड़ें वर्षों पुरानी हैं, लेकिन कोरोना महामारी के बाद यह तनाव और गहरा गया. AHPI के महानिदेशक गिरीधर ग्यानी ने कहा था कि जब बीमा कंपनियों ने कुछ अस्पतालों को अपनी पैनल लिस्ट से हटाना शुरू किया, तब अस्पतालों ने भी एकजुट होकर विरोध करने का निर्णय लिया. आखिर कौन कर रहा है मनमानी? अस्पताल संगठन बीमा कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हैं, जबकि बीमा कंपनियां अस्पतालों पर. मैक्स हेल्थकेयर का कहना है कि बीमा कंपनियां लगातार दरें घटाने का दबाव बनाती हैं, नए कॉन्ट्रैक्ट को लटकाए रखती हैं और पुराने कॉन्ट्रैक्ट में संशोधन करने से बचती हैं. वहीं, अस्पतालों की मांग है कि टैरिफ दरें बढ़ाई जाएं, लेकिन बीमा कंपनियां पुराने रेट में भी कटौती चाहती हैं. नतीजा यह है कि दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही और इसकी कीमत आम मरीज चुका रहा है.

मां दुर्गा और शिव जी की कृपा पाने के लिए नवरात्रि में अपनाएं ये पवित्र विधि

शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) हर साल भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह समय मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस खास अवसर पर भगवान शिव की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि नवरात्र में शिव जी के 108 नामों का जाप करने से परम कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। ऐसे करें पूजा सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान शिव के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में माता रानी और भोलेनाथ की आरती करें। ऐसा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ।।भगवान शिव के 108 नाम।। ॐ महाकाल नमः ॐ रुद्रनाथ नमः ॐ भीमशंकर नमः ॐ नटराज नमः ॐ प्रलेयन्कार नमः ॐ चंद्रमोली नमः ॐ डमरूधारी नमः ॐ चंद्रधारी नमः ॐ भोलेनाथ नमः ॐ कैलाश पति नमः ॐ भूतनाथ नमः ॐ नंदराज नमः ॐ नन्दी की सवारी नमः ॐ ज्योतिलिंग नमः ॐ मलिकार्जुन नमः ॐ भीमेश्वर नमः ॐ विषधारी नमः ॐ बम भोले नमः ॐ विश्वनाथ नमः ॐ अनादिदेव नमः ॐ उमापति नमः ॐ गोरापति नमः ॐ गणपिता नमः ॐ ओंकार स्वामी नमः ॐ ओंकारेश्वर नमः ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः ॐ भोले बाबा नमः ॐ शिवजी नमः ॐ शम्भु नमः ॐ नीलकंठ नमः ॐ महाकालेश्वर नमः ॐ त्रिपुरारी नमः ॐ त्रिलोकनाथ नमः ॐ त्रिनेत्रधारी नमः ॐ बर्फानी बाबा नमः ॐ लंकेश्वर नमः ॐ अमरनाथ नमः ॐ केदारनाथ नमः ॐ मंगलेश्वर नमः ॐ अर्धनारीश्वर नमः ॐ नागार्जुन नमः ॐ जटाधारी नमः ॐ नीलेश्वर नमः ॐ जगतपिता नमः ॐ मृत्युन्जन नमः ॐ नागधारी नमः ॐ रामेश्वर नमः ॐ गलसर्पमाला नमः ॐ दीनानाथ नमः ॐ सोमनाथ नमः ॐ जोगी नमः ॐ भंडारी बाबा नमः ॐ बमलेहरी नमः ॐ गोरीशंकर नमः ॐ शिवाकांत नमः ॐ महेश्वराए नमः ॐ महेश नमः ॐ संकटहारी नमः ॐ महेश्वर नमः ॐ रुंडमालाधारी नमः ॐ जगपालनकर्ता नमः ॐ पशुपति नमः ॐ संगमेश्वर नमः ॐ दक्षेश्वर नमः ॐ घ्रेनश्वर नमः ॐ मणिमहेश नमः ॐ अनादी नमः ॐ अमर नमः ॐ आशुतोष महाराज नमः ॐ विलवकेश्वर नमः ॐ अचलेश्वर नमः ॐ ओलोकानाथ नमः ॐ आदिनाथ नमः ॐ देवदेवेश्वर नमः ॐ प्राणनाथ नमः ॐ शिवम् नमः ॐ महादानी नमः ॐ शिवदानी नमः ॐ अभयंकर नमः ॐ पातालेश्वर नमः ॐ धूधेश्वर नमः ॐ सर्पधारी नमः ॐ त्रिलोकिनरेश नमः ॐ हठ योगी नमः ॐ विश्लेश्वर नमः ॐ नागाधिराज नमः ॐ सर्वेश्वर नमः ॐ उमाकांत नमः ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः ॐ त्रिकालदर्शी नमः ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः ॐ महादेव नमः ॐ गढ़शंकर नमः ॐ मुक्तेश्वर नमः ॐ नटेषर नमः ॐ गिरजापति नमः ॐ भद्रेश्वर नमः ॐ त्रिपुनाशक नमः ॐ निर्जेश्वर नमः ॐ किरातेश्वर नमः ॐ जागेश्वर नमः ॐ अबधूतपति नमः ॐ भीलपति नमः ॐ जितनाथ नमः ॐ वृषेश्वर नमः ॐ भूतेश्वर नमः ॐ बैजूनाथ नमः ॐ नागेश्वर नमः।।

पटना में होगी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक, 24 सितंबर को राहुल और खड़गे की भागीदारी तय

पटना  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने सोमवार को बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 24 सितंबर को पटना में होने वाली कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में शामिल होंगे. पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अल्लावरु ने कहा कि कांग्रेस बिहार में दूसरा 'स्वतंत्रता संग्राम' लड़ रही है, यही कारण है कि इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन बिहार में किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'सीडब्ल्यूसी बैठक में एआईसीसी अध्यक्ष खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहेंगे. सभी सीडब्ल्यूसी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं.' कृष्णा अल्लावरु ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'उस छात्र की तरह हैं जो मेहनत से पढ़ाई नहीं करता, बल्कि परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करता है.' कृष्णा अल्लावरु ने यह भी कहा कि बिहार, जहां हाल ही में राहुल गांधी ने 1,300 किलोमीटर की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली थी, अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है. अल्लावरु ने कहा, 'हम बिहार में दूसरा स्वतंत्रता संग्राम लड़ रहे हैं, यही कारण है कि सीडब्ल्यूसी की बैठक यहां आयोजित की जा रही है.' इंडिया ब्लॉक में सीट बंटवारे के सवाल पर अल्लावरु ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और जल्द ही हम एक व्यवहारिक फॉर्मूला लेकर आएंगे. उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी नीत एनडीए में अव्यवस्था दिख रही है. जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव को इंडिया ब्लॉक का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, 'उचित समय पर सभी गठबंधन सहयोगी एक साथ बैठकर इस पर फैसला लेंगे.' बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. निर्वाचन आयोग अक्टूबर के पहले हफ्ते में बिहार विधानसभा चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर सकता है.

राजाभोज एयरपोर्ट से विंटर सीजन में डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू, भोपाल से इन शहरों के लिए सुविधा

 भोपाल  राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई यात्रियों के लिए एक बार फिर अच्छी खबर आई है। इंडिगो एयरलाइंस ने भोपाल एयरपोर्ट से गोवा, अहमदाबाद, रायपुर जैसे शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू कर दी है। पिछले साल इन शहरों के लिए संचालित उड़ानों को यात्रियों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया गया था। पिछले 12 महीने से लगातार उठ रही डिमांड और हाल ही में किए गए यात्री सर्वे के बाद बेहतर पैसेंजर रिस्पांस के बाद इंडिगो एयरलाइंस ने 26 अक्टूबर से इन तीनों शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू करने का ऐलान कर दिया है। भोपाल एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि भोपाल हवाई अड्‌डे ने यात्रियों के लिए अपनी हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत किया है। अहमदाबाद, रायपुर, गोवा रूट पर डायरेक्ट फ्लाइट सेवा शुरू होने के बाद भोपाल एयरपोर्ट से प्रतिदिन उड़ानों की संख्या 36 दर्ज की जाएगी। 26 अक्टूबर से गोवा और अन्य शहरों के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू की जा रही है। इंडिगो एयरलाइंस गोवा के लिए दोपहर 2:40 पर विमान सेवा संचालित करेगी। गोवा से दोपहर 2:40 पर आने वाली फ्लाइट 3:30 पर दोबारा गोवा के लिए उड़ान भरेगी। राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू हुई हैं। 15 सितंबर से इंडिगो बेंगलुरु के लिए नई फ्लाइट शुरू की। 16 सितंबर से दिल्ली के लिए नई उड़ान शुरू हई। इसके बाद अहमदाबाद के लिए 21 सितंबर से सुबह और हैदराबाद के लिए 22 अक्टूबर से रात की नई फ्लाइट शुरू हुई। 

रेलवे का बड़ा ऐलान: 25 नवंबर से 8 जनवरी तक MP की 5 ट्रेनें रद्द, 18 के रूट बदले जाएंगे

ग्वालियर  पुराने साल की विदाई और नए साल के स्वागत को लेकर सैर-सपाटे की योजना बनाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। वीरंगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर वाशेबल एप्रन हटाकर गिट्टी रहित पटरी बिछाने का काम होने के कारण डेढ़ माह तक कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। 25 नवंबर से आठ जनवरी के बीच ग्वालियर होकर चलने वाली पांच जोड़ों ट्रेनों को रेलवे ने रद्द (Cancelled Train in MP) किया है, जबकि कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से संचालित किया जाएगा। ये ट्रेनें रहेंगी रद्द – ट्रेन क्रमांक 11901-11902 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-आगरा कैंट एक्सप्रेस 25 नवंबर से लेकर नौ जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 11903-11904 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-इटावा एक्सप्रेस 25 नवंबर से नौ जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 05073-05074 बेंगलुरु सिटी-लालकुआं साप्ताहिक ट्रेन को 29 नवंबर से छह जनवरी तक रद्द किया गया है। – ट्रेन क्रमांक 07363-07364 योगनगरी ऋषिकेश-हुबली साप्ताहिक ट्रेन 27 नवंबबर से पांच जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 06597-06598 योगनगरी ऋषिकेश-यशवंतपुर को 27 नवंबर से एक जनवरी तक रद्द किया गया है। परिवर्तित मार्ग से चलेंगी ये ट्रेनें – ट्रेन क्रमांक 22456 कालका-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस को 27 नवंबर से चार जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना होकर चलाया जाएगा। – ट्रेन क्रमांक 16318 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-कन्याकुमारी एक्सप्रेस 24 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 20494 चंडीगढ़-मदुरै एक्सप्रेस 28 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 16032 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-चेन्नई सेंट्रल 25 नवंबर से छह जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 16788 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस 27 नवंबर से एक जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 14314 बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – इसी प्रकार ट्रेन क्रमांक 14320 बरेली-इंदौर एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक तक अपने बदले हुए मार्ग ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 12162 आगरा कैंट-एलटीटी लश्कर एक्सप्रेस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 22706 जम्मूतवी-तिरुपति 28 नवंबर से दो जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 12752 जम्मूतवी-नांदेड़ 30 नवंबर से चार जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 22408 हजरत निजामुद्दीन-अंबिकापुर एक्सप्रेस 25 नवंबर से छह जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 11078 जम्मूतवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस 24 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 09466 दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक दिसंबर से पांच जनवरी तक बदले हुए मार्ग कानपुर से इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 09465 अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस 28 नवंबर से दो जनवरी तक कानपुर-इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से इटावा होते हुए कानपुर तक जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 11124 बरौनी-ग्वालियर मेल 24 नवंबर से सात जनवरी तक कानपुर-इटावा होते हुए ग्वालियर आएगी। – ट्रेन क्रमांक 04137 ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 04138 बरौनी-ग्वालियर 24 नवंबर से पांच जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी के बीच संचालित होगी। इन ट्रेनों के बदले स्टेशन – ट्रेन क्रमांक 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी 26 नवंबर से नौ जनवरी तक आगरा कैंट से शुरू होगी। – ट्रेन क्रमांक 19666 उदयपुर-खजुराहो इंटरसिटी 24 नवंबर से सात जनवरी तक आगरा कैंट तक संचालित की जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 12279-12280 ताज एक्सप्रेस 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से दिल्ली के बीच संचालित की जाएगी। देरी से चलेंगी ये ट्रेनें – ट्रेन क्रमांक 22196 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी मंगलवार और बुधवार को 25 नवंबर से एक जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट विलंब से चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी शनिवार को 29 नवंबर से तीन जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट देरी से जाएगी।

सावधान! पेन किलर और इनहेलर के सही इस्तेमाल का AIIMS ने दिया खास निर्देश

भोपाल   पेनकिलर या स्टेरॉयड का गलत उपयोग किडनी को प्रभावित कर सकता है। मेडिकल डिवाइस का सही ज्ञान न होने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो व्यक्ति को विचलित या गंभीर स्थिति में ला सकती है। यही नहीं, एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है, जिससे गंभीर बीमारी होने पर एंटीबायोटिक्स असर करना बंद कर देंगी और यह मौत का प्रमुख कारण बन सकता है। एम्स के विशेषज्ञों ने 21 सितंबर को 5वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान ये जानकारी दी। इस्तेमाल करने का सही तरीका सीखें विशेषज्ञों ने कहा कि ब्लड प्रेशर मशीन, ग्लूकोमीटर और इनहेलर जैसे उपकरणों को सही तरीके से उपयोग करना सीखें। गलत तकनीक परिणामों को प्रभावित कर सकती है। गलत परिणाम देखकर कई बार स्वस्थ व्यक्ति भी विचलित हो जाता है। इस स्थिति से बचना चाहिए, क्योंकि भ्रम में कई बार व्यक्ति जल्दबाजी में बड़ी गलती कर बैठता है। इसके अलावा थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि का नियमित केलिब्रेशन और सफाई जरूरी है, ताकि इन्फेक्शन का खतरा न रहे। बिना सलाह न लें पेनकिलर, स्टेरॉयड AIIMS Bhopal के विशेषज्ञों ने कहा कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर और स्टेरॉयड का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके गलत उपयोग से किडनी पर असर पड़ सकता है। इसके साथ-साथ एंटीबायोटिक्स के खिलाफ शरीर में रेजिस्टेंस बनता है, जिससे जब दवा की जरूरत पड़ती है तो शरीर पर उसका असर नहीं होता। टोल-फ्री नंबर पर करें कॉल किसी भी तरह के दुष्प्रभाव दिखने पर रिपोर्टिंग के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180- 3024 और मोबाइल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम का संचालन रिसर्च एसोसिएट दीपिका चौधरी और फैजान ने किया। वहीं, डॉ. फ्लोरेंस जॉय, डॉ. केविन जैन, डॉ. चिराग अग्रवाल और डॉ. सिद्धांत ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया और उपभोक्ताओं एवं स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

बड़ी सर्जरी: MP सरकार बदलेगी कई अधिकारियों की पोस्टिंग, कलेक्टरों पर विशेष कार्रवाई तय

भोपाल  मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव दशहरे के बाद मातहतों को सुशासन, न्याय और बेहतर कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाएंगे। उससे पहले बड़ी प्रशासनिक सर्जरी तय है। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के उन अधिकारियों को बदला जा सकता है, जिन्हें उम्मीदों के साथ लाया गया था लेकिन बेहतर परफॉर्मेंस नहीं कर पा रहे। कई कलेक्टरों पर भी गाज गिरनी तय है। ऐसे जिलों की बारी आएगी, जहां के प्रशासनिक मुखिया या तो विवादों में रहे हैं या काम अव्वल दर्जे का नहीं दिखा पाए। नए आइएएस अफसरों व राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में जिला पंचायत सीईओ बनाकर राहत की पोस्टिंग दी जा सकती है। पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस असल में मोहन सरकार में पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस होनी है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के पूर्व होनी थी, लेकिन तमाम विषयों को देखते हुए नहीं कर सके। अब नवरात्र और दशहरा पर्व नजदीक है, इसलिए कॉन्फ्रेंस को आगे खिसका दिया है। इसमें कलेक्टर, संभागायुक्त, एसपी पुलिस कमिश्नर समेत संभागों के आइजी-डीआइजी शामिल होंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कॉन्फ्रेंस में सीएस अनुराग जैन भी मौजूद रहेंगे। जिन जिलों में जिला पंचायत सीईओ ने नहीं हैं, उनमें कटनी, डिंडौरी, अनूपपुर, ग्वालियर, श्योपुर, छतरपुर, रतलाम, सिंगरौली, मंडला, शाजापुर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, सीधी. शहडोल, सिवनी, बुरहानपुर शामिल है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इन जिलों में सीईओ की कमान जल्द नए अफसरों को दे सकती है। हालांकि अभी इन जिलों में सीईओ का प्रभार दूसरे अफसरों को दे रखा है। कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव एजेंडे के साथ बैठेंगे। अलग-अलग सत्रों में अलग-अलग विषयों पर बातचीत होगी। शुरुआत जिलों की कमान संभाल रहे अफसरों के कामकाज पर आधारित रिपोर्ट से होगी। सूत्रों के मुताबिक संबंधितों को बताया जाएगा कि उन्होंने कहां अच्छा किया और कहां मुसीबत पैदा करने वाले काम किए। इस आधार पर ऐसे अधिकारियों को सीख दी जाएगी।

जबलपुर-रायपुर के बीच सफर होगा आसान, बनेगी 150 KM लंबी फोरलेन सड़क

जबलपुर  जबलपुर से रायपुर की सड़क की दशा जल्द बदलेगी। इस सड़क के कुछ हिस्से पर वाहन चालक चलने से घबराते हैं। इस सड़क को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण फोरलेन बनाने जा रहा है। सड़क की न सिर्फ चौड़ाई बढ़ेगी बल्कि नए तरह से निर्माण किया जाएगा। जबलपुर से चिल्पी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण एनएचएआइ करेगा। इस मार्ग के निर्माण में 4500 करोड़ का व्यय होगा। फिलहाल सडक निर्माण के लिए कंसल्टेंसी नियुक्त करने का प्रयास हो रहा है ताकि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जा सके। सब कुछ ठीक रहा तो यह सड़क जो अभी एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के पास है, इसे वापस एनएचएआइ सड़क का हस्तातंरण करेगा। वन्य जीवों के लिए सुरक्षित मार्ग जबलपुर से चिल्पी के बीच मंडला क्षेत्र में आने वाला कान्हा नेशनल पार्क का कोर एरिया आता है। जहां वन्यजीवों की घनी आबादी विचरण करती है। ऐसे में एनएचएआई मार्ग में जगह-जगह अंडरपास और ओवर ब्रिज का निर्माण करेंगा ताकि वाहन निकलने से वन्य जीवों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। कई जगह साउंड प्रूफ उपकरण भी लगाए जाएंगे जिससे बंदरों और अन्य जीवों को वाहनों की आवाजाही खलल न पैदा करें। बता दें करीब 25 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत आ रही है। फोरलेन बनने से बढ़ेगी रफ्तार फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग 30 जबलपुर से रायपुर के बीच दो लेन है। इस वजह से वाहनों की आवाजाही में थोड़ी परेशानी होती है। मौसम खराब होने पर वाहनों की लंबी कतार सड़क पर लग जाती है। आवागमन भी बाधित होता है। यहां कुछ जगह लैंड स्लाइडिंग की भी समस्या बनी हुई है इसके लिए लगातार एमपीआरडीसी को शिकायत होती है लेकिन वहां से कोई भी राहत नहीं मिल पा रही है।  एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से कराया जा रहा था। वर्षों से यह सड़क बेहद खराब स्थिति में है जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस सड़क को सरकार फोरलेन में तब्दील होगी तो बड़े स्तर पर राहत मिलने की संभावना है। इस सड़क के लिए गडकरी ने मांगी थी माफी जबलपुर मंडला की यह वही सड़क है जिसके लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सड़क की खराब गुणवत्ता के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। गडकरी 2022 में मध्य प्रदेश दौरे पर आए थे। तब उन्होंने मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे की इस बदहाल सड़क को देखा। उन्होंने शर्मिंदगी महसूस की। सड़क की स्थिति को देखते हुए मंच से ही माफी मांगी थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने ये बयान सात नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश के मंडला में दिया था। गडकरी ने जबलपुर से मंडला के बीच नेशनल हाईवे के टेंडर रद्द कर सड़क के इस हिस्से को फिर से बनवाने के निर्देश दिए थे। बाद में इस मार्ग को सुधारने के लिए 53 करोड़ रुपये की लागत से सुधार का काम हुआ था। 2015 में शुरू हुआ था निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 251 करोड़ की लागत से जबलपुर से मंडला के बीच इस राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन को निर्माण एजेंसी बनाया था। तीन फेस में बनने वाली इस सड़क का काम साल 2015 में शुरू हुआ था, जिसे दिसंबर 2016 तक पूरा हो जाना था। लेकिन, अब तक हाईवे का निर्माण अधूरा है और जहां हाईवे बना वो घटिया निर्माण से टूट-फूट का शिकार है। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जबलपुर से चिल्पी के बीच करीब 150 किमी की सड़क को फोरलेन बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कंसल्टेंसी की तलाश हो रही है। हम जल्द डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजेंगे यदि मंजूरी मिली तो एमपीआरडीसी से यह सड़क लेकर एनएचएआई निर्माण कराएंगा।

रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम की संभावना, जानिए कैसे होगा कानून व्यवस्था का बेहतर नियंत्रण

रायपुर  कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी है। सीएम विष्णुदेव साय के बाद राज्य के गृहमंत्री और डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने भी कमिश्नरी सिस्टम को लेकर अहम जानकारी दी है। विजय शर्मा ने कहा कि हम कमिश्नरी प्रणाली लेकर आ रहे हैं, जिससे पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित होगी और पुलिस त्वरित निर्णय ले सकेगी। जीरो पॉइंट पर निर्णय लेने के लिए प्रैक्टिस चल रही है। क्या है कमिश्नरी सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस आयुक्त के पास कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से संबंधित सभी शक्तियां होती हैं। ज्यादा शक्तियां होने से पुलिस को तेजी से निर्णय ले सकती है। इस सिस्टम के तहत पुलिस आयुक्त के पास जिला मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां हो जाती हैं। कई जगहों पर लागू है यह सिस्टम पुलिस कमिश्नरी सिस्टम देश के कई राज्यों में बड़े शहरों में लागू है। जिले का एसपी पुलिस का मुखिया होता है। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना एसपी की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन यह सिस्टम लागू होने के बाद एसपी, एसएसपी की जगह पुलिस कमिश्नर होता है। पुलिस कमिश्नर किस रैंक के अधिकारी को बनाया जाएगा यह फैसला राज्य सरकार करती है। राज्य सरकार डीआईजी से लेकर एडीजी स्तर तक के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दे सकती है। जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है वह अनुभवी अफसर होते हैं। राज्य सरकार उसके अधिकारों को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। कौन-कौन से अधिकार देने हैं यह राज्य सरकार तय करती है। यह जरुरी नहीं है कि सारे अधिकार डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट के जैसे हों। क्या बदलाव होंगे कमिश्नरी बन जाने से सबसे बड़ा फर्क यह पड़का है कि जिला पुलिस का मुखिया एक अनुभवी और ऊंचे रैंक वाला अधिकारी होता है। बहुत सारे काम उसकी मंसा के अनुरुप होते हैं। पुलिसिंग व्यवस्था प्रभावी बनती है। जरुरत के मुताबिक पुलिस फोर्स मिल सकती है। इसका फायदा आम जनता को भी मिलता है। छोटे मोटे दंड वाले अपराधों की तफ्तीस का अधिकार हेड कांस्टेबल को मिल जाता है। जिससे अपराध को नियंत्रण पर में मदद मिलती है। अभी ऐसे मसलों का निपटारा एसएआई या एसआई रैंक के अधिकारी करते हैं।

भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट को मिलेगी विश्व धरोहर की मान्यता? प्राचीन चट्टानों और भूगर्भीय रहस्यों से भरा क्षेत्र

जबलपुर  भेड़ाघाट व लम्हेटाघाट की चट्टानें यूनेस्को के विश्व धरोधर सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गई हैं। जिसके बाद नर्मदा तट पर बसे जबलपुर की प्राचीन धरा को अब पूरी दुनिया में पहचान मिलेगी। भूगर्भ शास्त्र के अनुसार दो हजार करोड़ वर्ष पुरानी जबलपुर के नर्मदा तट की चट्टानें सदियों से पृथ्वी की कई संरचनाओं के निर्माण की गवाह रही हैं। कुछ वर्ष पहले यूनेस्को ने भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट (भूगर्भशास्त्र में लमेटा फार्मेशन के नाम से विख्यात) की चट्टानों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय किया और वर्ष 2021 में लम्हेटा यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हुआ। संगमरमर के पत्थरों को चीरकर निकलती नर्मदा के इस तट को दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सूची में लाने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ), जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड समेत राष्ट्रीय स्तर की अन्य एजेंसी कार्य कर रही हैं। विशेषज्ञों के दल ने किया दौरा विशेषज्ञों का एक दल ने भेड़ाघाट, लम्हेटा का दौरा किया और इस बात पर सहमति जताई कि यह स्थल अगले दो वर्ष के अंदर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थायी रूप से नाम दर्ज करवा लेगा। डब्ल्यूआइआइ के विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया ने बताया कि यह साइट प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भ के महत्व के लिहाज से देश की पहली अति प्राचीन धरोहर होगी। इधर, डब्ल्यूआईआई द्वारा तैयार प्रारंभिक मूल्यांकन को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। आगे यूनेस्को से प्रारंभिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आने के बाद नामांकन डोजियर यूनेस्को को सौंपा जाएगा। डोजियर जमा होने के बाद यूनेस्को के इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) का मूल्यांकन दल स्थल का निरीक्षण करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा। क्या है भूगर्भीय महत्व भेडाघाट और इसके निकट दो हजार से बाइस सौ करोड़ वर्ष पुरानी चट़टानों से लेकर पंद्रह लाख वर्ष पुरानी चट्टानें मौजूद हैं। इस समयावधि के बीच पृथ्वी में हुई भू वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रमाण यहां मौजूद हैं। यहां की इगनिंग बराइट नाम की चटटानें इस बात का प्रमाण हैं कि यहां कभी ज्वालामुखी फटने जैसी घटनाएं भी हुई थीं। यहां नर्मदा नदी का प्रवाह के परिवर्तन प्रमाण में देखने मिलते हैं जिसे नदी अपहरण कहा जाता है। नर्मदा के इस तट को पूरे विश्व में लमेटा फार्मेशन के नाम से जाना जाता है। भूगर्भ शास्त्रियों के लिए यह स्थल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां विभिन्न समय कालखंड की चट़टानों के साथ-साथ डायनासोर के अंडों के फासिल भी मिले हैं। केंद्र के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर शुक्रवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट के स्थलों का निरीक्षण किया। दल में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के विज्ञानी डा. गौतम तालुकदार, विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया, प्रोजेक्ट एसोसिएट दीपिका सायरे एवं स्नेहा पांडे, जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के डा. सुहेल अहमद, सर्वे आफ इंडिया के जयप्रकाश पाटीदार, कुलदीप सिंह बागरी, हेमंत तथा भेडाघाट नगर परिषद के सीएमओ विक्रम सिंह तथा मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के मार्केटिंग प्रमुख योगेंद्र रिछारिया, जीएम अमित सिंह आदि शामिल थे। 2200 करोड़ साल पुरानी हैं चट्टानें     लम्हेटाघाट में 2200 करोड़ साल पुरानी चट्टानें हैं इन्हें महाकोशल राक कहा जाता है। करोड़ों साल पहले यहां समुद्र था जिसके किनारे नमी में डायनासोर प्रजनन करते थे। अंडे देते थे। करीब 65 करोड़ साल पहले लम्हेटा में ज्वालामुखी फटा जिसका लावा ठंडा होकर लम्हेटाघाट की चट्टानों में बदल गया। प्राकृतिक रूप से यह अदभुत है कि यहां की चट्टानों में खड़े हो तो एक पैर जिस चट्टान पर होगा वह 22 करोड़ साल पुरानी होगी वहीं दूसरा पैर जिस पर रखा होगा वह 65 करोड़ साल पुरानी। ये बेहद दुर्लभ है। देश में प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भीय महत्व वाली यह पहली साइट है। – भूमेश सिंह भदौरिया, विषय विशेषज्ञ, वर्ल्ड हेरिटेज नर्मदा घाटी रहस्य समेटे हुए है     मां नर्मदा पृथ्वी पर सबसे प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक हैं। नर्मदा घाटी अपने आप में अनेक रहस्य समेटे हुए है जो मानव सभ्यता के उन अनजान पहलुओं से अवगत कराती है जिसकी खोज में आधुनिक मानव निरंतर प्रयत्नशील है। नर्मदा मैया के तट पर संगमरमर की चट्टानें करोडों वर्ष के भूगर्भीय परिवर्तन की मूक गवाह हैं जो मानव मात्र को अचंभित कर देती है। जबलपुर का लम्हेटा और भेड़ाघाट यूनेस्को की विश्व धरोहरों की स्थायी सूची में अपना गहरा हस्ताक्षर दर्ज कराने की कगार पर है। इस स्थल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन निरंतर प्रयत्नशील है।- शिव शेखर शुक्ल, पर्यटन सचिव, एमडी मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड