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बाढ़ त्रासदी: मौतों का आंकड़ा 394, हजारों घर उजड़े

भोपाल इस साल प्रदेश के 21 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण 394 जनहानि हुई, वहीं पांच हजार मकान क्षतिग्रस्त हुए। 1814 पशुहानि भी हुई। शिवपुरी, बुरहानपुर, दमोह, अशोकनगर, धार, छतरपुर, रायसेन, उमरिया, बड़वानी, मंडला और कटनी जिलों में 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर फसलें प्रभावित हुई हैं। 17,500 किसानों को अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की राहत राशि स्वीकृत की गई है। सीएम ने दिए राहत कार्य बढ़ाने के निर्देश यह जानकारी अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव द्वारा बुधवार को की गई समीक्षा में सामने आई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन-जिन क्षेत्रों में भी अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को क्षति हुई है, वहां राहत की कार्रवाई आरंभ की जाए। जनहानि और पशु हानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलब्ध कराई जाए। आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना है। ऐसे में जिलों में प्रशासन सक्रिय रहे। पुल-पुलिया में बैरिकेटिंग और बाढ़ की स्थिति में पुल पार न करने की चेतावनी की व्यवस्था की जाए। अस्थायी कैम्प, राशन एवं भोजन वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामग्री संभावित स्थानों पर सुनिश्चित होनी चाहिए। इन जिलों में हुई औसत से अधिक बारिश प्रदेश में एक जून से दो सितंबर तक 38.24 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में भिण्ड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मंडला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी में सामान्य से अधिक तो गुना, मंडला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर में सर्वाधिक वर्षा दर्ज हुई।

महिला की नग्न अवस्था देख दंपत्ति ने रखी हैरान कर देने वाली मांग

सिचुआन  चीन में एक महिला के साथ अजीब घटना घट गई है। यहां एक महिला अपने कमरे में नग्न अवस्था में सो रही थी, उसी समय उसकी खिड़की को साफ करने आए दो सफाई कर्मियों ने उसे इस हालत में देख लिया। इसके बाद उसे काफी शर्मिंदगी हुई और वह डिप्रेशन में चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह महिला और उसका पति चीन के सिचुआन प्रांत के चेंगदू के एक लग्जरी बिल्डिंग के अपार्टमेंट में रहता है। इनके अपार्टमेंट का किराया करीब 1400 डॉलर प्रति महीना है। सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में चेंग नामक इस महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। दंपत्ती ने बताया कि यह घटना 25 अप्रैल की सुबह हुई जब पत्नी सो रही थी और पति लिविंग रूप में काम कर रहा था। उसी वक्त पत्नी के चीखने की आवाज आई। पति भागकर उसे देखने के लिए पहुंचा। दंपत्ति ने आगे लिखा, "मैं उसे देखने गया, मेरी पत्नी बिस्तर पर बिना कपड़ों के लेटी हुई थी और खिड़की पर दो सफाई कर्मचारी उसे घूर रहे थे। उस समय कमरे के पर्दे भी बंद नहीं थे और लाइट भी पूरी जल रही थी। मैं तुरंत ही पर्दे बंद करने के लिए भागा।" महिला के पति के मुताबिक उसकी पत्नी को आमतौर पर बिस्तर में कपड़े नहीं पहनने की आदत है। ऐसे में वह अपनी सामान्य अवस्था में ही थी। प्रॉपर्टी ऑनर के ऊपर आरोप लगाते हुए पति ने लिखा, "उन्होंने हमें खिड़की के बाहर सफाई की तारीख की सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने हमें बस इतना बताया था कि 21 से 30 अप्रैल के बीच में सफाई की जाएगी। दस दिन तक कमरे के पर्दे बंद रखना हमारे लिए नामुमकिन है। हालांकि मैंने कई बार उनसे सही तारीख के बारे में पूछा भी लेकिन उन्होंने नहीं बताया।" चेंग ने कहा कि जब से यह घटना हुई है, उसकी पत्नी गहरे डिप्रेशन में चली गई है। कपल का कहना है कि इस घटना के लिए प्रॉपर्टी ऑनर और उनकी मैनेजमेंट कंपनी को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें उचित मुआवजे के तौर किराए में बड़ी छूट भी मिलनी चाहिए। हालांकि चेंग के मुताबिक उनकी दोनों ही मांगे कंपनी की तरफ से ठुकरा दी गई हैं। चेंग ने बताया कि उनके शिकायत करने पर कंपनी ने एक कर्मचारी को फलों की टोकरी के साथ मांफी मांगने के लिए भेज दिया। अब मेरी पत्नी के डिप्रेशन में जाने का सवाल है, तो किसी को कोई चिंता नहीं है। हमारा किराए का कॉन्ट्रेक्ट भी कुछ समय में खत्म हो रहा है। इतना ही नहीं हमारे बार-बार कहने पर कंपनी में किराए में सिर्फ 80 डॉलर कम करने के प्रस्ताव रखा है। चेंग ने कहा, “हम इस अपार्टमेंट के प्रति महीने करीब 10 हजार युआन देते हैं। क्या हमारे पास 600 युआन की कमी है? कंपनी का यह रवैया दर्शाता है कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है। अगर वह चिंता करते ही तो किराए में एक लंबी छूट दे सकते थे। हम उनके रवैए से संतुष्ट नहीं है।”

तेजी से कद-काठी बढ़ाने के लिए बच्चों को जरूर दें ये फूड्स

भोपाल  आजकल के दौर में अच्छी हाइट यानी लंबाई काफी जरूरी मानी जाती है क्योंकि हाइट आपकी पर्सनैलिटी को इन्हैंस करती है. जबकि कई तरह से ये करियर में भी फायदे पहुंचाती है.अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चों की हाइट अच्छी हो तो उसके लिए आपको कुछ चीजों का शुरू से ही ध्यान रखने की जरूरत है. हाइट में सबसे बड़ा रोल जीन्स प्ले करते हैं. अगर मां-बाप लंबे हैं तो उनके बच्चे भी लंबे ही होते हैं. लेकिन इसके अलावा मेडिकल कंडीशन, डाइट, फिजिकल एक्टविटी और एनवायरमेंट का भी बच्चों की ग्रोथ पर असर पड़ता है. ऐसे में मां-बाप को चाहिए कि अपने बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर आहार दें जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन ए शामिल हो ताकि हड्डियों और ऊतकों के विकास में मदद मिल सके. यहां हम आपको कुछ फूड्स बता रहे हैं जिन्हें आपको अपने बच्चों की डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए.  प्रोटीन इनटेक बढ़ाएं प्रोटीन मजबूत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए जरूरी होता है. इसलिए आपको अपने बच्चों को चिकन, अंडे, मछली और डेयरी उत्पाद जरूर देने चाहिए. अगर आप वेजिटेरियन हैं तो आप उन्हें बीन्स, दालें, क्विनोआ, टोफू और मेवे, पनीर और सोयाबीन जैसीचीजें भी खिला सकते हैं. डेयरी उत्पाद हैं जरूरी सिर्फ प्रोटीन ही नहीं दूध, दही और पनीर कैल्शियम और विटामिन डी के भी बेहतरीन स्रोत होते हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां खिलाएं पालक, साग, मेथी और केल जैसी सब्जियोंं में कैल्शियम, विटामिन K और कई पोषक तत्व होते हैं जो हड्डियों की मजबूती और ग्रोथ में मदद करते हैं. ग्रोथ के लिए अच्छी नींद  बढ़ते बच्चों को कम से कम 8-10 घंटे की अच्छी नींद लेने की जरूरत होती है. इसलिए इस चीज से समझौता ना करें. फिजिकल एक्टिविटी कराएं मांसपेशियों और हड्डियों की ग्रोथ के लिए स्ट्रेचिंग, साइकिलिंग या तैराकी जैसी फिजिकल एक्टिविटी को बच्चों के रूटीन का हिस्सा बनाएं.

स्वच्छता में इंदौर की अंतरराष्ट्रीय पहचान, विदेशी प्रतिनिधियों को दी गई ट्रेनिंग

 इंदौर  देश में लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता में शीर्ष स्थान पर रहने वाले इंदौर की प्रसिद्धि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल चुकी है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल इंदौर की स्वच्छता के रहस्यों को जानने के लिए यहां आ चुके हैं। कचरा प्रबंधन के तौर-तरीके जानने पहुंचा संयुक्त प्रतिनिधि मंडल यह जानना उनके लिए दिलचस्प है कि आठ वर्ष पूर्व जिस शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर लगे रहते थे, वहां अब स्वच्छता का ऐसा माहौल कैसे बना। इंदौर की सफलता का यह मॉडल लैटिन अमेरिकी देशों ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने दो दिवसीय दौरे के दौरान देखा। दल के सदस्य ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचे दल के सदस्य ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने कचरे से सीएनजी बनाने वाले संयंत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पहले यहां कचरे के पहाड़ थे, लेकिन अब हरियाली है।प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर के कचरा प्रबंधन के तरीकों को समझने के लिए नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किए। उन्होंने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम, अनुपयोगी वस्तुओं के पुन: उपयोग और सीवेज प्लांट से निकलने वाले उपचारित जल के उपयोग के तरीकों को भी जाना। इंदौर का स्वच्छता माडल न्यूनतम खर्च में अधिकतम स्वच्छता को दर्शाता है। यह मॉडल न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी आदर्श माना जा रहा है। अब तक 40 से अधिक देशों के 850 से ज्यादा प्रतिनिधिमंडल इंदौर आकर यहां से स्वच्छता का पाठ सीख चुके हैं।  

सिंहपुर सीवरेज परियोजना अंतिम चरण में, सफल परीक्षणों से बढ़ी उम्मीदें

नरसिंहपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड द्वारा जर्मन विकास बैंक केएफडब्ल्यू के सहयोग से नरसिंहपुर में संचालित सीवरेज परियोजना का कार्य अब अंतिम चरण में पहुँच चुका है। इस अत्याधुनिक परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्र में सुनियोजित मलजल प्रबंधन सुनिश्चित कर नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करना है। इस परियेाजना का सफल प्रायोगिक परीक्षण जारी है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्यरत है। उल्लेखनीय है कि परियोजना के अंतर्गत नरसिंहपुर में दो आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जिनकी क्षमता क्रमशः 6.25 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) और 2.75 एमएलडी है। परियोजना में 6 इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का निर्माण भी किया गया है। इसके साथ ही नगर में लगभग 122 किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिससे पूरे नेटवर्क को सुव्यवस्थित रूप से जोड़ा गया है। नरसिंहपुर सीवरेज परियोजना 105 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित है। इस परियोजना के माध्यम से 15 हजार 4 सौ से अधिक घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाना है, इस परियोजना में अभी तक 13 हजार से अधिक कनेक्शन दिए जा चुके है। परियोजना के पूरा होने पर इससे नगरवासियों को बेहतर स्वच्छता सेवाएं प्राप्त होने के साथ बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी होगी। परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन से नदी, नालों और जल स्रोतों में गंदे जल के प्रवाह पर नियंत्रण होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।  

18 से 45 साल के बेरोजगार युवाओं को मिलेगा फायदा, उद्यम क्रांति योजना से शुरू कर सकेंगे बिज़नेस

भोपाल  छोटे-छोटे कारोबार को बढ़ावा देने और युवाओं को जॉब मांगने की बजाए रोजगार देने वाला बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रयासरत है. सरकार छोटे उद्यमियों को बढ़ाकर देश और मध्य प्रदेश को आर्थिक तरक्की पर ले जाना चाहती है. सरकार बिजनेस करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता के तौर पर बिना गारंटी लोन मुहैया करा रही है. सरकार 10 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का लोन दे रही है. इसके लिए आपको चयन करना होगा कि आप किस तरह का लोन लेना चाहते हैं. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अब रीवा जिले के बेरोजगारों के लिए एक मजबूत सहारा बनती जा रही है. 10 जनवरी 2022 को शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक जिले में सैकड़ों युवाओं ने लाभ लेकर अपना खुद का व्यवसाय खड़ा किया है. योजना के तहत उद्योग क्षेत्र में अधिकतम ₹50 लाख और सर्विस या बिज़नेस सेक्टर में अधिकतम ₹25 लाख तक का ऋण बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3% ब्याज सब्सिडी अधिकतम 7 वर्षों तक मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दी जाती है. यह सब्सिडी सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे युवाओं को लोन चुकाने में राहत मिलती है. कैसे उठाएं फायदा? मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. आवेदक की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह मध्यप्रदेश का निवासी होना चाहिए. इसके अलावा परिवार की वार्षिक आय ₹12 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए और आवेदक बैंक डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना बेरोजगारों को सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है. स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में यह योजना कारगर साबित हो रही है. अगर आप भी कोई बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं, तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा अवसर हो सकती है. MSME लोन योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम वर्गीय और छोटे कारोबार को बढ़ावा देने के लिए यह लोन दिया जाता है. यह लोन कारोबारी को बिना किसी गारंटी के 1 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाता है. इस योजना के तहत 8% का ब्याज दर चुकाना पड़ता है. 12 दिन के भीतर यह लोन उद्यमी के खाते में प्राप्त हो जाता है. यह उन कारोबारियों के लिए जो अपना व्यवस्या शुरू करना चाहते हैं. इस लोन की अच्छी बात यह है कि इसमें उम्र का लिमिट नहीं है. आधार कार्ड: पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड अनिवार्य है. जाति प्रमाण पत्र: पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होने का प्रमाण. मूल निवास प्रमाण पत्र: आवेदक का मध्य प्रदेश का निवासी होना आवश्यक है. आय प्रमाण पत्र: आर्थिक स्थिति का सत्यापन करने के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य है. फोटो: हाल ही की पासपोर्ट आकार की फोटो. बैंक खाता विवरण: ऋण की राशि सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी, इसलिए बैंक खाता जानकारी अनिवार्य है. योजना रिपोर्ट: जिस व्यवसाय को शुरू करना है, उसकी संक्षिप्त योजना रिपोर्ट. पैन कार्ड: कर मामलों के लिए पैन कार्ड का विवरण अनिवार्य है. कोटेशन: जिस व्यवसाय को आप शुरु करने जा रहे हैं कहां से कौन सा सामान लेंगे उसकी जानकारी. बाद में बदला भी जा सकता है.

भारत तैयार बढ़ाने के लिए रूसी तेल की खरीद, पुतिन का आकर्षक ऑफर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बीते 27 अगस्त को 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाकर इसे 50% कर दिया है और ये अतिरिक्त टैरिफ जुर्माने के तौर पर लागू किया गया है, जिसके पीछे वजह है भारत की रूसी तेल की खरीद. जी हां, ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल और हथियारों की खरीद बढ़ाकर यूक्रेन के साथ युद्ध में उसकी आर्थिक मदद करने का आरोप लगाते हुए टैरिफ बम फोड़ा है. हालांकि, अमेरिका को उम्मीद थी कि उसके इस कदम से भारत दबाव में आ जाएगा, लेकिन ट्रंप का दांव उल्टा पड़ा है और रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की ओर से की जा रही अतिरिक्त छूट की पेशकश के चलते भारत तेल की खरीद बढ़ाने की तैयारी में है.  ट्रंप का भारत पर दबाव नहीं आया काम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी क्रूड ऑयल की खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए हाई टैरिफ की उनकी कोशिश उल्टी पड़ती नजर आ रही है. रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिका के किसी भी दबाव में आने के बजाय भारत और पहले से भी ज्यादा रूसी तेल खरीदने के लिए तैयार है और इस बीच रूस की ओर से भारत को तेल पर भारी छूट का ऑफर भी दिया जा रहा है. ब्लूमबर्ग के अनुसार, सितंबर के अंत और अक्टूबर में भारत को रूसी यूराल क्रूड की आपूर्ति ब्रेंट क्रूड से 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल कम पर की जाने का ऑफर है. कुछ हफ्त पहले, यह अंतर 2.50 डॉलर था. ये खबर ट्रंप के टैरिफ अटैक के बाद चीन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की हालिया बैठक के बाद हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद सामने आई है. गौरतलब है कि रूसी तेल का भारत अकेला खरीदार नहीं है, बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी वाला चीन लंबे समय से रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है. हालांकि, भारत की बात करें, तो यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बढ़ाई गई और ये तेजी से बढ़ी है.  अमेरिकी टैरिफ के बाद बढ़ी तेल खरीद अमेरिका के 50% टैरिफ के बावजूद भारत ने अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस के साथ संबंध मजबूत बनाए हुए हैं और इसका नजारा दुनिया ने एससीओ की बैठक के दौरान देखा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का एक्स्ट्रा टैरिफ लागू होने के बाद यानी 27 अगस्त से 1 सितंबर के बीच भारत में सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरियों ने 11.4 मिलियन बैरल रूसी तेल का आयात किया है. वहीं ऐसा अनुमान भी जताया जा रहा है कि रूस से ऑफर की जा रही छूट के चलते अगले महीने भारत में रूसी तेल के आयात में 10-20% या 1,50,000 से 3,00,000 बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त वृद्धि देखने को मिल सकती है.  रूसी तेल से भारत को अरबों की बचत अमेरिका ने भारत पर तमाम आरोप लगाते हुए टैरिफ को डबल किया है, तो वहीं भारत सरकार की ओर से लगातार साफ किया गया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. बीते दिनों विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था कि रूस के साथ भारत का ऑयल ट्रेड तेल की वैश्विक कीमतों को स्थिर रखता है. भारत ने जोर देकर अमेरिकी आरोपों के खिलाफ अपना पक्ष रखा है और दो टूक कहा है कि उसका तेल व्यापार किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता और प्रतिबंधों में कच्चे तेल का आयात शामिल नहीं है.  अगर फायदे की बात करें, तो साल 2022 से भारत का रूसी तेल का आयात 1 फीसदी से बढ़कर करीब 40 फीसदी पर पहुंच चुका है. कई एनालिसिस से स्पष्ट हुआ है कि किफायती रूसी तेल की वजह से भारतीय रिफाइनरियों को अप्रैल 2022 और जून 2025 के बीच कम से कम 17 अरब डॉलर की बचत हुई है. बीते दिनों रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने एक इंटरव्यू में अमेरिकी टैरिफ को अनुचित करार देते हुए कहा था कि भारत की प्राथमिकता अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है, तेल का व्यापार व्यावसायिक आधार पर होता है और अगर सौदा सही है, तो भारतीय कंपनियां सबसे अच्छे विकल्प से तेल खरीदेंगी.'

मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित

मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर उल्लेखनीय कार्य के लिये नई दिल्ली में होंगे सम्मानित मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा सम्मान भोपाल प्रदेश के 2 शिक्षकों को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जायेगा। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों में दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। आगर-मालवा जिले के भेरूलाल ओसारा माध्यमिक शिक्षक शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला खेरिया सुसनेर में पदस्थ हैं। प्रदेश के समस्त 55 जिलों में से 45 जिलों में 145 शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिये अपना पंजीयन कराया गया था। इसके बाद राज्य स्तरीय चयन समिति ने 6 शिक्षकों की अनुशंसा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को भेजी थी। इस प्रक्रिया के बाद प्रदेश के 2 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये हुआ है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिये सम्मानित होने वाले शिक्षक प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिये भी प्रेरणा का कार्य करेंगे। शीला पटेल प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल ने अपनी शाला में बच्चों को खेल-खेल में आनंदमयी शिक्षा दी है। उन्होंने गीत, कविता, कहानी और अभिनय के माध्यम से फाउण्डेशन लिटरेसी मिशन (एफएलएन) का क्रियान्वयन किया है। इसी के साथ उन्होंने अवकाश के दिनों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये विशेष कक्षाओं का संचालन किया। श्रीमती शीला पटेल ने अवकाश के दिनों में समर कैम्प एवं विंटर कैम्प का आयोजन किया। उन्होंने अपनी पदस्थापना के शाला के गाँव की हर गली व मोहल्लों में जगह-जगह पर बच्चों को सिखाने के उद्देश्य से शैक्षिक पटल व लर्निंग प्लेस तैयार करवाया। शिक्षिका श्रीमती पटेल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये शून्य लागत पर टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार किया। बच्चों में समझ को बढ़ावा देने के लिये समूह में आपस में चर्चा और उनकी सहभागिता को बढ़ाने का काम प्रमुख रूप से किया। प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा ने अपनी पदस्थ शाला में विषय-वस्तु की गहन समझ के साथ शिक्षण कार्य किया और बच्चों में नैतिकता और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया। विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिये ईको क्लब और क्लैप क्लब के संयोजन से ठोस कार्य किया। बच्चों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधरोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और हरित जीवन-शैली के बारे में नवाचार करते हुए शिक्षा दी। शिक्षक भेरूलाल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता के साथ लेखन की वर्कशॉप भी निरंतर आयोजित की। उन्होंने डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए विद्यार्थियों में ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिये महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को साइबर अपराध के खतरों, सोशल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग, पासवर्ड की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उनके इस कार्य से आसपास के अनेक शिक्षकों ने भी प्रेरणा ली है।  

टाइगर सफारी के बाद अब चीता सफारी का रोमांच, कूनो में करें बुकिंग

भोपाल   टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश अब चीता स्टेट भी बन गया है. मध्यप्रदेश में अब पर्यटक खुले जंगलों में चीता सफारी का मजा ले सकेंगे. दरअसल, मध्यप्रदश के कूनो नेशनल पार्क में रोमांचक चीता सफारी शुरू होने जा रही है. इसमें पर्यटक खुली जीप में बैठकर कूनो के खुले जंगल में घूम रहे चीतों को देख सकेंगे. कूनो में हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. कूनो में चीता सफारी 1 अक्टूबर के बाद कूनो पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए कूनो सफारी यादगार बनाने के लिए पर्यटन विभाग 5 अक्टूबर से कूनो नेशनल पार्क के पास कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल और 12 सितंबर से गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्रीट शुरू करने जा रहा है. इसमें पर्यटकों के लिए टेंट सिटी, एडवेंचर गेम्स जैसी की सुविधाएं मिलेंगी. खुली जीप में बैठकर नजदीक से देखें चीते मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कूनो को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं. 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. इसके बाद 18 फरवरी 2023 के 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से भारत आए थे. अब कूनो नेशनल पार्क में पर्यटक खुले जंगल में चीतों का दीदार कर सकेंगे. चीतों के दीदार के साथ प्राकृतिक सुंदरता का मजा ले सकेंगे टूरिस्ट  पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया, '' कूनो में चीतों के दीदार होने की उम्मीद अब बहुत ज्यादा है. चीतों की संख्या भी अब बढ़ गई है. कूनो के हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. टूरिज्म जोन इस बार ओपन रहेगा. इस बार जो भी कूनो जाएंगे वह चीता देख पाएंगे. भारत में चीता देखना अपने आप में सपने जैसा है, जो अब संभव हो सकेगा.'' कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 30 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हालांकि, पिछले तीन सालों के दौरान कई बार कूनो से दुखद खबरें भी आईं, लेकिन अब कूनो में चीतों के कुनबे में संख्या 30 पहुंच गई है. कूनो नेशनल पार्क में 9 वयस्क सहित कुल 26 चीते मौजूद हैं. 9 वयस्क चीतों में 6 मादा और 3 नर हैं. खासबात यह है कि इनमें 17 भारत में ही जन्मे शावक हैं और खुले जंगल में घूम रहे हैं. कूनो में पर्यटन बढ़ाने पर वन विभाग व पर्यटन विभाग का जोर कूनो में 16 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं. बाकी दो मादा चीता वीरा और नीरवा अपने नन्हें शावकों के साथ हैं, जबकि बाकी दो नर चीतों को गांधी सागर में शिफ्ट किया गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कुल 30 चीता मौजूद हैं. कूनो और गांधी सागर में कर रहे डेवलपमेंट अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया, '' चीता आने के पहले कूनो टूरिज्म के मैप पर नहीं था, लेकिन अब कूनो टूरिज्म साइट के मैप पर प्रमुखता से आ गया है. इसी उद्देश्य के लिए कूनो और गांधीसागर साइट को डेवलप किया गया है. दूसरे प्रदेश जो नहीं कर पा रहे, वह मध्यप्रदेश कर रहा है. दूसरे राज्यों में उनके प्रचलित स्थान है, जहां लगातार पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है, जबकि मध्यप्रदेश में नए 50 स्थानों को टूरिज्म के लिए डेवलप किया जा रहा है.'' अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश का पर्यटन में विविधता बढ़ रही है और पर्यटक अलग-अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं. कूनो और बांधवगढ़ भी तेजी से पर्यटन स्थल के रूप में अपना स्थान तेजी से बना रहे हैं.  

बस एक दिन का इंतजार… GST छूट से TV-AC समेत 175 सामान होंगे सस्ते

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक  शुरू हो चुकी है और कल इस बैठक के तहत लिए गए फैसले का ऐलान होगा, जिसका ब्रेसब्री से इंतजार कंपनियों से लेकर आम आदमी तक को है. क्‍योंकि 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से एक बड़ा ऐलान करते हुए दिवाली पर नए GST रिफॉर्म लाने की बात कही थी. इस ऐलान के बाद जीएसटी परिषद (GST Council) की यह पहली बैठक है.  जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में कई बड़े ऐलान हो सकते हैं. साथ ही दिवाली पर लागू होने वाले नए GST Reform के तहत दो टैक्‍स स्‍लैब और आम आदमी से जुड़ी चीजें सस्‍ती करने पर मुहर लग सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि दो दिन चलने वाले इस बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्‍मीद है, जिसमें डेली यूज के साथ-साथ महंगी वस्‍तुएं भी सस्‍ती होंगी.  2 स्‍लैब करने पर होगी चर्चा  केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब हो सकते हैं. इसमें 28 प्रतिशत वाले स्लैब में आने वाली सभी वस्तुएं, हानिकारक वस्तुओं को छोड़कर, 18 प्रतिशत वाले स्लैब में शामिल हो सकती हैं और 12 प्रतिशत वाले स्लैब की वस्‍तुएं 5 प्रतिशत वाले स्लैब में आ सकती हैं. 40 प्रतिशत का एक और स्लैब होगा, जो 6-7 वस्तुओं पर लगाया जाएगा, जिनमें से ज्‍यादातर हानिकारक और लग्‍जरी वस्‍तुएं होंगी. भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। बुधवार, 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 56वीं बैठक चल रही है। इस बैठक में 175 से ज्यादा सामानों और सेवाओं पर GST दरें घटाने का प्रस्ताव चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) रखने का प्लान है। वहीं, लक्ज़री आइटम्स और ‘सिन गुड्स’ पर 40% का अलग टैक्स स्लैब भी लाने पर विचार हो रहा है। 12-28% स्‍लैब में आने वाली कुछ खास वस्‍तुएं     घी     मक्खन     चीज     पैक्ड फ्रोजन सब्जि‍यां     फ्रूट जूस (अधिकतर, नॉन-एरेटेड)     छाता      सोलर वॉटर हीटर     कृषि उपकरण      एयर कंडीशनर     सीमेंट      कार/एसयूवी हेल्‍थ और इंश्‍योरेंस को जीएसटी से छूट  मंत्रियों के समूहों का प्रस्‍ताव है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को जीएसटी दायरे से अलग रखना चाहिए. यानी इसपर टैक्‍स नहीं लगाया जाना चाहिए. हालांकि इससे राजस्‍व में गिरावट आएगी. तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार, व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर पूरी छूट से अनुमानित रूप से सालाना 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.  क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव?     5% GST स्लैब में आएंगे: टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, रेडी-टू-ईट फूड्स, बटर, चीज़, स्नैक्स और आम कपड़े-खाद्य उत्पाद।     18% GST स्लैब में: टीवी, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सीमेंट और ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट (पहले 28% टैक्स लगता था)।     40% टैक्स स्लैब: लक्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइकें, तंबाकू और प्रीमियम प्रोडक्ट्स। ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर     छोटी कारें और हाइब्रिड गाड़ियां (1200cc तक) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है।     ₹20-40 लाख तक की महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स 5% से बढ़कर 18% हो सकता है।     दोपहिया वाहनों पर राहत: इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक 28% से घटकर 18% GST की उम्मीद।     350cc से ऊपर की बाइक (जैसे रॉयल एनफील्ड) पर 40% टैक्स का प्रपोजल, कंपनियों को झटका लग सकता है। ️ आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?     रोजमर्रा की चीज़ें जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और खाने का सामान सस्ता होगा।     टीवी, AC, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमत घट सकती है।     टू-व्हीलर्स और कई कारें सस्ती होंगी।     लक्ज़री प्रोडक्ट्स और प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें महंगी हो जाएंगी। क्यों हो रहे हैं GST रिफॉर्म्स? प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से कहा था कि भारत को नए GST ढांचे की जरूरत है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% इंपोर्ट ड्यूटी लगाने के बाद यह कदम उपभोक्ताओं की जेब को राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उठाया जा रहा है।     SBI रिसर्च का अनुमान: GST सुधारों से अगले 1 साल में GDP में 0.60% की बढ़त हो सकती है।     खुदरा महंगाई में भी 20-25 बेसिस पॉइंट की गिरावट की उम्मीद। सरकार को कितना होगा नुकसान?     टैक्स कटौती और स्लैब घटाने से सरकार को सालाना ₹60,000 करोड़ से ₹1.7 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।     सरकार इसे GST कम्पनसेशन सेस फंड (₹45,581 करोड़ सरप्लस) और सिन गुड्स पर 40% टैक्स से भरने की योजना बना रही है।     कम टैक्स से खपत बढ़ने की उम्मीद, जिससे लंबी अवधि में राजस्व फिर बढ़ सकता है। ️ राज्यों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच राज्यों को GST कटौती से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए नया कंपनसेशन मैकेनिज्म बनाने पर भी चर्चा हो रही है।