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सावधान! पीरियड्स डिले करने की दवा बन सकती है जानलेवा, डॉक्टर ने बताई सच्चाई

नई दिल्ली हमारे आसपास ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो किसी कारण से कभी-कभी पीरियड्स रोकने वाली दवाओं का सेवन करती हैं ताकि किसी खास दिन या मौके पर उन्हें पीरियड्स ना हों. कई बार इन दवाओं का सेवन महिलाएं डॉक्टर से पूछे बिना ही कर लेती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीरियड्स रोकने वाली गोलियों का सेवन करना खतरनाक साबित भी हो सकता है. एक पॉडकास्ट में वैस्कुलर सर्जन डॉ. विवेकानंद ने अपने एक केस के बारे में बताते हुए कहा, 'कुछ समय पहले मेरे हॉस्पिटल में एक 18 साल की इंजीनियरिंग की छात्रा आई थी. उसे पैर और जांघ में काफी ज्यादा दर्द हो रहा था. रूटीन चेकअप के दौरान लड़की ने बताया कि वह 3 दिनों से पीरियड्स रोकने वाली दवा का सेवन कर रही थी क्योंकि उसके घर में पूजा थी.' 'चेकअप के दौरान उसके घरवालों को बुलाया और उन्हें बताया कि लड़की को डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या है और उसे अस्पताल में एडमिट करना होगा. लड़की के पेरेंट्स ने उसे एडमिट करने के लिए मना कर दिया और देर रात डॉक्टर के पास अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड से फोन आया कि उस लड़की को अस्पताल में लाया गया है और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है. लेकिन कुछ मिनटों के बाद ही उसकी मौत हो गई.' ये उनके लिए काफी मुश्किल मामला था. अब ऐसे में हर लड़की या महिला को बिना प्रिस्काइब के पीरियड्स रोकने वाली गोलियां नहीं खानी चाहिए. आज हम आपको बता रहे हैं कि पीरियड्स की दवाओं का सेवन महिलाओं को क्यों नहीं करना चाहिए, डीप वेन थ्रोम्बोसिस क्या है और इसके कारण और लक्षण क्या हैं? पीरियड्स रोकने वाली दवा से किन महिलाओं को खतरा? इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम सूरी का कहना है कि आजकल कई महिलाएं हार्मोनल पिल्स का इस्तेमाल पीरियड देरी करने या मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याओं के लिए करती हैं. ये पिल्स शरीर में हार्मोन्स का स्तर बदलकर काम करती हैं, जिससे पीरियड में बदलाव आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हार्मोनल पिल्स लेने से खून गाढ़ा हो सकता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है. खून का गाढ़ा होना यानी ब्लड थिकनेस बढ़ जाना, खासकर उन लोगों में जो पहले से ही ब्लड क्लॉटिंग (थ्रोम्बोसिस) की समस्या से ग्रस्त होते हैं, खतरनाक साबित हो सकता है. जब खून गाढ़ा होता है तो ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) में थ्रोम्बस बन सकते हैं. ये थ्रोम्बस ब्लड के सामान्य प्रवाह को रोक देते हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है. यदि ये थ्रोम्बस टूटकर कहीं और चले जाएं, तो वे फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में अटक सकते हैं. इसे पल्मनरी एम्बोलिज्म कहते हैं, जो अचानक दिल की धड़कन रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) या मृत्यु का कारण बन सकता है. इसलिए हार्मोनल पिल्स कभी भी खुद से या बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए. डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, रिस्क फैक्टर्स और आपकी सेहत का पूरा मूल्यांकन करके ही सही दवा और मात्रा तय करते हैं. सही दवा और सही डोज़ ही आपकी सेहत के लिए सेफ होती है. जो लोग सीधे केमिस्ट से पिल्स ले लेते हैं या बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी मेडिकेशन शुरू कर देते हैं, उनमें ऐसे खतरनाक कॉम्प्लिकेशंस होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें, और हार्मोनल पिल्स जैसी दवाइयों का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टरी सलाह के बाद करें. क्या होता है डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT)? डीप वेन थ्रोम्बोसिस का सामना तब करना पड़ता है जब हमारे  शरीर के अंदर मौजूद नसों में ब्लड क्लॉटिंग या खून के थक्के बनने लगते हैं. ऐसा तब होता है जब या तो आपको चोट लगी हो या आपकी नसों में बहने वाला खून काफी ज्यादा गाढ़ा हो. ये खून के थक्के खून के प्रवाह को रोक सकते हैं. आमतौर पर, डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या का सामना पैर के निचले हिस्से, जांघ या पेल्विस में करना पड़ता है, लेकिन ये समस्या शरीर के बाकी अंगों में भी हो सकती है. इसमें हाथ, ब्रेन, आंतें, किडनी और लिवर भी शामिल हैं. डीप वेन थ्रोम्बोसिस के लक्षण और कारण क्या हैं? यह समस्या आमतौर पर आपके पैरों या हाथों की नसों में होता है. DVT एक गंभीर स्थिति है, जिसके कारण खून का थक्का नस को बंद कर सकता है, जिससे खून का फ्लो रुक जाता है. कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि अन्य बार ये लक्षण अचानक और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. आइए जानते हैं डीप वेन थ्रोम्बोसिस केलक्षण क्या होते हैं- सबसे आम लक्षण पैरों या हाथों की सूजन है, जो कभी-कभी अचानक शुरू हो सकती है. इस सूजन वाले हिस्से में दर्द या टेंडरनेस भी महसूस हो सकती है, खासकर जब आप खड़े होते हैं या चल रहे होते हैं. सूजन वाली जगह का रंग लाल या भूरा हो सकता है, और वहां की स्किन नार्मल से गर्म लग सकती है. दबी हुई नसें भी थोड़ी सूजी हुई  दिख सकती हैं. कुछ मामलों में, जब क्लॉटिंग पेट की गहराई में मौजूद नसों पर असर डालती है, तो पेट या कमर में दर्द हो सकता है. अगर खून का थक्का दिमाग की नसों में बनता है, तो अचानक तेज सिरदर्द, दौरे या झटके जैसे लक्षण हो सकते हैं. कई लोगों को इसके लक्षण नहीं भी दिख सकते. पर कभी-कभी थक्का पैर या हाथ से निकलकर फेफड़ों में चला जाता है, जिससे फेफड़ों में ब्लॉकेज हो सकती है. इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) कहा जाता है. PE के लक्षणों में छाती में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खून के साथ खांसी, चक्कर आना या बेहोशी शामिल हैं. डीप वेन थ्रोम्बोसिस का क्या कारण है? ये स्थितियां डीप वेन थ्रोम्बोसिस के खतरे को बढ़ा सकती हैं:     वंशानुगत (आनुवांशिक) स्थिति होने से खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है.     कैंसर और कीमोथेरेपी होना.     अगर आपको या आपके परिवार में डीप वेन थ्रोम्बोसिस की हिस्ट्री रही हो.     चोट, सर्जरी  के कारण नसों में ब्लड का फ्लो सीमित होना.   … Read more

त्योहारों की भीड़: 3 दिन में ट्रेनें फुल, रेलवे का बड़ा ऐलान,12 हजार स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी में

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से त्योहारों पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। 21 अगस्त को जब 20 अक्टूबर (दीपावली) की बुकिंग खुली, तो सिर्फ तीन दिनों में ही उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें फुल हो गईं। हालात ये हैं कि कई ट्रेनों में अब वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रही। ऐसे में यात्रियों के पास अब केवल तत्काल टिकट या फिर रेलवे की ओर से चलाई जाने वाली स्पेशल ट्रेनें ही विकल्प बची हैं।रेलवे का कहना है कि दीपावली (20 अक्टूबर) और छठ पूजा (26 अक्टूबर) के मौके पर पूरे देश में 12 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।उम्मीद है कि चंडीगढ़ से भी 2-3 स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए मिलेंगी। हालांकि, अंबाला मंडल की तरफ से अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। तत्काल टिकट ही आखिरी सहारा त्योहार सीजन में यात्रियों को तत्काल टिकट पाने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोगों को रिजर्वेशन सेंटर पर पूरी रात कतारों में गुजारनी पड़ती है, इसके बावजूद टिकट हाथ नहीं लगती। कई बार लोग तत्काल टिकट पाने के लिए दो-तीन दिन तक रेलवे स्टेशन पर डेरा डालते हैं।अभी हालात यह हैं कि सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में सीटें मिलना लगभग नामुमकिन है और यात्री केवल तत्काल या फिर स्पेशल ट्रेनों का ही इंतजार कर रहे हैं। नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई इसके तहत यात्री यदि 13 से 26 अक्टूबर के बीच आगे की यात्रा करेंगे और 17 नवंबर से एक दिसंबर के बीच वापसी करेंगे तो रिटर्न टिकट पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। त्योहारों के दौरान बिहार लौटने वाले प्रवासी यात्रियों के लिए यह योजना काफी उपयोगी होगी। बिहार को ध्यान में रखते हुए कई नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई। गयाजी से दिल्ली, सहरसा से अमृतसर, छपरा से दिल्ली और मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के बीच चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जाएंगी। धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी इसके अलावा, भगवान बुद्ध से जुड़े धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, राजगीर, नालंदा, गया और कोडरमा तक जाएगी।सीमांचल क्षेत्र को राजधानी से जोड़ने के लिए पूर्णिया से पटना के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत होगी। साथ ही बक्सर-लखीसराय रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी ताकि ट्रेनों का संचालन सुगम हो। पटना के चारों ओर रिंग रेलवे बनाया जाएगा, जबकि सुल्तानगंज को देवघर से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण होगा। लौकहा में नया वॉशिंग पिट बनेगा और बिहार में कई नए रोड ओवरब्रिज और अंडरपास तैयार किए जाएंगे।रेल मंत्री ने यह भी बताया कि पटना से अयोध्या के लिए भी नई ट्रेन शुरू की जाएगी, जिससे धार्मिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी। रेल मंत्री के साथ मौजूद बिहार के सभी नेताओं ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से न केवल बिहारवासियों की यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। रेलवे का दावा है कि इस बार त्योहारों के मौसम में यात्रियों को बिना भीड़ और परेशानी के सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव होगा।  

MP में विधायकों की तनख्वाह बढ़ सकती है 45% तक, विधानसभा में गूंजा प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर विधायकों की सैलरी बढ़ने के मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी 45 फीसदी बढ़ती है तो उन्हें मिलने वाली सैलरी 1 लाख से ज्यादा हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान से ज्यादा मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी हो जाएगी. जानकारी के मुताबिक सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भेजा गया है. इतना ही नहीं पूर्व विधायकों के पेंशन में भी इजाफा करने की मांग की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से भी यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा गया है. अब 3 सदस्यीय समिति इस मुद्दे पर फैसला करेगी. इस समिति के अध्यक्ष एमपी के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा हैं. इस समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि उनका चयन जल्द ही सरकार की तरफ से किया जाएगा. लंबे समय से चल रही मांग काफी लंबे वक्त से मध्य प्रदेश के विधायकों की तरफ से वेतन, भत्ते और विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी. इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है. इसकी अध्यक्षता रीवा की गुढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह कर रहे हैं. समिति ने सभी पक्षों पर चर्चा कर वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी थी.  

एमपी में वंदे भारत एक्सप्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, भोपाल रेल मंडल ने लिया अहम निर्णय

भोपाल एमपी में चल रहीं वंदेभारत एक्सप्रेस में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की पहली वंदेभारत भोपाल निजामुद्दीन और बाद में चलनेवाली इंदौर नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ऑक्यूपेंसी बेहतर होती जा रही है। रेलवे बोर्ड द्वारा वंदे भारत के संबंध में जोन और मंडलों से बुलाई गई रिपोर्ट के अनुसार भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में तो सीटों की जबर्दस्त कमी पड़ रही है। इसकी ऑक्यूपेंसी और पैसेंजर डिमांड को देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने बड़ा फैसला लिया है। मंडल ने भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मांगी गई है। एमपी की राजधानी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़नेवाली रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेन नंबर 20171 रानी कमलापति-निजामुद्दीन की ऑक्यूपेंसी जहां 94 प्रतिशत है वहीं ट्रेन नंबर 20172 निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत 112 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी से चल रही है। ट्रेन में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाए जा रहे हैं। इससे रेल यात्रियों को खासी राहत मिल सकेगी। भोपाल रेल मंडल ने रेलवे बोर्ड को वंदे भारत ट्रेन में 4 कोच बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। मंडल अधिकारियों के अनुसार बोर्ड से इसकी जल्द मंजूरी मिल सकती है। रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस अभी 16 कोच की ट्रेन है। इसमें 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच और 14 एसी चेयर कार कोच हैं। इस प्रकार कुल 1128 सीटें हैं। 4 कोच बढ़ाने पर रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत में 432 सीटें बढ़ जाएंगी। 20 कोच से रोज 1560 यात्री कर सकेंगे सफर भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने से इसमें रोज 1560 यात्री सफर कर सकेंगे। नया प्रस्ताव मंजूर होने पर ट्रेन में 2 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बढ़ जाएंगे। इस प्रकार रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 4 एग्जीक्यूटिव क्लास और 16 चेयर कार कोच हो जाएंगे। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड से जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव विद्युत कंपनियों के 1060 कर्मचारियों को देंगे नियुक्ति-पत्र मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर विद्युत कंपनियों में नई नियुक्तियाँ: सीएम डॉ. यादव बांटेंगे 1060 नियुक्ति-पत्र ऊर्जा मंत्री ने 26 अगस्त के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन भोपाल में विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में बिजली कंपनियों के लिए नवीन संगठनात्मक संरचना के तहत 51 हजार 711 नये स्थाई पदों की स्वीकृति के लिये मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया जायेगा। ऊर्जा विभाग की विभिन्न बिजली कंपनियों में रिक्त पदों की परीक्षा के बाद कर्मचारियों का चयन किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को मंत्रालय में 26 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संकल्प-पत्र के आधार पर विभिन्न पदों पर एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भर्ती की गई है। चयनित पदों में बिजली इंजीनिय़र, सिविल इंजीनियर, लेखाधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक विधि अधिकारी, लाइन अटैंड़ेंट, सिक्य़ोरिटी ऑफिसर, पॉवर प्लांट  फार्मासिस्ट, केमिस्ट, एएनएम, ट्रेसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टैक्निशियन, पब्लिसिटी ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर आदि पद शामिल हैं। भोपाल में होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी कर्मचारी हितों और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर चर्चा भी की जाएगी। बैठक में एम.डी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी अविनाश लवानिया और एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

2005-06 के बाद फिर कहर! WHO ने चेताया, दुनियाभर में फैल रहा चिकनगुनिया

भोपाल   करीब 20 साल बाद एक बार फिर चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता दिख रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर अलर्ट जारी किया है. चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह अब तक 119 देशों में पाई जा चुकी है, जिससे करीब 5.6 अरब लोग जोखिम में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 साल पहले वाले वायरस में जो म्यूटेशन देखे गए थे, वही फिर से सामने आए हैं. भारत जैसे देशों में, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां पहले से मौजूद हैं, वहां इसका खतरा और बढ़ जाता है. राजधानी की बात करें तो बीते साल अगस्त के अंत तक चिकनगुनिया के 40 मरीज मिले थे। इस साल अब तक 58 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाले मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सभी को बुखार, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायत है, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती। हमीदिया, जेपी और एम्स में एक अगस्त से अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। इसमें से 700 से ज्यादा मरीजों की जांच भी हो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बार मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत जोड़ों में दर्द की है। मरीज बताते हैं कि लगता है जैसे हड्डियां आपस में टकरा रही हों। टेस्ट रिपोर्ट 10 दिन तक पॉजिटिव नहीं आ रही, जिससे पहचान में देरी हो रही है। मरीजों के लिए यह सिर्फ बुखार नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला जोड़ों का कहर है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए यह और खतरनाक है। चिकनगुनिया के लक्षण जीएमसी के एमडी मेडिसिन डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि इस बीमारी का वायरस शरीर में आने के 4 से 7 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तीव्र दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और नसों में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पूरे शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों में सूजन और दर्द, डेंगू जैसे लक्षण होने की वजह से कई बार मरीज सही समय पर पहचान नहीं कर पाते। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन गंभीर मरीजों (अस्पताल में भर्ती) के लिए: आईवी हाइड्रेशन (ड्रिप) का प्रयोग करें। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबिन थेरेपी से बचें। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन सिर्फ तब करें जब ब्लीडिंग हो। येलो फीवर से लिवर फेलियर होने पर आईवी एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग। मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबिन और सोफोसबुविर जैसी दवाएं सिर्फ रिसर्च में। सामान्य या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए: डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ओआरएस और तरल पदार्थ दें। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल। स्टेरॉइड से बचें। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, कॉइल और स्प्रे का उपयोग करें। दरवाजों-खिड़कियों पर नेट लगाएं। भारत में कितना खतरा? पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ समीर भाटी बताते हैं कि भारत में मॉनसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम हैं और यही चिकनगुनिया के फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. हालांकि यहां चिकनगुनिया का ज्यादा रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस बात सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ भाटी कहते हैं कि चिकनगुनिया कीबीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में एंटर कर जाता है और शरीर में तेजी से फैलता है. इसका असर शरीर की जोड़ों, मांसपेशियों और नसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी का सामना करना पड़ता है. चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? चिकनगुनिया के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आते हैं. इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिन होता है यानी वायरस के संक्रमण के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे विशेष लक्षणों में तेज बुखार, तीव्र जोड़ दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यह जोड़ दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि मरीज को हिलने-डुलने में कठिनाई होती है और यह हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं. आंखों में दर्द और सूजन भी सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे मरीज को सही पहचान करने में देर हो सकती है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर डालता है. डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ऐसी ही तीन खतरनाक बीमारियां हैं जिनका अभी तक कोई स्थायी इलाज या वैक्सीन नहीं है।  यही वजह है कि डॉक्टर सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहने की सलाह देते रहते हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये जानलेवा रूप ले सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली तमाम बीमारियां हर साल लोगों के परेशान करती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगता है जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। चिकनगुनिया महीनों तक जोड़ों में दर्द देता रहता है वहीं जीका वायरस गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आजीवन खतरा बन सकता है। यानी ये सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का कारण भी हैं। डेंगू का खतरा डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलती है। दुनियाभर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू का शिकार होते हैं। भारत में मानसून के दिनों में और बरसात के बाद यह सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू के कारण रोगियों को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे और मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम का भी कारण बन सकता है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है जो शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती है।  डेंगू का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है। इसके उपचार में केवल … Read more

Petrol के बाद Diesel में बदलाव: Isobutanol ब्लेंडिंग से क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली  बीते कुछ हफ्तों से देश भर में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E20 Petrol) की खूब चर्चा हो रही है. पेट्रोल के आयात और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिक्स करना शुरू किया, जो इस समय देश के कई फ्यूल स्टेशन पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. जिसके बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी आने की शिकायत की. अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की तैयारी कर रही है.  हाल ही में पुणे में प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. मैं विशेष रूप से प्राज इंडस्ट्री और ARAI को धन्यवाद दूंगा कि, उन्होनें एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू किया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है. आइसोब्यूटेनॉल वैकल्पिक जैव ईंधन है."  नितिन गडकरी ने आगे कहा कि, "आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. हमारे देश में पेट्रोल के तुलना में डीजल का प्रयोग ढाई से तीन गुना ज्यादा होता है. प्रदूषण की मुख्य समस्या पेट्रोल और डीजल के कारण ज्यादा है. आने वाले समय में आइसोब्यूटेनॉल हमारे देश के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. रिसर्च, ट्रायल और स्टैंडर्ड निश्चित होने के बाद जब इसका प्रस्ताव पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को जाएगा और मंत्रालय से इसको मान्यता मिलेगी तब इसका मार्केट और भी बढ़ेगा."  क्या है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल मूल रूप से एल्केनॉल (अल्कोहल) ग्रुप से आने वाला एक कलरलेस, फ्लेमेबल ऑर्गेनिक लिक्विड है. इसका केमिकल फार्मूला (C₄H₁₀O) है. ये व्यापक रूप से पेंट और कोटिंग्स के लिए सॉलवेंट यानी विलायक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अपने हाई एनर्जी डेंसिटी और ऑक्टेन रेटिंग के कारण फ्यूल ऐडिटिव्स के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है. इसे प्रोपिलीन कार्बोनिलीकरण के माध्यम से पेट्रोलियम या बायोमास जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है. डीज़ल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग फ्यूल ब्लेंडिंग: आइसोब्यूटेनॉल को डीज़ल के साथ मिक्स कर उपयोग किया जा सकता है. यह उत्सर्जन को कम करने और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. क्लीन बर्निंग फ्यूल: इसमें सल्फर और अन्य हानिकारक तत्व कम होने के कारण डीज़ल इंजन में स्वच्छ दहन (Clean Combustion) होता है. ग्रीनहाउस गैस में कमी: आइसोब्यूटेनॉल फ्यूल से CO₂ और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है. इंजन कम्पैटिबिलिटी: शोध से पता चला है कि डीज़ल इंजनों में आइसोब्यूटेनॉल-डीज़ल मिश्रण बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. बेहतर प्रदर्शन: इससे इंजन परफॉर्मेंस बनी रहती है और ईंधन की खपत भी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि अभी डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्स्चर पर शोध जारी है. लेकिन माना जा रहा है कि, भविष्य में आने वाले नए डीजल इंजन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के ही सिद्धांत पर काम करेंगे. जो संभवतः पूरी तरह से आइसोब्यूटेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे. क्या कहते हैं अब तक हुए शोध? सोसायटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (SAE) की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 4-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर डीज़ल इंजन में 5% और 10% वॉल्यूम आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी (BTE) में वृद्धि देखी गई है. ब्रेक स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (BSFC) में सुधार हुआ है, यानी ईंधन की खपत प्रति यूनिट ऊर्जा कम हुई. कार्बन उत्सर्जन और धुएँ की तीव्रता (Smoke Opacity) में काफी कमी आई है, जबकि NOₓ उत्सर्जन में मामूली कमी देखने को मिली है. बहरहाल, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल को मिलाने को लेकर शोध अभी चल रही है. जैसा कि नितिन गडकरी ने भी बताया कि, इससे जुड़ी एजेंसियां इस पर प्रयोग कर रही हैं. यानी अभी इस डीजल ब्लेंडिंग पर अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगेगा. अभी इस बात की भी जानकारी नहीं मिली है कि, सरकार डीजल में इसका प्रयोग कब शुरू करेगी. अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और रिसर्च/प्रयोग में सफलता मिलने के बाद इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहां से इसे आखिरी मंजूरी मिलेगी.  भारत में डीजल की खपत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत की कुल कच्चे तेल की खपत में डीज़ल का योगदान लगभग 40% है. 2024-25 में डीज़ल की खपत 2% बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो जाएगी. पीपीएसी ने 2025-26 के लिए डीज़ल के उपयोग में 3% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 94.1 मिलियन टन हो जाएगा.

महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."

और सिंधिया होंगे मौजूद रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में, 29 अगस्त से दो दिन तक आयोजन

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में 29 एवं 30 अगस्त को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी की विशेष उपस्थिति होंगी। राज्यमंत्री लोधी ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ–साथ पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। ग्वालियर के पर्यटन श्रेत्र में निवेश को नया आयाम मिलेगा। 'टाइमलेस ग्वालियर: इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ लेगेसी' थीम पर आधारित ये कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।   प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्रदान किए जाएंगे, एमओयू एवं अनुबंध होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार प्राप्त होगा और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व के साथ बल मिलेगा। क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण घाेषणाएं होंगी। विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडीक्रॉफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे।  प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज्म इज अ कल्चरल ब्रिज– ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ एमपी” विषय पर पैनल डिस्कशन होगा। इसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन 'ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग– इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्जरी एंड एक्सपीरियंस' विषय पर केंद्रित होगा, इसमें विरासत, लग्जरी स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा।  

महू में होगा रण संवाद 2025, सेनाओं में नवाचार और रणनीति पर चर्चा

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार देश की तीनों सेनाओं द्वारा युद्ध पद्धति में नवाचार और रणनीतिक विमर्श को लेकर राष्ट्रीय स्तर का रण संवाद 2025 आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को महू के सैन्य संस्थान में होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister in MP) 27 की शाम कोमध्यप्रदेश में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह भी उपस्थित रहेंगे। वहीं देशभर के अन्य सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। इसको लेकर महू शहर के आर्मी क्षेत्र की मुख्य माल रोड को भी बंद किया गया है। कार्यक्रम के तहत 25 से 27 अगस्त तक यह मार्ग पूर्णत: बंद रहेगा। वहीं ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई चौराहा होते हुए चाकू चौराहे से मंडलेश्वर की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। यह है कार्यक्रम देशभर में पहली बार ट्राय-सर्विस सेमिनार रणसंवाद का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत महू से हो रही है। इसमें विशेष रूप से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-लड़ाई पर तकनीक का प्रभाव विषय पर बातचीत होगी। जिसमें प्रतिष्ठित कमांडर, रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि विचार साझा करेंगे। इसमें युद्ध पद्धति में नवाचार व नई तकनीकों पर विचार विमर्श होगा। विचार विमर्श भविष्य के लिए सशस्त्र बल तैयार करने, युद्ध के अभ्यासियों के लिए अद्वितीय मंच उपलब्ध कराने, शिक्षा जगत और रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने को ध्यान में रखकर किया जाएगा। महू के यह मार्ग होंगे बंद आयोजन के तहत महू सेना द्वारा महू में तैयारियां की जा रही है। इसको लेकर महू यातायात पुलिस ने ट्रफिक प्लान भी बनाया है। ट्रैफिक सूबेदार विनोद यादव ने बताया कि 25, 26 और 27 को माल रोड को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इसमें आंबेडकर जन्मभूमि स्मारक के पास राम मंदिर होते हुए डीएसओएमआई तक जा रहे माल रोड पर जाना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। वहीं महू शहर के किशनगंज आरओबी से होते हुए ड्रीमलैंड तक जाने वाले भायाजी मार्ग से माल रोड पर जुड़ने वाले मार्ग भी बंद रहेंगे। इसमें गर्ल्स स्कूल चौपाटी से माल रोड जाने वाला मार्ग, भायाजी मार्ग से गेटवेल अस्पताल होते हुए माल रोड, मदर मेरी स्कूल से, भायाजी मार्ग से बत्तीवाला चौराहा मार्ग और गैरिसन ग्राउंड से माल रोड जुड़ने वाले मार्ग पर आवाजाही बंद रहेगी। इसके पूर्व 23 और 24 को सांकेतिक रूप से बंद किया है ताकि सभी को पता चल सके। यह होगा वैकल्पिक मार्ग इंदौर की ओर से किशनगंज आरओबी से आने वाले मार्ग गर्ल्स स्कूल चौपाटी से भायाजी मार्ग से होते हुए ड्रीमलैंड चौराहे पर जाएंगे। ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई होते हुए चाकूल चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। इससे महू से मंडलेश्वर व मानपुर की ओर जाने मार्ग पर जा सकेंगे। इसके लिए भायाजी मार्ग पर खड़े वाहनों को हटवाया जाएगा। ताकि यातायात सुगम रहे। 26-28 अगस्त तक महू नो फ्लाईंग जोन आयोजन के दौरान 26 से 28 अगस्त तक महू को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है। महू और आसपास के इलाके में कोई ड्रोन भी नहीं उड़ा सकेंगे। पहली बार तीनों सेनाओं का साझा मंच देश में पहली बार तीनों सेनाओं का संयुक्त सेमिनार (Three Armies of India Joint Seminar) हो रहा है। इसमें थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस संवाद में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध पर आधुनिक तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें सेनाओं के अफसर बल्कि रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी विचार साझा करेंगे।