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‘क्या मुझे खेलना बंद कर देना चाहिए?’ हरमनप्रीत कौर ने सवाल से पलट दिया माहौल

लंदन आईसीसी विमेंस टी20 विश्व कप 2026 के आगाज से पहले भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर सुर्खियों में आ गई हैं. लंदन में आयोजित 'कैप्टन्स कार्निवल' कार्यक्रम के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसकी शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी. हरमनप्रीत ने जिस अंदाज में जवाब दिया, उसने रिपोर्टर की बोलती बंद कर दी. 37 वर्षीय हरमनप्रीत कौर से जब पूछा गया कि क्या यह उनका आखिरी टी20 विश्व कप होगा, तो भारतीय कप्तान ने जवाब देने के बजाय ऐसा सवाल दागा कि माहौल ही बदल गया. उनका जवाब सुनकर कई लोगों को महेंद्र सिंह धोनी की याद आ गई, जो अपने करियर के दौरान ऐसे सवालों का जवाब बेहद चतुराई और सादगी से दिया करते थे. टी20 विश्व कप से पहले आयोजित कार्यक्रम में एक रिपोर्टर ने हरमनप्रीत कौर से पूछा, 'क्या यह आपका आखिरी टी20 विश्व कप होगा?' इस पर हरमनप्रीत कौर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'क्यों?' रिपोर्टर ने जवाब दिया, 'बस पूछ रहा था.' इसके बाद भारतीय कप्तान ने पलटकर पूछा, 'क्या आपको लगता है कि मुझे खेलना बंद कर देना चाहिए?' रिपोर्टर ने तुरंत कहा, 'बिल्कुल नहीं.' इस पर हरमनप्रीत कौर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'तो फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?' इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे और रिपोर्टर के पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा. हरमनप्रीत कौर का यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कई प्रशंसकों ने इसे 'धोनी स्टाइल रिप्लाई' बताया है. महेंद्र सिंह धोनी भी अपने करियर में रिटायरमेंट से जुड़े सवालों का जवाब अक्सर इसी अंदाज में देते थे- कम शब्द, लेकिन सीधा असर. हरमनप्रीत ने अपने जवाब से साफ कर दिया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान क्रिकेट पर है, न कि संन्यास पर. पिछले साल भारतीय महिला टीम ने हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में वनडे विश्व कप खिताब जीता था. इसके बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा करने के बाद संन्यास का ऐलान कर सकती हैं. लेकिन हरमनप्रीत ने तब भी साफ कर दिया था कि उनका क्रिकेट छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा था कि जब तक वह टीम के लिए योगदान दे सकती हैं, तब तक खेलती रहेंगी. 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाली हरमनप्रीत कौर आज भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं.  वह भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं और वनडे व टी20 दोनों फॉर्मेट में 4000 से अधिक रन बना चुकी हैं, उनकी कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं और वह आज भी टीम की सबसे अहम खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं. विमेंस टी20 विश्व कप 2026 में भारत अपने अभियान की शुरुआत 14 जून को चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ करेगा. भारतीय टीम को ग्रुप-ए में रखा गया है, जहां ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी टीमें मौजूद हैं.

गोकशी पर सख्त कानून की मांग, शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा- गाय के वध पर पूरी तरह लगे रोक

होशियारपुर. गाय को काटने की आयु सीमा नहीं तय होनी चाहिए। न ही उसके फिटनेस का मानक हो। गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। यह बात होशियारपुर में गोवर्धन मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कही। शंकराचार्य जी पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले को आड़े हाथ लिया, जिसमें गाय काटने की आयु चौदह वर्ष हो और उसकी फिटनेस भी हो। उन्होंने भाजपा को रडार पर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे और उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब मोदी गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की वकालत करते थे और मोदी पिछले ग्यारह साल से देश के प्रधानमंत्री हैं तो गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर फैसला नहीं ले पा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि सरकार में इच्छा शक्ति की कमी है। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौ माता का दर्जा देना चाहिए ताकि ऐसे फिजूल बातें करने वालों के मुंह बंद हो जाए। शंकराचार्य जी ने कहा कि गाय माता में देवी देवता का वास होता है। जब कोई मुसीबत पड़ती है तो देवी देवता गाय के रूप में अवतरित होते हैं। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा हिन्दू को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है कि कोई भी गरीबी से धर्म परिवर्तन न करे।

गर्मियों में भी जरूरी है मॉइश्चराइजर, स्किन रहेगी हाइड्रेटेड और फ्रेश

गर्मी का मौसम आते ही चेहरे पर पसीना, चिपचिपाहट और ड्राइनेस जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं. पसीने से होने वाली चिपचिपाहट के कारण कई लोगों को लगता है कि गर्मियों में मॉइश्चराइजर लगाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन सच इससे उलट है. दरअसल, तेज धूप और गर्म हवा स्किन की नमी छीन लेती है. ऐसे में गर्मियों में भी मॉइश्चराइजर लगाना बहुत जरूरी होता है. सही मॉइश्चराइजर स्किन को मुलायम और फ्रेश बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन अगर आप सोचते हैं कि जो मॉइश्चराइजर आपने सर्दियों में लगाया था, वही आप गर्मी में भी लगा सकते हैं तो आप गलत हैं. खास बात ये है कि गर्मियों में हल्के और नॉन-स्टिकी मॉइश्चराइजर ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. आज हम आपको ऐसे 4 तरह के मॉइश्चराइजर के बारे में बताएंगे जो गर्मी में आपकी स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं. जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर अगर आपकी स्किन ऑयली या कॉम्बिनेशन है, तो गर्मियों में आपके लिए जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. ये स्किन पर भारी महसूस नहीं होता और जल्दी एब्जॉर्ब हो जाता है. इससे चेहरा चिपचिपा नहीं लगता और स्किन को ठंडक भी मिलती है. एलोवेरा या हायल्यूरोनिक एसिड वाले जेल मॉइश्चराइजर गर्मियों में काफी पसंद किए जाते हैं. वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र गर्मी के मौसम में वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर स्किन को हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद करते हैं. ये स्किन में नमी बनाए रखते हैं लेकिन ऑयल नहीं बढ़ाते. जिन लोगों को पसीना ज्यादा आता है, उनके लिए ऐसे मॉइश्चराइजर काफी फायदेमंद हो सकते हैं. इन्हें लगाने के बाद चेहरा ज्यादा भारी भी नहीं लगता. विटामिन-ई वाला मॉइश्चराइजर धूप और गर्मी की वजह से स्किन अक्सर गर्मियों बेजान और रूखी दिखने लगती है. ऐसे में विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर स्किन को पोषण देने का काम करते हैं. ये स्किन को मुलायम रखने के साथ-साथ ड्राइनेस कम करने के लिए भी असरदार माने जाते हैं. अगर आपकी स्किन जल्दी फटने या छिलने लगती है, तो विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. SPF वाला मॉइश्चराइजर गर्मियों में ऐसा मॉइश्चराइजर चुनना ज्यादा बेहतर माना जाता है जिसमें SPF भी मौजूद हो. इससे स्किन को धूप की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद मिलती है. SPF वाला मॉइश्चराइजर लगाने से कई बार सनस्क्रीन लगाने की जरूरत भी कम हो जाती है. बाहर निकलने से पहले इसे लगाना फायदेमंद हो सकता है.

चाणक्य नीति: इंसान की फितरत और रिश्तों की सच्चाई पर कड़ा संदेश

 क्या तुमने कभी उस सांप को देखा है, जो दूध पीने के बाद भी डसना नहीं भूलता है? इंसान बिल्कुल वैसा ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि सांप का जहर उसके दांतों में होता है, और इंसान का जहर उसकी मुस्कुराहट में. तुम्हें लगता है कि तुम्हारे आसपास की भीड़ तुम्हारी ताकत है? लेकिन असल में यही भीड़ वो दीमक है जो तुम्हें अंदर से खोखला कर रही है. तुम जिसे अपना समझते हो, वो सिर्फ एक मुखौटा है. आज जो तुम्हारे लिए ताली बजा रहा है, वही कल तुम्हारी बर्बादी का जश्न मनाएगा. क्योंकि इस दुनिया में कोई किसी का नहीं होता है. हर कोई स्वार्थ का गुलाम है. आचार्य चाणक्य ने कहा था कि विश्वास एक ऐसी तलवार है, जिसका हैंडल दुश्मन के हाथ में होता है. तुमने विश्वास किया, मतलब तुमने खुद अपने अंत की इजाजत दे दी है. दोस्त देता है शत्रु से ज्यादा पीड़ा सोचा है, दुश्मन से ज्यादा दर्द दोस्त क्यों देता है? क्योंकि दुश्मन को तुम्हारे घर का रास्ता नहीं पता होता है, लेकिन दोस्त तुम्हारी हर कमजोरी जानता है. उसे पता है कि वार कहां करना है ताकि आवाज भी न निकले और काम भी हो जाए. तुम्हारे राज तुम्हारी सबसे बड़ी तिजोरी हैं, और तुमने उन्हें हर किसी के सामने खोल दिया है. याद रखो, जो बातें तुमने दोस्ती में कही थीं, वही बातें दुश्मनी में तुम्हारे खिलाफ हथियार बनेंगी. लोग ढूंढ़ते हैं कमियां चाणक्य नीति के मुताबिक, दुनिया तुम्हारी अच्छाई नहीं देखती है, वो तुम्हारी कमजोरी ढूंढती है. तुम जिसे अपना दुख बताते हो, वही पीछे मुड़कर तुम्हारा मजाक उड़ाता है. लोग मदद इसलिए नहीं करते कि वो तुम्हें पसंद करते हैं, बल्कि इसलिए करते हैं ताकि समय आने पर उस एहसान को वसूल सकें. ये रिश्ते नहीं, सिर्फ सौदे हैं. चाणक्य कहते थे कि कमजोर से दोस्ती मत करो, वो तुम्हारा बोझ नहीं उठा पाएगा. ताकतवर से दोस्ती मत करो, वो तुम्हें दबा देगा. तो बचा कौन? सिर्फ तुम. क्योंकि तुम अकेले आए थे, और तुम्हें अकेले ही लड़ना होगा. लोगों का आपसी मतलब हर मुस्कुराहट के पीछे एक चाल छिपी होती है. जो इंसान बहुत झुक रहा है, समझ लेना वो तुम्हारी जड़ काटने की तैयारी कर रहा है. जो ज्यादा मीठा बोलता है, वही सबसे खतरनाक होता है. इंसान की फितरत ऐसी है कि जब तक उसे फायदा मिलता है, वो साथ रहता है. जिस दिन फायदा खत्म, उसी दिन रिश्ता खत्म. जलनखोर लोग चाणक्य नीति के मुताबिक, सफल लोगों से दुनिया नफरत नहीं करती है, वो जलती है. जब वो आगे बढ़ते हैं तो लोग खुश नहीं बल्कि डरते हैं. उन्हें डर लगता है कि सफल लोग उनसे आगे निकल जाएंगे. इसलिए सफल लोगों के पास ऐसे लोग रहते हैं ताकि वह उनकी हर चाल पर नजर रख सकें. इमोशंस पर रखें काबू याद रखो, भावनाएं ही शक्ति की सबसे बड़ी दुश्मन हैं. जो इंसान ज्यादा भावुक होता है, वह जल्दी टूटता है. शेर कभी किसी पर भरोसा नहीं करता है. उसे पता है कि एक पल की लापरवाही उसकी जान ले सकती है. तुम्हें भी वैसा ही बनना होगा. भरोसा करो लेकिन इस शर्त पर कि सामने वाला कभी भी बदल सकता है. कम बोलो और ज्यादा सुनो कम बोलो, गहरा बनो, और अपने इरादों को छुपाकर रखो. समुद्र जितना शांत होता है, उतना ही खतरनाक होता है. दूरी बनाए रखो. हर किसी को अपने दिल का पता मत बताओ. पैसों की मदद मत लो पैसा वो चीज है जो दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बना देती है. किसी की असलियत जाननी हो, उसे थोड़ा पैसा और थोड़ी ताकत दे दो. अगर वो नहीं बदला, तो समझो वो इंसान नहीं, देवता है. लेकिन इस दुनिया में देवता नहीं मिलते हैं. जब तक तुम्हारे पास पैसा है, लोग तुम्हारे आसपास रहेंगे. जिस दिन खाली हुए, सब गायब. इसलिए अपने आपको इतना मजबूत बनाओ कि तुम्हें किसी सहारे की जरूरत ही न पड़े. अकेलापन अकेलापन कमजोरी नहीं, सुपरपावर है. जब तुम अकेले होते हो, तुम्हारे पीछे कोई वार करने वाला नहीं होता है. सामने सिर्फ दुश्मन होता है और दुश्मन से लड़ना आसान है. जिंदगी शतरंज है. अगर तुम प्यादे हो, तो कुर्बानी तय है. अगर राजा हो, तो अपने ही वजीर से बचकर रहना होगा. इरादे मत बताओ अपने इरादे कभी किसी को मत बताओ. जब तक शिकार को पता नहीं चलता कि वो शिकार है, वो बचने की कोशिश नहीं करता है. तुम भी अपने इरादों को छुपाकर रखो.

वास्तु टिप्स: इन जगहों पर भोजन करने से बढ़ सकता है आर्थिक नुकसान

 वास्तु शास्त्र में केवल घर की दिशाएं और कमरों का रख-रखाव ही नहीं, बल्कि हमारे खान-पान की आदतें और जगह भी सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं. मान्यता है कि गलत जगह पर बैठकर भोजन करने से मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है और इंसान धीरे-धीरे कंगाल होने लगता है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार किन जगहों पर भोजन करने से सख्त परहेज करना चाहिए. 1. बिस्तर पर बैठकर भोजन करना आजकल बहुत से लोग बेड पर बैठकर टीवी देखते हुए या आराम करते हुए खाना पसंद करते हैं. वास्तु के अनुसार, यह सबसे बड़ा दोष है. बिस्तर सोने और आराम करने की जगह है. वहां भोजन करने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. इससे न सिर्फ धन की हानि होती है, बल्कि व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस सकता है और अनिद्रा जैसी बीमारियों का शिकार हो जाता है. 2. टूटे हुए बर्तनों में खाना अगर किसी बर्तन या थाली में हल्का सा क्रैक (दरार) आ गया है, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए. टूटे या चटके हुए बर्तनों में भोजन करने से घर की सुख-समृद्धि चली जाती है. इसे दुर्भाग्य और कंगाली का सीधा कारण माना जाता है. हमेशा साफ और सुरक्षित बर्तनों का ही इस्तेमाल करें. 3. अंधेरे या कम रोशनी वाली जगह पर जिस जगह पर पर्याप्त रोशनी न हो या जहां बहुत ज्यादा अंधेरा रहता हो, वहां बैठकर भोजन कभी नहीं करना चाहिए. अंधकार नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. कम रोशनी में भोजन करने से शरीर में नकारात्मकता प्रवेश करती है, पाचन तंत्र खराब होता है और आर्थिक उन्नति रुक जाती है. 4. हाथ में रखकर भोजन करना कुछ लोग जल्दबाजी में या खड़े होकर भोजन को हाथ में लेकर ही खाने लगते हैं. शास्त्र कहते हैं कि अन्न का सम्मान बैठकर और थाली को सम्मानजनक स्थान (जैसे टेबल या जमीन पर) रखकर ही करना चाहिए. हाथ में रखकर खाना खाने से अन्न का अपमान होता है, जिससे घर में दरिद्रता का वास होने लगता है. 5. श्मशान या नकारात्मक स्थानों के पास ऐसी जगहें जहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक हो (जैसे श्मशान भूमि के नजदीक या बहुत ज्यादा गंदगी वाले स्थान), वहां बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए. यह आदत मानसिक तनाव बढ़ाती है और व्यक्ति की जमा पूंजी धीरे-धीरे बीमारियों और अनचाहे खर्चों में खत्म होने लगती है.

सनातन धर्म में 14 लोकों की ब्रह्मांडीय संरचना का वर्णन

 सनातन धर्म में ब्रह्मांड की कल्पना केवल भौतिक नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थों से जुड़ी हुई है. विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, यह सृष्टि किसी खाली अंतरिक्ष में नहीं तैर रही, बल्कि इसका आधार दिव्य शक्तियों पर टिका हुआ है. कहा जाता है कि पूरा ब्रह्मांड शेषनाग के फनों पर स्थित है, और वे स्वयं कूर्म अवतार के रूप में एक विशाल कछुए की पीठ पर टिके हैं. यह सब अनंत क्षीर सागर में स्थित है, जहां भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन रहते हैं और उनकी नाभि से निकले कमल पर ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं. पुराणों के अनुसार, यह पूरी सृष्टि 14 लोकों में विभाजित है, जो ब्रह्मा जी के उसी दिव्य कमल की डंडी में बसे हुए माने जाते हैं. ऊपर के 7 लोक (उच्च लोक) सबसे पहले अगर ऊपर के लोकों को समझें, तो इन्हें ऊर्ध्व लोक कहा जाता है और ये चेतना के उच्च स्तर को दर्शाते हैं. सबसे ऊपर ब्रह्मलोक है, जहां से सृष्टि का संचालन होता है और इसे सर्वोच्च स्थान माना जाता है. इसके नीचे तपोलोक है, जहां महान ऋषि और देवता कठोर तपस्या में लीन रहते हैं. फिर जनलोक आता है, जहां सनक, सनंदन जैसे सनकादि ऋषि निवास करते हैं, जो जन्म से ही ज्ञानी माने जाते हैं. इसके बाद महर्लोक है, जहां महर्षि यज्ञ और ज्ञान में लीन रहते हैं. स्वर्गलोक वह स्थान है जहां इंद्रदेव, अप्सराएं और दिव्य सुख-सुविधाएं मौजूद हैं. इसके नीचे भुवर्लोक है, जो ग्रह-नक्षत्रों और अंतरिक्षीय शक्तियों का क्षेत्र है, और अंत में पृथ्वीलोक आता है, जहां हम मनुष्य रहते हैं और जहां कर्म, धर्म और जीवन के निर्णयों का महत्व सबसे अधिक होता है. नीचे के 7 लोक (पाताल लोक) अब अगर नीचे के लोकों की बात करें, तो इन्हें अधोलोक कहा जाता है. ये भौतिक तथा गूढ़ शक्तियों से जुड़े हुए माने जाते हैं. पृथ्वी के नीचे सबसे पहले अतल लोक आता है, जिसे दानवों का क्षेत्र माना गया है. इसके बाद वितल लोक है, जहां शिव के गणों का निवास बताया गया है. सुतल लोक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राजा बलि का राज्य है, जिन्हें वामन अवतार से आशीर्वाद प्राप्त हुआ था. इसके बाद तलातल लोक आता है, जिसे मय दानव का क्षेत्र कहा गया है. फिर महातल लोक है, जहां असंख्य नाग जातियां निवास करती हैं. इसके नीचे रसातल लोक है, जो असुरों का अंधकारमय क्षेत्र माना जाता है, और सबसे अंत में पाताल लोक आता है, जहां नागों और दैत्यों की गहरी और रहस्यमयी गुफाएं स्थित हैं. लोकों का महत्व इन सभी लोकों के नीचे अनेक नरक लोकों का भी वर्णन मिलता है, जहां जीवों को उनके कर्मों के अनुसार दंड मिलता है. इस पूरी संरचना को केवल भौतिक रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक व्यवस्था के रूप में समझा जाता है. जो यह दर्शाती है कि ब्रह्मांड कई स्तरों पर काम करता है. हर लोक जीवन, चेतना और कर्म के अलग-अलग आयाम को प्रकट करता है. इस संपूर्ण संतुलन का आधार भगवान विष्णु माने जाते हैं, जबकि इसे स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने की जिम्मेदारी अनंत शेष निभाते हैं. मान्यता है कि जब तक शेषनाग अस्तित्व में हैं, तब तक यह सृष्टि भी कायम रहेगी.

‘कांग्रेस ने सिर्फ ठगने का काम किया’, टीएस सिंहदेव की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री साय का तीखा तंज

रायपुर. कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर दिए गए पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के बयान पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि ये हमारा देखने का काम नहीं है, कांग्रेस इसको देखे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कितना भी कर लें, जनता का विश्वास नहीं जीत पाएगी। सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस देश की जनता का विश्वास खो चुकी है और लगातार सिमटती जा रही है, क्योंकि ये लोग हमेशा जनता को ठगने का काम करते हैं। इनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है, जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी वर्ष 2018 में प्रदेश की जनता ने इन्हें जनादेश दिया था, लेकिन पांच वर्षों तक इन्होंने केवल जनता को ठगने और प्रदेश को लूटने का काम किया। इसका परिणाम उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। अब ये लोग कुछ भी कर लें, जनता का विश्वास खो चुके हैं। वहीं, एलपीजी सिलेंडर के बढ़े दामों को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की जो स्थिति है, उससे हम सब वाकिफ हैं। पूरा विश्व इससे प्रभावित है। हम सबको इसमें सहयोग करना चाहिए और टीम भावना के साथ अपने देश के लिए खड़ा रहना चाहिए।

क्रॉस वोटिंग की अटकलों के बीच राज्यसभा चुनाव दिलचस्प, क्या बीजेपी का दांव बदलेगा पूरा गणित?

भोपाल  मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए शह-मात का खेल शुरू हो गया है. विधायकों की संख्या के लिहाज से दो बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के लिए कन्फर्म मानी जा रही थी, लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारकर राहुल गांधी की करीबी मिनाक्षी नटरजान की सियासी टेंशन बढ़ा दी है?  राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के बाद महेश केवट को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन पर दांव खेला है. इस तरह तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।  मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान के बाद निर्विरोध चुनाव की संभावना खत्म हो गई है और वोटिंग के जरिए ही फैसला होगा.  ऐसे में अब असल पेंच विधायकों की क्रॉस वोटिंग को लेकर फंसता दिख रहा है ।  कौन हैं महेश केवट, जिन्हें बीजेपी ने एमपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है. महेश केवट मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं.  महेश केवट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने मछुआरा वर्ग को संदेश दिया है. महेश केवट 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े है.  वो ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक रह चुके हैं. छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक के रूप में कार्य किया।  महेश केवट 1995 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में हैं और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम कर चुके हैं. 2000 में पार्षद निर्वाचित हुए तथा नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे. भाजपा के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर उपचुनावों में संगठन की ओर से अहम जिम्मेदारियां संभालीं।  भाजपा से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल भी कर चुके नामांकन मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है. भाजपा ने दो सीटों के लिए पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम की घोषणा कर दी थी. इन दोनों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. तीसरे सीट के लिए अब महेश केवट को उतार कर भाजपा ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराने लगा है।  कांग्रेस के पास 62 वोट, एकजुट रखना चुनौती मालूम हो कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 62 वोट हैं. एक सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए. उधर बीजेपी को तीसरी सीट जीतने के लिए केवल आठ अतिरिक्त वोट चाहिए. इसी कारण कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. मीनाक्षी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस को अपने वोटों को एकजुट रखना होगा. लेकिन इससे पहले कांग्रेस विधायकों में टूट हो चुकी है. लिहाज़ा एमपी में राज्य सभा चुनाव काँटे का हो गया है।  कर्नाटक से भाजपा ने एम नागराज को बनाया उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने कर्नाटक में होने वाले राज्यसभा के ‌द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए डॉ. एम नागराज को उम्मीदवार बनाया है. आरएसएस से जुड़े नागराज अभी पार्टी का बिल्डिंग कमेटी संभाल रहे हैं. इसका काम राज्य भर में हर जिले में पार्टी कार्यालय बनाना है।  साथ ही कर्नाटक के विधान परिषद् द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य को उम्मीदवार बनाया है।  राज्यसभा चुनाव का नंबर गेम क्या है?  मध्य प्रदेश में विधानसभा के कुल 230 सदस्यों की संख्या है, लेकिन फिलहाल 228 सदस्य हैं. इनमें बीजेपी के 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव की एक राज्यसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 58 विधायकों (प्रथम वरीयता के वोट) के समर्थन चाहिए।  विधायकों के आधार पर बीजेपी की दो सीटें कन्फर्म है और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के उतरने के बाद मामला उलझ गया है. बीजेपी 164 विधायकों की आधार पर दो राज्यसभा सीट जीतने के लिए 116 विधायकों के वोट चाहिए।  बीजेपी दो सीटें जीतने के बाद 48 अतिरिक्त वोट चाहिए जबकि कांग्रेस 64 विधायकों के दम पर एक सीट जीत सकती है, उसके बाद भी उसके बाद 6 विधायकों का अतरिक्त वोट हो रहा है, लेकिन मामला बीजेपी के तीसरे प्रत्याशी के उतरने से है।  तीसरी राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी 2 राज्यसभा सीटें सेफ करने के बाद 48 विधायक बचेंगे, जिसके तीसरी राज्यसभा की सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी. वहीं कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीत के लिए जरूरी संख्या बल है, लेकिन बीजेपी के द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और मिनाक्षी नटराजन की जीत की राह मुश्किल कर दी है।  बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतारने के फैसले ने कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी है. बीजेपी का यह कदम बताता है कि पार्टी या तो अपनी पार्टी से बाहर के विधायकों का समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है या उसे लगता है कि क्रॉस-वोटिंग अंतिम नतीजे को बदल सकती है।  राज्यसभा के लिए क्रॉस वोटिंग का खतरा मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव, जिसे एक सामान्य चुनाव माना जा रहा था, एक ऐसे मुकाबले में बदल दिया है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हैं, अब सबकी नजरें वोटिंग के दिन से होने वाली क्रॉस-वोटिंग, वोटिंग से दूर रहने और आखिरी समय की सियासी चालों पर होंगी।  बीजेपी के लिए, तीसरा उम्मीदवार उतारना अपर हाउस में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है. कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और उस सीट को बचाने की क्षमता का इम्तिहान है, जो मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से उसकी पहुंच में दिख रही है।  कांग्रेस की बढ़ी सियासी टेंशन कांग्रेस के पास वैसे तो 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के … Read more

प्री-मानसून ने पकड़ी रफ्तार, झारखंड में मौसम बदला, येलो अलर्ट जारी

रांची  झारखंड में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हो गई हैं. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है. कई स्थानों पर बारिश भी हो रही है. इस बीच गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड स्थित परासपानी कला गांव में शनिवार शाम वज्रपात की चपेट में आने से 12 वर्षीय बालक क्रमु कुमार की मौत हो गई. रामगढ़ के गंडके पाहन टोला निवासी की 30 वर्षीय युवक राजू मुंडा और कुजू के मुरपा कठरा टोला निवासी 16 वर्षीय साहिल कुमार की भी वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई. पिछले 24 घंटे ऐसा रहा तापमान झारखंड में कई स्थानों पर गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की गई, जबकि एक स्थान पर भारी बारिश भी हुई. सबसे अधिक 70.3 मिमी वर्षा सिमडेगा के थर्थाइटांगर में रिकॉर्ड की गई. वहीं, राज्य का सबसे अधिक उच्चतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस डाल्टनगंज में दर्ज हुआ, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस लातेहार-AWS में रिकॉर्ड किया गया. कई जिलों में बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी), रांची केंद्र ने झारखंड में आगामी दिनों में बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई है. कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेलंगाना तक बना ट्रफ सक्रिय है, जिसके प्रभाव से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है. कल रांची और आसपास में बारिश के संकेत 9 जून को रांची, बोकारो, रामगढ़, गुमला और खूंटी सहित दक्षिणी और निकटवर्ती मध्य भागों में मेघगर्जन और तेज हवा के साथ वर्षा होने के संकेत हैं. रांची में 10 और 11 जून को भी मेघगर्जन के साथ वर्षा की संभावना है.

गंभीर धाराओं में FIR के बाद भी खान सर गिरफ्त से दूर, बढ़ा विवाद

पटना  खान सर लापता हो गए हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। लेकिन खान सर का कुछ भी पता नहीं चल सका है। आखिर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज होने के बाद खान सर कहां अंडरग्राउंड हो गए हैं और पुलिस उन्हें क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है? ज्ञान बिंदू जी.एस एकेडमी ने यह गंभीर सवाल उठाए हैं। एकेडमी प्रबंधन की तरफ से कहा गया है कि जिस तरह से ज्ञान बिंद् के डायरेक्टर रौशन आनंद को गिरफ्ताार करने में पुलिस ने त्वरित ऐक्शन दिखाया आखिर उस तरह का ऐक्शन खान सर को अरेस्ट करने में क्यों नहीं दिखाया गया? ज्ञान बिंदु एकेडमी के टीचर ने खान सर की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने पर आमरण अनशन की धमकी तक दे दी है। ज्ञान बिंदु के शिक्षक वरुण ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में सवाल उठाते हुए कि रौशन सर की गिरफ्तारी के लिए जिस तरह से प्रशासन ने तत्परता दिखाई वैसी तत्परता वो आज क्यों नहीं दिखा रही है? खान की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? 4 तारीख को एफआईआऱ दर्ज कराई गई थी और अब 8 तारीख हो गया है। केस दर्ज होने के बाद वो अपने क्लासरूम में डिजीटल बोर्ड पर सीसीटीवी फुटेज को चला कर कह रहे हैं कि इस व्यक्ति की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। जबकि खुद उस व्यक्ति (खान सर) पर ऐसी-ऐसी धाराएं लगी हैं कि उसकी तो उसी समय गिरफ्तारी होनी चाहिए थी ज्ञान बिंदु एकेडमी के टीचर ने आगे कहा कि जो शख्स उस वक्त वहां नहीं थे यानी रौशन सर की इसमें कोई संलिप्ता नहीं है उसे आपने गिरफ्तार कर रखा है। जिस शख्स पर प्रत्यक्ष एफआईआर है आज वो आसानी से और आराम से अपना जीवन जी रहा है। हमारी मांग है कि उनकी (खान सर) गिरफ्तारी अविलंब होनी चाहिए। टीचर वरुण ने कहा कि हमलोगों ने पहले भी कहा है कि जो गार्ड इस मामले में है वो कैंपस का गार्ड है, खान का गार्ड नहीं है। गार्ड ने खुद कहा कि हम कैंपस के गार्ड हैं। उस गार्ड को सुरक्षाा मिलनी चाहिए। अगर उस गार्ड के साथ कुछ भी गलत होता है तो उसका सारा बोझ रौशन सर पर डाल दिया जाएगा इसलिए उसे सुरक्षा मिलनी चाहिए। वरुण ने आगे कहा कि अगर खान सर गिरफ्तार नहीं होते हैं तो हम आमरण अनशन करेंगे। हमने न्यायालय से भी गुहार लगाई है कि जल्द इस प्रक्रिया को देख कर रौशन सर को बेल दी जाए और जो दोषी है उसपर कार्रवाई करने का आदेश प्रशासन को दिया जाए। बहरहाल आपको बता दें कि खान सर के वकील कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत की याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। खान सर पर हत्या के प्रयास और आर्म्स ऐक्ट के तहत संगीन धाराओं में केस दर्ज किया गया है। 2 जून को खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट में हुए बवाल के बाद खान सर पर बीएनएस की धारा 109 के अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25(9), 27 और 35 के तहत केस दर्ज किया गया है। ये धाराएं बेहद कड़ी हैं और इनसे खान सर की मुश्किलें निश्चित तौर से बढ़ सकती हैं।