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ईरान ने कतर में अमेरिका की सैन्य संचार प्रणाली पर किया हमला? सैटेलाइट तस्वीरों से उठे सवाल

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. हाल ही में एक बड़ी घटना ने इस तनाव को और ज्यादा उजागर किया है. ईरान के भारत में दूतावास (@Iran_in_India) ने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें कहा गया कि ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य की प्राथमिक संचार प्रणाली (रेडोम) को नष्ट कर दिया है. सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि अल उदीद एयर बेस (Al Udeid Air Base) पर ईरान के मिसाइल हमले से एक उपग्रह संचार एंटीना पूरा तबाह हो गया है. इस घटना ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि इससे पहले कतर और अमेरिका द्वारा किए गए दावों को भी चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि कोई नुकसान नहीं हुआ.  क्या है रेडोम और इसका महत्व? रेडोम (Radome) एक बड़ा, गोलाकार ढांचा होता है, जो उपग्रह और रेडियो संचार एंटीना को सुरक्षा प्रदान करता है. यह ढांचा मजबूत सामग्री से बना होता है, जो एंटीना को मौसम और बाहरी खतरों से बचाता है, जबकि संचार सिग्नल को बाधित नहीं करता. अमेरिकी सैन्य के लिए ये रेडोम्स मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये उनकी संचार क्षमताओं को बनाए रखते हैं. इनके बिना, सैन्य ऑपरेशंस, निगरानी और कम्युनिकेशन प्रभावित हो सकते हैं. कतर में अल उदीद एयर बेस अमेरिकी सैन्य का सबसे बड़ा बेस है, जहां से मध्य पूर्व में सभी हवाई ऑपरेशंस का नियंत्रण होता है. यहां एक प्राथमिक रेडोम था, जो अब नष्ट हो गया है. दूसरा रेडोम कुवैत में स्थित है, जो अभी सुरक्षित है. उपग्रह तस्वीरें क्या दिखाती हैं? ईरान के भारत में दूतावास ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें स्पष्ट दिखाई देता है कि जहां पहले रेडोम था, वहां अब एक काला धब्बा है. यह धब्बा बताता है कि मिसाइल हमले से एंटीना पूरी तरह से नष्ट हो गया है. पास के एक हैंगर पर भी नुकसान हुआ है. ये तस्वीरें 10 जुलाई 2025 को ली गईं. इन्हें अब जारी किया गया है.  इससे पहले, कतर और अमेरिका ने दावा किया था कि मिसाइल हमले से कोई नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन ये तस्वीरें उनके दावों को गलत साबित करती हैं. ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा उनके परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों का जवाब था. लंबे समय से तनाव जारी है ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, खासकर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर. 2025 की शुरुआत में, अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु सुविधाओं पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने कतर में अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाया. इस हमले में 14 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ को कतर की एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, लेकिन कुछ मिसाइलें बेस तक पहुंचीं. ईरान का दावा है कि इस हमले से अमेरिकी सैन्य की संचार क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि अमेरिका और कतर ने शुरुआत में कहा था कि कोई नुकसान नहीं हुआ. लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीरें साफ तौर पर दिखाती हैं कि नुकसान हुआ है. नुकसान का आकलन     संचार प्रणाली का नुकसान: रेडोम के नष्ट होने से अमेरिकी सैन्य की संचार क्षमता प्रभावित हुई है. यह क्षमता निगरानी, निर्देश और ऑपरेशंस के लिए जरूरी है.     हैंगर का नुकसान: पास के हैंगर पर नुकसान हुआ है, जो हवाई जहाज और उपकरणों को रखने के लिए इस्तेमाल होता है. यह नुकसान अमेरिकी सैन्य की तैयारियों को भी प्रभावित कर सकता है.      क्षेत्रीय तनाव: इस घटना से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है. ईरान और अमेरिका के बीच की लड़ाई अब सीधे सैन्य ठिकानों पर पहुंच गई है, जो और ज्यादा खतरनाक हो सकता है.  

साय सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्य धारा में जोड़ने के साथ ही परिवार बढ़ाने में भी करेगी मदद : डिप्टी सीएम

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने में आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के लिए एक बड़ी सौगात दी है. अब वे चाहें तो उनके घर भी नन्हें बच्चे की किलकारी गूंज सकती है. डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आज मीडिया से बातचीत में बताया कि नक्सल संगठनों ने कई लोगों से ना सिर्फ परिवार से दूर किया, बल्कि पिता बनने का भी सुख छीन लिया. उनकी नसबंदी कर दी. लेकिन अब सरकार उन सभी नक्सलियों को टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा उपलब्ध कराएगी. साय सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्य धारा में जोड़ने के साथ ही परिवार बढ़ाने में भी मदद करेगी. आपको बता दें, जो लोग प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में असक्षम होते हैं. वे साइंस की मदद से ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ सुविधा का उपयोग कर मां-बाप बन सकते हैं. इस सुविधा का लाभ लेने के लिए भी लोगों को लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन सरकार इस सुविधा को आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए उपलब्ध करवाते हुए उन्हें जीवन एक बड़ा तोहफा दे रही है.  डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया कि हमारे प्रावधानों में है जिनकी नसबंदी कराई जाती है, वे मुख्य धारा में आने के बाद (सरेंडर करने के बाद) अगर माता-पिता बनना चाहते हैं, तो सरकार द्वारा टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा भी दी जा रही है. डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि पुनर्वास केंद्रों में नौजवान भी आ रहे हैं. उनके विवाह के भी चिंता सरकार कर रही है. महिला एवं बाल विकास विभाग सामूहिक विवाह करवाएंगे. यह बेहद अलग और अद्भुत नजारा होगा. मानसून में भी जारी रहेगा एंटी नक्सल ऑपरेशन वहीं बारिश के मौसम में भी एंटी नक्सल ऑपरेशन जारी रखने को लेकर उन्होंने बताया कि मानसून में जवानों को नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए जवानों को हैदराबाद में ट्रेनिंग दी जा रही है. उन्होंने कहा कि जवानों के हौसले के सामने सभी चुनौतियां फीकी पड़ रही हैं.

लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त 12 जुलाई को, सीएम डॉ. यादव ने दी जानकारी

भोपाल  मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की करोड़ों बहनों के लिए खुशखबरी है। शनिवार 12 जुलाई को उज्जैन से सीएम डॉ मोहन यादव योजना की 26वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत 1.27 करोड़ बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे। इसके साथ ही 26 लाख बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग के लिए राशि दी जाएगी। सीएम ने कहा है कि अगले माह अगस्त में रक्षाबंधन के अवसर पर लाड़ली बहना योजना के तहत वर्तमान में दी जा रही मासिक आर्थिक सहायता राशि के साथ 250 रूपए की विशेष सहायता राशि भी अंतरित की जाएगी। अप्रैल से 10 से 15 तारीख के बीच भेजी जाती है योजना की किस्त आमतौर पर योजना की किस्त हर महीने की 10 तारीख तक जारी कर दी जाती थी, लेकिन अप्रैल 2025 से राशि वितरण की तारीख में बदलाव किया गया है।इस दौरान कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने फैसला किया था कि वह प्रतिमाह 15 तारीख के आसपास बहनों के खाते में राशि भेजेगी। यही कारण था कि अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त, 15 मई को 24वीं किस्त और 16 जून को 25वीं किस्त जारी की गई थी।अब 12 जुलाई को मोहन सरकार योजना की अगली किस्त जारी करने जा रही है। दिवाली बाद बहनों को हर माह मिलेंगे 1500     दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा और हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रक्षाबंधन से पहले सभी पात्र बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि शगुन के रूप में भेजी जाएगी।     दीपावली के बाद हम प्रदेश की सभी लाडली बहनों को हर माह 1500 रुपए महीना देंगे। अभी वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है।योजना के तहत चरणबद्ध रूप से राशि बढ़ाकर तीन हजार रूपये प्रति माह तक की जायेगी। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से जून 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 25 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 30 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैंजिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो।     लाभार्थी सूची में चेक करें नाम, पैसा मिलेगा या नहीं?

किसानों से खरीदी मक्का, पैसे दबाए 3 करोड़! छिंदवाड़ा में व्यापारी पर पुलिस की कार्रवाई

छिंदवाड़ा   छिंदवाड़ा में किसानों के साथ धोखा करने वाले एक व्यापारी को पुलिस ने पकड़ लिया है। चौरई पुलिस ने इस व्यापारी को गिरफ्तार किया है। इस व्यापारी पर आरोप है कि उसने किसानों से मक्का खरीदा और लगभग 3 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया। इसके बाद वह फरार हो गया था। पुलिस ने उसे छिंदवाड़ा से गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी भारती जाट ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। चौरई पुलिस ने तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के बाद आरोपी को पकड़ा। भारी मात्रा में मक्का जब्त पुलिस ने आरोपी हिमांशु साहू की निशानदेही पर दादा गुरु वेयरहाउस कंडीपार से 4276.840 मीट्रिक टन मक्का जब्त की है। इस मक्के की कीमत लगभग 9 करोड़ 40 लाख 72 हजार रुपये है। पुलिस ने इस फसल को फ्रीज कर दिया है। इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से फरार था आरोपी पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से फरार था। वह दूसरे स्थान पर अलग नाम से रह रहा था। पुलिस लगातार उस पर नजर रख रही थी। पुलिस ने उसे घेरकर पकड़ लिया। इन धाराओं में मामला दर्ज थाना चौरई में अपराध क्रमांक 502/25 के तहत धारा 318(4), 318(3), 316(5), 3(5) BNS में मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस ठगी के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं किसानों में भुगतान न होने के कारण असंतोष का भाव है।  

जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड को मैच के दूसरे दिन तीन झटके दिए, स्टोक्स, रूट-वोक्स को भेजा पवेलियन

लॉर्ड्स इंग्लैंड की टीम ने भारत के खिलाफ लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे तीसरे मुकाबले में सात विकेट गंवा दिए। जो रूट ने तीसरे टेस्ट के दूसरे दिन की पहली ही गेंद पर चौका लगाकर अपना शतक पूरा किया। इसके बाद जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड को मैच के दूसरे दिन तीन झटके दिए हैं। उन्होंने कप्तान बेन स्टोक्स (44) और जो रूट (104) को क्लीन बोल्ड किया और फिर क्रिस वोक्स को कैच आउट करवाया। जेमी स्मिथ और ब्रायडन कार्स क्रीज पर मौजूद हैं। हैट्रिक से चूके जसप्रीत बुमराह भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह हैट्रिक लेने से चूक गए हैं। बुमराह ने शतकवीर जो रूट को आउट किया और फिर क्रिस वोक्स को आउट करके लगातार गेंदों पर दो विकेट लिए। जो रूट 199 गेंद में 104 रन बनाए। जसप्रीत बुमराह ने बेन स्टोक्स को किया आउट जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स को क्लीन बोल्ड करके दूसरे दिन भारत को पहली सफलता दिलाई। इंग्लैंड ने पहली पारी में पांच विकेट गंवा दिए हैं। बेन स्टोक्स 110 गेंद में 44 रन बनाकर आउट हुए।

8 महिला समेत 22 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 37 लाख 50 हजार रुपए का इनाम था घोषित

नारायणपुर छत्तीसगढ़ में एक ओर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर उनके पुनर्वास की नीति को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है. इस बीच शुक्रवार को 22 नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया. इनमें 8 महिला नक्सली भी शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर 37 लाख 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था. ये सभी अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रीय थे.   जानकारी के मुताबिक, पुलिस के लगातार दबाव, मुठभेड़ों में बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. इनमें 8 महिला नक्सली शामिल हैं. सरेंडर करने वाले सभी नक्सली आमदई, नेलनार और कुतुल एरिया कमेटी में सक्रिय थे. लंबे समय से संगठन में रहकर आईईडी प्लांट, पुलिस मूवमेंट ट्रेस, जनताना सरकार के विस्तार करने जैसे गतिविधियों में शामिल थे. बता दें कि इस वर्ष अब तक 110 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं.

गुना में स्कूल भवन निर्माण पर तेजी, केंद्रीय मंत्री सिंधिया को कलेक्टर ने दी जानकारी

 गुना  गुना जिले के बमोरी विकासखंड के ग्राम सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मारकी महू में लंबे समय से टपरे के नीचे कक्षाएं संचालित हो रही थीं। जैसे ही इस विद्यालय की जर्जर हालत और बच्चों की दयनीय पढ़ाई व्यवस्था की जानकारी केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री तथा गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली, उन्होंने इस गंभीर विषय पर तुरंत संज्ञान लिया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बताया गया कि केंद्रीय मंत्री सिंधिया उस समय बेंगलुरु प्रवास पर थे। लेकिन जैसे ही उन्हें विद्यालय की बदहाल स्थिति और बच्चों की कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई किए जाने की सूचना मिली, उन्होंने स्थान और समय की परवाह किए बिना गुना कलेक्टर को फोन कर विद्यालय भवन निर्माण कार्य को प्राथमिकता पर लेकर शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को आश्वस्त किया कि विद्यालय भवन का निर्माण कार्य अगले एक-दो दिनों में प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रशासन ने स्थल का निरीक्षण कर जरूरी तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। यह विद्यालय पिछले तीन वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने और प्लास्टर झड़ने के कारण बच्चों को अस्थायी टपरे के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। टिन-तिरपाल से बने इस अस्थायी ढांचे में पढ़ाई का वातावरण न तो सुरक्षित था और न ही सम्मानजनक। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की इस त्वरित पहल ने न केवल प्रशासनिक कार्यशैली को सक्रिय किया, बल्कि यह भी साबित किया कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को लेकर हमेशा सजग और संवेदनशील रहते हैं।  

फंदे पर लटकी मिली युवक लाश, फांसी लगाकर की आत्महत्या

बलरामपुर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से युवक के आत्महत्या का मामला सामने आया है. युवक ने अपने किराए के मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. मामला रामानुजगंज थाना क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक, रोहित गुप्ता अपनी पत्नी के साथ वार्ड क्रमांक 13 में रहता था. गुरुवार दोपहर 2 बजे करीब पत्नी घर के बाहर में कुछ काम कर रही थी. इसी दौरान रोहित ने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया.सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई है. मृतक के परिजन और दोस्त सदमें में हैं. फिलहाल आत्महत्या की कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी, देहरादून में डायनामाइट के साथ पकड़े गए तीन आरोपी

देहरादून  देहरादून में 11 जुलाई 2025 को तीन लोगों को 125 किलोग्राम डायनामाइट के साथ पकड़ा. एक सवाल जो लोगों के दिमाग में आ रहा है, वह है – 125 किलोग्राम डायनामाइट से कितना नुकसान हो सकता है? हाल ही में सोशल मीडिया और समाचारों में विस्फोटकों जैसे डायनामाइट के बारे में सवाल उठ रहे हैं. खासकर तब जब देहरादून जैसे पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य और खनन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं.  डायनामाइट क्या है और यह कैसे काम करता है? डायनामाइट एक विस्फोटक सामग्री है, जिसे 19वीं सदी में स्वीडिश वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने बनाया था. यह ट्राइट्रोटोल्यूनि (TNT) और अन्य रसायनों से मिलकर बनता है, जो जब फूटता है तो बहुत सारी ऊर्जा छोड़ता है. इस ऊर्जा से इमारतें, चट्टानें और जमीन को तोड़ा जा सकता है. डायनामाइट का इस्तेमाल खनन, निर्माण और कभी-कभी गलत तरीके से विनाश के लिए भी होता है.  हर 1 ग्राम डायनामाइट में लगभग 4.184 किलोजूल ऊर्जा होती है. इसका मतलब है कि 125 किलोग्राम (125,000 ग्राम) डायनामाइट में करीब 523,000 किलोजूल (523 मेगाजूल) ऊर्जा होगी. यह ऊर्जा कितना नुकसान कर सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कहां और कैसे इस्तेमाल किया जाता है. 125 किलोग्राम डायनामाइट से कितना नुकसान? भौतिक नुकसान  125 किलोग्राम डायनामाइट का विस्फोट एक छोटे से पहाड़ी क्षेत्र या इमारत को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. अगर यह देहरादून के एक छोटे से निर्माण स्थल पर फूटे, तो आसपास की 50-100 मीटर की दूरी तक की इमारतें ढह सकती हैं. चट्टानों को तोड़ने के लिए खनन में, यह एक बड़े हिस्से को हटा सकता है, लेकिन अगर गलत जगह फूटे तो सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं. धमाका और दबाव विस्फोट से पैदा होने वाला दबाव 100 मीटर तक हवा को हिला सकता है, जिससे खिड़कियां टूट सकती हैं. लोग सुनने की क्षमता खो सकते हैं. अगर यह भीड़-भाड़ वाले इलाके में फूटे, तो गंभीर चोटें आ सकती हैं या जान-माल का नुकसान हो सकता है. जमीन पर प्रभाव पहाड़ी इलाकों में, जैसे देहरादून, विस्फोट से भूस्खलन (landslide) का खतरा बढ़ सकता है. अगर 125 किलोग्राम डायनामाइट मसूरी की पहाड़ियों पर फूटे, तो मिट्टी और चट्टानों का बहाव निचले इलाकों में तबाही मचा सकता है. उदाहरण के लिए तुलना 1 किलोग्राम TNT (जो डायनामाइट से मिलता-जुलता है) एक छोटे घर को नष्ट कर सकता है. तो 125 किलोग्राम से एक छोटा गांव या औद्योगिक क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंच सकता है. यह ऊर्जा करीब 0.125 टन TNT के बराबर है, जो एक छोटे परमाणु बम (हिरोशिमा बम का 0.0001%) से बहुत कम है, लेकिन फिर भी स्थानीय स्तर पर खतरनाक है. देहरादून में इतने डायनामाइट के मिलने का मतलब  देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है, जो हिमालय की तलहटी में बसा एक खूबसूरत शहर है. यहां सड़क निर्माण, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और भवन निर्माण के लिए डायनामाइट का इस्तेमाल आम है. लेकिन 125 किलोग्राम डायनामाइट का अनियंत्रित विस्फोट यहां के लिए गंभीर खतरा हो सकता है…     भूस्खलन का जोखिम: देहरादून के पहाड़ी इलाकों में पहले से ही भूस्खलन की समस्या है. 2021 की आपदा के बाद से यह और गंभीर हो गई है. इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोट से मिट्टी का ढांचा कमजोर हो सकता है.     आबादी का नुकसान: शहर में घनी आबादी वाले क्षेत्र जैसे राजपुर रोड या प्रेमनगर में अगर ऐसा विस्फोट हो, तो सैकड़ों लोग प्रभावित हो सकते हैं.     पर्यावरणीय नुकसान: विस्फोट से धूल, राख और प्रदूषण फैल सकता है, जो देहरादून की हवा और पानी को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, निर्माण में डायनामाइट का इस्तेमाल नियंत्रित तरीके से होता है, लेकिन अगर यह गलती से या आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो,तो परिणाम भयानक हो सकते हैं. सुरक्षा और सावधानियां     नियंत्रित प्रयोग: डायनामाइट का इस्तेमाल केवल प्रशिक्षित लोगों और सरकार की अनुमति से होना चाहिए. देहरादून में खनन कंपनियों को सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है.     जागरूकता: स्थानीय लोगों को विस्फोट के समय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और आपातकालीन नंबर (112) याद रखने चाहिए.     निगरानी: सरकार को विस्फोटकों की बिक्री और भंडारण पर नजर रखनी चाहिए ताकि गलत हाथों में न जाएं.  

भारत में Tesla लॉन्च की तैयारी पूरी, जानिए कब और कहां खुलेगा पहला शोरूम

मुंबई  आखिरकार सालों के लंबे इंतजार के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की इंडिया में एंट्री होने जा रही है. अलग-अलग मौकों पर कई बार टेस्ला की कारों को भारतीय सड़कों पर स्पॉट किया गया था, लेकिन अब इन कारों का इंतजार खत्म होने जा रहा है. टेस्ला इंडिया में अपने ऑफिशियल ऑपरेशन की शुरुआत करने जा रही है और कंपनी के पहले शोरूम की शुरुआत मुंबई में होगी.  कहां खुलेगा टेस्ला का शोरूम? रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आगामी 15 जुलाई को टेस्ला का इंडिया में पहला शोरूम मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लैक्स (BKC) में शुरू किया जाएगा. इस शोरूम की शुरुआत के साथ टेस्ला की साउथ एशिया में एक फॉर्मल एंट्री होगी. लगभग 4000 वर्ग फुट में फैले टेस्ला के इस पहले शोरूम से इंडिया ऑपरेशन की शुरुआत होगी. मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में शोरूम का काम तकरीबन खत्म हो चुका है. ये शोरूम ग्राहकों के लिए टेस्ला के 'एक्सपीरिएंस सेंटर' के तौर पर काम करेगा, जिसमें ग्राहकों को टेस्ला की कारों को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा. टेस्ला भारत में डायरेक्ट-टू-कस्टमर (Direct-to-Customer) रिटेल मॉडल के साथ वाहनों की बिक्री करेगी. लेकिन कारों की बिक्री के बाद सहायता के लिए ब्रांड के पास स्थानीय साझेदार भी होंगे. जो आफ्टर सेल्स सपोर्ट मुहैया कराएंगे.  टेस्ला ने निकाली थी जॉब वैकेंसी मुंबई के बाद टेस्ला देश की राजधानी दिल्ली में भी अगला शोरूम खोलेगी. हाल ही में टेस्ला ने मुंबई और पुणे में अलग-अलग पदों पर वैकेंसी (Tesla Jobs in India) भी निकाली थी. जिसमें सेल्स एक्जीक्यूटिव, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग और आईटी, ऑपरेशन बिजनेस सपोर्ट, चार्जिंग इंफ्रा, एआई और रोबोटिक, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट सहित कई अलग-अलग डिविजन में नौकरियों के लिए आवदेन मांगे गए थें. भारत पहुंची चीन में बनी टेस्ला की कारें ब्लूमबर्ग की पिछली रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि, टेस्ला की कारों का पहला सेट भारत पहुंच चुका है. टेस्ला की मशहूर इलेक्ट्रिक एसयूवी – मॉडल वाई (Model Y) रियर-व्हील ड्राइव को चीन में स्थित टेस्ला की फैक्ट्री से भारत भेजा गया है. कंपनी ने इस कार के कुल 5 यूनिट को चीन के शंघाई से भारत में इंपोर्ट किया है. Model Y दुनिया की बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कारों में से एक है और संभवत: कंपनी इसी कार से भारत में अपने सफर की शुरुआत कर सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि, टेस्ला ने अमेरिका, चीन और नीदरलैंड से सुपरचार्जर कंपोनेंट, कार एक्सेसरीज, मर्चेंडाइज और स्पेयर्स को भी इंपोर्ट किया है. दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क (Elon Musk) के नेतृत्व वाली टेस्ला इस समय यूरोप और चीन के बाजार में बिक्री में भारी गिरावट से जूझ रही है. यही कारण है कि टेस्ला जल्द से जल्द दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार यानी भारत में प्रवेश करने की योजना बना रही है. क्या होगी कीमत? हालांकि आधिकारिक लॉन्च से पहले टेस्ला की पहली कार की कीमत के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि, इंपोर्ट की गई इन कारों में से प्रत्येक मॉडल की कीमत 27.7 लाख रुपये (लगभग 31,988 डॉलर) घोषित की गई है और इन पर 21 लाख रुपये से अधिक का इंपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है. अब लॉन्च के बाद ही इस कार की कीमत का खुलासा हो सकेगा. क्या भारत में लगेगा टेस्ला का प्लांट? फिलहाल टेस्ला भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पिछले महीने मीडिया को दिए अपने एक बयान में कहा था कि, "टेस्ला की प्राथमिकता भारत में अपने शोरूम का विस्तार करने में है. कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि, "हालांकि टेस्ला ने बहुत कम रुचि दिखाई है, लेकिन कई ग्लोबल ब्रांड्स – जिनमें हुंडई, मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा और किआ शामिल हैं – ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है.