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स्थानीय सामग्री और आधुनिक हरित तकनीक से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा, कार्बन फुटप्रिंट घटाने पर ज़ोर

भोपाल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को भविष्योन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हरित आवास तकनीक का उपयोग करने जा रही है। इस नवाचार से स्वच्छ और स्वस्थ भारत के संकल्प को बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आवास बनाए जाएंगे, जो स्थानीय संस्कृति और भू-जलवायु परिस्थितियों के पूरी तरह अनुकूल होंगे। हरित आवासों के माध्यम से जहाँ एक ओर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आवासों के ज़रिए सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ संसाधनों की रीसाइकलिंग भी हो सकेगी। सीएसईबी तकनीक को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण भवन निर्माण में हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 'कंप्रेस्ड स्टेबलाइज्ड अर्थ ब्लॉक्स' के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। महात्मा गांधी ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर के साथ क्षेत्रीय केंद्रों – जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सिवनी तथा नौगाँव-में सीएसईबी ब्लॉक बनाने वाली मशीनों की स्थापना की गई है। इन संस्थानों में राजमिस्त्रियों, जनपद अधिकारियों और कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे इन ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण कर सकें। भोपाल और इंदौर के केंद्रों द्वारा उक्त ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण भी किया जा चुका है। इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत में न्यूनतम 25 आवास सीएसईबी ब्लॉक्स से बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सीईओ जिला पंचायत और सीईओ जनपद पंचायत के साथ ही आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को इसके सफल क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। हरित आवासों के निर्माण में बांस, स्थानीय मिट्टी और अन्य संसाधनों का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे न केवल कमरे का तापमान (इनडोर थर्मल कम्फर्ट) और आर्द्रता बेहतर होंगी और गर्मी से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय सामग्री के उपयोग के चलते कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।  

साइबर सिक्योरिटी एवं एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन 400 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गौतम टेटवाल ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार हैं। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा बन चुका है।इसके संरक्षण और सुरक्षित उपयोग में साइबर सुरक्षा की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राष्ट्र की डिजिटल सीमाओं के प्रहरी हैं। मंत्री  टेटवाल शुक्रवार को ग्लोबल स्किल पार्क, भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मंत्री  टेटवाल ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नवाचार को अपनाने, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और तकनीकी रूप से सशक्त मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। एमपीएसईडीसी की मुख्य महाप्रबंधक सु शिवांगी जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गिरीश शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर बल दिया। एसएसआरजीएसपी-गोप के वरिष्ठ निदेशक  नीरज सहाय ने ग्लोबल स्किल पार्क को भारत का पहला एकीकृत बहु-कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप दक्ष एवं भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है। कार्यक्रम के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में “साइबर डिफेंस फंडामेंटल्स” विषय पर विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, साइबर खतरों तथा सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को मालवेयर, रैनसमवेयर, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और इनसाइडर रिस्क जैसे प्रमुख साइबर खतरों से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर किल चेन फ्रेमवर्क के माध्यम से साइबर हमलों की प्रक्रिया और उन्हें रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई। सत्र में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ की अवधारणा, सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, साइबर हाइजीन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट एवं पैचिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं करियर अवसरों, विशेष रूप से एसओसी एनालिस्ट जैसी उभरती भूमिकाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।  

सभी 194 निकायों में एक ही दिन होगी बैठक, नोडल अधिकारी निकायों के कार्यों की करेंगे समीक्षा

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव  शंगीता आर. ने गुरुवार को राज्य के सभी 194 नगरीय निकायों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सहित पांच प्रमुख शहरी विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान आवास निर्माण की प्रगति, आधिपत्य की स्थिति तथा हितग्राहियों के साथ समन्वय जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव  शंगीता आर. ने स्पष्ट किया कि पीएम आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत सितंबर 2026 अंतिम समय-सीमा है और इसके बाद किसी प्रकार की समयवृद्धि नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के पश्चात केंद्र अथवा राज्य शासन से कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय भार संबंधित नगरीय निकायों को स्वयं वहन करना होगा। सचिव ने सभी नगरीय निकायों को निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण करने तथा पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने, हितग्राहियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा हितग्राही अंश की वसूली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, नियमित समीक्षा और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कमजोर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को कार्यों में तेजी लाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना तथा अन्य शहरी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस दौरान भूमि उपलब्धता, परियोजनाओं की प्रगति तथा निर्माण गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। सचिव ने सभी बाधाओं के त्वरित निराकरण, प्रक्रियाओं के मानकीकरण तथा जलापूर्ति, स्वच्छता और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए सभी राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आवंटित जिलों के नगरीय निकायों का नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। पहली बार 6 जून को सभी नोडल अधिकारी अपने जिलों में पहुंचकर योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे। इस पहल का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, समस्याओं के त्वरित समाधान तथा मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। बैठक में वार्ड-स्तरीय डेटा मॉनिटरिंग को मजबूत करने, स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष बल दिया गया। सचिव  शंगीता आर. ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्मित परिसंपत्तियों के अधिकतम उपयोग और परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकारी भर्ती के लिए सख्त होंगे मानदंड, नैतिक पतन से जुड़े मामलों को भी किया जाएगा शामिल

भोपाल  राज्य सरकार 65 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। वर्ष 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। परिवीक्षा अवधि और स्थायीकरण को लेकर बड़ा फैसला परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है।   वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा।  

ऊर्जा मंत्री तोमर ने विषम परिस्थितियों में बिजली कार्मिकों द्वारा व्‍यवधानों के त्‍वरित निराकरण और उपभोक्‍ताओं के धैर्य की सराहना की

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ने बीते गुरूवार की शाम राजधानी में तेज आंधी, तूफान एवं बारिश के दौरान प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न विद्युत व्यवधान के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं के अपार धैर्य और परिपक्वता की प्रशंसा की है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान उपभोक्‍ताओं का सहयोग सराहनीय है। आमजन और बिजली उपभोक्‍ताओं का यह विश्वास ही बिजली कार्मिकों को विपरीत परिस्थितियों में भी त्वरित कार्य करने की ऊर्जा देता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बहाली के दौरान बिजली उपभोक्‍ताओं द्वारा किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने सभी उपभोक्‍ताओं को अनवरत बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए कृतसंकल्पित है। प्रबंध संचालक ने बिजली कंपनी के सभी मैदानी अधिकारियो एवं कर्मचारियों की तत्परता सजगता और सक्रियता से न्यूनतम समय मे बिजली आपूर्ति बहाल करने पर प्रशंसा की है। भोपाल शहर की विद्युत आपूर्ति सामान्‍य  भोपाल शहर में बीते गुरूवार को सायं लगभग 7:30 बजे 70-80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली अत्यंत तेज आंधी एवं भारी वर्षा के कारण बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है। तेज हवाओं के चलते बड़ी संख्या में वृक्ष उखड़कर एवं उनकी शाखाएं टूटकर विद्युत लाइनों पर गिरने से अनेक स्थानों पर विद्युत लाइनें एवं पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण शहर के 350 से अधिक 11 केवी फीडर बाधित हुए थे।   मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मैदानी अमले ने चुनौतीपूर्ण एवं विकट परिस्थितियों के बावजूद तत्‍परता से युद्धस्तर पर कार्य करते हुए चरणबद्ध तरीके से विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। रात्रि 8:30 बजे तक 165 फीडरों की आपूर्ति पुनः प्रारंभ कर दी गई। इसके पश्चात रात्रि 9:30 बजे तक अतिरिक्त 66 फीडरों की विद्युत आपूर्ति भी बहाल कर दी गई। पूरी रात सतत कार्य करते हुए सुबह तक सभी प्रभावित 11 केवी फीडरों के अधिकांश भागों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई। कंपनी की 10 से अधिक विशेष टीमों ने  विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावित विद्युत आपूर्ति शुक्रवार दोपहर तक पूरी तरह बहाल कर दिया।  कंपनी की लगभग 30 से अधिक टीमों ने उपभोक्‍ताओं की व्‍यक्तिगत शिकायतों (एफओसी) को भी शत-प्रतिशत निराकृत कर दिया है।   

नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य, बनेगी ‘पीपल सिटी’

रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राजधानी रायपुर में आयोजित संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव मती आर. संगीता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विकसित सीजी निगरानी पोर्टल, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन विषयक फिल्म, मंडल की 25 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, मंडल की नवीन वेबसाइट तथा ईको क्लब गतिविधियों पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण किया गया। भारतीय संस्कृति प्रकृति के संरक्षण और सह-अस्तित्व पर आधारित             मंत्री  ओपी चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का मूल कारण प्रकृति के साथ असंतुलित विकास मॉडल है। भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति के संरक्षण और उसके साथ सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही है। यहां नदियों, पर्वतों, वृक्षों और जीव-जंतुओं तक को पूजनीय माना गया है। हमारी परंपरा प्रकृति के उपयोग की बात करती है, शोषण की नहीं।          मंत्री  चौधरी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था रहा, लेकिन उस दौर में पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि विकास का आधार प्रकृति के साथ संतुलन था। औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया ने जिस विकास मॉडल को अपनाया, वह प्रकृति के अत्यधिक दोहन पर आधारित रहा और आज उसके दुष्परिणाम पूरी मानवता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की चुनौती बन चुका है। असामान्य वर्षा, बढ़ती गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। प्रकृति के साथ अन्याय का परिणाम अंततः मानव समाज को ही भुगतना पड़ता है। पर्यावरण संरक्षण में तकनीक का उपयोग बढ़ाया           मंत्री  चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरणीय निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऑनलाइन निगरानी के लिए आधुनिक प्रणाली विकसित की गई है, जिससे प्रदूषण स्तर बढ़ते ही विभाग को तत्काल जानकारी मिलती है और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन और निपटान के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि अन्य राज्यों का फ्लाई ऐश छत्तीसगढ़ में डंप न किया जाए। खतरनाक अपशिष्टों के प्रबंधन को लेकर भी राज्य सरकार ने सख्त और नैतिक निर्णय लिए हैं, ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। नवा रायपुर बनेगा ‘पीपल सिटी           चौधरी ने वृक्षारोपण की वर्तमान पद्धतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिकता के लिए पौधे लगाने के बजाय स्थानीय और पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीपल, नीम, आम और अन्य देशी वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर कलेक्टर रहते हुए उन्होंने “पीपल फॉर पीपल” अभियान प्रारंभ किया था। अब नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के वृक्ष लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां किसी भी दिशा में देखने पर पीपल का वृक्ष दिखाई देगा। बच्चों में विकसित करनी होगी पर्यावरणीय संवेदनशीलता       आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से           आवास एवं पर्यावरण मंत्री  चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है। अनावश्यक बिजली की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, पौधों की सही देखभाल और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण जैसी आदतें समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने शिक्षकों और ईको क्लब समन्वयकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करें। आने वाली पीढ़ी की सोच बदलकर ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। सस्टेनेबिलिटी में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं           मंत्री  चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास आधारित स्टार्टअप भविष्य के सबसे बड़े अवसरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का भी बड़ा क्षेत्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और उद्यमों को सस्टेनेबिलिटी के सिद्धांतों से जोड़ें और पर्यावरणीय चुनौतियों को अवसर में बदलने का प्रयास करें। विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन             कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण विषयक प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा तुलसी पौधे को जल अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मिशन लाइफ की शपथ दिलाई गई तथा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक “किस्सा लकड़ी का” ने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईको क्लब समन्वयकों एवं मास्टर ट्रेनर्स को मिशन लाइफ, ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरणीय गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के दौरान पोस्टर प्रतियोगिता एवं विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, विद्यालयों और ईको क्लबों को सम्मानित भी किया गया।            समारोह में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव   राजु अगसिमनि, प्रदेशभर से आए शिक्षकों, ईको क्लब समन्वयकों, विद्यार्थियों, विभागीय अधिकारी कर्मचारी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि  सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री  साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद  सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली। मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में  सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, विधायक  अमर अग्रवाल, विधायक  धरमलाल कौशिक, विधायक  अजय चंद्राकर, महापौर मती मीनल चौबे,  रमेश बैस,  राम प्रताप,  पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना,  राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

डेब्यू का मौका और नए संयोजन की तैयारी, अफगानिस्तान मुकाबले के लिए भारत की संभावित XI

 मुल्लांपुर अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के साथ टीम इंडिया अपने 2026 के टेस्ट अभियान की शुरुआत करने जा रही है. 6 जून (शनिवार) से न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 क्या होगी, इस पर भी फैन्स की निगाहें हैं।  मैच से एक दिन पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम संकेत दिए, जिससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया कि अफगानिस्तान के खिलाफ भारत किस संयोजन के साथ उतर सकता है. खास बात यह है कि कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ बड़े नाम अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।  भारतीय बल्लेबाजी की शुरुआत एक बार फिर यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल की जोड़ी करेगी. जायसवाल इस समय भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में गिने जाते हैं, जबकि राहुल को इस मैच के लिए उपकप्तान भी बनाया गया है।  गंभीर देंगे सुदर्शन को भी मौका IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 में बल्ले से धमाल मचाने वाले साई सुदर्शन को नंबर-3 पर मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है. गौतम गंभीर ने भी संकेत दिए हैं कि टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज को लंबी पारी खेलने की जिम्मेदारी सौंपने के मूड में है. साई ने IPL 2026 में 722 रन बनाए थे और अब वह उसी फॉर्म को टेस्ट क्रिकेट में भी जारी रखना चाहेंगे. साई के प्लेइंग-11 में जगह बनाने का मतलब यह है कि देवदत्त पडिक्कल को बाहर बैठना पड़ेगा।  गर्दन की चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछला टेस्ट नहीं खेलने वाले शुभमन गिल अब पूरी तरह फिट हैं और नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते नजर आएंगे. वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ के लिए यह मुकाबला बेहद खास रहने वाला है. पंत अपने करियर का 50वां टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे और टीम उनसे बड़ी पारी की उम्मीद करेगी. नीतीश कुमार रेड्डी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की भूमिका में नजर आ सकते हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावित किया है।  इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर का खेलना भी तय माना जा रहा है. सुंदर टीम को स्पिन के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी गहराई देंगे. कुलदीप यादव भारत के मुख्य स्पिनर होंगे. रवींद्र जडेजा की गैरमौजूदगी में कुलदीप पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. वहीं घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले हर्ष दुबे को टेस्ट डेब्यू का मौका मिल सकता है।  हालांकि हाल के दिनों में मोहम्मद सिराज के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन ताजा संकेतों के अनुसार वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रह सकते हैं. सिराज वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 चक्र में भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं और अफगानिस्तान के खिलाफ तेज आक्रमण की अगुआई करेंगे. उनका साथ देने के लिए प्रसिद्ध कृष्णा सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. ऐसे में पंजाब के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।  भारतीय टीम की संभावित प्लेइंग-11: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उप कप्तान), साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा। 

आज का मौसम: मॉनसून की रफ्तार तेज, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी

तिरुवनन्तपुरम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और कर्नाटक में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। यूपी का मौसम पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार का मौसम बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों का मौसम हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

डिजिटल सुशासन और साइबर सुरक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर हुआ पुरस्कृत मध्यप्रदेश : मंत्री विजयवर्गीय

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने डिजिटल सुशासन, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा तथा नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचार किए हैं। यह राष्ट्रीय पुरस्कार मध्यप्रदेश द्वारा उत्कृष्ट नागरिक सेवाओं के वितरण और तकनीकी सुधारों की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का एक गौरवशाली प्रतीक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन को मध्यप्रदेश पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रभावी रूप से आगे बढ़ा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग नागरिकों को उत्कृष्ट, सरल एवं पारदर्शी डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत है और साथ ही साइबर सुरक्षा एवं डेटा संरक्षण के प्रति भी समान रूप से संवेदनशील है। विभाग का उद्देश्य केवल सेवाओं का डिजिटलीकरण करना नहीं, बल्कि प्रदेश में एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल इको सिस्टम स्थापित करना है, जहां तकनीक, सुरक्षा और नागरिकों के विश्वास साथ आगे बढ़ें। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा है कि ई-नगर पालिका परियोजना को नागरिक सेवाओं को सरल, तेज़ एवं पारदर्शी बनाने एवं नागरिकों के डेटा की सर्वोच्च सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म आधुनिक क्लाउड अवसंरचना, जीरो ट्रस्ट ऑर्किटेक्चर, डेटा एन्क्रिप्शन, निरंतर साइबर निगरानी और उन्नत साइबर सुरक्षा मानकों पर आधारित है। इससे नागरिकों की जानकारी की गोपनीयता, अखंडता एवं उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है, साथ ही सभी आवश्यक सुरक्षा एवं अनुपालन मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। विभाग द्वारा संचालित ई- नगर पालिका परियोजना को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाना प्रसन्नता का विषय है। मंत्री  विजयवर्गीय ने ई-नगरपालिका 2.0 की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत जीआईएस आधारित संपत्ति प्रबंधन, क्लाउड आधारित डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएं और उमंग सहित विभिन्न शासकीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों से एकीकरण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में इस सिस्टम के माध्यम से 20 से अधिक मॉड्यूल एवं 24 नागरिक सेवाओं का एकीकृत संचालन सफलता पूर्वक किया जा रहा है, जिससे नगरीय निकायों की कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश में नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा और 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। मंत्री  विजयवर्गीय ने विभाग की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए उनके उत्कृष्ट व समर्पित कार्यों की सराहना की और भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार पूरी टीम के कड़े परिश्रम, नवाचार और राज्य में पारदर्शी डिजिटल सुशासन स्थापित करने के संकल्प का एक सुखद प्रतिफल है।