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भुल्लर की याचिका खारिज करने की मांग, CBI बोली- ट्रायल टालने की हो रही कोशिश

अमृतसर  रिश्वत मामले में फंसे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा मुकदमा चलाने की मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई होगी। इस याचिका का CBI ने विशेष अदालत में विरोध किया है।  CBI ने अपने जवाब में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 19(2) के तहत सक्षम प्राधिकारी ने जांच से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता की लिखित शिकायत के आधार पर 16 अक्टूबर 2025 को डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्णु शारदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद 3 दिसंबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।CBI ने अदालत को बताया कि 13 मार्च को अदालत इस मामले में संज्ञान ले चुकी है और उस समय वैध अभियोजन स्वीकृति आदेश रिकॉर्ड पर मौजूद था। ऐसे में अब सैंक्शन आदेश की वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मुख्य सचिव को दी गई जानकारी CBI ने भुल्लर के इस दावे को गलत बताया कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी केवल पंजाब सरकार ही दे सकती थी। एजेंसी ने कहा कि भुल्लर IPS अधिकारी हैं और उन्हें नौकरी से हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है। उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी थी। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार को प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा गया था। 3 दिसंबर 2025 को सैंक्शन प्रस्ताव भेजते समय पंजाब के मुख्य सचिव को भी इसकी जानकारी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला CBI ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी से जुड़े सवाल ट्रायल के दौरान उठाए जा सकते हैं। इस समय ऐसी याचिका दाखिल करना जल्दबाजी है। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि रिश्वत मांगना या लेना किसी भी सरकारी अधिकारी के आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हो सकता। इसलिए आरोपी द्वारा अतिरिक्त कानूनी सुरक्षा का दावा भी इस मामले में लागू नहीं होता। ट्रायल में देरी की कोशिश: CBI CBI ने अदालत से कहा कि आरोपी की याचिका का उद्देश्य आरोप तय करने की प्रक्रिया को लंबित रखना और ट्रायल में देरी करना है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।

1 लाख मतदाताओं के फैसले पर टिकी नजर, आज आएंगे 227 पदों के चुनाव नतीजे

रायपुर. छत्तीसगढ़ में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों के आम एवं उप चुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से मतगणना शुरू होगी और इसके साथ ही 5 नगरीय निकाय अध्यक्ष, 71 पार्षद, 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला सामने आने लगेगा। बता दें कि मतों की गणना प्रदेश के 13 निर्धारित मतगणना केंद्रों में की जाएगी, जहां मतगणना कार्य संपन्न कराने के लिए 395 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों, समर्थकों और राजनीतिक दलों में उत्सुकता चरम पर है। इन चुनावों को स्थानीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनमें कई नवगठित नगर पंचायतों और रिक्त पंचायत पदों के लिए जनप्रतिनिधियों का चुनाव हुआ है। चुनाव परिणाम आने के बाद संबंधित क्षेत्रों में विकास और स्थानीय प्रशासन की नई दिशा तय होगी। मई में जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग ने मई में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 1 जून को मतदान कराया गया, जबकि आज यानी 4 जून को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार पूरे चुनावी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी। 5 अध्यक्ष और 71 पार्षद पदों पर सबकी नजर नगरीय निकाय चुनाव में कुल 5 अध्यक्ष पद और 71 पार्षद पदों के लिए मतदान हुआ था। इनमें नवगठित नगर पंचायतों के चुनाव भी शामिल हैं। राजनांदगांव जिले की घुमका, जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह, सूरजपुर जिले की शिवानंदनपुर और बलौद जिले की पलारी नगर पंचायत के नतीजों पर विशेष नजर रहेगी। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला था। पंचायतों में भी कई महत्वपूर्ण पदों का फैसला पंचायत चुनाव में 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए मतदान कराया गया था। कई जगहों पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और ग्रामीण नेतृत्व को लेकर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसका परिणाम आज सामने आएगा। मतदान में दिखा था जबरदस्त उत्साह 1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। नगरीय निकाय चुनाव में 31,928 मतदाताओं में से 27,006 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत चुनाव में 1,02,797 मतदाताओं में से 79,968 लोगों ने वोट डाले और 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। मतदान के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में 96 और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया था। राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें मतगणना को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में उत्सुकता चरम पर है। मतदान के बाद से ही जीत-हार को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कई सीटों पर कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में एकतरफा मुकाबले की भी चर्चा है। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हों, लेकिन इनके परिणामों को राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक ताकत के पैमाने के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में आज आने वाले नतीजों पर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।

हीटवेव से मिलेगी राहत, पंजाब में आज से तेज हवाएं और बारिश के आसार, 3 दिन मौसम रहेगा खराब

चंडीगढ़ पंजाब में भीषण गर्मी से आज राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने आज से अगले चार दिनों तक तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। वहीं बुधवार को भीषण गर्मी का असर जारी रहा और फरीदकोट में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा।  मौसम विभाग के अनुसार पंजाब में तापमान सामान्य से 2.7 डिग्री नीचे रहा, लेकिन शुष्क मौसम के कारण इसमें 0.2 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। वीरवार और शुक्रवार को मौसम सबसे अधिक प्रभावित रहने की संभावना है। इस दौरान कई जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और बारिश होने के आसार हैं।  चंडीगढ़ में आज (4 जून) से लेकर 6 जून तक बारिश और आंधी का अलर्ट ऑरेंज है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है, जबकि इसके बाद मौसम ड्राई रहेगा। अभी हीट वेव से राहत बनी रहेगी। जून की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने फिर से अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबित तापमान में 0.2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, हालांकि यह अभी भी सामान्य से 2.7 डिग्री नीचे है। फरीदकोट में सबसे अधिक तापमान 42.6 डिग्री दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार, आज पंजाब में बारिश होने की संभावना है। हालांकि 5 जून से बारिश की गतिविधियां पश्चिमी क्षेत्रों से कम होने लगेंगी और धीरे-धीरे पूर्वी इलाकों की ओर शिफ्ट होंगी। इसी तरह आज-कल चंडीगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। यहां तेज हवाएं चल सकती हैं और मूसलाधार बारिश भी हो सकती है। सभी जिलों में तापमान 35 से 42 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। आठ जून से फिर शुष्क होगा मौसम छह और सात जून के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन दिनों 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बदलाव से तापमान में 4 से 5 डिग्री तक गिरावट आ सकती है।अमृतसर और लुधियाना का अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री, पटियाला का 39.4 डिग्री और रूपनगर का 37.4 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं अमृतसर में सबसे कम 22.4 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। विभाग के अनुसार आठ जून से मौसम फिर शुष्क हो जाएगा।  23% कम बारिश दर्ज जून में अब तक 23 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। 3 जून 2026 को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। पिछले 24 घंटों (2 जून सुबह 8:30 बजे से 3 जून सुबह 8:30 बजे तक) अमृतसर में 7.8 मिमी, तरनतारन में 4.7 मिमी, गुरदासपुर में 3.8 मिमी, फिरोजपुर में 2.2 मिमी और फरीदकोट में 0.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं लुधियाना, पटियाला, बठिंडा और होशियारपुर समेत कई जिलों में बारिश नहीं हुई। पंजाब में औसतन बारिश 1.2 मिमी दर्ज की गई, जो सामान्य 1.5 मिमी के मुकाबले 23 प्रतिशत कम है। हालांकि जून के पहले तीन दिनों (1 से 3 जून) के आंकड़े देखें तो अमृतसर में सामान्य से 460 प्रतिशत, तरनतारन में 200 प्रतिशत और फिरोजपुर में 175 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। दूसरी ओर पठानकोट, जालंधर, मोहाली और संगरूर समेत राज्य के कई हिस्सों में अब तक एक भी मिमी बारिश दर्ज नहीं हुई। मानसून अब आगे बढ़ने लगा मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। 4 जून के आसपास इसके केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में पहुंचने के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय है। इसके अलावा उत्तर पाकिस्तान के ऊपर भी एक नया पश्चिमी विक्षोभ बन गया है। इससे उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम बदला रह सकता है। इस दौरान तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है। तीन दिन ऐसा रहेगा मौसम…     5 जून: फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, मानसा, संगरूर और पटियाला के कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसी दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।     6 जून: फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा और मानसा के कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं (40–50 किलोमीटर प्रति घंटा) चलने की संभावना है। इसके साथ ही इन जिलों और फरीदकोट में हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है।     7 जून: कोई अलर्ट नहीं।

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो साल में प्रारंभ किये प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली श्रीमती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित … Read more

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी योगी सरकार जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, नगरीय परिवहन को मिलेगा आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल स्वरूप यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं, निजी निवेश से बढ़ेगी सेवा गुणवत्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मिली स्वीकृति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में  आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 24 प्रस्तावों को कैबिनेट की ओर से स्वीकृति दी गई। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी होंगे  कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति को मंजूरी आश्रितों को समयबद्ध व त्वरित सहायता होगी सुनिश्चित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक बंदियों के आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को मुआवजा भुगतान के लिए "उत्तर प्रदेश बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति" बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। नई नीति का उद्देश्य बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता तथा पीड़ित परिवारों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करना है। वर्तमान में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली की संस्तुतियों के आधार पर मुआवजा भुगतान की व्यवस्था प्रचलित है। हालांकि इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन और औपचारिकताओं के कारण मृतक बंदियों के आश्रितों को मुआवजा मिलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और संस्थागत नीति बनाने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान अधिक त्वरित और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे सभी मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए बनेगी एसओपी  योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास क्षेत्र, विस्तारित विकास क्षेत्र एवं विनियमित क्षेत्रों में, जहां अभी महायोजना तैयार नहीं है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक समस्या का समाधान होगा। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए मानचित्रों की वैधता को लेकर जो प्रश्न उठ रहे थे, उन्हें विनियमतीकरण के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिन विकास क्षेत्रों, विस्तारित विकास क्षेत्रों अथवा विनियमित क्षेत्रों की महायोजना अभी तैयार नहीं हुई है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए एक स्पष्ट और … Read more

अगरकर और गंभीर लेंगे बड़ा फैसला, T20 टीम की कप्तानी की रेस में श्रेयस सबसे आगे

नई दिल्ली टीम इंड‍िया को टी20 वर्ल्ड कप 2026 ज‍िताने के बावजूद कप्तान सूर्यकुमार यादव पर संकट है, उनकी हाल‍िया फॉर्म गड़बड़ रहा, जिस वजह से उनकी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही है।  टी20 वर्ल्ड कप में उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, जबकि आईपीएल 2026 में भी उनका बल्ला लगातार संघर्ष करता नजर आया. यही वजह है कि टीम  सेलेक्टर्स अब भविष्य को ध्यान में रखते हुए टी20 टीम के लिए नए नेतृत्व विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।   जानकारी के अनुसार टीम इंड‍िया की अगली टी20 सीरीज, जो आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर खेली जानी है, उससे पहले कप्तानी को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. इस रेस में श्रेयस अय्यर सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं. हालांकि अंतिम फैसला लेने से पहले सूर्यकुमार यादव के भविष्य और टीम की दिशा को लेकर हेड कोच गौतम गंभीर से भी राय-मशविरा किया जाएगा।  सूत्रों का कहना है कि सेलेक्टर्स की प्राथमिकता केवल अगली सीरीज नहीं, बल्कि अगले दो टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए एक दीर्घकालिक कप्तान चुनना है. इसी वजह से ऐसे खिलाड़ी की तलाश हो रही है जो लंबे समय तक टीम का नेतृत्व कर सके।  श्रेयस अय्यर के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क उनका नेतृत्व अनुभव और हालिया प्रदर्शन है. आईपीएल में कप्तानी करते हुए उन्होंने खुद को एक सफल लीडर के रूप में स्थापित किया है. साथ ही बल्लेबाजी में भी लगातार रन बनाकर उन्होंने अपनी दावेदारी मजबूत की है. माना जा रहा है कि टीम प्रबंधन उन्हें टी20 टीम में नए नंबर-4 बल्लेबाज के रूप में भी देख रहा है. यदि ऐसा होता है तो वह प्लेइंग इलेवन में सूर्यकुमार यादव की जगह ले सकते हैं।  क्या केवल अय्यर ही हैं टी20 कप्तानी की रेस में…  हालांकि कप्तानी की दौड़ केवल अय्यर तक सीमित नहीं है. शुभमन गिल, अक्षर पटेल, तिलक वर्मा और इशान किशन भी सेलेक्टर्सओं की नजर में हैं. इनमें तिलक और ईशान ऐसे नाम बताए जा रहे हैं जो अंतिम समय में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं. अगर अय्यर को कप्तानी मिलती है तो इन दोनों में से किसी एक को उप-कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।  इस बीच टीम सेलेक्शन और भविष्य की रणनीति को लेकर मुख्य सेलेक्टर्स अजीत अगरकर और हेड कोच गौतम गंभीर के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय होने की भी चर्चा है. खासकर नेशनल टीम में विशेषज्ञ खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर दोनों की सोच अलग बताई जाती है. सूत्रों के मुताबिक अगरकर चयन समिति में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और कप्तानी से जुड़े फैसले में उनकी राय अहम रहने वाली है।  आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से पहले टीम इंड‍ियाीय क्रिकेट में सबसे बड़ी चर्चा अब यही है कि क्या सूर्यकुमार यादव टी20 कप्तान बने रहेंगे या फिर टीम इंडिया एक नए दौर की शुरुआत श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में करेगी। 

सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले योगी सरकार का तोहफा, उम्मीदवारों को मिलेगी किराए में रियायत

लखनऊ यूपी में सिपाही बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश में होने जा रही आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभ्यर्थियों की सुविधाओं को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं. सबसे बड़ा फैसला यह है कि परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए रियायती किराये पर विशेष बसों का संचालन किया जाएगा, ताकि उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस भर्ती परीक्षा और आगामी जनभागीदारी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि आरक्षी नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 8, 9 और 10 जून को आयोजित होगी. परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में कराई जाएगी।  सबसे अहम बात यह है कि इस भर्ती परीक्षा में करीब 29 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियां भी युद्धस्तर पर की जा रही हैं. परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, निगरानी तंत्र और कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण मुख्यमंत्री के सामने रखा गया. मुख्यमंत्री ने सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।  धूप में खड़ा नहीं रहेगा कोई अभ्यर्थी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा निर्देश दिया, जिसकी चर्चा अब युवाओं के बीच हो रही है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा रहने की नौबत नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध रहनी चाहिए. लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा देने आने वाला हर अभ्यर्थी व्यवस्था से संतुष्ट होकर वापस जाए. यही सरकार और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।  बस किराए में छूट, विशेष बसें भी चलेंगी परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी समस्या अक्सर यात्रा को लेकर सामने आती है. कई अभ्यर्थियों को अपने जिले से दूसरे जिले में जाकर परीक्षा देनी पड़ती है. ऐसे में परिवहन खर्च और समय दोनों बड़ी चुनौती बन जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि अभ्यर्थियों के लिए अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए. साथ ही रियायती किराये की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।   सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया की लगातार निगरानी की जाए. यदि कोई व्यक्ति अफवाह फैलाने या भ्रामक जानकारी प्रसारित करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. सरकार का उद्देश्य है कि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने और परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।  6 जून को होगा पूर्वाभ्यास मुख्यमंत्री ने परीक्षा से पहले 6 जून को पूर्वाभ्यास कराने के निर्देश भी दिए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या सामने न आए. सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और केंद्र व्यवस्थापकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से करे. गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. यदि कहीं बिजली बाधित होती है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी पहले से तैयार रखी जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती रहेगी और संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी की जाएगी।  पर्यावरण अभियान को भी मिलेगी रफ्तार बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी कार्यक्रमों की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रदेशभर में कम से कम 5 करोड़ पौधे लगाए जाएं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधों की उपलब्धता, जियो टैगिंग और संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व सम्मान का प्रतीक अभियान बनना चाहिए. मुख्यमंत्री ने सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए।  12 साल पूरे होने पर जनसंवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों, वकीलों, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप इनोवेटर्स के साथ संवाद किया जाएगा. सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने के निर्देश दिए. इन चौपालों में लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और सरकारी योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।  उन्होंने कहा कि मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी गांवों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय समस्याओं को नजदीक से समझा जा सके. बैठक के अंत में मुख्यमंत्री का फोकस एक बार फिर भर्ती परीक्षा पर ही रहा. उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और संवेदनशीलता के साथ संपन्न कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

बंगाल में NIA का ताबड़तोड़ एक्शन, बम धमाके की जांच में 9 स्थानों पर रेड

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के भांगर में चुनावी हिंसा के दौरान हुए विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा एक्शन लिया है. NIA की टीम ने आज पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक शौकत मुल्ला (Shaukat Mollah) के आवास पर छापेमारी की है।  सूत्रों के अनुसार, विस्फोट की घटना के पीछे छिपे पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए एनआईए एक साथ 9 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. संदिग्धों के घरों और ठिकानों को खंगालकर ब्लास्ट से जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है. 19 मार्च को भांगर इलाके में हुए बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. जांच एजेंसी इस घटना को चुनावी हिंसा से जोड़कर देख रही है।  इसी क्रम में NIA ने आज शौकत मुल्ला के घर पर छापेमारी की है. इस छापेमारी के दौरान NIA की टीमें मौके से महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स और डिजिटल सबूतों को खंगालने में जुटी हुई हैं. अधिकारियों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से भांगर ब्लास्ट केस में बहुत जल्द कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।  इस बड़ी कार्रवाई के बीच शौकत मोल्लाह की पत्नी सायरा बानू मोल्लाह का भी बयान सामने आया है. उनका कहना है कि उन्हें एनआईए द्वारा बुलाया गया था, इसके अलावा उन्हें कोई और जानकारी नहीं दी गई।  दरअसल, 19 मार्च को भांगर में हुए विस्फोट की घटना चुनावी हिंसा के दौरान हुई थी. इस ब्लास्ट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल भी हुए थे. NIA ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और इसमें चुनावी हिंसा व विस्फोट के बीच संभावित कनेक्शन की गहन छानबीन कर रही है।  NIA की इस कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है. शौकत मुल्ला TMC के पूर्व विधायक हैं और भांगर इलाका लंबे वक्त से राजनीतिक हिंसा के लिए जाना जाता रहा है। 

हरित कौशल विकास के लिए हुई ऐतिहासिक पहल

UPCAMP प्राधिकरण और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र के बीच एमओयू हरित कौशल विकास के लिए हुई ऐतिहासिक पहल एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा यह पहल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी लखनऊ, विश्व बैंक के सहयोग से क्रियान्वित उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनिज्मन्ट प्रोजेक्ट (UPCAMP) अथॉरिटी और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के बीच बुधवार को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय में एमओयू हुआ। इसका उद्देश्य राज्य में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और हरित कौशल बल के विकास को सुदृढ़ करना है। यह एमओयू पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।  इस एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की योजना है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और स्थानीय निकायों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी की अध्यक्षता में यह आयोजन हुआ। इसमें विभिन्न क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र (विभिन्न विश्वविद्यालय एवं इंस्टीट्यूट) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी, दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एण्ड सस्टैनबल डेवलपमेंट, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी रूड़की, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अकबरपुर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर, मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी प्रयागराज के साथ UPCAMP की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी चंद्रकला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इन केंद्रों की भागीदारी से पूरे प्रदेश में हरित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा। UPCAMP के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद राहिब ने परियोजना के बारे मे सभी संस्थानों को जानकारी दी| मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों पर सरकारी अधिकारियों, स्थानीय निकायों एवं समुदायों की क्षमता का विकास करना। हरित कौशल बल का विकास: युवाओं को हरित रोज़गार के अवसरों के लिए तैयार करते हुए सक्षम एवं प्रशिक्षित हरित कौशल बल (ग्रीन स्किल फोर्स) का निर्माण करना। ज्ञान साझाकरण: क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के माध्यम से शोध, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रसार करना।

राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति

मोहनलालगंज में बनेगा नया उप निबंधक कार्यालय लखनऊ  योगी कैबिनेट ने जनपद लखनऊ के मोहनलालगंज में नए उप निबंधक कार्यालय के निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से क्षेत्रीय नागरिकों को भूमि, भवन, विवाह, किरायानामा, गिफ्ट डीड तथा अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण संबंधी सेवाएं अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हो सकेंगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ग्राम मऊ, परगना एवं तहसील मोहनलालगंज स्थित कुल 953 वर्गमीटर भूमि राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त उप निबंधक कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सब-रजिस्ट्रार कक्ष, रजिस्ट्रेशन कक्ष, अभिलेखागार, प्रतीक्षालय, पेयजल एवं महिला-पुरुष शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार के अनुसार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग राज्य का प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाला विभाग है और प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख विलेखों का पंजीकरण करता है। बढ़ती जनसंख्या और पंजीकरण कार्यों की संख्या को देखते हुए नए कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि राजस्व विभाग द्वारा स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग को उक्त भूमि हस्तांतरण से संबंधित पट्टा विलेख पर स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी। इससे विभागीय प्रक्रिया सरल होगी और भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति उच्चतम न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों तक पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा लाभ कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मुकदमों और वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वर्तमान में उन्हें देय रिटेनरशिप एवं बहस शुल्क का निर्धारण 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर किया जा रहा था। बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इन शुल्कों में वृद्धि का निर्णय लिया है। योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी एवं दक्ष अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और अधिक प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग द्वारा की जाएगी। मक्का खरीद नीति को मंजूरी, 15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर खरीद खरीदे गए मक्का का मूल्य यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों को हस्तांतरित किया जाएगा  कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 (रबी फसल) के लिए मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत मक्का खरीद नीति को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रदेश में मक्का खरीद 15 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक की जाएगी। इसके लिए फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर कुल 25 जनपदों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों से खरीद कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, आधार कार्ड एवं फोटोयुक्त पहचान पत्र के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल से ऑनलाइन कराया जाएगा। योगी सरकार ने किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का मूल्य पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार लिंक एवं एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर हस्तांतरित किया जाएगा। 1460 करोड़ रुपये से पांच नए जिला कारागारों का होगा निर्माण योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पांच जनपदों- मुरादाबाद, कानपुर नगर, औरैया, ललितपुर और भदोही में नवीन जिला कारागारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं पर 1460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य कारागारों में भीड़भाड़ कम करना, बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कारागार प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है। निर्णय के अनुसार मुरादाबाद में 2000 बंदी क्षमता का नया जिला कारागार 386.91 करोड़ रुपये की लागत से, कानपुर नगर में 2030 बंदी क्षमता का कारागार 384.05 करोड़ रुपये की लागत से तथा औरैया में 1056 बंदी क्षमता का कारागार 264.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जाएगा। इसी प्रकार ललितपुर में 552 बंदी क्षमता की नई जेल 225.06 करोड़ रुपये तथा भदोही में 574 बंदी क्षमता की नई जेल 209.18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नए कारागारों के निर्माण से बंदियों के आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुधारात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।  इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी झांसी में गोआश्रय और पशु सेवा केंद्र के लिए एमओयू को मंजूरी, पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधियां कानपुर में ईएसआई अस्पतालों के हस्तांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार द्वारा संचालित पांडुनगर अस्पताल भारत सरकार को और भारत सरकार द्वारा संचालित जाजमऊ अस्पताल राज्य सरकार को सौंपा जाएगा