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बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: ‘ऑब्सेशन’ ने पांचवें दिन भी पकड़ी रफ्तार, बाकी फिल्मों पर भारी

 सिनेमाघरों में कई बॉलीवुड फिल्में लगी हैं। इनमें ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’, 'चांद मेरा दिल' और 'पति पत्नी और वो दो' शामिल हैं। इन सभी फिल्मों पर हॉलीवुड फिल्म 'ऑब्सेशन' भारी पड़ रही है। साउथ की फिल्म 'दृश्यम' का कलेक्शन 100 करोड़ से ज्यादा हो गया है। वहीं 'करुप्पु' 200 करोड़ क्लब के करीब है। आइए जानते हैं मंगलवार को सभी फिल्मों ने कितना कलेक्शन किया है। ऑब्सेशन हॉलीवुड की हॉरर फिल्म 'ऑब्सेशन' को भारतीय दर्शक प्यार दे रहे हैं। पांचवें दिन इसने 2.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। सोमवार को इस फिल्म ने भारत में दो करोड़ रुपये कमाए थे। पांच दिनों में इस फिल्म का कुल कलेक्शन 12.50 करोड़ रुपये हो गया है। भारत में यह फिल्म 29 मई को रिलीज हुई थी। दुनियाभर में यह 15 मई को रिलीज हुई थी चांद मेरा दिल लक्ष्य और अनन्या पांडे की अदाकारी वाली फिल्म 'चांद मेरा दिल' का कलेक्शन भी काफी घट गया है। दूसरे मंगलवार को इसने एक करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। सोमवार को इसने एक करोड़ रुपये कमाए थे। फिल्म का टोटल कलेक्शन 26.30 करोड़ रुपये हो गया है। सिनेमाघरों में यह फिल्म 22 मई को रिलीज हुई थी। दृश्यम 3 मलयालम फिल्म 'दृश्यम 3' रिलीज के बाद से ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। दूसरे वीकएंड के बाद इसके कलेक्शन में गिरावट आई है। दूसरे मंगलवार को इसने 1.55 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। सोमवार को इसने 2.20 करोड़ रुपये कमाए थे। फिल्म का टोटल कलेक्शन 100.45 करोड़ रुपये हो गया है। करुप्पु सूर्या की अदाकारी वाली फिल्म 'करुप्पु' की कमाई तीसरे वीकएंड के बाद घटी है। तीसरे मंगलवार को इसने 2.05 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। सोमवार को इसने 2.40 करोड़ रुपये कमाए थे। 19 दिनों में फिल्म का टोटल कलेक्शन 186.90 करोड़ रुपये हो गया है। यह फिल्म 14 मई को रिलीज हुई थी।  

दुश्मन को हराना है तो अपनाएं चाणक्य की ये 7 रणनीतियां, बिना बोले भी जीत सकते हैं हर लड़ाई

जरा सोचिए, आप कुछ नहीं बोलते हैं. आप ना गुस्सा दिखाते हैं, ना सफाई देते हैं, ना जवाब देते हैं. लेकिन, सामने वाला अंदर ही अंदर टूटने लगता है. क्यों? दरअसल, इस विषय में चाणक्य कहते हैं कि सबसे खतरनाक हथियार तलवार नहीं, चुप्पी होती है. आज की दुनिया में जो ज्यादा बोलता है, वो जल्दी पकड़ा जाता है. और जो चुप रहता है, वही खेल पलट देता है. आइए चाणक्य नीति से जानते हैं उन 7 ट्रिक्स के बारे में दुश्मन को हराने में आपकी मदद करेगी. चाणक्य नीति के मुताबिक, इन तरीकों से दुश्मन खुद अपनी हार का कारण बनता है और उसे पता भी नहीं चलता है. 1. चुप्पी- सबसे बड़ा डर चाणक्य कहते हैं कि अज्ञात सबसे बड़ा भय है. क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति जल्दी रिएक्ट करता है, जल्दी सफाई देने लगता है और खुद को साबित करने लगता है. और यहीं से आप हारने लगते हैं. क्योंकि जब आप हर बात का जवाब देते हैं, तो आप सामने वाले को अपनी कमी बता देते हैं कि आपकी सोच और आपकी प्रतिक्रिया क्या है. लेकिन जब आप चुप रहते हैं तो सामने वाला कंफ्यूज हो जाता है. ऐसे में वो सोचता है कि ये बोल क्यों नहीं रहा है? क्या इसे कुछ पता है? या ये मुझसे एक कदम आगे है? यहीं से उसके मन में डर शुरू होता है. 2. ऑफिस या लाइफ का असली सीन कोई आपको नीचा दिखाने की कोशिश करता है. अगर आप तुरंत जवाब देते हैं तो वह जीत जाता है. क्योंकि उसे वही मिला जो वह चाहता था, आपकी प्रतिक्रिया. लेकिन, अगर आप शांत रहते हैं,  आत्मविश्वास के साथ. तो ऐसे में बिना बोले ही खेल पलट जाता है. अब लोग आपको नहीं, उसे देखने लगते हैं. 3. धैर्य चाणक्य कहते हैं कि, 'जो प्रतीक्षा कर सकता है, वही शासन करता है.' जब आप रिएक्ट नहीं करते हैं तो दुश्मन बेचैन हो जाता है. वो ज्यादा बोलता है और ज्यादा गलतियां करता है. याद रखिए कि जो ज्यादा बोलता है, वो खुद अपना सबूत बन जाता है. 4. बॉडी लैंग्वेज यानी बिना बोले वार चुप रहना मतलब सिर्फ मौन नहीं होता है बल्कि दुश्मन पर बड़ा वार होता है. 5. दुश्मन खुद टूटता है चाणक्य नीति के मुताबिक, जब सामने वाला बार-बार कोशिश करता है और आप नहीं टूटते हैं तो वह खुद टूटने लगता है. वो उकसाएगा, गॉसिप फैलाएगा, झूठ बोलेगा, लेकिन आप शांत रहते हैं. धीरे-धीरे लोग समझ जाते हैं कि समस्या आप नहीं, वो है. 6. आखिरी वार: मौन चाणक्य कहते हैं कि, मौन तभी तोड़ो जब शब्द तीर बन जाए.' आप लंबे समय तक चुप रहते हैं, सब कुछ देखते हैं, समझते हैं और फिर सही समय पर तथ्य के साथ बस एक वाक्य बोलते हैं. ना गुस्सा, ना बहस और वही एक वाक्य पूरा खेल खत्म कर देता है. अब वो रिएक्ट करता है और आप शांत रहते हैं.

कलेक्टर के नाम से आदेश जारी करने पर घिरे DEO, RTI मामलों में अनदेखी का भी आरोप

बलरामपुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. डीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि विभागीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालय के आधिकारिक लेटरपैड का उपयोग करने के बजाय कई मामलों में कलेक्टर कार्यालय के नाम से आदेश जारी कर रहे हैं. इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने में असफल रहे हैं. कार्यालय के नियमित कर्मचारियों को दरकिनार कर बाहरी लोगों से काम लिया जा रहा है. इस बीच डीईओ पर यह भी आरोप है कि विद्यालयों से मंगाए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कार्यालय में रखने के बजाय निजी निवास पर ले जाया जाता है. सूत्रों का कहना है कि कई बार संबंधित शाखा के कर्मचारियों को भी इन दस्तावेजों की जानकारी नहीं होती, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित होते हैं. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के मामलों में भी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि सैकड़ों आरटीआई आवेदन लंबित पड़े हैं, जबकि आवक-जावक शाखा को भी कई मामलों की जानकारी नहीं दी जाती. इससे आवेदकों को समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही है. गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पूर्व में भी कई विवादों और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में जिले के नवनियुक्त कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी से टेलिफोनिक चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है अगर ऐसा आदेश जारी किया जा रहा है तो विधिवत जांच कराई जाएगी और उचित क्रिया भी लिया जाएगा.

दिग्विजय सरकार में बंद हुआ ट्रिब्यूनल अब फिर होगा शुरू, ड्राफ्ट तैयार करा रही मोहन यादव सरकार

भोपाल  म.प्र. के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों के भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। ट्रिब्यूनल के गठन से इन मामलों का अलग से और तेजी से निपटारा हो सकेगा। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था जिसे अब एक नए स्वरूप में फिर से चालू किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच बनी सहमति बन चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन का खाका तैयार करने में जुटा है। उधर, एमपी हाईकोर्ट में पेंडिंग केस बढ़ने के कारण न्यायाधीशों के नए पद सृजित किए जाने के प्रस्ताव भी सरकार तक पहुंचे हैं। राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन की कवायद को लेकर सरकार का मानना है कि इससे एमपी के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों के मामले कोर्ट के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए निराकृत हो सकेंगे। सरकार का यह भी मानना है कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एसएटी) के गठन के बाद एमपी के मुख्य हाईकोर्ट जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में हो सकेगी। ऐसे में इन न्यायालयों पर पड़ने वाले न्यायालयीन मामलों का बोझ कम हो सकेगा। कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल के फैसले की अपील के लिए ही किए जा सकेंगे। सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही तीनों ही न्यायालय में कर्मचारियों से संबंधित साढ़े 4 लाख मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से इस फैसले को जल्दी ही लागू करने के संकेत भी दिए हैं। दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की वर्किंग की स्टडी मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश के एसएटी के गठन के पहले दूसरे राज्यों में संचालित राज्य प्रशासनिक अधिकरण की वर्किंग और वक्त के हिसाब में किए गए बदलाव की स्टडी भी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की जानकारी लेकर एमपी की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। फिर इसे विधानसभा में विधेयक लाकर मंजूरी दी जाएगी। दिग्विजय सरकार में बंद किया गया था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। इसके पीछे तब की दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा एमपी का पुनर्गठन और प्रशासनिक कारण बताए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था। 13 साल ही काम कर पाया था ट्रिब्यूनल इस अधिकरण को राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अंतर्गत 29 जून 1988 को स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों का निपटारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य बेंच (जबलपुर) और खंडपीठों (इंदौर और ग्वालियर) द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण राज्य के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए यह एक प्रमुख संस्था थी जिसमें वर्ष 2001 से काम बंद हुआ और 2003 में केंद्र ने इसको मंजूरी दे दी थी। भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवाद, शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार जब यह ट्रिब्यूनल काम कर रहा था तो इसमें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किए जाते थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती थी। ट्रिब्यूनल को राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार था। इसमें यह व्यवस्था भी थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकती थी। प्रशासनिक न्याय अधिकरण को जब बंद किया गया था, तब प्रदेश में कर्मचारियों से संबंधित लंबित मामलों की संख्या 30 हजार थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था।  

ममता सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका, स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को दी नई जिम्मेदारी

कोलकाता विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। इसी कड़ी में बुधवार को टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। सूत्रों ने बताया कि ऋतब्रत बनर्जी ने संदीपन साहा और कई अन्य बागी विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे। उन्होंने एक नई नेतृत्व टीम का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें ऋतब्रत को विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता और रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है. ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था. इसके बाद पार्टी में बगावत हो गई है. 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मुलाकात कर उनसे कहा कि वे TMC के असली गुट हैं और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी जाए. विधायकों की अपील पर विचार करते हुए स्पीकर ने  ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है।  गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से चुनाव नतीजे आने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह को TMC से निलंबित कर दिया था। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दिया।  स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी दे दी है. टीएमसी के इस गुट में चार उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं. इनके नाम हैं- जावेद अहमद खान, शबीना यास्मीन, शीलू साह, और संदीपन साह. अकीरजम्मा सदन में टीएमसी के चीफ व्हिप होंगे।  स्पीकर के इस फैसले से साफ हुआ है उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली टीएमसी को असली तृणमूल कांग्रेस माना है।   यह घटनाक्रम विधानसभा में बागी विधायकों की एक बैठक के बाद सामने आया। विधानसभा में हुई इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक मंगलवार को मध्य कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के धरने में मौजूद नहीं था। दूसरी ओर, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे नेता बागी विधायकों की बैठक से दूर रहे।बागियों ने ममता को माना पार्टी सुप्रीमोबागी विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बागी विधायक अपनी लड़ाई को टीएमसी सुप्रीमो के खिलाफ नहीं, बल्कि मौजूदा विधायक दल के नेतृत्व के खिलाफ पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। बागी गुट के सूत्रों ने बताया कि विधायकों ने यह भी साफ कर दिया है कि वे विधायक दल के मामलों पर फैसले लेने के संबंध में अभिषेक बनर्जी के अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं।पार्टी के साथ विश्वासघात हुआ। टीएमसीटीएमसी नेतृत्व ने इस पूरी कवायद को विश्वासघात करार देते हुए खारिज कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संगठन के भीतर बातचीत से किसी भी मतभेद को सुलझाया जा सकता था। अगर उन्हें कोई समस्या थी, तो वे पार्टी के भीतर इस पर चर्चा कर सकते थे। इसके बजाय उन्होंने पार्टी को धोखा देना चुना। बागी विधायकों और उनके समर्थकों को गद्दार बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि टीएमसी इस संकट से उबर जाएगी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट रहेगी।अयोग्य होने से बच जाएंगे बागी विधायकदल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग हुए गुट को अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। चूंकि, विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायक हैं, इसलिए यह सीमा 54 विधायकों की है। यदि बागी गुट का दावा स्वीकार कर लिया जाता है, तो वे आसानी से इस आंकड़े को पार कर लेंगे और सदन में एक अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के अपने दावे को मजबूत करेंगे। यह है मामलाघटनाक्रम की जड़ें छह मई को ममता बनर्जी के आवास पर चुने गए विधायकों की एक बैठक में थीं, जहां विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को विपक्ष के नेता, उप-नेता और मुख्य सचेतक के नामों पर फैसला करने का अधिकार दिया था। इसके बाद टीएमसी ने विधानसभा को सूचित किया कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता होंगे, नयना बंद्योपाध्याय और आशिमा पात्रा उप-नेता होंगी और फिरहाद हकीम मुख्य सचेतक होंगे। हालांकि, विधानसभा सचिवालय ने इस सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की और प्रक्रियागत जरूरतों का हवाला दिया कि ऐसे पदाधिकारियों का चुनाव विधायक दल की एक औपचारिक बैठक में होना चाहिए।हस्ताक्षर पर उठे थे सवालविवाद तब और बढ़ गया जब बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र पर किए गए हस्ताक्षर सही नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस आरोप को खारिज कर दिया और बागियों पर चुनावी झटके के बाद संगठन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसी क्रम में टकराव तब और तेज हो गया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया गया।

Bhopal Administration सख्त, 15 दिन में देना होगा परमिशन का रिकॉर्ड; 576 अवैध कॉलोनियां निशाने पर

भोपाल भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।  हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे। आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं। कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं। फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली) बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई। सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें। फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान 1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

ईरान के हमले से कुवैत में तबाही, हवाई अड्डा बना निशाना

कुवैत  कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। कुवैत स्थित भारत के दूतावास ने इसकी पुष्टि कर दी है। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हमले में 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें हवाई अड्डे के कर्मचारी और यात्री शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले में हवाई अड्डे की सुविधाओं और राजनयिक मिशनों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। इंडियन एंबेसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कुवैत स्थित भारतीय दूतावास आज कुवैत के हवाई अड्डे पर हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर मृतक के परिवार और घटना में घायल हुए लोगों को हर संभव सहायता देने के लिए समन्वय स्थापित किए हुए है।' कुवैत ने जताई कड़ी नाराजगी कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से उनकी जमीन पर क्रूर हमले किए हैं। ईरान के इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। बयान के अनुसार, इन हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई नागरिक और महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं को निशाना बनाया गया। कुवैती विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान के इन हमलों को पूरी तरह खारिज करता है। इस तरह की घटनाएं ना केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 2026 के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का भी उल्लंघन हैं। कुवैत की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा रेड लाइन है, जिसे किसी भी हालत में पार नहीं किया जा सकता। कुवैत देगा ईरान को जवाब! कुवैत सरकार ने इन हमलों का जवाब देने के लिए संभावित उपायों पर विचार करने की बात कही है। कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति पर ध्यान देने और तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की है। कुवैती रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल-1 (टी1) को कई ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। कुवैत पर हमलों के समय ही बुधवार सुबह को बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी चेतावनी सायरन बजाए जाने की जानकारी दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को एक चेतावनी सायरन बजाया गया जिसमें नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और सुरक्षा संबंधी आधिकारिक निर्देशों को पालन करते हुए करीब सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई।

रायपुर में बनेगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस सेंटर, PPP मॉडल पर तैयार होगी परियोजना

रायपुर में विकसित होगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस सेंटर, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के उन्नयन हेतु PPP मॉडल पर प्रस्तावित परियोजना इनडोर स्पोर्ट्स, जिम, स्विमिंग पूल, आधुनिक आवासीय सुविधाओं सहित होगा व्यापक आधुनिकीकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा। देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

मतदाता सूची सुधार अभियान: धनबाद के 2372 बूथों पर रोज 3 घंटे मिलेंगी सेवाएं

धनबाद  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले की तैयारी की प्रक्रिया चल रही है। 30 जून से एसआइआर होना है। मतदाताओं की सुविधा और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों को लेकर धनबाद जिला निर्वाचन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। चार जून से धनबाद जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। इस संबंध में उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी आदित्य रंजन जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीएलओ की बूथ पर नियमित उपस्थिति से मतदाताओं को विभिन्न कार्यों के लिए कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। निर्धारित समय के दौरान अनमैप्ड मतदाताओं की मैपिंग, मतदाता सूची से संबंधित त्रुटियों का सुधार, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पता परिवर्तन तथा अन्य निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा सकेंगे। धनबाद में कुल 2,372 मतदान केंद्र वर्तमान में जिले में 2,372 मतदान केंद्र हैं, जहां बीएलओ प्रतिदिन तीन घंटे उपलब्ध रहेंगे। हालांकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 2,484 हो जाएगी। जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कालिदास मुंडा ने बताया कि प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन तीन घंटे अपने संबंधित बूथ पर रहना अनिवार्य होगा। इससे आम मतदाताओं को सीधे बूथ स्तर पर सेवाएं मिल सकेंगी और अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान व मैपिंग का कार्य भी तेजी से पूरा होगा। मदताता सूची को अद्यतन बनाने में मिलेगी मदद उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एसआईआर अभियान को भी गति मिलेगी और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध एवं अद्यतन बनाने में सहायता मिलेगी। निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से मतदाताओं की भागीदारी बढ़ेगी और चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा सकेगा।  

भरतपुर में रिश्तों की मिसाल: हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी बनीं ‘कलयुग की श्रवण कुमार’

 जयपुर राजस्थान के जिले भरतपुर में  रिश्तों की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने हर आंख को नम कर दिया. हरियाणा की एक बहू अपनी 90 साल की सास को प्लास्टिक के टब में बिठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए पैदल ही '84 कोस' की कठिन परिक्रमा करवा रही है.  जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायल होते ही हर कोई इस नजारे को देखकर भावुक हो गया.  कौन हैं टब में सांस को बिठाकर कंधो पर '84 कोस' की परिक्रमा करने वाली बहू? इस बहू का नाम काजल चौधरी है. जो हरियाणा के हताना गांव की रहने वाली हैं और पेशे से एक लोकप्रिय हरियाणवी लोक गायिका (सिंगर) हैं. काजल की 90 साल की सास चन्द्री देवी पिछले कई सालों से शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और चलने-फिरने में लाचार हैं. चन्द्री देवी के मन में लंबे समय से ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस की परिक्रमा करने की इच्छा थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वह बेबस थीं. जब उनकी बहू काजल को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सास के इस सपने को पूरा करने की कोशिश की.  टब में बैठी सास, सिर पर उठाए बहू हरियाणा के हताना गांव की हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को बड़े प्लास्टिक के टब में बिठाकर सिर पर रखकर पैदल 84 कोस की परिक्रमा करवा रही हैं. गांव बनचारी से परिक्रमा शुरू कर सिंगर काजल ने जहां-जहां से गुजर रही थीं, लोग फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर रहे थे. बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंच रहे हैं. 'सास ने बेटी की तरह पाला, अब फर्ज निभाने की बारी मेरी' काजल चौधरी ने बताया कि उनकी सास चलने-फिरने में असमर्थ हैं. बरसों से उनके मन में 84 कोस परिक्रमा करने की इच्छा थी. सास की यही इच्छा पूरी करने के लिए वह उन्हें भरतपुर की ब्रजभूमि लेकर आई है. काजल ने कहा कि सास ने उन्हें हमेशा बेटी जैसा प्यार दिया.आज जो कुछ भी है सास के आशीर्वाद से है. ऐसे में उनकी इच्छा पूरी करना मेरा फर्ज है. सिंगर काजल बनीं कलयुग की श्रवण कुमार ब्रजभूमि में सास-बहू के इस अद्भुत प्रेम की चर्चा हर जुबान पर है. लोग काजल को कलयुग की श्रवण कुमार बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, काजल ने समाज को नई दिशा दिखाई है.