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यूपी में बच्चों के स्वास्थ्य पर फोकस, ‘पौष्टिक थाली’ से बदल रही नौनिहालों की जिंदगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को कुपोषण के कलंक से मुक्त करने और नई पीढ़ी को शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक मूक क्रांति चल रही है। राज्य सरकार ने 'पीएम पोषण योजना' के अंतर्गत परिषदीय, राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में मिलने वाले मिडडे मील को पूरी तरह 'पोषण सुरक्षा कवच' में बदल दिया है। प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के लाखों छात्र-छात्राओं को अब केवल पेट भरने के लिए भोजन नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और आयरन से भरपूर संतुलित और गुणवत्तापूर्ण 'पौष्टिक थाली' दी जा रही है। इस योजना का सीधा असर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्कूलों में उनकी दैनिक उपस्थिति और सीखने की मानसिक क्षमता पर दिखने लगा है। प्राइमरी और अपर प्राइमरी के लिए तय हुए कड़े पोषण मानक बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास को वैज्ञानिक आधार देने के लिए योगी सरकार ने भोजन में कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा का एक कड़ा मानक तय किया है, जिसे हर स्कूल में अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।      प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5): प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन युक्त भोजन दिया जा रहा है।     उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8): किशोर वय के बच्चों की शारीरिक आवश्यकताओं को देखते हुए प्रतिदिन न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जा रहा है। थाली में शामिल हुए दूध, सोयाबीन और मौसमी फल भोजन को उबाऊ होने से बचाने और बच्चों में चाव पैदा करने के लिए साप्ताहिक मेन्यू में विविधता लाई गई है। अब बच्चों को नियमित रूप से कार्बोहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्व देने के लिए भोजन में निम्नलिखित चीजें शामिल की जा रही हैं।     प्रोटीन की प्रचुरता के लिए विशेष रूप से सोयाबीन और विभिन्न प्रकार की दालें।     विटामिंस और मिनरल्स की कमी को दूर करने के लिए ताजा हरी सब्जियां और मौसमी फल।     बच्चों में कैल्शियम और आयरन की पूर्ति के लिए सप्ताह में निर्धारित दिन दूध का वितरण। मध्याह्न भोजन से आगे बढ़कर बनी 'समग्र स्वास्थ्य नीति' योगी सरकार के इस विजन का सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि यह योजना अब सिर्फ एक प्रशासनिक मध्याह्न भोजन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित करने की एक दूरगामी नीति बन चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, संतुलित भोजन मिलने से गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों में कुपोषण की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्वस्थ शरीर मिलने से बच्चे अब कक्षाओं में अधिक एकाग्र हो पा रहे हैं, जिससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन भी पहले से काफी बेहतर हुआ है। स्वस्थ और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव शासन का मानना है कि एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य की इमारत केवल तभी खड़ी हो सकती है जब उसके बच्चे स्वस्थ और सक्षम हों। शिक्षा और पोषण के इस अनूठे समन्वय के जरिए योगी सरकार न केवल कुपोषण के खिलाफ अपनी जंग को मजबूत कर रही है, बल्कि एक आत्मविश्वासी, ऊर्जावान और मेधावी नई पीढ़ी को भी तैयार कर रही है जो आगे चलकर देश और प्रदेश की प्रगति का मुख्य आधार बनेगी।  

पानी की कमी से निपटने के लिए दिल्ली सरकार का नया ऐलान, सीवर वॉटर होगा इस्तेमाल

नई दिल्ली दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राजधानी में जल संकट को दूर करने के लिए कई नए उपायों की घोषणा की है। भीषण गर्मी के बीच हो रही किल्लत को स्वीकार करते हुए दिल्ली सरकार ने पिछली सरकारों को इसके लिए कसूरवार ठहराया तो यह भी बताया कि अब स्थिति में बदलाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को बताया कि उनकी सरकार सीवर के पानी को साफ करके भी पानी की कमी को पूरा करने पर विचार कर रही है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे सीवर के पानी को ट्रीट करके टॉयलेट या गाड़ी धोने जैसे काम में लाया जा सकता है। प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में रोजाना 1000 एमजीडी पानी घरों में सप्लाई हो रहा है। इसमें से 800 एमजीडी पानी प्रतिदिन सीवर में लौटता है, जबकि केवल 200 एमजीडी पानी का इस्तेमाल लोग पीने या अन्य उपभोग में लाते हैं। प्रवेश वर्मा ने कहा कि सीवर के पानी को एसटीपी प्लांट में इतना ट्रीट किया जाएगा कि वह पीने लायक बन जाएगा। लेकिन फिलहाल उन्हें टायलेट आदि में यूज किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'इस पानी को सबसे पहले सरकारी इमारतों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कॉलोनियों में डबल पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। जो लोग डबल पाइपलाइन लगवाएंगे उन्हें बिल में छूट दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि एसटीपी में साफ किए गए पानी का इस्तेमाल लोग शौचालय, पौधे में डालने, गाड़ी धोने आदि कामों के लिए कर सकेंगे। इससे मीठे पानी की बचत होगी। प्रवेश वर्मा ने कहा कि कि इससे रोजाना करोड़ों लीटर पानी बचाया जा सकता है। कम हो रहा उत्पादन प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में पानी की कमी को लेकर जानकारी मिल रही है। जनसंख्या के आधार पर अगर सभी को पानी मिले तो कुल मांग 1250 एमजीडी की है। लेकिन इतना उत्पादन नहीं होता है। आज के दिन में हरियाणा सरकार से लगभगएक हजार क्यूसेक पानी मिल रहा है। वजीराबाद में पानी सूख गई है जिसके चलते वहां प्लांट में पानी नहीं आ रहा है। वहां 200 क्यूसेक पानी से ज्यादा खींचा जाता था जो अभी केवल 75 क्यूसेक ही मिल रहा है। पिछली सरकारों पर फोड़ा ठीकरा प्रवेश वर्मा ने कहा कि टैंकर के माध्यम से लोगों को पानी पहुंचाया जा रहा है। जहां पिछली सरकारों ने पानी की पाइपलाइन नहीं डाली तो वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले दोगुने टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछली सरकार 200 नए बोरवेल लगाती थी जबकि हमारी सरकार ने 560 बोरवेल लगाए हैं। पानी की समस्या पिछले एक साल की नहीं है। पिछली सरकार ने अगर बंदोबस्त किया होता तो इतनी परेशानी नहीं आती। आप सरकार ने अपने अंतिम वर्ष में लगभग 1200 करोड़ इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया था जबकि इस वर्ष जल बोर्ड ने लगभग 2900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा मंत्री ने कहा कि दिल्ली में दशकों पुरानी पाइप लाइन से पानी लीक होता है। इन सभी पाइपलाइंस को बदलने के लिए योजना बन चुकी है। दिल्ली को हमने आठ जोन में बांटा है। चंद्रावल का टेंडर हो चुका है जबकि आगामी वजीरगंज जोन नवंबर तक टेंडर कर कंपनी को सौंप दिया जाएगा। दिल्ली सरकार पानी लीकेज को कम करने के लिए प्रयास कर रही है। यह कंपनिया सभी पाइपलाइन को बदलेगी और पानी का रिसाव खत्म करेगी। पिछले सवा साल में हमारी सरकार की पांच उपलब्धियों में से एक इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क को कम करना है। दिल्ली की 52 फीसदी पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा कनाल का पानी पाइपलाइन से आएगा हरियाणा से कैनाल के माध्यम से आने वाले पानी को पाइपलाइन के माध्यम से लाया जाएगा। रास्ते में किसान भाई निकाल लेते हैं। अन्य लोग भी पानी निकाल लेते हैं। इसलिए पाइपलाइन डालने की तैयारी की जा रही है। दिल्ली का पानी का कोटा तय है। हमने बांध के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को पैसा दिया है जिससे 2032 से पानी मिलने लगेगा।

पिलखा डैम पर महिलाओं की सफलता की कहानी, मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार, पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत रायपुर  कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं। यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली। शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया। आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

मंगोलिया पहुंचे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष, श्रद्धा के साथ हुआ भव्य स्वागत

मंगोलिया पहुंचे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष : श्रद्धा और सम्मान के साथ हुआ भव्य स्वागत गंदन मॉनेस्ट्री में 9 जून तक होंगे सार्वजनिक दर्शन : प्रदेश के बौद्ध स्थलों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान भोपाल असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से मंगोलिया लेकर पहुंचे। मंगोलिया पहुंचने पर हवाई अड्डे पर मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एल.एंख-अमगलान तथा गंडनतेगचेनलिंग मठ के मुख्य महंत खाम्बा नोमुन खान गेशे ल्हारम्पा डी. जावज़ानदोरज ने उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। पवित्र अवशेषों के यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से नमन कर अपनी आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य के साथ अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत एवं श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित रहा। समारोह में मंगोलिया के विभिन्न प्रमुख मठों के महंत, अनेक बौद्ध भिक्षु तथा मंगोलिया के पूर्व (तीसरे) राष्ट्रपति नामबारिन एंखबयार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप में संरक्षित भगवान बुद्ध के परम शिष्यों अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए मंगोलिया भेजा गया है। गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक किया जाएगा, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर प्राप्त होगा।यह पहल केवल आध्यात्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेगी। राज्य के बौद्ध पर्यटन स्थलों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान इस ऐतिहासिक पहल से भारत के बौद्ध तीर्थ सर्किट, विशेषकर सांची जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों के प्रति अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण बढ़ेगा। मध्यप्रदेश के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे राज्य के बौद्ध पर्यटन स्थलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या, प्रवास अवधि और सांस्कृतिक सहभागिता में वृद्धि होगी। साथ ही यह पहल दोनों देशों के मठों, सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के नए द्वार खोलेगी। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप विश्व के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों में से एक है। यहां संरक्षित पवित्र अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा और पूजनीय भाव से देखा जाता है। भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य सारिपुत्र और मौद्गल्यायन बौद्ध संघ के ‘अग्र युग्म’ माने जाते हैं। सारिपुत्र प्रज्ञा और ज्ञान के लिए तथा मौद्गल्यायन अपनी आध्यात्मिक एवं अलौकिक सिद्धियों के लिए विख्यात थे। दोनों ने बौध धम्म के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान दिया और उनकी शिक्षाएँ आज भी बौद्ध दर्शन एवं साधना परंपरा का महत्वपूर्ण आधार हैं  

जीत के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट-अनुष्का, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात

 वृंदावन आरसीबी बेंगलुरु के IPL 2026 का खिताब जीतने के बाद स्टार क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन पहुंचे. यहां दोनों प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए उनके आश्रम राधा केलि कुंज पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया. दरअसल, आईपीएल 2026 का खिताब जीतकर मैदान पर अपनी बादशाहत कायम रखने वाले भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली इस सफलता के बाद आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में वृंदावन पहुंचे. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने के बाद विराट अपनी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्‍का शर्मा (Anushka Sharma) के साथ मंगलवार को वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Maharaj) के आश्रम पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया।  दोनों ने वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में विराट और अनुष्का आश्रम से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों ने कुछ समय आश्रम में बिताया और आध्यात्मिक चर्चा के साथ गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।  यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब RCB ने आईपीएल 2026 के फाइनल में गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) को हराकर लगातार दूसरा खिताब अपने नाम किया है. जीत के जश्न के बीच विराट का वृंदावन पहुंचना क्रिकेट और अध्यात्म के अनूठे संगम के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें विराट और अनुष्का आगरा एयरपोर्ट से बाहर निकलते दिखाई दिए. वहां से दोनों सीधे वृंदावन के लिए रवाना हुए।  विराट और अनुष्का पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से वृंदावन आते रहे हैं. दोनों कई बार प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद ले चुके हैं और सार्वजनिक मंचों पर आध्यात्मिकता के महत्व का जिक्र भी कर चुके हैं. क्रिकेट की चमक-दमक और फिल्मी दुनिया की व्यस्तताओं के बीच यह जोड़ी आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानती है। 

अब मोबाइल ऐप से खरीद सकेंगे गाय-भैंस, हर पशु की बनेगी डिजिटल प्रोफाइल

यमुना नगर. अब पशुपालकों को अच्छी नस्ल की गाय, भैंस या बकरी खरीदने के लिए पशु मेलों और डेयरियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पशुपालन विभाग मुंह-खुर और गलघोटू रोग के टीकाकरण अभियान के साथ प्रदेश के करीब 70 लाख पशुओं का डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर रहा है। भारत पशुधन एप पर पशुओं की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य, टीकाकरण और दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारी उपलब्ध होगी। इससे पशुपालक घर बैठे अपनी जरूरत के अनुसार पशु तलाश सकेंगे और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी। पशु पालन विभाग ने इस बार टीकाकरण अभियान को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ा है। प्रदेशभर में 550 से अधिक पशु चिकित्सक और 2500 पशुधन विकास सहायक (वीएलडीए) अभियान में लगे हुए हैं। टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर पशुओं को टीके लगाने के साथ उनका ऑनलाइन रिकॉर्ड भी तैयार कर रही हैं। विभाग का उद्देश्य पशुधन का प्रमाणिक और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है। खरीदार को अब पहले ही मिलेगी पूरी जानकारी डेटाबेस तैयार होने के बाद पशुपालक अपनी जरूरत के अनुसार पशुओं की जानकारी आनलाइन देख सकेंगे। यदि कोई अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंस या किसी विशेष नस्ल की गाय की तलाश कर रहा है तो उसे संबंधित जानकारी आसानी से मिल जाएगी। इससे पशु खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। डेयरी व्यवसायी भूपेंद्र कुमार और कुलदीप सिंह का कहना है कि यह पहल पशुपालकों के लिए काफी लाभकारी साबित होगी। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। ओटीपी सत्यापन के बाद होगा पंजीकरण प्रत्येक पशु का आनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही पशु का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड होता है। विभाग का कहना है कि इससे डेटा की शुद्धता बनी रहेगी और भविष्य में योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक पहुंचाना आसान होगा। सुरक्षित प्रक्रिया है ओटीपी सत्यापन पशुपालन विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. सतबीर सिंह ने बताया कि टीकाकरण के साथ पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। ओटीपी सत्यापन पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। पशुपालक चाहें तो टीम के पहचान पत्र की जांच कर सकते हैं। ऐसे पता चलेगा दूध उत्पादन के बारे में भारत पशुधन एप पर पशुपालक का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा। साथ ही पशु का फोटो, नस्ल, रंग, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति व दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारियां भी अपलोड होंगी। टीकाकरण का रिकॉर्ड भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। पशु की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।

बिहार की राजनीति में गरमाया आवास विवाद, सम्राट चौधरी ने लालू परिवार को घेरा

मुजफ्फरपुर. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार संविधान से चल रहा है। कुछ इसे राजतंत्र के अनुसार चलाना चाहते हैं, मगर ऐसा नहीं होगा। बिहार में लोकतंत्र है। यहां कानून का राज है। आवास तो ख़ाली करना ही पड़ेगा। इसे कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। उनका निशाना लालू परिवार पर था। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास खाली नहीं करने को लेकर कहा, पिता के लिए अलग, बेटा के लिए अलग, पत्नी के लिए अलग आवास चाहिए। सभी को अलग अलग सुरक्षा चाहिए। उन्हें नीति सिद्धांत से मतलब नहीं। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा तो आवास भी समय से खाली कर दिया। कुछ लोग यहाँ राजतंत्र चलाना चाहते, मगर ऐसा नहीं होगा। मुख्यमंत्री मंगलवार को मोतीपुर की परसौनी नाथ पंचायत में सहयोग शिविर का निरीक्षण करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे आवास को लेकर बयान दे रहे हैं। उन्हें यह बता दूं कि उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री रहने पर भी वह पिता के घर में रहे। वह भी पिताजी ने घर का एक हिस्सा दिया। पीएम मोदी, नीतीश कुमार, एनडीए के नेता और जनता ने मुख्यमंत्री बनाया तो सीएम आवास में आया हूं। यहां जनता जिसे चाहेगी मुख्यमंत्री बनाएगी। सहयोग शिविर को लेकर उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के मार्ग पर चल कर बिहार को समृद्ध बनाना है। लोगों की समस्या का समाधान देना है। इसलिए ही यह क़ानून बनाया गया है। आपकी समस्या का निदान कर्मचारियों और पदाधिकारियों को करना ही होगा। अगर 10 दिन में नहीं किया तो 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से एक नोटिस जाएगा। फिर 20 दिन में नहीं किया तो 21वें दूसरा नोटिस जाएगा। तीसरा मौक़ा भी दिया जाएगा। लेकिन 26वें दिन तीसरा नोटिस जाएगा। तीस दिनों में समाधान नहीं हुआ तो नोटिस नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से नोटिस नहीं कर्मचारी और पदाधिकारी के निलंबन का आदेश जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, नीतीश कुमार ने बिहार को विकसित किया। मैं भी आपको एक बात के लिए आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी अपराधी या गुंडा अगर पुलिस को चैलेंज करता है तो उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा, हरा गमछा के मेरे बयान पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की। मैं कहता हूं हरा रंग हरियाली का प्रतीक है। अगर कोई गुंडागर्दी करेगा तो उसकी जगह जेल में होगी।

भवन नियम तोड़ना पड़ा भारी! बादशाह का ‘सागो क्लब’ प्रशासन ने किया बंद

चंडीगढ़. शहर के सेक्टर-26 स्थित शोरूम नंबर 17 में चल रहे क्लब को सील किया गया है। मशहूर रैपर बादशाह से जुड़े चर्चित सागो क्लब पर मंगलवार सुबह प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। यूटी एस्टेट ऑफिस की बिल्डिंग ब्रांच और प्रवर्तन शाखा की टीम ने भवन नियमों के उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की। क्लब संचालकों को कई बार नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर कमियां दूर करने और नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अनुपालन न होने पर प्रशासन ने सीलिंग का फैसला लिया। प्रशासन के अनुसार क्लब परिसर में स्वीकृत भवन नक्शे और निर्माण नियमों से जुड़े कई उल्लंघन पाए गए थे। नोटिसों के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मंगलवार सुबह अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और क्लब को सील कर दिया। मालूम हो कि इस क्लब में सबसे ज्यादा युवा आते हैं और वीकेंड पर यहां पर खूब परियां होती हैं क्लब बंद होने से युवाओं को भी निराशा हुई है। यह वही क्लब है जो पहले भी एक बड़े विवाद के चलते सुर्खियों में रहा था। क्लब के बाहर हुए धमाकों की जिम्मेदारी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा द्वारा लिए जाने का दावा सामने आया था। इंटरनेट मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी की मांग पूरी न होने पर धमाके कराने की बात कही गई थी। हालांकि उस मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस द्वारा की गई थी। एक साल में करीब 10 क्लबों पर कार्रवाई शहर में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 10 क्लबों और बारों को भवन नियमों के उल्लंघन के कारण सील किया जा चुका है। सबसे अधिक क्लब मध्य मार्ग और उसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित हैं। इससे पहले एस्टेट ऑफिस ने सेक्टर-7 स्थित सांता क्लब और ब्लू एस्टेट क्लब के खिलाफ कार्रवाई की थी। ये दोनों क्लब युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं और सप्ताहांत पर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इससे पहले पिछले साल प्रशासन ने सेक्टर-7 स्थित एक लाउंज बार को भी सील किया था। अधिकारियों के अनुसार वहां भी भवन संबंधी गंभीर उल्लंघन पाए गए थे, जो संपदा विभाग की नीतियों के विपरीत थे। हाईकोर्ट में हार चुके हैं क्लब संचालक सूत्रों के अनुसार कई क्लब संचालक इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचे थे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। प्रशासन का कहना है कि कई शोरूमों के पिछले हिस्सों और बरामदों में बिना मंजूरी के क्लब और बार संचालित किए जा रहे हैं। बावजूद इसके ऐसे प्रतिष्ठानों को आबकारी एवं कराधान विभाग से लाइसेंस भी जारी किए जाते रहे हैं। पूर्व सांसद के कार्यकाल में गठित एक समिति ने इन क्लबों को नियमित करने की सिफारिश भी की थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। प्रशासन का कहना है कि भवन नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि शहर के सभी क्लबोन की जांच की जा रही है अगले दिनों में और क्लबोन पर भी कार्रवाई होगी।

खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद

खेत बचाओ अभियान: नील हरित शैवाल से मिट्टी की सेहत संवार रहे लब्जी नावापारा के किसान धनेश्वर प्रसाद रासायनिक खाद छोड़ जैविक खेती की ओर बढ़े, अन्य किसानों से भी की जैविक खेती अपनाने की अपील रायपुर  खेती में रासायनिक खादों के बेहिसाब प्रयोग से मिट्टी की कम होती उपजाऊ क्षमता के बीच सरगुजा जिले में अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत लब्जी, नावापारा के एक प्रगतिशील किसान धनेश्वर प्रसाद ने एक नई और सकारात्मक राह चुनी है। 6 एकड़ कृषि भूमि के मालिक धनेश्वर अब रासायनिक खादों का मोह छोड़कर पूरी तरह से जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा चुके हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन ने दिखाई सही राह धनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि वे पहले अपनी खेती में केवल रासायनिक खादों का ही प्रयोग करते थे, जिससे हर साल खाद की मात्रा बढ़ानी पड़ती थी और जमीन की उपजाऊ शक्ति लगातार कम हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषि विस्तार विभाग से संपर्क किया और अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराया। परीक्षण रिपोर्ट में मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पाई गई। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए ’नील हरित शैवाल’ (Blue-Green Algae) से खेती करने की तकनीकी सलाह दी। टैंक बनाकर शुरू किया नील हरित शैवाल का उत्पादन कृषि विभाग के मार्गदर्शन पर अमल करते हुए धनेश्वर जी ने नवाचार किया और अपने घर के बाड़ी में ही एक टैंक का निर्माण कर नील हरित शैवाल का उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस टैंक से लगभग 25 किलो नील हरित शैवाल का उत्पादन प्राप्त होगा। इसे खेतों में डालने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी और जमीन की सेहत में सुधार आएगा। भविष्य और स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती है जरूरी जैविक खेती के दूरगामी फायदों का उल्लेख करते हुए धनेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह कदम केवल वर्तमान फसल को बचाने के लिए नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए भी है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से जमीन उपजाऊ बनती है और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरने से फसल उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी और शुद्ध व पौष्टिक आहार मिलेगा। अन्य किसानों से की अपील पर्यावरण और खेत बचाओ अभियान की इस मुहिम में जुटे धनेश्वर प्रसाद का मानना है कि जैविक खेती को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र के अन्य कृषक बंधुओं से भी अपील की है कि वे भी रासायनिक खेती का त्याग कर जैविक खेती को अपनाएं और अपनी खेती, मिट्टी और आने वाली पीढ़ी को बचाएं।

किसानों को राहत! बिलासपुर में खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित, प्रशासन ने दिए निर्देश

बिलासपुर. खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर बिलासपुर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है। उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को परेशानी न हो। कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।