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The Art of Living के 45 वर्ष पूरे, उपराष्ट्रपति ने लॉन्च कीं 5 राष्ट्रीय पहलें और किया विशेष डाक टिकट का अनावरण

माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया बेंगलुरु भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, स्थिरता, चेतना अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब इस संस्था ने मानवीय सेवा के 45 वर्ष में प्रवेश किया हैं और इसी माह 70 वर्ष के हुए गुरुदेव रवि शंकर के शांति, कल्याण एवं मानवीय मूल्यों के प्रति उनके जीवनपर्यंत योगदान को रेखांकित किया गया है। माननीय उपराष्ट्रपति ने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ एक स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया, जो व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक शांति में द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों के योगदान का प्रतीक है।शुरू की गई पहलों में युवा करियर उत्कृष्टता कार्यक्रम (यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम), पूर्वी ज्ञान प्रणाली संकाय (फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स), नवाचार एवं उद्यमिता (आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन), चेतना अध्ययन और मानव क्षमता उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडी एंड ह्यूमन पोटेंशियल), तथा इको शांति सम्मिलित हैं। ये पहलें शिक्षा, नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव विकास पर संगठन के बढ़ते ध्यान को प्रतिबिंबित करती हैं। यह शुभारंभ समारोह द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महीने भर चले उत्सव का चरमोत्कर्ष था, जिसमें भारत और विश्व भर के 678 प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के राष्ट्रीय नेता, व्यापारिक दिग्गज, खिलाड़ी, उद्यमी, शिक्षाविद, आध्यात्मिक गुरु, राजनयिक, कलाकार और सामाजिक परिवर्तनकर्ता सम्मिलित थे।सभा को संबोधित करते हुए माननीय उपराष्ट्रपति ने गुरुदेव रवि शंकर द्वारा स्थापित इस आंदोलन की असाधारण वैश्विक पहुंच पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, आज उस महान दूरदर्शिता का उत्सव है जिसने विभिन्न महाद्वीपों में करोड़ों जीवनों को स्पर्श किया है। मैं यह जानकर विस्मित रह गया कि द आर्ट ऑफ लिविंग 182 देशों में विद्यमान है। मानव जाति की लगभग संपूर्ण सभ्यता इस आंदोलन के माध्यम से परस्पर जुड़ रही है। संगठन की यात्रा का वर्णन करते हुए उन्होंने आगे कहा, पैंतालीस वर्ष पूर्व, एक सरल किंतु गहन विचार के साथ एक आंदोलन का सूत्रपात हुआ था कि आंतरिक शांति ही बाह्य सामंजस्य की आधारशिला है। संघर्ष और अनिश्चितता से घिरे इस संसार में, गुरुदेव रवि शंकर विवेक, जागरूकता, शांति और सद्भाव के मूल्यों से मानवता को निरंतर अनुप्राणित कर रहे हैं।गुरुदेव की सरलता और उनके प्रभाव की प्रशंसा करते हुए राधाकृष्णन ने टिप्पणी की, उनकी मुस्कान, उनकी विनम्रता और उनका स्नेह प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को छू लेता है। जो बात उनके योगदान को असाधारण बनाती है, वह उनके भीतर समाहित विनम्रता और मानवता है। माननीय उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए गुरुदेव रवि शंकर ने समकालीन चुनौतियों के समाधान में आंतरिक विकास की शाश्वत प्रासंगिकता पर बल दिया। गुरुदेव ने कहा, आज विश्व ने स्वीकार कर लिया है कि ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है। विश्व ध्यान दिवस घोषित करने के लिए 192 देशों के एक साथ आने से यह समझ सुदृढ़ हुई है कि एक स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए ध्यान एक मूलभूत आवश्यकता है। मानव विकास के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने आगे कहा, जीवन भर तीन चीजें सदैव हमारे साथ होनी चाहिए: ज्ञान, ध्यान और संगीत।वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए गुरुदेव ने कहा, आइए हम एक ऐसे वसुधैव कुटुम्बकम् का स्वप्न देखें, जो भय, तनाव और घृणा से मुक्त एक वैश्विक परिवार हो। एक शांत और सौहार्दपूर्ण विश्व का प्रारंभ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यक्तियों से ही होता है। कर्नाटक के माननीय राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी सभा को संबोधित किया और संगठन के उद्गम के साथ कर्नाटक के गहन संबंध को रेखांकित किया।उन्होंने कहा, यह कर्नाटक के लिए गौरव का विषय है कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें हमारी इस पवित्र भूमि से जुड़ी हुई हैं। चार दशकों से अधिक समय से, द आर्ट ऑफ लिविंग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत, सामुदायिक और वैश्विक स्तर पर शांति और कल्याण को बढ़ावा दे रहा है।शांति स्थापना में गुरुदेव के योगदान पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने आगे कहा, मानवीय सेवा से परे, गुरुदेव के शांति-स्थापना के प्रयासों ने दीर्घकालिक संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के माध्यम से एक हिंसा-मुक्त और तनाव-मुक्त समाज की उनकी दूरदर्शिता को संपूर्ण विश्व में सराहना और मान्यता प्राप्त हुई है। इस आयोजन के दौरान शुरू की गई पांच पहलें शिक्षा, नवाचार, स्थिरता और मानव विकास के माध्यम से समकालीन समाज की कुछ अत्यंत तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं।यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम युवाओं को सिविल सेवा में करियर के लिए तैयार करेगा, साथ ही ग्रामीण और शहरी युवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग-उन्मुख आतिथ्य प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करेगा जो पूर्वी ज्ञान परंपराओं को समकालीन शिक्षा और अनुसंधान के साथ एकीकृत करेगा, जिससे आधुनिक नैतिक, सामाजिक और पारिस्थितिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके। आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन पहल का उद्देश्य मार्गदर्शन, प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण सहायता के माध्यम से नवाचार-संचालित और हार्डवेयर-केंद्रित स्टार्टअप को पोषित करना है, जिसका लक्ष्य 500 स्टार्टअप को सक्षम बनाना है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल चेतना, संज्ञान, मानसिक कल्याण और मानव क्षमता में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के लिए एक अंतःविषय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा।द आर्ट ऑफ लिविंग की एक स्थिरता पहल इको शांति का उद्देश्य संधारणीय विकल्पों के माध्यम से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग को प्रतिवर्ष कम से कम 1,00,000 टन कम करना है। आश्रम प्रवास के दौरान, माननीय उपराष्ट्रपति ने संगठन की विभिन्न सुविधाओं और पहलों का अवलोकन किया। उन्होंने गुरुकुलम का भ्रमण किया, छात्रों से संवाद किया, प्रताप गणपति मंदिर में प्रार्थना की, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए और लगभग 1,600 स्वदेशी गायों के निवास स्थान गौशाला का भी भ्रमण किया। इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण द आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम के अभ्यासकर्ताओं … Read more

किशनगंज के जनता हाट में NIA की दबिश, बड़े ऑपरेशन के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

किशनगंज. ब‍िहार के सीमांचल के क‍िशनगंज जिला अंतर्गत पोठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर पंचायत के जनता हाट इलाके में शुक्रवार की सुबह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एनआईए की टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों में अफरातफरी का माहौल बन गया। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) और अन्य सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने जनता हाट निवासी मनोज रविदास, पिता लखन रविदास, के घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कई घंटों तक चली और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। कई घंटों तक चली तलाशी, युवक को साथ ले गई टीम स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह अचानक बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के पहुंचने से गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जवानों ने घर के अंदर और आसपास के क्षेत्र की गहन तलाशी ली। दस्तावेजों, मोबाइल उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की गई। छापेमारी के दौरान मनोज रविदास को टीम अपने साथ लेकर चली गई। हालांकि, उसे किस आधार पर हिरासत में लिया गया, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। कार्रवाई के बाद से पूरे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और इनपुट की चर्चा ग्रामीणों के बीच यह चर्चा बनी हुई है कि जांच एजेंसियों को कुछ संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और संचार से जुड़े इनपुट मिले थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर एनआईए ने यह कार्रवाई की है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी सुरक्षा एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए की कार्रवाई आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में की जाती है। ऐसे में इस कार्रवाई को भी संवेदनशील जांच के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। सामान्य परिवार से जुड़ा है मामला, ग्रामीणों में हैरानी जानकारी के अनुसार, मनोज रविदास जनता हाट में चप्पल की दुकान चलाता है, जबकि उसके पिता लखन रविदास खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार के सदस्य स्तब्ध हैं और किसी भी प्रकार की जानकारी से इनकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उन्हें इस तरह की कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। छापेमारी के बाद से परिवार और आसपास के लोग मानसिक तनाव में हैं। गांव में बढ़ी हलचल, बड़ी संख्या में जुटे लोग छापेमारी की खबर जैसे ही इलाके में फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। गांव में कई घंटों तक भीड़ और चर्चा का माहौल बना रहा। लोग अलग-अलग तरह की अटकलें लगा रहे हैं, लेकिन किसी के पास ठोस जानकारी नहीं है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके को नियंत्रित रखा गया और किसी को भी घर के आसपास अनावश्यक रूप से जाने की अनुमति नहीं दी गई। जांच एजेंसियां पूरी तरह सतर्क, आगे की कार्रवाई पर नजर फिलहाल एनआईए और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से जांच रही हैं और सभी पहलुओं की गहन छानबीन की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी बड़े नेटवर्क या संवेदनशील इनपुट से जुड़ी हो सकती है, जिसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। ग्रामीणों की निगाहें जांच के अगले कदम पर घटना के बाद जनता हाट और आसपास के क्षेत्रों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है। लोग अब जांच एजेंसियों के अगले कदम और आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं। पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण इसे बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

स्थायी रोजगार की मांग को लेकर अड़े सफाई कर्मचारी, 31 मई तक जारी रहेगी हड़ताल; मंत्री के घर होगा प्रदर्शन

बाढड़ा/चंडीगढ़. ग्रामीण सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन सीटू के आह्वान पर चल रही हड़ताल शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रही। कर्मचारी धरने पर बैठकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं लेकिन सरकार अब तक उनकी मांगों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही। ग्रामीण सफाई कर्मचारी पक्का कर्मचारी का दर्जा, 26 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने, एक्सग्रेसिया नीति लागू करने तथा 400 की आबादी पर स्थायी सफाई कर्मचारी भर्ती करने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षो से गांवों की सफाई व्यवस्था संभालने के बावजूद उन्हें ना तो स्थायी रोजगार मिला है और ना ही सम्मान जनक वेतन। हड़ताल को 31 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। 31 मई तक प्रदेश के मंत्रियों के आवासों पर रोष प्रदर्शन होगा। भिवानी, चरखी दादरी और रोहतक जिलों के ग्रामीण सफाई कर्मचारी 31 मई को सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी के आवास पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। धरने की अध्यक्षता संजय जीतपुरा ने की तथा संचालन सुरेश कुमार ने किया। यूनियन नेता सुरेश कुमार जेवली ने कहा कि ग्रामीण सफाई कर्मचारी पिछले 15 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पंचायत सचिवों और सरपंचों की ओर से कर्मचारियों पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश के लगभग 10500 ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल झूठे आश्वासन देने में लगी है। सीटू जिला संयोजक राजकुमार घिकाड़ा और जिला सह संयोजक कमलेश भैरवी ने कहा कि आज प्रदेश में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है।

तूफान और बारिश से प्रभावित इलाकों में पहुंचे ऊर्जा मंत्री तोमर, हालात का लिया जायजा

आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लेने मैदान में उतरे ऊर्जा मंत्री तोमर ग्वालियर गुरुवार रात आई आंधी और बारिश से उप नगर ग्वालियर में कई क्षेत्रों में वृक्ष गिरने से विद्युत लाइनों तथा खंभों के क्षतिग्रस्त होने से बिजली संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई। सूचना प्राप्त होते ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तत्काल ग्राउंड पर पहुँचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा राहत एवं मरम्मत संबंधी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने देर रात 1 बजे 4 फीडरों पर विद्युत व्यवस्था का जायजा लिया। मंत्री तोमर ने माँ वैष्णोंपुरम , चंदनपुरा, श्याम बाबा का मंदिर, राठौर चौक, गदाईपुरा पहुंचकर विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंधी-पानी के कारण जिन इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित हुई है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्युत आपूर्ति बहाल करें। प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से संवाद करते हुए ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिजली विभाग की टीमें पूरी तत्परता और तेजी से कार्य कर रही हैं। शीघ्र ही सभी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।   

निकाय चुनाव में धांधली का आरोप, पंजाब चुनाव आयोग पहुंचा भाजपा का डेलिगेशन

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में वीरवार को पंजाब राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर पंजाब में जारी निकाय चुनावों के दौरान कथित बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन-सह-शिकायत पत्र सौंपा। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से सामने आए बूथ कैप्चरिंग, मतदाता सूचियों में हेरफेर, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग तथा अन्य चुनावी अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से इन शिकायतों का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों एवं चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। ज्ञापन में उन प्रभावित क्षेत्रों में मतदान रद कर पुनर्मतदान करवाने की भी मांग की गई, जहां गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि पार्टी मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा तथा चुनाव प्रक्रिया को भय, दबाव और सत्ता के दुरुपयोग से मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ढिल्लों के साथ प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा, प्रदेश विधि प्रकोष्ठ संयोजक एनके वर्मा, प्रदेश मीडिया प्रमुख विनीत जोशी तथा वरिष्ठ भाजपा नेता रणजीत गिल शामिल थे।

कोरबा में भ्रष्टाचार का VIDEO वायरल, रिश्वत लेते पकड़ा गया पटवारी; SDM की बड़ी कार्रवाई

कोरबा. एक और पटवारी का किसान से रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है. मामला कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के पसान तहसील के पिपरिया हल्के का मामला है. जानकारी के अनुसार, पिपरिया व सिर्री हल्के के पटवारी विनोद अग्रवाल ने जमीन का वन पट्टा ऑनलाइन करने के लिए 5 हजार और फौती नामांतरण के लिए 10 हजार की रिश्वत मांगी थी. मजबूर किसान ने पटवारी को रिश्वत देने के साथ-साथ टेबल के नीचे नोट गिनते हुए उसका वीडियो भी बना लिया. वीडियो वायरल होने के बाद पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने पटवारील विनोद अग्रवाल को निलंबित कर दिया है. 

पंजाब में BJP को करारा झटका, दूसरे-तीसरे नंबर की बात दूर, ‘अन्य’ ने भी छोड़ा पीछे

चंडीगढ़  पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. पार्टी को उम्मीद थी कि नया चेहरा संगठन में नई ऊर्जा भरेगा और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा. लेकिन राजनीति में टाइमिंग कभी-कभी सबसे बड़ा संदेश बन जाती है. अध्यक्ष पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा की उम्मीदों पर ठंडा पानी डाल दिया. पार्टी सिर्फ 52 सीटों पर सिमट गई. हालत इतनी खराब रही कि भाजपा न सिर्फ आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल से पीछे रही, बल्कि ‘अन्य’ उम्मीदवारों से भी पिछड़ गई. यह नतीजा साफ संकेत देता है कि पंजाब में भाजपा अभी भी जमीन तलाश रही है. किसान आंदोलन के बाद बनी दूरी, स्थानीय नेतृत्व की कमजोरी और क्षेत्रीय राजनीति की समझ की कमी पार्टी को लगातार भारी पड़ रही है. केवल सिंह ढिल्लों के सामने अब सिर्फ संगठन चलाने की नहीं, बल्कि पार्टी को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने की चुनौती भी है।  नगर निकाय चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए सिर्फ हार नहीं, बल्कि चेतावनी की घंटी हैं. पंजाब जैसे राज्य में जहां क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय विमर्श पर भारी पड़ते हैं, वहां भाजपा अभी तक मजबूत जनाधार नहीं बना पाई है. आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसका संगठन गांव से शहर तक सक्रिय है. कांग्रेस अपनी पारंपरिक ताकत बचाने में सफल रही और अकाली दल भी भाजपा से आगे निकल गया. ऐसे में भाजपा के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ चेहरा बदलने से हालात बदल जाएंगे? केवल सिंह ढिल्लों को अब बूथ स्तर से लेकर किसान और सिख समुदाय तक भरोसा बहाल करना होगा. वरना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी और मुश्किल में फंस सकती है।  नया अध्यक्ष और तुरंत झटका: 2027 चुनाव की चुनौती     पंजाब निकाय चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति का मौजूदा मूड साफ कर दिया है. आम आदमी पार्टी ने 630 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा. कांग्रेस 215 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. शिरोमणि अकाली दल को 175 सीटें मिलीं. भाजपा सिर्फ 52 सीटों पर सिमट गई, जबकि अन्य उम्मीदवारों ने 214 सीटें जीत लीं. यह आंकड़ा भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है. इसका मतलब है कि जनता स्थानीय स्तर पर निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी भाजपा से ज्यादा भरोसा कर रही है.     राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अभी भी पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को पूरी तरह समझ नहीं पाई है. राज्य में किसान आंदोलन का असर खत्म नहीं हुआ है. ग्रामीण इलाकों में भाजपा को लेकर नाराजगी अब भी दिखती है. इसके अलावा भाजपा के पास ऐसा बड़ा स्थानीय चेहरा भी नहीं है जो पूरे राज्य में पार्टी को मजबूती दे सके. केवल सिंह ढिल्लों के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती होगी।  नया अध्यक्ष, लेकिन पुरानी मुश्किलें बरकरार केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी अब पंजाब में नई शुरुआत चाहती है. लेकिन संगठनात्मक बदलाव का असर तुरंत चुनावी नतीजों में नहीं दिखा. ढिल्लों को ऐसे समय कमान मिली है जब पार्टी लगातार कमजोर स्थिति में दिखाई दे रही है. उन्हें कार्यकर्ताओं में भरोसा लौटाने के साथ-साथ सिख समुदाय के बीच भी स्वीकार्यता बढ़ानी होगी।  AAP ने क्यों मारी बाजी? आम आदमी पार्टी की जीत के पीछे स्थानीय स्तर पर मजबूत नेटवर्क और भगवंत मान सरकार की योजनाओं को बड़ा कारण माना जा रहा है. पार्टी ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखी. मुफ्त बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों ने AAP को फायदा पहुंचाया. यही वजह है कि नगर निकाय चुनाव में पार्टी ने एकतरफा बढ़त बना ली।  BJP की आगे की राह आसान नहीं भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती खुद को चौथे स्थान से ऊपर लाना है. पार्टी को सिर्फ हिंदुत्व की राजनीति से आगे बढ़कर स्थानीय मुद्दों पर काम करना होगा. किसानों, बेरोजगारी, व्यापार और नशे जैसे मुद्दों पर ठोस रणनीति बनानी पड़ेगी. अगर भाजपा आने वाले समय में अकाली दल के साथ तालमेल बनाती है तो उसे कुछ फायदा मिल सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति मुश्किल दिखाई दे रही है।  केवल सिंह ढिल्लों के अध्यक्ष बनने के बावजूद BJP को इतना बड़ा झटका क्यों लगा? संगठन में बदलाव चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होता. पंजाब में भाजपा की सबसे बड़ी समस्या कमजोर जनाधार और स्थानीय मुद्दों से दूरी है. किसान आंदोलन के बाद पार्टी की छवि प्रभावित हुई. केवल सिंह ढिल्लों को संगठन संभालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. ऐसे में चुनावी नतीजों पर तत्काल असर दिखना मुश्किल था।  क्या ये नतीजे 2027 विधानसभा चुनाव का संकेत हैं? नगर निकाय चुनाव को पूरी तरह विधानसभा चुनाव का ट्रेलर नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह राजनीतिक माहौल जरूर दिखाता है. AAP की मजबूत स्थिति और भाजपा की कमजोरी साफ दिखाई दे रही है. अगर भाजपा अगले दो साल में संगठन और जनाधार मजबूत नहीं करती तो 2027 में भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  पंजाब में BJP अपनी स्थिति कैसे सुधार सकती है? भाजपा को पंजाब में स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना होगा. किसान, युवा और व्यापारियों से जुड़ाव बढ़ाना जरूरी है. पार्टी को सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय राज्य के खास मुद्दों पर फोकस करना होगा. सिख समुदाय के साथ संवाद बढ़ाना और बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना भी बेहद अहम होगा। 

दो केंद्रीय मंत्रियों को प्रदेश की कमान मिलने से बढ़ी अटकलें, मोदी सरकार में बदलाव के संकेत?

नई दिल्ली बीजेपी ने एक बार फिर चौंकाते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्‍होत्रा को प्रदेश की कमान सौंप दी है. उन्‍हें द‍िल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया है. दिल्ली से पहले बीजेपी ने यूपी में भी भाजपा ने यही फॉर्मूला अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी. यानी अब दो-दो केंद्रीय मंत्री सीधे राज्यों में संगठन की कमान संभाल रहे हैं. इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है क‍ि क्या अब मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा. क्‍योंक‍ि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’के सिद्धांत को मानतीहै. ऐसे में मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने का सीधा मतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण कुर्सियां खाली होने वाली हैं।  हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. दिल्ली में अगले कुछ समय में होने वाले एमसीडी चुनाव को देखते हुए उनकी न‍ियुक्‍त‍ि काफी मायने रखती है. द‍िल्‍ली में बीजेपी को एक ऐसे जमीन से जुड़े पंजाबी और वैश्य चेहरे की जरूरत थी, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो. केंद्रीय मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ने वाली. इसके साथ ही बीजेपी ने पंजाबी चेहरे को मौका देकर पंजाब में भी पैठ बनाने की कोश‍िश की है।  ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत बीजेपी की कार्यशैली दूसरी पार्टियों से थोड़ी अलग है. बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का नियम बेहद कड़ाई से लागू करती है. पार्टी का इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी नेता को संगठन से सरकार में या सरकार से संगठन में लाया गया है, उसने बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया है।  जेपी नड्डा का उदाहरण जब जेपी नड्डा को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी से दूरी बनाई और पार्टी ने सांगठनिक निरंतरता के लिए नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. ठीक यही नियम अब राज्यों के स्तर पर भी लागू होने जा रहा है।  उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी कुछ समय पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था. तब भी यह सवाल उठा था कि क्या वे दोनों पद संभालेंगे? भाजपा की नीति के अनुसार, जब कोई मंत्री संगठन के पूर्णकालिक काम में उतरता है, तो उसे सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है ताकि वह शत-प्रतिशत समय संगठन को दे सके।  अब हर्ष मल्‍होत्रा अब यही इतिहास दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा के साथ दोहराया जा रहा है. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी दोनों केंद्रीय मंत्रालयों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. चूंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठन का काम 24 घंटे और 365 दिन का होता है, इसलिए इन दोनों मंत्रियों का कैबिनेट से बाहर होना तय माना जा रहा है. यह कदम ही इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि मोदी कैबिनेट में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री होने वाली है।  जब-जब संगठन बदला, तब-तब बदली कैबिनेट यदि हम मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के इतिहास और उससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के दौर के इतिहास पर नजर डालें, तो काफी कुछ क्‍ल‍ियर हो जाता है।      साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब राजनाथ सिंह सरकार में गृहमंत्री बने. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ा और अमित शाह को संगठन की कमान मिली. इसके बाद संगठन का पूरी तरह कायाकल्प हुआ और कैबिनेट का भी विस्तार हुआ।      जुलाई 2021 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया था. उस समय रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी. इनमें से कई नेताओं को बाद में संगठन के काम में लगाया गया था, जबकि भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिली थी।      अटल जी के समय भी कुशाभाऊ ठाकरे और जन कृष्णमूर्ती जैसे संगठन के दिग्गजों को सरकार के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. प्रमोद महाजन और वेंकैया नायडू जैसे नेताओं को कई बार संगठन से सरकार और सरकार से संगठन में भेजा गया।   

JPSC अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट, जून में आएगा प्रीलिम्स रिजल्ट और अगस्त में मेन्स एग्जाम

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग जून माह के पहले या दूसरे सप्ताह में सिविल सेवा संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी कर सकता है। अगस्त माह में इसकी मुख्य परीक्षा आयोजित किए जाने की तैयारी है। आयाेग ने 19 अप्रैल को संपन्न प्रारंभिक परीक्षा में दोनों पत्रों में पूछे गए प्रश्नों का अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिया है। इसके आधार पर ही प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया जाएगा। आयोग ने सामान्य अध्ययन (प्रथम पत्र) एवं सामान्य अध्ययन (द्वितीय पत्र) दोनों का मॉडल उत्तर जारी किया है। पूर्व में जारी मॉडल उत्तर में अभ्यर्थियों की आपत्तियों के बाद आयोग ने पहले प्रश्नपत्र में आयोग ने दो प्रश्नों को ड्राप किया है। वहीं, एक प्रश्न में दो विकल्प सही पाए गए हैं। इनमें सभी अभ्यर्थियों को समान अंक दिए जाएंगे। दूसरे प्रश्नपत्र में इस तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। इससे पहले आयोग ने दोनों प्रश्न पत्रों का मॉडल उत्तर जारी करते हुए उनपर अभ्यर्थियों से 20 अप्रैल से 24 अप्रैल तक आपत्तियां मांगी थीं। निर्धारित तिथि तक अभ्यर्थियों से प्राप्त आपत्तियों पर आयोग द्वारा विषय-विशेषज्ञों के समीक्षा के बाद अंतिम माडल उत्तर प्रकाशित किया गया। प्रारंभिक परीक्षा के माध्यम से कुल विज्ञापित पदों के 15 गुना अभ्यर्थियों का चयन मेधा सूची के आधार पर मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए किया जाएगा। यह मेधा सूची दोनों पत्रों के प्राप्तांकों के योग के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आवश्यक अंक 32 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 34 प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5 प्रतिशत निर्धारित है। अंतिम परिणाम मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंकों के आधार पर किया जाएगा।

अचानक बाजार में बड़ी गिरावट, Sensex 1100 अंक टूटा; निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

मुंबई  बाजार बंद के दौरान,शुक्रवार को अचानक स्‍टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई. सेंसेक्‍स-निफ्टी सभी इंडेक्‍स दबाव में रहे. दोपहर 3 बजे निफ्टी करीब 400 अंक टूटकर 23,500 पर पहुंच गया. वहीं सेंसेक्‍स 1150 अंक टूटकर 74,800 के ऊपर था. सबसे ज्‍यादा दबाव मिडकैप और स्‍मॉलकैप में दिखाई दिया, जहां सबसे ज्‍यादा मुनाफावसूली हुई।  BSE टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 4 शेयर ही मामूली तेजी पर कारोबार कर रहे थे, बाकी सभी 26 शेयर बिखर गए हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट इंडिगो, टाटा स्‍टील और पावरग्रिड जैसे शेयरों में आई है।  हालांकि कारोबार बंद होने तक, निफ्टी 360 अंक या 1.50 फीसदी गिरकर 23,547 पर था और सेंसेक्‍स 1092 अंक या 1.45 फीसदी गिरकर 74775 पर था. बैंक निफ्टी में भी 600 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई।  5.56 लाख करोड़ का नुकसान बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देखें तो बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 470.75 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 5.56 लाख करोड़ रुपये गिरकर 45.19 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों की वैल्‍यूवेशन 5.56 लाख करोड़ कम हुई है।  क्‍यों गिरा शेयर बाजार?  अमेरिका ईरान जंग: अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान गुरुवार को अपने युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक समझौते पर पहुंच गए हैं, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं किया है, और ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।  वीआईएक्‍स में तेजी: इंडिया VIX में तगड़ी बढ़ोतरी हो गई है, जो 6% बढ़कर 15.91 पर पहुंच गया है. यह एक बड़े गिरावट का संकेत देता है।  FII की सेलिंग: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं. सबसे जयादा बिकवाली साल 2026 में देखी जा रही है, जो अभी तक 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की है. बुधवार को 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए थे।  मुनाफावसूली: सबसे बड़ा कारण दो दिनों की छुट्टी के कारण बाजार में अचानक से मुनाफावसूली मानी जा रही है. ग्‍लोबल इम्‍पैक्‍ट के कारण गिरावट के साथ ज्‍यादातर सेक्‍टर में बिकवाली देखने को मिली. ऑटो से लेकर फाइनेंशियल, मेटल, ऑयल एंड गैस सेक्‍टर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट रही. हालांकि, आईटी और कंज्‍यूमर गूड्स ने थोड़ा सपोर्ट देने का प्रयास किया, लेकिन यह बड़ी गिरावट को रोकने में नाकाम रहे।  मानसून देरी से आने का अनुमान  बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह मानी जा रही है, वह मानसून के देरी से आने का अनुमान है. देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी की लहरें जारी रहने के बावजूद, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान को दीर्घकालिक औसत के 92% से घटाकर 90% कर दिया, जो इस बात का संकेत है कि जून से सितंबर के दौरान भारत में सामान्य से कम वर्षा होने का खतरा है।  हैवीवेट शेयरों में बड़ी गिरावट मार्केट में हैबीवेटज रखने वाले स्‍टॉक रिलायंस के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट रही. टीसीएस में भी 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट रही. बजाज फाइनेंस के शेयर 2.45 फीसदी, सन फार्मा के शेयर 2 फीसदी और पावरग्रिड के शेयर 4 फीसदी तक गिरे, जिसने सेंसेक्‍स को बड़ी गिरावट में बड़ा योगदान दिया।