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शराब घोटाले की जांच में सामने आए नए तथ्य, हर माह 80 लाख के कमीशन का खुलासा

रायपुर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में कमीशन वसूली के नेटवर्क को लेकर जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। ईओडब्ल्यू के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त राशि दी गई। इसके बाद एजेंसियों से नकद कमीशन वसूला जाता था। सभी एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था। शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन लेकर शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। कमीशन की रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सिद्धार्थ सिंघानिया निभाता था। एक एजेंसी से 15.65 करोड़ रुपये देने का दावा आरोपपत्र में सिद्धार्थ सिंघानिया के कथन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रही। इस दौरान सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी मिला है। दो कंपनियों को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 38.31 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में भुगतान किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर के संस्थापक बीआर लोहिया दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेते थे। उनके निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के बिल तैयार कराए गए, जबकि संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं मिलने की बात सामने आई। बिल पास कराने के लिए 28.80 लाख रुपये 29 नवंबर 2023 को लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को कथित तौर पर 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई। रकम पहुंचाने से पहले ईडी की कार्रवाई में यह राशि बरामद हुई। जांच एजेंसी ने इसे मैनपावर भुगतान से जुड़ी कथित कमीशन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा बताया है।

17 राज्यों में मतदाता सूची का होगा विशेष पुनरीक्षण, SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) कराएगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए राज्यों को सूचित किया है। इन 17 राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा भी शामिल हैं, जहां चुनाव होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे एक पत्र में, चुनाव आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 निर्धारित कट-ऑफ तारीख होगी। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं, जिनमें क्रमशः 60, 40, 117 और 70 सीटें हैं, का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' के तहत, चुनाव आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने की अनुमति होती है। SIR और SSR में क्या है अंतर? संक्षिप्त पुनरीक्षण का मुख्य ध्यान नए पात्र लोगों को जोड़ने और सामान्य सुधारों पर होता है, जबकि 'SIR' कहीं अधिक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन करना, प्रविष्टियों की बारीकी से जांच करना और बड़े पैमाने पर डेटा का ऑडिट करना शामिल है।  

छत्तीसगढ़ के राव हॉस्पिटल पर कार्रवाई, फायर सेफ्टी ऑडिट में गड़बड़ी के आरोप में संचालक पर केस दर्ज

CG राव हॉस्पिटल के संचालक के खिलाफ FIR, फायर सेफ्टी ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का खेल आरंग. आरंग स्थित राव हॉस्पिटल का हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) का नवीनीकरण कराने के बजाय कंप्यूटर ग्राफिक्स के जरिए खुद ही फर्जी एनओसी तैयार कर ली। जिले में अपनी तरह की इस पहली जालसाजी का भंडाफोड़ होने के बाद आरंग पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। डिजिटल पड़ताल में ऐसे खुली पोल अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम जब नियमित सुरक्षा ऑडिट के तहत राव हॉस्पिटल पहुंची, तो अस्पताल प्रबंधन ने अधिकारियों को एनओसी की फोटोकॉपी थमा दी। लेकिन दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के दौरान अधिकारियों को गड़बड़ी की आशंका हुई। कागजात पर एनओसी जारी होने की तारीख 16 अप्रैल 2026 दर्ज थी, लेकिन जब अधिकारियों ने उस पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन किया तो सिस्टम में असली तारीख 16 अप्रैल 2025 दिखाई दी। एनओसी में जांच अधिकारी के तौर पर ‘पुरुषोत्तम सिंह’ का नाम दर्ज था, जबकि अग्निशमन विभाग में इस नाम का कोई अधिकारी कार्यरत ही नहीं है। यही नहीं, जिस तिथि पर हस्ताक्षर अंकित थे, उस दौरान संबंधित पद पर कोई अधिकारी पदस्थ ही नहीं था। शासकीय पोर्टल पर मिलान करने के बाद पूरी तरह साफ हो गया कि अस्पताल संचालक ने अपने फायदे के लिए कंप्यूटर ग्राफिक्स के माध्यम से एक नकली (कूटरचित) प्रमाण पत्र तैयार किया था। धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ग्राफिक्स डिजाइनर पर भी कसेगा शिकंजा न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक पुष्पराज विनायक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने राव हॉस्पिटल के संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस फर्जी दस्तावेज को बनाने में किस कंप्यूटर सेंटर या ग्राफिक्स डिजाइनर की मदद ली गई थी। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जालसाजी करने वाले और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले, दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस मामले में पुष्पराज सिंह (जिला सेनानी एवं फायर ऑफिसर, रायपुर) ने बताया, “व्यावसायिक व चिकित्सकीय संस्थानों में सुरक्षा के लिहाज से हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। इससे पहले बिलासपुर और अंबिकापुर में ऐसे मामले आए थे जहां गिरफ्तारियां हुई थी, लेकिन रायपुर जिले में फर्जी एनओसी का यह पहला मामला है। अधिकारियों के मुताबिक, राव हॉस्पिटल प्रबंधन का यह कृत्य अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की जिंदगी को सीधे तौर पर जोखिम में डालने वाला है। अस्पताल में आगजनी से निपटने के वास्तविक पुख्ता इंतजाम किए बिना ही फर्जी कागजात के सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा था।

गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, छत्तीसगढ़ में 2025-26 सत्र से ₹425 प्रति क्विंटल भुगतान

विशेष लेख गन्ना मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन किसानों को अब 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान  नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू              रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।  मुख्यमंत्री साय ने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर शक्कर कारखानों के लिए गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025- 26 में की गई खरीदी का भुगतान भी बढ़े हुए दर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत को कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है। किसान हित से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता से निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे। गांवों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।                     छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने के लिए गन्ने के खरीदी मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रूपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति क्विंटल कर दिया है। इस बढ़े हुए मूल्य का लाभ पेराई सत्र 2025-26 के गन्ने पर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ का बोनस वितरित किया जाएगा। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी                    देश के कुल गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान भले ही कम है लेकिन गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में राज्य अब नंबर वन हो गया है। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में अधिक हो गई है। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।  किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे                 सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती थी। नई दर से किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। गन्ना मूल्य में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब खेती की लागत और किसानों की आमदनी के बीच संतुलन बनाना कृषि नीति की प्रमुख चुनौती है।                   देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।  किसानों की आय बढ़ाने पर जोर                  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना तथा खेती को सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को उनकी कुल बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी मिलेगी।                मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और हमारे अन्नदाता निरंतर समृद्ध हों-इसी संकल्प के साथ हमारी सरकार आगे बढ़ रही है। नई दर का लाभ कीमतों में बढ़ोतरी से पहले बेचे गए गन्ने पर भी लागू होगी। इससे चालू पेराई सत्र में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी राहत मिलेगी। यह व्यवस्था मूल्य वृद्धि के लाभ को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।गन्ने की खरीदी दर में वृद्धि का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं है। बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकते हैं।  छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन           गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में 14 वां स्थान है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 4 प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं, भोरमदेव सहकारी चीनी मिल (कवर्धा), महामाया सहकारी चीनी मिल (सूरजपुर), सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी चीनी मिल (पंडरिया, कबीरधाम) और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल (बालोद) है। छत्तीसगढ़ में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर व रायपुर जिलो में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है । सर्वाधिक उत्पादन देने वाले  जिलो  में कबीरधाम, जगदलपुर एवं सरगुजा जिले  आते है।        धनंजय राठौर           सयुक्त संचालक जनसंपर्क, रायपुर                     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Jio Platforms IPO: ₹1,119 तक होगा शेयर का प्राइस, 21 से 23 अक्टूबर तक लगा सकेंगे बोली

मुंबई  रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा में है. कंपनी ने आईपीओ से जुड़ा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है. इसके साथ ही इश्यू का प्राइस बैंड, शेयरों की डीटेल और आईपीओ से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है।  जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार सिर्फ मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं है. कंपनी के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम बिजनेस और कई डिजिटल सर्विसेस आती हैं. ऐसे में निवेशकों की नजर आईपीओ पर रहेगी. हालांकि, निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार और आईपीओ की शर्तों को समझना जरूरी है।  क्या है जियो आईपीओ का प्राइस बैंड? जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. यानी निवेशकों को इसी दायरे में शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अंतिम कीमत तय होने के बाद शेयरों का अलॉट किया जाएगा।  कितने शेयर जारी करेगी कंपनी? इस आईपीओ में कुल 27 करोड़ शेयरों का इश्यू है. अपर प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है. वहीं, 1,065 रुपये के निचले प्राइस बैंड पर यह रकम करीब 28,755 करोड़ रुपये होगी।  देश के बड़े आईपीओ के बीच कहां होगी जियो की जगह? जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अपर प्राइस बैंड पर करीब 30,213 करोड़ रुपये का होगा. इसके साथ यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है. इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने 27,870 करोड़ रुपये, एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ का साइज करीब 22,569 करोड़ रुपये, एलआईसी ने 20,557 करोड़ रुपये और पेटीएम ने 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।  कब खुलेगा और कब बंद होगा आईपीओ? जियो आईपीओ टाइमलाइन के मुताबिक, 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए अलॉट होगा. आम निवेशकों के लिए आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. निवेश करने से पहले कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में दी गई तारीखों को जरूर चेक कर लें।  कर्मचारियों को कितना मिलेगा फायदा? कंपनी ने एलिजिबल कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं. इन कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट भी मिलेगी. हालांकि, इसका फायदा उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो कंपनी की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।  रिलायंस के शेयरधारकों के लिए क्या है खास? रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. इसमें वे पात्र व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर थे. यह तारीख आरएचपी दाखिल करने की तारीख है. इस कैटेगरी में आवेदन करने के लिए संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।  जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार क्या है? जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम कारोबार और डिजिटल सर्विसेस देती आती हैं. कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट के अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा अन्य तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में भी काम करती है. यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता कारोबार से जुड़ी स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है।  आईपीओ से जुटाई रकम क्यों अहम है? आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के साइज और बाजार में उसकी स्थिति को लेकर निवेशकों का ध्यान खींच रही है. हालांकि, रकम का इस्तेमाल किस तरह होगा, इसकी सही जानकारी के लिए आरएचपी में दिए गए प्रस्ताव को जानना जरूरी है।  निवेश से पहले किन बातों को समझें? किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार की वृद्धि, कॉम्टिटेविटी और भविष्य के प्लान को समझना चाहिए. जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में भी निवेशकों को आरएचपी में दिए गए वित्तीय आंकड़ों और कारोबार से जुड़ी जानकारियों का एनालिसिस करना चाहिए।  2008 के बाद रिलायंस ग्रुप का पहला IPO जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग रिलायंस ग्रुप के लिए भी खास होगी, क्योंकि 2008 के बाद यह ग्रुप का पहला आईपीओ होगा. साथ ही, किसी कंज्यूमर-फोकस्ड कारोबार की यह पहली बड़ी पब्लिक पेशकश होगी. जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस के डिजिटल कारोबार का प्रमुख हिस्सा है. कंपनी क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एंटरप्राइज नेटवर्क सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। 

मध्य प्रदेश में शराबबंदी के पक्ष में बोले धीरेंद्र शास्त्री, अब नशामुक्ति के लिए निकालेंगे यात्रा

टीकमगढ़   बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने टीकमगढ़ में अपनी यात्रा को राजनीतिक नहीं, बल्कि ‘राम नैतिक’ बताया। उन्होंने हिंदू एकता, सामाजिक भेदभाव और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। शास्त्री ने बुंदेलखंड में छुआछूत को हिंदू समाज के बंटवारे की वजह बताते हुए लोगों से आपसी भेदभाव छोड़कर एकजुट रहने की अपील की। छुआछूत छोड़कर एकजुट होने का संदेश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हिंदू समाज की सच्ची एकता केवल बातों से नहीं, बल्कि मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े होने से दिखाई देती है। उन्होंने बुंदेलखंड में छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को एकता के रास्ते की बाधा बताया और लोगों से भेदभाव खत्म करने की अपील की। शराबबंदी के लिए युवाओं से आगे आने की अपील धीरेंद्र शास्त्री ने टीकमगढ़ के लोगों से शराब छोड़ने और गांवों में शराबबंदी के लिए पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं, तो समाज को शराब के नुकसान से बचाने के लिए भी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर शराब छोड़ने के साथ-साथ गांवों में जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक सहयोग से इस दिशा में काम करने की अपील की। ‘शराब बंद होनी चाहिए, नशा नाश की जड़ है’ रहली क्षेत्र में मीडिया से चर्चा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शराबबंदी पर अपनी बात रखी। उन्होंने बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों का जिक्र करते हुए नशे के दुष्परिणामों पर चिंता जताई। उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए नशे के बजाय भगवान का नाम लेना चाहिए। शास्त्री ने कहा, “जाम पीना है तो भगवान का नाम पीकर देखो, जिंदगी संवर जाएगी।” उन्होंने लोगों से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और नशे से दूरी बनाए रखने का आह्वान किया। बोले- यात्रा राजनीतिक नहीं, ‘राम नैतिक’ है अपनी यात्रा को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक जागरूकता है। उन्होंने इसे ‘राम नैतिक’ यात्रा बताते हुए अपने अभियान को राम और हिंदू समाज से जुड़े संदेशों पर केंद्रित बताया। दिल्ली में CJP के प्रदर्शन पर क्या बोले? दिल्ली में चल रहे CJP के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में अलग-अलग विचारों वाले युवा हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विरोध या प्रदर्शन के दौरान देश की छवि खराब होने से बचना चाहिए। गढ़ाकोटा से रहली होते हुए सागर पहुंची रथयात्रा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता एवं गौ सम्मान रथयात्रा गढ़ाकोटा से रवाना होकर रहली और ढाना होते हुए सागर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। बालाजी मंदिर में लगा दिव्य दरबार सागर पहुंचने के बाद देर रात बालाजी मंदिर में दिव्य दरबार का आयोजन किया गया। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दर्शन के लिए पहुंचे। उनके आगमन को लेकर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। विरोध को लेकर भी दिया बयान धीरेंद्र शास्त्री ने अपने विरोध को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनके विरोध में हिंदू ही आगे आते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग उन पर फूल बरसाते हैं। उनका यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। टीकमगढ़ में दिए गए इन बयानों के जरिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू एकता, सामाजिक समानता और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।  

EPFO को लेकर बड़ा अपडेट: 51 लाख कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा, जबलपुर में अंतिम तिथि घोषित

 जबलपुर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज सीमा बढ़ाने की घोषणा की है। भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का लाभ अब 15 हजार रुपये की जगह 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले अधिक कर्मचारियों को ईपीएफओ के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का लाभ मिलने का अनुमान है। नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी यह जानकारी क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 कैलाश चंद्र जोशी ने पत्रकारवार्ता में दी। इस दौरान सहायक भविष्य निधि आयुक्त संदीप मिश्रा भी मौजूद रहे। जोशी ने बताया कि नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है। इसका मकसद अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। हाथ में आने वाले वेतन में कुछ कमी हो सकती है क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने बताया कि ईपीएफ में योगदान बढ़ने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाले वेतन में कुछ कमी हो सकती है, लेकिन इसका फायदा लंबे समय में बचत, पेंशन और बीमा सुरक्षा के रूप में मिलेगा। छूटे कर्मचारियों को जोड़ने का अभियान कैलाश चंद्र जोशी ने बताया कि कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत ऐसे पात्र कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ा जा सकेगा, जो पहले किसी कारण से इससे बाहर रह गए हैं। उमंग ऐप के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण और फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। पुराने मामलों में नियोक्ताओं को राहत विश्वास-2026 योजना के तहत पात्र नियोक्ताओं को पुराने लंबित जुर्माने और हर्जाने के मामलों के निपटारे का अवसर मिलेगा। निर्धारित शर्तों के तहत जुर्माने में 45 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान है। योजना दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। पहली नौकरी पर 15 हजार तक प्रोत्साहन पत्रकारवार्ता में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की भी जानकारी दी गई। इसके तहत पहली बार औपचारिक रोजगार पाने वाले पात्र युवाओं को 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है। वहीं नए कर्मचारियों को नौकरी देने वाले पात्र नियोक्ताओं को भी मासिक प्रोत्साहन देने का प्रवि‍धान है। सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना उद्देश्य कैलाश चंद्र जोशी ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना, युवाओं को औपचारिक रोजगार से जोड़ना और नियोक्ताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाना है।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को 15 हजार रुपये एडवांस; 24 अक्टूबर तक करें आवेदन

चंडीगढ़  त्योहारों के बीच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रदेश सरकार ने राहत दी है। सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त संस्थानों में स्थायी या अस्थायी आधार पर लगे नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 15 हजार रुपये का ब्याजमुक्त एडवांस दिया जाएगा। पात्र कर्मचारी 24 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। धनराशि 30 अक्टूबर 2026 तक स्वीकृत और वितरित की जा सकेगी। यह सुविधा नियमित स्थायी और अस्थायी राज्य सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी, जिनकी अगले 10 महीने तक सेवा में बने रहने की संभावना है। संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) एडवांस स्वीकृत करेंगे। अस्थायी कर्मचारी को किसी स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी की जमानत देनी होगी। 10 मासिक किस्तों में वसूली जाएगी राशि यह राशि 10 समान मासिक किस्तों में वसूली जाएगी। पति-पत्नी के दोनों सरकारी कर्मचारी होने पर उनमें से केवल एक को यह सुविधा मिलेगी। कार्यभारित, आकस्मिक वेतनभोगी, दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी एडवांस के पात्र नहीं होंगे। दूसरे सरकारी विभागों, निगमों या स्थानीय निकायों में प्रतिनियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मूल विभाग से एडवांस नहीं मिलेगा। निलंबित कर्मचारियों और हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम 2016 के नियम-7 के तहत कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारियों के आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। अपात्र कर्मचारी को एडवांस देने पर डीडीओ जिम्मेदार होंगे और नियमानुसार कार्रवाई होगी। दुरुपयोग पर कर्मचारी से 10 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज वसूला जाएगा। विभागों को वसूली का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। हर महीने प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के कार्यालय से मिलान करने के साथ ही हर बिल के साथ विवरण देना होगा। कुल खर्च की जानकारी नवंबर अंत तक निर्धारित प्रारूप में वित्त विभाग को भेजनी होगी।

पत्नी की हत्या के बाद रातभर सोता रहा पति, सुबह खुद थाने पहुंचकर किया सरेंडर

खरगोन  शहर के शास्त्री नगर में चरित्र शंका को लेकर पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद जानलेवा साबित हुआ। रात में हुए विवाद के दौरान तैश में आकर पत्नी की लकड़ी से इस हद तक पिटाई की कि उसने दम तोड़ दिया। इसके आरोपित पति सो गया। हत्या का खुलासा उस वक्त हुआ गुरुवार सुबह जब पति नींद से जागा। पत्नी के शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसके होश उड़ गए और आनन-फानन में कोतवाली पहुंचा। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अभिरक्षा में लेकर पंचनामे की कार्रवाई के बाद पीएम के लिए जिला अस्पताल भेजा। आरोपित पति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कि शाबासपुरा थाना भगवानपुरा हाल मुकाम शास्त्री नगर निवासी रुपसिंह ने सुबह सात बजे कोतवाली पहुंचकर सूचना दी कि उसने रात को अपनी पत्नी शारदा (35) की बुधवार रात लकड़ी से पिटाई की थी, अब वह होश में नहीं आ रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची। यहां महिला के शरीर पर चोट के निशान मिले। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पूछताछ में रुपसिंह ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी शारदा के बीच चरित्र शंका को लेकर आए दिन झगड़े होते रहते थे। यह भी पढ़ें- लिव-इन पार्टनर की कार में गला दबाकर हत्या, यमुना में फेंका शव; 40 किमी तक सर्च ऑपरेशन जारी बुधवार रात भी दोनों के बीच इसी बात पर तीखा विवाद हुआ। विवाद के दौरान रूपसिंह ने आवेश में आकर पास रखी जलाऊ लकड़ी उठाई और शारदा के सिर पर वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से शारदा वहीं गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई। पिटाई के बाद रुपसिंह सो गया। गुरुवार सुबह जब शारदा नहीं जागी, तो रूपसिंह को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तत्काल कोतवाली थाने पहुंचा और पुलिस को सारी जानकारी दी।  

​चिरायु से मिली नई उड़ान- नन्हें सूर्या के टेढ़े पैरों को मिली राह

​चिरायु से मिली नई उड़ान- नन्हें सूर्या के टेढ़े पैरों को मिली राह अब आत्मविश्वास से दौड़ रहा 4 साल का मासूम ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सजगता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्वय ने बदला सूर्या का जीवन ​रायपुर,   जन्म के साथ ही जिसके नन्हें कदमों पर दुखों का साया मंडरा रहा था, जो मासूम चलने-फिरने और दौड़ने के लिए तरसता था, आज वही 4 वर्षीय सूर्या यादव अपने हमउम्र बच्चों के साथ खुशी से दौड़-भाग रहा है। सरकार की संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु योजना) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सतर्कता ने इस मासूम को नया जीवन प्रदान किया है। ​चिंता के बादलों से घिरी थी मासूमियत        ​सारंगढ़ के एक सामान्य परिवार में जन्मे सूर्या के दोनों पैर जन्मजात विकृति श्क्लबफुटश् से प्रभावित थे। पैर टेढ़े होने के कारण मासूम सूर्या ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था। जैसे-जैसे सूर्या बड़ा हो रहा था, उसके माता-पिता के दिलों में उसके भविष्य को लेकर चिंता गहरी होती जा रही थी। आर्थिक तंगी और सही मार्गदर्शन के अभाव में परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा था। ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनीं देवदूत, चिरायु टीम ने संभाली कमान        ​   मासूम सूर्या के जीवन में मोड़ तब आया जब स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र की सजग कार्यकर्ता श्रीमती रमाधि चौहान की नज़र बच्चे की स्थिति पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु टीम (सारंगढ़) को इसकी सूचना दी।           ​सूचना मिलते ही चिरायु दल ने सूर्या का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसे निरूशुल्क व उच्च स्तरीय उपचार के लिए जिला अस्पताल रायगढ़ भेजा। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में प्लास्टर चढ़ाने तथा आवश्यक फिजियोथेरेपी व चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के माध्यम से सूर्या का क्रमबद्ध एवं नियमित इलाज शुरू हुआ। ​रंग लाई मेहनत- सीधे हुए पैर, चेहरे पर लौटी मुस्कान       ​लगातार उपचार और उचित देखभाल का नतीजा यह हुआ कि सूर्या के पैरों का टेढ़ापन पूरी तरह ठीक हो गया। कभी जो बच्चा दो कदम चलने के लिए संघर्ष करता था, आज वह बिना किसी सहारे के आत्मनिर्भर होकर खेल रहा है, दौड़ रहा है और अपना बचपन जी रहा है। अपने कलेजे के टुकड़े को सामान्य बच्चों की तरह हंसते-खेलते देख माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक ध्येय यही है कि पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचे। चिरायु योजना के माध्यम से मासूम सूर्या के जीवन में आया यह बदलाव सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है। ‘सेवा की कहानी-कहानी बदलाव की        ​मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित चिरायु योजना राज्य के लाखों नौनिहालों के लिए वरदान साबित हो रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्कूलों में जाकर बच्चों में जन्मजात बीमारियों और कमियों की पहचान कर उनका समय पर निरूशुल्क इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।       ​सूर्या के सफल उपचार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और चिरायु दल के प्रयासों की सराहना हो रही है। मासूम सूर्या के खिलखिलाते चेहरे और दौड़ते कदम इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि सही समय पर सही पहल किसी का पूरा जीवन बदल सकती है।