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दुर्ग न्यायालय में तकनीक से सिमट रही दूरी: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन का निराकरण, मुंबई और चेन्नई के गवाहों के बयान दर्ज

रायपुर न्याय पाने के लिए दूरी बाधा न बने और न्यायिक प्रक्रिया समय तथा संसाधनों के लिहाज से अधिक सुगम हो – इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया, वहीं मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान एवं प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई। यह पहल न्यायिक कार्यों में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। *जब न्यायालयीन कार्यवाही में दूरी बाधा नहीं बनी*          एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन का विधिवत निराकरण किया। इस व्यवस्था से अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में भाग लेने की सुविधा मिली और आवागमन में लगने वाले समय एवं संसाधनों की बचत में सहायता मिली। *मुंबई और चेन्नई से जुड़े गवाहों के दुर्ग न्यायालय में दर्ज हुए साक्ष्य*           एक अन्य विचारणाधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके बयान दर्ज किए गए तथा प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही पूरी कराई गई। इससे लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिली। *डिजिटल न्याय के साथ जनजागरूकता पर भी जोर*           न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का वास्तविक लाभ तभी व्यापक रूप से सामने आता है, जब नागरिकों और संबंधित हितधारकों को इसकी उपलब्ध सुविधाओं तथा उपयोग के तरीकों की जानकारी हो। इसी दृष्टिकोण के तहत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में प्राधिकरण द्वारा डिजिटल माध्यमों और तकनीकी संसाधनों के उपयोग के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।             इन प्रयासों के अंतर्गत आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा अन्य संबंधित हितधारकों तक विभिन्न माध्यमों से पहुँचकर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं की उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना, तकनीक के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक बनाना तथा पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता और न्याय तक पहुँचने के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी देना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग का यह प्रयास न्यायिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा डिजिटल न्याय व्यवस्था के लाभों को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी। मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है। मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की। मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ के दुर्गम गांवों में बदली तस्वीर, दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर 228 घरों तक पहुंचा नल का पानी

सेवा संकल्प की कहानी घने जंगलों के बीच दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर बसे 228 घरों तक पहुंचा नल से जल एडपाल और डोडपाल बने ‘हर घर जल ग्राम’, परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी हुई आसान रायपुर,  दंतेवाड़ा और सुकमा जिले की सीमा पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे एडपाल और डोडपाल गांवों के 228 परिवारों को अब घर पर ही नल से पेयजल मिल रहा है। जल जीवन मिशन से इन दूरस्थ गांवों में वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या दूर हुई है। पहले ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से विशेष रूप से महिलाओं की दिनचर्या आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण जीवन में आए बदलाव की यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  एडपाल के 137 और आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में नल से  शुद्ध पेयजल उपलब्ध          दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर कटेकल्याण विकासखंड की ग्राम पंचायत एडपाल के 137 और उसके आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में जल जीवन मिशन के तहत नल से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। दोनों गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ का दर्जा भी मिल चुका है। पानी लाने की मशक्कत से मिली मुक्ति        घर तक पानी पहुंचने का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है। पहले गर्मी और बरसात के दिनों में भी उन्हें पानी के लिए घर से दूर जाना पड़ता था। इसमें सुबह का काफी समय बीत जाता था। अब पानी लाने की मशक्कत से राहत मिलने के साथ घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। पानी की चिंता हुई दूर          एडपाल की वार्ड पंच बुदरी मंडावी और ग्रामीण महिला जोगी मरकाम बताती हैं कि घर में नल लगने से पानी की चिंता दूर हुई है। महिलाएं अब सब्जी बाड़ी, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के कामों में अधिक समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने में समय लगाने के बजाय पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। पानी की शुद्धता भी जांच रही गांव की महिलाएं        इन गांवों में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महिलाओं ने संभाली है। इसके लिए गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्ट किट से पानी की नियमित जांच कर रही हैं। इससे ग्रामीणों में स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ जलजनित बीमारियों से बचाव के प्रयासों को भी बल मिल रहा है। पूरे परिवार की रोजमर्रा जिंदगी हुई आसान         डोडपाल में आयोजित ‘ग्राम जल उत्सव’ में ग्रामीणों ने घर-घर पेयजल सुविधा मिलने पर खुशी जताई। जल जीवन मिशन से दूरस्थ वनांचल के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचने से महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो रही है।

दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर लगाम की तैयारी, हरियाणा में 17.5 लाख वाहनों पर प्रतिबंध

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा सरकार ने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने की पहल की है। सरकार ने वाहन मालिकों से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है। पुराने वाहनों से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इनके रखरखाव का खर्च अधिक होने के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं। सरकार ने वाहन मालिकों से पुराने वाहन अधिकृत पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्रों (आरवीएसएफ) पर ही स्क्रैप कराने की अपील की है। यहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत वाहनों को नष्ट कर उपयोगी धातुओं और अन्य सामग्रियों का पुनर्चक्रण किया जाता है। इससे अनधिकृत तरीके से वाहन काटने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलती है। एनसीआर में शामिल हैं हरियाणा के 14 जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के अनुसार, हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में शामिल हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, पानीपत, पलवल, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, जींद और करनाल हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की राष्ट्रीय हरित अधिकरण में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 तक एनसीआर में 10 साल से पुराने 6,11,097 डीजल और 15 साल से पुराने 11,45,645 पेट्रोल वाहन दर्ज थे। इनकी कुल संख्या 17,56,742 थी। इनमें से जनवरी 2025 तक 4,160 डीजल और 2,377 पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद किया गया था। एनसीआर में नहीं चलाए जा सकते ऐसे वाहन एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत आयु सीमा पार कर चुके डीजल और पेट्रोल वाहन एनसीआर में नहीं चलाए जा सकते। नियम तोड़ने पर चालान और वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। दिसंबर 2025 में संसद में पेश संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 21 वाहन स्क्रैपिंग केंद्र संचालित हैं। वाहन स्क्रैपिंग का कोई एक समान सरकारी शुल्क निर्धारित नहीं है। भुगतान वाहन की स्थिति, वजन और कबाड़ सामग्री के मूल्य के आधार पर तय हो सकता है। वाहन मालिक को स्क्रैप की कीमत मिल सकती है और प्रक्रिया पूरी होने पर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। पात्रता के अनुसार, इसके आधार पर नए वाहन की खरीद पर प्रोत्साहन मिल सकता है। नए वाहन लेने पर मिल सकती है छूट हरियाणा ने 2022 में वाहन स्क्रैपिंग नीति अधिसूचित की थी। स्क्रैपिंग उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग एवं रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति-2024 में भी प्रावधान हैं। केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत नए वाहन पर मोटर वाहन कर में छूट मिल सकती है। गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए यह अधिकतम 25 प्रतिशत और व्यावसायिक वाहनों के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक हो सकती है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी थी? सॉलिसिटर जनरल ने बयान देकर दूर किया भ्रम

नई दिल्ली 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो, ट्रेन सेवाओं और इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही खबरों पर गहरी आपत्ति जताई और अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अवमानना नोटिस के जवाब में अधिकारियों द्वारा दायर हलफनामों में दिए गए ठोस तर्कों और कारणों को नजरअंदाज कर मीडिया यह भ्रामक संदेश फैला रहा है कि सरकार ने बिना शर्त माफी मांग ली है और उसके पास अपने कदमों के बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि अवमानना के जवाब की ड्राफ्टिंग नियमावली के तहत पहला पैराग्राफ बिना शर्त माफी से शुरू होता है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सरकार अपनी कार्रवाई को गलत मान रही है। सरकार और उसकी एजेंसियों ने सुरक्षा और जनहित में उठाए गए सभी कदमों का हलफनामे में पूरी मजबूती के साथ बचाव किया है। 'मीडिया कवरेज से प्रभावित नहीं होती कार्यवाही' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई की शुरुआत में ही कहा, मैं मामले के गुण-दोष पर जाने से पहले एक बेहद जरूरी बिंदु सामने रखना चाहता हूं। अदालत ने अवमानना का नोटिस जारी किया था, जिसके जवाब में हमने हलफनामे दायर किए हैं। स्थापित कानूनी सिद्धांत के अनुसार, जब भी अवमानना नोटिस का जवाब दिया जाता है, तो पहला वाक्य बिना शर्त माफी मांगने का ही होता है। इसके तुरंत बाद हम वे तथ्य और कारण बताते हैं कि आखिर अवमानना कैसे नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर यह माहौल बनाया जा रहा है कि सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली है। मेहता ने कहा, मैं यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि सरकार ने अपनी कार्रवाई का पूरा बचाव किया है। पहला पैराग्राफ केवल इस सम्मानित अदालत द्वारा तय किए गए कानूनी प्रोटोकॉल के तहत लिखा गया है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए कहा, मीडिया क्या करता है और क्या लिखता है, उससे अदालत की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ता। हम मीडिया की खबरों के आधार पर अदालत नहीं चलाते हैं। वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि पीठ सॉलिसिटर जनरल द्वारा बताई गई बिना शर्त माफी पर कोई ध्यान नहीं दे रही है और अदालत मामले के मूल तथ्यों के आधार पर ही विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश यह पूरा विवाद 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़ा है। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और सेवाओं पर पूरी तरह रोक न लगाने के सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन किया है। इस अवमानना याचिका के जवाब में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC की ओर से अलग-अलग हलफनामे दायर किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों की पूरी रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। गृह सचिव ने दी सफाई केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता थी। गृह सचिव ने बताया कि दिल्ली पुलिस से मिले सुरक्षा इनपुट के आधार पर रायसीना हिल के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे (कुल 24 घंटे) तक केवल सेलुलर इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। उन्होंने साफ किया कि यह पाबंदी सिर्फ मोबाइल इंटरनेट तक सीमित थी। वाई-फाई, ब्रॉडबैंड या अन्य लैंडलाइन और नॉन-सेलुलर इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह चालू थीं, ताकि आम जनता और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अनावश्यक परेशानी न हो। गृह सचिव के अनुसार, पुलिस की मांग को विधिक ढांचे के तहत जांचा-परखा गया और तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम पूरी तरह तर्कसंगत पाया गया। हिंसक इतिहास और इंटेलिजेंस इनपुट दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने अपने एफिडेविट में पुलिसिया कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा उपाय और मेट्रो सेवाओं का नियमन खुफिया जानकारियों और जमीनी स्थिति के सटीक आकलन पर आधारित था। पुलिस कमिश्नर ने याद दिलाया कि दिल्ली देश की राजधानी है और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। उन्होंने 6, 7 और 8 अक्टूबर को हुए आयोजनों और उसके बाद उपजी हिंसा का हवाला दिया, जिसमें भीड़ द्वारा सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि मेट्रो सेवाओं को आंशिक रूप से नियंत्रित करने का मकसद शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित उपद्रव को रोकना था। अनुराग कुमार ने यह भी कहा कि पुलिस के सुरक्षा तंत्र और बचाव के उपायों को लेकर गलत और भ्रामक नैरेटिव फैलाया जा रहा है, जो कि सच्चाई से परे है। DMRC ने रक्षा अपना पक्ष दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अपने अलग हलफनामे में उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद या रद कर दिया गया था। DMRC ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि उसके पूरे नेटवर्क में कुल 303 स्टेशन हैं। प्रदर्शन वाले दिन केवल 45 स्टेशनों (नेटवर्क के लगभग 15 प्रतिशत) पर ही यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रवेश और निकास पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। की 258 स्टेशन बिना किसी बाधा के यात्रियों के लिए खुले रहे और पूरे दिन परिचालन सामान्य रहा। DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को लगभग 32 लाख लोगों ने मेट्रो से सफर किया। आम तौर पर दूसरे शनिवार को यह संख्या लगभग 58 लाख होती है, लेकिन सवारियों की इस कमी का मुख्य कारण शहर में सुरक्षा संबंधी पाबंदियां थीं, न कि मेट्रो संचालन का बंद होना।

इंदौर का करोड़पति हेड कांस्टेबल! आय से 575% अधिक संपत्ति का खुलासा, 22 खातों की जांच जारी

देवास  पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त जांच में अब तक करीब 13.07 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों पर व्यय किए जाने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, यह राशि उसकी ज्ञात आय की तुलना में 575 प्रतिशत अनुपातहीन है। 14 अक्टूबर को विभिन्न ठिकानों पर तलाशी के बाद अब जांच बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों से जुड़े वित्तीय अभिलेखों पर केंद्रित है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, अब तक सामने आए 22 बैंक खातों की जानकारी के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। इनमें से 17 खातों में अंतिम शेष राशि के रूप में 10 लाख 6 हजार 382 रुपये मिले हैं। शेष पांच खातों का विवरण प्राप्त किया जा रहा है। खातों से राशि निकासी पर रोक लगाने के लिए भी बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश की जानकारी जुटाने के साथ वाहनों के सत्यापन के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय सहित अन्य विभागों से अभिलेख मांगे गए हैं। पुराने विवाद भी चर्चा में कार्रवाई के बाद देवास में फिरोज खान से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में हैं। वर्ष 2019 में शक्ति नगर पहुंच मार्ग को निजी जेसीबी से खोदने के मामले में तत्कालीन एसपी ने नोटिस दिया था। वर्ष 2024 में घर के पास सरकारी बाउंड्रीवाल तोड़ने की शिकायत पर नगर निगम ने प्रकरण दर्ज कराया था। आदर्श नगर में शासकीय मार्ग खोदने की शिकायत भी रहवासियों और पार्षद ने की थी।  

101 कन्याओं का पूजन कर दिया संरक्षण का संदेश, स्वास्थ्य और मानसिक सशक्तीकरण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गुरुवार को महासमुंद के अंबेडकर भवन, बागबाहरा रोड में “कन्या पूजन से कन्या संरक्षण तक” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 350 किशोरी बालिकाओं एवं माताओं ने सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से बालिकाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 101 कन्याओं के पूजन एवं कन्या भोज के साथ हुई। इसके बाद जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बालिकाओं और माताओं को शारीरिक स्वास्थ्य, कैंसर से बचाव, किशोरावस्था में होने वाले बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। आयोग का उद्देश्य कन्या पूजन की परंपरा को बालिकाओं के संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रति जिम्मेदारी के संकल्प से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बेटियों का सम्मान केवल किसी पर्व या विशेष अवसर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए वर्षभर प्रयास किए जाने चाहिए। बाल मनोचिकित्सक डॉ. गार्गी पांडेय ने बच्चों की सुरक्षा, उनसे संवाद करने के तरीके और व्यवहार के महत्व पर अपनी बात रखी। साथ ही मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति अभिभावकों को जागरूक किया गया। बालको मेडिकल सेंटर, नया रायपुर की विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. यामिनी शुक्ला भविष्कर ने सर्वाइकल कैंसर के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते, इसलिए समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श महत्वपूर्ण है। उन्होंने एचपीवी जांच, पैप स्मीयर और एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं, बालको मेडिकल सेंटर की वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. अनीशा ने ब्रेस्ट कैंसर के संभावित लक्षणों और बचाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने स्तन में गांठ, आकार में बदलाव अथवा त्वचा में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं किशोरियों के लिए स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग संबंधी पहल भी की गई। एम्स रायपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा साहू ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, माहवारी स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया। आईटीएसए हॉस्पिटल, रायपुर की बाल मनोचिकित्सक डॉ. इशिका जायसवाल ने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, चिंता, आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को समझने तथा उन्हें सकारात्मक वातावरण देने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। नाटक के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सामने स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जागरूकता, समय पर जांच, उचित परामर्श और विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने एम्स रायपुर, बालको मेडिकल सेंटर और आईटीएसए हॉस्पिटल जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर बालिकाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद की पहल की है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव, एचपीवी टीकाकरण और समय पर जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और एचपीवी टीकाकरण के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेकर उपलब्ध पात्रता एवं सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार टीकाकरण सुनिश्चित करें। अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि आयोग “फ्रॉम डिलिबरेशन टू डिलीवरी” अर्थात विचार-विमर्श से प्रभावी क्रियान्वयन के सिद्धांत के साथ प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त बचपन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कन्या पूजन की सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर मिलें। बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम ठाकुर सहित अन्य पार्षद एवं जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उपस्थित बालिकाओं और माताओं ने बेटियों के सम्मान, स्वास्थ्य एवं संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और समाज में इस संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की तैयारी करने पर दिया जोर

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा से आज दंतेवाड़ा सर्किट हाउस में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की पदाधिकारियों एवं महिला सदस्यों ने मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कंपनी को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त होने पर महिलाओं को बधाई दी। मुलाकात के दौरान महिला सदस्यों ने उप मुख्यमंत्री  शर्मा को अपनी कंपनी के ‘दण्डक ब्रांड’ का चावल का पैकेट भेंट किया।  शर्मा ने महिलाओं से कंपनी की गतिविधियों, उत्पादों की बिक्री, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद अब दण्डक ब्रांड के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने दण्डक ब्रांड को छत्तीसगढ़ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के साथ जोड़कर व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही विदेशों में निर्यात के लिए आवश्यक तैयारियां करने को कहा।  शर्मा ने कहा कि बस्तर के प्राकृतिक वनोपज की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ स्थानीय महिलाओं और वनोपज संग्राहकों तक पहुंचना चाहिए।  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के विकास के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा दे रही है। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की उपलब्धि इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। प्रदेश की पहली एनपीओपी प्रमाणित महिला किसान उत्पादक कंपनी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में दंतेवाड़ा जिले में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था। कंपनी को हाल ही में वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज उत्पादन के लिए यह प्रमाणन मिला है। इससे कंपनी के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। वर्तमान में कंपनी से 1080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबद्ध 2100 वनोपज संग्राहक दीदियां भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। कंपनी के माध्यम से महिलाओं को वनोपज संग्रहण, खरीदी-बिक्री, मूल्य संवर्धन और विपणन से संबंधित आजीविका के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया है।  दण्डक ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान       माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा स्थानीय उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत एचएमटी, लाल चूड़ी और बासमती चावल के साथ नीम फूल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित विभिन्न स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर विपणन किया जा रहा है। कंपनी द्वारा दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र भी प्रारंभ किया गया है, जहां स्थानीय उत्पादों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जा रहा है।       कंपनी की अध्यक्ष  विमला ठाकुर ने बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी। बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से महिलाओं में उत्साह है। उन्होंने कहा कि अब उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत प्राप्त करने की उम्मीद बढ़ी है।       इस अवसर पर विधायक  चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष  नंदलाल मुड़ामी, कलेक्टर  देवेश कुमार ध्रुव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  एम. भार्गव सहित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी की अध्यक्ष  विमला ठाकुर, कोषाध्यक्ष  सरिता ठाकुर, सचिव  मीना ठाकुर तथा अन्य सदस्य  उपस्थित रहे।

CP में तिरंगा लहराने की तैयारी में CJP, परमिशन के लिए माननी होगी दिल्ली पुलिस की शर्त

नई दिल्ली कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शुक्रवार को संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और एनडीएमसी ने सुरक्षा कड़े प्रबंध कर दिए हैं। वहीं डीसीपी नेहा यादव ने आज शाम की गई प्रेसवार्ता में सीजेपी के लिए एक राहत वाली बात भी कही है। उनके अनुसार, सीजेपी को सीपी में तिरंगा लहराने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन इसके लिए दिल्ली पुलिस की कुछ शर्तें हैं।  क्या बोलीं डीसीपी नेहा यादव? डीसीपी नेहा यादव ने कहा, दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय ध्वज लेकर आने और राष्ट्रगान गाने के लिए 11 चुनिंदा लोगों के एक समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर इसकी अनुमति देने की व्यवस्था कर सकती है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि राष्ट्रीय ध्वज को वैधानिक या साथ लेकर चलने और राष्ट्रगान गाने के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जाए, तथा तिरंगे और राष्ट्रगान के प्रति पूरा सम्मान, गरिमा और मर्यादा बनाई रखी जाए। सीजेपी ने क्या की है लोगों से अपील? सीजेपी ने इंटरनेट मीडिया और पत्रकारवार्ता के जरिए आम जनता से शुक्रवार शाम पांच बजे हाथों में तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की है। आम आदमी पार्टी ने भी इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है। मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में शांति बनाए रखने, जनता की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। डीसीपी ने बोलीं- सुरक्षा के हैं कड़े इंतजाम डीसीपी नेहा यादव ने शुक्रवार शाम पत्रकारवार्ता कर बताया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर सूचित किया है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा। एनडीएमसी ने पुलिस से अनुरोध किया है कि इस संवेदनशील सार्वजनिक पार्क की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं और किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को प्रवेश न करने दिया जाए। त्योहारों के इस मौसम में व्यावसायिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका से कनॉट प्लेस के विभिन्न व्यापारी संगठनों और मार्केट एसोसिएशनों ने पुलिस में आवेदन दिया है। व्यापारियों का भी दिया हवाला व्यापारियों का कहना है कि उपद्रवी तत्वों और गैर-कानूनी जमावड़े से उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मुद्दे से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी व्यापारी गतिविधियों में बाधा की आशंका पर गौर किया है, जिसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे धारा 163 के आदेश का उल्लंघन करने वाली किसी भी सभा में शामिल न हों। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से क्षेत्र की शांति भंग न करने और दुकानदारों के कारोबार में बाधा न डालने का अनुरोध किया है।  

चंडीगढ़ में चुनाव से पहले धड़ाधड़ उद्घाटन पर विवाद, SIA ने उठाई रोक लगाने की मांग

चंडीगढ़. नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही शहर में विकास कार्यों के धड़ाधड़ उद्घाटन और शिलान्यास हो रहे हैं। इस बीच सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (एसआईए) ने सार्वजनिक धन से करवाए जा रहे विकास कार्यों के उद्घाटन के नाम पर राजनीतिक प्रचार किए जाने पर चिंता जताई है। एसआईए ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि चुनाव से पहले अनधिकृत उद्घाटनों और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से आयोजित प्रचार कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। एसआईए के प्रतिनिधियों का कहना है कि पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों को अपने काम और उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सरकारी धन से होने वाले विकास कार्यों को किसी व्यक्ति, परिवार या राजनीतिक दल की निजी उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं है। प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठते हैं सवाल ये परियोजनाएं जनता के पैसे से तैयार होती हैं और इनका लाभ भी जनता को ही मिलता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि या संभावित उम्मीदवार नगर निगम की अनुमति के बिना किसी सार्वजनिक परियोजना का उद्घाटन करता है या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करता है तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। चुनाव से ठीक पहले ऐसे कार्यक्रमों के जरिये राजनीतिक लाभ लेने की संभावना पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एसोसिएशन ने मांग की कि सार्वजनिक परियोजनाओं का उद्घाटन केवल सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और नियमों के अनुसार ही किया जाए। पार्षदों, उनके परिवार के सदस्यों और संभावित उम्मीदवारों को सरकारी कार्यक्रमों या सार्वजनिक विकास कार्यों का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार और चुनावी लाभ के लिए करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। विकास कार्यों को चुनावी उपलब्धि प्रस्तुत न करें एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन की मांग किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन के सम्मान, प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनाव से पहले सभी उम्मीदवारों को समान अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जनता के हैं और उन्हें किसी की व्यक्तिगत या चुनावी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।