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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में आयोजित “शिक्षा संवाद” कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया सीधा संवाद, समस्याओं के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं, जहाँ समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले श्रेष्ठ, संवेदनशील, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम, उत्तरदायी एवं नवाचारी बनाना है। विश्वविद्यालयों को इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मंत्री  परमार बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित "शिक्षा संवाद" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज को दिशा देने वाले सशक्त शैक्षणिक संस्थान बनें। मंत्री  परमार ने कहा कि आदर्श विश्वविद्यालय वही है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ, अनुशासित व्यवस्था, शोध की सशक्त संस्कृति, नवाचार तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि समाज एवं राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले सक्षम नागरिक बनकर निकलें। मंत्री  परमार ने कहा कि प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'सार्थक ऐप' का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 'सार्थक ऐप' के माध्यम से दर्ज की जायेगी, जिससे नियमित उपस्थिति, अनुशासन, कक्षाओं में सहभागिता तथा शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। मंत्री  परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि अनुसंधान केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योगों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान की प्रवृत्ति एवं राष्ट्रभावना का विकास करना है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम हो। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को ऐसे आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से ज्ञान, कौशल, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण विद्यार्थी निकलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ। मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित एवं विद्यार्थी-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ, डिजिटल संसाधन, शोध अवसंरचना, प्लेसमेंट गतिविधियाँ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शोध, उद्योगों से समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया संवाद मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परीक्षा, शोध, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, प्लेसमेंट, खेल गतिविधियों एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुझाव और समस्याएँ गंभीरता से सुनीं। मंत्री  परमार ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहाँ विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ समाधान हो तथा संवाद की संस्कृति निरंतर सशक्त होती रहे। गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का किया निरीक्षण मंत्री  परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, अध्ययन कक्ष, स्वच्छ शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी  चेतस सुखाड़िया, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।  

गया में आधुनिक MSME ट्रेनिंग सेंटर बनेगा कौशल विकास और रोजगार का केंद्र

 बोधगया  गया जिले के खिजरसराय में निर्माणाधीन एमएसएमई टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग सेंटर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 20 एकड़ भूमि पर करीब 176 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर निर्माण कार्य जारी है। अब तक परिसर की बाउंड्री वॉल, मुख्य गेट और गार्ड रूम का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य भवनों की ड्राइंग और डिजाइन के अनुरूप निर्माण प्रक्रिया लगातार जारी है। निर्माण एजेंसी को इस परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। सेंटर का वास्तुशिल्प (आर्किटेक्चरल) डिजाइन दिल्ली के विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स द्वारा तैयार किया गया है, जो इसे आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देगा। कुल नौ ब्लॉकों में विकसित होगा अत्याधुनिक परिसर एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बहुउद्देशीय प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, एक्जीक्यूटिव हॉस्टल, कमर्शियल ब्लॉक, कन्वोकेशन हॉल, स्टाफ रेजिडेंसी, गर्ल्स हॉस्टल, डाइनिंग ब्लॉक, बॉयज हॉस्टल, ट्रेनिंग सेंटर, प्रोडक्शन ब्लॉक सहित कई भवन बनाए जाएंगे। सभी भवन दो मंजिला होंगे और आधुनिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण परियोजना पूरी होने के बाद यह संस्थान मगध क्षेत्र के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा। एमएसएमई विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यहां आठवीं कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के छात्र-छात्राओं को विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे। संस्थान में डिप्लोमा इन टूल एंड डाई मेकिंग, मेकाट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स स्किल्स सहित कई आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होंगे। प्रशिक्षण की अवधि छह माह से एक वर्ष तक निर्धारित की जाएगी, ताकि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था सेंटर में हेवी इंजीनियरिंग, जनरल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेस्टिंग, प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े अलग-अलग विभाग स्थापित किए जाएंगे। वहीं, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, ब्यूटीशियन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई नींव साबित होगी। इसके शुरू होने से हजारों युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

परमिट नवीनीकरण, नए परमिट और ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों पर छह जुलाई को फैसला

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की महत्वपूर्ण बैठक छह जुलाई को परिवहन आयुक्त कार्यालय लखनऊ में आयोजित होगी। इसमें परमिटों के नवीनीकरण, परमिट हस्तांतरण, नए स्टेज कैरिज और अन्य परमिटों के आवेदन, प्रति हस्ताक्षर (काउंटर सिग्नेचर) से जुड़े प्रकरण, व मोटरयान अधिनियम-1988 की धारा 86 के तहत परमिटों को निरस्त या निलंबित किए जाने के मामलों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जिन चालक प्रशिक्षण केंद्रों (ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर) को एक वर्ष से अधिक समय पहले लेटर आफ इंटेंट (एलओआइ) जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक केंद्र के प्रत्यायन (एक्रेडिटेशन) के लिए आवेदन नहीं किया है, उनके एलओआइ को निरस्त करने के प्रस्ताव पर भी निर्णय होगा। परिवहन विभाग ने संबंधित आवेदकों और पक्षकारों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखने की सुविधा दी है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति अपने जिले के परिवहन कार्यालय में निर्धारित समय पर उपस्थित होकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रख सकेंगे। अधिवक्ता भी अपनी सुविधा के अनुसार बैठक में शामिल होकर पक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों का असर प्रदेश में बस संचालन, यात्री परिवहन, मालवाहक वाहनों के संचालन, परमिट व्यवस्था और ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्रों की मान्यता पर पड़ता है। नए परमिटों की मंजूरी, पुराने परमिटों के नवीनीकरण और नियमों का पालन न करने वाले मामलों में कार्रवाई से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

वन विभाग की अभिनव पहल बनी लोगों के लिए सुरक्षा कवच

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है। समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है। पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है। तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है। दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।  

बिहार की चुनिंदा सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स, रखरखाव पर होगा खर्च

पटना  राज्य उच्च पथ की चुनिंदा सड़कें और पुल पर टोल टैक्स (Bihar Toll Tax) लगाने के निर्णय से पथ निर्माण विभाग को एक साल में सात से आठ सौ करोड़ रुपए का राजस्व हासिल होगा। इस राशि का इस्तेमाल सड़कों के रख रखाव पर किया जाएगा। वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से बनी सड़कें आ जाएंगी टोल की परिधि में पथ निर्माण विभाग ने बड़ी संख्या में राज्य उच्च पथों (एसएच) को एशियन डेवलपमेंट बैंक व कुछ सड़कों किसी दूसरी वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से विकसित किया है। वित्तीय संस्थाओं की मदद से तैयार राज्य उच्च पथों को टोल टैक्स के दायरे में लाया जाना तय है। जल्द ही पथ निर्माण विभाग इस आशय की अधिसूचना जारी करेगा कि कौन-कौन से राज्य उच्च पथों पर टैक्स लिए जाएंगे। टोल की वसूली के लिए टोल एजेंट को मिलेगी जिम्मेवारी अलग-अलग इलाके में स्थित सड़कों पर टोल टैक्स की वसूली के लिए टोल एजेट नियुक्त करेगा पथ निर्माण विभाग। पथ निर्माण विभाग इन दिनाें डिजिटल मोड़ में यह आकलन कर रहा है कि किसी सड़क पर 24 घंटे के भीतर औसतन कितने वाहनों का परिचालन होता है। इसके आधार पर टोल एजेंट को जिम्मेवारी दी जाएगी। पेमेंट गेटवे के लिए केंद्र सरकार की संस्था की मदद ली जाएगी स्टेट हाईवे पर लगने वाले टोल टैक्स के पेमेंट गेटवे के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की मदद ली जाएगी। राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) पर टोल टैक्स वसूली के लिए जो फास्ट टैग प्रचलन में हैं उन्हीं का इस्तेमाल राज्य उच्च पथ (एसएच) पर भी टोल के लिए किया जा सकेगा। इसकी अनुमति मिल जाने के बाद एसएच के लिए टोल मद में फास्ट टैग के माध्यम से जो राशि आएगी वह पथ निर्माण विभाग के खाते में चली जाएगी। इसके लिए पथ निर्माण विभाग अलग से कोई फास्ट टैग की व्यवस्था नहीं करेगा।  

डीएमएफ से 13 विकास कार्यों के लिए 35.77 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा। आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

रांची एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की तैयारी तेज, केंद्र के फैसले का इंतजार

रांची  झारखंड के लोगों का वर्षों पुराना सपना अब धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ता दिख रहा है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का आकलन कर अपनी रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी है। रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर उपलब्ध संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाना है। अगर सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हुईं तो आने वाले वर्षों में रांची देश के चुनिंदा ऐसे शहरों में शामिल हो सकता है, जहां से घरेलू उड़ानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। रांची एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने की सबसे बड़ी वजह इसकी लगातार बढ़ती यात्री संख्या और झारखंड से विदेश जाने वाले यात्रियों की बढ़ती मांग मानी जा रही है। वर्तमान में बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और हैदराबाद के रास्ते दुबई, सिंगापुर, बैंकाक, कतर, मलेशिया और अन्य देशों के लिए उड़ान भरते हैं। यदि रांची से सीधी अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू होती है, तो यात्रियों का समय और खर्च दोनों कम होंगे। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए एयरलाइंस कंपनियों की रुचि, पर्याप्त यात्री संख्या, द्विपक्षीय उड़ान अनुमति और राज्य सरकार का सहयोग भी उतना ही जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय सुविधा बहाल करने के लिए स्थान चिन्हित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) व्यवस्था है। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार इन सुविधाओं के लिए आवश्यक स्थान चिह्नित किया जा चुका है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही संबंधित विभागों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद विदेश जाने वाले यात्रियों की पासपोर्ट जांच, कस्टम क्लीयरेंस और अन्य औपचारिकताएं रांची एयरपोर्ट पर ही पूरी हो सकेंगी। एयरपोर्ट प्रबंधन ने अंतराष्ट्रीय सेवा बहाल करने के लिए कई एयरलाइंस कंपनियों से भी संपर्क किया है। शुरुआत खाड़ी देशों के लिए सीधी उड़ानों से हो सकती है, क्योंकि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए वहां जाते हैं। एयरपोर्ट को मिल चुका है आईएसओ प्रमाण पत्र बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। लगभग 19 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल में एक समय में करीब 500 यात्रियों को संभालने की क्षमता है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, पर्याप्त चेक-इन काउंटर, विस्तृत आगमन-प्रस्थान क्षेत्र और भविष्य के विस्तार की भी व्यवस्था की गई है। रांची एयरपोर्ट पहले ही आईएसओ प्रमाणन प्राप्त कर चुका है। सुरक्षा के लिहाज से आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, सीसीटीवी निगरानी, फायर सेफ्टी सिस्टम तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। एयरपोर्ट पर रनवे और एप्रन की क्षमता भी वर्तमान परिचालन के अनुरूप मजबूत मानी जा रही है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढोतरी झारखंड में विदेशी पर्यटकां की संख्या में बढोत्तरी हुई है। राज्य गठन के साथ सिर्फ 172 विदेशी पर्यटक सलाना आते थे। अब दो लाख से अधिक विदेशी पर्यटक सलाना आते है। गत वर्ष 3.31 लाख पर्यटक प्रदेश में आए, जिसमें से 1.76 विदेशी पर्यटक की संख्या रही। प्रदेश से विदेश जाने वालों की संख्या बढ़ी क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की ओर से वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक करीब 10.98 लाख पासपोर्ट बनाया गया। कोरोना काल के बाद से पासपोर्ट बनवाने वालो की संख्या लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022 में 1 लाख 900, वर्ष 2023 में एक लाख नौ हजार, वर्ष 2024 में एक लाख 12 हजार और वर्ष 2025 में एक लाख 13 हजार पासपोर्ट जारी हुए। पासपोर्ट बनाने के बाद लोग बड़ी संख्या में विदेश जहा रहे हैं। क्यों जरूरी है रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ान -दिल्ली या कोलकाता होकर विदेश जाने की मजबूरी खत्म होगी। -यात्रा का समय 4 से 8 घंटे तक कम हो सकता है। -झारखंड के प्रवासी श्रमिकों और कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। -मेडिकल, शिक्षा और पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। राज्य में निवेश और उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने से पहले क्या है जरूरी -केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय दर्जे की अंतिम मंजूरी। -कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) की स्थापना। -एयरलाइंस कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय रूट पर परिचालन की घोषणा। -संबंधित देशों के साथ स्लॉट और उड़ान अनुमति। -पर्याप्त यात्री मांग और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित होना।     बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने के लिए की मंत्रालय व एयरलांस कंपनियां को भी पत्र लिखा गया है। रांची एयरपोर्ट कस्टम, इमिग्रेशन और अन्य सुविधाओं के लिए एयरपोर्ट में जगह उपलब्ध है। एयरपोर्ट अंतराष्ट्रीय उडान के लिए तैयार है। पूर्व में वर्ष 2008-09 में रांची से जेद्दा के लिए सीधी उड़ानें संचालित होती थी।     -विनोद कुमार, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट निदेशक  

सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन

मुख्यमंत्री ने किया उत्कृष्ट किसानों का सम्मान सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन वाहन को हरी झंडी दिखाकर सीएम योगी ने रवाना किया यूपी का आम  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आम महोत्सव में उत्कृष्ट किसानों का सम्मान किया। सबसे पहले उन्होंने वाहन को हरी झंडी दिखाकर यूपी के आम को रवाना किया। मुख्य आयोजन में उन्होंने आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का भी विमोचन किया। सीएम ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इनका हुआ सम्मान… 1- बसंत कुमार- ग्राम-रंडौल, सहारनपुर 2- आशा सिंह- ग्राम- महोतेपुर, सीतापुर  3- अचल कुमार मिश्र- ग्राम मेड़ईपुरवा, लखीमपुर खीरी 4- शैलेंद्र कुमार- ग्राम भानपुर, उन्नाव  5- गोपाल माहेश्वरी- ग्राम माधौपुरी, कासगंज 6- नर्वदेश्वर सिंह- ग्राम छबैला, गोरखपुर  7- अमरपाल सिंह- ग्राम अकबरपुर सादात, मेरठ 8- हर्षवर्धन त्यागी- ग्राम भदस्याना, हापुड़ 9- सूर्यमणि यादव- ग्राम-विशुनपुर, हापुड़  10- मो. रेयान सिद्दीकी- अमरोहा 11- मेसर्स अवध नर्सरी- मलिहाबाद, लखनऊ 12- एससी शुक्ल- गोमती नगर, लखनऊ  13- उपेंद्र कुमार सिंह- नवीपनाह, मलिहाबाद लखनऊ

तैयार हो चुके 70 सांदीपनि विद्यालयों का 15 जुलाई तक करायें लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में लोकार्पण के लिए तैयार हो चुके प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन विद्यालयों का लोकार्पण औपचारिक कार्यक्रम न होकर शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी का सामाजिक उत्सव बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संचालित 'स्कूल चलें अभियान' के दौरान आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में बच्चों, उनके अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण आनंद के उत्सव के रूप में मनाया जाए। यह नए भवनों के उद्घाटन के साथ हमारे नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अध्याय का शुभारंभ है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रमों को यादगार बनाने के लिए बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएँ तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएँ। साथ ही सभी बच्चों को स्वल्पाहार एवं मिष्ठान्न वितरित किया जाए, जिससे यह अवसर उनके लिए अविस्मरणीय बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु सांदीपनि के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) प्रकाशित कर विद्यार्थियों में वितरित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु सांदीपनि तत्समय सामाजिक समरसता के सबसे बड़े पैरोकार थे। उन्होंने जाति, वर्ग, रंग का भेद न करके अमीर-गरीब से लेकर राज परिवार के बच्चों सहित गरीबों और किसानों के बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दी। सभी को समान रूप से दीक्षित किया। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में हम सबके विशेषकर विद्यार्थियों को जानना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों और नैतिक मूल्यों के बारे में जानकारी और प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहाँ प्रवेशोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक बच्चों का विद्यालयों से जुड़ाव बढ़े। उन्होंने अधिकारियों से सभी तैयारियाँ समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और आधुनिक शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह तथा स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की। बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि वर्तमान में 70 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के 46 एवं जनजातीय कार्य विभाग के 24 (कुल 70) सांदीपनि विद्यालय लोकार्पण के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण कराया जाये। उन्होंने कहा कि आने वाली गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन हर जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाये। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की जानकारी प्रदाय, विद्यार्थियों द्वारा डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रदर्शन सहित स्कूल के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान जैसे आयोजन किये जायें। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य  गुलशन बामरा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

रिम्स-2 निर्माण को हरी झंडी, कैबिनेट ने 27 प्रस्तावों पर लगाई मुहर

 रांची  झारखंड में अबतक के सबसे बड़े अस्पताल के निर्माण को लेकर गुरुवार को राज्य कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। रांची में रिम्स-2 के निर्माण को कैबिनेट ने 4189.41 करोड़ रुपये खर्च करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए जागृति पीएमयू के गठन पर सहमति दी है। इसके लिए आइआइएम, रांची को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही एक्सआइएसएस, रांची को इम्पैक्ट असेसमेंट की जिम्मेदारी दी गई है।  दूसरी ओर, कैबिनेट ने झारखंड में विकसित भारत जी-राम-जी योजना लागू करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान कर दी। इस योजना में आदिम जनजाति समूह के लिए अतिरिक्त कार्य की भी व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें 100 दिनों की जगह 150 दिनों का रोजगार मिलेगा। योजना लागू होने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने कुल 27 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। कैबिनेट ने राज्य में 12 पंचायतों से कम वाले प्रखंड एवं अंचलों में एकल प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मा देने का निर्णय लिया है। अंचल-प्रखंडों में बदलेगी व्यवस्था ऐसे 53 अंचलों और 54 प्रखंडों में एकल प्रशासनिक पदाधिकारी रखने का निर्णय लिया गया है। इन 53 अंचलों में अंचल अधिकारी सह बीडीओ पदस्थापित होंगे, जबकि 54 प्रखंडों में बीडीओ सह सीओ की पदस्थापना होगी। इसके अलावे 164 प्रखंडों में बीडीओ और सीओ अलग-अलग पदस्थापित होंगे। प्रदेश में 271 प्रशासनिक सेवा की इकाई है। राज्य में प्रखंड-अंचल में झारखंड प्रशासनिक कोटि के पदाधिकारियों की युक्तिसंगत पदस्थापन होगी। कैबिनेट की बैठक में आठ-नौ जुलाई को नई दिल्ली में नेशनल स्टेट होल्डर कंसल्टेशन 2026 के आयोजन की भी स्वीकृति प्रदान की गई। श्रावणी मेला के लिए बनेंगे अस्थायी ओपी झारखंड में श्रावणी मेला को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कांवरियों को कोई परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ओपी की स्थापना की जाएगी। इसमें 28 अस्थायी ओपी और 19 यातायात ओपी बनाए जाएंगे। ये ओपी 30 जुलाई से 28 अगस्त तक कार्य करेंगे। नियुक्ति पत्र लेते समय लेनी होगी निष्ठा की शपथ राज्य में नियुक्ति पत्र लेते समय सभी कर्मियों और पदाधिकारियों के लिए निष्ठा और गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य किया गया है। कैबिनेट ने कार्मिक विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति प्रदान की थी। चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की होगी स्थापना झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024 के तहत बोकारो के चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। इसे लेकर लेटर आफ इंटेंट देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की।