samacharsecretary.com

NHM कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आशा वर्कर यूनियन सक्रिय

 चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हरियाणा की हजारों आशा वर्करों ने अपनी नौकरी पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। राज्य में 21 साल से आशा वर्कर कार्यरत हैं। इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से करीब 17 हजार की सेवाएं 10 साल से अधिक अवधि की हो चुकी हैं। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को दो दिन पहले ही हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं। हरियाणा सरकार ने हालांकि कोर्ट में दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वर्षों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और वर्षों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं। उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 10 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को पक्का किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें 1 .वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय (Honorarium) का भुगतान किया जाए। 2 .जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए। 3 .वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर (Arrears) सहित दिया जाए। 4 .आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव (Medical Leave) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा मिले। 5 .सभी आशा वर्कर्स और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। 6 .पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप (Salary/Honorarium Slip) दी जाए। 7 .त्योहारों के अवसर पर सभी आशा वर्कर्स को त्योहार भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।

लुधियाना में चुनावी अवकाश पर भी लगी कक्षाएं, आदेशों की अनदेखी पर सवाल

लुधियाना. शहर के कई निजी स्कूलों को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की पिक एंड चूज की नीति अक्सर देखने को मिलती है। जहां एक तरफ छोटी छोटी बातों को लेकर शहर के कई बड़े और नामी स्कूलों को प्रशासन और शिक्षा विभाग की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। वहीं शहर में पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग से एफिलिएटिड और एसोसिएट ऐसे स्कूल हैं जहां सरकारी आदेशों को सिरे से अनदेखा कर स्कूल लगातार अपनी मनमर्जी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन और शिक्षा विभाग आंखें मूंद कर उनकी मनमानियों को सहन कर रहा है। शिक्षा विभाग के दावों पर खड़े हुए सवाल ऐसा ही एक नया मामा फिर से प्रकाश में आया है। पंजाब भर में  स्थानीय निकाय चुनावों (लोकल बॉडी इलैक्शंस) के मद्देनजर सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर छुट्टी घोषित की गई थी। इस अनिवार्य अवकाश के बावजूद महानगर के कई इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर स्कूलों को खुला रखने का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय टिब्बा रोड और ताजपुर रोड पर स्थित कई स्कूल इस सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए आज आम दिनों की तरह खुले रहे, जिससे शिक्षा विभाग के प्रबंधकीय दावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सभी स्कूल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) से संबंधित हैं, जिन पर सरकारी गाइडलाइंस और नियमों को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी होती है। नियमों के मुताबिक, चुनाव वाले दिन किसी भी अप्रिय घटना से बचने, सिक्योरिटी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से सभी सरकारी व गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में पूर्ण अवकाश रहता है। लेकिन इन निजी स्कूलों ने एडमिनिस्ट्रेशन के आदेशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। छुट्टी के दिन भी स्टूडैंट्स स्कूल आते-जाते देखे गए इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि स्थानीय सचेत नागरिकों द्वारा इस उल्लंघन की लाइव सूचना तुरंत संबंधित उच्चाधिकारियों को भी दी गई। इसके बावजूद, मौके पर स्कूलों को बंद करवाने या उनके खिलाफ तुरंत एक्शन लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे इन स्कूलों के संचालकों के हौसले बुलंद दिखे।  छुट्टी के दिन भी स्टूडैंट्स आम दिनों की तरह बैग उठाकर स्कूल आते-जाते देखे गए, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि स्कूलों ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी चलाई। इस लापरवाही को लेकर समाज सेवकों और अभिभावकों (पेरेंट्स) में भारी रोष पाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब सरकार और इलैक्शन कमिशन द्वारा सुरक्षा कारणों से छुट्टी का ऐलान किया गया था, तो इन स्कूलों ने किस आधार पर क्लास लगाने का फैसला किया। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी नियमों का सरेआम उल्लंघन करने वाले इन पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई (लीगल एक्शन) अमल में लाते हैं।

वन मंत्री सख्त, बीजापुर DFO को हटाकर निष्पक्ष जांच के दिए आदेश

रायपुर. बीजापुर जिले में हुए तेंदूपत्ता अग्निकांड को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत की कमाई को नुकसान पहुंचाने वाली इस गंभीर घटना पर मंत्री कश्यप ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बीजापुर के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय रायपुर में संबद्ध किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन में अनुभवी अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया डीएफओ नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई को शासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वनवासियों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन मंत्री कश्यप ने दो टूक कहा कि तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं, हजारों आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है। उनकी मेहनत और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री कश्यप ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, समयबद्ध और तथ्यात्मक होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके। अनुभवी अधिकारी को मिली जिम्मेदारी नवनियुक्त डीएफओ जाधव सागर रामचंद्र वर्तमान में राज्य लघु वनोपज संघ में पदस्थ हैं और तेंदूपत्ता संग्रहण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। दंतेवाड़ा जिले में उनके प्रभावी कार्य और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए शासन ने बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। 10 करोड़ से अधिक नुकसान का प्रारंभिक अनुमान उल्लेखनीय है कि 25 मई 2026 को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में भीषण आग लगने से विभिन्न समितियों का संग्रहित तेंदूपत्ता जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 10 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। वास्तविक नुकसान का विस्तृत भौतिक सत्यापन वर्तमान में जारी है। सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत शासन ने घटना के कारणों, गोदामीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों के पालन, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तथा संभावित वित्तीय क्षति सहित सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वन संपदा की सुरक्षा और आदिवासी हितों की रक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सनातन पर कथित टिप्पणी से बढ़ा विवाद, ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिलीगुड़ी में ममता बनर्जी के खिलाफ एक वकील की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले साल कोलकाता में ईद के एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ममता के खिलाफ धारा 351 (1)- आपराधिक धमकी, धारा 352- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान और धारा 353- विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी, नफरत या द्वेष की भावना को बढ़ावा देना के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह शिकायत वकील रिंकी चटर्जी द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में साल 2025 में कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के कार्यक्रम में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का हवाला दिया है। क्या कहा था ममता ने? पिछले साल ईद के मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कथित तौर पर कहा था, "मैं उस गंदे धर्म को नहीं मानती जिसे इस 'जुमला पार्टी' ने जानबूझकर गढ़ा है।" आरोप है कि उन्होंने भाजपा द्वारा प्रचारित हिंदू धर्म के स्वरूप को गंदा धर्म कहकर संबोधित किया था। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख ने 31 मार्च 2025 को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, 'क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (तत्कालीन) ममता बनर्जी के लिए सनातन धर्म एक गंदा धर्म है? उनके शासनकाल में कई हिंदू-विरोधी दंगे होने के बावजूद, उनमें हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उनकी आस्था का अपमान करने की हिम्मत है। एक बार फिर उन्होंने मुसलमानों को हिंदुओं को निशाना बनाने की खुली छूट दे दी है। इस बार एक ऐसे धार्मिक मंच से, जो ईद मनाने के लिए था। उन पर शर्म आती है।' वहीं, शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि एक मुस्लिम धार्मिक सभा के मंच से सनातन धर्म को गंदा कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे भारत सहित दुनिया भर के हिंदुओं का अपमान हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कानून इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगा। रिंकी चटर्जी ने अपनी शिकायत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार हिंदू धर्म को निशाना बनाया है, जिसमें ममता बनर्जी का यह बयान सबसे गंभीर था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ममता बनर्जी ने साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से धमकी दी थी। TMC के भीतर से उठे विरोध के सुर इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है। जब इस एफआईआर को लेकर टीएमसी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और पेशे से वकील अत्री शर्मा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने पार्टी प्रवक्ता के रूप में तो कुछ नहीं कहा लेकिन व्यक्तिगत तौर पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। अत्री शर्मा ने स्वीकार किया कि जब तृणमूल सत्ता में थी तब भी पार्टी के भीतर कई लोग इस बयान के खिलाफ थे। उन्होंने कहा, "उस समय सत्ता की कमान संभालते हुए ममता बनर्जी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना वास्तव में अनुचित था। यहां तक कि हममें से जो लोग उस समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने भी उन विशेष टिप्पणियों का कभी समर्थन नहीं किया। देश के हर नागरिक को शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार है।"

बारनवापारा के जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, वन विभाग भी हुआ उत्साहित

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।           वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं। देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति          बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत          विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति          यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है। बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता         वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सोना-चांदी खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले! चांदी में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम गोल्ड का भाव भी टूटा

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया। सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है। MCX पर सोना-चांदी में गिरावट मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया। चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है। अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।     दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल? एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली। सोने-चांदी में गिरावट की वजह सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।

पर्यावरण संरक्षण की बड़ी योजना: DMRC स्टेशनों पर जमा होंगे पुराने कपड़े, होगा रिसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग

नई दिल्ली  घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़े अब कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे नए और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत DMRC राजधानी के 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़ों के लिए विशेष कलेक्शन बॉक्स लगाएगा, जहां लोग अपने पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ता कपड़ा अपशिष्ट (Waste) पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में इस पहल के जरिए पुराने कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से रिसाइक्लिंग और उनका दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे कचरे में कमी आने के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें। इन 10 स्टेशनों पर कलेक्शन बॉक्स जिन स्टेशनों को इस योजना के लिए चुना गया है, उनमें शाहदरा, मोहन एस्टेट, रोहिणी वेस्ट, लाजपत नगर, मालवीय नगर, मयूर विहार फेज-I, हौज खास, पंजाबी बाग वेस्ट, द्वारका और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो स्टेशन पर बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस पहल के तहत जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसे दोबारा उपयोग लायक बनाया जाएगा। साथ ही इनकी अपसाइक्लिंग (उपयोगी उत्पादों में बदलना) भी की जाएगी। पुराने कपड़ों से बैग, दरी और अन्य प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट के प्रदर्शन और बिक्री के लिए चयनित मेट्रो स्टेशनों पर विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा। रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजे जाएंगे कपड़े जो कपड़े दोबारा उपयोग के योग्य नहीं होंगे, उन्हें रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजा जाएगा, जहां उनसे रिसाइक्ल्ड यार्न, फाइबर और नॉन-वोवन फेल्ट जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे न्यूनतम अपशिष्ट सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस तरह होगी ब्रैंडिंग डीएमआरसी के अनुसार, इस परियोजना की ब्रैंडिंग 'दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन' के नाम से की जाएगी। फिलहाल कलेक्शन बॉक्स लगाने, ब्रैंडिंग और एमओयू से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना का शुभारंभ किया जाएगा।

आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: पटना IGIMS में बड़ा खुलासा

पटना पटना स्थित आईजीआईएमएस (IGIMS) में आयुष्मान घोटाले की जांच के लिए पुलिस और संस्थान की ओर से मंगलवार को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गईं। आईजीआईएमएस ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो घोटाले के हर बिंदु पर जांच करेगी। इधर पुलिस ने इस मामले के आरोपित चार संविदा कर्मियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी गठित की है। आईजीआईएमएस में अब तक 45 लाख का आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) में घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन संस्थान के अधिकारियों की मानें तो यह राशि और बढ़ सकती है। आईजीआईएमएस में एक प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी में संस्थान के पदाधिकारियों के अलावा एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी की बुधवार को इस विषय पर बैठक होनी है। संस्थान के पदाधिकारियों की मानें तो आयुष्मान कार्ड का सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी और आउटसोसिंग एजेंसी के कर्मियों की मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ छलावा किया है। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मरीजों को 2018 से मिल रहा है। इधर, इस मामले में आरोपित आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी अमरजीत राय, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। एक कर्मी को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। टाउन डीएसपी-2 साकेत कुमार ने बताया कि आईजीआईएमएस ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है। कैसे खुला राज अक्तूबर 2025 में मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड के बाघाखाल गांव निवासी 46 वर्षीय मनोज झा को दलालों ने उनके आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल करने के बदले में 40 हजार देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अपना कार्ड तो दे दिया, पर दलालों ने उन्हें 40 हजार नहीं दिये। इसकी उन्होंने आईजीआईएमएस में लिखित शिकायत की। मामले की छानबीन की गई तो पाया गया कि मनोज झा का अस्पताल में उपचार ही नहीं हुआ है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के तहत बने कार्ड से 40 हजार की निकासी कर ली गई है। यह कैसे हुआ? संस्थान के पदाधिकारी भी नहीं समझ पाए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने योजना के अंतर्गत बने कार्ड से अन्य मरीजों की जांच शुरू की तो पता चला कि बड़े पैमाने पर इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। इन बिंदुओं पर होगी जांच – किस स्तर तक गड़बड़ी की गई है, किन कारणों से ऐसी गड़बड़ी हुई – आयुष्मान के लिए जो सॉफ्टवेयर बनाया गया है उसमें क्या खामी थी – जिस एजेंसी ने सॉफ्टवेयर बनाया था वह कैसे निगरानी रख रही थी – आरोपित का कहां-कहां नेटवर्क है, इसमें कौन-कौन लोग हैं शामिल

हरियाणा की आशा वर्करों के लिए बड़ी खबर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परमानेंट होने की आस

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हरियाणा की हजारों आशा वर्करों ने अपनी नौकरी पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। राज्य में 21 साल से आशा वर्कर कार्यरत हैं। इस समय करीब 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से करीब 17 हजार की सेवाएं 10 साल से अधिक अवधि की हो चुकी हैं। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को दो दिन पहले ही हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं। हरियाणा सरकार ने हालांकि कोर्ट में दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और अदालत नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वर्षों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और वर्षों तक बिना किसी अदालत के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो राज्य उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं। उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 10 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को पक्का किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया। आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय (Honorarium) का भुगतान किया जाए। जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए। वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर (Arrears) सहित दिया जाए। आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव (Medical Leave) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) की सुविधा मिले।  सभी आशा वर्कर्स और उनके परिवारों को सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में मुफ्त/कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए। पारदर्शिता के लिए हर महीने सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप (Salary/Honorarium Slip) दी जाए। त्योहारों के अवसर पर सभी आशा वर्कर्स को त्योहार भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।

बेतला नेशनल पार्क में जानवर पानी को तरसे, जंगलों में लू और प्यास का कहर

 लातेहार बेतला नेशनल पार्क सहित पूरा पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इस समय भीषण और जानलेवा गरमी की चपेट में है. कभी ठंडी बयार के लिए मशहूर रहने वाले पलामू टाइगर रिजर्व का पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जंगलों में भी गर्म हवाएं चल रही है. जंगल सफारी के दौरान हीटवेव (लू ) का कहर का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए पर्यटकों का आगमन बैकफुट पर चला गया है. आसमान से बरसती आग ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीना भी दूभर कर दिया है. भीषण तपिश और लू के थपेड़ों से जंगलों में हाहाकार मचा है, जिससे जंगली जानवर अत्यधिक बेचैन हैं. नवजात और नन्हें जंगली जानवरों की मौत की अपुष्ट खबरें मिल रही है. सदियों पुराने कई प्राकृतिक जलस्रोतों को सुख गए है. पानी की एक-एक बूंद के लिए जंगलों में त्राहि-त्राहि मची है. बेकाबू प्यास और भीषण बेचैनी से तड़पते जानवर अब रिजर्व की सुरक्षित सीमा को छोड़कर बाहरी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जहां मौत के सौदागर (शिकारी) हाथ में फंदे और जहर लिए उनके इंतजार में बैठे शिकार कर रहे हैं. सूख गए प्राकृतिक जलस्रोत, कृत्रिम व्यवस्थाएं नाकाफी हिरण बंदर, लंगूर,गौर और जंगली सुअर पानी की तलाश में पागलों की तरह भटक रहे हैं. हालांकि वन विभाग ने कुछ जगहों पर टैंकरों के जरिए कृत्रिम वॉटर होल (जलपात्र) भरने का दावा किया है, लेकिन यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. कड़कड़ाती धूप में इन कृत्रिम गड्ढों का पानी भी कुछ ही घंटों में खौलने लगता है, जो जानवरों के पीने लायक नहीं बचता. जंगल में पानी न मिलने के कारण मजबूरन वन्यजीवों के झुंड रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों, खेतों और रिहायशी बस्तियों की तरफ आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार बाहरी इलाकों और बचे-खुचे पानी के गड्ढों के पास शिकारियों ने गुप्त फंदे (फांस) लगा दिये हैं. प्यास से बेहाल जानवर जैसे ही पानी पीने नीचे झुकते हैं, वे इन फंदों का शिकार हो जा रहे हैं. इसके अलावा, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पानी में जहरीले पदार्थ मिलाने की भी आशंका बनी हुई है, जिससे सामूहिक शिकार का खतरा मंडरा रहा है. रात भर गांवों के आसपास मंडराते हैं जानवर: ग्रामीण पीटीआर की सीमा से सटे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी थी. पानी की तलाश में हिरण, बाइसन और जंगली सुअर रोज हमारे खेतों की तरफ आ रहे हैं. हाल ही में बाइसन ने एक को मार डाला है. रात को डर के मारे कोई घर से बाहर नहीं निकलता. जंगल के अंदर पानी बिल्कुल नहीं है. कुछ बाहरी लोग रात के समय पानी के गड्ढों के पास संदिग्ध हालत में घूमते देखे गए हैं, जो पक्के तौर पर शिकार के इरादे से आते हैं. हम अलर्ट पर हैं, टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई: रेंजर रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है,स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं. कृत्रिम वॉटर होल्स में टैंकरों के जरिए लगातार पानी भरा जा रहा है. इसके साथ ही कुछ चुनिंदा बोरवेल को सोलर पंप से जोड़ा गया है जिससे पानी की निरंतर आपूर्ति हो सके. वहीं शिकार की आशंका को देखते हुए हमारी एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) टीम और वनकर्मियों की गश्त चौबीसों घंटे बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों के साथ मिलकर इको-विकास समिति को सक्रिय किया गया है जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना मिल सके.