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TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह? काकोली घोष ने पार्टी के सभी पद छोड़े, ममता की बढ़ी टेंशन

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है. अब पार्टी को बड़ा झटका लगा है. बारासात से TMC पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें आ रही थीं, जिस पर अब इस इस्तीफे ने मुहर लगा दी है। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा पत्र सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपना इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेज दिया है. अपने पत्र में उन्होंने साफ किया है कि वह पार्टी संगठन के सभी पदों को छोड़ रही हैं. बता दें कि इससे पहले उन्होंने बारासात के जिलाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह कोई बड़ा कदम उठा सकती हैं। सांसद बनी रहेंगी काकोली घोष हालांकि, काकोली घोष ने अभी तक तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. वह लोकसभा में बारासात सीट से टीएमसी की सांसद बनी रहेंगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह कदम पार्टी नेतृत्व को एक कड़ा संदेश है, जिससे यह साफ है कि वह संगठन के कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं। पार्टी में बढ़ता असंतोष ममता के लिए चिंता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी के अंदर कई सांसद और विधायक नाराज चल रहे हैं. काकोली घोष जैसी सीनियर नेता का इस तरह पदों से किनारा करना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकता है. फिलहाल इस पूरे मामले पर टीएमसी आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ममता बनर्जी के इस कदम से काकोली घोष आहत और नाराज चल रही हैं. काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. काकोली घोष को टीएमसी के चीफ व्हिप से हटाए जाने के कुछ ही घंटों में केंद्र सरकार ने उनको वाई सिक्योरिटी दे दी थी. ऐसा तब था, जब अभिषेक बनर्जी से लेकर टीएमसी के तमाम नेताओं की सिक्योरिटी में कटौती की गई थी। एक दिन पहले ही काकोली घोष टीएमसी के छह विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भी शामिल हुई थीं. काकोली घोष टीएमसी की स्थापना के पहले से ममता बनर्जी की करीबी रही हैं। I PAC को मैनर्स नहीं, बदतमीजी से बात करते थे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन, चुनावी हार, आई-पैक की भूमिका और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन कुछ लोग बाहर से आकर पार्टी को नुकसान पहुंचा गए। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के कठिन समय में संघर्ष किया और मेहनत के दम पर संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मैं अच्छे समय में पार्टी में नहीं आई थी। जब लोग सड़कों पर पीटे जाते थे, तब भी मैं पार्टी के साथ थी। हमने लंबे संघर्ष के बाद पार्टी को मजबूत किया और करीब 20 साल बाद सत्ता हासिल की। व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी में आए कुछ लोग काकोली घोष ने इशारों में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा, जो पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में आए। उन्होंने संगठन को मजबूत करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। बंगालविधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर काकोली घोष दस्तीदार ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी का काम करने का तरीका गलत था और उसके प्रतिनिधियों का व्यवहार पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक था। ममता बनर्जी के नौकर नहीं टीएमसी कार्यकर्ता काकोली ने कहा कि हमारे कार्यकर्ता किसी के नौकर नहीं हैं। वे ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति प्रेम और विश्वास के कारण काम करते हैं, लेकिन आई-पैक के लोगों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कुछ सदस्य खुद को बहुत बड़ी सत्ता मानने लगे थे और स्थानीय नेताओं की राय को महत्व नहीं देते थे। उनके अनुसार, चुनाव प्रचार का संचालन करने वाली इस बाहरी एजेंसी के पास जमीनी राजनीति का पर्याप्त अनुभव नहीं था, जबकि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। I-PAC में काम करने का बिल्कुल भी सलीका नहीं था। वे बहुत ही बदतमीज़ी से बात करते थे। हमारे ये कार्यकर्ता कोई नौकर नहीं हैं। हम इन्हें कोई तनख्वाह नहीं देते। ये तो ममता दीदी और पार्टी के प्रति अपने प्यार की वजह से काम करते हैं। वे लोगों के साथ बुरा बर्ताव करते थे, और उनका घमंड इतना बढ़ गया था कि आखिरकार उन्होंने हमारे साथ भी बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया। उन्हें ऐसा लगता था मानो वे प्रधानमंत्री से भी ज़्यादा ऊंचे ओहदे पर बैठे हों। मुझे नहीं लगता कि I-PAC सीधे तौर पर उनके (ममता बनर्जी के) नियंत्रण में था, क्योंकि I-PAC एक अलग ही संस्था है।

पाकिस्तान में इतिहास पर बवाल: ख्वाजा आसिफ ने माना- हिंदू थे हमारे पूर्वज, किताबों में फैलाया गया झूठ

इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को "गलत इतिहास" पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे." उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए। ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, "हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?" आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की। पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई! ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे। ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी। पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, "मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो." उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं से भरी" हो सकती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझते रहे हनी सिंह, बोले- 7 साल घर में खुद को बंद रखा

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी लड़ाई के दौरान सालों तक भारी दवाइयां लेने की वजह से उनके बाल बहुत ज्यादा झड़ गए थे, जिससे वे पूरी तरह से गंजे हो गए. सिंगर ने बताया कि कई सालों तक बाइपोलर डिसऑर्डर और नशे की लत से जूझने के बाद अब वे विग पहनते हैं. रैपर ने यह खुलासा हाल ही में ABtalks पॉडकास्ट में किया, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने यह भी बताया कि सालों तक लोगों की नजरों से दूर रहने के दौरान उनके इलाज का उनके शरीर पर क्या असर पड़ा. हनी सिंह के बाल कैसे झड़ गए? चकाचौंध से दूर होने से पहले, हनी सिंह इंडियन पॉप म्यूजिक के सबसे बड़े नामों में से एक थे. लेकिन शोहरत के पीछे, सिंगर ने बताया कि वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे.  पॉडकास्ट के दौरान, हनी सिंह ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज के दौरान सालों तक दवाइयां लेने का उनके शरीर पर क्या असर पड़ा. सिंगर ने कहा, 'मैं सात सालों तक भारी दवाइयां ले रहा था. इसकी वजह से मेरा वजन 105 किलो हो गया था, और मेरे सारे बाल झड़ गए थे. ये नकली बाल हैं, मैं पूरी तरह से गंजा हूं. ये केवल एक विग है.' ठीक होने में सालों लग गए हनी सिंह ने यह भी बताया कि ठीक होना लोगों की सोच से कहीं ज्यादा मुश्किल था. सिंगर के मुताबिक, 2014 में नशा छोड़ देने के बाद भी, उन्हें मानसिक रूप से फिर से स्थिर महसूस करने में कई साल लग गए. उन्होंने कहा, 'आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन 2014 में नशा छोड़ देने के बाद भी, मुझे ठीक होने में सात से आठ साल लग गए.' सिंगर ने बताया कि उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्होंने सालों तक खुद को बाहरी दुनिया से पूरी तरह से काट लिया था. रैपर ने कहा, 'फिर मैंने अपनी बहन को बुलाया और उसे बताया कि मेरे साथ कुछ अजीब हो रहा है. उसने कहा कि मुझे फिर भी शो करना होगा. दो गाने गाने के बाद मैं बीच में ही शो छोड़कर चला गया. उसके बाद, मैं सात सालों तक अपने घर के अंदर ही रहा. मैं नहीं चाहता था कि मेरे फैंस मुझे उस हालत में देखें. मैंने खुद को अंदर बंद कर लिया और अपने बचपन के दोस्तों से भी नहीं मिला. कोई बातचीत नहीं, कोई फोन कॉल नहीं, कोई टीवी नहीं, कोई इंटरनेट नहीं. लोग सोचते थे कि कोई शैतान मुझसे बात कर रहा है.' सिंगर ने यह भी बताया कि डॉक्टरों और दवाइयों को बदलने से आखिरकार उन्हें ठीक होने में मदद मिली. उन्होंने कहा, 'मैं सात सालों से एक ही दवा ले रहा था, फिर भी ठीक नहीं हो पा रहा था. लेकिन जब आखिरकार मैंने अपने घर से बाहर निकलने का फैसला किया, तो मैंने अपना डॉक्टर भी बदल लिया. उन्होंने कुछ दवाएं बदलीं, कुछ नई दवाएं शुरू कीं, और मुख्य दवा की डोज को एडजस्ट किया. चार हफ्तों के अंदर ही मैं ठीक होने लगा. सिर्फ चार हफ्तों में मैंने लोगों से मिलना-जुलना और जिंदगी का सामना करना फिर से शुरू कर दिया.'

मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्लासरूम और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए तय होगी प्राथमिकता   रायपुर मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी में छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वार्षिक कार्य योजना और बजट वर्ष 2026-27 का प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से समग्र शिक्षा अंतर्गत स्वीकृत नवीन कार्यों का युक्तियुक्तकरण उपरांत स्थल परिवर्तन एवं विविध बिन्दुओं के प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत अनुमोदित किये गये। स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत विविध निर्माण कार्यों को शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराये जाने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा हुई।             बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने 2026-27 के वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट प्लान को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंनें शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया।  मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बजट प्लान में केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि लर्निंग आउटकम सुधारने वाले नवाचारों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए स्कूलों में संसाधन, शिक्षक और तकनीक तीनों मजबूत करने होंगे।   छात्रों के ड्राप आउट को राकने करें प्रयास             मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में छात्रों के ड्राप आउट की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाये। माध्यमिक-उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब स्थापित होंगी। सभी स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था होगी।  ड्रॉपआउट रोकथाम कक्षा 1, 8 और 10 में ड्रॉपआउट दर शून्य करने के लिए विशेष ट्रैकिंग सिस्टम बनेगा। शाला त्यागी बच्चों को मुख्यधारा में लाने हेतु ब्रिज कोर्स चलेंगे। शिक्षक प्रशिक्षण            राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसार सभी शिक्षकों का फेज-वाइज प्रशिक्षण दिया जाये। गणित-विज्ञान-अंग्रेजी के लिए विशेष मास्टर ट्रेनर पूल तैयार होगा। बुनियादी सुविधा जरूरत वाले स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, बालिका शौचालय, पेयजल, बिजली और बाउंड्रीवॉल के काम प्राथमिकता से होंगे।   समावेशी शिक्षा          दिव्यांग बच्चों के लिए संसाधन कक्ष, थेरेपी यूनिट और विशेष टीएलएम का प्रावधान बजट में रखा जाएगा।  कौशल विकासरू कक्षा 9 से 12 तक वोकेशनल एजुकेशन को मजबूत किया जाएगा। कृषि, आईटी, हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे ट्रेड में स्थानीय जरूरत के अनुसार कोर्स चलेंगे।

हरियाणा गेस्ट टीचर्स को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने नियमितीकरण का दिया आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था। हाई कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।  

भारत का भविष्य है वैभव’, लेकिन टेस्ट से पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट जरूरी: गांगुली

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है, वह हैं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को हैरान करने वाले इस युवा बल्लेबाज को लेकर अब पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने बड़ा बयान दिया है.  मीडिया से  इंटरव्यू में गांगुली ने साफ कहा कि वैभव अभी टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. उन्होंने BCCI और चयनकर्ताओं को संकेत देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में प्रतिभा जरूर दिख रही है, लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में जगह बनाने के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन जरूरी है. गांगुली ने कहा- T20 क्रिकेट में उसे तुरंत शामिल किया जा सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में नहीं. उसे पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ज्यादा रन बनाने होंगे. हालांकि इस समय वह बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी है. 15 साल का लड़का जिस तरह दुनिया के गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहा है, वह अविश्वसनीय है. वह भारत का भविष्य है. दादा ने वैभव की बल्लेबाजी की जमकर तारीफ भी की. उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और निडर अंदाज के साथ वह खेल रहे हैं, वह भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. क्या आक‍िब को मिलनी चाहिए जगह, गांगुली की दो टूक इंटरव्यू में गांगुली ने घरेलू क्रिकेट और चयन प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले आकिब नबी को अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह मिलनी चाहिए थी. गांगुली ने कहा कि नबी ने रणजी सीजन में बेहतरीन गेंदबाजी की थी. हालांकि उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव के चयन का भी समर्थन किया. गांगुली के मुताबिक- प्रिंस यादव बेहद तेज गेंदबाज हैं और जब आपके पास रफ्तार होती है तो आपको ज्यादा समय तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इंतजार नहीं करवाना चाहिए. मुझे लगता है कि दोनों खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए था.” गांगुली ने आधुनिक क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने क्रिकेट को अलग तरीके से सीखा था और उस दौर में किसी ने नहीं सोचा था कि T20 क्रिकेट इतना बड़ा फॉर्मेट बन जाएगा. उन्होंने र‍िकी पोंट‍िंग, कुमार संगकारा,  जो रूट, एल‍िस्टेयर कुक  जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ क्रिकेट और खिलाड़ियों की सोच दोनों बदलती रहती है. पूर्व कप्तान ने कहा कि T20 क्रिकेट अब हमेशा रहने वाला है और यह लगातार ऐसे खिलाड़ियों को पैदा करेगा जो आक्रामक क्रिकेट खेलेंगे और गेंद को सीधे स्टैंड्स में पहुंचाएंगे.

नीट यूजी में प्रवेश प्राप्त करने हेतु प्रदेश के संगठित क्षेत्र के बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी वन मंत्री  केदार कश्यप ने दी बधाई जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।           वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं। देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति          बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत          विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति          यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है। बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता         वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

फिश मंडी से लेकर एक्वा पार्क तक: यूपी सरकार की नई योजना से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन और कारोबार

 लखनऊ प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को नई गति देने के लिए सरकार ने स्टेट आफ आर्ट होल सेल फिश मंडी, एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर स्थापना की योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत पहले चरण में गोरखपुर और मुरादाबाद में होल सेल मत्स्य मंडी स्थापित की जाएंगी। वहीं गोरखपुर में एकीकृत एक्वा पार्क और मत्स्य प्रसंस्करण सेंटर भी बनाया जाएगा। मत्स्य विभाग ने योजना के संचालन के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत मुरादाबाद में 4.84 एकड़ भूमि होलसेल फिश मंडी का निर्माण किया जाएगा। वहीं गोरखपुर में मंडी के साथ एक्वा पार्क व प्रसंस्करण इकाई के लिए 27 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इनमें मत्स्य उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही जल पर्यटन, मनोरंजन और जलीय कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत फिश मंडी निर्माण को 24-24 करोड़ रुपये, एक्वा पार्क के लिए 40 करोड़ और मत्स्य प्रसंस्करण इकाई के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। इनका संचालन निजी सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी) मोड पर किया जाएग। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों-संस्थाओं से अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआइ) आमंत्रित किए जाएंगे। योजना के संचालन के लिए अपर मुख्य सचिव-प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। विभाग के अनुसार, योजना मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी। मत्स्य पालकों को आधुनिक बाजार, बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलेंगी। अभी किसानों और कारोबारियों को संगठित बाजार और आधुनिक सुविधाओं के अभाव में नुकसान उठाना पड़ता है। नई व्यवस्था से उन्हें बेहतर कीमत मिल सकेगी और बिचौलियाें पर भी अंकुश लगेगा। मत्स्य पालन से जुड़े युवाओं, व्यापारियों और उद्यमियों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।  

पेट पर हाथ रख जमीन पर बैठीं करिश्मा तन्ना, एक्ट्रेस का बेबी बंप लुक देख फैंस हैरान

मुंबई एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना 42 की उम्र में मां बनने वाली हैं. वो अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के हर मोमेंट को एन्जॉय कर रही हैं। करिश्मा प्रेग्नेंसी में सुपर एक्टिव भी हैं. वो लगातार फैंस संग अपने स्पेशल मोमेंट्स शेयर करके उन्हें खुश कर देती हैं। करिश्मा ने अब अपने मैटरनिटी शूट की नई तस्वीरें शेयर की हैं. प्रेग्नेंट एक्ट्रेस सुकून के पल बिताती नजर आईं।  नई तस्वीरों में प्रेग्नेंट करिश्मा जमीन में बैठकर पोज देती हुई दिखाई दे रही हैं. कुछ तस्वीरों में वो अपना बेबी बंप थामें नजर आईं।         प्रेग्नेंट करिश्मा ने लूज ट्राउजर और टॉप में अपना बेबी बंप भी फ्लॉन्ट किया. ओपन सॉफ्ट कर्ली हेयर और सटल मेकअप में वो काफी स्टनिंग लगीं। सादगी में भी करिश्मा की खूबसूरती का जवाब नहीं है. उनके चेहरे पर प्रेग्नेंसी ग्लो साफ नजर आया. एक्ट्रेस को देखकर साफ जाहिर है कि वो हर पल को खुलकर जी रही हैं। अभी हाल ही में करिश्मा की ट्रेडिशनल अंदाज में गोदभराई हुई है. गोदभराई में एक्ट्रेस शिव के भजनों पर झूमती दिखीं. उन्होंने कीर्तन भी किया। करिश्मा तन्ना की बात करें तो उन्होंने साल 2022 में लॉन्ग टाइम बॉयफ्रेंड वरुण बंगेरा संग शादी रचाई थी. शादी के करीब 4 साल बाद 42 की उम्र में वो नन्हे मेहमान का वेलकम करने वाली हैं। पति संग आलीशान घर में रहती हैं करिश्मा तन्ना मशहूर एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना के घर जल्द ही नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंजने वाली हैं। 42 की उम्र में अपने पहले बच्चे को जन्म देने जा रहीं करिश्मा आगामी अगस्त में मां बनेंगी, जिसकी खुशियों में उनका पूरा परिवार डूबा हुआ है। हाल ही में उनके घर पर गोद भराई की रस्म भी गई। इस बीच, हसीना का आलीशान आशियाना चर्चाओं में है, जहां वह अपने बिजनेसमैन पति वरुण बंगेरा और प्यारे पेट डॉग के साथ रहती हैं। करिश्मा का यह रॉयल घर विंटेज क्लासिक और मॉडर्न लग्जरी का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। उनके घर का शांत लिविंग रूम, शानदार बालकनी और यादगार तस्वीरों से सजी दीवारें किसी महल से कम नहीं लगतीं। तो चलिए आपको दिखाते हैं करिश्मा तन्ना के इस आलीशान घर की तस्वीरें और लेते हैं होम डेकोर के कुछ शानदार आइडियाज।    

बिजली व्यवस्था सुधारने मैदान में उतरे MD, भागलपुर में अफसरों को अल्टीमेटम

भागलपुर. जिले में भीषण आंधी-तूफान के बाद बिजली संकट गंभीर रूप ले चुका है। भागलपुर में पिछले 38 घंटे से अधिक समय से बिजली आपूर्ति बाधित है, जिससे पूरे जिले के लोग परेशान हैं। नवगछिया, बिहपुर, नारायणपुर, कहलगांव, अजगैवीनाथ धाम, पीरपैंती, कजरैली, नाथनगर और सन्हौला सहित लगभग सभी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। सोमवार की रात करीब 12 बजे आए भीषण तूफान ने पूरे जिले में भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं की रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जा रही है। इस दौरान जगह-जगह बिजली के पोल गिर गए, तार टूट गए और कई इलाकों में बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। घरों, दुकानों और टेंटों को भारी नुकसान तूफान का असर सिर्फ बिजली व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। कई इलाकों में लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। जहां-जहां टेंट और अस्थायी दुकानें लगी थीं, वहां सब कुछ उड़ गया। झोपड़ी में दुकान चलाने वाले छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कई परिवारों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। 38 घंटे बाद भी बिजली बहाल नहीं लगातार 38 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश इलाकों में बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। लोग पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और दैनिक कार्यों के लिए परेशान हैं। नगर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अंधेरे की स्थिति बनी हुई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। एमडी पहुंचे भागलपुर, हुई उच्चस्तरीय बैठक बिजली संकट को गंभीरता से लेते हुए बिहार बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) राहुल कुमार हेलीकॉप्टर से भागलपुर पहुंचे। उनके साथ मुख्य अभियंता और तकनीकी टीम भी मौजूद रही। भागलपुर पहुंचकर एमडी ने जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, अधीक्षण अभियंता और तीनों डिवीजन के कार्यपालक अभियंताओं के साथ बैठक की। बैठक में भागलपुर, कहलगांव और नवगछिया डिवीजन की बिजली स्थिति की समीक्षा की गई। डीएम के अनुरोध पर तेज हुई कार्रवाई इससे पहले जिलाधिकारी ने स्वयं एमडी से बातचीत कर बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने का अनुरोध किया था। इसके बाद उच्चस्तरीय टीम को तत्काल भागलपुर भेजा गया। अधिकारियों को सख्त निर्देश बैठक के दौरान एमडी ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन इलाकों में अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी संसाधनों का उपयोग कर युद्धस्तर पर बहाली कार्य किया जाए, ताकि जल्द से जल्द जिले में बिजली व्यवस्था सामान्य हो सके। राहत की उम्मीद प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही अधिकतर इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। हालांकि फिलहाल लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन बहाली कार्य तेज कर दिया गया है।