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स्कूलों में पढ़ने की आदत मजबूत करने में जुटी योगी सरकार, पठन संस्कृति पर विशेष फोकस

विद्यालयों में पठन संस्कृति मजबूत करने में जुटी योगी सरकार – परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में 'समाचार-पत्र पठन' और पठन संस्कृति अभियान को नई गति देने पर फोकस – रीडिंग ऑवर, डीईएआर कैंपेन और रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश – बच्चों में पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता, तार्किक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने पर जोर – अपर मुख्य सचिव स्तर से सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत और समर्पित प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश लखनऊ  योगी सरकार अब परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में पठन संस्कृति को मजबूत कर बच्चों में पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। शैक्षिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ के अवसर पर 'पठन संस्कृति' और 'समाचार-पत्र पठन' से संबंधित पूर्व में जारी निर्देशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर फिर से व्यापक स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यालयों में पढ़ने का सकारात्मक वातावरण विकसित किया जा सके। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से पहले ही विद्यालयों में पठन संस्कृति, समाचार-पत्र पठन और रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब उन्हीं निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समस्त प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, बीएसए, बीईओ आदि को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि विद्यालयों में पठन गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु व्यक्तिगत एवं समर्पित प्रयास सुनिश्चित किए जाएं। भाषा दक्षता, संवाद क्षमता और तार्किक सोच को मजबूत करने पर जोर योगी सरकार का फोकस अब परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई को केवल पाठ्यक्रम आधारित न रखते हुए विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित कर भाषा दक्षता, संवाद क्षमता, तार्किक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करने पर भी है। इनमें विद्यालयों में नियमित रीडिंग ऑवर, समाचार-पत्र उपलब्ध कराना, सुबह की सभा में समाचार वाचन और बच्चों को पुस्तक पठन के लिए प्रेरित करना शामिल है। यही कारण है कि 'समाचार-पत्र पठन', 'रीडिंग ऑवर' और 'स्क्रीन टाइम कम करने' जैसी गतिविधियों को अब और अधिक गंभीरता के साथ लागू कराने पर जोर दिया जा रहा है। इन गतिविधियों को नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित कर प्रत्येक विद्यालय में पढ़ने का सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा। डीईएआर कैंपेन और रीडिंग चैलेंज को मिलेगी गति विद्यालयों में 'डियर' (ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड) कैंपेन को भी प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया गया है। इसके अन्तर्गत सप्ताह में एक निर्धारित समय पर छात्र-छात्राएं, शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे। इसके अलावा प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियों को भी नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। निर्धारित संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय स्तर पर सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' घोषित कर पुरस्कृत भी किया जाएगा। स्वतंत्र लेखन व रचनात्मकता पर भी जोर शासन की मंशा है कि विद्यार्थी पुस्तक पठन तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी स्वतंत्र लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच भी मजबूत हो। इसके अंतर्गत पढ़ी गई पुस्तकों, कहानियों और समाचार-पत्रों के आधार पर विद्यार्थियों से लेखन कार्य एवं रचनात्मक गतिविधियां कराई जाएंगी। साथ ही विद्यालय स्तर पर लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर सीधे आम आदमी को दिखना चाहिए: मुख्यमंत्री

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से जोड़ें: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर सीधे आम आदमी को दिखना चाहिए: मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना गरीबों का सबसे बड़ा सहारा, क्लेम भुगतान समय से हो: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्णय, दीनदयाल राज्य कर्मचारी कैशलेस योजना में अब आयुष पद्धतियों से इलाज भी होगा शामिल एनएचएम के अंतर्गत कोविड कालखंड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर यथोचित समायोजन किया जाए: मुख्यमंत्री एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम और कम करने के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा- आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण सरकारी अस्पतालों में तीन माह से कम एक्सपायरी वाली दवाएं न रहें: मुख्यमंत्री मातृ-शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए सुरक्षित प्रसव व्यवस्था मजबूत करने पर जोर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हुई, नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर रिसर्च, मेडटेक और डिजिटल हेल्थ पहल को मिलेगा बढ़ावा,कैंसर, ट्रॉमा, आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता से करें विकसित: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा करते हुए साफ तौर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का लाभ सीधे आम आदमी को मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर मानव संसाधन और प्रभावी प्रबंधन से सशक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल संस्थान बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश को प्रशिक्षित चिकित्सक, विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है। उन्होंने मेडिकल संस्थानों में आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।  बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 जनपदीय चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी सेवाएं और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं, जबकि 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें की गईं। वर्ष 2016-17 की तुलना में सत्र 2025-26 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है, जो 88.6 प्रतिशत की वृद्धि है। विगत 10 वर्षों में पीजी सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 हो गई है, जबकि एमबीबीएस सीटें 5390 से बढ़कर 12800 तक पहुंच गई हैं। सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।  नर्सिंग शिक्षा के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं। एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और अन्य पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हैं। ‘मिशन निरामया 1.0’ के तहत नर्सिंग शिक्षा में हुए सुधारों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 17 हजार स्कूलों में परामर्श सत्र आयोजित किए गए तथा 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। 10,570 नर्सिंग संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है। उन्होंने क्लेम दावों का तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान होता रहेगा तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती रहेगी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 6480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक नि:शुल्क उपचार किए जा चुके हैं।  मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की आईपीडी सेवाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कोविड कालखंड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर यथोचित समायोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों का भुगतान किसी भी स्थिति में लंबित न रहे। साथ ही, हेल्थ एटीएम सेवाओं का विस्तार करते हुए उन्हें अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि जनजागरूकता, स्वच्छता और समयबद्ध उपचार व्यवस्था के माध्यम से बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। प्रदेश में 15.14 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम का दायरा भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मेडिकल संस्थानों को रिसर्च आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि ‘UP-IMRAS’ डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट, क्लिनिकल ट्रायल यूनिट तथा मेडटेक कार्यक्रमों पर कार्य किया जा रहा है। चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक क्षेत्र में लगभग 1500 करोड़ रुपये निवेश के लिए इंटेंट फाइल किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी परियोजनाएं तय समयसीमा में पूर्ण हों, ताकि आमजन को जल्द बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में आगामी महीनों में प्रस्तावित महत्वपूर्ण लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इनमें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेड ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज तथा कानपुर मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग विस्तार एवं डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। महाराजगंज, शामली और संभल में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जबकि कई अन्य जनपदों में प्रक्रिया जारी है।  बैठक में बताया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ है। वर्तमान में … Read more

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ईरान ने MQ-9 ड्रोन गिराने का किया दावा

तेहरान  खाड़ी में चल रहे बवाल के खत्म होने के आसार नजर आ ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की ओर से हुए हमले ने एक बार फिर से खाड़ी में गोले-बारूद की आवाज गुंजा दी है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है. IRGC ने ये भी दावा किया हैहा कि उसने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।  इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. अल जजीरा के मुताबिक खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा. बकरीद के मौके पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि समय को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे हालात स्वीकार नहीं करेंगे. ईरानी सरकारी टीवी और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का प्रभाव पश्चिम एशिया में लगातार कमजोर हो रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उसकी स्थिति पहले से कम होती जा रही है।  हमलों के साथ वार्ता भी है जारी इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ती दिख रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौता ज्ञापन पर कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि अंतिम समझौता अभी दूर है. बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध रोकना और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।  परमाणु मुद्दे पर अटकी हुई है बात दरअसल परमाणु मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी मतभेद जारी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक अगर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि खामेनेई पहले ही इस समझौते की व्यापक रूपरेखा को समर्थन दे चुके हैं। 

पेड़ों की कटाई पर HC सख्त, हिसार इंटरचेंज प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक

हिसार. विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस एक बार फिर हिसार की धरती पर आकार लेती दिखाई दे रही है। गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास के माध्यम से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल कागजों में ही ठहर गई है। उच्च न्यायालय के एक केस में दिए आदेश के बाद प्रदेशभर में पेड़ों की कटाई पर लगी रोक ने इस परियोजना की रफ्तार पर अचानक विराम लगा दिया है। जिस परियोजना से हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब हरियाली और विकास के द्वंद्व में उलझी खड़ी है। टेंडर आवंटित हो चुका है, तकनीकी तैयारियां भी लगभग पूरी हैं, लेकिन निर्माण स्थल पर खड़े पेड़ फिलहाल इस परियोजना के सबसे बड़े अवरोध बन गए हैं। आदेश ने थाम दी परियोजना की चाल प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक का आधार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे सुनील कुमार शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले को माना जा रहा है। हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सात अप्रैल 2026 को क्षेत्रीय वन अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आगामी आदेश तक किसी भी आयु अथवा प्रजाति के पेड़ की कटाई की अनुमति न दी जाए। इसके बाद से विभागीय स्तर पर पेड़ों की कटाई से जुड़े प्रस्ताव भी रोक दिए गए। इसी आदेश की परछाई अब हिसार की इस बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना पर भी पड़ रही है। एनएचएआई करवा रहा है पेड़ों का सर्वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अब निर्माण क्षेत्र में पेड़ों की गणना और सर्वे का कार्य करवा रहा है। विभाग यह स्पष्ट करने में जुटा है कि परियोजना के लिए आखिर कितने पेड़ों की कटाई आवश्यक होगी। हालांकि स्थिति साफ है कि जब तक पेड़ हटाने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक निर्माण कार्य की शुरुआत संभव नहीं दिखाई देती। ऐसे में जिस परियोजना से क्षेत्र को शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद थी, उसका इंतजार अब और लंबा हो सकता है। ढंढूर के पास आकार लेगा आधुनिक यातायात केंद्र प्रस्तावित योजना के तहत गांव ढंढूर के समीप एनएच-9 और एनएच-52 को जोड़ने के लिए दो आधुनिक डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास बनाए जाने हैं। ये अंडरपास मौजूदा ओवरब्रिज से लगभग एक-एक किलोमीटर की दूरी पर विकसित किए जाएंगे। इनके निर्माण के बाद वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग एक ही बिंदु पर व्यवस्थित रूप से जुड़ सकेंगे। इससे यातायात अधिक सुगम और सुरक्षित बनने की उम्मीद है। भारी वाहनों के लिए भी होगा सहज मार्ग इंजीनियरों के अनुसार प्रत्येक अंडरपास की चौड़ाई लगभग 20 मीटर और ऊंचाई साढ़े पांच मीटर के आसपास होगी। आधुनिक मानकों पर आधारित यह संरचना भारी ट्रकों और बड़े वाहनों की आवाजाही को भी बिना बाधा के संभव बनाएगी। भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को ध्यान में रखते हुए परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत स्वरूप दिया गया है। 63.27 करोड़ की परियोजना करीब 63.27 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना को एनएचएआई ने विस्तृत योजना के साथ तैयार किया है। इसके पूर्ण होने पर प्रतिदिन गुजरने वाले लगभग 30 हजार वाहनों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। वाहनों को बिना रुके मार्ग मिलने से ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय घटेगा और यातायात जाम की समस्या में भी कमी आएगी। एनएच-9 का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। क्रास ट्रैफिक और अव्यवस्थित मोड़ों के कारण यहां हादसों का खतरा बना रहता है। डबल लूप इंटरचेंज बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अलग-अलग स्तरों पर संचालित होगी, जिससे टकराव के बिंदु कम होंगे और दुर्घटनाओं की आशंका में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इस परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार हिसार-सिरसा मार्ग और हिसार-कैथल मार्ग को बेहतर ढंग से जोड़ने वाली यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार इससे औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था निवेश आकर्षित करेगी और रोजगार के अवसरों का विस्तार भी संभव होगा। गांव ढंढूर निवासी विकास जांगड़ा और नरेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित यह परियोजना क्षेत्र के लिए एक दूरदर्शी और जनहितकारी पहल है। यह भविष्य की सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था की मजबूत नींव है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद एनएच-9 और एनएच-52 के बीच आवागमन कहीं अधिक सहज और सुरक्षित हो जाएगा। डबल लूप इंटरचेंज के प्रमुख लाभ सुचारू यातायात : अलग स्तर पर मार्ग बनने से वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और यातायात निर्बाध रूप से चलता रहेगा। दुर्घटनाओं में कमी : क्रासिंग और टर्निंग प्वाइंट कम होने से हादसों की आशंका घटेगी। समय और ईंधन की बचत : बिना रुकावट के सफर से यात्रा तेज होगी और ईंधन की खपत कम होगी। बढ़ती ट्रैफिक क्षमता : भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालने में यह संरचना अधिक सक्षम होगी। कम होगा प्रदूषण : वाहनों के लगातार चलने से इंजन कम समय तक आइडल रहेगा, जिससे प्रदूषण घटेगा। बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी : दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग सीधे जुड़ने से व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अनिकेत श्रीवास्तव ने कहा कि न्यायालय के एक आदेश के चलते पेड़ों की कटाई पर रोक लगी हुई है। इसी कारण गांव ढंढूर के पास प्रस्तावित डबल लूप इंटरचेंज व्हीकल अंडरपास परियोजना पर फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है। विभाग पेड़ों का सर्वे करवा कर रिपोर्ट तैयार करेगा तभी स्थिति स्पष्ट होगी। पेड़ कटाई की अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आरंभ हो पाएगा।

पन्ना के बीहरपुरवा में बड़ा हादसा, कुआं धंसने से 5 मजदूरों की जान गई

पन्ना   पन्ना की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बीहरपुरवा में निर्माणाधीन कुएं की खुदाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया. कुआं धंसने से वहां काम कर रहे 5 मजदूर दब गए. पांचों मजदूरों की मौत हो गई. दो मजदूरों के शव बाहर निकाले लिए गए, जबकि 3 मजदूरों के शव निकालने में टीमें जुटी हैं. मौके पर रेस्क्यू टीमें जेसीबी के जरिए कुएं से मलबा हटा रही हैं. पन्ना जिला जनसंपर्क अधिकारी देवेंद्र सिंह ने आधिकारिक घोषणा करते हुए 5 मजदूरों की मौत की पुष्टि की है।  10 दिन से चल रहा था कुआं खोदने का काम अजयगढ़ जनपद के ग्राम बीहरपुरवा के नयापुरवा में बिन्नू अहिरवार के खेत में बीते 10 दिन से कुएं की खुदाई का काम चल रहा था. मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अचानक कुएं की भुसभुसी मिट्टी भरभराकर धंस गई. हादसे के वक्त 5 मजदूर कुएं के अंदर काम कर रहे थे, जबकि दो मजदूर पानी पीने के लिए ऊपर आए हुए थे. हादसे में चुन्नू यादव, राजकुमार यादव, आशीष यादव और चुनवाद पाल समेत 5 मजदूर मलबे में दब गए।  दो मजदूरों के शव कुएं से निकाले रेस्क्यू के दौरान राजकुमार यादव और एक अन्य मजदूर का शव बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश जारी है. मौके पर पुलिस, राजस्व अमला और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं. इस दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं. आखिर भुसभुसी और कमजोर मिट्टी वाले इलाके में कुएं की खुदाई किस आधार पर कराई जा रही थी? क्या तकनीकी जांच हुई थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं? अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर निगाहें टिकी हैं. हादसे को लेकर अभी प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं आया।  रेस्क्यू टीमें जेसीबी की मदद से हटा रही मिट्टी हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया गया. स्थानीय ग्रामीण भी रेस्क्यू में जुटे हैं. कुएं ढही हुई मिट्टी के कारण बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं. मौके पर जेसीबी की मदद से मिट्टी हटाई जा रही है. मलबा हटाकर मजदूरों को निकालने की कोशिश की जा रही है. ​हादसे का शिकार हुए 3 लोग एक ही परिवार के हैं. ग्रामीणों के मुताबिक कुएं के मलबे में दबे 5 लोगों में पिता, भाई, चाचा, चचेरा भाई और एक अन्य मजदूर शामिल है। 

राजा लालबहादुर की प्रतिमा हटाकर बसाई कॉलोनी, चिल्ड्रन पार्क जमीन घोटाले का खुलासा

खैरागढ़. शहर में नजूल और मेंटेनेंस खसरा की जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग का मामला अब बड़े खुलासे में बदलता जा रहा है। सरकारी दस्तावेज, जांच प्रतिवेदन और पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि जिस जमीन पर कभी बच्चों का पार्क हुआ करता था, उसी जमीन को धीरे-धीरे टुकड़ों में बांटकर बेच दिया गया और वहां पूरी कॉलोनी और बड़े कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए। मामला राजनांदगांव-कवर्धा मेन रोड पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने स्थित प्लॉट नंबर 114 और 115 का है। पुराने सरकारी रिकॉर्ड में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को पार्क की बाड़ी के रूप में दर्ज बताया गया है। आजादी से पहले इस क्षेत्र को “अल्फ्रेड पार्क” कहा जाता था। स्वतंत्रता के बाद यह स्थान राजा लालबहादुर सिंह के नाम से पहचाना जाने लगा और वहां उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार बाद में राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा को वहां से हटाकर डोंगरगढ़ स्थित “लाल निवास” में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे पूरी जमीन निजी हाथों में जाती चली गई और छोटे-छोटे हिस्सों में बिकने लगी। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पहले यह जमीन राजा बहादुर वीरेंद्र बहादुर सिंह के नाम दर्ज थी। वर्ष 1974 में यह जमीन उनकी अवयस्क नातिन स्मृति देवी सिंह के नाम चढ़ गई। इसके बाद वर्षों तक जमीन के हिस्से अलग-अलग लोगों को बेचे जाते रहे। जांच प्रतिवेदन के अनुसार करीब एक लाख वर्गफीट से अधिक भूमि को लगभग 22 टुकड़ों में बांटा गया और 17 लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया गया। बाद में इनमें से कई हिस्सों की दोबारा बिक्री भी हुई। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में नजूल और मेंटेनेंस खसरा की भूमि बताया गया है, उसे आखिर निजी प्लॉटिंग में कैसे बदल दिया गया। जांच रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि जमीन का वैधानिक उपविभाजन नहीं कराया गया था और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से किसी प्रकार का ले-आउट भी स्वीकृत नहीं हुआ था। यानी कॉलोनी काटने की कानूनी अनुमति ही नहीं ली गई थी। इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और निर्माण कार्य लगातार चलते रहे। जांच दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि करीब 85 हजार वर्गफीट से ज्यादा जमीन बिक चुकी है और वहां बड़े मकान, कॉम्प्लेक्स और अन्य निर्माण खड़े हो चुके हैं। कुछ हिस्सों में अब भी निर्माण कार्य जारी है। सार्वजनिक जमीन की अनुमति किसने दी? मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर अवैध प्लाटिंग की जानकारी पहले से मौजूद थी। जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि संबंधित विभागों को इस जमीन के संबंध में जानकारी दी गई थी, फिर भी पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रिया नहीं रुकी। अब खैरागढ़ में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों के पार्क और सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी कॉलोनी में बदलने की अनुमति किसने दी? और जब जमीन मेंटेनेंस खसरा में दर्ज थी, तब वर्षों तक उसकी खरीदी-बिक्री और निर्माण कैसे चलता रहा? यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और संगठित भू-कारोबार की बड़ी जांच का विषय बन चुका है।

बिहार में राजद को बड़ा झटका, ‘मुखिया दीदी’ BJP में शामिल

पटना. बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को झटका देते हुए पार्टी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ‘मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल भी मौके पर मौजूद रहे। राजद से लंबे समय तक जुड़ी रहीं रितु जायसवाल पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। 2025 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुलकर बगावत कर दी थी। टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन करीब 64 हजार वोट हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का संकेत दिया था। भाजपा में शामिल होने से पहले 24 मई को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले के संकेत दे दिए थे। पोस्ट में उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बताते हुए जनहित में काम जारी रखने की बात कही थी। पंचायत राजनीति से प्रदेश स्तर तक बनाया प्रभाव सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी पंचायत से राजनीति की शुरुआत करने वाली रितु जायसवाल ने बहुत कम समय में बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2016 में वह मुखिया चुनी गईं और पंचायत स्तर पर किए गए कार्यों की वजह से तेजी से चर्चाओं में आईं। उन्हें 2017 में एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा ‘आदर्श युवा सरपंच सम्मान’ दिया गया। इसके बाद 2018 में उपराष्ट्रपति के हाथों ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ पुरस्कार भी मिला। वर्ष 2019 में उनकी पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा गया। राजद में तेजी से बढ़ा कद राष्ट्रीय जनता दल ने 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता और फिर महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने करीब 4.74 लाख वोट हासिल किए, लेकिन लगभग 29 हजार मतों से हार गईं। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनाधार चर्चा में रहा। हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद राजद ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। भाजपा के लिए क्यों अहम हैं रितु जायसवाल राजनीतिक जानकारों की मानें तो महिला वोट बैंक, पंचायत स्तर की मजबूत पकड़ और मिथिलांचल क्षेत्र में सक्रियता को देखते हुए भाजपा के लिए रितु जायसवाल का शामिल होना अहम माना जा रहा है।  अब तक का राजनीतिक सफर 2016 : सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनीं 2017 : आदर्श युवा सरपंच सम्मान प्राप्त 2018 : चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार मिला 2019 : पंचायत को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान 2020 : राजद में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़ा 2021 : राजद की प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनीं 2024 : शिवहर लोकसभा चुनाव लड़ा 2025 : निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और अब भाजपा में शामिल हुईं

कपिल शर्मा हाउस फायरिंग मामला फर्जी! पुलिस बोली- अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

अमृतसर. मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के घर के बाहर दिन दिहाड़े फायरिंग और फिरौती की मांग की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने घर के मुख्य द्वार पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद परिवार में भारी दहशत फैल गई। अफवाह यह भी थी कि घटना से कुछ दिन पहले ही कथित तौर पर परिवार से फिरौती की मांग की गई थी, जिसके बाद यह कथित हमला हुआ। इलाके के निवासियों ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर लोग घरों में दुबक गए और पूरे इलाके में डर का साया छा गया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के सी.सी.टी.वी. फुटेज खंगाले जा रहे थे। हालांकि अमृतसर पुलिस ने इन सभी खबरों को पूरी तरह अफवाह बताते हुए साफ इनकार कर दिया है। डी.सी.पी. रविंद्रपाल सिंह संधू सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मौके पर गहन जांच के बाद कोई फायरिंग या गोली चलने का कोई सबूत नहीं मिला। पुलिस कमिश्नरेट ने सोशल मीडिया पर अधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक "कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर अफवाहें फैला रहे हैं। हमने पूरी तरह जांच कर ली है, ऐसी कोई घटना नहीं हुई।" कपिल शर्मा के नाम से जुड़ी ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कनाडा में उनके कैफे पर फायरिंग की घटना हुई थी, जिसे कुछ गैंग वार से जोड़ा जा रहा था। अमृतसर में भी पहले टायर फटने जैसी घटनाओं को बाद में फायरिंग बताकर अफवाहें फैलाई जा चुकी हैं।

रेलवे सुरक्षा अलर्ट! जगदलपुर स्टेशन पर ‘शेरा’ संग ट्रेनों की सघन जांच

जगदलपुर. जगदलपुर रेलवे स्टेशन पर इस बार सिर्फ चेकिंग नहीं हुई, बल्कि सुरक्षा का ऐसा लाइव ट्रायल दिखा जिसने यात्रियों को भी चौकन्ना कर दिया। आरपीएफ ने स्टेशन और ट्रेनों में सघन एंटी-सैबोटॉज व नारकोटिक्स अभियान चलाया, जिसकी कमान निरीक्षक प्रवीण कुमार ने संभाली। ऑपरेशन का सबसे बड़ा चेहरा बना स्नीफर डॉग ‘शेरा’, जिसने स्टेशन के हर संवेदनशील हिस्से को सूंघकर खंगाला। ट्रेन नंबर 58502, 18107 और 18447 में डिब्बों के भीतर तक तलाशी ली गई। वेटिंग हॉल, पार्सल एरिया और सर्कुलेटिंग एरिया में संदिग्ध सामानों की जांच की गई। यात्रियों के बैग और लावारिस वस्तुओं पर विशेष नजर रखी गई। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि पहले भी ऐसे अभियानों में गांजा और अवैध सामान पकड़े जा चुके हैं। इसी वजह से स्टेशन को लगातार हाई अलर्ट मोड में रखा गया है। हालांकि, इस बार कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन अभियान ने असामाजिक तत्वों में डर जरूर पैदा किया। रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि अचानक होने वाले ऐसे ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे। ‘शेरा’ जैसे प्रशिक्षित श्वान अब रेलवे सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। उद्देश्य साफ है… सफर सुरक्षित रहे और स्टेशन अपराधियों के लिए असुरक्षित बने।

नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने से कतरा रहे TMC नेता, ममता के सामने नई चुनौती

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं हैं। अब खबर है कि पार्टी को नंदीग्राम में होने वाले उप चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। फिलहाल, सीट पर उप चुनाव का भी ऐलान नहीं हुआ है। अटकलें हैं कि टीएमसी नेता यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के साथ नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी, लेकिन अंत में उन्होंने यह सीट छोड़ने का फैसला किया। खास बात है कि अधिकारी 2021 में भी तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। 2 नेता कर चुके मना पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उप चुनाव की तारीख का ऐलान कभी भी हो सकता है। अब अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि यहां टीएमसी ने उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यहां से टीएमसी को उम्मीदवार खोजने में मुश्किल हो रही है। साथ ही दो नेताओं ने तो यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। 2026 विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराया है। नंदीग्राम से लड़ने नेता मना क्यों कर रहे अधिकारी के कभी करीबी रहे पवित्र कर भी नंदीग्राम से नहीं लड़ना चाहते। खास बात है कि शुभेंदु ने उन्हें ही इस सीट से हराया है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, वह कहते हैं, 'कुछ लोग मुझसे बात करने आए थे, लेकिन मैं दोबारा नंदीग्राम से नहीं लड़ सकता। इसका सवाल ही पैदा नहीं होता है।' चुनाव से कुछ समय पहले ही कर भारतीय जनता पार्टी छोड़ टीएमसी में गए थे। 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के इलेक्शन एजेंट रहे शेख सूफियान भी यहां से चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने 2006 में नंदीग्राम का चुनाव लड़ा था। उसके बाद टीएमसी में से किसी ने भी मुझसे चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा। मुझे अब चुनावों में दिलचस्पी नहीं है। मैं मेरे परिवार की सलाह मानकर राजनीति से रिटायर हो रहा हूं।' टीएमसी का क्या है प्लान रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'उम्मीदवार का चुनाव ममता बनर्जी करेंगी और इस पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी। चुनावों का ऐलान होने दीजिए।' फलता जैसा लक्ष्य रखा मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम के अपने पहले दौरे पर अधिकारी ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि सीट खाली करने के बावजूद उनका अपने राजनीतिक गढ़ से जुड़ाव पूरी तरह मजबूत बना हुआ है। उन्होंने अभिनंदन रैली को संबोधित करते हुए अपने समर्थकों से पूछा कि क्या वे नंदीग्राम में भी फाल्टा जैसी जीत का अंतर दोहरा सकते हैं, जहां भाजपा ने एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की है।