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सम्राट चौधरी ने AI समिट से दिया सियासी संदेश, गंगा एक्सप्रेसवे पर 19 हजार करोड़ खर्च होंगे

पटना. मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को राजधानी पटना में आयोजित एआई समिट में बिहार के विकास, तकनीक, कानून-व्यवस्था और शिक्षा को लेकर बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है और बिहार की अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिसिंग तथा उद्योग विकास में इसकी बड़ी भूमिका होने वाली है। ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में हजारों सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और एआई तकनीक की मदद से अपराधियों तक बेहद तेजी से पहुंचा जा सकता है। हरे गमछे पर सीएम का तंज  उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सिस्टम को किसी हरे गमछे वाले व्यक्ति को खोजने का निर्देश दिया जाए तो एआई तुरंत उसे ट्रैक कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति की ओर नहीं था। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता। पुलिस को पूरी छूट दी गई है। और यदि कोई अपराधी पुलिस या प्रशासन को चुनौती देता है तो 48 घंटे के भीतर जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'रूल ऑफ लॉ' स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। AI से प्रशासन और टेंडर सिस्टम में बचत सम्राट चौधरी ने कहा कि एआई का इस्तेमाल केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न विभागों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि टेंडरों की दोबारा जांच में एआई के इस्तेमाल से सरकार के काफी पैसे बचे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “सहयोग पोर्टल” पर ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए। जहां बिहार या देश-दुनिया में रहने वाले लोग मगध और बिहार की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दे सकें। बिहार लौटें या बाहर रहकर करें योगदान मुख्यमंत्री ने युवाओं और प्रवासी बिहारियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जो लोग बाहर या विदेश में बेहतर काम कर रहे हैं, वे वहीं रहकर भी अपनी जन्मभूमि का कर्ज चुका सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरी के लिए पलायन करने वालों की चिंता करेगी, लेकिन जो लोग सफलता हासिल कर चुके हैं, वे बिहार के विकास में योगदान दें। गंगा एक्सप्रेसवे, IT हब और 20 हजार मेगावाट बिजली का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सिर्फ उद्योग लगाना ही उद्देश्य नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य का राजस्व 60 हजार करोड़ रुपये है, जिसे बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने घोषणा की कि पटना का मरीन ड्राइव अभी 21 किलोमीटर लंबा है, लेकिन अब करीब 125 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। यह लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की परियोजना होगी और पीपीपी मॉडल पर अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में आईटी हब, डेटा सेंटर और पावर सेक्टर में बड़े निवेश आ रहे हैं। राज्य अभी 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है और अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया गया है। मॉडल स्कूल, कोचिंग और नई यूनिवर्सिटी का ऐलान मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलावों का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 534 ब्लॉकों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। पटना में 10 मॉडल स्कूल, जबकि गया, बिहारशरीफ, पूर्णिया, दरभंगा और भागलपुर जैसे नगर निगम क्षेत्रों में पांच-पांच मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिभाशाली बच्चों के लिए कोचिंग व्यवस्था भी विकसित करेगी और 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। आने वाले समय में बिहार में फिजिक्स, मैथेमेटिक्स और आर्किटेक्चर जैसी विशेष यूनिवर्सिटी स्थापित करने की भी योजना है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के युवाओं के पास नई तकनीक और नई सोच है, इसलिए अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी प्रशासन और राजनीति को भी आधुनिक सोच सिखाए। उन्होंने कहा कि “एआई के माध्यम से बिहार को बदलने का रास्ता तैयार करना है।”

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, पुलिस थानों में महिलाओं के लिए कब होंगी बुनियादी सुविधाएं?

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए। सरकार को करना होगा फैसला अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है। मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई। महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है। सोशल ऑडिट करवाने की मांग  इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं। अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

सड़क सुरक्षा के साथ पर्यावरण पर जोर, ट्रैफिक कर्मियों को बांटी गई सेफ्टी जैकेट

रायपुर. ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (RADA) द्वारा सामाजिक दायित्व (CSR) गतिविधि के अंतर्गत ट्रैफिक विभाग को रिफ्लेक्टिव सेफ्टी जैकेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन ट्रैफिक थाना, कालीबाड़ी चौक में किया गया। कार्यक्रम में रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ल एवं राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन द्वारा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को सेफ्टी जैकेट वितरित किए गए। इस अवसर पर राडा की ओर से अमर परवानी, मनीष राज सिंघानिया, शशांक शाह, विवेक गर्ग, कैलाश खेमानी, विवेक अग्रवाल, सूरज परवानी एवं अभिनव ऋषि उपस्थित रहे। इस अवसर पर राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन ने कहा कि उन्हें रायपुर ट्रैफिक पुलिस पर गर्व है, जो भीषण गर्मी में भी 24X7 शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में लगे रहते हैं। उन्होंने रायपुर कमिश्नर एवं ट्रैफिक विभाग को आश्वस्त किया कि सड़क सुरक्षा एवं जनहित के किसी भी कार्यक्रम में राडा हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम के दौरान रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने राडा से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। इस पर राडा के उपाध्यक्ष कैलाश खेमानी ने आश्वासन दिया कि वृक्षारोपण हेतु शासन से भूमि की मांग की जाएगी तथा हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। साथ ही राडा द्वारा लगाए गए पौधों की पूरी देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी। यह कार्यक्रम सड़क सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति राडा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बल्क ग्राहकों पर महंगाई की मार! नए नियमों से भोपाल निगम पर हर महीने ढाई करोड़ का अतिरिक्त बोझ

भोपाल   हैं। अब उन्हें आम उपभोक्ताओं के मुकाबले 30 प्रतिशत तक महंगा ईंधन खरीदना पड़ेगा। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। भोपाल नगर निगम की बात करें तो अब उसे 49 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त देने होंगे।  बता दें कि कुछ दिन पहले तेल कंपनियों द्वारा बल्क उपभोक्ताओं के लिए डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए थे। अब कंपनियों ने पंप संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बल्क उपभोक्ताओं को डिस्काउंट रेट पर नहीं, बल्कि निर्धारित बल्क रेट पर ही डीजल-पेट्रोल दिया जाए। कंपनियों ने यह भी हिदायत दी है कि यदि किसी पंप से बल्क उपभोक्ताओं को कम दरों पर डीजल-पेट्रोल दिया गया तो संबंधित पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसका असर भोपाल में देखने को मिलने लगा है। पुराने रेट पर डीजल देने से इनकार नगर निगम की कचरा कलेक्शन गाड़ियां जब तय रिटेल पंपों पर डीजल लेने पहुंचीं तो पंप संचालकों ने पुराने रेट पर डीजल देने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों को बताया गया कि अब बल्क उपभोक्ताओं को 142 रुपए प्रति लीटर की दर से ही डीजल मिलेगा। पहले नगर निगम को करीब 93 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल मिल रहा था। यानी नए और पुराने रेट में करीब 49 रुपए प्रति लीटर का अंतर आ गया है। कचरा कलेक्शन के काम पर असर बताया जाता है कि पंपों से समय पर डीजल नहीं मिलने के कारण करीब 2 से 3 घंटे तक कचरा कलेक्शन का काम प्रभावित रहा। अफसरों की दखल के बाद पंपों से डीजल सप्लाई शुरू हुई। जिसके बाद कचरा कलेक्शन दोबारा शुरू किया गया। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। कई इलाकों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन देर से हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर गाड़ियां तय समय पर नहीं पहुंच सकीं। अब तक 5 रुपये महंगे हुए, जानें नई कीमतें आज शनिवार सुबह फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि की है. ताजा जानकारी के मुताबिक पेट्रोल में करीब 87 पैसे और डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके साथ-साथ सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं।  बता दें, मिडिल ईस्ट में तनाव का साफ असर अब दिखाई देने लगा है. आम जनता पर लगातार महंगाई का बोझ बढ़ता ही जा रहा है. जानकारी के लिए बता दें, तेल कंपनियों ने पिछले दस दिनों के अंदर तीसरी बार पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में संशोधन किया है. इससे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई थी. उसके बाद 19 मई को दोबारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 87 पैसे और 91 पैसे बढ़ाए गए थे. इस तरह 10 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल करीब 5 रुपये महंगे हो गए हैं।  राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल के नई कीमतें 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति ली. हो गई हैं. इससे पहले यह 98.64 रुपये प्रति ली. की दर से बिक रहा था. वहीं, डीजल के दामों में 91 पैसे बढ़ाए गए हैं. जिससे नई कीमतें 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये प्रति ली. हो गई है. बात सीनएजी की करें तो इसके दाम 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए हैं. राजधानी दिल्ली में 1 किलो सीएनजी के नए दाम करीब 81.09 रुपये हैं।  कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान दिया था कि भारत देश में ईंधन पर्याप्त मात्रा में है. सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि देश में पेट्रोल औऱ डीजल की पर्याप्त मात्रा है. घबराने की कोई बात नहीं है. सप्लाई पूरी तरह से स्थिर बनी हुई है. मंत्रालय ने आगे कहा कि देश की जनता अफवाहों से बचकर रहे और परेशान ना हो। 

पुलिस थानों में महिला शौचालय और तय ड्यूटी टाइम की मांग हाई कोर्ट पहुंची, पंजाब-हरियाणा सरकार को नोटिस

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए। सरकार को करना होगा फैसला अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है। मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई। महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है। सोशल ऑडिट करवाने की मांग  इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं। अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

बदलते बस्तर की नई तस्वीर, बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ पहुँचविहीन गांव मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका में ग्रामीणों को दी सौगात स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति रायपुर बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर संवाद और श्सुशासन परिसरश् की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे श्सुशासन परिसरश् का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। और जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये।  कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में श्सुशासन परिसरश् और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारीयांे को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटरसाइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

UPSC परीक्षा 24 मई: कड़ी सुरक्षा, जैमर और हीट वेव के बीच प्रशासन अलर्ट

 अलीगढ़  संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को जिले में दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण व निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम अविनाश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव ने बताया कि पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक व दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगी। शहर में कुल 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां कुल 4467 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। हीट वेव को देखते हुए डीएम ने पेयजल, पंखे व बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने के दिए निर्देश डीएम ने सभी केंद्र व्यवस्थापकों को आयोग की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने हीट वेव को देखते हुए सभी परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, पंखे, बिजली व अन्य मूलभूत सुविधाएं समय से दुरुस्त रखने को कहा। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। सभी केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे और मोबाइल फोन समेत अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। सभी केंद्रों पर लगाए जाएंगे जैमर व अन्य व्यवस्था होंगी उपलब्ध अधिकारियों को पॉवर प्वाइंट व विद्युत व्यवस्थाओं की पहले से जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिले में नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज, श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय, चंपा अग्रवाल गर्ल्स इंटर कॉलेज, धर्म समाज महाविद्यालय, डीएवी इंटर कॉलेज, रतन प्रेम डीएवी गर्ल्स इंटर कॉलेज, राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज, बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज, एसएमबी इंटर कॉलेज, श्री टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज व श्री टीकाराम कन्या महाविद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।  

संशोधित चयन सूची पर विवाद के बीच हाईकोर्ट का यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

चंडीगढ़ चंडीगढ़ से बड़ी खबर सामने आई है। Punjab and Haryana High Court ने हरियाणा ग्रुप-D भर्ती में एक्सीलेंट स्पोर्ट्स पर्सन (ESP) श्रेणी के चयनित उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में “यथास्थिति बनाए रखने” के आदेश दिए हैं। यानी अगली सुनवाई तक चयनित उम्मीदवार अपनी नौकरी जारी रख सकेंगे। संशोधित सूची के बाद बढ़ा था विवाद यह मामला उस समय सामने आया जब Haryana Staff Selection Commission द्वारा 18 मई 2026 को संशोधित चयन सूची जारी की गई। नई सूची के आधार पर उन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जो पहले ही चयनित होकर विभिन्न विभागों में नौकरी जॉइन कर चुके थे। स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बना विवाद की वजह याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनके सभी दस्तावेज और प्रमाणपत्रों की जांच पहले ही हो चुकी थी। इसके बावजूद महीनों तक सेवा लेने के बाद अब चयन रद्द करना पूरी तरह मनमाना और कानून के खिलाफ है। मामला मुख्य रूप से स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के सत्यापन से जुड़ा बताया गया। खेल विभाग की रिपोर्ट के आधार पर संशोधित सूची तैयार की गई थी। हाई कोर्ट ने क्या कहा? मामले की सुनवाई जस्टिस Sandeep Moudgil की अदालत में हुई।याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील Jasbir Mor ने दलील दी कि चयनित उम्मीदवार नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनका रोजगार खतरे में पड़ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल वर्तमान स्थिति बरकरार रखी जाए। अदालत ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं। अगली सुनवाई 2 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 तय की है। फिलहाल इस अंतरिम आदेश से उन खिलाड़ियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी सरकारी नौकरी संशोधित चयन सूची के बाद खतरे में पड़ गई थी।

राहु गोचर का असर: शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश से 5 राशियों को बड़ा लाभ

 राहु का गोचर ज्योतिष में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह अचानक बदलाव, सफलता और अप्रत्याशित लाभ का कारक ग्रह है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 1 मई को राहु का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश हो चुका है, जो कि 2 अगस्त तक रहेगा. राहु का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कई राशियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लेकर आया है. यह गोचर खासतौर पर करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा के मामलों में प्रभाव डालेगा. आइए जानते हैं किन 5 राशियों को इस गोचर से सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है और उनके जीवन में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे. मेष राशि राहु का यह गोचर मेष राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. अचानक धन लाभ के योग बनेंगे और लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में प्रमोशन का रास्ता खोलेंगी. हालांकि, निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा, नहीं तो नुकसान भी हो सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर ग्रोथ का संकेत दे रहा है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी का अवसर मिल सकता है. व्यापारियों को नए क्लाइंट और बड़े प्रोजेक्ट मिल सकते हैं. इस दौरान आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स आपको सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगी. सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए राहु का यह गोचर सामाजिक प्रतिष्ठा और पहचान बढ़ाने वाला रहेगा. आपके काम की सराहना होगी और आप किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं. आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी. निवेश से लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन सोच-समझकर निवेश करना बेहतर रहेगा. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसरों का रहेगा. खासकर विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिल सकती है. करियर में बदलाव के योग बन रहे हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे. आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है. कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर बेहद शुभ माना जा रहा है, क्योंकि राहु का संबंध इस राशि से विशेष रूप से होता है. इस दौरान आय के नए स्रोत बनेंगे और करियर में तेजी से उन्नति होगी. बिजनेस में विस्तार के योग हैं और साझेदारी से भी लाभ मिल सकता है.

परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर चाय, नाशपाती, लीची, स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब की खेती में आजमा रहे हैं हाथ रायपुर जशपुर हमेशा फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानकी और नकद फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को उद्यानिकी और नगद फसलों के लिए लगातार  प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी  विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है। किसानों  को उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई सालों में यहाँ के किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों में रुचि लेने लगे हैं। जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्राबेरी, नाशपाती के साथ सेब के बगान भी तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (त्म्।क्ै) व नाबार्ड के समन्वित प्रयासों से जशपुर ने फलोत्पादन व बागवानी में नई पहचान बनाई है। इन पहलों से स्थानीय किसानों की आय सुदृढ़ हुई है। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।  जशपुर में सेब उत्पादन वर्ष 2023 में आरंभ हुआ। सेब खेती अब लगभग 410 एकड़ में विस्तारित है, जिसमें लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। जिले के मनोर व बगीचा विकासखंड तथा शैला, छतौरी, करदना व छिछली जैसे पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता व आकार के फल दिए हैं। । स्थानीय किसान बताते हैं कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से कश्मीर व हिमाचल के सेबों के समकक्ष हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के 410 किसानों ने अपने 1-1 एकड़ जमीन पर सेब की खेती कर रहे हैं।  इसी तरह जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहाँ 3,500 से अधिक किसान नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई, गीधा आदि लाखों में नाशपाती की खेती हो रही है। यहीं से नाशपाती पैक कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुँच चुका है। किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ वार्षिक आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार पहुँच जैसी योजनाएँ हैं, जिनसे किसान आत्मनिर्भर बने हैं और नई फसल विविधिकरण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रहे हैं। जशपुर में चाय की खेती पहले से होती आ रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता अच्छी है। अब जशपुर में सेब व नाशपाती उत्पादन के सफल विकास से जशपुर न केवल नए बाजारों के रूप में स्थापित हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में इन फसलों का दायरा और विस्तारित करने की योजना है।