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राज्यपाल रमेन डेका ने की ‘पीएम-जनमन’ योजना समीक्षा

रायपुर,  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका आज लोक भवन में 'पीएम-जनमन' (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं।

भीषण गर्मी का कहर! नौतपा के पहले दिन 5 शहरों में पारा 45°C से ऊपर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नौतपा के पहले दिन भीषण गर्मी पड़ी. रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, मुंगेली, राजनांदगांव समेत 10 शहर में लू के थपेड़ों ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया.10 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा गर्मी राजनांदगांव में 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं इस बार की गर्मी में रायपुर में पहली बार दिन में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. आज भी राजधानी में इसी के करीब पारा पहुंचने की संभावना है. हालांकि बंगाल की खाड़ी से नमी की एंट्री होने से मौसम में बदलाव हो सकता है. मौसम विभाग के अनुसार 24 घंटों में प्रदेश में अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया. अगले 3 दिनों बाद छत्तीसगढ़ में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होने की संभावना है. सोमवार को सक्ती में अधिकतम तापमान 44.9 डिग्री, बेमेतरा में 44.8 डिग्री, जांजगीर-चांपा में 44.4 डिग्री, कबीरधाम में 44.4 डिग्री, गरियाबंद में 43.6 डिग्री, महासमुंद में 43.4 डिग्री, कोरबा में 43.2 डिग्री, सरगुजा में 42.8 डिग्री, रायगढ़ में 42.8 डिग्री, बलरामपुर रामानुजगंज में 41.7 डिग्री, जशपुर में 41.5 डिग्री और सूरजपुर में 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इन इलाकों में तापमान 45 से ऊपर राजनांदगांव – 46.5 डिग्री माना (रायपुर) – 45.7 डिग्री मुंगेली – 45.4 डिग्री दुर्ग – 45.2 डिग्री रायपुर – 45.1 डिग्री बिलासपुर – 45.1 डिग्री कुछ इलाकों में हल्की वर्षा और गरज-चमक के आसार मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने बताया कि एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण बिहार और उसके आसपास स्थित है. एक द्रोणिका दक्षिण बिहार से उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. बंगाल की खाड़ी से नमी का आगमन प्रारंभ हो रहा है. प्रदेश में 26 मई को एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. इस दौरान अधिकतम तापमान में कोई मुख्य बदलाव नहीं होगी. हालांकि अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट संभावित है. कई जिलों में अलर्ट प्रदेश बिलासपुर, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, कोरबा, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडाई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और जिलों में एक दो पॉकेट में ग्रीष्म लहर चलने की संभावना है. इन इलाकों में अगले 48 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

CM साय की दिल्ली यात्रा खत्म, लौटने के बाद शाम 6 बजे होगी अहम कैबिनेट मीटिंग

रायपुर. दिल्ली दौरे से आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वापस लौटेंगे. दोपहर करीब 1 बजे छत्तीसगढ़ सदन, दिल्ली से एयरपोर्ट रवाना होंगे. करीब शाम 4:15 बजे रायपुर पहुंचेंगे. इसके बाद शाम 4:30 बजे नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास जाएंगे. साय कैबिनेट की बैठक आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है. मंत्रालय में यह बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी. मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से लौटते ही अचानक बुलाई गई इस बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. हालांकि सरकार की ओर से बैठक का अधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में चल रहे सुशासन तिहार अभियान के तहत जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और विभिन्न जनहित योजनाओं की समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा आम लोगों को राहत देने वाले कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है.

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

जेलों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री केवल पेशेवर अपराधी, माफिया को जेलों में रखने की जरूरत, छोटे अपराधों में ओपन जेल की परिकल्पना उपयोगी 75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री ‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए: मुख्यमंत्री प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 हुई सात नए कारागार शुरू, छह निर्माणाधीन; बंदी क्षमता में लगातार बढ़ोतरी 6200 सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मजबूत हुई जेल सुरक्षा व्यवस्था ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ से बंदियों को मिल रहा कौशल और रोजगार का अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से कारागारों को नई पहचान दी जाए। बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को गति दी गई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई। जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने के अभाव में जेल में बंद कैदियों की सूची तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने 'ओपन जेल' की परिकल्पना को विशेष महत्व देते हुए इसे साकार रूप में लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए 'ओपन जेल' उपयोगी होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने नए कारागारों और बैरकों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।  बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। इसके अतिरिक्त अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला करागारों के निर्माण को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 30 ड्रोन कैमरे, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 195 बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी कैमरे तथा मेनवॉल पर वायर फेंसिंग कराई गई है। न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि लखनऊ, आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर, उन्नाव और अन्य कारागारों में सिलाई, दरी, कम्बल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी, कार्पेट और विभिन्न हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक वातावरण के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।   बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं तथा विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

नार्थ-साउथ कॉरिडोर से बदलेगी यूपी की सड़क तस्वीर, योगी सरकार देगी कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

स्पेशल  योगी सरकार नार्थ-साउथ कॉरिडोर से सड़क कनेक्टिविटी को देगी नई रफ्तार – नेपाल बॉर्डर से बुंदेलखंड तक मजबूत होगा सड़क नेटवर्क, नए कॉरिडोर से व्यापार, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ  – योगी सरकार की बड़ी पहल, दक्षिण भारत की ओर तक बनेगा हाई स्पीड संपर्क मार्ग – पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई क्षेत्रों के बीच आसान आवागमन का बनेगा नया नेटवर्क  लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में सड़क और कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी के तहत योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के विस्तार के साथ अब प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” की महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने जा रही है। इसका उद्देश्य नेपाल बॉर्डर से लेकर दक्षिण भारत की ओर तक बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना है, जिससे प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके। उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क किया जाएगा विकसित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर के विकसित होने से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पूर्व से पश्चिम दिशा में विकसित हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए अब उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके तहत नेपाल बॉर्डर से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड क्षेत्र के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने की तैयारी है। कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को किया जाएगा विकसित “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मार्गों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नव निर्माण की कार्य योजना बनाई गयी है। वहीं चार प्रमुख नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1531 किलोमीटर है। इनमें से 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि शेष मार्गों को विकसित करने की योजना बनाई गयी है। पहले कॉरिडोर के रूप में कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी कुल लंबाई 220 किलोमीटर है। इसमें 53.25 किलोमीटर लंबाई को स्वीकृति मिल चुकी है और लगभग 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर पीपरी (इंडिया-नेपाल बॉर्डर) से बांसी, सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई 295 किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत कई नए मार्ग प्रस्तावित हैं जिनसे पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।  मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने की बनाई परियोजना  “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत तीसरे कॉरिडोर में लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-बांदा मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी लंबाई 502 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त चौथे कॉरिडोर के रूप में मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने वाली 514 किलोमीटर लंबी परियोजना है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे जरूरी आधार है। यही कारण है कि योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट और नई सड़क परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं पहले ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल रही हैं। अब नार्थ-साउथ कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ जिलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यूपी बनेगा एडवांस ट्रेनिंग हब, 17 राज्यों के छात्र सीखेंगे फॉरेंसिक साइंस और साइबर सिक्योरिटी

17 राज्यों के छात्र-छात्राएं यूपी में लेंगे फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी समेत अन्य विषयों में प्रशिक्षण यूपीएसआईएफएस में 6 हफ्ते की समर इंटर्नशिप शुरू, 108 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा हमारा मुख्य उद्देश्य सर्टिफिकेट देना ही नहीं, कौशल विकास करना है: डॉ. जीके गोस्वामी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी का हब बनकर उभर रहा है। अब यूपी अपने ही नहीं, दूसरे राज्यों के छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न माध्यम से प्रशिक्षण दे रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस लखनऊ (यूपीएसआईएफएस) में ग्रीष्मकालीन (समर) इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरूआत सोमवार से हुई। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से कुल 108 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। यह सभी छात्र-छात्राएं छह हफ्ते तक विषय विशेषज्ञों द्वारा लॉ, फोरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक विषयों की गहनता से जानकारी व दक्षता प्राप्त करेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ मिले निर्देश पर इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने किया। उन्होंने डेटा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जिसके पास जितना डाटा रहेगा वह उतना ही सबल होगा। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के लिए बेहतर अवसर है, जिसके लिए आप में लगनशीलता होनी चाहिए। अगर लगन है तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।  उन्होंने यह भी कहा कि यूपीएसआइएफएस में बिताये गए आपके छह हफ्ते आपके भविष्य के द्वार को खोलेगा, आपको अपनी योग्यता से ऐसे अवसर का लाभ लेना चाहिए। सीएम योगी का निर्देश- देशभर के बच्चों का भविष्य संवारें डॉ. जीके गोस्वामी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेज से आए हुए छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि यह संस्थान न केवल उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं, युवाओं के भविष्य को विकसित करने में अग्रणी रहे बल्कि देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य मात्र एक सर्टिफिकेट देना नहीं है बल्कि आपके भीतर कौशल विकास करना है ताकि आप बाहर की दुनिया में स्वयं को प्रतिष्ठापित कर सकें। वहीं अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने कहा कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता है। आप यूपीएसआईएफएस में एक संकल्प लेकर आये हैं और आप लगनशील हैं तो तो वह निश्चित पूरा होगा।   इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. प्रेरणा, डॉ.अजीत कुमार डॉ. प्रीती, डॉ. नेहा, डॉ. निताशा सहित अन्य उपस्थित रहे।

‘अपनापन’ पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे CM विष्णुदेव साय

‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा – जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं रायपुर /नई दिल्ली मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

‘मेरी उड़ान’ से बुलंद हुए सपने, KGBV की बेटियों ने मेहनत से छुआ सफलता का आसमान

मेरी उड़ान: केजीबीवी की बेटियों ने मेहनत से हासिल किया सफलता का आसमान अलीगढ़ में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से निकली बेटियों ने खाकी पहन बढ़ाया प्रदेश का मान वंचित परिवारों की छात्राओं ने शिक्षा और संकल्प के दम पर लिखी प्रेरणा की नई कहानी लखनऊ  सपनों को पंख तब मिलते हैं, जब अवसर, शिक्षा और आत्मविश्वास एक साथ जुड़ते हैं। उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय आज ऐसी ही हजारों बेटियों की उड़ान का मजबूत आधार बन रहे हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करने वाली वंचित परिवारों की बेटियां अब प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर समाज में नई पहचान बना रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की पहल, शिक्षकाओं के मार्गदर्शन और छात्राओं की अथक मेहनत ने इन विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बेटियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बना दिया है। जनपद अलीगढ़ के विकास खण्ड अतरौली स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मढ़ौली की पूर्व छात्रा यामिनी वर्मा की कहानी संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा है। वर्ष 2012 में कक्षा-06 में प्रवेश लेने वाली यामिनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण की और 18 जून 2025 को जनपद इटावा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति प्राप्त कर अपने परिवार, गांव और विद्यालय का नाम रोशन किया। यामिनी वर्मा कहती हैं, “केजीबीवी ने मुझे केवल शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया। यहां की शिक्षिकाओं ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अगर मुझे यहां का सहयोग और मार्गदर्शन नहीं मिलता तो शायद मैं अपने सपने तक नहीं पहुंच पाती। आज जो भी हूं, उसमें मेरे विद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है।” इसी विद्यालय की छात्रा रहीं मुनिशा यादव ने भी अपने सपनों को हकीकत में बदलकर मिसाल पेश की। वर्ष 2008 में कक्षा-06 में प्रवेश लेने वाली मुनिशा शुरू से ही पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं। पढ़ाई के साथ नियमित व्यायाम, दौड़ और अनुशासित तैयारी को उन्होंने अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर 12 जुलाई 2018 को जनपद अमरोहा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति प्राप्त की। मुनिशा यादव बताती हैं, “केजीबीवी में रहकर मुझे अनुशासन, आत्मनिर्भरता और बड़े सपने देखने की सीख मिली। यहां शिक्षिकाएं हर कदम पर हमारा हौसला बढ़ाती थीं। विद्यालय का माहौल ऐसा था जिसने मुझे अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने की ताकत दी।” विकास खण्ड गंगीरी की छात्रा कंचन ने भी अपनी लगन से सफलता का नया अध्याय लिखा। 2010 में कक्षा-08 उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने लगातार शिक्षा जारी रखी। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और विज्ञान वर्ग से बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कंचन ने यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की और 13 मार्च 2023 को जनपद सहारनपुर में सब इंस्पेक्टर पद पर ज्वाइन किया। उनकी सफलता आज ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा बन चुकी है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की ये बेटियां आज यह साबित कर रही हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अगर शिक्षा और संकल्प साथ हो तो हर सपना पूरा किया जा सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग की पहल अब हजारों बेटियों के जीवन में नई उम्मीद, नया आत्मविश्वास और नई उड़ान बनकर सामने आ रही है।

योगी सरकार का बड़ा रिकॉर्ड, यूपी में 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार

योगी सरकार ने किया रिकॉर्ड 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार देश भर में बने अमृत सरोवरों का 30 प्रतिशत यूपी में निर्मित गोरखपुर सरोवर निर्माण में पहले स्थान पर, जिले के 735 स्थानों पर काम पूरा सरोवर अभियान से ग्रामीण रोजगार में हो रही वृद्धि लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' के तहत उत्तर प्रदेश 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार पूरा हो चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक देश में मौजूद सभी अमृत सरोवरों में से लगभग 30 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निर्मित किए गए हैं। साथ ही इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है। अब तक पूरे प्रदेश में 19,978 सरोवरों का निर्माण  सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश में गोरखपुर सबसे आगे है। यहां 735 सरोवरों का निर्माण हो चुका है। वहीं महाराजगंज में 601 और प्रयागराज में 525 सरोवर निर्माण के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अब तक 19,978 सरोवरों का निर्माण पूरे प्रदेश में हो चुका है।  कई स्तर पर हो रहा फायदा उत्तर प्रदेश अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार करने में देश में पहले स्थान हासिल कर चुका है। यह पहल केवल जल स्रोतों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अमृत सरोवरों का निर्माण वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो रहा है। साथ ही यह अभियान गांवों में हरियाली, स्वच्छता और सतत विकास को एक नई दिशा दे रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार बन रहे हैं। पर्यावरण को स्वच्छ बना रहे अमृत सरोवर योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन जल निकायों को सिर्फ पानी इकट्ठा करने का साधन नहीं बनाया गया। प्रत्येक अमृत सरोवर को न्यूनतम 1 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार क्यूबिक मीटर है। इसके चारों तरफ ग्रामीणों के ग्रामीणों के टहलने के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है। बैठने के लिए बेंच और लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया है। ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने इस योजना को न केवल पर्यावरण से जोड़ा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी लाभकारी बनाया है। अमृत सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और उनके सुंदरीकरण के काम को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है।

महिला उत्पीड़न मामलों पर MP महिला आयोग की सख्ती, 6 साल बाद सुनवाई में तेज हुई कार्रवाई

भोपाल   मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर जनसुनवाई की शुरुआत होने से पीड़ित महिलाओं में न्याय की नई उम्मीद जगी है. भोपाल में सोमवार को आयोजित पहले सत्र में आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक की संयुक्त बेंच ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई की. पहले ही दिन बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर पहुंचीं, जहां उनकी समस्याएं विस्तार से सुनी गईं और संबंधित पक्षों को भी बुलाकर जवाब-तलब किया गया।  छह साल बाद शुरू हुई जनसुनवाई, महिलाओं को राहत की उम्मीद महिला आयोग के नए गठन के बाद यह पहला मौका है, जब जनसुनवाई आयोजित की गई. लंबे समय से लंबित मामलों और शिकायतों के कारण पीड़ित महिलाओं को काफी इंतजार करना पड़ा था. ऐसे में इस पहल को बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।  पहले दिन 40 मामलों की सुनवाई आयोग कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई में भोपाल जिले के करीब 40 प्रकरण प्रस्तुत किए गए. अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक ने एक-एक कर सभी मामलों को गंभीरता से सुना. आवेदिकाओं की शिकायतों के साथ-साथ दूसरे पक्ष के बयान भी दर्ज किए गए, ताकि मामलों का निष्पक्ष समाधान किया जा सके।  बेटी से मिलने नहीं देने का मामला बना चर्चा का केंद्र जनसुनवाई के दौरान एक संवेदनशील मामला सामने आया, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है. महिला ने बताया कि ससुराल पक्ष उस पर मानसिक दबाव बना रहा है. वहीं, दामाद पर आरोप है कि वह अपनी पत्नी के जरिए मायके वालों के खिलाफ झूठे केस दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है. इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया, जहां बहू पर ससुराल पक्ष के खिलाफ झूठी घरेलू हिंसा की शिकायत करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और इसके बदले एक करोड़ रुपए के लेन-देन की बात कही गई. आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए।  समझौते के बावजूद भरण-पोषण विवाद एक अन्य मामले में घरेलू हिंसा के साथ आर्थिक विवाद भी जुड़ा हुआ था. सुनवाई में सामने आया कि पहले ही समझौते के तहत महिला को राशि दी जा चुकी है और बच्ची के नाम पर एक प्लॉट भी रजिस्टर्ड किया गया है. इसके बावजूद आवेदिका अतिरिक्त भरण-पोषण की मांग कर रही थी. आयोग ने दोनों पक्षों को सुनकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।  आयोग की सख्त चेतावनी आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. शिकायतों के निराकरण में देरी नहीं होने दी जाएगी और हर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।  मंगलवार को भी जारी रहेगी सुनवाई सोमवार की तरह मंगलवार को भी जनसुनवाई का सिलसिला जारी रहेगा. इसके लिए करीब 42 नए मामलों को सूचीबद्ध किया गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में और भी कई पीड़ित महिलाओं को अपनी बात रखने और न्याय पाने का अवसर मिलेगा।