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मदरसों में बच्चों की स्वच्छता और व्यवस्थाओं में मिली खामियां

मुस्लिम बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग तत्पर मदरसों में बच्चों की स्वच्छता और व्यवस्थाओं में मिली खामियां डॉ. वर्णिका शर्मा के निरीक्षण में मदरसों की अव्यवस्था आई सामने बाल संरक्षण मानकों में मिली कमियां, सुधार के दिए निर्देश रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर स्थित दो मदरसों एवं यतीमखानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।  निरीक्षण के दौरान बैजनाथ पारा स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन एवं दारुल यतामा में बच्चों की दिनचर्या अत्यधिक लंबी एवं असंतुलित पाई गई। निरीक्षण में परिसर एवं रसोईघर में गंदगी, स्वच्छ पेयजल की कमी तथा अस्वच्छ भोजन व्यवस्था जैसी गंभीर कमियां सामने आईं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य एवं मानसिक विकास के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मदरसों में बच्चों से सफाई एवं अन्य दैनिक कार्य कराए जा रहे हैं, जिसे बाल अधिकारों के विरुद्ध माना गया। डॉ वर्णिका शर्मा ने संस्था प्रबंध को आदेशित किया है कि बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कार्य नहीं कराया जाए तथा बाल संरक्षण संबंधी सभी मानकों एवं वैधानिक प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। इसके अलावा खेलकूद एवं मनोरंजन की समुचित व्यवस्था नहीं मिलने पर भी चिंता व्यक्त की। बाल आयोग ने संबंधित संस्थानों को तत्काल निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के निराकरण हेतु आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्यवाही भी की जाएगी।आयोग द्वारा संबंधित अधिकारियों को और  मदरसे को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित अवधि में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ट्विशा केस में बड़ा एक्शन, CBI आज करेगी समर्थ से पूछताछ; चैट और कॉल डिटेल्स जांच के दायरे में

भोपाल  ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच करेगी. सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ और सास के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इससे पहले सोमवार (25 मई) को एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभालने और आवश्यक दस्तावेज और सबूत जुटाने के लिए भोपाल में एक स्पेशल क्राइम यूनिट भेजी।  मुलाकात के बाद, सीबीआई ने प्रक्रिया के अनुसार, भोपाल पुलिस की एफआईआर को पुनः दर्ज किया, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया था।  सीबीआई के हाथ में आई जांच, नई टीम गठित ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है. भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले दर्ज एफआईआर को एजेंसी ने री-रजिस्टर किया है. इस मामले की जांच दिल्ली में पदस्थ एसपी राजबीर सिंह के नेतृत्व में की जाएगी, वहीं डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी (आईओ) नियुक्त किया गया है. सीबीआई टीम अब पूरे मामले की नई सिरे से पड़ताल करेगी।  आज समर्थ सिंह की कस्टडी लेगी CBI सूत्रों के अनुसार, सीबीआई बुधवार को मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर सकती है. एजेंसी डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर उससे गहन पूछताछ करेगी. सीबीआई की नजर व्हाट्सएप चैट्स, कॉल डिटेल्स और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिनके जरिए घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जाएगी।  12 मई को हुई थी संदिग्ध मौत यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स इलाके का है, जहां 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना पुलिस को मिली थी. शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने से हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटेमॉर्टम हैंगिंग' यानी जीवित अवस्था में फांसी की पुष्टि हुई, लेकिन शरीर पर चोटों के निशान मिलने से मामला और संदिग्ध हो गया।  गिरिबाला सिंह का आरोप, ट्विशा को ड्रग्स की लत थी ट्विशा (33) का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है. वहीं, ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उसे मादक पदार्थों की लत थी।  दहेज और प्रताड़ना के गंभीर आरोप मृतका के परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में कहा गया है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जाता था. बताया गया कि शादी के दौरान करीब 2 लाख रुपए का दबाव डालकर लेन-देन कराया गया और इसके बाद भी लगातार अतिरिक्त रकम की मांग की जाती रही. इसके अलावा, ट्विशा के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए हैं।  गर्भपात कराने का भी आरोप एफआईआर के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थी. परिजनों का आरोप है कि पति और सास ने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए दबाव बनाकर गर्भपात करवाया. यह आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं, जिस पर सीबीआई विशेष रूप से जांच कर रही है।  इन कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया है. मध्यप्रदेश सरकार की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने 25 मई को अधिसूचना जारी कर सीबीआई को जांच का अधिकार सौंपा था।  डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य होंगे अहम सीबीआई अब इस मामले में डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच करेगी. व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर घटनाक्रम को पुनर्निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही पोस्टमार्टम में मिले चोटों के निशान और उनके कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा।  परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद सीबीआई की एंट्री के बाद परिजनों को अब निष्पक्ष और सटीक जांच की उम्मीद जगी है. यह मामला न सिर्फ एक संदिग्ध मौत बल्कि दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है. आने वाले दिनों में आरोपी से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना है।  चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो।  पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. प्राथमिकी में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है।  दोनों परिवारों को सलाह- मीडिया से बात न करें पीठ ने कहा, ‘‘हम पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और कोई पूर्वाग्रह नहीं हो। 

खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर बनेगा आस्था और विकास का नया केंद्र, मंत्री सारंग का बड़ा बयान

आस्था, संस्कृति और विकास का संगम बनेगा खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर : मंत्री सारंग लगभग 100 करोड़ की लागत से तेजी से आकार ले रहा खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर मंत्री विश्वास सारंग ने दिए तय समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश भोपाल  राजधानी भोपाल के प्राचीनतम और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र खेड़ापति हनुमान मंदिर परिसर में निर्माणाधीन खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर के निर्माणाधीन कार्यों का सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि कॉरिडोर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से तय समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को शीघ्र बेहतर एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। आस्था और विरासत को मिलेगा भव्य स्वरूप मंत्री सारंग ने कहा कि छोला स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। सदियों से यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। इसी विरासत को संरक्षित करते हुए “विरासत भी और विकास भी” की भावना के साथ खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भोपाल की सांस्कृतिक धरोहर को भव्य स्वरूप प्रदान करेगी और आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगी। निर्माण कार्य समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में श्रद्धालुओं, स्थानीय रहवासियों एवं व्यापारियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यों के क्रियान्वयन में न्यूनतम विस्थापन सुनिश्चित किया जाए तथा यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। 100 करोड़ की लागत से विकसित होगा हनुमान लोक मंत्री सारंग ने बताया कि लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत से विकसित हो रहे खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को महाकाल लोक की तर्ज पर आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। करीब 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था, भव्य कॉरिडोर, दर्शक दीर्घा, सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अधोसंरचना, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नागर शैली में होगा मंदिर परिसर का विकास मंत्री सारंग ने बताया कि मंदिर परिसर के विकास कार्यों में राजस्थान के व्हाइट मार्बल का उपयोग करते हुए प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। मंदिर परिसर में सुंदरकांड की झलक दर्शाने वाला भव्य और गरिमामयी कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। दशहरा मैदान में विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं मंत्री सारंग ने कहा कि दशहरा मैदान के खुले स्वरूप को संरक्षित रखते हुए वहां दर्शक दीर्घा, विशाल मंच, रावण दहन स्थल एवं सार्वजनिक आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है। साथ ही परिसर के चारों ओर 15 मीटर चौड़ी कांक्रीट सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के आवागमन में सुविधा होगी। रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित मंत्री सारंग ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। दुकानें एवं अन्य सुविधाएं आधुनिक व्यवस्थाओं से युक्त होंगी। भोपाल की नई पहचान बनेगा हनुमान लोक मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूर्ण की जाएं। उन्होंने कहा कि खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल की आस्था, संस्कृति और विकास का प्रतीक बनेगा तथा आने वाले समय में यह परियोजना शहर की नई पहचान के रूप में स्थापित होगी।  

MSP पर रिकॉर्ड गेहूं खरीदी, 13.27 लाख किसानों से 102 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

समर्थन मूल्य पर 13.27 लाख किसानों से हुआ 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी भोपाल  मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 27 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नंबर-1 स्थान पर है। अब तक लगभग 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 22,165.21 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,165.21 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं खेल, चिकित्सा, कला समेत अनेक क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वालों को मिला सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में किया सम्मानित पद्म विभूषण से अलंकृत वायलिन वादिका एन. राजम व दिवंगत फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देयोल के परिजनों को भी बधाई दी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सोमवार को नई दिल्ली में सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर पद्म विभूषण से अलंकृत वायलिन वादिका एन. राजम एवं दिवंगत फ़िल्म अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देयोल के परिजनों को भी बधाई दी।  डॉ. ठकराल के शोध कार्य मानवता के लिए अमूल्य निधि  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर लिखा- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा आयुर्वेद के अनन्य साधक एवं प्रख्यात शोधकर्ता डॉ. केवल कृष्ण ठकराल जी को चिकित्सा के क्षेत्र में 'पद्म श्री' से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई। ​छह दशकों की दीर्घ साधना, ब्रोंकियल अस्थमा उपचार में 'कर्ण वेधन' जैसी युगांतरकारी तकनीक का विकास और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने वाले आपके शोध कार्य मानवता के लिए अमूल्य निधि हैं। प्रो. श्याम सुंदर के समर्पण, शोध और सेवा भावना को राष्ट्र की आदरपूर्ण अभिव्यक्ति है यह सम्मान सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध कालाजार विशेषज्ञ प्रो. श्याम सुन्दर जी को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया जाना अत्यंत गौरव का विषय है। कालाजार के उपचार हेतु प्रथम प्रभावी मौखिक दवा के विकास एवं त्वरित निदान परीक्षण विकसित कर आपने चिकित्सा अनुसंधान और मानव सेवा में ऐतिहासिक योगदान दिया है। यह सम्मान आपके समर्पण, शोध और सेवा भावना को राष्ट्र की आदरपूर्ण अभिव्यक्ति है, हार्दिक बधाई। आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं डॉ. सिंह के कार्य मुख्यमंत्री ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के गौरव डॉ. अशोक कुमार सिंह जी को 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा कि धान की उन्नत प्रजातियों के विकास, कृषि अनुसंधान एवं किसान हित में आपके द्वारा किए गए अभिनव कार्य 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। आपकी यह गौरवपूर्ण उपलब्धि समस्त देशवासियों के लिए हर्ष एवं गर्व का विषय है। प्रो. राजेंद्र प्रसाद का उत्कृष्ट योगदान संपूर्ण राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्वारा वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. (डॉ.) राजेंद्र प्रसाद जी को चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु 'पद्म श्री' सम्मान से विभूषित होने पर हार्दिक बधाई दी। सीएम ने कहा कि टीबी एवं एमडीआर-टीबी उपचार के क्षेत्र में पिछले पांच दशकों की आपकी निस्वार्थ एवं समर्पित सेवा सराहनीय है। लाखों मरीजों को नवजीवन प्रदान करने और जनस्वास्थ्य के प्रति आपका उत्कृष्ट योगदान संपूर्ण राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आपका यह सम्मान चिकित्सा जगत में सेवा, समर्पण और मानवता के उच्चतम मूल्यों का अभिनंदन है। प्रो. बुद्ध रश्मि मणि का भगीरथ प्रयास हर देशवासी के लिए प्रेरणापुंज  मुख्यमंत्री ने भारतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के गौरव प्रो. बुद्ध रश्मि मणि जी को 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा कि अयोध्या और सारनाथ जैसी हमारी पावन धरोहरों के पुनरुत्थान तथा भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करने का आपका भगीरथ प्रयास हर देशवासी के लिए प्रेरणापुंज है। आपके इस अप्रतिम पुरुषार्थ का अभिनंदन! प्रवीण की उपलब्धि प्रेरणा का उज्ज्वल स्रोत सीएम ने खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान हेतु उत्तर प्रदेश के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता एवं लगातार पैरालंपिक पदक जीतने वाले सबसे युवा दिव्यांग हाई जंप खिलाड़ी प्रवीण कुमार को 'पद्म श्री' सम्मान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सीएम ने लिखा कि आपकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि उत्तर प्रदेश सहित सम्पूर्ण देश के युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल स्रोत है। आपके समर्पण, संघर्ष और अनुशासन ने भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।

मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान कार्यशालाओं की धूम, छात्रों ने किए रोचक प्रयोग

मैपकास्ट के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग में विज्ञान आधारित कार्यशालाओं का हुआ आयोजन विद्यार्थियों ने वर्चुअल वैज्ञानिक उपकरणों एवं ध्वनि विज्ञान की प्रयोगात्मक गतिविधियों से बढ़ाई वैज्ञानिक समझ भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत संचालित “सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग” में “वर्चुअल साइंस फन कैंप” एवं “साइंस ऑफ साउंड्स” विषयक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, रचनात्मक चिंतन एवं तकनीकी समझ विकसित करना था। कार्यशालाओं में विभिन्न विद्यालयों से आए 34 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े आधुनिक डिजिटल उपकरणों, प्रयोगात्मक गतिविधियों एवं व्यवहारिक वैज्ञानिक अवधारणाओं की जानकारी प्राप्त की। मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रवि भारद्वाज, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण डिगर्रा, संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज राठौर और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समीर द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। मैपकास्ट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास शेंडे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौधरी और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी भूपेश सक्सेना ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विज्ञान शिक्षा में प्रयोगात्मक अधिगम, जिज्ञासा एवं रचनात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को ऑनलाइन वैज्ञानिक उपकरणों एवं डिजिटल लैब टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। वर्चुअल माइक्रोस्कोप, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, ओरिगामी और विभिन्न डिजिटल प्रयोगशाला उपकरणों के वैज्ञानिक उपयोग एवं महत्व को विद्यार्थियों ने समझा। कार्यशाला में रोचक गतिविधियों एवं हैंड्स-ऑन प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बताई गई। ब्रेन एक्टिविटीज़ के जरिए विद्यार्थियों को मस्तिष्क की कार्यप्रणाली एवं उसकी सुरक्षा के लिए हेलमेट के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही “साइंस ऑफ साउंड्स” कार्यशाला में विद्यार्थियों को ध्वनि विज्ञान से संबंधित वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं व्यवहारिक प्रयोगों से अवगत कराया गया। विद्यार्थियों ने फ्रीक्वेंसी, वेवलेंथ, एम्प्लिट्यूड एवं विभिन्न प्रकार की तरंगों के वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझा। माउथ ऑर्गन किट एवं विभिन्न प्रकार की साउंड किट्स तैयार कर ध्वनि के उत्पन्न होने एवं उसके संचरण की प्रक्रिया को जाना। साथ ही उन्हें वैक्यूम में ध्वनि के संचरण न होने के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों ने विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों से उत्पन्न ध्वनियों के भेद एवं उनकी विशेषताओं को भी समझा। कार्यशालाओं में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने और दैनिक जीवन में उसके उपयोग के प्रति प्रेरित किया।  

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस बनी मिसाल, राहत-उपचार और जागरूकता मॉडल से प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन

सड़क सुरक्षा में देवास पुलिस का प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन — राहत, उपचार और जागरूकता के समन्वित मॉडल से बनी नई पहचान देवास मॉडल से सड़क सुरक्षा को मिली नई दिशा, दुर्घटनाओं में 18% एवं मृत्यु में 25% की ऐतिहासिक कमी हिट एंड रन योजना, राह वीर योजना एवं पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास प्रदेश में प्रथम देवास ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने संबंधी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन में देवास जिला प्रदेशभर में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह एवं पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। समन्वित कार्यवाही, वैज्ञानिक विश्लेषण, मानवीय दृष्टिकोण एवं त्वरित राहत व्यवस्था के कारण वर्ष 2026 में देवास जिले में वर्ष 2025 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 18 प्रतिशत तथा सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में 25 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। देवास जिले में सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक कार्यवाही तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी आधारित अभियान का स्वरूप दिया गया। प्रत्येक सड़क दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एसडीओपी द्वारा मौके पर पहुँचकर दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण किया गया तथा इन रिपोर्टों की प्रति माह आयोजित रोड सेफ्टी समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की गई। दुर्घटना संभावित स्थलों पर NHAI, PWD एवं MPRDC द्वारा त्वरित इंजीनियरिंग सुधार कराए गए। वहीं ट्रैफिक पुलिस एवं जिला पुलिस द्वारा गाँव-गाँव चौपाल लगाकर हेलमेट एवं सीट बेल्ट के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया तथा हजारों हेलमेट निःशुल्क वितरित किए गए। राह वीर योजना में भी देवास प्रदेश में प्रथम सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन ऑवर” के महत्व को ध्यान में रखते हुए देवास जिले में “राह वीर योजना” का भी प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचाने वाले नागरिकों को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजे गए। जिले से भेजे गए 14 प्रकरणों में से 4 नागरिकों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा “राह वीर” के रूप में सम्मानित करते हुए प्रशंसा पत्र एवं 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। राह वीरों को सम्मानित करवाने में भी देवास जिला प्रदेश में प्रथम रहा। पीएम राहत योजना से 200 से अधिक घायलों को मिला जीवनदान प्रधानमंत्री राहत योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को 1 लाख 50 हजार रूपए तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी देवास जिले में प्रभावी रूप से लागू किया गया। मात्र दो माह की अवधि में 200 से अधिक घायलों का निःशुल्क उपचार कराया गया, जिनमें से 150 से अधिक घायल पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। हिट एंड रन योजना में 68 परिवारों को मिली 61 लाख रुपये की राहत राशि देवास पुलिस द्वारा “हिट एंड रन योजना” के अंतर्गत भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। ऐसे मामलों में, जहाँ दुर्घटना करने वाला वाहन अज्ञात रहता है और पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती, शासन द्वारा घायल को 50 हजार रूपए एवं मृतक के परिवार को 2 लाख रूपए तक की राहत राशि प्रदान की जाती है। देवास जिले में वर्ष 2022 से 2026 के मध्य हिट एंड रन के कुल 130 प्रकरणों का प्रभावी निराकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 68 पीड़ित परिवारों को लगभग 61 लाख रूपए की राहत राशि उनके खातों में दिलाई जा चुकी है। कलेक्टर देवास ऋतुराज सिंह ने बताया कि रोड सेफ्टी बैठकों को औपचारिकता तक सीमित न रखकर परिणाम आधारित एवं विश्लेषणात्मक बनाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम आज सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिट एंड रन योजना के शेष प्रकरणों में भी शीघ्र राहत राशि प्रदान करवाई जाएगी तथा राह वीर योजना के लंबित प्रस्तावों को भी प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कराया जाएगा। पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद ने बताया कि जिले में “360 डिग्री रोड सेफ्टी मॉडल” के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसमें दुर्घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण के साथ-साथ शासन की सभी सड़क सुरक्षा योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी केवल आँकड़े नहीं हैं, बल्कि वे अनेक परिवारों की बची हुई खुशियाँ और सुरक्षित जीवन हैं।  

राष्ट्रीय मंच पर चमके MP एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ी, शानदार प्रदर्शन से बढ़ाया प्रदेश का मान

मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन देव मीणा ने जीता स्वर्ण, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह ने रजत पदक समरदीप सिंह गिल शॉटपुट में रहे स्वर्ण विजेता पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर प्रदर्शन के साथ बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, एशियन गेम्स एवं एशियन अंडर-23 के लिए हासिल किए क्वालीफाइंग मार्क भोपाल  रांची में 22 से 25 मई 2026 तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। अकादमी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी देव मीणा ने पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अर्जित किया, जबकि कुलदीप कुमार ने रजत पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने 5.45 मीटर का शानदार प्रदर्शन करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसके साथ ही अकादमी के खिलाड़ी विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ स्पर्धा में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। वहीं शॉटपुट स्पर्धा में समरदीप सिंह गिल ने 20.46 मीटर के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतकर अकादमी को एक और बड़ी सफलता दिलाई। कॉमनवेल्थ गेम्स एवं एशियन गेम्स के लिए हासिल किया क्वालीफाइंग मार्क देव मीणा और कुलदीप कुमार ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 5.25 मीटर क्वालीफाइंग मार्क को पार करते हुए प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। साथ ही दोनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 5.45 मीटर क्वालीफाइंग मानक भी हासिल कर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत दावेदारी प्रस्तुत की है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश एवं देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। इसी क्रम में समरदीप सिंह गिल ने पुरुष शॉटपुट स्पर्धा में 20.46 मीटर का प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए निर्धारित 20.36 मीटर क्वालीफाइंग मानक एवं एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 19.41 मीटर क्वालीफाइंग मार्क भी हासिल किया। एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप के लिए भी किया क्वालिफाई विनोद सिंह ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ में 14:15.50 सेकेंड का प्रदर्शन करते हुए चीन के ओरोडोस में आयोजित होने वाली प्रथम एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के लिए निर्धारित 14:22.00 सेकेंड के क्वालीफाइंग मार्क को पार कर प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। खिलाड़ियों की यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और खेल अधोसंरचना का प्रमाण है। खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने देव मीणा, कुलदीप कुमार, विनोद सिंह एवं समरदीप सिंह गिल को इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता एवं उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। दबावपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर पदक अर्जित करना खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस उपलब्धि में अकादमी के प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया गया, जिसका परिणाम इस ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिलाड़ी आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। युवा खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणास्रोत मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ियों की यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका प्रदर्शन यह दर्शाता है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।  

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रधानों को बनाया जाएगा ग्राम पंचायतों का प्रशासक नई पंचायतों के गठन अथवा छह माह की अधिकतम अवधि तक निवर्तमान प्रधान होंगे प्रशासक सीएम योगी के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी, 26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल लखनऊ  प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे। सीएम योगी के निर्देश पर निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित किए जाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है, जिसके अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में लेंगे डीएम से स्वीकृति इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अत्यावश्यक अथवा किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा। ज्ञात है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।

जनगणना 2027 में MP ने पकड़ी रफ्तार, 2.39 करोड़ मकानों की गणना पूरी; फील्ड वर्क अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग 30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य भोपाल मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।