samacharsecretary.com

विश्व कप जीत के बाद हरमनप्रीत का बड़ा फैसला, कप्तानी से लिया संन्यास; बतौर खिलाड़ी जारी रहेगा सफर

नई दिल्ली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप विजेता कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मंगलवार को भारतीय टीम की तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का एलान किया। हरमनप्रीत ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन अब वह बतौर खिलाड़ी आगे बढ़ना चाहती हैं। हरमनप्रीत ने अपने संदेश में लिखा, 'आज मैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ रही हूं। यह आसान फैसला नहीं है। इसमें वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे पल जुड़े हैं, जो जिंदगी भर मेरे साथ रहेंगे। कप्तानी में हरमनप्रीत का लंबा सफर 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने पांच टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत की कप्तानी की है। कप्तान के रूप में उनका आखिरी काम पिछले महीने निशिन में भारतीय टीम को लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक दिलाना रहा। फैसले से एक दिन पहले हुई अहम बैठक हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने का फैसला उस बैठक के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारतीय टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार के साथ बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया से मुलाकात की थी। गुवाहाटी में हुई इस बैठक में भारतीय महिला टीम के आगे के रोडमैप को लेकर चर्चा हुई थी। टीम के लिए खुद की महत्वाकांक्षाएं पीछे रखीं हरमनप्रीत ने कहा कि उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट और टीम के लिए अपना सब कुछ दिया। कई मौकों पर उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, विकास और निजी महत्वाकांक्षाओं को भी टीम के हित में पीछे रखा। उन्होंने लिखा, 'मैंने इस टीम और भारतीय महिला क्रिकेट को अपना खून, पसीना और समय दिया है। कई बार अपने खेल और निजी महत्वाकांक्षाओं का एक हिस्सा भी पीछे रखा, क्योंकि मेरा मानना था कि टीम सबसे पहले है।' कप्तान के तौर पर लिए गए फैसलों को लेकर होने वाली आलोचनाओं का भी उन्होंने जिक्र किया। हरमनप्रीत ने कहा कि कई फैसले मुश्किल थे और हमेशा समझे नहीं गए, लेकिन उनका एक ही उद्देश्य था—टीम को बेहतर बनाना और दूसरी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका देना। हार से लेकर विश्व कप जीत तक सब देखा हरमनप्रीत ने भारतीय टीम के साथ अपने सफर के उतार-चढ़ाव को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने निराशा, दिल टूटने, आलोचना और मुश्किल दौर देखे, लेकिन इसके साथ जीत, जश्न और देश का प्रतिनिधित्व करने का गर्व भी महसूस किया। उन्होंने लिखा, 'मैंने सबसे बुरे दौर, दिल टूटने, आलोचना और संदेह देखे हैं। मैंने सबसे ऊंचे पल भी देखे हैं, जीत, जश्न और देश का प्रतिनिधित्व करने का गर्व।' विश्व कप जीत के बाद कप्तानी छोड़ने का उनका फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि वह अब टीम को सही दिशा में मान रही हैं। 'मैंने अपनी ड्यूटी पूरी कर दी' हरमनप्रीत ने कहा कि वह कप्तानी छोड़ते समय भावुक हैं, लेकिन उनके मन में शांति है। उन्हें भरोसा है कि भारतीय टीम के पास प्रतिभा, चरित्र और भविष्य के लिए मजबूत आधार मौजूद है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैंने अपनी ड्यूटी पूरी कर दी है। मैंने इस टीम को अपना सब कुछ दिया। मैंने इस जिम्मेदारी को गर्व के साथ निभाया और भारतीय महिला क्रिकेट की अगुआई करने के विशेषाधिकार के लिए हमेशा आभारी रहूंगी।' कप्तानी खत्म, सफर जारी हरमनप्रीत ने साफ किया कि कप्तानी छोड़ने का मतलब क्रिकेट से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अब वह खेल को एक अलग नजरिए से जीना चाहती हैं। उनका संदेश था, 'कप्तानी आज खत्म हो रही है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए मेरा प्यार कभी खत्म नहीं होगा। अब मैं फिर से खेल के प्यार के लिए खेलने को तैयार हूं।' उन्होंने अपने साथियों, कोचिंग स्टाफ, प्रबंधन, बीसीसीआई, परिवार और प्रशंसकों का भी धन्यवाद किया। अपने संदेश का अंत उन्होंने इन शब्दों से किया- 'खून। पसीना। त्याग। गर्व। मैंने अपना सब कुछ दे दिया। अब सफर जारी है।'

बैटिंग की दादागीरी से नहीं मिलेगा वर्ल्ड कप, भारत को चाहिए ऐसी गेंदबाजी जो मैच छीन सके

नई दिल्ली 1983 और 2011… भारतीय क्रिकेट के ये दो साल सिर्फ विश्व कप जीतने की तारीखें नहीं हैं, बल्कि उस क्रिकेट की पहचान हैं, जिसमें भारत ने दुनिया को बताया था कि बड़े टूर्नामेंट कैसे जीते जाते हैं. 2027 में फिर वही गौरव हासिल करना है तो सिर्फ बल्लेबाजी के दम पर सपना देखना खतरनाक होगा. टीम इंडिया के पास बल्लेबाजी में रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, शुभमन गिल और संजू सैमसन जैसे विकल्प हैं. रन बनाने की ताकत की कमी नहीं है. सवाल यह है कि रन बचाने और विकेट निकालने की ताकत कितनी है? क्रिकेट अब सिर्फ 350 रन बनाने का खेल नहीं रह गया है. बड़े टूर्नामेंट में असली परीक्षा तब होती है जब सामने वाली टीम भी 300-350 के पार जाने की स्थिति में हो. ऐसे में आपकी गेंदबाजी कितनी जल्दी मैच का रुख बदल सकती है, यही खिताब और सिर्फ अच्छे प्रदर्शन के बीच का फर्क बनती है. भारत अगर बल्लेबाजी की दादागीरी के भरोसे हर मुकाबला जीतने की सोचता रहेगा तो यह रणनीति लंबे टूर्नामेंट में जोखिम भरी होगी. एक खराब दिन बल्लेबाजों का आया और स्कोर 250-270 के आसपास अटक गया तो मैच बचाने के लिए गेंदबाजों के पास क्या हथियार होंगे? यहीं जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. बुमराह 100 फीसदी फिट हों और हार्दिक अपनी पूरी गेंदबाजी क्षमता के साथ उपलब्ध हों तो टीम का संतुलन ही बदल जाता है. लेकिन सवाल सिर्फ दो खिलाड़ियों का नहीं है. 2027 विश्व कप के लिए भारत को ऐसी गेंदबाजी यूनिट चाहिए जो परिस्थितियों की मोहताज न हो और बड़े मुकाबलों में खुद मैच छीन सके. और इसके लिए सबसे जरूरी है- अब प्रयोगों की दुकान बंद कर विश्व कप के लिए चुनी जाने वाली टीम को साथ खेलने का पर्याप्त समय देना होगा. विश्व कप से छह महीने पहले टीम बनाने की कोशिश करने की बजाय कम से कम छह महीने पहले एक पक्का टीम संयोजन तैयार होना चाहिए. कौन नई गेंद संभालेगा, डेथ ओवर में कौन आएगा, बीच के ओवरों में विकेट कौन निकालेगा, बुमराह के साथ दूसरा और तीसरा तेज गेंदबाज कौन होगा, हार्दिक की मौजूदगी में टीम का संतुलन कैसा होगा- इन सवालों के जवाब टूर्नामेंट शुरू होने से काफी पहले मिलने चाहिए. बल्लेबाजी में पांच बड़े नाम होने से टीम कागज पर मजबूत दिख सकती है, लेकिन विश्व कप कागज पर नहीं जीते जाते. वहां एक विकेट मैच बदलता है, एक स्पेल कहानी बदलता है और एक दबाव भरा ओवर पूरा अभियान बदल सकता है. 1983 की टीम के पास कपिल देव थे, 2011 की टीम के पास जहीर खान… दोनों टीमों में बल्लेबाजी सितारों से भरी थी, लेकिन खिताब तक पहुंचने के लिए गेंदबाजी ने भी अपनी भूमिका निभाई. इसलिए 2027 का सवाल यह नहीं होना चाहिए कि भारत के पास कितने बड़े बल्लेबाज हैं. सवाल यह होना चाहिए कि क्या भारत के पास इतने धारदार गेंदबाज हैं जो बड़े मैच में सामने वाली टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ सकें? अगर जवाब अभी पूरी तरह साफ नहीं है तो वक्त अभी भी है. लेकिन वक्त को प्रयोगों में गंवाने की बजाय योजना में लगाना होगा. 2027 में 1983 और 2011 का गौरव दोहराना है तो बैटिंग की दादागीरी के साथ गेंदबाजी में भी बारूद चाहिए. वरना 350 रन भी कभी-कभी कम पड़ सकते हैं  

Virat-Rohit की अगली सीरीज कब? भारतीय जर्सी में अगले महीने फिर उतरेंगे मैदान पर, जानें पूरा शेड्यूल

मुंबई  शुभमन गिल की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम की। भारत ने तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी में आयोजित वनडे में 8-8 विकेट से जीत दर्ज की जबकि न्यू चंडीगढ़ में आखिरी मैच में पांच विकेट से हार का सामना किया। दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा ने घर पर फैंस का काफी मनोरंजन किया। दोनों करियर के आखिरी पड़ाव पर हैं लेकिन फैंस का जोश बरकरार है। 37 वर्षीय विराट और 39 वर्षीय रोहित टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं और भारत के लिए सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलेते हैं। ऐसे में फैंस दोनों को मैदान पर देखने कोई मौका नहीं गंवाया चाहते। चलिए, आपको बताते हैं कि विराट और रोहित कब अगली बार भारतीय जर्सी में वनडे मैच खेलते हुए नजर आएंगे। अब 3 नहीं बल्कि 5 वनडे में मैदान पर उतरेंगे भारत को अगली वनडे सीरीज न्यूजीलैंड दौरे पर खेलनी है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीनों फॉर्मेट की सीरीज आयोजित होगी। दोनों टीमें 22 अक्टूबर 2026 से पांच मैचों की टी20 सीरीज में भिड़ेंगी। उसके बाद पांच मैचों की वनडे सीरीज होगी। विराट और रोहित 1 नवंबर से भारतीय जर्सी में एक्शन में होंगे क्योंकि उसी दिन से वनडे सीरीज शुरू होगी। विराट ने पिछली बार न्यूजीलैंड की धरती पर वनडे सीरीज फरवरी 2020 में खेली थी। तब उनके बल्ले से 51, 15 और 9 के स्कोर निकले थे। वहीं, 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित ने न्यूजीलैंड में पिछली वनडे सीरीज जनवरी 2019 में खेली। रोहित ने पांच मैचों की सीरीज में 11, 87, 62, 7 और 2 के स्कोर बनाए थे। वनडे सीरीज के मैच कब-कहां खेले जाएंगे? भारत को न्यूजीलैंड दौरे पर वनडे सीरीज का पहला मैच एक नवंबर को ऑकलैंड के मैदान पर खेलना है। दोनों टीमें दूसरा वनडे में वेलिंग्टन के मैदान पर भिड़ेंगी, जो 7 नवंबर को आयोजित होगा। तीसरा मुकाबला हैमिल्टन में 10 नवंबर को खेला जाएगा। सीरीज के आखिरी दोनों वनडे माउंट माउंगानुई के मैदान पर होंगे। चौथे वनडे का 13 नवंबर और पांचवें मैच का 15 नवंबर को आयोजन होगा। वनडे सीरीज समाप्त होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ 19 नवंबर से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। विराट-रोहित ने WI सीरीज में कितने रन बनाए? विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में तीन मैचों में 168 रन जुटाए। उन्होंने पहले वनडे में नाबाद 139 रन बनाए, दूसरे में 29 रन की पारी खेली और तीसरे में गोल्डन डक का शिकार हुए। वह सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में छठे पायदान पर है। रोहित शर्मा ने 225 रन बटोरे। उन्होंने पहले मैच में 32, दूसरे में 101 और तीसरे वनडे में 92 रनों की पारी खेली। वह लिस्ट में चौथे नंबर पर हे। कप्तान शुभमन गिल ने सीरीज में सर्वाधिक 334 रन जोड़े। उन्होंने एक दोहरा शतक लगाया और एक सेंचुरी जमाई। वह आखिरी मुकाबले में एक रन ही बना सके। गिल को प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड मिला।

फॉर्म में थे वैभव फिर भी बैठे रहे बाहर, गौतम गंभीर ने संजू-अभिषेक का नाम लेकर बताई वजह

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की कोई कमी नहीं है लेकिन सही समय पर सही मौका मिलना ही किसी खिलाड़ी का भविष्य तय करता है। 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखकर इतिहास रचने वाले वैभव सूर्यवंशी इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर खुलकर बात की और यह साफ किया कि शानदार फॉर्म में होने के बावजूद इस युवा खिलाड़ी को अपनी बारी के लिए इंतजार क्यों करना पड़ा। वैभव ने मचाया धमाल वैभव ने इस साल की शुरुआत में सबसे कम उम्र में डेब्यू का रिकॉर्ड बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर के सालों पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और बाद में जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक जड़कर इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में फिफ्टी बनाने वाले बल्लेबाज भी बने। हालांकि, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज और फिर एशिया कप के शुरुआती मैचों में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली जिसको लेकर काफी सवाल उठ रहे थे। गौतम गंभीर ने दी सफाई गंभीर ने बाहर बैठने की इस वजह को साफ करते हुए स्पष्ट किया कि सिर्फ अच्छी फॉर्म में होना ही टीम में जगह मिलने की गारंटी नहीं होता। टीम मैनेजमेंट और लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अनुभवी खिलाड़ियों को सुरक्षा देना पहली प्राथमिकता होती है। गंभीर ने कहा, 'यह मेरे लिए भी एक नया अनुभव था। हां, वह बहुत अच्छी फॉर्म में थे लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि कई बार ऐसे खिलाड़ियों की वजह से आपको अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है जिन्होंने लंबे समय से टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। और एक बात साफ है सोशल मीडिया या बाहर का शोर यह तय नहीं करता कि प्लेइंग इलेवन क्या होगी।' संजू या अभिषेक को बाहर करना मुश्किल कोच ने टीम में सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका और ड्रेसिंग रूम के माहौल को बनाए रखने पर जोर दिया। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए गंभीर ने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने पिछले डेढ़-दो साल में प्रभाव डाला है उन्हें तीन-चार नाकामियों के आधार पर बाहर नहीं बैठाया जा सकता। गंभीर ने कहा, 'अगर वैभव आज खेलते हैं तो यह मेरे और उस खिलाड़ी के बीच एक कठिन बातचीत होगी जिसे हम बाहर बैठाएंगे चाहे वह अभिषेक हों या संजू। इसलिए हम उस कॉम्बिनेशन को अचानक नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसने पिछले डेढ़ या दो साल में इतना प्रभाव डाला है। हम ड्रेसिंग रूम में वह सुरक्षा का माहौल बनाना चाहते हैं।' एशियन गेम्स में खेली शानदार पारी मौका मिलने पर वैभव ने खुद को फिर साबित किया। एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ वापसी करते हुए उन्होंने 21 गेंदों में 38 रनों की अहम पारी खेली। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भी 9 गेंदों पर 15 रन बनाकर टीम की जीत में अपना योगदान दिया जिसकी बदौलत भारत ने 19 रनों से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

धीमी ओवर गति पड़ी भारी, भारत पर 20 और वेस्टइंडीज पर 10 फीसदी मैच फीस का जुर्माना

नई दिल्ली भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले में पांच विकेट से हार झेलनी पड़ी थी. 3 सितंबर (शनिवार) को मुल्लांपुर में आयोजित इस मुकाबले में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के सामने 352 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे मेहमान टीम ने कप्तान शाई होप के नाबाद 162 रनों की बदौलत 10 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. भारतीय टीम शुरुआती दो मुकाबले जीत सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी थी. हालांकि आखिरी मैच में हार के चलते भारतीय टीम वेस्टइंडीज का सूपड़ा साफ नहीं कर सकी. अब वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने दोनों टीमों पर तगड़ा एक्शन लिया है. भारत और वेस्टइंडीज दोनों टीमों पर धीमी ओवर गति को लेकर कार्रवाई हुई है. आईसीसी ने भारतीय टीम पर मैच फीस का 20 प्रतिशत, जबकि वेस्टइंडीज की टीम पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया है. भारत निर्धारित समय में चार ओवर पीछे रह गया, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर कम कर पाई. समय से जुड़ी रियायतों को शामिल करने के बाद दोनों टीमों को न्यूनतम ओवर रेट के नियम का दोषी पाया गया. आईसीसी इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरी के प्रकाश भट्ट ने दोनों टीमों पर यह जुर्माना लगाया. भारत ने चार ओवर कम फेंके आईसीसी की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के मुताबिक निर्धारित समय में कम फेंके गए प्रत्येक ओवर के लिए खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है. इसी नियम के तहत भारत पर चार ओवर कम होने के कारण 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज पर दो ओवर कम होने के चलते 10 प्रतिशत जुर्माना लगा. भारत और वेस्टइंडीज के कप्तानों ने धीमी ओवर गति के आरोपों को स्वीकार कर लिया और आईसीसी की ओर से प्रस्तावित सजा पर भी सहमति जताई. साथ ही दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया, इसलिए मामले में औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी. इस मामले में मैदानी अंपायर जयरामन मदनगोपाल और सैम नोगाज्स्की के साथ थर्ड अंपायर शरफुद्दौला इब्ने शाहिद और फोर्थ अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाए थे. इस तरह सीरीज के आखिरी वनडे के बाद दोनों टीमों को मैदान पर प्रदर्शन के अलावा धीमी ओवर गति की कीमत भी चुकानी पड़ी.

सचिन के आखिरी टेस्ट में 10 विकेट लेने वाले प्रज्ञान ओझा अब संभालेंगे सिलेक्शन की कमान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की चयन समिति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को अजीत अगरकर के पद छोड़ने के बाद कथित तौर पर अंतरिम इंटरीम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेल चुके ओझा अब टीम इंडिया के आगामी दौरों के लिए स्क्वाड चुनने की अहम प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रज्ञान ओझा को मिली जिम्मेदारी हाल ही में गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले से ठीक पहले प्रज्ञान ओझा ने चयन समिति के अन्य सदस्यों शिव सुंदर दास, अजय रात्रा और आरपी सिंह के साथ मिलकर मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ एक लंबी बैठक की। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के आगामी न्यूजीलैंड दौरे और बहुप्रतीक्षित टीम के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। न्यूजीलैंड सीरीज पर ध्यान सेलेक्टर्स की इस बैठक का मुख्य ध्यान न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी पांच मैचों की टी20आई और वनडे सीरीज के साथ-साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम को अंतिम रूप देना था। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड दौरे पर जाने वाली इंडिया ए टीम के तीन टेस्ट मैचों के लिए भी खिलाड़ियों के चयन पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सचिन और रोहित से खास कनेक्शन पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद शानदार रहा है। वे सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक 200वें और अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच के हीरो रहे थे जिसमें उन्होंने 10 विकेट झटकर मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता था। इसके अलावा, आईपीएल में वह रोहित शर्मा की कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों के लिए भी खेल चुके हैं। मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब वे भारतीय चयन समिति में इस नई भूमिका को बखूबी संभाल रहे हैं।  

सबालेंका को 34वीं रैंक की बार्तुनकोवा ने हराया, उधर अलकराज ने जापान ओपन में बनाई सेमीफाइनल में जगह

 बीजिंग  विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज एरिना सबालेंका को रविवार को चीन ओपन के तीसरे दौर में चेक गणराज्य की निकोला बार्तुनकोवा ने सीधे सेटों में हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। विश्व रैंकिंग में 34वें स्थान पर काबिज बार्तुनकोवा ने चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन सबालेंका को करीब डेढ़ घंटे में 6-4, 6-3 से मात दी। इसके साथ ही टूर्नामेंट के पहले ही सप्ताह में दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ी बाहर हो गईं। हाल ही में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी बनीं एलेना रिबाकिना शनिवार को ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं और अब सबालेंका के बाहर होने के साथ बीजिंग में जारी डब्ल्यूटीए-1000 प्रतियोगिता से दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ियों की विदाई हो गई है। पि छले महीने यूएस ओपन में रिबाकिना के हाथों खिताब की हैटट्रिक से चूकने वाली सबालेंका ने पहले सेट में पांच ब्रेक पाइंट गंवाए। बीजिंग में उनका संघर्ष जारी रहा। 28 वर्षीय बेलारूसी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में कभी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। अब बार्तुनकोवा का सामना आस्ट्रिया की 24 वर्षीय सिंजा क्राउस से होगा, जिन्होंने इससे पहले दयाना यास्त्रेम्स्का को 6-1, 6-4 से हराया। अलकराज सेमीफाइनल में पहुंचे शीर्ष वरीयता प्राप्त कार्लोस अलकराज ने रविवार को जापान ओपन के सेमीफाइनल में जगह बना ली। चार महीने तक कलाई की चोट के कारण कोर्ट से दूर रहने के बाद उनकी शानदार वापसी जारी है। अलकराज ने अंतिम चार में जगह बनाई, क्योंकि उनके क्वार्टर फाइनल प्रतिद्वंद्वी डेनिस शापोवालोव को कूल्हे की चोट के कारण मुकाबले के दौरान रिटायर होना पड़ा। गत चैंपियन अलकराज 82 मिनट के खेल के बाद 7-6 (4), 2-1 से आगे थे, तभी कनाडाई खिलाड़ी ने मुकाबले से हटने का फैसला किया। अलकराज ने पिछले सप्ताह लेवर कप में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने सिंगल्स मुकाबले में टेलर फ्रिट्ज को हराकर यूरोप को खिताब दिलाने में मदद की थी। शापोवालोव ने पहले सेट में कड़ा मुकाबला किया और 5-4 के स्कोर पर सेट पाइंट भी हासिल किया। अलकराज ने शानदार ड्राप शाट लगाकर इस खतरे को टाला और इसके बाद प्रभावशाली टाईब्रेक जीतकर सेट अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में अलकराज का सामना हमवतन जाउमे मुनार से होगा।

एशियन गेम्स में भारत की शानदार कामयाबी, पीएम मोदी ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली एशियन गेम्स-2026 खत्म हो चुके हैं और भारत ने कुल 85 मेडल्स के साथ अपना सफर खत्म किया। हालांकि, पिछले संस्करण के मुकाबले ये संख्या काफी कम है, लेकिन मेडल टैली में भारत फिर भी चौथे स्थान पर रहने में सफल रहा। इस सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है। भारत ने चीन में खेले गए पिछले एशियन गेम्स में कुल 106 मेडल जीते थे। इस बार भारतीय खिलाड़ी 100 के आस-पास भी नहीं पहुंच सके। भारत के हिस्से कुल 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। भारत ने इस बार कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं जिनमें आर्चरी और मुक्केबाजी सहित हॉकी ने अहम योगदान दिया। पीएम मोदी की बधाई पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए खिलाड़ियों के जुनून, जज्बे की सराहना की है और हर किसी को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "एशियन गेम्स-2026 खत्म हो गए हैं और ऐसे में मैं भारतीय दल के हर सदस्य को प्रतिबद्धता, जुनून और बेहतरीन खेल भावना के साथ इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बधाई देता हूं। सभी मेडल विजेताओं को बधाई जिनकी सफलता ने देश को खुशी के पल दिए। उम्मीद करता हूं कि इन खेलों में मिली सफलता आने वाले सालों में कई और उपलब्धियों को प्रेरित करेगी। उम्मीद करता हूं कि ये उपलब्धियां जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में योगदान देंगी।"   आखिरी दो दिन में हुआ कमाल भारत ने इन खेलों में आखिरी दो दिन में शानदार कमाल किया और 11 गोल्ड मेडल अपने नाम किए जिससे मेडल टैली में उसके स्थान में गजब का इजाफा हुआ। भारत पहले टॉप-10 में नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल जीते और भारत को आगे बढ़ने का मौका दिया। चीन 341 मेडल के साथ पहले स्थान पर रहा जिसमें 169 गोल्ड, 89 सिल्वर और 83 ब्रॉन्ज मेडल हैं। उसके बाद मेजबान जापान है जिसने कुल 269 मेडल जीते हैं। इसमें से जापान के हिस्से 83 गोल्ड, 95 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। साउथ कोरिया कुल 160 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है। इस देश के हिस्से 39 गोल्ड, 43 सिल्वर और 68 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं।

भुवनेश्वर कुमार की कप्तानी में हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस खेलेगा भारत, टीम में क्रुणाल-तेवतिया समेत 7 खिलाड़ी

  नई दिल्ली अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अगुवाई में आईपीएल सितारों से सजी भारतीय टीम 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले आगामी हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में उतरेगी. छह खिलाड़ियों वाले इस तेजतर्रार फॉर्मेट के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विस्फोटक बल्लेबाजी का शानदार मिश्रण तैयार किया है. भारतीय टीम में भुवनेश्वर कुमार के अलावा क्रुणाल पंड्या, शशांक सिंह, राहुल तेवतिया, नीतीश राणा, राहुल त्रिपाठी और टी. नटराजन शामिल हैं. शशांक सिंह को छोड़कर टीम के बाकी सभी खिलाड़ी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं. हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में मैदान पर एक समय सिर्फ छह खिलाड़ी होते हैं, लिहाजा यहां बल्लेबाजों को पारी जमाने का ज्यादा वक्त नहीं मिलता. यही वजह है कि टीम में ऐसे खिलाड़ियों को तरजीह दी गई है, जो कम गेंदों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं. भुवनेश्वर कुमार अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल अनुभव के साथ नई गेंद से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. वहीं क्रुणाल पंड्या बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाले उपयोगी ऑलराउंडर हैं. नीतीश राणा की आक्रामक बल्लेबाजी भारत को शीर्ष क्रम में तेजी देगी, जबकि शशांक सिंह और राहुल तेवतिया फिनिशर की भूमिका में कम गेंदों में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं. राहुल त्रिपाठी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, जबकि बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी. नटराजन टीम के गेंदबाजी आक्रमण में विविधता जोड़ेंगे. क्रिकेट हॉन्गकॉन्ग, चीन के मार्केटिंग एवं कमर्शियल निदेशक अनुराग भटनागर ने भारतीय टीम के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट अधिकारियों के सहयोग से इस टीम को तैयार किया गया है. उन्होंने इसे हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस के इतिहास में भारत की सबसे मजबूत टीमों में से एक बताया और उम्मीद जताई कि इससे टूर्नामेंट की दर्शक संख्या को बड़ा फायदा मिलेगा. भारत पिछले साल भी हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में उतरा था. उसने अपने अभियान की शुरुआत पाकिस्तान के खिलाफ दो रन की DLS जीत से की थी, लेकिन इसके बाद लगातार मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया था. इस बार टीम बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी. पाकिस्तान 2026 संस्करण में डिफेंडिंग चैम्पियन के तौर पर उतरेगा. उसने पिछले साल फाइनल में पदार्पण कर रहे कुवैत को हराकर खिताब जीता था. यह हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में पाकिस्तान का रिकॉर्ड छठा खिताब था. इस साल टूर्नामेंट में आठ प्रमुख क्रिकेटिंग देशों के साथ चार एसोसिएट सदस्य देश हिस्सा लेंगे. तीन दिनों तक चलने वाला यह मुकाबला हॉन्गकॉन्ग के टिन क्वांग रोड रिक्रिएशन ग्राउंड में खेला जाएगा, जहां छोटे फॉर्मेट में चौकों-छक्कों और तेजतर्रार क्रिकेट का रोमांच देखने को मिलेगा.

कुमकुम से लवलीना तक छाईं भारतीय बेटियां, नागोया एशियन गेम्स में 38 पदकों से रचा नया इतिहास

नई दिल्ली नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपने साहस और बेजोड़ खेल से नया इतिहास रच दिया। भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते, जबकि 3 गोल्ड मिक्स-टीम इवेंट्स में आए। 495 खिलाड़ियों के भारतीय दल में 234 महिला एथलीट शामिल थीं, जिन्होंने कुल 85 पदकों में से 38 पदक जीतकर साबित कर दिया कि वे अब पोडियम के सबसे ऊपरी पायदान की असली हकदार हैं। 17 साल की कुमकुम ने ओलंपिक चैंपियन को हराया, प्रणवी उर्स ने गोल्फ में रचा इतिहास इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। दोनों युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं। हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड मेडल, मीराबाई चानू ने खत्म किया 28 साल का सूखा टीम इवेंट्स और वेटलिफ्टिंग में भारतीय महिलाओं की वापसी की तस्वीरें सबसे यादगार रहीं। भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर 44 साल लंबे इंतजार के बाद एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। लवलीना और परवीन हुड्डा का मुक्केबाजी में पंच, वीथ्या रामराज ने तोड़ा पीटी उषा का रिकॉर्ड बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। बीमारियों और संघर्षों को पछाड़कर पोडियम तक पहुंचीं नीरू, अन्सी और सुचिका नागोया की सफलता सिर्फ मेडलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एथलीट्स के निजी संघर्षों की जीत भी दिखी। इन्फ्लूएंजा-बी से उबरकर ट्रैप शूटर नीरू ढांडा ने इंडिविजुअल गोल्ड समेत 3 मेडल जीते। पीसीएस (PCOS) से जूझ रही लॉन्ग जंपर अन्सी सोजन ने 6.53 मीटर छलांग लगाकर सिल्वर जीता, जबकि 36 साल की सुचिका तरियाल ने मिक्स मार्शल आर्ट्स में ब्रॉन्ज जीता। यह साबित करता है कि महिला खेलों में लगातार निवेश देश का नाम रोशन कर सकता है।