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ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है।  देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे।  हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं।  क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश? जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है।  पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।  अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?  

भारत की आत्मा बचाने में आदिवासी-सूचित समुदायों की अहम भूमिका: मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत  ने कहा है कि जिस तरह से दुनिया इस समय डावांडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ एवं सबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है। इसके लिए भारत को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा और आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा. संघ प्रमुख भागवत आज मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला’ में वनवासी इलाकों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के अवसर पर बोल रहे थे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अस्थिर विश्व में सुदृढ़ भारत ही आधार बन सकता है, जिसके लिए आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है. विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा. भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य के आदिवासी विकास मंत्री प्रो. अशोक उइके और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा है और आदिवासी समाज हमें बहुत कुछ देता रहा है। उनकी यही प्रवृति भारत की सनातन संस्कृति की पहचान है और आदिवासियों ने सबका कल्याण करने की इसी प्रवृति को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में शिक्षा का यह प्रसार संवेदना से किया जाने वाला कार्य है। यह दया से नहीं, जी तोड़ मेहनत से संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य तौर पर देश के आम लोगों को जो सुविधाएं मिलती है वो आदिवासी समाज को नहीं मिल पातीं। उन्हें देश के मुख्य प्रवाह में लाए बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अब राजनीति की व्याख्या बदलने की जरूरत है। पावर पालिटिक्स या सत्ता पाना अब राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ अब विकास और सामाजिक सेवा है। नागपुर स्थित ‘स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था’  अब तक विदर्भ में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करने जा रही है। यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन और मुंबई के जाने-माने व्यवसायी अतुल शिरोडकर की अध्यक्षता में काम करती है।

US-चीन टकराव बढ़ा: 5 कंपनियों पर प्रतिबंध, ड्रैगन ने आदेश मानने से किया इनकार

वाशिंगटन ईरानी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव अब और बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद करने वाली चीन की 5 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में डाल दिया है, जिसके तहत उनकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और उनके साथ लेन-देन पर रोक लगाई जाती है. वहीं इस फैसले के जवाब में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने देश की कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का आदेश दिया है. यह कदम खास तौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को बचाने के लिए उठाया गया है, जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है. अमेरिका को जवाब देने चीन का ‘ब्लॉकिंग स्टैच्यूट’ लागू चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने से रोक दिया है. यह पहली बार है जब चीन ने अपने “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” यानी ऐसा कानूनी हथियार इस्तेमाल किया है, जो विदेशी कानूनों के असर को अपने देश में निष्प्रभावी करने के लिए बनाया गया है. इस कदम को सिर्फ कूटनीतिक विरोध से आगे बढ़कर कानूनी जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. इन 5 बड़ी चीनी कंपनियों को मिला संरक्षण चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, जिन कंपनियों को इस आदेश से सुरक्षा दी गई है, उनमें शामिल हैं:     हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड     शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड     शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी लिमिटेड अमेरिका के कदम पर चीन की सख्त प्रतिक्रिया चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 से अमेरिका लगातार अपने कार्यकारी आदेशों के जरिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, यह आरोप लगाते हुए कि वे ईरान के तेल कारोबार में शामिल हैं. प्रवक्ता ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे चीनी कंपनियों और तीसरे देशों के बीच सामान्य व्यापारिक गतिविधियों पर गलत तरीके से रोक लग रही है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संबंधों के बुनियादी नियमों का उल्लंघन बताया.

Inflation Bomb: 21 देशों में महंगाई का खतरा बढ़ा, US-ईरान युद्ध से आर्थिक संकट गहरा

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) में भले ही सीजफायर चल रहा है, लेकिन दुनिया में इसका असर देखने को मिल रहा है. इस जंग से तेल-गैस की कीमतों में लगी आग के  चलते यूरोप में महंगाई का बम फूटा है. यहां के 21 देशों में महंगाई अप्रैल महीने में बढ़ (Inflation Attack) गई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह एनर्जी प्राइस हाइक बना है. ऊर्जा की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिली है. पहले से ही ये युद्ध ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था और इसके सबूत भी सामने आने लगे हैं।  होर्मुज ने बिगड़ा यूरोप का खेल  US-Iran War के चलते दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद होने (Hormuz Strait Closure) के चलते फ्यूल सप्लाई पर गहरा असर हुआ. पाकिस्तान, ब्रिटेन से लेकर श्रीलंका, भारत और साउथ कोरिया तक में इसका असर देखने को मिला. इन देशों में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में तगड़ा इजाफा (LPG Price Hike) देखने को मिला।  वहीं अप्रैल में यूरोप में महंगाई दर (Inflation In Europe) भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ग्रोथ रेट लगातार कमजोर हो रहा है. इस तरह से Inflation Rate Rise न सिर्फ कंज्यूमर्स और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के पॉलिसीमेकर्स दोनों के लिए चिंता की बात है।  महंगाई से सहमे 21 देश 21 देश, जो शेयर्ड यूरो करेंसी का इस्तेमाल करते हैं, वो महंगाई बढ़ने से सहमे हुए हैं. इनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस (France), जर्मनी (Germany), इटली (Italy), नीदरलैंड्स (Netherlands), स्पेन (Spain) जैसे नाम शामिल हैं.  एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई. इसकी बड़ी वजह एनर्जी की कीमतों में 10.9% की तगड़ी बढ़ोतरी रही।  यूरोपियन यूनियन की स्टैटिस्टिकल एजेंसी यूरोस्टैट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत (Crude Price Hike) 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करने से ये खराब हालात बने, जो कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध (US-Israel Vs Iran War) शुरू होने से पहले करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही था।   ग्रोथ रेट ने किया निराश न सिर्फ महंगाई, बल्कि यूरोजन की ग्रोथ रेट ने भी निराश किया है. साल के पहले तीन महीनों में यूरोज़ोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में इकोनॉमिक आउटपुट में 0.1% की मामूली बढ़त में रही. इन आंकड़ों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि वेस्ट एशिया का युद्ध ग्लोबल इकॉनमी (Global Economy) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।  सबसे खराब हालात ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने से बने हैं, जो कि वह समुद्री रास्ता है जिससे पहले दुनिया का लगभग 20% तेल फारस की खाड़ी के जरिए प्रोड्यूसर्स से कस्टमर्स तक जाता था. तेल की कीमतों में उछाल का असर गैस स्टेशनों और जेट फ्यूल की कीमतों पर तुरंत दिखा है।  बढ़ती महंगाई ने चिंता जताई है कि यह धीमी या न के बराबर ग्रोथ के साथ इकॉनमी में शामिल हो सकती है, जो कि पॉलिसीमेकर्स के लिए एक बड़ी उलझन है और इसे स्टैगफ्लेशन कहा जाता है. इससे ECB जैसे सेंट्रल बैंकों के पास कुछ ही अच्छे ऑप्शन बचते हैं. महंगाई को कंट्रोल करने का सबसे आम तरीका यह है कि सेंट्रल बैंक अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा (Policy Rate Hike) दे, लेकिन इससे चीजें खरीदने के लिए क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो सकती है। 

रिजल्ट डे पर हाई अलर्ट: कंट्रोल रूम से निगरानी, अमित शाह करेंगे हर मिनट मॉनिटरिंग

कोलकाता बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद अब मतगणना में भी भाजपा एक इंच जमीन छोडऩे को तैयार नहीं है। 2021 की गलतियों से सीख लेते हुए भाजपा ने मतगणना को लेकर इस बार व्यापक तैयारियां की है। चार मई को होने वाली मतगणना के दिन राज्य की जिम्मेदारी संभाल रहे पार्टी के सभी केंद्रीय नेता व पर्यवेक्षक कोलकाता में ही मौजूद रहेंगे और साल्टलेक स्थित पार्टी कार्यालय के कंट्रोल रूम से हर पल की जानकारी सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाई जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य की सभी 294 सीटों पर मतगणना की प्रगति, किस सीट पर पार्टी के उम्मीदवार आगे हैं और कुल कितनी सीटों पर बढ़त मिल रही है- इन सभी अपडेट्स को मिनट-टू-मिनट दिल्ली भेजा जाएगा। इस दौरान बंगाल भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल व मंगल पांडेय और केंद्रीय मंत्री एवं बंगाल के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव साल्टलेक कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम में मौजूद रहेंगे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। मतगणना से पहले पार्टी स्तर पर कई चरणों में बैठकें की गई हैं। बीते तीन दिनों में सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव ने मालदा, सिलीगुड़ी और कोलकाता में अलग-अलग बैठकें कर जिला अध्यक्षों, उम्मीदवारों और बूथ स्तर के जिम्मेदार नेताओं को मतगणना को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए हैं। इन बैठकों में राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य भी मौजूद रहे। प्रवासी नेताओं और सभी गणना एजेंटों के साथ भाजपा ने बैठक की इसी क्रम में पार्टी के बंगाल चुनाव प्रभारियों ने शनिवार को कोलकाता में एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिस में वे प्रवासी नेता शामिल हुए जो अन्य राज्यों से आकर पिछले कई माह से बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों में चुनाव को लेकर रणनीति और कार्यों को गति दे रहे थे। साथ ही पार्टी के सभी गणना एजेंटों के साथ भी बैठक की गई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मतगणना केंद्रों के भीतर एजेंटों को सतर्क रहना होगा और काउंटिंग प्रक्रिया पूरी होने तक निगरानी जारी रखनी होगी। पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए पार्टी ने गणना एजेंटों को अंतिम वोट की गिनती तक मतगणना केंद्र नहीं छोडऩे का साफ निर्देश दिया है। यह पहली बार है जब भाजपा ने मतगणना को लेकर इस स्तर पर तैयारी की है। दरअसल, 2021 में रुझान विपरीत दिखने पर भाजपा के कई एजेंट मतगणना केंद्र छोड़कर बीच में ही चले गए थे, जिससे पार्टी को जमीनी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में इस बार अंत तक मोर्चे पर डटे रहने पर भाजपा का मुख्य जोर है। ममता भी सतर्क, पार्टी के सभी गणना एजेंटों के साथ की वर्चुअल बैठक दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके सांसद भतीजे व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी शनिवार शाम में पार्टी के राज्यभर के सभी गणना एजेंटों के साथ वर्चुअल माध्यम से महत्वपूर्ण बैठक की। सूत्रों के अनुसार, ममता ने गणना एजेंटों को उनके कर्तव्यों के बारे में बताया ताकि चार मई को मतगणना प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की न हो। ममता ने भी अपने गणना एजेंटों को अंतिम समय तक मतगणना केंद्र नहीं छोडऩे का स्पष्ट निर्देश दिया।  

फारूक अबदुल्ला ने कहा: कश्मीरी पंडितों की अनुपस्थिति से जम्मू-कश्मीर को हुआ भारी नुकसान

श्रीनगर  नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने घाटी के पुराने स्वरूप को बहाल करने पर जोर देते हुए कश्मीरी पंडितों की वापसी की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर सभी समुदायों का है और पंडितों के बिना यह अधूरा है। शनिवार को प्रख्यात कश्मीरी पंडित डॉ. सुशील राजदान की पुस्तक विमोचन के अवसर पर बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों का पलायन इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा नुकसान था। उन्होंने कहा, "मैं अल्लाह से दुआ करता हूं कि जो लोग यहां से चले गए, वे अपने घरों को वापस लौटें और एक बार फिर खुशहाली से रहें। हमने बहुत कुछ खो दिया है। कश्मीर हिंदू, मुस्लिम और सिख, सभी का है। यही इस जगह की असली पहचान है।" अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि एक दिन कश्मीर फिर से अपने पुराने गौरव और आपसी भाईचारे के साथ बहाल होगा। गौरतलब है कि 1990 में आतंकवाद की शुरुआत के कारण लगभग 57,000 परिवारों को घाटी छोड़कर जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में शरण लेनी पड़ी थी। इनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित थे। इसी बीच, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने केंद्र शासित प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सीधे तौर पर नशीली दवाओं के व्यापार को आतंकवाद से जोड़ा और इसे युवाओं के लिए एक गंभीर खतरा बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत अभियान' को आगे बढ़ाते हुए एलजी सिन्हा ने 11 अप्रैल से एक विशेष "3-P" रणनीति शुरू की है। इनमें ड्रग सप्लाई चेन और नारको-टेरर नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना, जमीनी स्तर पर शिक्षा के माध्यम से हर व्यक्ति तक पहुंचना और नशे के शिकार हो चुके युवाओं का इलाज और पुनर्वास करना शामिल है। उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नशे की चुनौती के पीछे एक गहरी और रणनीतिक साजिश है, जिसका उद्देश्य युवाओं को बर्बाद करना और आतंकवाद को बढ़ावा देना है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि अब यह अभियान केवल सरकारी नीति न रहकर एक जन आंदोलन बन गया है। प्रशासन का लक्ष्य न केवल नशे की लत से जूझ रहे लोगों को मुख्यधारा में लाना है, बल्कि सीमाओं पर उस सप्लाई चेन को भी तोड़ना है जो आतंकवाद के लिए धन जुटाने का जरिया बनती है। प्रशासन, पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय के कारण इस अभियान में शुरुआती सफलताएं भी देखने को मिली हैं।

आंधी, बारिश और ओलों का कहर: कई राज्यों में मौसम ने लिया अचानक यू-टर्न

देहरादून/चंडीगढ़/लखनऊ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है। रविवार सुबह से ही इन क्षेत्रों में तेज आंधी और झमाझम बारिश का दौर जारी है। कई जगहों पर दिन में ही अंधेरा छा गया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उत्तराखंड में आज सुबह से मौसम खराब है। राजधानी देहरादून में अचानक अंधरा छा गया और झमाझम बारिश शुरू हो गई और जमकर ओलावृष्टि हुई। वहीं, आस पास के इलाकों में भी बारिश से तापमन में गिरावट आई है। प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने दून समेत कई जिलों में चार और पांच मई के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश और बिजली चमकने की संभावना है। इसके अलावा 4000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का भी अनुमान है जबकि प्रदेश के सभी जिलों में कहीं-कहीं बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब में बदला मौसम का मिजाज पंजाब में रविवार की छुट्टी का आगाज सामान्य उजाले के साथ नहीं, बल्कि काले घने बादलों के पहरे के साथ हुई। आसमान में उमड़े बादलों ने ऐसा डेरा डाला कि सुबह के वक्त ही रात जैसा नजारा बन गया। सड़कों पर गाड़ियों को हेडलाइट्स जलाकर चलना पड़ा। 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलीं हवाएंमौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने लगीं। बादलों की कड़कड़ाहट और बिजली की चमक के बीच शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया। हरियाणा में अचानक मौसम बदला पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हरियाणा के उत्तरी जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली है। रविवार सुबह अंबाला और यमुनानगर में आए कुदरत के इस बदलाव ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज आंधी और धूल के गुबार के कारण सुबह के समय ही सड़कों पर अंधेरा छा गया, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंबाला में 40 किमी की रफ्तार से चली हवाएं अंबाला में सुबह लगभग पौने आठ बजे अचानक मौसम बदल गया। करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने शहर में अफरा-तफरी मचा दी। आंधी इतनी जोरदार थी कि कई घरों की छतों पर रखा सामान उड़ता हुआ दिखाई दिया। आंधी के कुछ ही देर बाद गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यमुनानगर में धूल के गुबार से दिन में हुआ 'रात' का अहसास यमुनानगर में सुबह 8:15 बजे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। तेज आंधी के कारण चारों तरफ धूल का गुबार छा गया, जिससे दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। आसमान में काले बादलों के जमावड़े के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया और लोगों को घरों व वाहनों की लाइटें जलानी पड़ीं। यहां भी तेज आंधी के बाद झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जो खबर लिखे जाने तक जारी था। यूपी के रायबरेली में पड़े ओले यूपी में मौसम एक बार फिर से पलट गया है। मौसम विभाग के अनुसार चार मई से प्रदेश के कई जिलों में बरसात होनी थी लेकिन दो मई की रात से ही अवध के कई जिलों में अच्छी बरसात हुई। सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, अमेठी, रायबरेली सहित कई जिलों में रविवार की सुबह हल्की बरसात हुई। इसके पहले शनिवार की शाम को भी इन इलाकों में हल्की बारिश की खबरें थीं। वहीं, रायबरेली शहर के कई हिस्सों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई।

चलती फ्लाइट में इमरजेंसी गेट खुला, यात्री कूदा बाहर

 चेन्नई रविवार तड़के चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त भारी दहशत फैल गई, जब एक यात्री ने चलती फ्लाइट का आपातकालीन दरवाजा अचानक खोल दिया और बाहर छलांग लगा दी। शारजाह से चेन्नई पहुंची एअर अरेबिया की इस फ्लाइट में 231 यात्री सवार थे। इस दुस्साहसिक और खतरनाक हरकत के कारण विमान में बैठे बाकी यात्रियों की जान हलक में आ गई। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल टल गया। यह खौफनाक घटना तब घटी जब विमान लैंडिंग के बाद मुख्य रनवे से हटकर टैक्सीवे (रनवे और टर्मिनल को जोड़ने वाला रास्ता) पर धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। तभी अचानक 34 साल के एक पुरुष यात्री ने इमरजेंसी गेट खोला और चलती फ्लाइट से नीचे कूद गया। इस अचानक हुई घटना से विमान में अफरातफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर विमान को रोका और ग्राउंड सुरक्षा टीम को फौरन अलर्ट कर दिया। यात्री ने चलती फ्लाइट से छलांग क्यों लगाई?     शुरुआती जांच में पता चला है कि यात्रा के दौरान इस यात्री की तबीयत काफी खराब हो गई थी।     हवाई अड्डे के अधिकारियों के मुताबिक, यात्री ने फ्लाइट के अंदर घबराहट और उल्टी आने की शिकायत की थी।     बताया जा रहा है कि इमरजेंसी गेट से कूदने से ठीक पहले उसने विमान के अंदर दो बार उल्टी भी की थी।     माना जा रहा है कि इसी भारी बेचैनी और खराब तबीयत के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत क्या कार्रवाई की? पायलट की सूचना मिलते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान तुरंत उस जगह पहुंच गए जहां विमान रुका था। हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ बम निरोधक दस्ता भी तुरंत विमान के पास पहुंच गया था। सुरक्षाकर्मियों ने बिना देरी किए उस यात्री को पकड़ लिया और उसे फौरन अपनी हिरासत में ले लिया। पायलट ने इस पूरी घटना को लेकर एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसके बाद यात्री को आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है। एयरपोर्ट के कामकाज पर क्या असर पड़ा? इस हाई वोल्टेज ड्रामा के कारण चेन्नई एयरपोर्ट का सामान्य कामकाज कुछ समय के लिए बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह 03:23 बजे से 04:23 बजे तक मुख्य रनवे को पूरी तरह से बंद रखा। इस एक घंटे के दौरान आने वाली अन्य सभी उड़ानों (फ्लाइट्स) को एयरपोर्ट के दूसरे (सेकेंडरी) रनवे की तरफ मोड़ दिया गया। चेन्नई एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि इस घटना में विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और बाकी सभी यात्री सुरक्षित हैं। गिरफ्तार किया गया यात्री कौन? भले ही अभी तक यात्री की पूरी पहचान आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि वह तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले का रहने वाला है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब विमानन सुरक्षा नियमों (एविएशन सेफ्टी प्रोटोकॉल) के उल्लंघन के इस बेहद गंभीर मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारी उस यात्री से लगातार पूछताछ कर रहे हैं और घटना की असली वजह जानने की कोशिश में जुटे हैं। इसके साथ ही, डॉक्टरों की एक टीम उस यात्री की मानसिक स्थिति (मेंटल कंडीशन) की भी जांच कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि उसने ऐसा खतरनाक कदम क्यों उठाया।

नीदरलैंड की राजकुमारियों के खिलाफ फिर हत्या की साजिश, ‘नाजी’ कनेक्शन से यूरोप दहला

एम्सटर्डम नीदरलैंड की राजकुमारी के खिलाफ एक बार फिर हत्या की साजिश रची जा पही थी. 22 साल की राजकुमारी कैथरीना अमालिया और 20 साल की राजकुमारी एलेक्सिया पर हमले की तैयारी थी. पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस को शक है कि आरोपी नाजी विचारधारा से प्रेरित है।  हालांकि, अभी तक इस साजिश के पीछे के असली मकसद का पता नहीं चल पाया है. द हेग लोक अभियोजक कार्यालय के मुताबिक, आरोपी को  अदालत में पेश किया जाएगा।  संदिग्ध को फरवरी में द हेग से गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से दो कुल्हाड़ियां बरामद हुई हैं, जिन पर 'एलेक्सिया', 'मोसाद' और नाजी काल का नारा 'सीग हेल' खुदा हुआ था।  इसके अलावा, पुलिस को संदिग्ध के पास से एक हाथ से लिखा हुआ नोट भी मिला है. इस नोट पर दोनों राजकुमारियों के नाम के साथ 'ब्लडबाथ' शब्द लिखा था।  पहले भी राजकुमारी अमालिया के खिलाफ रची गई साजिश भविष्य की डच रानी, राजकुमारी अमालिया पहले भी कई बार खतरों का सामना कर चुकी हैं. ड्रग गिरोहों पर उनके और पूर्व प्रधानमंत्री मार्क रुट के अपहरण की साजिश रचने का आरोप लग चुका है. सुरक्षा कारणों से उन्हें 2022 में एम्स्टर्डम में अपना हॉस्टल भी छोड़ना पड़ा था. इसके बाद उन्हें द हेग के महल में रहना पड़ा।  आम जिंदगी चाहती हैं राजकुमारी अमालिया अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अमालिया ने 2024 में गुपचुप तरीके से स्पेन के मैड्रिड में समय बिताया था. राजकुमारी अमालिया ने सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात की है. उन्होंने कहा, 'मुझे आम जिंदगी, एक स्टूडेंट की जिंदगी की याद आती है. सड़कों पर टहलना और दुकान पर जाना।  उनकी मां, रानी मैक्सिमा ने भी कहा है कि इन खतरों का उनकी बेटी की जिंदगी पर बहुत गहरा असर पड़ा है और वो अपनी मर्जी से बाहर नहीं निकल सकतीं। 

दोस्ती की फिर बहार: बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए वीजा सेवाएं बहाल कीं

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय में तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ा। राजनीतिक बदलाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण वीजा सेवाएं भी प्रभावित हुई थी। हालांकि बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी सुधार देखने को मिल रहे है। इसी कड़ी में एक और बड़ा कदम उठाते हुए दोनों देशों के बीच वीजा सेवाओं को फिर से पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए सभी श्रेणी के वीजा शुरू किए बांग्लादेश ने भारतीय नागरिकों के लिए सभी श्रेणियों में वीजा जारी करना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने हाल ही में भारत दौरे के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। वर्तमान में नई दिल्ली, कोलकाता, अगरतला, मुंबई और चेन्नई स्थित बांग्लादेश के सभी वीजा केंद्र पूरी तरह कार्यरत हैं। बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने बताया कि दिसंबर में सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी थीं, लेकिन फरवरी में उन्हें फिर से शुरू कर दिया गया। अब ढाका चाहता है कि भारत भी जल्द इसी तरह की पूर्ण बहाली कर दे।   भारत भी वीजा सेवा सामान्य करने की योजना बना रहा भारत की ओर से वीजा सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करने की योजना बनाई जा रही है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने फरवरी में ढाका का दौरा किया था, जहां वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। यह दौरा प्रधानमंत्री तारिके रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए हुआ था। नई सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को फिर से संतुलित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इससे पहले अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के दौर में संबंधों में खटास आई थी, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद। व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं को मिलेग बढ़ावा वीजा सेवाओं के सामान्य होने से व्यापार, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में भारतीय वीजा सेवाएं बांग्लादेशी नागरिकों के लिए केवल 15 से 20 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं, जिसमें मेडिकल और पारिवारिक वीजा को प्राथमिकता दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। 2023 में जहां 21.2 लाख लोग भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 4.7 लाख रह गई। पश्चिम बंगाल प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। हाल ही में भारत ने ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति भी की, जिससे दोनों देशों के सहयोग को नई मजबूती मिली है।