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ड्रोन विवाद के बाद बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए ताबड़तोड़ हमले

तेहरान  ईरान के अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराने के बाद यूएस ने ईरान में रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटर पर बड़ा हमला किया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार, ईरान के अर्द्धसैन्य बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने एक बयान में बताया कि अमेरिकी बलों ने एक द्वीप पर दूरसंचार टावर को निशाना बनाया। इससे पहले कुवैत ने बताया था कि ईरान की ओर से हमला किया गया है। अमेरिका ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए उसने गुरुक और ईरान के केश्म आइलैंड पर बमबारी की है। होर्मुज वाले द्वीप पर भी हमला बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक रूप से युद्धविराम है। हालांकि कई बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका और ईरान दोनों की तरफ से युद्धविराम का उल्लंघन किया गया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका होर्मुज के सिरिक आइलैंड पर हमला करन के लिए कुवैत के एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था। इसीलिए इस एयरबेस को टारगेट किया गया है। ईरान ने फिर खोल दिए मिसाइल अड्डे एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपेयरिंग का काम पूरा होने के बाद ईरान ने एक बार फिर अपने मिसाइल अड्डे खोल दिए हैं। सुरंगों में बनाए गए इन अड्डों को सुरक्षित बनाने के लिए एंट्री को सील कर दिया गया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सैटलाइट इमेजरी से पता चला है कि जिन 69 ठिकानों पर अमेरिका ने हमला किया था उनमें से करीब 50 को फिर से खोला जा चुका है और मेंटिनेंस का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने बुलडोजर और ट्रक का इस्तेमाल करके सारा मलबा साफ कर दिया है और सड़कों को भी दुरुस्त कर दिया गया है। इसके बाद अब ईरान एक बार फिर लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक करने की स्थिति में है। बताया गया कि लगभग सात हफ्ते पहले हुए सीजफायर के बाद ही ईरान ने अपने मिसाइल ठिकानों को रिकवर करने का मिशन शुरू कर दिया था। कहां अटकी है समझौते की बात सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संशोधित मसौदा कई बार मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की अगुवाई में मध्यस्थता की जा रही है। हालांकि अमेरिकी संशोधनों को "महत्वपूर्ण" बताया गया है, लेकिन उनके विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और ईरान ने भी अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फारस की खाड़ी में तनाव के बावजूद ईरान ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में 28 वाणिज्यिक जहाज, जिनमें तेल टैंकर और मालवाहक पोत शामिल हैं, उसकी अनुमति से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। वहीं दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र के कुछ प्लेटफॉर्मों पर उत्पादन आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान दबाव में है। खबरों के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत में मजदूरों और पेंशनभोगियों ने वेतन, पेंशन और बढ़ती महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया।

1 साल बाद फिर पटरी पर लौटेंगी ट्रेनें, दिल्ली से जम्मू-कश्मीर का सफर होगा आसान

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर जाने वाले यात्रियों की परेशानी अब दूर होगी। पिछले वर्ष भारी वर्षा और बाढ़ के कारण रावी नदी का पानी बहुत बढ़ गया था। तेज बहाव की वजह से कठुआ और माधोपुर के बीच पुल का एक पिलर क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण सुरक्षा के कारणों से ट्रेनों के परिचालन को रोक दिया गया था। कई ट्रेनें पिछले एक साल से निरस्त थीं। इससे जम्मू कश्मीर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब क्षतिग्रस्त पुल को ठीक कर दिया गया है। निरस्त ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी गई है। स्पेशल ट्रेनों के संचालन में होगी आसानी 30 मई को उत्तर रेलवे के रेलवे संरक्षा आयुक्त दिनेश चंद देशवाल ने पुल का निरीक्षण और गति परीक्षण करने के बाद ट्रेन संचालन को मंजूरी दे दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पुल पठानकोट-जम्मू-श्रीनगर रेल मार्ग का अहम हिस्सा है। इसके खुलने से जम्मू-कश्मीर आने-जाने वाले यात्रियों और मालगाड़ियों को सीधा लाभ होगा। कटड़ा और जम्मू जाने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलेगी। इस पुल की बहाली से ट्रेनों का संचालन समय पर होगा, साथ ही अमरनाथ यात्रा व ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विशेष ट्रेनों के संचालन में आसानी होगी। इन निरस्त ट्रेनों का शुरू हो रहा परिचालन     काठगोदाम-जम्मूतवी गरीबरथ (12207/12208)     गाजीपुर सिटी-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (14611/14612)     भावनगर-एमसीटीएम ऊधमपुर जन्मभूमि एक्सप्रेस(19107/19108)     तिरुपति-जम्मूतवी हमसफर एक्सप्रेस (22705/22706)     दुर्ग-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12549/12550)     साबरमती -श्री माता वैष्णों देवी कटड़ा एक्सप्रेस (19415/19416)     दुर्ग-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20847/20848)     कोटा- एमसीटीएम ऊधमपुर एक्सप्रेस (20985/20986) 15 जून से शुरू होगा इन ट्रेनों का संचालन     दिल्ली सराय रोहिल्ला-जम्मूतवी दुरंतो एक्सप्रेस (12265)     कालका-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस (14503/14504)     दिल्ली सराय रोहिल्ला -एमसीटीएम ऊधमपुर एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22401/22402)     सुबेदरागंज-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22431/22432)  

जेईई एडवांस 2026 के टॉपर बने शुभम कुमार, गर्ल्स कैटेगरी में आरोही देशपांडे ने मारी बाजी

नई दिल्ली  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की (IIT Roorkee) द्वारा आज यानी 1 जून को जेईई एडवांस रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। परिणाम की घोषणा ऑनलाइन माध्यम से ऑफिशियल वेबसाइट jeeadv.ac.in पर की गई है। परीक्षा में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स साइट पर जाकर या सीधे इस पेज पर दिए डायरेक्ट लिंक से स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। शुभम कुमार ने हासिल की AIR-1 जेईई एडवांस एग्जाम 2026 में आईआईटी दिल्ली जोन के शुभम कुमार ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करके टॉप किया है। उन्होंने 360 में से 330 अंक (CRL 1) हासिल कर यह मुकाम हासिल किया है। गर्ल्स में आरोही देशपांडे ने हासिल किया शीर्ष स्थान जेईई एडवांस एग्जाम में कुल 56880 स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है जिसमें से लड़कियों की संख्या 10107 है। इन सभी गर्ल्स में दिल्ली जोन से परीक्षा देने वाली आरोही देशपांडे ने देश में टॉप किया है। उन्होंने 360 में से 280 अंक (CRL 77) प्राप्त करके यह मुकाम हासिल किया। आपको बता दें कि जेईई एडवांस एग्जाम से पहले आरोही ने जेईई मेन में भी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 99 हासिल की थी। आपको बता दें कि इस बार जेईई एडवांस के लिए कुल 187389 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसमें से 179694 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी थी जिसमें से 56880 स्टूडेंट्स ने एग्जाम क्वालीफाई किया है। इसमें से मेल स्टूडेंट्स की संख्या 46773 वहीं फीमेल स्टूडेंट्स की संख्या 10107 है। स्कोरकार्ड एवं फाइनल आंसर की यहां से करें डाउनलोड आपको बता दें कि जेईई एडवांस एवं फाइनल आंसर की ऑफिशियल वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जारी हुआ है। आप सीधे साइट पर जाकर या नीचे दिए जा रहे डायरेक्ट लिंक से स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और साथ ही फाइनल उत्तर कुंजी भी प्राप्त कर सकते हैं। साथ पढ़कर, साथ खेलकर दो यार बने ऑल इंड‍िया टॉपर कोटा से आई यह खबर इस साल की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायी कहानी है. जब देश की सबसे कठिन परीक्षा का नतीजा आता है, तो अक्सर हमें सिर्फ नंबर्स और कट-ऑफ की बातें सुनाई देती हैं. लेकिन इस बार कोटा की वादियों से जो कहानी निकली है, वह सिर्फ कामयाबी की नहीं बल्कि एक सच्ची दोस्ती, अनुशासन और जिद की दास्तान है।  आईआईटी रुड़की ने जब देर रात 1 बजे जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम घोषित किया, तो कोटा में एक नया इतिहास रचा जा चुका था. यहाँ साथ रहने वाले, साथ पढ़ने वाले और शाम को साथ खेलकर तनाव दूर करने वाले दो दोस्तों ने देश की टॉप-2 रैंक पर अपना नाम लिख दिया।  बिहार के गया के रहने वाले शुभम कुमार ने 360 में से 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल की. वहीं उनके सबसे पक्के दोस्त, गुरुग्राम के कबीर छिल्लर महज 1 नंबर से पीछे रह गए और 329 अंकों के साथ AIR-2 बने. इस त्रिकोणीय मुकाबले में तीसरा स्थान यानी AIR-3 सीकर के जतिन चाहर को मिला, जिन्होंने 319 अंक हासिल किए. इन तीनों ने ही कोटा में रहकर पढ़ाई की।  हॉस्टल की दोस्ती से देश की टॉप रैंक तक का सफर शुभम और कबीर की यह जुगलबंदी कोटा के एक ही हॉस्टल में परवान चढ़ी. शुभम चौथी मंजिल पर रहते थे और कबीर सातवीं मंजिल पर. दिनभर की थका देने वाली पढ़ाई के बाद दोनों का एक ही नियम था, शाम को बैडमिंटन कोर्ट पर उतरना और खेल के जरिए अपने दिमाग को बिल्कुल फ्रेश करना. आज उनकी इसी संतुलित लाइफस्टाइल और कड़े अनुशासन ने उन्हें देश के सबसे ऊंचे शिखर पर लाकर खड़ा कर दिया है. अब इन दोनों यारों का अगला सपना भी साझा है यानी आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना।  इस महापरीक्षा में बेटियों ने भी अपना परचम लहराया है. दिल्ली जोन की आरोही देशपांडे महिला अभ्यर्थियों में सबसे आगे रहीं. उन्होंने 280 अंक हासिल कर कॉमन रैंक लिस्ट में 77वीं रैंक अपने नाम की।  शुभम की 'क्वालिटी स्टडी' का जादुई मंत्र शुभम कुमार पिछले दो सालों से कोटा में तपस्या कर रहे थे. इससे पहले जेईई मेन 2026 में भी उन्होंने 300 में से 295 अंक लाकर AIR-6 पाई थी. शुभम का मानना है कि सफलता इस बात से नहीं मिलती कि आप कितने घंटे कुर्सी पर बैठे हैं, बल्कि इस बात से मिलती है कि आपकी पढ़ाई कितनी फोकस्ड है।  शुभम ने कभी 16-16 घंटे की मैराथन पढ़ाई नहीं की, बल्कि रोज सिर्फ 6 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ा. उन्होंने अपना एक बॉडी क्लॉक सेट कर लिया था, रोज रात 10:30 बजे सो जाना और सुबह 6:30 बजे बिना किसी अलार्म के खुद-ब-खुद उठ जाना. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने खुद को सुख-सुविधाओं से दूर रखा. वह एसी के आदी नहीं बने ताकि परीक्षा के दिन चाहे जैसा भी माहौल हो, उनका ध्यान न भटके।  खाने में भारी नाश्ते की जगह अंकुरित मूंग और फल, सोशल मीडिया और फिल्मों से मुकम्मल दूरी, और खुद को हमेशा सकारात्मक रखना ही उनकी रणनीति थी. शुभम के भीतर आत्मविश्वास इस कदर था कि वह अपनी रफ कॉपी पर पहले से ही 'JEE Advanced Topper' लिख दिया करते थे ताकि खुद को याद दिला सकें कि लक्ष्य क्या है. शुभम के पिता शिवकुमार एक व्यवसायी हैं और मां कंचन देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा अपने बेटे के इस सधे हुए सफर का साथ दिया।  दोस्त की जीत पर कबीर का बड़ा दिल कबीर छिल्लर, जिन्होंने जेईई मेन 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की थी, इस बार एडवांस्ड में दूसरे स्थान पर रहे. लेकिन उनके चेहरे पर इस बात का कोई मलाल नहीं था, बल्कि अपने दोस्त की जीत की एक अलग ही चमक थी।  कबीर कहते हैं, शुभम ने दो साल तक बहुत कड़ा संघर्ष किया है, वह इस कामयाबी का हकदार है. अगर कोई दूसरा मुझसे आगे निकलता तो शायद थोड़ा दुख होता, लेकिन मेरे दोस्त ने टॉप किया है, इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकती।  गुरुग्राम के रहने वाले कबीर के रगों में भी इंजीनियरिंग और अनुशासन है. उनके पिता अमोल छिल्लर खुद आईआईटी खड़गपुर से पढ़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और मां प्रियंका एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं. कबीर ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई उसी स्कूल से की जहां उनकी मां पढ़ाती थीं. … Read more

F-15 दुर्घटना पर बड़ा खुलासा: चीन-ईरान सैन्य सहयोग पर उठे सवाल

 नई दिल्ली  ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में पिछले महीने दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस लड़ाकू विमान को चीन निर्मित शोल्डर-फायर्ड मिसाइल (MANPADS) से निशाना बनाया गया हो सकता है। NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने ईरान को संघर्ष के दौरान अतिरिक्त सैन्य सहायता भी दी हो सकती है। इसमें स्टेल्थ एयरक्राफ्ट तकनीक और लंबी दूरी की रडार प्रणालियां शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन प्रणालियों की मदद से ईरान को F-15E स्ट्राइक ईगल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को ट्रैक करने में मदद मिली होगी। ट्रंप ने भी कहा था- मिसाइल से गिरा जेट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उस समय कहा था कि विमान को एक शोल्डर-लॉन्च्ड मिसाइल से मार गिराया गया। MANPADS छोटे पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम होते हैं, जिन्हें कंधे पर रखकर दागा जा सकता है और इनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। 36 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन विमान गिरने के बाद दोनों क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए 36 घंटे तक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दोनों ने हादसे से पहले इजेक्ट कर अपनी जान बचा ली थी। पेंटागन के मुताबिक, पायलट को करीब 7 घंटे में सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दूसरे अधिकारी वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर को बचाने में लगभग दो दिन लग गए। वह ईरान के ज़ाग्रोस पर्वतीय इलाके में छिपा रहा, जिसके बाद उसे सुरक्षित निकाला गया अमेरिका कर रहा जांच अमेरिकी अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं कि अप्रैल में यह लड़ाकू विमान आखिर कैसे गिराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह पुष्टि होती है कि अमेरिकी जेट दुश्मन की गोलीबारी से गिराया गया, तो यह दशकों में पहली ऐसी घटना होगी। चीन-ईरान संबंधों पर बढ़ेगी चिंता रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चीन ने ईरान को यह सैन्य उपकरण कब उपलब्ध कराए। लेकिन यदि ईरान वास्तव में चीनी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, तो इससे अमेरिका-चीन संबंधों में और तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका पहले ही चीन पर ईरान को चीनी सैटेलाइट सेवाओं तक पहुंच देने का आरोप लगा चुका है। वॉशिंगटन का कहना है कि इससे ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इसी आरोप के बाद अमेरिका ने तीन चीनी सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए थे। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है। ट्रंप बोले- शी जिनपिंग ने दिया भरोसा इसी महीने डोनल्ड ट्रंप ने Fox News से बातचीत में कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा। ट्रंप ने कहा, "राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि चीन ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहा। यह एक खूबसूरत वादा है और मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूं।"  

बाल यौन शोषण पर सख्त रुख: सहमति का तर्क खारिज, दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश

 नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि व्यावसायिक यौन शोषण के लिए किसी नाबालिग की तस्करी की जाती है, तो दोषियों पर कठोर 'पोक्सो एक्ट' के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने एनजीओ 'प्रज्वला' की याचिका पर यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बाल यौन शोषण का हर मामला कानूनन गैर-सहमति वाला ही माना जाएगा। सहमति का तर्क पूरी तरह खारिज कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मानव तस्करी के मामलों में पीड़ित बच्ची की 'सहमति' का कोई अर्थ नहीं रह जाता, चाहे अपराधी ने डराने, धमकाने या बहलाने-फुसलाने जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया हो या नहीं। कोर्ट का पूरा ध्यान अपराधियों की करतूतों और उनकी नीयत पर होना चाहिए। यदि पीड़ित को यह पता भी हो कि उसे वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है, तब भी वह पीड़ित ही रहेगी, क्योंकि काम के हालातों को लेकर उसे धोखे में रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाता है और यह अधिकार सरकार के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी लागू होता है पुनर्वास ही असल सशक्तिकरण सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों को किसी एक कानून के चश्मे से न देखें, बल्कि भारतीय न्याय संहिता और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के साथ पोक्सो एक्ट का भी समग्रता से इस्तेमाल करें। पोक्सो लागू होने से पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करने और मेडिकल जांच की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील व सुरक्षित हो जाती है। कोर्ट ने पीड़ितों को सिर्फ 'बचाव का पात्र' मानने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके पुनर्वास पर जोर दिया, क्योंकि बिना पुनर्वास के वे दोबारा उसी दलदल में गिरने को मजबूर हो जाते हैं।

2033 से शामिल होंगी नई सबमरीन, हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की समुद्री ताकत

नई दिल्ली  भारत ने पनडुब्बी क्षमता में अपने पड़ोसी देशों को मात देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना ने जर्मनी के साथ एक डील को लेकर अच्छी खबर दी है। भारतीय नौसेना के मुताबिक भारत और जर्मर्नी के बीच 6 नए कन्वेंशनल सबमरीन के निर्माण के लिए अब कुछ ही महीनों में कॉन्ट्रैक्ट की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान टेक्नोलॉजी का भी ट्रांसफर किया जाएगा। इस डील के फाइनल होने से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। पूर्व नौसेना प्रमुख के मुताबिक भारत के मजगांव डॉक और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के बीच अनुबंध को पूरा होने में बस कुछ और महीने ही लगेंगे। पहली पनडुब्बी के 2033 में शामिल होने की उम्मीद है, जिसके बाद 2038 तक हर साल एक पनडुब्बी शामिल की जाएगी। इस मामले पर अब पूर्व नौसेना प्रमुख रहे एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बयान दिया है। उन्होंने इस डील की पूरी कहानी बताई है। सबसे पहले इस पनडुब्बी की खासियत इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी AIP तकनीक है, जिसके कारण इन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार पानी की सतह पर नहीं आना पड़ेगा। ये पनडुब्बी 2 से 3 सप्ताह तक लगातार पानी के भीतर छिपी रह सकती हैं। इन्हें आधुनिक टॉरपीडो और भारी मारक क्षमता वाली मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस-एनजी) से लैस किया जाएगा। ये खामोश और अत्याधुनिक पनडुब्बियां हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की समुद्री चुनौतियों का मुकाबला करने में भारतीय नौसेना को एक बड़ी रणनीतिक बढ़त देंगी। होर्मुज जैसे संकट के लिए तैयार रहना जरूरी: नौसेना प्रमुख पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू देते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संरक्षा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। नौसेना की तात्कालिक प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापक अरब सागर में उपस्थिति, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा प्रदान करके सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना रही है। इन समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने की हमारी दीर्घकालिक योजना किसी एक निश्चित समाधान पर निर्भर रहने के बजाय समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, परिचालन क्षमता और साझेदारी को मजबूत करना है। हम महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्गों पर निरंतर उपस्थिति बनाए रखते हैं, जैसे कि 2008 से समुद्री डाकुओं से बचाव के लिए अदन की खाड़ी में एक जहाज की निरंतर तैनाती। हमारे सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) ने परिचालन प्रतिक्रियाओं के समन्वय के लिए सहयोगी देशों के साथ संबंध स्थापित किए हैं। नौसेना प्रमुख बोले- हमारा लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा करना पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना के प्रयास किसी विशिष्ट राष्ट्र को लक्षित नहीं करते, न ही हम अपने उद्देश्यों को केवल क्षेत्र पर "वर्चस्व" स्थापित करने तक सीमित रखते हैं। हमारा सर्वोपरि लक्ष्य भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक स्थिर, स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देना है। हम कई रणनीतिक कदमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं – पहला, हम अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं और 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर हैं। दूसरा, हमने मिशन-आधारित तैनाती और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के माध्यम से निरंतर परिचालन पहुंच बनाए रखी है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और हिंद महासागर क्षेत्र में अपने जहाजों और विमानों की लगभग निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित की है; और अंत में, भारत ने महासागर की परिकल्पना के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को काफी मजबूत किया है।

भीषण गर्मी का असर, कई बांध सूखे के कगार पर; दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर

 नई दिल्ली  भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के सामने एक नई और गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, मई महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर बेहद तेजी से नीचे आया है। महज 22 दिनों के भीतर इनमें पानी का स्टॉक 12% तक कम हो गया है, जिसके बाद अब कुल क्षमता का केवल 25% पानी ही शेष बचा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के आखिरी हफ्ते तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर पर सिमट गया है। मई महीने में आई भारी गिरावट मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो इनकी कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा अर्थ यह है कि कड़कती धूप और पानी की भारी मांग के कारण एक महीने के भीतर ही मुख्य जल स्रोतों से लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई है, जिसने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन जिस रफ्तार से बांध खाली हो रहे हैं, वे आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती हैं। संकटग्रस्त बांधों की बढ़ती संख्या मई की शुरुआत में जब गर्मी का असर कम था, तब देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ा, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। अत्यधिक गर्मी के कारण महीने के अंत तक कई जलाशय खाली हो चुके हैं, जिससे गंभीर संकट का सामना कर रहे बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। सतारा का कोयना बांध भी इस समय गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। पानी की किल्लत की सबसे भयावह और डरावनी तस्वीर दक्षिण भारतीय राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर मात्र 17.55% रह गया है। इसके कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गई है। देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे बड़े जलाशय मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया। बिजली उत्पादन पर संकट पानी की इस भारी कमी का सीधा असर देश के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 में मई की शुरुआत में ही पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे चला गया था, और अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57% से घटकर 26.60% और पश्चिमी भारत में 42.36% से कम होकर 28.53% पर आ गया है, जबकि साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में पानी का भारी अकाल साफ देखा जा सकता है। इस भीषण संकट के बीच अब सभी की निगाहें केवल आने वाले मानसून पर टिकी हैं।

ईरान की Maham-3 नेवल माइन पर विवाद, होर्मुज में अमेरिकी तलाशी अभियान तेज

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है. इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है. वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स… जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा. माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है. हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

महाराष्ट्र में बड़ा अपडेट: e-KYC सख्ती के बाद घटकर 1.66 करोड़ हुई लाभार्थियों की संख्या

महाराष्ट्र महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना आगे भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल e-KYC की समयसीमा को आगे बढ़ाने या नए लाभार्थियों को जोड़ने की कोई योजना नहीं है। सरकार द्वारा चलाए गए एक सत्यापन अभियान के बाद लाभार्थियों की सूची में 80 लाख नाम काट दिए गए हैं। योजना के शुरुआती दौर में लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, जो अब घटकर 1.66 करोड़ रह गई है। दस्तावेजों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए चलाई गई e-KYC मुहिम 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जिन महिलाओं की e-KYC अधूरी रह गई थी, उनकी अपीलों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार के पास e-KYC की समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाभार्थियों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके अलावा वर्तमान में नए लाभार्थियों को जोड़ने का भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।" क्यों कटे 80 लाख महिलाओं के नाम? आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं। तय समयसीमा तक e-KYC पूरा न करना या रिकॉर्ड अपडेट न कर पाना, दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना, योजना की तय पात्रता और आय मानदंडों को पूरा न कर पाना और व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी होना। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नवंबर 2025 से दस्तावेज अपडेट करने की समयसीमा को कई बार बढ़ाया था और 30 अप्रैल को अंतिम तारीख घोषित किया गया था। महिलाओं में नाराजगी सूची से नाम हटाए जाने के कारण प्रभावित महिलाओं को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पुणे जिले की रहने वाली माया वाघमारे ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, "मैंने अपने दस्तावेज जमा किए थे और मुझे आश्वासन दिया गया था कि सिस्टम अपडेट हो जाएगा। लेकिन मेरा नाम ही हटा दिया गया। वह मासिक सहायता मेरे घर के खर्चों के लिए बहुत जरूरी थी।" एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई महिलाओं को लग रहा था कि सरकार पहले की तरह इस बार भी तारीख आगे बढ़ा देगी। इस लापरवाही के कारण अब उनकी मासिक किस्तें अचानक रुक गई हैं। विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई यह स्पष्टीकरण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के उन आश्वासनों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस योजना को बंद कर दिया जाएगा। शिंदे ने हाल ही में दोहराया कि सरकार महिलाओं और किसानों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और इस पहल के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। साल 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई 'लाड़की बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। महायुति सरकार की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ आता है।

दक्षिणी लेबनान में तनाव चरम पर, इजरायली सेना ने रणनीतिक पहाड़ी पर किया कब्जा

लेबनान इजरायली सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में रणनीतिक रूप से अहम पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है जिसके शीर्ष पर ब्यूफोर्ट किला स्थित है। इस फोर्ट पर लगभग 44 साल बाद इजरायली झंडा लहराया है। यह 26 वर्ष से अधिक समय में लेबनान में इजराइली सेना का सबसे भीतर किया गया कब्जा है। इजराइली सेना ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। बताया गया कि इजइराली सेना ने नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर आसपास के गांवों में कई दिन तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद कब्जा किया। इजराइली सैनिकों ने इन गांवों के दुर्गम इलाके में हिजबुल्ला सदस्यों से लड़ाई लड़ी किले पर कब्जा करना मार्च की शुरुआत में इजराइल-हिजबुल्ला के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब 1948 में इजराइल के गठन के बाद से युद्ध की स्थिति में रहे दोनों देश वाशिंगटन में सीधी वार्ता कर रहे हैं। इजरायल की यह कार्रवाई 17 अप्रैल से लागू नाममात्र के संघर्षविराम के बावजूद हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अगले दौर की वार्ता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में होनी है। इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अवीचाय अद्राई ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की जिसमें इजराइली सैनिक किले के बाहर चलते दिख रहे हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा कि सैनिकों ने किले पर इजरायल का ध्वज फहरा दिया है। इससे पहले 1982 में इजराइली सैनिकों ने इस किले पर कब्जा किया था और 2000 में लेबनान से वापसी तक इस पर उनका कब्जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने कुछ दिन पहले ब्यूफोर्ट रिज और उससे आगे दक्षिण में सुलुकी घाटी में अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला के ढांचे को नष्ट करना और 'इजराइली नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष खतरों' को दूर करना था। बयान में कहा गया कि सेना जरूरत पड़ने पर अपने 'अभियान का विस्तार करने' के लिए तैयार है। हाल के दिनों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियानों का दायरा बढ़ा दिया है। इसने वास्तविक सीमा रेखा की तरह काम करने वाली लितानी नदी के पार सैनिक भेजे हैं और दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से से निवासियों को हटने को कहा है।