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मानसून की विदाई से पहले मौसम का पलटवार, UP-दिल्ली समेत 13 राज्यों में तेज बारिश और तूफान की चेतावनी

 नई दिल्ली मानसून के जाते-जाते मौसम विभाग ने एक बार फिर से मुश्किल बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को यूपी, दिल्ली समेत 13 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों के कुछ इलाकों में लैंडस्लाइड की चेतावनी दी गई है। वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। किसानों और मछुआरों को अलर्ट रहने की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा इस तेज आंधी के चलते कुछ इलाकों में बड़े-बड़े वृक्ष धाराशायी हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों में किसानों के फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस बीच बंगाल की खाड़ी से चलने वाली तूफानी हवाएं पूर्वी भारत के राज्यों में लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। वहीं, राजस्थान के लोगों के लिए आज विशेष अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेस मौजूद है। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे पूर्वी राजस्थान के ऊपर ऊपरी हवाओं में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं देश के अन्य राज्यों में आज  यानी 21 सितंबर को मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं… देश के 13 राज्यों में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को देश के 13 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक की तेज आंधी चलने का अलर्ट है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों की यात्रा से पहले मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो परेशानी में फंस सकते हैं। दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा दिल्ली(21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को दिल्ली में हल्की बारिश और मध्यम गति की हवा की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस जाएगा। यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा यूपी(21 सितंबर-हल्की बारिश का अलर्ट): गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, मथुरा, मोरादाबाद, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, जौनपुर, सोनभद्र, कुशीनगर, महाराजगंज, प्रयागराज और सुल्तानपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा बिहार (21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, गया, जहानाबाद, भोजपुर, पटना, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, भागलपुर, किशनगंज, मुंगेर और खगड़िया में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। वहीं, पटना में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा। झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा झारखंड (21-22 सितंबर-तेज बारिश-आंधी का अलर्ट): रांची, रामगढ़, खूंटी, बोकारो, चतरा, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, दुमका, पलामू, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह और गुमला में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा उत्तराखंड (21 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। देहरादून में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा। हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा हिमाचल (21 सितंबर-बारिश-तूफान का अलर्ट): किन्नौर, मंडी, ऊना, चंबा, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कांगड़ा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, मनाली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा जम्मू-कश्मीर (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पुंछ, बारामूला, किश्तवाड़, रियासी, गांदरबल, उधमपुर, रामबन, शोपियां, बांदीपोरा और जम्मू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमा 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा पश्चिम बंगाल(21-22 सितंबर-बारिश-आंधी की संभावना): हावड़ा, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, अलीपुर द्वार, दार्जिलिंग, कूचबिहार, दुर्गापुर, बीरभूम और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, कोलकाता में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंचेगा और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा पंजाब (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): फिरोजपुर, संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, चंडीगढ़, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, गुरदासपुर, बठिंडा, बरनाला और फरीदकोट में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा राजस्थान (21 सितंबर-भारी बारिश की संभावना): जयपुर, उदयपुर, चुरू, बारां, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, दौसा, चुरू, भरतपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर और अलवर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे … Read more

कलात में पाकिस्तानी सेना का ऑपरेशन, चेक पोस्ट बनाकर 23 लोगों को बंधक बनाने का दावा

क्वेटा बलूचिस्तान में लगातार हालात बिगड़ रहे हैं। स्थानीय लड़ाकों से संघर्ष कर रही पाकिस्तानी सेना ने एक अभियान के दौरान 5 उग्रवादियों को मार गिराया है। पाकिस्तान सेना के मुताबिक, यह उग्रवादी करीब 23 लोगों को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने फुर्ती दिखाते हुए इनकी चाल को नाकाम कर दिया। पाकिस्तान सेना ने एक बयान में कहा कि आतंकवादियों ने फिरौती के लिए अपहरण, जबरन वसूली और गाड़ियां छीनने के मकसद से एक चेक पोस्ट बनाया था। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक यह घटना 18 सितंबर को रात में उस वक्त हुई जब उग्रवादियों ने कलात के पास चमन-कराची एन-25 राजमार्ग पर लोगों की शांतिपूर्ण आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की। इसके बाद सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में करीब 5 उग्रवादी मारे गए। इसके साथ ही उनके द्वारा अगवा किए गए 23 लोगों को भी छुड़ा लिया गया। बलूचिस्तान से 23 लोगों को रिहा कराया गया- पाकिस्तान सेना पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा, ''सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई की और जबरदस्त गोलीबारी के बाद सशस्त्र बलों की प्रभावी जवाबी कार्रवाई में पांच उग्रवादी मारे गए।'' उग्रवादियों के ठिकाने से छह ट्रक, तीन बस और दो कार सहित भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए गए। आतंक विरोधी अभियान लगातार जारी- पाकिस्तान सेना आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में बचे हुए किसी भी उग्रवादी को खत्म करने और स्थानीय आबादी तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी है। बता दें, पाकिस्तान आतंकवाद-विरोधी अभियान चला रहा है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा समेत कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना पूरी तरह से घिरी हुई है। लगातार होते संघर्ष के बीच बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सेना के जवान भी मारे जा रहे हैं। बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे लड़ाके लगातार पाकिस्तानी सेना के लिए चुनौतियां बढ़ा रहे हैं, जिसके कारण पाकिस्तानी सेना ने ने आतंकवाद-विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस अभियान के बीच पाकिस्तानी सेना लगातार वहां के आम नागरिकों के ऊपर भी अत्याचार करती हुई नजर आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आजादी के बाद से लेकर अभी तक पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान क्षेत्र में लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट से बढ़ा तनाव, दक्षिण कोरिया ने बुलाई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक

प्योंगयांग उत्तर कोरिया ने रविवार को कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्व में समुद्र की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी. जापान के रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया ने एक अननोन प्रोजेक्टाइल दागा. जापान की सरकारी मीडिया एजेंसी NHK के मुताबिक, यह जापान के स्पेशल इकोनॉमिक जोन के बाहर जाकर गिरा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इससे एक दिन पहले उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. यह बयान सरकारी मीडिया पर पढ़कर सुनाया गया. पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने अमेरिका की अगुवाई में हुए नौसैनिक अभ्यास की भी निंदा की थी. इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया और जापान शामिल थे और यह 29 अगस्त से 10 सितंबर तक गुआम के पास चला था. उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य अभ्यासों को कोरियाई प्रायद्वीप में लगातार बिगड़ते तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा था कि देश अपने परमाणु हथियारों को मजबूत करने की दिशा में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा. सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई उत्तर कोरिया के मिसाइल लॉन्च की खबरों के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठक बुलाई. रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने वॉनसान इलाके से पूर्वी सागर की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं. दक्षिण कोरिया ने इस लॉन्च की निंदा की. यह करीब एक सप्ताह में उत्तर कोरिया का दूसरा मिसाइल परीक्षण था. इससे पहले 12 सितंबर को भी परीक्षण किया गया था. NSC ने प्योंगयांग से तुरंत मिसाइल गतिविधियां रोकने की अपील की और कहा कि यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन है.

भारत-चीन रिश्तों में क्यों आई खटास? पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार ने तिब्बत और दलाई लामा को बताया अहम मुद्दा

नई दिल्ली  एक दौर था जब 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे दिए जाते थे। आज के समय में परिस्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। दोनों ही देशों के संबंध काफी खराब हो चुके हैं। आखिर ऐसी क्या वजह रही जिसके कारण दोनों देशों के रिश्ते ऐसे हो गए कि सात वर्षों के बाद चीन के राष्ट्रपति अपने पड़ोसी देश की यात्रा पर आए। ऐसा कहा जाता है कि दोनों देशों के संबंधों में खटास की शुरुआत दलाई लामा की वजह से होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दलाई लामा (Dalai Lama) ने दुनिभर के मंचों से तिब्बत की आवाज बुलंद की है। यह बात चीन को रास नहीं आती है। यूट्यूबर शुभांकर मिश्रा के साथ एक पॉडकास्ट के दौरान भारत के पूर्व डिप्लोमैट रिटायर आईएफएस ऑफिसर अशोक सज्जनहार ने इस मुद्दे को विस्तार से समझाया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या तिब्बत के कारण से भारत और चीन के संबंध बिगड़े हैं तो उन्होंने विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने कहा, भारत-चीन के रिश्ते पहले ऐसे नहीं थे। तिब्बत कभी भी चीन का हिस्सा नहीं था। 1954 में एक समझौते के तहत चीन ने इसे हथिया लिया। आज भी वह अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से को तिब्बत का बताकर उसपर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करता है। इसके पीछे के कारणों के समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब चीन की आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाती है, तब-तब वह अपनी विस्तारवाद की नीति को बढ़ावा देता है। आज के समय में चीन की जीडीपी भारत की तुलना में पांच गुना अधिक है। असुरक्षित महसूस करता है चीन अशोक सज्जनहार कहते हैं कि- दोनों देशों के बीच तिब्बत एक मसला है। भारत ने दलाई लामा को पनाह दी हुई है। चीन दलाई लामा को अलगाववादी नेता मानता है। चीन का मानना है कि दलाई लामा तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं। जबकि दलाई लामा ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। दलाई लामा बस चाहते हैं कि उनकी सभ्यता, संस्कृति और भाषा को संरक्षित किया जाए जो कि ऐसा हो नहीं हो रहा है। चीन तिब्बत की पहचान को ही खत्म करना चाहता है चीन। दलाई लामा इसका विरोध कर रहे हैं। चीन खुद को लेकर बहुत असुरक्षित महसूस करता है। इसलिए वह विस्तारवाद की नीति अपनाए हुए है। जिनपिंग और मोदी में क्या हुई बात? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि यह समय की मांग थी और तीनों ही देशों को इसकी जरूरत थी। जब उनसे पूछा गया कि जब बड़े कार्यक्रमों में दुनिया के दिग्गज नेताओं की मुलाकात होती है तो कैसा माहौल होता है। उन्होंने समझाते हुए कहा- जब कार्यक्रम की शुरुआत होती है तो होस्ट ओपनिग स्टेटमेंट देता है। इसके बाद आगंतुकों को बुलाया जाता है। मुद्दों पर निर्भर करता है कि आखिर माहौल कैसा होता है। सामान्य रूप से तो दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर आपसी सहमति बन जाती है। अगर उनसे कुछ मुद्दों का समाधान नहीं हो पाता है तो दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष उसपर बात करते हैं और समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। उसमें सियासी पहलुओं पर भी ध्यान देना पड़ता है उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर ट्रंप जैसे नेताओं के साथ बैठक होती हैं तो उस दौरान कुछ भी हो सकता है। सामान्यत: बैठक काफी शांति माहौल में होती है। मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाती है। डिनर में क्यों नहीं आए जिनपिंग? शी जिनपिंग की यात्रा पर उन्होंने कहा कि डिनर में नहीं आना सामान्य बात है। वह थके हुए थे। वह उसी दिन आए और सीधे ही भारत मंडपम गए। उन्हें आराम का मौका नहीं मिला। दिनभर मीटिंग चलती रही। मैसेजिंग देने की बात होती तो चीन की तरफ से कुछ न कुछ कहा जाता। अगर ऐसा होता तो वह भारत की यात्रा पर ही नहीं आते।

ट्रंप की अचानक वापसी से मचा हड़कंप, पश्चिम एशिया में अमेरिकी नागरिकों के लिए नया सुरक्षा अलर्ट

 वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपना वीकेंड ट्रिप एक दिन पहले ही बीच में ही रद कर दिया और शनिवार शाम को अचानक वॉशिंगटन डीसी लौट आए। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक वीडियो में उन्हें मरीन वन से उतरते हुए देखा गया। हालांकि, उनके अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, क्योंकि उनका कैंप डेविड में रविवार तक रुकने का कार्यक्रम था। समझिए क्यों मचा है हड़कंप? बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप की यह वापसी ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को पश्चिम एशिया को लेकर एक नया सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। विभाग ने वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और संभावित यात्रा बाधाओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। सऊदी अरब पर मिसाइल हमला दूसरी तरफ शनिवार को ही सऊदी अरब ने इस बात की पुष्टि की कि यमन के हूती विद्रोही गुट ने उसकी राजधानी रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाने की कोशिश की थी। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी राजधानी रियाद और यानबू में स्थित तेल कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए कई मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के साथ चल रहे संघर्ष के बीच रियाद को निशाना बनाने की यह हालिया घटना है। यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी इसके अलावा विदेश विभाग की चेतावनी में कहा गया है कि यह सैन्य संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा पर जाने से बचना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से वहां हैं, उन्हें एयरपोर्ट और उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।  

पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश की बढ़ी चिंता, फरक्का जल संधि पर भारत की नई रणनीति से हलचल

नई दिल्ली पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश को भी जल का मुद्दा भारी पड़ सकता है। इस साल के आखिर में पूरी हो रही फरक्का जल संधि को भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा सकता है। इससे पड़ोसी को दिक्कत हो सकती हैं। दरअसल, भारत की नीति पड़ोसी देशों के साथ समन्वय की रही है, लेकिन कई देशों की राजनीति ने अक्सर भारत के लिए दिक्कतें खड़ी की हैं। इनमें बांग्लादेश भी शामिल है, जिसने कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति पैदा की है। तड़प रहा है पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था। इसके बाद से पाक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुहार लगा रहा है। वहीं, अब बांग्लादेश का भारत के प्रति रुख रक्षात्मकहै। इसकी वजह फरक्का जल संधि है। गंगा पर भारत, बांग्लादेश के बीच यह संधि बेहद खास है। संधि पर 12 दिसंबर, 1996 को हस्ताक्षर हुए थे, जो एक जनवरी से 31 मई के दौरान फरक्का बैराज से गंगाजल का वितरण तय करती है। यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। अब भारत पर निर्भर है कि वह इसे कैसे आगे बढ़ाएगा, क्योंकि बिहार में इस संधि का विरोध हो रहा है। बिहार बाढ़ और सूखा दोनों झेल रहा बिहार सरकार और भाजपा की सहयोगी जेडीयू का तर्क है कि फरक्का बैराज की वजह से गंगा में गाद जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है। इससे मानसून में बिहार में बाढ़ का खतरा रहता है। गर्मियों में जलस्तर घटने से जल की कमी का सामना करना पड़ता है। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि संधि खत्म होने के बाद बिहार सहित गंगा बेसिन के राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल की जरूरतों का आकलन कर नई व्यवस्था बनाई जाए। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा उठा था। तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि सरकार बिहार की जरूरतों-चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सही फैसला लेगी। जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कई वर्षों से गाद प्रबंधन, फरक्का बराज, गंगा की अविरलता और बिहार के जल अधिकारों का मुद्दा उठाते रहे हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से हाल में राज्यसभा में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के विरोध में दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार गंगा में गाद के जमाव को बिहार में बाढ़ की गंभीर समस्या के प्रमुख कारणों में एक मानते रहे हैं। गाद के कारण नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह की गहराई घटती है, जिससे अधिक पानी आने पर नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि श्री कुमार ने अगस्त 2016 में भी स्पष्ट किया था कि गाद प्रबंधन की समस्या का समाधान किए बिना नमामि गंगे जैसी योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।

पर्यावरण संरक्षण पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान, बोले संरक्षण के बिना प्रगति मृगतृष्णा है

नई दिल्ली पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का जिक्र करते हुए CJI सूर्यकांत ने शनिवार को शीर्ष अदालत को पर्यावरण न्याय का ‘बरगद का पेड़’ बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( NGT ) की ओर से आयोजित ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए CJI ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और न्यायपालिका की भूमिका पर विस्तार से बात की। CJI सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए संविधान में प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन संविधान के शब्द केवल बीज की तरह हैं। इन्हें अंकुरित होने और जीवन पाने के लिए न्यायिक समझ के पोषण की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी भूमिका को निभाया है। उनके मुताबिक, शीर्ष अदालत पर्यावरण न्याय के ‘बरगद के पेड़’ की तरह मजबूती से खड़ी रही है, जिसकी जड़ें भारत के सभ्यतागत मूल्यों में गहरी हैं और जिसकी शाखाएं आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करती हैं। ‘संरक्षण के बिना प्रगति मृगतृष्णा’ CJI ने कहा कि दशकों से सुप्रीम कोर्ट इस विचार का समर्थन करता रहा है कि संरक्षण के बिना प्रगति एक ऐसी मृगतृष्णा है, जो पारिस्थितिक विनाश के रेगिस्तान में गायब हो जाती है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसलों में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रकृति की रक्षा करना केवल परोपकार का कार्य नहीं, बल्कि आत्म-संरक्षण है। यह जीवन की निरंतरता में किया जाने वाला निवेश है। अनुच्छेद 21 के तहत प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के सक्रिय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 में सीधे शामिल करके इसे मौलिक अधिकार बनाया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े न्यायिक दृष्टिकोण का यही क्रम आज तक आगे बढ़ा है और हाल में सुप्रीम कोर्ट ने ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ की अवधारणा को स्पष्ट किया है। विकास की अनुमति, लेकिन शर्तों और जवाबदेही के साथ CJI ने कहा कि ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ का अर्थ यह है कि पर्यावरण संरक्षण मजबूत होना चाहिए, लेकिन इतना विवेकपूर्ण भी होना चाहिए कि वह दुनिया के मौजूदा स्वरूप के साथ तालमेल बैठा सके। उन्होंने कहा कि इस अवधारणा के तहत विकास की अनुमति देने का व्यावहारिक तरीका यह है कि उसके साथ लागू करने योग्य शर्तें, विशेषज्ञों की निगरानी, बहाली, क्षतिपूरक वनीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। जलवायु परिवर्तन से मौलिक अधिकार भी प्रभावित CJI सूर्यकांत ने कहा कि हालिया भारतीय जलवायु न्यायशास्त्र ने इस मुद्दे को संवैधानिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायशास्त्र यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही यह उन आवश्यक परिस्थितियों को भी प्रभावित कर सकता है, जो इन अधिकारों का सार्थक रूप से आनंद लेने के लिए जरूरी हैं।  

रियाद पर हूती मिसाइल हमले के बाद ट्रंप की अचानक वापसी, ईरान ने रखीं 7 शर्तें

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना वीकेंड दौरा बीच में ही छोड़कर शनिवार को अचानक व्हाइट हाउस लौट आए हैं। ट्रंप का मैरीलैंड स्थित राष्ट्रपति आवास 'कैंप डेविड' से तय समय से एक दिन पहले वॉशिंगटन लौटना इस बात का साफ संकेत है कि क्षेत्र में तनाव बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। व्हाइट हाउस प्रशासन की ओर से ट्रंप के अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी उस आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी के तुरंत बाद आया है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा टालने और स्थिति के "अनियंत्रित रूप से बिगड़ने" की सख्त चेतावनी दी गई है। रियाद पर हूती मिसाइल हमला और US का 'ट्रैवल रेड अलर्ट' तनाव में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल है। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मिसाइल को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि हूतियों का दावा है कि उन्होंने रियाद के संवेदनशील ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस हमले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने दूतावासों के जरिए चेतावनी जारी करते हुए कहा, "यह सैन्य संघर्ष बेहद तेजी से उग्र रूप ले सकता है। क्षेत्र के भीतर या वहां से होकर यात्रा करने वाले सभी अमेरिकी नागरिक अपनी योजनाओं पर तुरंत पुनर्विचार करें।" ईरान की ट्रंप को 7 शर्तें: "पैसा छोड़ो, नौसेना नाकाबंदी हटाओ" इस भीषण तनाव के बीच ईरान ने युद्ध विराम और बातचीत की मेज पर लौटने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात शर्तें रख दी हैं। ईरान के शीर्ष सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने अल जजीरा से बातचीत में खुलासा किया कि कतर के माध्यम से ये शर्तें अमेरिका को सौंप दी गई हैं और तेहरान अब राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। रजाई ने सार्वजनिक रूप से तीन मुख्य शर्तों का खुलासा किया: सभी मोर्चों पर युद्ध की तुरंत समाप्ति: क्षेत्र में जारी तमाम सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण विराम। फ्रीज फंड की रिहाई: अलग-अलग इंटरनेश बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को तुरंत बहाल करना। अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी का अंत: लाल सागर और फारस की खाड़ी में ईरान व उसके सहयोगियों के खिलाफ जारी अमेरिकी नेवल ब्लॉकैड को खत्म करना। निर्णायक जंग के लिए तैयार: तेहरान की दोटूक चेतावनी ईरानी सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन ने इन शर्तों को खारिज कर दिया, तो ईरान 'निर्णायक युद्ध' के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों से ईरान डरने वाला नहीं है। कतर की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक कोशिश के बीच अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाते हैं।

मॉस्को में ड्रोन अटैक से हड़कंप, ऑयल रिफाइनरी को नुकसान; रूस ने यूक्रेन पर लगाया आरोप

मॉस्को रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है. यूक्रेन ने मॉस्को पर एक हजार से अधिक ड्रोन दागे. मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है. हमले के बाद यहां आग लग गई. दूर से आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई दिया. धमाकों की आवाज भी सुनाई दी. मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने रविवार को टेलीग्राम पर बताया कि ड्रोन ने मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने भी मेयर के हवाले से रिफाइनरी में नुकसान की जानकारी दी है. इस हमले में दो लोगों की मौत की भी खबर है. वहीं न्यूज एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जगह की पुष्टि की है. इन वीडियो में दूर एक जगह आग जलती दिख रही है. आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि बीती रात मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेन की लंबी दूरी की कार्रवाई का रूस पर काफी असर हुआ. उन्होंने दावा किया कि रूस के एक अहम तेल उद्योग ठिकाने और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया. जेलेंस्की के मुताबिक, इन ठिकानों से रूस की युद्ध मशीन को अरबों डॉलर की मदद मिलती है. कार्रवाई में FP-1, RZ-100, MICH-2000, Palianytsia, Vendetta, Liutyi, Bars, Flamingo, Sichen और Pelican जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा, मानव रहित सिस्टम बल, विशेष अभियान बल, रक्षा खुफिया और विदेश खुफिया सेवा के जवानों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि रूस के वोरोनिश क्षेत्र में एक ठिकाने पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. जेलेंस्की ने मॉस्को से युद्ध खत्म कर शांति का रास्ता चुनने को कहा. उन्होंने कहा कि तनाव कम करने के रास्ते ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग का आज आखिरी दिन है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया है. रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए वोटिंग तीन दिनों से चल रही है. रविवार को इसका तीसरा और आखिरी दिन है. सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी के चुनाव में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. दरअसल, यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. क्रेमलिन इस चुनाव के नतीजों को अपनी नीतियों और यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन के तौर पर पेश कर सकता है. यूक्रेन पर ड्रोन हमले का आरोप मॉस्को में हुए ड्रोन हमले का आरोप रूस ने यूक्रेन पर लगाया है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी है. रूस पहले भी यूक्रेन पर ड्रोन हमलों के आरोप लगाता रहा है. इस बीच एक्स पर पोस्ट पर यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इन हमलों की पुष्टि कर दी है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को भी यूक्रेन पर चुनाव में दखल देने की कोशिश का आरोप लगाया था. उन्होंने रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया इलाके में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हमले का जिक्र किया था. रूस के मुताबिक इस हमले में चुनाव अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई. यूक्रेन ने रूस के चुनाव को पहले ही खारिज किया है. कीव ने इसे एक दिखावटी इलेक्शन बताया है. वहीं यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण वहां चुनाव स्थगित हैं. रूस के चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मॉस्को में ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम पर साइबर हमले की भी जानकारी दी थी. चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन मतदान व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश हुई. इस बीच रूस में चुनाव को लेकर सुरक्षा भी कड़ी रखी गई है. रूसी सरकार का कहना है कि पश्चिम के साथ मौजूदा टकराव के दौरान राष्ट्रीय एकता जरूरी है. रूसी सरकार यूक्रेन में चल रही सैन्य कार्रवाई को पश्चिम के साथ बड़े संघर्ष का हिस्सा बताती रही है. युद्ध की थकान का भी दिख सकता है असर रूस में चुनाव का नतीजा काफी हद तक तय माना जा रहा है. यूनाइटेड रशिया के सत्ता में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और आर्थिक दबाव की वजह से लोगों में थकान का असर कुछ विपक्षी दलों को मिल सकता है. बर्लिन स्थित नेस्ट थिंक टैंक ने कहा है कि चुनाव के दौरान कुछ ऐसे नतीजे भी सामने आ सकते हैं, जो क्रेमलिन के लिए असहज स्थिति पैदा करें. खासकर ऐसे समय में जब रूस आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है. इस चुनाव में ज्यादातर युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को मैदान में उतरने की इजाजत नहीं मिली. वहीं कुछ उदारवादी उम्मीदवारों ने युद्ध को लेकर अपनी चिंता जताई है. रूस में सेना को बदनाम करने या अधिकारियों के मुताबिक फर्जी खबर फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है. ऐसे माहौल में मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी पर हुआ ड्रोन हमला चुनाव के आखिरी दिन की बड़ी घटना बन गया है. फिलहाल हमले में नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है. साथ ही इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं हुई है. इस हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट, ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा हुई लागत; 2030 तक दौड़ेगी B35 ट्रेन

नई दिल्ली  भारत 2030 तक 350 किमी/घंटा (B35) की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी हाई-स्पीड या बुलेट ट्रेन बनाएगा। ये ट्रेनें जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की ट्रेनों जैसी होंगी, जिनका प्रोडक्शन भी उसी साल शुरू होना है। यह प्रस्ताव मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी देने के लिए था। रेलवे मंत्रालय के कैबिनेट ने प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी दे दी है और ये लागत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह 2015 में तैयार किए गए शुरुआती अनुमान से लगभग दोगुना है। बढ़ी हुई लागत में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च बजट से पूरा किया जाएगा। ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कैबिनेट को बताया है कि उसने B35 ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब जापान ने दिसंबर 2024 में बताया कि मौजूदा E5 सीरीज की ट्रेनों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। इसमें बताया गया है कि जापान ने संकेत दिया है कि E10 ट्रेनों का प्रोडक्शन 2030 में शुरू होगा और वे 2034 तक ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि E10 ट्रेनों के उपलब्ध होने पर उन्हें चलाने पर विचार किया जाएगा। भारत खुद डेवलप करेगा अपना सिस्टम मंत्रालय ने कहा है कि देश में बनी B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी गई है और भारत अपना खुद का भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) भी विकसित करेगा। यह कदम चीन के अपने CTCS सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसा ही है, जो पारंपरिक और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर स्पीड, ट्रेनों के बीच की दूरी और सुरक्षा को मैनेज करता है। लागत में बढ़ोतरी की वजह क्या है? मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट की लागत में पहले के 1.1 लाख करोड़ रुपये से जो भारी बढ़ोतरी हुई है, उसकी मुख्य वजहें-     जमीन अधिग्रहण की लागत का तीन गुना से ज्यादा बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना।     इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में लगभग 50% की बढ़ोतरी के साथ यह 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाना।     2015 के अनुमान की तुलना में ट्रेनों और सिग्नलिंग सिस्टम पर होने वाले खर्च में लगभग 100% की बढ़ोतरी। शुरुआत में चलेंगी बी28 ट्रेनें भविष्य में आने वाली जापानी ट्रेनों को छोड़कर, प्रोजेक्ट की मौजूदा लागत लगभग 399 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है। शुरुआत में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर B28 ट्रेनें चलेंगी जिनकी डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि उनकी ज्यादा से ज्यादा ऑपरेटिंग स्पीड 249 kmph होगी। BEML को 32 B28 ट्रेनें बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। उम्मीद है कि 2027 की पहली तिमाही तक ट्रायल रन के लिए दो प्रोटोटाइप ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। BEML ने शुक्रवार को BSE को बताया कि उसे 15 और B28 ट्रेनें बनाने के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग कॉन्ट्रैक्ट मिला है। पूरे 508 किमी. लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।