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आधे दाम में तैयार हुआ ‘S-400’, IAF ने थोक में ऑर्डर दिया, रूस चौंका

बेंगलुरु  रूस का एस-400 दुनिया का एक सबसे बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम है. रूस के साथ चीन और भारत भी इस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने इसकी झांकी दिखाई थी. इसके बाद कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था. उसने सीज फायर की गुहार लगाई थी. एस-400 ने पाकिस्तान की सीमा से करीब 300 किमी भीतर जाकर उसके एक बड़े अवॉक्स सिस्टम को तबाह कर दिया था. खैर हम इस जंग की बात नहीं कर रहे है. हमारा आज का फोकस एस-400 है. भारत ने रूस से इस डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन खरीदे है. इसमें से तीन की डिलिवरी हो गई है. चौथे की डिलिवरी लेने एयरफोर्स की टीम रूस जा चुकी है. वहीं पांचवें स्क्वाड्रन की डिलिवरी भी इसी साल होने की उम्मीद है. भारत इसके अलावा एस-400 के ही पांच और स्क्वाड्रन खरीदे की योजना पर काम रहा है।  इस बीच भारत अपना देसी एस-400 बना रहा है. इसका नाम प्रोजेक्ट कुश है. इस डिफेंस सिस्टम को डीआरडीओ विकसित कर रहा है. यह कई मामलों में एस-400 से बेहतर सिस्टम है. इसको पूरी तरह भारतीय एयरफोर्स की जरूरत के हिसाब से डेवलप किया गया है. एयरफोर्स ने पहली बार में ही इस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन के ऑर्डर दे दिए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस सिस्टम की लागत एस-400 की तुलना में आधी से भी कम है. ऐसे में रूस के चेहरे पर हैरानी साफ नजर आ रही है. रूस के हथियार कारोबार के लिए एस-400 एक सबसे प्रीमियम हथियार है।  प्रोजेक्ट कुश की खासियत एस-400 की तुलना में कुश न केवल लागत में कम है बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता, सॉफ्टवेयर स्वतंत्रता और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस के मामले में भी कहीं बेहतर है. भारत ने 2018 में रूस से एस-400 के पांच स्क्वाड्रन की डील की थी. उस वक्त उसकी लागत करीब 5.45 अरब डॉलर यानी करीब 45 हजार करोड़ रुपये थी. वहीं प्रोजेक्ट कुश के पांच स्क्वाड्रन की कीमत सिर्फ 21,700 करोड़ रुपये है. यानी यह लागत आधी से भी कम है. यह बचत न केवल सिस्टम की खरीद पर हो रही बल्कि इसमें इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें भी काफी सस्ती हैं. यह कुश सिस्टम तीन लेयर वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों पर आधारित हैं. इसमें एम-1 मिसाइल की रेंज 150 किमी, एम-2 मिसाइल की रेंज 250 किमी और सबसे भारी एम-3 मिसाइल की रेंज 350 से 400 किमी के बीच है. इन मिसाइलों की कीमत 40 से 50 करोड़ के बीच है जबकि एस-400 की रूसी मिसाइलों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये हैं।  क्यों सस्ता है ये सिस्टम दरअसल, इन मिसाइलों का उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड कर रहा है, जबकि एडवांस मल्टी-फंक्शन कंट्रोल रडार का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) कर रहा है. ये दोनों कंपनियां डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर्स जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।  पूर्ण सॉफ्टवेयर और टेक्टिकल स्वतंत्रता रूसी सिस्टम एस-400 में सोर्स कोड लॉक रहता है. इनका उपयोग काफी हद तक विदेशी सप्लायर की मर्जी पर निर्भर करता है. कुश प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी है. ऐसे में एयरफोर्स का मिशन अल्गोरिदम और कोर सॉफ्टवेयर पर पूरा नियंत्रण मिलता है. इससे किसी भी स्थिति में इसमें किल स्विच का खतरा नहीं रहता है. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर दुश्मन नई स्टेल्थ टेक्नोलॉजी या इलेक्ट्रॉमिक वारफेयर का इस्तेमाल करता है तो भारत अपना रडार डिटेक्शन और ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर तुरंत अपडेट कर सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के जे-20 या जे-35 फाइटर जेट का इ्स्तेमाल करे तो ये डिफेंस सिस्टम तुरंत अपने रडार डिटेक्शन और ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट कर देंगे।  लाइफ साइकल इकोनॉमी इस मामले में भी कुश एस-400 से काफी आगे हैं. दरअसल, लाइफ साइकल इनोनॉमी का मतलब एक सिस्टम को उसकी पूरी उम्र तक ऑपरेट करने में आने वाला खर्च से है. एस-400 और कुश जैसे बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 25 से 30 सालों तक अपनी सेवा देते हैं. ऐसे में एस-400 जैसे विदेश प्लेटफॉर्म के मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स और अपग्रेड में बहुत पैसे खर्च होंगे. ऐसे में कई भार पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरा सिस्टम ठप हो जाता है. वहीं कुश का पूरा मेंटेनेंस भारत में होगा. इस कारण कुश के ठप होने की संभावना न के बराबर है।  इसके अलावा कुश को इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के साथ सहजता से इंटीग्रेट किया जा सकता है. इसे नेटा अवाक्स, भविष्य के अवाक्स, तेजस मार्क-2 देसी फाइटर जेट और ग्राउंड रडार के साथ तुरंत डेटा शेयर किया जा सकेगा।  प्रोजेक्ट कुश की रफ्तार भारत ने प्रोजेक्ट कुश को बेहद तेज गति से विकास कर रहा है. इस साल के शुरू में इसके एम1 इंटरसेप्टर का फ्लाइट टेस्ट पूरा हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक एम1, एम2 और एम3 वैरिएंट 2028 से 2030 के बीच सेना को सौंपे जाएंगे. अगर भारत के सिस्टम 100 फीसदी सफल हो जाते हैं तो यह मित्र देश रूस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. भारत का यह सिस्टम काफी सस्ता है. ऐसे में संभावना है कि कम बजट वाले मुल्कों के लिए भारत ने एक शानदार एयर डिफेंस सिस्टम को विकसित किया है। 

US पायलट की मां की दुआ पर ईरान का पलटवार: ‘हमारे पास सुरक्षित, ट्रंप से नहीं

तेहरान   ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. शुक्रवार (3 मार्च) को ईरान ने अमेरिका के दो खतरनाक लड़ाकू विमानों (F-15 और A-10) को मार गिराया. इस घटना के बाद एक अमेरिकी पायलट लापता है, जिसकी तलाश में ईरान की सेना ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. इस बीच, लापता पायलट की मां ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे की सलामती के लिए दुआ मांगी, जिस पर ईरान के दूतावासों ने काफी तीखा जवाब दिया है।  ईरान का पलटवार: ‘ट्रंप से ज्यादा हमारे पास सुरक्षित है आपका बेटा’ पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में मौजूद ईरानी दूतावासों ने पायलट की मां के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि उनके बेटे ट्रंप की कमान में रहने से ज्यादा ईरान की कैद में सुरक्षित रहेंगे. ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा कि दुआ कीजिए कि आपका बेटा अमेरिकी रेस्क्यू टीम के हाथ लगने के बजाय ईरान की गिरफ्त में रहे. हम सभ्य लोग हैं और कैदियों के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं. दक्षिण अफ्रीका स्थित दूतावास ने तो यहां तक कह दिया कि वे अमेरिका या उनके साथियों की तरह ‘पाषाण युग’ वाली सोच नहीं रखते।  23 साल बाद अमेरिका को लगा इतना बड़ा झटका वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2003 के इराक युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी जंग में अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराया गया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुई इस जंग के छठे हफ्ते में यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी सैन्य हार मानी जा रही है. लापता पायलट को खोजने के लिए गए दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा।  ग्राउंड जीरो के हालात: ईरान में तलाशी अभियान और इनाम का ऐलान ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी ईरान के क्षेत्रीय गवर्नर ने लापता अमेरिकी पायलट को पकड़ने या मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा की है. वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के जवान पूरे इलाके में छानबीन कर रहे हैं. दूसरी ओर, कुवैत में क्रैश हुए A-10 वॉर्थोग विमान का पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहा. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के डेटा के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं।  न्यूक्लियर प्लांट के पास हमला और आम लोगों की मौत तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास एक मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है, हालांकि प्लांट सुरक्षित है. ईरानी स्टेट मीडिया ने बताया कि इस जंग में अब तक ईरान के 4,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें उनके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल हैं. शनिवार को ईरान के पेट्रोकेमिकल जोन और पानी के गोदामों पर भी हवाई हमले हुए हैं।  बातचीत का रास्ता बंद  प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी दी थी, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट दिख रही है. ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का मकसद अब ‘सत्ता पलटना’ नहीं बल्कि अपने ‘पायलटों को बचाना’ रह गया है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली शांति वार्ता भी रुक गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से साफ मना कर दिया है। 

चुनावी रण में TMC का दांव: तृणमूल कांग्रेस ने उतारे दिग्गज स्टार प्रचारक

 बंगाल श्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने पहले चरण के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर चुनावी रण का औपचारिक आगाज कर दिया है. यह सिर्फ नामों की घोषणा नहीं, बल्कि पार्टी की रणनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है. चुनाव प्रचार की कमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हाथ में है. दोनों चेहरे न सिर्फ संगठन के केंद्र में हैं, बल्कि चुनावी नैरेटिव को तय करने में भी अहम भूमिका निभाने वाले हैं. TMC ने साफ कर दिया है कि चुनाव अभियान शीर्ष नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रहेगा. पहले चरण के लिए जारी सूची में सिर्फ शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि संगठन के अनुभवी और भरोसेमंद चेहरों को भी जगह दी गई है. वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम, पार्टी के अनुभवी नेता सुब्रत बख्शी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं. इन नेताओं की मौजूदगी यह बताती है कि पार्टी सिर्फ करिश्माई नेतृत्व पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं के जरिए हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है. स्टार प्रचारकों की यह सूची कई स्तरों पर संदेश देती है.  एक तरफ यह पार्टी के भीतर एकजुटता और सामूहिक नेतृत्व की तस्वीर पेश करती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष को संकेत भी है कि तृणमूल कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ सियासी समर में उतर चुकी है. यह भी साफ है कि पार्टी इस चुनाव को सिर्फ सत्ता बचाने की लड़ाई के रूप में नहीं लड़ रही. ​ बल्कि अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है. इसलिए प्रचार में ऐसे चेहरों को उतारा गया है जो आक्रामक और संगठनात्मक रूप से प्रभावी हैं. ये घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरम हो रहा है.  सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस का यह कदम शुरुआती बढ़त लेने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. पहले चरण के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर पार्टी ने अपने कैडर को सक्रिय होने का संकेत दे दिया है.  

स्कूल में फोन पर बैन बढ़ा, बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास पर असर, दुनिया भर में गहरा प्रभाव

नई दिल्ली आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका असर अब चिंताजनक होता जा रहा है। लगातार बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के कारण बच्चों का पढ़ाई में ध्यान कम हो रहा है और उनकी मेंटल हेल्थ भी प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब दुनियाभर के स्कूलों में फोन पर पाबंदी लगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। 58% देशों में स्कूलों ने लगाया फोन बैन यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के करीब 58% देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर बैन लगाया जा चुका है। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है, 2023 में सिर्फ 24% देशों में बैन था, 2025 की शुरुआत में 40% और अब 2026 में 58% तक पहुंच गया यह साफ दिखाता है कि स्कूल अब बच्चों की पढ़ाई और व्यवहार को लेकर ज्यादा सख्त हो रहे हैं। स्कूलों में फोन बैन की बड़ी वजह Phone Ban करने की सबसे बड़ी वजह है बच्चों का ध्यान भटकना। क्लास के दौरान सोशल मीडिया, गेम्स और वीडियो देखने की आदत पढ़ाई में बाधा बन रही है। इसके अलावा साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और गलत कंटेंट से भी बच्चों को बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सेंट्रल और साउथ एशिया के देश इस मामले में सबसे आगे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में अभी कम सख्ती देखने को मिलती है। फोन बैन का बच्चों पर असर रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां फोन पर सख्ती लागू की गई, वहां स्कूल टाइम में मोबाइल इस्तेमाल 37% से घटकर सिर्फ 4% रह गया। टीचर्स ने भी बदलाव महसूस किया:     बच्चे आपस में ज्यादा बातचीत करने लगे     आउटडोर एक्टिविटी बढ़ी     किताबें पढ़ने में रुचि बढ़ी हालांकि, यह बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं है। करीब एक तिहाई टीचर्स ने इसे पॉजिटिव माना, जबकि 64% का कहना है कि ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सोशल मीडिया से बढ़ रहा खतरा बच्चों पर Phone Ban का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया का बढ़ता असर भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खासकर लड़कियों को ऑनलाइन हैरेसमेंट और सोशल प्रेशर का सामना करना पड़ता है। एक रिपोर्ट में सामने आया कि इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने के बाद 32% किशोर लड़कियों को अपने शरीर को लेकर खराब महसूस हुआ। वहीं, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म हर 39 सेकंड में बॉडी इमेज से जुड़ा कंटेंट और कुछ ही मिनटों में ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ी चीजें दिखाने लगते हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ध्यान दें स्कूलों में फोन बैन का फैसला सिर्फ अनुशासन के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लिया जा रहा है। अगर सही समय पर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर और भी गहरा पड़ सकता है।

ग्लोबल संकट में भारत आगे: होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज, चीन अब भी जूझ रहा

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं। सात पहले निकल चुके थे और शनिवार को ग्रीन सान्वी नाम के एक और जहाज के होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की सूचना है। विभिन्न एजेंसियों के मुताबिक, होर्मुज में अभी कई देशों के तीन सौ के करीब जहाज (ज्यादातर पेट्रोलियम ढुलाई वाले) फंसे हैं। सबसे ज्यादा जहाज चीन (तकरीबन 60-70) के हैं। लेकिन ईरान की मदद से सबसे ज्यादा भारतीय जहाज ही होर्मुज से बाहर निकल पाए हैं। होर्मुज से निकले भारतीय जहाज पश्चिम एशिया विवाद शुरू होने के बाद से एलपीजी संकट के मुहाने पर खड़े भारत के लिए इन जहाजों का आना किसी वरदान से कम नहीं है। इनकी वजह से एलपीजी आपूर्ति को सुधारने में मदद मिली है, खास तौर पर वाणिज्यिक क्षेत्र को ज्यादा एलपीजी की आपूर्ति संभव हुई है। हालांकि एलपीजी आपूर्ति की स्थिति सामान्य से काफी दूर है। ईरान युद्ध के बीच भारत की ताकत सरकार की तरफ से पिछले दस दिनों में शिवालिक, नंदा देवीस पाइन गैस, जग वसंत,बीडब्लू टायर, बीडब्लू एल्म, जग लाडकी और अब ग्रीन सान्वी के होर्मुज से निकलने की सूचना दी गई है। इसमें जग लाडकी के अलावा अन्य सात एलपीजी से भरे हुए थे। शिवालिक व नंदा देवी में कुल 92,712 टन एलपीजी था। पाइन गैस व जग वसंत में में 92,612 टन और टायर व एल्म से कुल 94,000 टन एलपीजी की आपूर्ति हुई। जग लाडकी में 80,886 टन क्रूड ऑयल भी मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। ये सप्लाई मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर जैसे बंदरगाहों पर पहुंची। कुल मिलाकर इन जहाजों से भारत को लगभग 2.79 लाख टन से ज्याादा एलपीजी मिला, जो देश की दैनिक खपत (लगभग 1 लाख टन) के हिसाब से 2-3 दिन की पूरी जरूरत को पूरा करने जितना है। अभी देश की रिफाइनरियों ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है, उसे देखते हुए होर्मुज से आने वाले एलपीजी टैंकरों की भूमिका घरेलू आपूर्ति को बेहतर बनाने में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। होर्मुज से धीरे-धीरे और 14 और भारतीय जहाजों के भी जल्दी निकलने की उम्मीद बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों पिछले महीने की शुरूआत में उस इलाके में भारत के कुल 24 जहाज वहां थे। चीन-पाकिस्तान कर रहे मशक्कत इसके साथ ही संकेत यह है कि अब ओमानी रूट (ओमान तट के साथ) को अपनाने की संभावना बढ़ रही है, जिससे होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे अन्य जहाजों को निकालना भी आसान हो जाएगा। हाल ही में तीन ओमानी टैंकर इसी रूट से गुजरे, जो भविष्य में फ्लो को और आसान बना सकता है। दूसरी ओर चीन की सरकार ने 31 मार्च को बताया है कि उसके अभी तक सिर्फ तीन कंटेनर ही होर्मुज से बाहर निकले हैं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि ईरान ने उसके 20 जहाजों को पास करने की अनुमति दी है, लेकिन यह दावा पूरी तरह सत्यापित नहीं हुआ है। अभी तक होर्मुज से दो पाकिस्तानी जहाज कराची पहुंच पाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह खबर प्रकाशित हुई है कि पाकिस्तान निजी तेल-गैस जहाजों पर अपना झंडा लगाकर अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है।

PM बोले—भारतीयों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, पश्चिम एशिया तनाव पर कांग्रेस पर हमला

केरल केरल में चुनावी बिगुल बज चुका है और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सूबे के तिरुवल्ला में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विपक्षी दल कांग्रेस, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) पर जमकर प्रहार किए। पीएम ने कांग्रेस पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ चुनावी फायदे और मुझे गाली देने के लिए एक करोड़ प्रवासियों की जिंदगी दांव पर लगाने को तैयार है। 'कांग्रेस चाहती है कि खाड़ी देश भारत को अपना दुश्मन समझें' प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की मंशा बेहद खतरनाक है। वे चाहते हैं कि पश्चिम एशिया के देश भारत को अपना दुश्मन समझ लें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि हम यहां कोई ऐसी गलती कर दें या कोई ऐसा बयान दे दें, जिससे खाड़ी देशों में रह रहे हमारे भारतीय भाई-बहनों पर बड़ी मुसीबत आ जाए। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कहा कि कांग्रेस जानबूझकर खाड़ी देशों को नाराज करने वाले बयान दे रही है, जिससे देश में डर का माहौल बने और उन्हें केंद्र सरकार को कोसने का मौका मिल सके। प्रधानमंत्री ने विरोधियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि मैं कांग्रेस और एलडीएफ-यूडीएफ के लोगों से साफ कह देना चाहता हूं कि राजनीति अपनी जगह है और चुनाव आते-जाते रहेंगे। मेरे लिए केरल के जो लाखों लोग वहां काम कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और मैं इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं। 'सबरीमाला में हुए पाप का कांग्रेस और लेफ्ट से कनेक्शन' प्रधानमंत्री ने केरल की संस्कृति पर हो रहे हमलों को लेकर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लेफ्ट और कांग्रेस के भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण का सीधा निशाना केरल की महान संस्कृति और आस्था पर है। उन्होंने कहा कि पहले इन लोगों ने सबरीमाला तीर्थ को बदनाम करने की साजिश रची और अब यह इनकी लूट का अड्डा बन गया है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि सबरीमाला में जो कुछ भी हुआ वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि यह चोरी एलडीएफ सरकार में हुई और इसके तार कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से जुड़े पाए गए हैं। यही वजह है कि एलडीएफ सरकार इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौंप रही है। झूठ बोलना कांग्रेस और वामपंथियों का स्वभाव: पीएम मोदी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हर चीज में झूठ बोलना इनका स्वभाव बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब हम सीएए लेकर आए, तब इन्होंने खूब झूठ फैलाया। आज कानून लागू हो चुका है और देश का कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने 'द केरल फाइल्स' और 'कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि सच सामने आते ही विपक्ष इसे झूठ का पुलिंदा बताने लगता है। आजकल ये लोग यूसीसी को लेकर भी ऐसा ही भ्रम फैला रहे हैं।  

ईरान ने दिखाई ताकत, दो दशक में पहली बार अमेरिका को झटका; 13 सैनिक मारे गए

वाशिंगटन/ तेहरान  ईरान युद्ध में अमेरिका को जो झटका लगा है वैसा झटका पिछले दो दशक में कभी नहीं लगा। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना को दो विमानों को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि एक पायलट की जान बच गई है जबकि दूसरा लापता है। पिछले 20 साल में ऐसा नहीं हुआ कि अमेरिकी सेना के दो विमान विदेशी धरती पर गिरा दिए गए हों। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि ईरान एकदम कमजोर हो गया है तो दूसरी तरफ ईरान कहता है कि वजह जवाब देने के लिए तैयार है। दो दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ''ईरान को हरा दिया है और उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया है और हम अपने काम को बहुत तेजी से पूरा करने जा रहे हैं।' इराक में गिराया गया था अमेरिका का विमान ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एक पायलट को बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ईरान की मीडिया ने दावा किया है कि यूएस ए-10 विमान को भी निशाना बनाया गया है। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ए-10 थंडरबोल्ट II को गिराया गया था। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब तक ऐसा कोई भी देश नहीं कर पाया, यह कोई चमत्कार से कम नहीं है। मारे गए 13 अमेरिकी सैनिक इस युद्ध के दौरान अब तक कुल 365 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हुई है। बीसीसी ने अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के हवासे से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि इन आंकड़ों में ईरान में हाल ही में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के मार गिराये जाने और लापता चालक दल को खोजने के लिए चलाए गये बचाव अभियान के दौरान घायल हुए सैनिक भी घायलों की इस सूची में शामिल हैं या नहीं। अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 13 ही बनी हुई है। युद्ध के दौरान घायल हुए अमेरिकी सैनिकों में सेना के 247 जवान, नौ सेना के 63 जवान, वायु सेना के 36 जवान और 19 मरीन सैनिक शामिल हैं। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य स्थिति पर चर्चा करते हुए पहले कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया या इसमें ईरान की कोई भूमिका थी। चालक दल की स्थिति और विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का सटीक स्थान भी तुरंत ज्ञात नहीं हो सका।

पाकिस्तान के प्रयासों को लगा झटका, ईरान ने इस्लामाबाद बैठक से किया मना, युद्धविराम पर असफलता

इस्लामाबाद पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को मध्यस्थों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। ईरान ने पाकिस्तान सहित मध्यस्थता करा रहे देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करने को तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। कुल मिलाकर ये बातचीत अब 'डेड एंड' पर पहुंच गई है। ईरान का इनकार और अमेरिका की मांगें सूत्रों के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के लिए अपनी शर्तें दोहराई हैं। शुरुआती दौर में ईरान ने कहा था कि वह तभी युद्ध समाप्त करेगा जब अमेरिका युद्ध मुआवजा दे, मध्य पूर्व के अपने सभी सैन्य ठिकानों से वापसी करे और भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी दे। इन मांगों पर कोई समझौता नहीं होने के कारण बातचीत अटक गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के नेतृत्व में बातचीत को आगे बढ़ाने की यह कोशिश कोई सफलता हासिल नहीं कर सकी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसे अमेरिका की मांगें 'अस्वीकार्य' लगती हैं। वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक के लिए अपने कोई अधिकारी को नहीं भेजेगा। इस कड़े रुख ने बातचीत की मौजूदा रूपरेखा के दरवाजे प्रभावी रूप से बंद कर दिए हैं। पाकिस्तान की निकल गई हवा! पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान बैकडोर कूटनीति के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद में सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की थी। इसी दिशा में पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव ईरान को सौंपा था। इससे पहले, चीन और पाकिस्तान ने भी संयुक्त रूप से एक 5-सूत्रीय शांति योजना पेश की थी। हालांकि, अमेरिका की कुछ कठोर रणनीतिक मांगों और जमीनी स्तर पर लगातार हो रहे सैन्य हमलों के कारण, ईरान ने इस बातचीत से अपने कदम पीछे खींच लिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि पाकिस्तान के लिए दोनों पक्षों को एक मेज पर लाना कूटनीतिक रूप से एक बेहद जटिल काम था, जो अंततः विफल साबित हुआ। शांति प्रयासों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी युद्धक विमान (F-15E) को मार गिराने का दावा किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विशेष बलों ने एक पायलट का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तुर्की और मिस्र तलाश रहे नए विकल्प इस कूटनीतिक गतिरोध के कारण शांति प्रयास अधर में लटक गए हैं। इसे देखते हुए तुर्की और मिस्र अब इस समस्या का समाधान इस्लामाबाद से बाहर तलाश रहे हैं। दोनों देश युद्धविराम की बची-खुची उम्मीदों को बचाने के लिए नए स्थानों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें दोहा (कतर) और इस्तांबुल (तुर्की) बातचीत की मेजबानी के लिए प्रमुख विकल्पों के रूप में उभरे हैं। विवाद की मुख्य जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री रास्ता एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। इस समझौते के तहत यह प्रस्ताव था कि अगर तेहरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते को वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोल देता है, तो इसके बदले में युद्धविराम लागू किया जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और धमकियां रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान संभावित युद्धविराम को लेकर चर्चा की थी। उसी दिन, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति युद्धविराम चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी होगा जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से 'खुला और स्वतंत्र' होगा। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा: हम तभी विचार करेंगे जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुला होगा। तब तक, हम ईरान पर विनाश की हद तक बमबारी कर रहे हैं। उन्हें वापस पाषाण युग में भेज देंगे!!!" ईरान की प्रतिक्रिया ट्रंप के इन दावों और बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने युद्धविराम चाहने वाले ट्रंप के दावे को पूरी तरह से झूठा और निराधार करार दिया है। इस युद्ध की आंच अब अन्य देशों तक फैल रही है। इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने हाई-अलर्ट जारी करते हुए अमेरिकी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने को कहा है, क्योंकि ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा हमले की आशंका है। बहरीन से लेकर दुबई तक ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।

ईरान जंग में US के लिए मुश्किलें बढ़ीं, 2 फाइटर जेट और 2 चॉपर क्रैश, पायलट लापता

वाशिंगटन पिछले पांच हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और अनिश्चित दौर में पहुंच गया है. पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जबकि बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हमले की चपेट में आ गए हैं।  ईरानी मीडिया की तरफ से कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं और दावा किया गया है कि कुवैत स्थित 'कैंप बुहरिंग' पर हुए ईरानी हमलों में अमेरिकी सेना का एक 'बोइंग CH-47 चिनूक' भारी-भरकम हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।  28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद  यह पहली बार है जब अमेरिकी विमानों को इस तरह नुकसान पहुंचा है. जिसने वाशिंगटन के ‘एयर सुपीरियरिटी’ के दावों को कड़ी चुनौती दी है.  जानकारी के मुताबिक, एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान ईरान के भीतर सैन्य अभियान के दौरान क्रैश हो गया. इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है और उसके ईरान में कहीं छिपे होने की आशंका है।  कुवैत में भी प्लेन क्रैश एक अन्य घटना में, कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा।  लापता पायलट को खोजने के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक (Black Hawk) हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने भारी गोलीबारी की जिसके बाद वे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे. लगातार दो विमानों के नुकसान को इस युद्ध में अमेरिकी सेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  अमेरिकी सेना के लिए मुश्किल भरे रहे पिछले 24 घंटे      F-15E स्ट्राइक ईगल: ईरान की सीमा के भीतर एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया है. विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स में से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है. लापता क्रू मेंबर की तलाश में हाई-स्टेक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।      A-10 वारथॉग: दो A-10 वारथॉग विमानों को निशाना बनाया गया. इनमें से एक फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया (पायलट सुरक्षित), जबकि दूसरे ने एक इंजन खराब होने के बावजूद इमरजेंसी लैंडिंग की।      रेस्क्यू  हेलीकॉप्टरों पर अटैक: लापता पायलट को खोजने निकले दो HH-60W जॉली ग्रीन II रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आ गए. हालांकि क्रू सुरक्षित है, लेकिन कुछ जवान घायल हुए हैं।      इमरजेंसी लैंडिंग: एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को भी तकनीकी खराबी या हमले के बाद इमरजेंसी घोषित कर सुरक्षित लैंडिंग करनी पड़ी।  ईरान का 'पायलट हंट'  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता अमेरिकी पायलट की तलाश के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे जंग का टर्निंग पॉइंट बताते हुए कहा कि अब लड़ाई 'सत्ता परिवर्तन' से हटकर 'अमेरिकी पायलटों की तलाश' पर केंद्रित हो गई है।  ईरानी अधिकारियों ने अपने नागरिकों से पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने का आग्रह किया है और एक क्षेत्रीय अधिकारी ने 'शत्रु की सेनाओं' को पकड़ने या मारने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा इनाम देने की भी घोषणा की है।  ट्रंप बोले- यह जंग है, होता रहता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं को बहुत अधिक महत्व न देते हुए कहा, 'यह जंग है और ऐसा होता रहता है.' उन्होंने संकेत दिया कि इन नुकसानों से ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के उन दावों के विपरीत है जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है।  सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर एयर डिफेंस सिस्टम भी मोबाइल मिसाइल और ग्राउंड फायर के जरिए खतरा पैदा कर सकते हैं. हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा, लेकिन दो विमानों के गिरने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  फिलहाल जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं और इसका असर पूरे मध्य-पूर्व पर पड़ रहा है. ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयासों को खारिज कर दिया है, जिससे पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे सीजफायर की कोशिशों को झटका लगा है. वहीं कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। 

नासिक में भीषण दुर्घटना, कुएं में गिरने से एक ही परिवार के 9 सदस्यों की जान गई

नासिक  महाराष्ट्र के नासिक जिले के दिंडोरी तालुका में देर रात एक भीषण सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। एक मारुति XL6 कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित पानी से भरे कुएं में जा गिरी, जिसमें सवार नौ लोगों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के नौ सदस्य शामिल थे। हादसा शुक्रवार रात करीब 10 बजे डिंडोरी शहर के शिवाजी नगर इलाके में हुआ। पुलिस के अनुसार, पीड़ित लोग डिंडोरी तालुका के इंदौर गांव के दरगुडे परिवार के सदस्य थे। मृतकों की पहचान सुनील दत्तु दरगुडे (32), उनकी पत्नी रेशमा, आशा अनिल दरगुडे (32) और परिवार के छह बच्चों के रूप में हुई है; इन बच्चों में सात से 14 साल की उम्र की पांच लड़कियां और 11 साल का एक लड़का शामिल है। कार्यक्रम से लौटते समय हुआ हादसा परिवार वाले एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहे थे। जो रात के अंधेरे में अचानक चालक का वाहन पर से नियंत्रण छूट गया और कार सीधे सड़क किनारे बने गहरे कुएं में गिर पड़ी। पानी भरा होने के कारण बचाव कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। देर रात तक चले बचाव अभियान में कड़ी मशक्कत के बाद कार और शवों को कुएं से बाहर निकाला गया। मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। कब हुआ हादसा? दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, यह परिवार एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहा था। इसी दौरान अचानक कार का नियंत्रण बिगड़ गया और वह सड़क किनारे बने गहरे कुएं में गिर गई। कुएं में पानी भरा होने की वजह से राहत और बचाव कार्य और भी मुश्किल हो गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस को भी सूचना दी गई, लेकिन जब तक कार और लोगों को बाहर निकाला गया, तब तक सभी की मौत हो चुकी थी। परिवार के सभी सदस्यों की हुई मौत सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। राहत-बचाव अभियान के तहत दो क्रेन और तैराकों की मदद से आधी रात के आसपास कार और उसमें सवार सभी लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक सभी की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने बताया कि सभी मृतक डिंडोरी तालुका के इंदोरे गांव निवासी दरगुड़े परिवार के सदस्य थे। मृतकों की पहचान सुनील दत्तू दरगुड़े (32), उनकी पत्नी रेशमा, आशा अनिल दरगुड़े (32) और परिवार के छह बच्चों के रूप में हुई है। बच्चों में पांच लड़कियां (उम्र 7 से 14 वर्ष) और एक 11 वर्षीय लड़का शामिल है। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए डिंडोरी के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।  पुलिस को क्या पता? फिलहाल, सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे की असली वजह क्या थी। साथ ही सड़क की स्थिति, वाहन की रफ्तार और अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में ऐसा हादसा हुआ हो। इससे पहले भी यहां इस तरह की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। जांच में जुटी पुलिस  दिंडोरी पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में वाहन से नियंत्रण खोना मुख्य कारण बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस रोड कंडीशन, वाहन की स्पीड और अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के सही कारण सामने आएंगे।