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दक्षिण भारत में उलटफेर: कोलाथुर में हार, CM स्टालिन को झटका, केरल में कांग्रेस (UDF) को मिला बहुमत

तिरुवनंतपुरम/चेन्नई/गुवाहाटी  विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के ताज़ा रुझानों ने देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, तमिलनाडु और केरलम से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। जहाँ तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन खुद अपनी सीट पर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं केरलम में कांग्रेस गठबंधन (UDF) सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ता दिख रहा है। तमिलनाडु : स्टालिन पिछड़े, एक्टर विजय की धमाकेदार एंट्री तमिलनाडु के रुझानों ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से पीछे चल रहे हैं। शुरुआती रुझानों के अनुसार, सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK करीब 70 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों में TVK 2 सीटों पर, AIADMK 3 और DMK 1 सीट पर आगे दिखाई दे रही है। कुल सीटों के हिसाब से तमिलनाडु में DMK 46 सीटों पर बढ़त के साथ मुकाबला कड़ा करने की कोशिश में है। केरलम : UDF ने मारी बाजी, बाजी पलटते हुए कांग्रेस आगे केरलम में 'सत्ता परिवर्तन' का रिवाज बरकरार रहता दिख रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन को 83 सीटों पर बढ़त हासिल हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं आगे है। सत्ताधारी LDF फिलहाल 53 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुमानों के अनुरूप ही यहाँ कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनती दिखाई दे रही है। असम और पुडुचेरी : बीजेपी की मजबूत वापसी उत्तर-पूर्वी राज्य असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही है। असम : मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी 69 सीटों पर आगे चल रही है, जिससे सत्ता में वापसी के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। पुडुचेरी : यहाँ भी बीजेपी 22 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे NDA गठबंधन की वापसी तय मानी जा रही है। रुझानों के आने के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। दोपहर तक इन सभी राज्यों की अंतिम तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत, ममता दीदी की सत्ता पर खतरा, रुझानों में बहुमत के पार

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल और असम समेत पांच राज्यों में अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। बंगाल में बीजेपी बहुमत के आंकड़े के पार चल रही है और टीएमसी काफी पीछे हो गई है। असम में बीजेपी बंपर जीत की ओर आगे बढ़ रही है। बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। केरल में यूडीएफ अच्छे अंतर के साथ आगे हो गई है और तमिलनाडु में ऐक्टर विजय की पार्टी टीवीके 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना चुकी है। यह डीएमके के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।। पुडुचेरी में फिर से एनडीए की सरकार रिपीट होती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में संवेदनशील माहौल देखते हुए मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस बार तमिलनाडु, केरल और पुडुच्चेरी में भी जमकर मतदान हुआ था। बंगाल की 293 सीटों के लिए 77 मतगणना केंद्रों पर गिनती हो रही है। मतगणना से पहले ही टीएमसी और बीजेपी ने एक दूसरे पर हेरफेर के आरोप लगाए थे। धन्यवाद हिंदू, धन्यवाद सनातनी- शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने रुझानों में बड़ी लीड के बाद सभी सनातनी, सभी हिंदू मतदाताओं को धन्यवाद दिया है. उन्होंने कहा है कि पहले राउंड में मुस्लिम बाहुल्य बूथ थे, ममता बनर्जी आगे निकल गई थीं. भवानीपुर के हिंदू बाहुल्य बूथ की ईवीएम खुली, तो हमने अंतर कवर करते हुए बढ़त बना ली. तीन, चार, पांच, छह बूथ मुस्लिम बाहुल्य हैं. इन बूथों पर ममता बनर्जी लीड करेंगी. सात, आठ, नौ और 10 हिंदू बाहुल्य बूथ हैं. यहां फिर से अंतर कम कर लीड ले लूंगा।  आरजी कर पीड़िता की मां पनिहाटी सीट से आगे आरजी कर रेप पीड़िता की मां बीजेपी के टिकट पर पनिहाटी सीट से चुनाव लड़ रही हैं. पनिहाटी सीट पर आरजी कर पीड़िता की मां आगे चल रही हैं. बीजेपी उम्मीदवार आरजी कर पीड़िता की मां तीन हजार वोट से आगे चल रही हैं।  जनता ने हमारे संदेश को स्वीकार किया है- थरूर शशि थरूर ने कहा है कि हम 10 साल से इंतजार कर रहे थे. इतनी बड़ी मेजॉरिटी हमें मिली, तो हम स्टेबल रहेंगे. जनता ने हमारे संदेश को स्वीकार किया है और् इतना बड़ा समर्थन हमें मिलता नजर आ रहा है।     विजय की सुरक्षा बढ़ाई गई तमिलनाडु में विजय की अगुवाई वाली टीवीके 102 सीटों पर आगे चल रही है. एआईएडीएमके के उम्मीदवार 73 और डीएमके के उम्मीदवार 48 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. तमिलनाडु के रुझानों के बाद विजय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. विजय के घर के बाहर भी सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।  असम चुनाव में साफ तौर पर बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है। असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम असम में लगातार तीसरी बार बीजेपी हैटट्रिक लगा रही है। राज्य की 126 विधानसभा सीट से 722 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य को समेटे हुए इईवीएम, 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर खोली गईं। राज्य में मतदान 9 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ था।

मुंबईवासियों के लिए अलर्ट: 5 और 6 मई को बड़ी पानी कटौती, कई इलाके होंगे प्रभावित

मुंबई मुंबई नगर निगम (BMC) ने शहर के पानी सप्लाई सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अमर महल में तैयार नए वॉटर टनल को मुख्य लाइन से जोड़ने के काम के चलते 5 मई (मंगलवार) सुबह 10 बजे से 6 मई (बुधवार) दोपहर 4 बजे तक करीब 30 घंटे पानी सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी। इस पानी कटौती का असर दक्षिण और मध्य मुंबई के छह वार्डों पर पड़ेगा। किन इलाकों में रहेगा पानी बंद 30 घंटे तक पानी की कटौती का असर मुंबई के माटुंगा, सायन, वडाला, परेल, शिवड़ी, कुर्ला, साकीनाका, गोवंडी, मानखुर्द, चेंबूर, घाटकोपर और विद्याविहार समेत कई इलाकों पर पड़ेगा। बीएमसी के अनुसार, यह कटौती एफ/नॉर्थ (माटुंगा, सायन, वडाला), एफ/साउथ (परेल, शिवडी), एल वार्ड (कुर्ला, साकी नाकी), एम/ईस्ट (गोवंडी, मानखुर्द), एम/वेस्ट (चेंबूर) और एन वार्ड (घाटकोपर, विद्याविहार) के कई इलाकों को प्रभावित करेगी। क्यों जरूरी है यह काम बीएमसी ने बताया कि अमर महल में तैयार नई वॉटर टनल अब मुख्य जल आपूर्ति नेटवर्क से जोड़ी जा रही है। इससे शहर के पूर्वी उपनगरों में पानी सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा और भविष्य में पानी की कमी जैसी समस्याओं को कम किया जा सकेगा। इस परियोजना के तहत 1,800 मिमी व्यास की एक सुरंग का निर्माण किया जाएगा, साथ ही उससे जुड़े अन्य सहायक कार्य भी किए जाएंगे। इस दौरान बीएमसी तुर्भे के हाई-लेवल और लो-लेवल जलाशयों से मौजूदा सुरंगों के जरिए होने वाली जल आपूर्ति बंद देगी। प्रभावित इलाकों की पूरी सूची- एफ/नॉर्थ वार्ड – प्रतीक्षा नगर, शास्त्री नगर, संजय गांधी नगर, शांति नगर, एच एम रोड, के डी गायकवाड़ नगर, वडाला ट्रक टर्मिनस, न्यू कफ परेड, आल्मेडा कॉम्प्लेक्स, सायन (पूर्व) और सायन (पश्चिम) । एफ/साउथ वार्ड- डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मार्ग, दिनशॉ पेटीट मार्ग, डॉ. आर. एस. अर्नेस्ट बोर्जेस मार्ग, परमार गुरुजी मार्ग, गोखले मार्ग, दादासाहेब फाल्के मार्ग, गोविंदजी केणी मार्ग, जेरबाई वाडिया मार्ग, बी. जे. देवरुखकर मार्ग, सेंट पॉल मार्ग, सेंट जेवियर मार्ग, खशाबा मार्ग, महादेव पालव मार्ग, जीजीभॉय लेन, आचार्य डोंडे मार्ग, विठ्ठल चव्हाण मार्ग, जगन्नाथ भातणकर मार्ग, बाटलीवाला गली, चामर बाग मार्ग, आई माई मेरवानजी मार्ग, शिरोडकर मार्ग, चिवड़ा गली, साने गुरुजी मार्ग, आनंद मालवणकर मार्ग, गैस कंपनी गली। एल वार्ड- साबले नगर, संतोषी माता नगर, क्रांतिनगर, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, न्यू तिलक नगर, कुरेशी नगर (कसाईवाड़ा), हिल मार्ग, ताड़ी पेठ, मुक्तादेवी मार्ग, गावदेवी मंडल, डोंगर क्षेत्र, पाटिल गली, गुलमोहर गली, पंचशील नगर, नेहरू नगर, शिव सृष्टि मार्ग, नाइक नगर, मदर डेयरी मार्ग, एस. जी. बर्वे मार्ग (कुर्ला पूर्व), केदारनाथ मंदिर रोड, नवरे बाग, कामगार नगर, हनुमान नगर, पुलिस कॉलोनी, कुर्ला कारशेड, रेलवे कॉलोनी, टैक्सिला नगर, चाफे गली, राहुल नगर, एवरार्ड नगर, पान बाजार, त्रिमूर्ति मार्ग, वी. एन. पुरव मार्ग, उमरवाड़ी मार्ग, अली दादा स्ट्रीट, स्वदेशी मिल चाल, चुनाभट्टी फाटक, म्हाडा कॉलोनी, समर्थ नगर। एम/ईस्ट वार्ड- लल्लुभाई कॉम्प्लेक्स, कमला रमण नगर, रमण मामा नगर, शिवाजी नगर, लोटस कॉलोनी, गौतम नगर, गायकवाड़ नगर, अयोध्या नगर, वाशी नाका, मानखुर्द, बैंगनवाड़ी, भारत नगर, म्हाडा बिल्डिंग्स, चिता कैंप, साठे नगर, जाकिर हुसैन नगर, देवनार गांव, देवनार वसाहत, न्यू भारत नगर, हशु अडवाणी नगर, नटवर पारेख कॉम्प्लेक्स, सह्याद्री नगर, वडवली गांव, बार्क वसाहत, डंपिंग सप्लाई, रफीक नगर, मंडाला गांव, न्यू मंडाला, पद्मा नगर, विष्णु नगर, एल. यू. गडकरी, आर. एन. ए. पार्क, कुकरेजा बिल्डिंग्स, महाराष्ट्र नगर, इंडियन ऑयल नगर, पाटिल मार्ग स्थित बी. डी. रिफाइनरी विभाग, एचपीसीएल और बीपीसीएल। एम/वेस्ट वार्ड- मैत्री पार्क, घाटला, चेंबूर गांव, सुभाष नगर, लालडोंगर, सिद्धार्थ वसाहत, स्वास्तिक पार्क, पोस्टल वसाहत, डब्ल्यू. टी. पटेल मार्ग, मुक्ति नगर, काशीनाथ पाटिल वाड़ी, संतोष नगर, केलकर वाड़ी, डायमंड गार्डन, सेंट्रल एवेन्यू मार्ग, एन. बी. पाटिल मार्ग, जनार्दन पाटिल मार्ग, घाटला गांव, सेंट एंथनी मार्ग, चंद्रोदय सोसायटी, एस. जी. बर्वे मार्ग, चराई गांव, बोरला सोसायटी। इसके अलावा, एम. एस. बिल्डिंग नंबर 1-32, चेंबूर कैंप, सिंधी कैंप, विजय विहार, सुमन नगर, भक्ति भवन, चिखल वाड़ी, समर्थ नगर, बसंत पार्क, गांधी बाजार, जनता बाजार, इंदिरा नगर, नवजीवन सोसायटी, गोल्फ क्लब, राम टेकड़ी, तोलाराम टावर, चेंबूर वसाहत, कोंकण नगर, गणेश नगर, विजय नगर, अशोक नगर, अन्नाभाऊ साठे मार्ग, सिंधी सोसायटी, कलेक्टरेट वसाहत, मरावली चर्च, आर. सी. रूट, महुल गांव, अंबापाड़ा गांव, मैसूर कॉलोनी, वाशी गांव, डीवाई बी रियल्टी बिल्डिंग, वडवली, शरद नगर, लक्ष्मी नगर, जनता नगर, वाशी नाका, जीजामाता नगर और भक्ति पार्क की सभी इमारतें। साथ ही तिलक नगर, सहकार नगर, वत्सलाताई नाइक नगर, श्रमजीवी नगर, पी. एल. लोखंडे मार्ग, एकता मित्र मंडल, मालेकर वाड़ी, पी. वाई. थोरात मार्ग, रमाबाई वसाहत, आमिर बाग, जनता नगर, मोतीलाल रेजिडेंशियल एसोसिएशन, कादरिया नगर, महात्मा फुले नगर, अजंता वसाहत, साहदीप वसाहत, मुकुंद नगर, पंजाबी चाल, नागे वाड़ी, छेड़ा नगर।  

पीएम मोदी और RSS पर अध्ययन करने के लिए नया कोर्स, इस यूनिवर्सिटी ने किया शुरुआत

वडोदरा  वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है.विश्वविद्यालय ने ऐलान किया है कि राष्ट्रीय संघ (RSS) के इतिहास और वर्तमान प्रशासन के मूल सिध्दांतों पर कोर्स शुरू किया गया है. अब छात्र क्लासरूम में मोदी तत्व और RSS की विचारधारा के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे. इस विषय के तहत विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी विभाग के छात्र राष्ट्रीय सेवक संघ के जन्म, इतिहास और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान में इसके योगदान को समझेंगे. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और स्वतंत्रता संग्राम में संघ की क्या भूमिका रही, इस पर विशेष सत्र होंगे. साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन मैनेजमेंट के लिए संघ की कार्यशैली को समझना क्यों जरूरी है।  पीएम मोदी पर होगी पढ़ाई  इस विषय के तहत छात्र अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर आधारित मोदी तत्व विषय भी शामिल किया गया है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के गुण, उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके काम करने के तरीकों की पढ़ाई होगी. समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से यह देखा जाएगा कि मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने समाज पर क्या प्रभाव डाला है।  4 नए कोर्स को मिली मंजूरी  MS यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ स्टडीज में कुल 4 नए कोर्स को मंजूरी दी है. इस पाठ्यक्रम में देश के महान नायकों को भी जगह दी गई है. इसमें वीर सावरकर,महर्षि अरविंद और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों को शामिल किया गया है. इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के शासन और उनके सामाजिक सुधारों को गहराई से पढ़ाया जाएगा. इस अभ्यास क्रम में राष्ट्रवाद की समझ को लेकर चौथा विषय राष्ट्रवाद पर केंद्रित है. इसमें राष्ट्र और राज्य की परिभाषा के साथ-साथ भारतीय समाजशास्त्रियों के राष्ट्रवाद पर क्या विचार थे इस पर चर्चा की जाएगी।  क्या बोली प्रशासन?  विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इन विषयों से छात्र वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से की गई हालिया शोध परियोजनाओं में छात्रों को सरकारी पहलों के साथ गहराई से जुड़ते हुए देखा गया है और इन विषयों को औपचारिक रूप से शामिल करना एक स्वाभाविक प्रगति के रूप में देखा जाता है।   

भवानीपुर में भाजपा की बढ़त, ममता बनर्जी की राजनीति को क्या होगी चुनौती?

नई दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नतीजों की घड़ी आ गई है. वोटों की गिनती के साथ ही रुझान आने शुरू हो गए हैं. बंगाल के रुझानों में टीएमसी-बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं असम में बीजेपी आगे चल रही है जबिक केरलम में यूडीएफ को बढ़त दिख रही है. वहीं तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अपनी बढ़त को कायम किए हुए है.  जिन पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज आ रहे हैं, उनमें पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही केरल और तमिलनाडु भी शामिल हैं. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में रंगास्वामी राज जारी रहेगा या सत्ता बदलेगी, इसका फैसला भी आज आएगा।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. जिन पर वोट डाले गए थे. पहले चरण में 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे. एक सीट पर पुनर्मतदान होना है, जिसकी वजह से आज 293 सीटों के नतीजे आ रहे हैं. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच टाइट फाइट नजर आ रही है।  बंगाल में बीजेपी 129 सीटों पर आगे पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने फिर से लीड ले ली है. बीजेपी के उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में 129  सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, टीएमसी 110 सीटों पर आगे है. कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. लेफ्ट का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है।  असम में बहुमत से आगे निकली बीजेपी असम के रुझानों में बीजेपी बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई है. बीजेपी 66 सीटों पर आगे निकल गई है. कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन 19 सीटों पर आगे चल रहा है. अन्य का खाता अब तक खुलता नहीं नजर आ रहा है।   बंगाल के रुझानों में टाइट फाइट पश्चिम बंगाल के शुरुआती रुझानों में फाइट टाइट दिख रही है. कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. फिलहाल, बीजेपी ने 122 विधानसभा सीटों पर लीड ले ली है. टीएमसी भी अधिक पीछे नहीं है. ममता बनर्जी की पार्टी 105 सीटों पर आगे चल रही है।  बंगाल और असमें बीजेपी को बढ़त, केरलमें यूडीएफ आगे बंगाल में 162 सीटों के रुझान आ गए ङैं जिसमें बीजेपी 88 सीटों पर आगे है जबकि टीएमसी72 सीटों पर आगे है. वहीं असम में 126 में से 54 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें बीजेपी 44 सीटों पर आगे हैं जबकि कांग्रेस 10 सीटों पर आगे है.  केरलम में 140 सीटों में से 27 के रुझान आए हैं जिसमें यूडीएफ 15 और एलडीएफ और बीजेपी 5-5 सीटों पर आगे चल रहे हैं।  कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी, दोनों दलों की लीड का आंकड़ा सौ के पार पहुंच चुका है. सत्ताधारी टीएमसी ममता बनर्जी की अगुवाई में जीत का चौका लगाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी को कमल खिलने की पुरजोर उम्मीद है., पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया है. सूबे में 92 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सूबे की विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।  एक्टर विजय का प्रचंड उलटफेर, असम में बीजेपी की जीत तय पश्चिम बंगाल : बैलट पेपर के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी आगे चल रही है. हालांकि टीएमसी ज्यादा पीछे नहीं है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में 294 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 148 है. एक सीट फालटा में वोटों की गिनती नहीं हो रही है. बीजेपी की पैठ इस बार दमदार है. अब तक भद्रलोक बीजेपी के साथ नहीं था. इस बार कोलकाता, हावड़ा, आसनसोल जैसे शहरी इलाकों में 2021 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई. इसका असर रुझानों में है. इन शहरी सीटों पर बीजेपी आगे है।  तमिलनाडु : डीएमके पर जनता फिर भरोसा जताती दिख रही है. एक्टर विजय के टीवीके से भी पिछड़ गई है एआईएडीएमके. तमिलनाडु विधानसभा में 324 सीटें हैं और बहुमत के लिए 173 सीटें चाहिए।   तमिलनाडु में टीवीके बड़ी ताकत के तौर पर उभर रही है असम : कांग्रेस से अलग होने के बाद इसी की हस्ती मिटाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा भगवा झंडा फिर फहराने की तैयारी में है. असम विधानसभा में 126 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है।  केरलम : अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा लेफ्ट फ्रंट कठिन दौर से गुजर रहा है. हालांकि पिनरई विजयन की पार्टी कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को कड़ी टक्कर दे रही है. अगर एलडीएफ की हार होती है तो पूरे देश से कम्युनिस्टों का सफाया हो जाएगा. ताजा डेटा के मुताबिक 76 सीटों पर यूडीएफ आगे है. केरलम विधानसभा में 140 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है. रुझान अगर परिणाम में तब्दील हो गए तो कांग्रेस का सीएम बनना तय है।  असम में विधानसभा की कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. प्रदेश की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने का भरोसा है. वहीं, सूबे की सत्ता से 10 साल लंबा वनवास समाप्त कराने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस को भी जीत की उम्मीद है. प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 85 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है।  तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों हैं. इन सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. सूबे में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया और मतदान का आंकड़ा सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए 85.14 फीसदी तक पहुंच गया. सूबे में डीएमके की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार है. विपक्षी एनडीए की अगुवाई सूबे में एआईएडीएमके कर रही है. थलापति विजय की अगुवाई वाली नई नवेली टीवीके मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।  केरलम की बात करें तो इस तटीय प्रदेश की 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. इस बार सूबे में 78.27 फीसदी मतदान हुआ है. वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए भी 9 अप्रैल को ही वोट डाले … Read more

सोमाली डाकुओं का फिर समुद्र में राज, 10 दिन में दूसरा तेल टैंकर हाईजैक, US नेवी ने किया मूक दर्शक

वॉशिंगटन  अमेरिका और ईरान के तनाव के कारण होर्मुज बंद है. वहीं जो जहाज लाल सागर से गुजर रहे हैं उनके ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है. यमन के तट के पास एक बार फिर समुद्री लुटेरों का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है. सोमालिया के समुद्री डाकुओं ने एक तेल टैंकर को हाईजैक कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर चिंता बढ़ गई है. यह तब हुआ है जब अमेरिकी नेवी अरब सागर में मौजूद है. BBC की रिपोर्ट में कहा गया कि सोमाली सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ‘MT यूरेका’ (MT Eureka) नाम के इस टैंकर को गल्फ ऑफ अदन में हथियारबंद लोगों ने कब्जे में ले लिया. रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 5 बजे हुआ. टैंकर टोगो के झंडे के तहत चल रहा था और यमन के काना पोर्ट के पास समुद्री लुटेरों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया. बताया जा रहा है कि हमलावर सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र के क़ंदाला इलाके से निकले थे और सीधे जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।  जहाज कहां ले जा रहे लुटेरे? सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, हाईजैक के बाद टैंकर अब यमन और सोमालिया के बीच गल्फ ऑफ अदन में आगे बढ़ रहा है और जल्द ही सोमालियाई जलक्षेत्र में लंगर डाल सकता है. इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह पिछले 10 दिनों में दूसरी बड़ी घटना है. इससे पहले 22 अप्रैल को ‘ऑनर 25′ नाम के एक और तेल टैंकर को सोमाली समुद्री डाकुओं ने कब्जे में लिया था, जिसमें 18,500 बैरल तेल था और वह मोगादिशु जा रहा था. उसके क्रू में पाकिस्तानी और एक भारतीय भी थे. लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि समुद्री लुटेरों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।   

होर्मुज संकट से निपटने के लिए ग्रीन सिग्नल, 2000 मेगावाट बिजली और LPG-तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं

मुंबई ईरान जंग के चलते होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों का आना-जाना बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस जैसे हालात पैदा हो गए हैं. तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आने का खामियाजा अब आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है. पश्चिम एशिया में तनाव से पैदा हुए संकट के बीच अब कई देशों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. सौर और पवन ऊर्जा के बाद अब एक और क्‍लीन एनर्जी ऑप्‍शन पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है. वह परमाणु ऊर्जा. भारत ने कुडनकुलम न्‍यूक्लियर एनर्जी प्‍लांट की यूनिट 5 और 6 पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।  दरअसल, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा देते हुए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant (कुडनकुलम) परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जिससे देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस मंजूरी के तहत Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) अब रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अहम उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर सकेगा. यह चरण किसी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद परियोजना अपने अंतिम विकास चरणों में प्रवेश करती है।  मल्‍टी-लेवल सिक्‍योरिटी रिव्‍यू AERB की यह अनुमति एक विस्तृत और मल्‍टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है. नियामक संस्था ने रिएक्टर डिजाइन को अपने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया और यह सुनिश्चित किया कि परियोजना में अब तक हुए सिविल निर्माण कार्य भी संतोषजनक हैं. इससे पहले अप्रैल 2021 में ‘फर्स्ट पोर ऑफ कंक्रीट’ के लिए अनुमति दी गई थी, जिसके बाद से निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है. यूनिट 5 और 6 में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो AERB के लाइट वॉटर रिएक्टर आधारित परमाणु संयंत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा कोड के अनुरूप हैं. ये मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर International Atomic Energy Agency (IAEA) द्वारा निर्धारित नवीनतम सुरक्षा दिशानिर्देशों से मेल खाते हैं. इन यूनिट्स में उन्नत पैसिव सेफ्टी सिस्टम और मजबूत कंटेनमेंट मैकेनिज्म लगाए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा और दुर्घटना-प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सके।  हर यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परियोजना भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र है. यहां कुल छह प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1000 मेगावाट है. यह परियोजना रूस के साथ तकनीकी सहयोग के तहत विकसित की जा रही है और इसे भारत-रूस परमाणु साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कुडनकुलम की पहली दो यूनिट्स 2013 और 2015 से ऑपरेशन में हैं और दक्षिणी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं. वहीं यूनिट 3 और 4 एडवांस स्‍टेज में हैं, जिनके लिए पहले ही प्रमुख उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है. अब यूनिट 5 और 6 के लिए मिली ताजा अनुमति से पूरे प्रोजेक्ट की गति और तेज होने की संभावना है।  परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा कुडनकुलम इन नई यूनिट्स के चालू होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी. साथ ही स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और मजबूत होगी. कुडनकुलम परियोजना का पूर्ण रूप से छह यूनिट्स के साथ संचालन भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. यह परियोजना देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। 

साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस की चेतावनी: न इंसान, न जानवर, वैज्ञानिकों ने कहा – नस्ल बचाना मुश्किल

 नई दिल्ली दुनिया में आज हजारों तरह के सिंथेटिक रसायन (मानव-निर्मित केमिकल) फैले हुए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से कई पेस्टिसाइड, प्लास्टिक, पॉल्यूटेंट और फॉरएवर केमिकल प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि रसायन और जलवायु परिवर्तन मिलकर मानव और जानवरों दोनों की प्रजनन क्षमता, जैव विविधता और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं।  पिछले 50 सालों में पृथ्वी पर वन्यजीवों की आबादी दो-तिहाई से ज्यादा घट चुकी है. इसमें प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी वजह माने जा रहे हैं. इंसानों में भी पुरुष और महिला दोनों में बांझपन की समस्या बढ़ रही है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि हार्मोन बिगाड़ने वाले रसायन (Endocrine Disrupting Chemicals – EDCs) इसके मुख्य कारण हो सकते हैं. आज बाजार में 1000 से ज्यादा ऐसे केमिकल मौजूद हैं जो हमारे शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को नकल करते या रोकते हैं।  विभिन्न जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव एक टेबल में वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि अलग-अलग जीवों पर कौन-कौन से रसायन और तनाव कैसे असर कर रहे हैं…      कीड़े-मकोड़े: Tributyltin, Phthalates, Microplastics आदि से लिंग परिवर्तन, प्रजनन क्षमता घटना.     मछलियां: Pyrethroids, Microplastics से अंडे कम बनना, जनसंख्या घटना.     पक्षी: PFAS, Organoclorines से अंडे से बच्चा निकलने में समस्या.     सरीसृप: धातु और तापमान से लिंग अनुपात बिगड़ना.     मेंढक: Phthalates से प्रजनन सफलता घटना.     समुद्री स्तनधारी: गर्भपात, समय से पहले जन्म.     इंसान: PFAS, Microplastics से स्पर्म की संख्या और गति कम होना, पुरुष जननांगों में समस्या. रसायन पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं और कम मात्रा में भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.। जलवायु परिवर्तन कैसे बढ़ा रहा है खतरा? ग्लोबल वार्मिंग से तापमान बढ़ रहा है, जिससे जानवरों पर अतिरिक्त तनाव पड़ रहा है. गर्मी, ऑक्सीजन की कमी और रसायन मिलकर प्रजनन के तनाव को और बढ़ा देते हैं. स्टडी में कहा गया है कि इंसानों की फर्टिलिटी ट्रेंड वन्यजीवों जैसी ही है. दोनों ही अनजाने में हानिकारक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं।  दुनिया में 1,40,000 से ज्यादा सिंथेटिक केमिकल हैं, लेकिन सिर्फ 1% की पूरी सुरक्षा जांच हुई है. DDT, PFAS (Forever Chemicals) जैसे कई केमिकल पहले इस्तेमाल होते रहे और बाद में इनके नुकसान पता चले।  DDT के कारण पक्षियों के अंडे पतले हो गए. समुद्री जानवरों की प्रजनन क्षमता घटी. PFAS महिलाओं में फर्टिलिटी 40% तक कम कर सकता है. माइक्रोप्लास्टिक भी जनन अंगों में जमा हो रहे हैं, लेकिन उनके पूरे प्रभाव अभी पता नहीं हैं. वैज्ञानिक सुसान ब्रैंडर के नेतृत्व में की गई स्टडी में कहा गया है कि पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हैं. अगर वन्यजीवों की प्रजनन क्षमता खत्म हुई तो पूरा फूड चेन प्रभावित होगा, जिसका असर अंत में इंसानों पर पड़ेगा।  क्या है इस समस्या का समाधान  वैज्ञानिकों का कहना है कि Global Plastics Treaty जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते जरूरी हैं. हमें रसायनों की सुरक्षा जांच तेज करनी होगी. प्लास्टिक प्रदूषण कम करना होगा और क्लाइमेट चेंज रोकने के प्रयास बढ़ाने होंगे।  यह छिपा प्रजनन संकट कोई दूर की बात नहीं है. यह आज हमारे आसपास हो रहा है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर स्वास्थ्य और जैव विविधता संकट का सामना करेंगी. रसायनों और जलवायु दोनों पर एक साथ नियंत्रण जरूरी है, वरना साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस धीरे-धीरे बड़े संकट में बदल सकता है। 

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों की लाइव गिनती शुरू होगी सुबह 8 बजे, यहां देखें पूरा अपडेट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग 4 मई को तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित करेगा। पिछले कुछ हफ्तों में ये चुनाव कई चरणों में कराए गए थे, जिनमें सभी राजनीतिक दलों ने जोरदार प्रचार किया। कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला और मतदान भी अच्छा रहा। मतगणना सुबह 8 बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू होगी। शुरुआती कुछ घंटों में रुझान आने लगेंगे और दिन के अंत तक लगभग सभी सीटों के परिणाम सामने आ जाएंगे। गिनती की शुरुआत पोस्टल बैलेट से होती है, जिसमें सेवा कर्मियों, चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और अन्य लोगों के वोट शामिल होते हैं, जो सीधे मतदान नहीं कर पाए थे। इसके बाद ईवीएम की गिनती शुरू होती है, जिसमें हर मशीन को अधिकारियों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाता है। कैसे होती है वोटों की गिनती? पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ईवीएम से वोटों की गिनती की जाती है। हर मशीन से यह साफ हो जाता है कि किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती है और इसमें उम्मीदवारों के एजेंट भी मौजूद रहते हैं। गिनती के दौरान हर राउंड के बाद अपडेट जारी किया जाता है, जिससे यह पता चलता रहता है कि कौन उम्मीदवार आगे चल रहा है और किस सीट पर मुकाबला कड़ा है। कहां देखें चुनाव परिणाम? आप विधानसभा चुनाव के नतीजों की लाइव कवरेज दैनिक जागरण के प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। यहां आपको पूरे दिन लगातार अपडेट, ग्राउंड रिपोर्टिंग और विशेषज्ञों की राय मिलेगी। वेबसाइट पर सीटवार नतीजे, पार्टी के हिसाब से आंकड़े और लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध होंगे, जिससे आप हर पल की जानकारी आसानी से ले सकेंगे। इसके अलावा, दैनिक जागरण के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी आप तेजी से अपडेट, वीडियो और ब्रेकिंग न्यूज पा सकते हैं, जिससे चलते-फिरते भी नतीजों पर नजर रखी जा सकती है।

ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है।  देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे।  हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं।  क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश? जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है।  पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया।  अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?