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बॉम्बे IIT की खोज ने एलपीजी संकट में दी राहत, जानिए कैसे है ये तकनीकी खोज खास

मुंबई  इन दिनों एलपीजी सिलिंडर क्राइसिस की परेशानी से सभी जूझ रहे हैं। लेकिन आईआईटी बॉम्बे, इस मुश्किल हालात में एलपीजी की कमी को बिल्कुल भी महसूस नहीं कर रहा है। इस खोज की बदौलत बॉम्बे आईआईटी के कैंपस में किचन के चूल्हे लगातार जल रहे हैं। यह खोज, बायोमास गैसिफिकेशन टेक्नोलॉजी, जिसमें गिरी हुई पत्तियों का इस्तेमाल करके कुकिंग गैस बनाई जाती है। बता दें आईआईटी बॉम्बे ने इस तकनीक को पेंटेंट भी करा रखा है। 2014 से चल रहा शोध संस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस बारे में पोस्ट भी किया गया है। इसके मुताबिक यह इनोवेशन दशकों के रिसर्च का परिणाम है। यह रिसर्च साल 2014 में, केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के नेतृत्व में शुरू हुई थी। महाजनी ने  बताया कि तब आईआईटी बॉम्बे के हरे-भरे मैदान में काफी ज्यादा सूखी पत्तियां गिरी रहती थीं। इन पत्तियों को डिस्पोज करना एक बड़ा टास्क हुआ करता था। इन सूखी पत्तियों को ठिकाने लगाने का रास्ता ढूंढते-ढूंढते हम गैसिफायर तक पहुंच गए। आसान नहीं था सफर इस पोस्ट में आगे बताया गया है कि यह यात्रा इतनी आसान नहीं है। शुरुआती ट्रायल्स में काफी ज्यादा धुआं हो रहा था। इसके चलते किचन स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसके मुताबिक एक बड़ी बाधा, क्लिंकर बनाने की थी। ठोस अवशेष के चलते ट्रैडिशन सिस्टम जाम हो जाते थे। इन असंतुलनों के बावजूद, टीम ने टेक्नोलॉजी पर काम करना जारी रखा। 2016 तक, उन्होंने एक पेटेंट प्राप्त गैसीफायर विकसित कर लिया। इसके बाद चीजें काफी आसान हो गईं। अब सफलतापूर्वक लागू साल 2017 में, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संदीप कुमार इस प्रोजेक्ट में शामिल हुए और एक बेहतर बर्नर डिजाइन पर काम किया। संस्थान की लिविंग लैब पहल ने कैंपस में टेस्टिंग की अनुमति दी। इससे टीम को सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सही करने और यूजर्स के बीच भरोसे को फिर से स्थापित करने में मदद मिली। निरंतर परीक्षण और सुधार के एक साल के बाद और आगे कुछ काम के बाद, 2024 तक यह सिस्टम स्टाफ कैंटीन में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया। अब मेस में भी लगाने का प्लान आज आलम यह है कि कैंटीन में एलपीजी का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी तक कम हो चुका है। इसकी थर्मल एफिशिएंसी 60 फीसदी तक है और उत्सर्जन बहुत कम होता है। इस तकनीक ने न केवल ईंधन की लागत घटाई है बल्कि यह सुनिश्चित भी किया है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो जाए, तो खाना पकाने का काम सहज रूप से जारी रह सके। इस सिस्टम से सालाना करीब आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है। पोस्ट में कहा गया है कि हॉस्टल की मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे एलपीजी की खपत में काफी कमी आ सकती है। इससे सालाना 50 लाख तक की बचत हो सकती है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से भत्तों और पेंशन में भारी बढ़ोतरी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की मंजूरी मिलने के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद अहम अपडेट सामने आया है. वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इसकी समय-सीमा और प्रक्रिया को लेकर जानकारी साझा की है. संसद में बोलते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. जब तक रिपोर्ट नहीं आती है तब तक इसकी संभावना लगाना कि इसे कब से लागू किया जाएगा, सही नहीं है. 8वें वेतन आयोग को लेकर कई लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी हैं जैसे इसके लागू होने से किन लोगों को फायदा मिलेगा, बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी या भत्तों और पेंशन किस तरह से बांटे गए हैं. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए जानते हैं इसका जवाब. कितनी बढ़ सकती है सैलरी? सैलरी में बढ़त की बात करें, तो इसे लेकर अभी तक कोई ऑफिशियल नोटिस नहीं आई है. लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी. वहीं, 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आसपास बढ़ोतरी हुई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्टर है. भत्तों में भी होगा इजाफा सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में भी संशोधन किया जा सकता है. इससे कर्मचारियों की लाइफस्टाइल और सेविंग्स दोनों में सुधार होगा. नए उम्मीदवारों को क्या फायदा मिलेगा? जो युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए 8वां वेतन आयोग एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है.  नई हायरिंग में बढ़ी हुई सैलरी और बेहतर सुविधाएं मिलने से सरकारी नौकरी पहले से ज्यादा आकर्षक बन जाएगी. बेसिक सैलरी में होगी बढ़ोतरी बेसिक सैलरी (Basic Pay) में, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने से न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है (मान लेते है कि ₹18,000 से बढ़कर ₹41,000 तक) हो सकती है. पेंशनर्स को भी मिलेगा लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारी ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

जनगणना 2026: 1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी, जानें कौन-से 33 सवाल होंगे आपसे पूछे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। 2027 जनगणना का पहला चरण क्या होगा केंद्र सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर पहले फेज का फ्रेमवर्क बना दिया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेज हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर बेस्ड होगा. जनगणना अधिकारी घरों की गिनती करेंगे और उनकी रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक इसका मकसद यह है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा तैयार हो. इससे सरकार को विकास योजनाएं ज्यादा टारगेटेड तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।  33 सवालों में क्या क्या शामिल रहेगा? इस बार पूछे जाने वाले सवाल घर की संरचना और परिवार की स्थिति को लेकर होंगे. मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस चीज की है, घर में कितने सदस्य रहते हैं और कितने विवाहित जोड़े हैं, यह दर्ज किया जाएगा. घर का मुखिया पुरुष है या महिला और वह किस सामाजिक वर्ग से है. यह भी पूछा जाएगा।  सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा. पीने का पानी, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की उपलब्धता दर्ज होगी. परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार जैसे साधन हैं या नहीं, यह भी जानकारी ली जाएगी. यहां तक कि रोजमर्रा में किस तरह का अनाज ज्यादा खाया जाता है. यह भी नोट किया जाएगा।  जवाब न देने पर क्या होगा? जनगणना एक लीगल प्रोसेस है और जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत सूचना देता है. तो जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रोसेस लागू होती है।  जनगणना का मकसद किसी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं है. असल मकसद यह समझना है कि देश के किस हिस्से में किन सुविधाओं की जरूरत है. सही जानकारी मिलने पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य योजनाओं का बजट सही ढंग से तय किया जा सकता है. इसलिए सहयोग देना आपके इलाके के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।  जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी– शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

पश्चिमी विक्षोभ का डबल अटैक, दिल्ली से लेकर राजस्थान और यूपी तक बदलेगा मौसम, ओलावृष्टि की चेतावनी

 दिल्ली देश के 15 से अधिक राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है. अप्रैल महीने की शुरुआत होने जा रही है और आमतौर पर इस समय कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ने लगती है. लेकिन इस बार झुलसाने वाली गर्मी की बजाय आसमान से झमाझम बारिश हो रही है. करीब पूरे मार्च महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बादलों का असर देखने को मिला. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों तक मौसम का यही बदला हुआ रुख बना रह सकता है. उत्तर, पूर्वोत्तर, पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदल रहा मौसम भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दो दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने और कई चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के कारण देश भर में मौसम का मिजाज बदल गया है. इसके कारण कई इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जारी है. आईएमडी के मुताबिक उत्तर भारत के मौसम पर इस समय कई सिस्टम एक साथ असर डाल रहे हैं. उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी है और इसका असर उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंच रहा है. इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ बने हुए हैं, जिनसे मौसम में अस्थिरता बढ़ गई है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक भी निचले स्तरों पर ट्रफ सक्रिय हैं. पूर्वोत्तर भारत में बिहार से मणिपुर तक, मेघालय और असम के रास्ते पूर्व-पश्चिम गर्त (ट्रफ) बना हुआ है. जम्मू कश्मीर में बारिश और 50 किमी की रफ्तार से तेज हवा मौसम विभाग के अनुसार 3 और 4 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख समेत कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इस दौरान गरज-चमक, बिजली और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 3 से 5 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हिमाचल प्रदेश में 5 अप्रैल तक बारिश का अनुमान शिमला मौसम कार्यालय ने अनुमान जाहिर किया है कि राज्य में पांच अप्रैल तक बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने बताया कि दो अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है. इसके कारण हिमाचल प्रदेश में भी मौसम बदलेगा. मौसम विभाग ने इस दौरान बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, बिजली कड़कने और गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी दी है. आईएमडी ने येलो अलर्ट जारी किया है. दिल्ली समेत पंजाब हरियाणा में बारिश मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 3 से 5 अप्रैल के दौरान बारिश और तेज हवा का नया दौर दिख सकता है. 31 मार्च को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हल्की से लेकर मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इस दौरान कही-कही गरज-चमक के साथ छीटें भी पड़ने की संभावना है. कुछ इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. उत्तर प्रदेश में बारिश के आसार उत्तर प्रदेश के आगरा और अलीगढ़ जिलों में सोमवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग का अनुमान है कि आज (31 मार्च) को भी कई इलाकों में बारिश हो सकती है. विभाग ने बारिश को लेकर 24 घंटे का अलर्ट भी जारी किया था. हालांकि यूपी में कई जगहों पर मौसम शुष्क बना रहा. बीते 24 घंटों के दौरान बांदा प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं प्रयागराज में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस रहा. राजस्थान के कई इलाकों में आंधी-बारिश की चेतावनी नये पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजस्थान के कई इलाकों में मौसम का मूड बिगड़ा हुआ है. सोमवार को राजधानी जयपुर सहित कई इलाकों में सोमवार दोपहर बाद तेज हवाएं चलीं और कई स्थानों पर बूंदाबांदी हुई. मौसम विज्ञान केंद्र-जयपुर के अनुसार राज्य में फिलहाल हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. आईएमडी ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक परिसंचरण तंत्र सक्रिय है, जिसके असर से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. एक और दो अप्रैल को कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी के आसार हैं जबकि अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. इसके अलावा तीन से पांच अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है. झारखंड के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तूफानी हवा का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक आज (31 मार्च) को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. राज्य के पांच जिले बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, दुमका और पाकुड़ में ओलावृष्टि के लिए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. जबकि बाकी के 19 जिलों में गरज के साथ बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. आईएमडी के अनुसार 2 और 3 अप्रैल को झारखंड के दक्षिणी और मध्य जिलों में हल्की बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और बिजली कड़कने का अनुमान है. रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया- आसमान में तीन अप्रैल तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे. बिहार में गरज चमक के साथ बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है. कुछ इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्व बिहार के सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा, दक्षिण-पूर्व बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया और जमुई, दक्षिण-पश्चिम बिहार के बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ (कैमूर), औरंगाबाद और अरवल जिलों में मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता … Read more

टेनिस स्टार लिएंडर पेस अब बीजेपी के साथ, किरेन रिजिजू और सुकांत मजूमदार ने दिलाई सदस्यता

 दिल्ली खेल की दुनिया में तिरंगे का मान बढ़ाने वाले महान टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने सोमवार को राजनीति के ‘कोर्ट’ पर अपनी नयी पारी की शुरुआत की. नयी दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुकांत मजूमदार की मौजूदगी में पेस ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ली. बंगाल चुनाव 2026 से ठीक पहले इस ‘बंगाली आइकॉन’ की बीजेपी में एंट्री ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. माइकल मधुसूदन दत्त के वंशज अब ‘कमल’ के साथ लिएंडर पेस का भाजपा में शामिल होना केवल एक खिलाड़ी का दल बदलना नहीं है. इसके गहरे सांस्कृतिक मायने हैं. पेस बंगाल के महान कवि माइकल मधुसूदन दत्त के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. बीजेपी में शामिल होने के बाद पेस भावुक हो गये. उन्होंने कहा- मैं एक गौरवशाली बंगाली विरासत में जन्मा हूं. मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल में अपार क्षमताएं हैं और हम मिलकर राज्य को नयी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं. सुकांत मजूमदार ने पेस को बताया बंगाल का सपूत केंद्रीय मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार ने पेस को ‘बंगाल का सपूत’ बताया. कहा कि उनका भाजपा में आना बंगाल के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा पेस के जरिये बंगाल के शहरी और शिक्षित मतदाताओं में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है. सुकांत मजूमदार ने कहा- पेस का साथ आना बंगाल में भाजपा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा. मिशन ओलिंपिक और युवाओं पर फोकस लिएंडर पेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने भविष्य के लक्ष्यों का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य देश के कोने-कोने में खेल सुविधाओं को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि जब भारत ओलिंपिक की मेजबानी करेगा, तब हमें दुनिया के सामने अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्ति दिखानी होगी. लिएंडर पेस ने ‘खेलो इंडिया’ योजना की तारीफ करते हुए कहा कि वे युवाओं को सशक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करेंगे. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने लिएंडर पेस को दिलायी भाजपा की सदस्यता. किरेन रिजिजू ने याद किये पुराने दिन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पार्टी में लिएंडर पेस का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के दिनों से ही लिएंडर युवाओं के लिए प्रेरणा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह पेस ने टेनिस कोर्ट पर भारत को जीत दिलायी, वैसी ही एक ‘बड़ी पारी’ वे अब सार्वजनिक जीवन और राजनीति में खेलेंगे.

इटली का ट्रंप को झटका: ईरान जंग के बीच अमेरिकी वॉरप्लेन को अपने बेस पर नहीं उतारने दिया

रोम  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ना उनके यूरोपीय सहयोगियों को बिल्कुल रास नहीं आ रहा. हाल ही में स्पेन ने कहा कि ईरान पर हमला करने के लिए जा रहे किसी भी अमेरिकी युद्धक विमान को स्पेन के ऊपर से गुजरने की इजाजत नहीं है. अब अमेरिका के करीबी नाटो सहयोगी इटली ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया है. इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर उतरने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।  सिगोनेला एयर बेस पर रुकने के बाद अमेरिकी सैन्य विमान युद्धग्रस्त क्षेत्र मिडिल ईस्ट की तरफ जाने वाले थे. मामले से जुड़े एक सूत्र ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने अमेरिकी विमानों को अपने बेस पर उतरने की इजाजत नहीं दी।  इटली के अखबार 'Corriere della ​Sera' ने रिपोर्ट किया कि कुछ अमेरिकी बॉम्बर्स सिसिली के पूर्वी हिस्से में स्थित इस बेस पर उतरने वाले थे, इसके बाद उन्हें मध्य पूर्व जाना था. हालांकि, यह नहीं बताया गया कि अमेरिकी बॉम्बर्स कब उतरने वाले थे।  सूत्र ने यह भी साफ नहीं किया कि अमेरिकी ग्रुप में कितने विमान शामिल थे और इटली ने कब उन्हें उतरने से मना कर दिया।  इटली के अखबार ने यह भी कहा कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि अमेरिका ने इसके लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया था. इटली ने कहा कि अमेरिका ने उसके सैन्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया, जबकि देश में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को लेकर संधियों के तहत यह जरूरी है।  वामपंथी विपक्षी दलों ने सरकार से अपील की है कि वो इटली में स्थित अमेरिकी ठिकानों को इस्तेमाल न करने दे ताकि देश ईरान संघर्ष में शामिल होने से बच सके।  प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार ने कहा है कि अगर अमेरिका की तरफ से इस तरह का कोई अनुरोध किया जाता है, तो वो संसद से मंजूरी लेगी।  स्पेन ने किया मना, स्विट्जरलैंड ने भी अमेरिका की जंग से कर लिया है किनारा इसी हफ्ते सोमवार को स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने कहा कि स्पेन ने उन अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है जो ईरान पर हमलों में शामिल हैं. उन्होंने कहा, 'हम न तो सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत देंगे और न ही ईरान में युद्ध से संबंधित कामों के लिए हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की।  कुछ दिनों पहले यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड ने भी ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिका से किनारा कर लिया था. स्विट्जरलैंड ने कहा था कि वो ईरान पर जारी हमलों को देखते हुए अमेरिका को हथियार बेचने के लिए अपनी कंपनियों को लाइसेंस नहीं देगा।  यूरोपीय देश ने कहा कि वो किसी भी तरह से युद्ध को बढ़ावा नहीं दे रहा बल्कि वो तटस्थ है और अमेरिका को हथियारों का निर्यात जारी नहीं रख सकता।  सरकार ने एक बयान में कहा था, 'ईरान के साथ चल रहे अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल देशों को युद्ध सामग्री के निर्यात की इजाजत संघर्ष के चलते नहीं दी जा सकती. हम अमेरिका को फिलहाल हथियारों के निर्यात की इजाजत नहीं देंगे। 

ट्रंप का बयान: अमेरिका ने दिया संकेत, युद्ध रुक सकता है, बाजार में सकारात्मक माहौल

वाशिंगटन शेयर बाजार में बड़ी तेजी का संकेत दिखाई दे रहा है. मंगलवार को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जो अमेरिकी बाजारों के लिए एक मजबूत शुरुआत का संकेत है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के ईरान में युद्ध समाप्‍त करने के लिए तैयार होने की रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई।  सुबह करीब 10.45 बजे NASDAQ-100 से जुडे फ्यूचर प्राइस 0.55 प्रतिशत ऊपर थे. S&P 500 के फ्यूचर प्राइस में 0.7 फीसदी की उछाल हुई, जबकि डाउ जोन्‍स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर प्राइस में 0.8 फीसदी की तेजी आई. मंगलवार को तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।  वॉर बंद होने के संकेत इधर, भारत में भी गिफ्ट निफ्टी तेजी का संकेत दे रहा है. हालांकि, आज भारतीय बाजार महावीर जयंती की वजह से बंद है. शेयर बाजार में यह तेजी का संकेत सिर्फ एक रिपोर्ट के कारण है. रॉयटर्स के अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि  ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले बिना ईरान के खिलाफ सैन्‍य कार्रवाई योजना समाप्‍त करने को तैयार हैं।  तेल की कीमतों में भी गिरावट ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस में  1.22 डॉलर या 1.08 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 111.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि शुरुआती कारोबार में इसमें 2 फीसदी की तेजी थी. इसके साथ ही नेचुरल गैस कीमत और डॉलर इंडेक्‍स में भी गिरावट देखी जा रही है।  एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में गिरावट शॉर्ट टर्म में युद्ध समाप्‍त‍ि की संभावना को दिखाता है. उन्‍होंने कहा कि कोई भी महत्वपूर्ण परिवर्तन होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह से खुलने पर निर्भर करेगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को अमेरिकी सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार हैं, भले ही होमुर्ज काफी हद तक बंद रहे और बाद में इसे फिर से खोलने पर विचार किया जाए।   एशियाई मार्केट में भी गिरावट  अमेरिकी बाजार इस समय भले ही तेजी का संकेत दे रहा है, लेकिन एशियाई बाजार में गिरावट आई है. जापान का निक्‍केई 1.58 फीसदी गिर गया है. चीन का शंघाई 0.80% गिरा हुआ है और साउथ कोरिया का कोस्‍पी 4.26 फीसदी टूट चुका है और इस महीने इसमें 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने की संभावना है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी।  घरेलू बाजार की बात करें तो, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कमजोर निवेशक भावना के बीच सोमवार को 2025-26 वित्तीय वर्ष के अंतिम कारोबारी सत्र में इक्विटी बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।  सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ. दिन के दौरान इसमें 1,809.09 अंक या 2.45 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 71,774.13 पर पहुंच गया. निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ। 

विदेश से वतन वापसी: पश्चिम एशिया से 5 लाख 72 हजार भारतीय भारत पहुंचे

नई दिल्ली  सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र से लगभग 5,72,000 यात्री भारत लौट आए हैं, और कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के साथ ही, मंगलवार को देश के लिए लगभग 8-10 गैर-निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। यूएई में, एक दिन में लगभग 85 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। ऑपरेशनल और सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए, सीमित संख्या में गैर-निर्धारित उड़ानें जारी हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, ओमान और सऊदी अरब से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र बंद है। सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए विशेष गैर-निर्धारित कमर्शियल उड़ानें संचालित हो रही हैं। मंत्रालय ने कहा, "ईरान में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों को यात्रा की सुविधा आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते दी जा रही है। इजरायल में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों को देखते हुए, भारतीय नागरिक मिस्र और जॉर्डन के रास्ते स्वदेश लौट रहे हैं।" मंत्रालय ने आगे कहा कि इराक में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, भारतीय नागरिकों की यात्रा की सुविधा जॉर्डन और सऊदी अरब के रास्ते दी जा रही है। इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है; उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है और उनकी सुरक्षा तथा कल्याण के लिए परामर्श जारी किए जा रहे हैं। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। सरकार के अनुसार, पश्चिमी फारसी खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 485 भारतीय नाविक सवार हैं; डीजी शिपिंग, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। डीजी शिपिंग ने अब तक 959 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वतन वापसी में सहायता की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में वापस लौटे 9 नाविक भी शामिल हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है; गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के राज्य समुद्री बोर्डों ने बंदरगाहों के सुचारू रूप से काम करने की पुष्टि की है।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पर सवाल: क्या 2026 में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध हो सकता है?

 नईदिल्ली  ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच रखी हैं. हर कोई सोच रहा है कि आगे क्या होगा. लोग डर और चिंता में हैं क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ लोग इसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने आने वाले समय में बड़े युद्ध और दुनिया में उथल-पुथल होने की बात कही थी. यही वजह है कि 2026 में नास्त्रेदमस जैसी पुरानी भविष्यवाणियां फिर सुर्खियों में आ गई हैं. लोग यह भी सोच रहे हैं कि इस बड़े तनाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर क्या होगा. क्या यह शेयर बाजार में कोई बड़ी गिरावट का संकेत है।  क्या कहती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी? नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में सीधे सीधे कभी सोना, चांदी या 2026 में मंहगाई का जिक्र नहीं किया था. लेकिन, उनकी लिखी बातें अक्सर युद्ध, आर्थिक उथल-पुथल और दुनिया में अस्थिरता की चेतावनी के रूप में देखी जाती हैं. आज लोग इन्हें हाल के युद्ध और संकट से जोड़कर देख हैं. युद्ध के समय लोग सोना और चांदी जैसी संपत्ति की तरफ जाते हैं. इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जा सकती हैं. लेकिन, बाजार में हमेशा ऐसा नहीं होता है क्योंकि कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है।  सोना‑चांदी के रेट ऊपर जाएंगे या नीचे? हाल ही के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि स्थिति थोड़ी उलझी हुई है. युद्ध और तनाव होने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें कभी-कभी नीचे जा रही हैं. इसका मुख्य कारण है अमेरिका में डॉलर का मजबूत होना और ब्याज दरों का बढ़ना. असल में इसका मतलब यह है कि सिर्फ दुनिया में युद्ध का होना ही कीमतें बढ़ाने के लिए काफी नहीं. बाजार में और भी कई चीजें असर डालती हैं जैसे कि पैसे की कीमत (डॉलर) और बैंक की नीतियां. यानी, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी चाहे जैसी भी हो, असली मार्केट की चाल तो इन असली आर्थिक कारणों से तय होती है।  क्या हो सकता है तीसरे विश्व? आजकल लोग ये बात खूब कर रहे हैं कि क्या मौजूदा हालात आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकते हैं. इसकी वजह ये है कि नास्त्रेदमस ने अपनी लिखी बातों में बड़े युद्ध का जिक्र किया था, जिसे लोग आज के हालात से जोड़ रहे हैं. लेकिन सच यह है कि उनकी बातों में कहीं भी साफ-साफ आज के किसी तीसरे विश्व युद्ध का जिक्र नहीं मिलता है।  एक्सपर्ट क्या कहते हैं और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या कहती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना, चांदी और शेयर बाजार का हाल महंगाई, ब्याज दर और दुनिया भर की सप्लाई जैसी चीजों पर निर्भर करता है. यानी बाजार असली आर्थिक हालात से चलता है, न कि किसी भविष्यवाणी से. वहीं, नास्त्रेदमस की लिखी बातें सीधी नहीं होतीं हैं, बल्कि इशारों में होती हैं. लोग उन्हें अपने हिसाब से समझ लेते हैं, इसलिए एक ही बात के अलग-अलग मतलब निकाले जाते हैं।  नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां लोगों के बीच चर्चा और डर को जरूर बढ़ा देती हैं, लेकिन असली मार्केट ऊपर-नीचे होने के पीछे वजह अर्थव्यवस्था और दुनिया के हालात होते हैं. इसलिए, निवेश करते समय अंदाजों या भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि सही डेटा और एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करना ज्यादा समझदारी है।   

सूरत हादसा: आग की लपटों में घिरी बिल्डिंग, एक परिवार के 5 सदस्यों की जान गई

सूरत  इस हादसे मेंगुजरात के सूरत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां लिंबायत क्षेत्र की मीठी खाड़ी के पास स्थित एक रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। एक ही परिवार के पांच सदस्य, जिनमें एक बच्चा और महिलाएं शामिल हैं, बुरी तरह झुलस गए। अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान सभी पांचों लोगों ने दम तोड़ दिया। साड़ियों के ढेर ने घर को बनाया 'मौत का जाल' शुरुआती जाँच और अधिकारियों के बयानों के अनुसार, यह परिवार साड़ी बनाने और संग्रहण का काम करता था। घर के भीतर लगभग 10 टन साड़ियां रखी हुई थीं। पूर्व मेयर दक्षेशभाई मावानी ने बताया कि घर इतना छोटा था कि साड़ियों के ढेर के बीच चलने-फिरने तक की जगह नहीं थी। बड़ी मात्रा में कपड़ों की मौजूदगी के कारण आग तेजी से फैली और घना धुआं भर गया। धुएं से घुटा दम: मृतकों में 4 साल का बच्चा भी शामिल दमकल विभाग के अधिकारियों का संदेह है कि इन मौतों का मुख्य कारण आग से झुलसना नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटना है। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है…     शाहनाज़ बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (65 वर्ष)     शबीना रमज़ान अली अंसारी (28 वर्ष)     परवीन अब्दुल कलाम अंसारी (19 वर्ष)     हुसा बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (18 वर्ष)     शुभान रमज़ान अली अंसारी (4 वर्ष) अधिकारियों ने की सतर्क रहने की अपील घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। मौके पर पूर्व मेयर, डीसीपी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी भी पहुंचे। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का ध्यान रखें और रिहायशी घरों में इतनी भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री (जैसे साड़ियाँ) जमा न करें, जिससे आपात स्थिति में बचाव कार्य बाधित हो। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के सटीक कारणों की जांच कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- Rajasthan Board Result: निकिता ने 12वीं में पाए 93.88% अंक, पर रिजल्ट से 10 दिन पहले हो गया निधन