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युद्ध के बीच जेलेंस्की का बड़ा बयान: ईरान-रूस साथ, अमेरिका को दी मदद की पेशकश

यूक्रेन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को रूस और ईरान को 'नफरत के मामले में भाई-भाई' बताया है और पश्चिमी देशों से यूक्रेन को ना भूलने की गुजारिश की है। जेलेंस्की ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से ऐसे वक्त में समर्थन मांगा जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अमेरिका की मध्यस्थता वाली रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जेलेंस्की ने इस दौरान पश्चिमी देशों को ईरानी ड्रोन का मुकाबला करने के लिए मदद की भी पेशकश की है। ब्रिटेन की संसद में अपने बयान में जेलेंस्की ने कहा, ''रूस और ईरान की सरकारें नफरत के मामले में भाई-भाई हैं और इसीलिए वे हथियारों के मामले में भी भाई-भाई हैं। हम चाहते हैं कि नफरत पर आधारित सरकारें कभी किसी भी चीज में जीत हासिल ना कर सकें।'' वहीं लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में जेलेंस्की से बातचीत के दौरान स्टार्मर ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष से लाभ नहीं मिलना चाहिए, चाहे वह तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो या प्रतिबंधों में ढील। स्टार्मर और जेलेंस्की के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका ने वैश्विक आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटा दिए। जेलेंस्की और कुछ अन्य यूरोपीय नेताओं ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे मॉस्को को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदद की पेशकश इस दौरान जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका और अन्य देश पश्चिम एशिया के संघर्ष में यूक्रेन की ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, “मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र में 201 यूक्रेनी मौजूद हैं। और 34 अन्य तैनात होने के लिए तैयार हैं। ये सैन्य विशेषज्ञ हैं, ऐसे विशेषज्ञ जो जानते हैं कि मदद कैसे करनी है और शाहेद ड्रोन से बचाव कैसे करना है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी टीमें पहले से ही अमीरात, कतर, सऊदी अरब में मौजूद हैं, और कुवैत के रास्ते में हैं। हम कई अन्य देशों के साथ भी काम कर रहे हैं। और मैंने इन सैन्य विशेषज्ञों को अपने साझेदारों, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है,के अनुरोध पर भेजा है।”  

ED रेड में दखल पड़ा भारी! सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के कदम को बताया गलत

कोलकाता पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों आई-पैक के दफ्तर पर हुई ईडी की छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सरकार ने ईडी की याचिका पर सुनवाई टालने की अपील की थी, जिसके बाद कोर्ट ने दो टूक जवाब दिया कि आप हुक्म नहीं चला सकते हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा, जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। इसके अलावा, ईडी रेड के दौरान ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आपने जो किया, वह गलत था। कोर्ट ने कहा, ''जो हुआ, वह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी। यह असामान्य है।'' दरअसल, इस साल की शुरुआत में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव की रणनीति बनाने वाली आईपैक एजेंसी और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान, ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थीं, जिसके बाद उनका जांच एजेंसी के अधिकारियों से आमना-सामना भी हुआ था। ममता ने आरोप लगाया था कि ईडी टीएमसी के संवेदनशील डेटा और हार्ड डिस्क ले जा रही थी। ईडी ने हवाला कारोबार और कोयला तस्करी से जुड़े एक मामले में आईपैक व उसके प्रमुख पर रेड डाला था। लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुनवाई टालने के लिए कहा। उन्होंने ईडी द्वारा दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे पर जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सुनवाई में देरी करने की चाल है। हलफनामा तो चार हफ्ते पहले ही दायर कर दिया गया था और जवाब दाखिल करने के लिए उनके पास लंबा समय था। दीवान ने कहा कि अगर कोर्ट ईडी के जवाब को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रही है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर इस पर विचार किया जाना है तो… इस पर जस्टिस मिश्रा ने तुरंत जवाब दिया, ''हम किसी भी चीज को नजरअंदाज क्यों करें। आप हम पर हुक्म नहीं चला सकते हैं। हम हर चीज पर विचार करेंगे।'' उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार की स्थिति काफी कमजोर है, क्योंकि हमें ईडी के आरोपों का जवाब देने के लिए बिना किसी लिखित जवाब के ही बहस करनी पड़ रही है। यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें एक विस्तृत जवाब की जरूरत है। बंगाल सरकार ने बुधवार को I-PAC पर हुई छापेमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ को मामला भेजने की मांग की। सरकार ने दलील दी कि यह मामला संवैधानिक व्याख्या से जुड़े अहम सवाल उठाता है, खासकर केंद्र-राज्य संबंधों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका की स्वीकार्यता को लेकर। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के सामने कहा कि मौजूदा कार्यवाही पर दो जजों की पीठ फैसला नहीं दे सकती, क्योंकि इसमें संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी सवाल शामिल हैं। उन्होंने दलील दी कि यह विवाद केंद्र और किसी राज्य के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए सही मंच और तरीके से जुड़ा है, जिसकी, उनके अनुसार, संविधान की संघीय संरचना के आधार पर जांच की जानी चाहिए। दीवान ने दलील दी, "यह संविधान की व्याख्या से जुड़ा मामला है। इस मुद्दे की जांच करने का एक ढांचा और तरीका है… अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता। यह संघीय संरचना को कमज़ोर करता है, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।" दीवान ने आगे कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी को किसी राज्य के खिलाफ सीधे अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, केंद्र-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए संवैधानिक ढांचे को दरकिनार करना होगा  

बीच समंदर बदला रास्ता: रूस का तेल लेकर आ रहा जहाज अब भारत पहुंचेगा, जानें वजह

रूस दुनियाभर में ईंधन आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच रूसी तेल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक एक रूसी तेल से भरा टैंकर, जो चीन की तरफ बढ़ रहा था, दक्षिण चीन सागर में अपना रास्ता बदलकर अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक 'एक्वा टाइटन' 21 मार्च को न्यू मैंगलोर तट पर पहुंचने वाला है। यह टैंकर अपने साथ 'यूराल' तेल का कार्गो ला रहा है, जिसे जनवरी के आखिर में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से लोड किया गया था। जानकारी के मुताबिक यह जहाज शुरुआत में चीन के रिझाओ पोर्ट की तरफ जा रहा था। लेकिन हाल ही में इसने अपनी मंजिल बदल ली। वहीं 'वॉर्टेक्सा लिमिटेड' के मुताबिक रूस से तेल ले जा रहे कम से कम सात टैंकर ने सफर के बीच में ही चीन की बजाय भारत की ओर मुड़ गए हैं। इसके अलावा ट्रैकिंग डेटा से यह भी पता चला है कि 'स्वेज़मैक्स ज़ूज़ू एन.' जहाज ने भारत के सिक्का बंदरगाह को अपनी अगली मंजिल बताया है और यह 25 मार्च को यहां पहुंच सकता है। यह टैंकर कजाखस्तान का कच्चा तेल ले जा रहा है। होर्मुज प्रभावी रूप से बंद यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद हो गया है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान से इस रास्ते से जहाजों को ना गुजरने की धमकी दी है। बता दें कि इस रास्ते से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 फीसदी हिस्सा गुजरता है। रिफाइनर हुए सक्रिय जानकारी के मुताबिक यह मार्ग बाधित होने और अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने की ‘छूट’ मिलने के बाद भारत के सभी प्रमुख रिफाइनर रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए सक्रिय हो गए हैं। भारतीय रिफाइनरियों ने बीते कुछ दिनों में रूस से करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। इससे पहले भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य स्रोतों के विकल्प भी तलाश रहा है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।  

खरगे का तंज—प्यार हमसे, शादी मोदी से, PM मोदी भी हंसे, संसद में छाया मजेदार पल

नई दिल्ली हंगामों से भरपूर सदन में बुधवार को तब जमकर ठहाके लगे, जब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सांसद एचडी देवगौड़ा का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि देवगौड़ा ने शादी मोदी जी के साथ कर ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवगौड़ा के साथ खरगे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की जमकर तारीफ की। क्या हुआ खरगे ने कहा, 'मैं देवगौड़ा को बहुत दिन से, 54 सालों से जानता हूं। उनके साथ ही मैं काम किया, लेकिन क्या मुझे मालूम नहीं। वह तो प्रेम हमारे साथ किए, लेकिन शादी मोदी साहब के साथ कर लिए। ये हाल ही में हुए। तो आप कैसे माने ये मुझे मालूम नहीं है।' उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में जमकर ठहाके लगे और पीएम मोदी भी हंसते हुए नजर आए। पीएम मोदी ने की तारीफ देवगौड़ा, खरगे और पवार की पीएम मोदी ने खास तौर पर सराहना की और उन्हें ऐसे स्तंभ बताया जिन्होंने अपने जीवन का आधे से अधिक समय संसदीय कार्यवाहियों में बिताया। उन्होंने कहा 'जिस तरह वे नियमित रूप से सदन आते हैं, कार्रवाई में इतनी निष्ठा के साथ भाग लेते हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है। यह एक ऐसी भावना है जिससे सभी नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए।' पीएम मोदी ने राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदाई देते हुए संसद को 'एक खुला विश्वविद्यालय' करार दिया। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों से राष्ट्रीय जीवन में योगदान जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा 'राजनीति में फुल स्टॉप नहीं होता।' उन्होंने कहा, 'भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव हमेशा हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा रहेगा।' उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा 'हमारे अठावले जी वास्तव में सदाबहार हैं। वह जा रहे हैं, फिर भी मुझे विश्वास है कि कोई खालीपन महसूस नहीं करेगा, वह लगातार सेवाएं देते रहेंगे।'  

इजरायल का बेरूत पर हमला! मिसाइल गिरते ही ढही बहुमंजिला इमारत, 6 की मौत

बेरूत इजरायल ने अपने पड़ोसी देश लेबनान पर भीषण हमला किया है। बुधवार को उसने बिना किसी पूर्व सूचना के मिसाइल दाग दी, जिसमें एक बड़ी इमारत देखते ही देखते जमींदोज हो गई। इसका वीडियो भी दुनिया भर में तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना में 6 लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है। यही नहीं इजरायल का कहना है कि वह दक्षिणी लेबनान में हमला करने की तैयारी में था, लेकिन बेरुत में मिसाइल लॉन्च हो गई। ईरान से जारी जंग के बीच लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए थे। 2 मार्च को हुई इस घटना के बाद लेबनान भी जंग में शामिल हो गया और इजरायल ने उस पर लगातार हमले किए हैं।  

पूर्ण बहुमत से आगे बढ़ी भाजपा: राज्यसभा में NDA की ताकत 140 के पार

नई दिल्ली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटें मिली थीं तो माना गया था कि यह उसके लिए झटका है। यही नहीं 2014 और 2019 के आम चुनाव के मुकाबले नई बनने वाली सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भाजपा को गठबंधन पर निर्भर रहते हुए सरकार चलानी थी। इन सब आशंकाओं के बाद भी भाजपा और उसके नेतृत्व में एनडीए ने जिस तरह से सफलताएं हासिल की हैं, वह चौंकाने वाला है। भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों के चुनाव 2024 के झटके के बाद ही जीते हैं। यही नहीं अब इसका असर राज्यसभा में भी दिखा है और उसकी संख्या पहली बार 100 के पार हुई है। फिर एनडीए भी पहली बार 141 सीटों पर पहुंच गया है। 250 सदस्यों वाली राज्यसभा में इतना एनडीए के पक्ष में इतना बड़ा बहुमत आना उसके लिए बड़ी सफलता है। खासतौर पर हाल ही में खाली हुईं 37 राज्यसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल करके एनडीए ने अपने स्कोर को 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया है। ओडिशा, बिहार में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें हासिल कर ली हैं। भाजपा के पास उच्च सदन में 101 निर्वाचित सांसद हैं, जबकि 5 मनोनीत सांसद भी उसके पक्ष में हैं। ऐसी स्थिति में उसके यहां 106 सदस्य हो जाते हैं। एनडीए में भाजपा के बाद एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सांसद हैं। फिर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हो गए हैं तो वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के भी 2 सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश में सत्ता चला रही टीडीपी के पास भी 2 राज्यसभा मेंबर हैं। भाजपा और एनडीए की इस ताकत से यह स्पष्ट है कि अब लोकसभा के साथ ही राज्यसभा में भी सत्ताधारी गठबंधन किसी भी बिल को आसानी से पास कराने की स्थिति में है। भले ही बीते दो कार्यकालों के मुकाबले लोकसभा में भाजपा और एनडीए के पास पहले मुकाबले कम सीटें हैं, लेकिन राज्यसभा में उसकी ताकत निरंतर बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि 2029 में भी एनडीए के पास अपरहैंड रहेगा। अब यदि INDIA ब्लॉक की बात करें तो उसकी धुरी कही जाने वाली कांग्रेस के पास 29 सीटें हो गई हैं। भाजपा के मुकाबले यह संख्या एक तिहाई से भी कम है। इसके साथ ही विपक्ष की कुल सीटों की संख्या 62 है। विपक्ष में भी डीएमके को झटका लगा है, जिसके सांसदों की संख्या राज्यसभा में अब 8 ही रह गई है, जो पहले 10 हुआ करती थी। इसी तरह आरजेडी के सांसद भी अब 5 के मुकाबले तीन ही रह गए हैं।  

बजट सत्र के बीच गुजरात विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

गांधीनगर, गांधीनगर स्थित गुजरात विधानसभा परिसर में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बजट सत्र के दौरान बम की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। अधिकारियों के अनुसार यह धमकी ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें दावा किया गया था कि विधानसभा परिसर में बम लगाया गया है। विधानसभा में चल रहे बजट सत्र की कार्यवाही बुधवार सुबह 9 बजे शुरू होनी थी लेकिन उससे ठीक पहले करीब 8:45 बजे अधिकारियों को इस धमकी भरे ईमेल की जानकारी मिली। जैसे ही यह सूचना सामने आई, सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं और पूरे परिसर को खाली कराने का निर्णय लिया गया। पुलिस उपाधीक्षक पीयूष वांडा ने बताया कि ईमेल में स्पष्ट रूप से बम होने का दावा किया गया था, जिसके बाद एहतियातन सभी विधायकों, कर्मचारियों और अन्य मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा, “धमकी मिलने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गए और पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।” सुरक्षा एजेंसियों ने विधानसभा भवन के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। बम निरोधक दस्ते के साथ डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाया जा सके। शुरुआती जांच में अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। अधिकारियों ने बताया कि यह जांच अभी जारी है और ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। साइबर क्राइम टीम को भी मामले की जांच में लगाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी कहां से और किसने भेजी। इस घटना के बाद विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भाजपा विधायक कसवाला महेश ने कहा, “बुधवार सुबह हुई घटना के संबंध में, गुजरात विधानसभा को एक ईमेल मिला जिसमें धमकी भरा संदेश था। एहतियाती कदम के तौर पर, सभी विधायकों को वहां से हटाकर पास के ही एक हॉल में बिठा दिया गया।” भाजपा विधायक दिनेश सिंह कुशवाह ने कहा, “धमकी झूठी निकली और कोई वास्तविक खतरा नहीं पाया गया। व्यवस्थाएं फिर से शुरू की गईं, और विधानसभा परिसर में लौटने से पहले सभी को द्वारका हॉल में बिठाया गया।”  

साध्वी निरंजन ज्योति बनीं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की नई अध्यक्ष

 फतेहपुर  उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव में निषाद बिरादरी में जन्मी साध्वी निरंजन ज्योति ने एक कथा वाचक के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ की। एक बार विधायक, दो बार सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री, निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर का सफर तय करने के बाद बुधवार को वह राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष बन गयीं। उनकी इस सफलता पर समर्थकों में खुशी और जश्न का माहौल है। हालांकि वह इस समय दिल्ली में हैं लेकिन जैसे ही लोगों को इस कामयाबी की जानकारी हुई लोग से उछल पड़े। तांबेश्वर नगर स्थिति आवास पर समर्थकों का आना-आना प्रारंभ हो गया, यहां से लोग उनके मूसानगर आश्रम भी जा रहे हैं। बता दें कि 1 मार्च 1967 में उनका जन्म निषाद परिवार में हुआ था। यूं तो उनका जीवन कठिन संघर्षों से गुजरा है। लेकिन 1990 के दशक में वह राममंदिर आंदोलन में जुड़ी और एक प्रखर वक्ता के रूप में पहचान बनीं। वह संतश्री परमानंद जी महराज के आश्रम में उनकी शिष्या के रूप में रहीं और 2012 में पहली बार हमीरपुर सदर सीट से विधायक बनीं। सोशल मीडिया पर जताया आभार नवनियुक्त अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा करते हुए एक श्लोक के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि पिछड़े समाज के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगी। पिछड़े वर्ग के उत्थान पर जोर उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य पिछड़े वर्ग को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर दिलाना है। इसी दिशा में कार्य करने का संकल्प दोहराया। केंद्र सरकार में निभा चुकी हैं अहम भूमिकाएं     साध्वी निरंजन ज्योति नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।     2014 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बनीं     2019 में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली     2021 में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री रहीं राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में जन्मीं साध्वी निरंजन ज्योति निषाद मल्लाह समाज से आती हैं। वे फतेहपुर से सांसद रह चुकी हैं और 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2014 व 2019 में फतेहपुर लोकसभा से सांसद बनीं और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में देशभर में काम किया। अब उन्हें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी मिली है। दैनिक जागरण से बाचचीत में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उनका जीवन समाज के अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। हमारे नेतृत्व ने जो अहम जिम्मेदारी दी है उसका निर्वहन पूरी निष्ठा व समर्पण भाव से किया जाएगा।

पसंदीदा सीट के लिए अब नहीं देना होगा अतिरिक्त शुल्क, एयरलाइंस ने बदला नियम

 नई दिल्ली भारत में हवाई यात्रियों को जल्द ही छिपे हुए खर्चों से बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि सरकार ने सीट चुनने पर लगने वाले एक्स्ट्रा चार्ज पर रोक लगाने और सभी एयरलाइंस में यात्रियों के अधिकारों को और मज़बूत करने के लिए कदम उठाए हैं. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि वे यह तय करें कि किसी भी फ़्लाइट में करीब 60 फीसदी सीटें चुनने के लिए मुफ़्त में उपलब्ध हों. इसका मतलब है कि वेब चेक-इन या सीट सिलेक्शन के दौरान यात्रियों से वसूले जाने वाले एक्स्ट्रा शुल्क पर लगाम लगेगी। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा जारी इस आदेश का मकसद हवाई यात्रा को ज्यादा सहज और पारदर्शी बनाना है। कई एयरलाइंस टिकट बुक करने के बाद या वेब चेक-इन के दौरान पसंदीदा सीट चुनने के लिए एक्स्ट्रा चार्ज ले रही थीं. नए निर्देश का मकसद इस तरह एक्टिविटीज पर लगाम लगाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया करवाना है। साथ बैठेंगे एक ही बुकिंग वाले यात्री मंत्रालय ने एयरलाइंस से यह भी तय करने को कहा है कि एक ही PNR पर सफर करने वाले यात्री साथ बैठें और हो सके तो उन्हें आस-पास की सीटें ही अलॉट हों. इससे उन परिवारों और ग्रुप्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर एक-दूसरे के पास सीटें पाने के लिए ज़्यादा पैसे देने पड़ते थे। एयरलाइंस को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए, खेल के सामान और म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स को ले जाने की सुविधा पारदर्शी और यात्री-अनुकूल तरीके से देनी होगी. उनसे यह भी कहा गया है कि वे पालतू जानवरों को ले जाने के बारे में साफ़ नीतियां प्रकाशित करें; यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें यात्रियों के बीच अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। यात्रियों के अधिकारों और पारदर्शिता पर ज़ोर सरकार ने यात्रियों के अधिकारों का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, खासकर तब जब उड़ान में देरी हो, उड़ान रद्द हो जाए या यात्रियों को बोर्डिंग से रोक दिया जाए. एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म और एयरपोर्ट्स के काउंटरों पर इन अधिकारों को साफ़-साफ़ दिखाना होगा. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच स्थापित करने के लिए यात्रियों को उनके अधिकारों के बारे में क्षेत्रीय भाषाओं में भी जानकारी दी जानी चाहिए। भारत का घरेलू एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है. यहां के हवाई अड्डों पर रोज़ाना पांच लाख से ज़्यादा यात्री आते-जाते हैं. ऐसे में मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यात्रियों को सुविधाएं देना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. मंत्रालय ने 'UDAN यात्री कैफ़े' जैसी पहलों का ज़िक्र किया है, जहां हवाई अड्डों पर किफ़ायती खाना और मुफ़्त Wi-Fi की सुविधा मिलती है।

ट्रंप ने पलटी मारी, अमेरिका ने होर्मुज पर ईरानी मिसाइल भंडार पर गिराया भारी बम

वाशिंगटन  ईरान के साथ जंग में अमेरिका अकेला पड़ चुका है. उसका साथ कोई नहीं दे रहा है. ऐसे में अब अमेरिका ने अकेले ही ईरान से आर-पार की जंग लड़ने की ठान ली है. अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अकेले ईरान के कब्जे से मुक्त कराने में जुट गया है. जी हां, इसी सिलसिले में अमेरिका ने होर्मुज के पास 23 क्विंटल के खतरनाक बमों की बमबारी की है. इस बमबारी का मकसद होर्मुज के पास स्थित ईरानी मिसाइल साइटों को ध्वस्त करना था. ताकि होर्मुज के दरवाजे को समुद्री व्यापार के लिए खोला जा सके. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. इसके मुताबिक, ईरान की इन क्रूज मिसाइलों से होर्मुज से होने वाली अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा था। दरअसल, अमेरिकी फोर्स ने कई 5000 पाउंड वजन वाले गहराई तक घुसने वाले बम गिराए. यानी अमेरिका ने करीब 23 क्विंटल के बम से ईरान के मिसाइल भंडार पर हमला किया है. ये बम ईरान के मजबूत बनाए गए मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइटों पर गिराए गए, जो समुद्र किनारे बने थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी सफलता की जानकारी दी। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ‘कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के समुद्र तट पर स्थित ईरान की मजबूत मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड के कई ‘डीप पेनिट्रेटर’ बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. इन साइटों पर मौजूद ईरान की जहाज-रोधी क्रूज मिसाइलों से इस जलडमरूमध्य में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही को खतरा था.’ इसका मतलब है कि अमेरिका इस कार्रवाई को सफल मान रहा है। क्यों दुनिया के लिए खास है होर्मुज गौरतलब है कि होर्मुज की खाड़ी दुनिया के लिए बहुत अहम है. यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं. अभी इस होर्मुज के कारण पूरी दुनिया में खलबली है. कारण कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग चल रही है. ईरान ने बदला लेते हुए होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान लगातार होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को टारगेट करने के लिए मिसाइलें, ड्रोन और माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है. इस खौफ से ईंधन वाले जहाज पार नहीं कर पा रहे हैं. इससे तेल के टैंकर रुक गए और दुनिया भर में तेल संकट खड़ा हो गया है। होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल पर अटैक क्यों? होर्मुज खोलना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है. कारण कि ईरान ने भारत समेत एशिया के कुछ देशों को छूट तो दी है, मगर अमेरिका और यूरोप के लिए पूरी तरह से होर्मुज का दरवाजा बंद कर रखा है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार नाटो और अन्य देशों से होर्मुज खोलने में मदद मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देश भी जहाज भेजें.  लेकिन कई सहयोगी देशों ने मना कर दिया. ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि अमेरिका अकेले ही ये काम कर सकता है. यहा कारण है कि अब अमेरिका अकेले ही होर्मुज को खुलवाने में जुट गया है. आज का यह एक्शन इसी का नतीजा है। अमेरिका ने गेम पलटना शुरू किया पहले अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भी हमले किए थे. वहां मिलिट्री टारगेट नष्ट किए गए, लेकिन तेल सुविधाओं को बचाया गया. ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो तेल सुविधाएं भी निशाना बनाई जा सकती हैं. अब ये नया हमला ट्रंप की रणनीति का हिस्सा लगता है. होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल भंडार को तबाह करके ट्रंप ने गेम पलट दिया है. अमेरिका के इस एक्शन से होर्जुम में ईरान का खतरा कम हो जाएगा. ईरान की मिसाइलें नष्ट होने से होर्मुज का दरवाजा फिर से खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका ने किस बम से किया अटैक अमेरिका का ये हमला बंकर-बस्टर बमों से किया गया. ये बम जमीन के अंदर घुसकर मजबूत ठिकानों को तबाह कर देते हैं. अमेरिका ने 5000 पाउंड यानी करीब 23 क्विंटल बमों से अटैक किया. ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन ये साफ है कि अमेरिका ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करने पर जोर दे रहा है. अगर अमेरिका का यह दावा सही है तो दुनिया भर के व्यापारियों और तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है. अगर होर्मुज खुल गया तो तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी और कीमतें गिरेंगी. वैसे भी ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के बिना भी इस रास्ते को सुरक्षित रखेगा. बता दें कि 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है। क्या है ये बंकर बस्टर बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा? अब सवाल उठता है कि ये बंकर बस्टर बम आखिर बला क्या है? आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं. 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है. हालांकि, अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम हैं, लेकिन फिलहाल ईरान के इन मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये 5,000 पाउंड यानी 2200 किलो वाले बम ही काफी थे। पूरी कहानी का दूसरा पहलू ये भी है कि इस जंग के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भी हाथ माना जा रहा है, जो महीनों से अमेरिका को इस रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे. लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह उनकी अपनी फीलिंग थी कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया. दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। फिलहाल, हालात ये हैं कि पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के इस रास्ते पर टिकी हैं. अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाकर ये साफ कर दिया है कि वो पीछे हटने वाला नहीं है. अब देखना ये होगा कि ईरान इस बंकर बस्टर हमले का क्या … Read more