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आचरण के लिए माफी मांगें— राहुल गांधी को 200 से अधिक पूर्व अफसरों की खुली चिट्ठी

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के हालिया विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। 204 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पूर्व नौकरशाहों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने राहुल गांधी से उनके आचरण के लिए देश से माफी मांगने की मांग की है। मंगलवार को पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी के नाम लिखी एक खुली चिट्ठी जारी की जिसमें कहा गया है कि 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी और अन्य सांसदों का व्यवहार संसदीय मर्यादा और संस्थागत गरिमा के खिलाफ था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के बावजूद संसद परिसर में प्रदर्शन किया गया, जो “अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना” और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। चिट्ठी में राहुल गांधी के व्यवहार को मर्यादा और संस्थागत गरिमा का उल्लंघन बताया गया है। खुले पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 12 मार्च को संसद भवन परिसर के भीतर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी के कार्यों को 'पीठ' (Chair) की जानबूझकर अवहेलना माना जा सकता है, और यह संसदीय अधिकार के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। “राजनीतिक नाटक का मंच नहीं संसद” पत्र में कहा गया है, “संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है, इसे राजनीतिक नाटक का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।” हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों का संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाना और प्रदर्शन करना “जनप्रतिनिधियों के आचरण के अनुरूप नहीं” है। खुले पत्र में कहा गया कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय प्रक्रियाओं को कमजोर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। माफी और आत्ममंथन की मांग उन्होंने लिखा है, "संसद के हर हिस्से, सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी की समान गरिमा है। जनप्रतिनिधियों का आचरण इन स्थानों पर भी उसी स्तर का होना चाहिए।" पत्र में यह भी कहा गया है कि बार-बार इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराती हैं। पूर्व अधिकारियों ने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि वे देश से माफी मांगें और अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करें, ताकि संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। पत्र में कहा गया है, “एक संवैधानिक संस्था के संरक्षक के रूप में, जो एक अरब से अधिक लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक है, सांसदों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि उनके कार्यों का प्रतीकात्मक और संस्थागत महत्व होता है।” पत्र का नेतृत्व इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने किया। हस्ताक्षरकर्ताओं में 100 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारी, कई पूर्व नौकरशाह, राजनयिक और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से संसदीय आचरण और लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक नई बहस छिड़ सकती है।  

अफगानिस्तान पर पाक हमले से गरमाया माहौल, भारत ने UN में खोली पोल—अहमदियों पर अत्याचार का भी जिक्र

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र (UN) में 'इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की पड़ोसी देशों में 'इस्लामोफोबिया' की 'काल्पनिक कहानियां गढ़ने की आदत है। भारतीय दूत ने सवाल उठाया कि इस्लामाबाद के अपने ही देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन या रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हवाई बमबारी को कैसे देखा जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने महासभा को संबोधित करते हुए भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और क्रूरता राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में अहमदियों के क्रूर दमन, असहाय अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों को आखिर क्या नाम दिया जाएगा? बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को ऐसे समय पर फटकार लगाई है जब पिछली रात ही पाक ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर 400 लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक अस्पताल पर हवाई हमले का बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए और करीब 250 घायल हुए हैं। यह घटना 16 मार्च की रात करीब 9 बजे हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में हमला किया। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर पोस्ट करके बताया कि हमला काबुल स्थित ओमिद नामक 2000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल (नशामुक्ति केंद्र) पर हुआ, जहां नशेड़ी मरीजों का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बड़े हिस्से तबाह हो गए, आग लग गई और बचाव दल अब भी शव निकालने और आग बुझाने में जुटे हैं। अधिकांश मृतक और घायल नशे की लत से मुक्ति पा रहे मरीज थे। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और कहा कि अस्पताल साफ तौर पर चिह्नित था। उन्होंने पत्रकारों और राजनयिकों को साइट पर आने का न्योता भी दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर नागरिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भारत पहले भी की मौकों पर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन में अफगानिस्तान का साथ देता आया है। OIC का दुरुपयोग भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने 'इस्लामिक सहयोग संगठन' (OIC) को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सुनियोजित कोशिश की है और इस मंच से भारत के खिलाफ बार-बार झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय अपने प्रतिनिधि खुद चुनता है जो उनकी आवाज उठाते हैं। पाकिस्तान की 'असली फोबिया' और आतंकी मानसिकता भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का असली 'फोबिया' (डर) भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद मुस्लिम समुदाय सहित सभी भारतीय उठाते हैं। पाकिस्तान का नैरेटिव उसकी उस सांप्रदायिक और आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसे उसने अपने जन्म से ही पाला-पोसा है। संयुक्त राष्ट्र को नसीहत – 'रिलीजिओफोबिया' पर हो बात भारत ने स्पष्ट किया कि धर्म का राजनीतिकरण कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि यह ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह केवल एक धर्म (इस्लाम) पर केंद्रित ढांचों से बचे और सभी प्रकार के 'रिलीजिओफोबिया' (धर्म-आधारित घृणा) से निपटने पर ध्यान दे। हरीश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि धर्म का राजनीतिकरण समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर है। इसकी विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता में है। इसलिए हम ऐसे ढांचों से सावधान रहने की अपील करते हैं जो केवल एक धर्म पर केंद्रित हों।' भारत ने खुद को हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि 'सर्व धर्म समभाव' यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारत की सभ्यतागत जीवन शैली रही है। भारत ने 1981 के उस घोषणापत्र का भी समर्थन किया जो बिना किसी विशेषाधिकार के सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा करता है। अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव्स के बजाय संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और हर धर्म के व्यक्ति के लिए समानता और गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण में लगाए।  

ईरान पर बढ़ता तनाव: आखिर क्यों खामोश या खिलाफ हैं पड़ोसी मुस्लिम देश?

वाशिंगटन अमेरिका के हमले के बाद भड़का ईरान अपने ही पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इसपर खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि उसका अभियान इतना तेज होना चाहिए कि ईरान कमजोर हो जाए। हालांकि इस युद्ध में सीधे तौर पर कोई भी देश शामिल नहीं होना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों को डर है कि ईरान उनके तेल के ठिकानों, पोर्ट्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ऐसे में उनके पास अमेरिका की ओर देखने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।   अमेरिका चाहता है, खाड़ी देश भी युद्ध में कूदें अमेरिका चाहता है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी कूद पड़ें और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का खुलकर विरोध करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाकी देशों का आह्वान किया है। वह चाहते हैं कि ईरान समझ जाए कि उसके ही क्षेत्र में उसके खिलाफ सारे देश खड़े हैं। सऊदी में गल्फ रिसर्टे सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सेगर ने कहा कि सारे खाड़ी देश सोचते हैं कि ईरान ने सारी सीमाएं लांघदी हैं। उन्होंने कहा, शुरू में हमने ईरान का पक्ष लिया और अमेरिका के युद्ध का विरोध किया। हालांकि इसके बाद जब हवाई हमले हम पर भी होने लगे तो ईरान दुश्मन हो गया। ईरान से बढ़े हुए तनाव के बीच भी खाड़ी देश युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। ईरान ने यूएई समेत कई देशों के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और ओमान में एयरपोर्टस पर धमाके हुए हैं। इसके अलावा ईरान के खतरनाक कदमों की वजह से समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध को 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के ठिकानों और आम नागरिको को निशाना बना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हमलो की वजह से ईरान की सेना की कमर टूट गई है। वहीं जब होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई नहीं आया तो वह अपने मित्र देशों पर ही नाराज हो गए। ट्रंप ने कहा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में "उत्साह" की कमी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की जहाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह ज़रूरी था। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा " ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं "खुश नहीं हैं" और "बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।"  

सदन में तकरार: भाषणबाजी पर नाराज हुए ओम बिरला, मंत्री को लगाई फटकार

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री 'संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।' प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, 'आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।' इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, 'आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।' इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, 'मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।' उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, 'समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।' विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

गैस बुकिंग पर नया नियम! e-KYC को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की साफ गाइडलाइन सामने

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों में गैस संकट की खबरों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण सभी के लिए हर बार अनिवार्य नहीं है। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, केवाईसी की आवश्यकता केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होगी…      सामान्य उपभोक्ता: यदि आप उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते हैं और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, तो आपको इसे दोबारा कराने की कोई जरूरत नहीं है।      अधूरे दस्तावेज वाले ग्राहक: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण केवल उन ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिनकी केवाईसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।      उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी: इस योजना के 10.51 करोड़ लाभार्थियों को अपनी सब्सिडी जारी रखने के लिए साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना होगा। 15 मार्च के आदेश पर स्पष्टीकरण गौरतलब है कि 15 मार्च को मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की बात कही थी, जिससे आम जनता में भ्रम फैल गया था। मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस आदेश का उद्देश्य केवल उन उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिलाओं को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, सरकार को मिला महत्वपूर्ण आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने की बात कही गई थी जब बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि जो महिला कानूनी रूप से किसी बच्चे को गोद लेती है या जो कमीशनिंग मदर है, उसे बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का अधिकार होगा. इस फैसले को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें समानता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित होगा। जस्टिस जेबी पार्दीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि परिवार की परिभाषा केवल जैविक संबंधों के आधार पर ही तय नहीं की जा सकती. फैसले में जोर दिया गया कि गोद लेना परिवार बढ़ाने का उतना ही वैध तरीका है जितना जैविक तरीका. ऐसे में एक गोद दिए गए बच्चे का अधिकारी भी एक बायोलॉजिकल बच्चे जैसा है. जजों ने आगे कहा कि एक गोल लिए गए बच्चे को पालन पोषण में माता-पिता भावनात्मक रूप से उतना ही जड़े होते हैं जितना एक बॉयोलॉजिकल बच्चे को पालने में होता है. इसमें बच्चे की उम्र से कुछ भी लेना देना नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने हरदीप पुरी की बेटी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले कंटेंट पर लगाई रोक

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को चाइल्ड सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन से जोड़कर बदनाम करने वाले कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश दिया है। अभी ये आदेश वैश्विक स्तर पर जारी नहीं हुए हैं। दरअसल हिमायनी पुरी ने जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले पोस्ट को अपमानजनक बताते हुए याचिका दायर की थी, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है। 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग अपने वाद में हिमायनी पुरी ने 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इसके साथ ही कई संस्थाओं को मानहानिकारक कंटेंट फैलाने से रोकने का आदेश देने का अनुरोध किया है। इस मामले में न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना सुनवाई कर रही हैं। पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी का कहना है कि उन्हें अत्यंत अपमानजनक पोस्टों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 'जॉन डो' आदेश की मांग की है। पुरी की ओर से पेश वकील ने क्या तर्क दिए जेठमलानी का तर्क है कि यह सामग्री एक सुनियोजित हमले का हिस्सा प्रतीत होती है, जो व्यक्तिगत और संभावित राजनीतिक दुर्भावना का संकेत देती है। उनका यह भी कहना है कि पुरी से पूर्व में जुड़ी एक फर्म को एपस्टीन से धन प्राप्त होने के दावे पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। जेठमलानी का कहना है कि ये आरोप पेशेवर कदाचार और नैतिक पतन के आरोप हैं, जो उनके अनुसार हिमायनी पुरी के खिलाफ मानहानिकारक हमले का मूल आधार हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही झूठी सामग्री याचिका के अनुसार, 22 फरवरी 2026 के आसपास से सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर झूठे, भ्रामक एवं मानहानिकारक पोस्ट, आर्टिकल, वीडियो और डिजिटल कंटेंट फैलाए जा रहे हैं। इनमें एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन तथा अन्य डिजिटल न्यूज पोर्टल भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री की बेटी होने की वजह से बनाया जा रहा निशाना हिमायनी पुरी ने कहा कि वह फाइनेंस और इनवेस्टमेंट सेक्टर में काम करती हैं। उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हैं। याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों ने यह निराधार आरोप लगाए कि उनका एपस्टीन के साथ डायरेक्ट-इडायरेक्ट बिजनेस, फाइनेंस या निजी संबंध था। याचिका के अनुसार, इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन बताया गया है। चाइल्ड सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन Jeffrey Epstein एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जो बाद में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों के कारण दुनिया भर में कुख्यात हो गया। वह अमीर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े अपने नेटवर्क के लिए भी चर्चा में रहा। 2008 में उसे नाबालिग से जुड़े अपराध में सजा मिली थी, लेकिन 2019 में दोबारा गिरफ्तार किया गया। उसी साल न्यूयॉर्क की जेल में उसकी संदिग्ध मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। एपस्टीन केस ने वैश्विक स्तर पर सत्ता, पैसे और यौन अपराधों के संबंध पर बहस छेड़ दी।

काबुल में आतंकी ठिकाने बताकर पाकिस्तान ने 400 लोगों की जान ली, जिनमें मरीज और आम लोग भी शामिल

काबुल अफ़गानिस्तान के उप-सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार सुबह बताया कि अफ़गान राजधानी काबुल में नशा करने वालों का इलाज करने वाले एक अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गई है।  सोशल मीडिया पोस्ट में हमदुल्ला फितरत ने कहा कि सोमवार देर रात हुए इस हमले में अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया. उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 250 अन्य के घायल होने की खबर है।  फितरत ने आगे कहा कि बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।  पाकिस्तान क्या बोला? पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के दावे को झूठा और जनता की राय को गुमराह करने के मकसद से किया गया बताकर खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने कहा कि उसने सोमवार को काबुल और नंगरहार प्रांत में केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।  अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्ला फ़ितरत के मुताबिक, काबुल के उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हमला स्थानीय समय के अनुसार रात लगभग 9 बजे (16:30 GMT) हुआ. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह हॉस्पिटल 2,000 बेड की सुविधा वाला है और इस हमले में इमारत का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।  'हम फिर से उठ खड़े होंगे…' अफगानिस्तानी क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "काबुल में पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के हताहत होने की ताज़ा रिपोर्टों से मुझे गहरा दुख हुआ है. आम नागरिकों के घरों, शिक्षण संस्थानों या चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बनाना एक युद्ध अपराध है. इंसानी जानों के प्रति इस तरह की शदीद गफलत, खासकर रमज़ान के पवित्र महीने में, बेहद घिनौनी और गहरी चिंता का विषय है. इससे केवल फूट और नफ़रत ही बढ़ेगी।  उन्होंने आगे कहा कि मैं संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अन्य एजेंसियों से अपील करता हूं कि वे इस ताज़ा जुल्म जांच करें और इसके दोषियों को जवाबदेह ठहराएं. इस मुश्किल घड़ी में मैं अपने अफ़ग़ान लोगों के साथ खड़ा हूं. हम इस सदमे से उबरेंगे और एक राष्ट्र के रूप में हम फिर से उठ खड़े होंगे. हम हमेशा ऐसा ही करते आए हैं।  'जेट ने बम गिराए…' स्थानीय टेलीविज़न चैनलों ने ऐसे फुटेज दिखाए, जिनमें दमकलकर्मी एक इमारत के मलबे के बीच उठ रही लपटों को बुझाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे थे।  हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 31 साल के ओमिद स्तानिकज़ई ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि हमले से पहले उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों को गश्त करते हुए सुना था. हमारे चारों ओर सैन्य टुकड़ियां थीं. जब इन सैन्य टुकड़ियों ने जेट पर गोलीबारी की, तो जेट ने बम गिराए और आग लग गई. सभी मृतक और घायल नागरिक थे।  पाकिस्तान के द्वारा यह हमला अफ़ग़ान अधिकारियों के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी हुई थी और अफ़ग़ानिस्तान में चार लोग मारे गए थे. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब इन पड़ोसी देशों के बीच पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई तीसरे हफ़्ते में प्रवेश कर गई है।  'इंसानियत के खिलाफ जुर्म…' अफ़ग़ान सरकार के एक और प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इससे पहले सोशल मीडिया पर अस्पताल पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया है. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान सरकार इस तरह के कृत्य को सभी सिद्धांतों के खिलाफ और इंसानियत के खिलाफ जुर्म मानती है।  'आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर…' पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।  सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को सटीक रूप से निशाना बनाया गया, जिसमें अफ़ग़ान तालिबान के तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के गोदाम शामिल हैं. इसके साथ ही काबुल और नंगरहार में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान-स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों को भी निशाना बनाया गया. मंत्रालय ने आगे कहा कि इन ठिकानों का इस्तेमाल बेकसूर पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था। 

बर्फबारी के कारण अटल टनल की ओर जाने वाले मार्ग बंद, IMD का आज भी अलर्ट जारी

 मनाली      हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी के कारण प्रशासन ने नेहरू कुंड से साउथ पोर्टल तक अटल टनल की ओर वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी है. दरअसल, प्रसिद्ध पर्यटन जगह मनाली के पास अटल टनल क्षेत्र में रविवार को अचानक हुई भारी बर्फबारी ने हजारों पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. करीब 1000 से ज्यादा वाहनों में लगभग 5000 पर्यटक सड़क पर फंस गए थे. लेकिन प्रशासन, पुलिस और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीमों ने तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया और सोमवार देर शाम तक सभी लोगों को सुरक्षित मनाली पहुंचा दिया। डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि भारी बर्फबारी से सड़कों पर बर्फ जम गई. जिससे फिसलन वाले रास्तों पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया था. कई पर्यटकों को अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल या मदद से सुरक्षित जगह पहुंचना पड़ा. वहीं, कुछ टैक्सी ड्राइवर अभी भी अपने वाहनों के साथ टनल के आस-पास हैं, लेकिन सभी लोग सुरक्षित हैं. सड़क ठीक होने पर उन्हें मनाली भेज दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, अटल टनल के साउथ पोर्टल के पास भारी बर्फ जमा हो गई है. इसलिए यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. नेहरू कुंड और सोलंग नाला में 24 घंटे के लिए बैरियर लगाए गए हैं. पुलिस की निगरानी में केवल आपातकालीन वाहन जैसे एंबुलेंस, पुलिस गाड़ियां, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों को 4×4 वाहनों से ही जाने की अनुमति है। मार्च में बर्फ से ढकी वादियां, स्नोफॉल का अद्भुत नजारा उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने कहा कि बीआरओ की टीमें लगातार भारी मशीनरी से बर्फ हटा रही हैं. सड़क को जल्द से जल्द साफ करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अभी जोखिम ज्यादा है, इसलिए ट्रैफिक बंद रखना जरूरी है. इस बीच, मौसम विभाग ने फिलहाल भारी बर्फबारी और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि मौसम और सड़क की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक अटल टनल, सोलंग वैली की ओर जाने से बचें।

एयरस्ट्राइक के बाद अफगान सरकार का कड़ा संदेश: ‘पाकिस्तान से डिप्लोमेसी का समय अब खत्म’

काबुल पाकिस्तान और अफगान-तालिबान के बीच पिछले 10 दिनों से भीषण युद्ध जारी है . कल रात 9 बजे पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गजब लिल हक' के तहत काबुल में अब तक की सबसे बड़ी एयरस्ट्राइक की, जिसमें एक अस्पताल को भी निशाना बनाया गया. अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 400 बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई है और करीब 250 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान सरकार ने इस हमले का फुटेज जारी करते हुए इसे सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाई बताया है। इस हमले के बाद इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने टोलो न्यूज़ से कहा कि अब पाकिस्तान के साथ बातचीत या कूटनीति का समय खत्म हो गया है, अफगानिस्तान इसका बदला लेगा. डूरंड लाइन पर दोनों देशों की सेनाएं लगातार आमने-सामने हैं और तनाव चरम पर है। निशाने पर इस्लामाबाद जंग की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और सैन्य कार्रवाई तेज थी. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर काबुल पर हमला हुआ, तो निशाना इस्लामाबाद होगा. जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद, क्वेटा और रावलपिंडी में पाक आर्मी के ठिकानों पर हमले का दावा किया था. तालिबान ने दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण 'नूर खान एयरबेस' को निशाना बनाया है। पाकिस्तान का 'ऑपरेशन गजब लिल हक' पाकिस्तान ने काबुल और नंगरहार में किए गए इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने हाल ही में बयान दिया था कि अफगान-तालिबान ने पाकिस्तान में नागरिकों को निशाना बनाकर 'रेड लाइन' क्रॉस की है. इसी बयान के बाद कल रात काबुल पर भारी बमबारी की गई. पाकिस्तान का दावा है कि ये हमले उन सैन्य प्रतिष्ठानों पर थे, जो पाकिस्तान में हमलों को प्रायोजित कर रहे थे। डूरंड लाइन पर भीषण झड़पें दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है. डूरंड लाइन पर दोनों तरफ की सेनाएं लगातार एक-दूसरे पर भारी गोलाबारी कर रही हैं. पाकिस्तान द्वारा काबुल के अस्पताल पर किए गए हमले और उसके फुटेज जारी करने के बाद अफगानिस्तान में भारी आक्रोश है. तालिबान ने कहा है कि वे इस सैन्य हमले का करारा जवाब देंगे, जिससे पूरे इलाके में बड़ी जंग का खतरा मंडराने लगा है। ।.