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अमेरिका ने ईरान पर छोड़ी 29,750 करोड़ की टॉमहॉक मिसाइल, ये क्यों है खास?

न्यूयॉर्क अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले चार हफ्तों में 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी हैं. यह किसी एक अभियान में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह जानकारी अमेरिका की प्रसिद्ध थिंक टैंक सीएसआईएस (Center for Strategic and International Studies) की नई रिपोर्ट में दी गई है।  हर टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 35 करोड़ रुपये) है. इस हिसाब से इन 850 मिसाइलों की कुल कीमत लगभग 30,000 करोड़ की आंकी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिसाइलें मुख्य रूप से दो गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियों और डिस्ट्रॉयर जहाजों से छोड़ी गईं. इन जहाजों में वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) लगे हैं. इस अभियान में क्षेत्र में उपलब्ध लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में इन लॉन्चरों को फिर से लोड नहीं किया जा सकता. जहाजों को मिसाइलें खत्म होने पर बंदरगाह वापस जाना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक फिर से भरने में समय लगेगा।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने एपिक फ्यूरी 2026 में सिर्फ पहले 4 हफ्तों में 850 टॉमहॉक दागी हैं. यह इतिहास का रिकॉर्ड है. इस से पहले किसी भी एक अभियान में इतनी मिसाइलें नहीं दागी गई हैं. 2003 के पूरे इराक युद्ध (Iraqi Freedom) में अमेरिका ने 802 मिसाइलें दागी थीं. बाकी पुराने अभियान की बात करें तो 1991 के डेजर्ट स्टॉर्म में 288 मिसाइल दागी गईं थीं।  ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में? टॉमहॉक अमेरिका की एक मध्यम दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. यह जमीन, जहाज और पनडुब्बी से छोड़ी जाती है और दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला करने की ताकत रखती है. 1972 में अमेरिकी नौसेना ने इसका विकास शुरू किया था. यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ पाता. शुरू में इसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर विकल्प खत्म कर दिया गया है. इसे TLAM, TASM, BGM-109G Gryphon जैसे कई नामों से भी जाना जाता है. यह 1983 से सेवा में है।  टॉमहॉक के वेरिएंट ब्लॉक 1: TLAM-N (न्यूक्लियर), TASM (एंटी-शिप) और ग्राउंड लॉन्च Gryphon ब्लॉक 2: TLAM-C (सख्त टारगेट) और TLAM-D (नरम टारगेट) थे ब्लॉक 3: GPS और बेहतर इंजन जोड़े गए, जिससे ईंधन कम लगता है और ज्यादा ताकत मिलती है ब्लॉक 4: सबसे आधुनिक है – इसमें उड़ते समय नया लक्ष्य बदला जा सकता है टॉमहॉक की खूबियां रेंज 1,250 से 2,500 किलोमीटर तक (ब्लॉक IV में 1,600 किमी). स्पीड सबसोनिक (लगभग 800 किमी/घंटा). ऊंचाई समुद्र की सतह से चिपककर या 450 मीटर तक. वजन 1,315 किलोग्राम (लॉन्च वजन), लंबाई 5.55 से 6.25 मीटर. इसमें 454 किलोग्राम का पारंपरिक या पहले न्यूक्लियर वारहेड लगता है. गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल, TERCOM, GPS और टू-वे डेटालिंक है. सटीकता 10 मीटर से भी कम।  यह मिसाइल 140 से ज्यादा अमेरिकी नौसेना के जहाजों (टिकॉन्डेरोगा क्रूजर, आर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर) और पनडुब्बियों (Ohio क्लास SSGN और SSN) से छोड़ी जा सकती है. ब्रिटेन की Royal Navy की Astute, Swiftsure और Trafalgar पनडुब्बियों पर भी लगी है. पहले ग्राउंड लॉन्च वर्जन Gryphon भी था, लेकिन 1991 में INF संधि के तहत नष्ट कर दिया गया. मुख्य ऑपरेटर अमेरिका और ब्रिटेन हैं. यह Mark 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम से लॉन्च होती है।  मिसाइल का इतिहास टॉमहॉक का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ, जहां 300 से ज्यादा दागी गईं. 2003 के इराक युद्ध में 800 से ज्यादा. 2018 में सीरिया में 59 मिसाइलें दागी गईं. अफगानिस्तान, सोमालिया, लिबिया और सीरिया में भी इस्तेमाल हुई. 2016 में 245 मिसाइलों को एंटी-शिप बनाने के लिए 434 मिलियन डॉलर का बजट दिया गया. अमेरिका की आर्मी अब इसे ग्राउंड लॉन्चर पर भी लगा रही है. यह मिसाइल बहुत महंगी लेकिन बेहद सटीक और सुरक्षित हमला करने वाली है, जो आधुनिक युद्ध में अमेरिका की सबसे अहम हथियारों में से एक है। 

PAN कार्ड नियम में बदलाव 1 अप्रैल से: नाम mismatch पर हो सकता है PAN कार्ड बंद, जानें क्या करें

भोपाल पैन कार्ड और आधार कार्ड आज के समय में बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुके हैं। बैंकिंग से लेकर टैक्स फाइलिंग और सरकारी योजनाओं तक, हर जगह इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर इन दोनों दस्तावेजों की डिटेल्स में कोई गड़बड़ी या mismatch है, तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है जिनके पैन कार्ड और आधार कार्ड में नाम एक जैसा नहीं है या स्पेलिंग में अंतर है। ऐसी स्थिति में संबंधित पैन कार्ड निष्क्रिय (inactive) हो सकता है, जिससे कई वित्तीय कार्य प्रभावित होंगे। क्या हो सकते हैं नुकसान? इनकम टैक्स रिफंड मिलने में दिक्कत, TDS अधिक कट सकता है,बैंकिंग और KYC प्रक्रियाएं प्रभावित, वित्तीय लेन-देन में परेशानी..इसलिए यदि आपके आधार और पैन में नाम अलग-अलग दर्ज है, तो इसे जल्द से जल्द ठीक कर लेना जरूरी है। कैसे करें आधार कार्ड में नाम अपडेट? सबसे पहले अपने मोबाइल में आधार से संबंधित ऐप या आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें, लॉगिन करने के लिए आधार नंबर और OTP दर्ज करें “Update Aadhaar Online” विकल्प पर क्लिक करें ,नाम अपडेट का विकल्प चुनें ,जरूरी दस्तावेज अपलोड करें ,निर्धारित शुल्क का भुगतान करके सबमिट करें.. इसके बाद आप स्टेटस चेक करके देख सकते हैं कि आपका अपडेट पूरा हुआ या नहीं। पैन कार्ड में नाम कैसे बदलें? NSDL या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “Changes/Correction in PAN” विकल्प चुनें पैन नंबर, नाम, जन्मतिथि और ईमेल जैसी जानकारी भरें सबमिट करने पर एक टोकन नंबर जनरेट होगा। आवश्यक बदलाव चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें,शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें.. अंत में acknowledgement स्लिप डाउनलोड कर लें। अगर आपके पैन और आधार कार्ड की जानकारी एक जैसी नहीं है, तो इसे तुरंत अपडेट करना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानियों से बचा सकती है। एलपीजी के रेट से लेकर इनकम टैक्स के नियमों तक आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल जाएगा? 1-न्यू इनकम टैक्स लॉ इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। यह इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में ‘एसेसमेंट ईयर’, ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे कंफ्यूज करने वाले शब्दों को टैक्स ईयर ही कहा जाएगा। 2-टैक्स में मिलेगी अधिक छूट न्यू टैक्स रिजीम की वजह से 12 लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। सेक्शन 87 A में किए गए बढ़ाए गए छूट की सीमा की वजह से टैक्सपेयर्स को न्यू टैक्स रिजीम में यह फायदा होगा। 3- टीडीएस फॉर्म में बदलाव 1 अप्रैल 2026 से फॉर्म 16 और फॉर्म 16 A की जगह फॉर्म 130 और फॉर्म 131 ले लेगा। इस बदलाव के पीछे की वजह से टैक्सपेयर्स को अधिक सुविधा देना है। 4- पैन कार्ड का नियम हुआ कठिन 1 अप्रैल से पैन कार्ड बनवाना इतना आसान नहीं रह जाएगा। अभी तक पैन कार्ड के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही जरूरी होता है। लेकिन 1 अप्रैल से बर्थ सर्टिफिकेट के लिए 10वीं की मार्कशीट और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट भी जरूरी हो जाएंगे। 5- LPG की कीमतों पर फैसला 1 अप्रैल को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिल सकता है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्लाई बाधित हुई है। अब देखना है कि मार्च की तरह अप्रैल में भी कीमतों में कोई इजाफा होगा या नहीं। 6- CNG, PNG, ATF प्राइस अप्रैल के पहले दिन सीएनजी, पीएनजी और एटीएफ की कीमतों में भी बदलाव किया जा सकता है। अगर कोई चेंज होता है तो इसका सीधा असर आपकी-हमारी जेब पर पड़ेगा। 7- ATM से निकासी के नियम एचडीएफसी बैंक 1 अप्रैल से यूपीआई एटीएम से निकासी की लिमिट में बदलाव करने जा रहा है। अगर आप महीने में 5 ट्रांजैक्शन से अधिक करेंगे तब की स्थिति में हर एक ट्रांजैक्शन पर आपको 23 रुपये का भुगतान करना होगा। बंधन बैंक ने मेट्रो शहरों में फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की लिमिट को 5 से घटाकर 3 कर दिया है। अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर बैंक आपसे 23 रुपये लेगा। अगर कम बैलेंस की वजह से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है तब की स्थिति में आपसे बैंक 25 रुपये वसूलेगा। 8-विथड्रॉल लिमिट को बैंक ने घटाया पंजाब नेशनल बैंक ने कुछ सिलेक्टेड डेबिट कार्ड की विथड्रॉल लिमिट को 75000 रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। यह नियम में 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। 9- टिकट कैसिंल रिफंड के नियमों में बदलाव अगर आप किसी ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करते हैं तब की स्थिति में आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह टाइमलाइन 4 घंटे की थी। 10- क्या है रेलवे का नया रिफंड स्ट्रक्चर 1-ट्रेन के प्रस्थान होने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत रिफंड दिया जाएगा। 2- अगर कोई टिकट 24 घंटे से 72 घंटे में टिकट कैंसिल होता है तब की स्थिति में 25 प्रतिशत कटौती होगी। 3- ट्रेन के प्रस्थान होने से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर अधिकतम पैसा रिफंड हो जाएगा। ध्यान रखें इस स्थिति में भी पूरा पैसा रिफंड नहीं होगा।

जनगणना 2026 में सरकार ने पूछे 33 अहम सवाल, घर से लेकर अनाज तक जानिए क्या आपको सभी जवाब है?

 नई दिल्ली देश की 16वीं जनगणना अब केवल आबादी का आंकड़ा नहीं, बल्कि आपके रहन-सहन की पूरी 'डिजिटल कुंडली' होगी. सरकार द्वारा जारी 33 नए FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) बताते हैं कि इस बार आपके घर की बनावट, इस्तेमाल होने वाले अनाज और यहां तक कि आपके पास मौजूद गाड़ियों के प्रकार पर भी पैनी नजर होगी. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान में पहली बार जनता को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भरने की बड़ी सुविधा दी गई है।  जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक और सामाजिक बदलाव वाला कदम उठाया है. सरकार ने पहले चरण की जनगणना के लिए 33 सवालों की लिस्ट (FAQs) जारी कर दी है. इसमें सबसे चौंकाने वाली और बड़ी बात 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' को लेकर कही गई है।  ल‍िव-इन कपल्स के लिए क्या है नियम? सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) पोर्टल पर जारी जानकारी के मुताबिक, अगर कोई कपल 'ल‍िव-इन रिलेशनशिप' में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को एक 'स्थिर संबंध' मानते हैं तो जनगणना के दौरान उन्हें 'शादीशुदा जोड़ा' ही माना जाएगा. यह पहली बार है जब जनगणना के आधिकारिक सवालों में इस तरह के सामाजिक ढांचे को स्पष्ट रूप से जगह दी गई है।  खुद भर सकेंगे अपनी जानकारी सरकार ने उन लोगों के लिए एक खास पोर्टल खोला है जो 'सेल्फ-एन्युमरेशन' का विकल्प चुनना चाहते हैं. यानी अब आप खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे. यह सुविधा जनगणना के दोनों चरणों 'हाउसलिस्टिंग' (HLO) और 'जनसंख्या गणना' के लिए उपलब्ध होगी. जनता की आसानी के लिए पोर्टल पर 33 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की पूरी लिस्ट दी गई है।  1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा. इस दौरान घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से नागरिकों से 33 सवाल पूछे जाएंगे।  ये सवाल पूछे जाएंगे आपसे घर की बनावट: घर के फर्श, दीवार और छत में किस सामग्री (मटेरियल) का इस्तेमाल हुआ है? परिवार का मुखिया: घर के मुखिया का नाम, लिंग और वह किस समुदाय (SC, ST या अन्य) से ताल्लुक रखते हैं? सुविधाएं और वाहन: घर में पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं? आपके पास किस तरह के वाहन (साइकिल, स्कूटर, कार आदि) हैं? खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से किस अनाज (Cereal) का सेवन किया जाता है? शादीशुदा जोड़े: घर में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं? (यहीं ल‍िव-इन कपल्स वाला नियम लागू होगा). घर की स्थिति: मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और घर का मालिकाना हक (अपना या किराए का) क्या है? भवन नंबर से होगी शुरुआत प्रश्नों का क्रम भवन नंबर (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा दिया गया नंबर) और जनगणना मकान नंबर से शुरू होगा. इसके बाद, गणना करने वाले अधिकारी घर के फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल की गई प्रमुख सामग्री के बारे में पूछेंगे. साथ ही, घर के उपयोग, उसकी स्थिति और परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जाएगी।  अधिकारी परिवार के मुखिया के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे, जैसे उनका नाम, लिंग और क्या वे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य समुदायों से संबंध रखते हैं. साथ ही मकान के मालिकाना हक की स्थिति भी पूछी जाएगी। 

Credit Card Rule Change: 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, जानें क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए क्या हैं बड़े बदलाव

मुंबई  अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत किए जा रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो अब सरकार आपके क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर पैनी नजर रखने वाली है।  1. बहुत ज्यादा खर्च किया तो देना होगा हिसाब अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से साल भर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो सावधान हो जाइए. अब बैंक इसकी जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग को देंगे. यही नहीं, अगर आप विदेश यात्राओं पर मोटा पैसा खर्च करते हैं, तो उस पर भी नजर रहेगी.  मिल सकता है नोटिस भी  पेच कहां है? अगर आपका साल भर का खर्च आपकी कमाई, जो आपने टैक्स रिटर्न में दिखाई है, से बहुत ज्यादा निकला, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे पूछ सकता है कि इतना पैसा आया कहां से? और आपको नोटिस भी मिल सकता है।  2. बिना पैन कार्ड के होगी परेशानी 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड का नियम सख्त होने वाला है. अब बिना पैन नंबर के कोई भी बैंक नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करेगा. जिनके पास पहले से कार्ड है, उन्हें भी इसे लिंक करना होगा. इसका मतलब है कि आपका हर छोटा-बड़ा खर्च अब आपकी टैक्स प्रोफाइल से जुड़ जाएगा।  3. ऑफिस के कार्ड से पर्सनल शॉपिंग पड़ेगी भारी कई लोगों को अपनी कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड मिलता है. अब तक लोग इससे ऑफिस के काम के साथ-साथ कभी-कभार अपना निजी खर्च भी कर लेते थे. लेकिन अब अगर आपने कंपनी के कार्ड से अपनी पर्सनल शॉपिंग, फिल्म की टिकट या पर्सनल ट्रिप का भुगतान किया, तो सरकार उसे आपकी एक्स्ट्रा कमाई मानेगी।  हर बिल रखें संभाल कर! वह पैसा आपकी सैलरी में जोड़ दिया जाएगा और उस पर आपको टैक्स देना होगा. अब आपको हर बिल संभाल कर रखना होगा ताकि साबित कर सकें कि खर्च ऑफिस के काम के लिए था या खुद के लिए।  4. क्रेडिट कार्ड से भरिए इनकम टैक्स अब आप अपना इनकम टैक्स भरने के लिए नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के चक्कर छोड़कर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर टैक्स भरने के समय हाथ तंग है, तो कार्ड से पेमेंट कर दीजिए और बाद में बैंक को चुकाते रहिए. याद रखें कि बैंक इस पर प्रोसेसिंग फीस वसूल सकता है और अगर आपने समय पर कार्ड का बिल नहीं भरा, तो भारी ब्याज भी लग सकता है।  5. पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल अगर आपके पास बिजली बिल या कोई और पक्का कागजात नहीं है, तो अब आपका क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के सबूत के तौर पर काम आएगा. अगर आपको पैन कार्ड बनवाना है या उसमें कुछ अपडेट कराना है, तो आप अपना लेटेस्ट क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट दे सकते हैं, बशर्ते उस पर आपका सही पता लिखा हो।  ध्यान रखने वाली बात! अगर आप सामान्य यूजर हैं जो महीने के 20-50 हजार खर्च करते हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप हाई-वैल्यू यूजर हैं, तो अपने बिल और टैक्स रिटर्न का तालमेल बिठाकर चलें।     

PM E-Drive योजना: इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सरकार ने बदले सब्सिडी के नियम

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आम लोगों को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा पहले से ज्यादा समय तक मिलेगा. इस फैसले से न सिर्फ ईवी खरीदना सस्ता होगा, बल्कि बाजार में इसकी मांग भी और तेज होने की उम्मीद है।  क्या हुआ है बदलाव सरकार ने प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इन्हैंसमेंट (PM E-Drive) स्कीम के तहत सब्सिडी की समय सीमा में बदलाव किया है. भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी अब 31 जुलाई 2026 तक दी जाएगी. वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह लाभ 31 मार्च 2028 तक मिलता रहेगा. यह योजना पहले 31 मार्च 2026 तक खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है. खास बात यह है कि टू-व्हीलर के लिए 4 महीने का एक्स्ट्रा टाइम दिया गया है।  अक्टूबर 2024 में शुरू हुई इस स्कीम का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये रखा गया है. इसका मकसद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, बस, ट्रक और एंबुलेंस की खरीद को बढ़ावा देना है. साथ ही देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा है. इस योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपये सीधे सब्सिडी के रूप में दिए जाने हैं, जबकि 7,171 करोड़ रुपये पब्लिक चार्जिंग और ई-बस जैसी सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।  सब्सिडी में कटौती जहां एक तरफ सरकार ने सब्सिडी की समय-सीमा बढ़ाई है, वहीं इसकी रकम में कटौती भी की है. जिसका सीधा आम लोगों के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारी पर पड़ेगा. 1 अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई है, जो अधिकतम 5,000 रुपये है. यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने वालों को ज्यादा से ज्यादा 5,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा. पहले यह 5,000 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 10,000 रुपये तक थी. आमतौर पर बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कम से कम 2kWh बैटरी पैक के साथ आते हैं. ऐसे में लोगों को वाहनों पर कम से कम 10,000 रुपये तक का बेनिफिट जरूर मिल जाता था।  इसी तरह, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर भी सब्सिडी कम कर दी गई है. अब यह 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 12,500 रुपये प्रति वाहन है, जो पहले 25,000 रुपये तक मिलती थी. इसलिए सब्सिडी की समय सीमा भले ही बढ़ी हो लेकिर सब्सिडी के रूप में मिलने वाली रकम कम हो गई है. दरअसल, सरकार सिलसिलेवार ढंग से सब्सिडी खत्म पर विचार कर रही है. इसलिए धीमें-धीमें इसे कम किया जा रहा है।  भारी उद्योग मंत्रालय ने 5 फरवरी 2026 तक PM E-Drive योजना के तहत वाहन निर्माताओं को 1,182.32 करोड़ रुपये की राशि वापस की है. यह पैसा उन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर दी गई छूट के बदले लौटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुए हैं. अब तक 14,39,224 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।  कितने वाहनों को मिलेगा फायदा इस योजना के तहत देश भर में 24.79 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, 3.16 लाख थ्री-व्हीलर और 14,028 बस और ट्रक को सपोर्टै देना है. इसके साथ ही देशभर में 88,500 चार्जिंग स्टेशन लगाने का भी टार्गेट रखा गया है. 27 जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं. इनमें 19.19 लाख टू-व्हीलर और 2.93 लाख थ्री-व्हीलर शामिल हैं. इसके लिए कंपनियों को अब तक 1,703 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है।  इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रा पर जोर सरकार इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है. 4,391 करोड़ रुपये की लागत से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें बड़े शहरों में चलाई जाएंगी. इनमें बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे शहर शामिल हैं. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 22,100 फास्ट चार्जर, 1,800 बस चार्जर और 48,400 टू और थ्री-व्हीलर चार्जिंग पॉइंट लगाने का टार्गेट है। 

हैरान करने वाला खुलासा: अशोक खरात का घिनौना तरीका, रेप से पहले देता था खारा पानी

मुंबई रेप कांड में गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात के मामले की जांच जारी है। अब जांच में पता चला है कि खरात महिलाओं का शोषण करने से पहले कुछ तरल पदार्थ देता था। फिलहाल, अधिकारी इस तरल समेत कई सबूतों की जांच कर रहे हैं। महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने खरात की पुलिस हिरासत को 1 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। खट्टा पदार्थ पीने देता था सुनवाई के दौरान, लोक अभियोजक शैलेंद्र बागडे ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपी की संपत्तियों की जांच अभी बाकी है। बागडे ने कहा कि कई महिलाएं अब भी शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रही हैं और उस तथाकथित 'पानी या तरल पदार्थ' की जांच अभी बाकी है, जिसे खरात यौन शोषण से पहले पीड़ितों को बहलाने-फुसलाने के लिए देते था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये खारा और कड़वा पानी होता था, जिसे पीकर महिला को चक्कर आने लगते थे। फोन डेटा की भी हो रही है जांच उन्होंने कहा कि आरोपी के मोबाइल फोन डेटा की जांच की जा चुकी है और 'क्लोन रिपोर्ट' प्राप्त हो गई है। अभियोजक ने अदालत को बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या खरात ने अपने संपर्कों- विशेष रूप से राजनीतिक नेताओं- के नाम फर्जी पहचान के साथ फोन में सेव किए थे। कई डिजिटल सबूतों की अभी जांच की जानी है। बार-बार रेप के आरोप खरात को 18 मार्च को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब एक महिला ने उनपर तीन साल से अधिक समय तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। खरात नासिक जिले के मिरगांव में एक मंदिर ट्रस्ट का प्रमुख है और वर्षों से उनसे महाराष्ट्र के कई प्रमुख राजनेता मिलते रहे हैं। शहर के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में अब तक उनके खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें से आठ कथित यौन उत्पीड़न या शोषण और दो धोखाधड़ी से संबंधित हैं। 100 से ज्यादा महिलाओं ने की शिकायत पुलिस ने शनिवार को बताया था कि खरात के खिलाफ जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को पिछले कुछ दिनों में फोन पर 100 से अधिक शिकायतें मिली हैं, जिनमें से अधिकतर महिलाओं की हैं। खरात को पिछली पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद रविवार को अदालत में पेश किया गया।

Donald Trump के फैसलों से बढ़ा तनाव, इस देश में अमेरिकी सेना हटाने की मांग तेज

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप की सत्ता आने के बाद ज्यादातर सहयोगी देश नाराज नजर आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में नाटो समेत कई सहयोगी देश खुलकर वाशिंगटन का विरोध जता रहे हैं।। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा मित्र देश जर्मनी में वाशिंगटन के विरोध में सुर बुलंद हुए हैं। वहां की दक्षिणपंथी पार्टी ने देश में तैनात 40 हजार अमेरिकी सैनिकों को भी बाहर निकालने की मांग की है। इसके साथ ही अमेरिकी और सहयोगी देशों के बेस और परमाणु हथियारों को भी देश से बाहर निकालने की बात कही गई है। 'अल्टर्नेटिव फॉर जर्मनी' (AFD) नामक इस पार्टी ने मर्त्ज सरकार से मांग की है कि देश की ‘विदेश नीति’ अब वाशिंगटन से स्वतंत्र होनी चाहिए। पार्टी के नेता टीनो चुपाना ने एक बैठक में कहा कि जर्मनी को सहयोगी देशों के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों को भी खत्म कर देना चाहिए। इसकी शुरुआत 40 हजार अमेरिकी सैनिकों को देश से बाहर निकालकर करना चाहिए। दरअसल, अमेरिका भले ही यह कहता रहा हो कि नाटो में उसने ज्यादा खर्च किया है। लेकिन यूरोपीय देशों के मन में यह भाव है कि नाटो में हमेशा ही अमेरिका के हितों को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। यूरोपीय देश इस बात का भी आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका उन्हें विदेशी युद्धों में जबरदस्ती घसीटता रहता है। ईरान युद्ध को लेकर भी चुपाला ने नाराजगी जाहिर की है। गौरतलब है कि जर्मनी में अमेरिका को लेकर विरोध लगातार तेज हो रहा है। हमेशा विरोध में रहने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर काफी हद तक एक राय हैं। चांसलर मर्त्ज ने भी ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका पर हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस युद्ध को खत्म करने की बजाय अमेरिका ने इसे बढ़ाने का काम किया है, जिससे वैश्विक तनाव बढ़ गया है। जर्मनी में कितने अमेरिकी सैनिक? दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी में अमेरिका के 40 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। इसके अलावा करीब 12 से ज्यादा सैन्य अड्डे मौजूद हैं। वर्तमान में जर्मनी के ‘रामस्टाइन एयरबेस’ से ही ईरान पर हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों का निर्णय लिया जा रहा है। इसकी वजह से जर्मनी को आशंका है कि इसको भी निशाना बनाया जा सकता है। इस एयरबेस के आसपास अमेरिका का कंट्रोल इतना ज्यादा है कि इस क्षेत्र को यूरोप का मिनी अमेरिका तक कहा जाता है। हालांकि पिछले एक साल से अमेरिका और जर्मनी के बीच में तनाव बढ़ने लगा है। ऐसे में खबर सामने आई थी कि ट्रंप जर्मनी से अपने सैनिक निकालने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस मामले पर कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। नाटो सदस्य देशों को असहज कर रहे ट्रंप बता दें, जनवरी 2025 में शपथ लेने के साथ ही ट्रंप ने नाटो समेत कई देशों के साथ असहज करने वाला व्यवहार किया है। चाहें, फिर वह कनाडा के प्रधानमंत्री को गवर्नर कहना हो, या फिर जेलेंस्की को सरेआम खरी-खोटी सुनाना हो। यहां तक कि ट्रंप ने यूरोप के ग्रीनलैंड को भी हथियाने की योजना बना दी। विरोध इतना बढ़ गया कि यूरोपी देशों ने इसकी रक्षा के लिए अपने सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी। ईरान युद्ध के बाद हालात इतने खराब हो गए कि ट्रंप ने नाटो देशों को कायर तक कह दिया। इसके अलावा उन्होंने हाल ही में जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं के खिलाफ भी गलत भाषा का उपयोग किया है। ट्रंप की इन हरकतों से दशकों पुरानी अमेरिकी विदेश नीति अब अधर में लटकती नजर आ रही है। पूरे विश्व के ऊपर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने जिस नाटो की स्थापना की थी, ट्रंप उसे ही बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। हाल ही में ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों से अपने रक्षा खर्च को 5 फीसदी तक बढ़ाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अगगर यह देश ऐसा नहीं कर सकते, तो फिर यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद ही उठाए।  

6 दिन तक नहीं मिलेगा डब्बा: मुंबई की टिफिन सेवा क्यों रहेगी ठप?

मुंबई मुंबई में छह दिन तक डब्बा सेवा बंद रहेगी। इसके चलते यहां के लोगों को उनके ऑफिस और दुकान में लंच के टिफिन नहीं मिल पाएंगे। हालांकि यह कोई हड़ताल नहीं है, बल्कि इसके पीछे वजह है डब्बावालों की सालाना छुट्टी। इस छुट्टी के लिए डब्बावाले चार अप्रैल तक अपनी सेवा बंद रखेंगे। मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष तलेकर ने खुद इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहाकि यह एक तय ब्रेक है, हड़ताल नहीं। हालांकि सर्विस में ब्रेक से बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। ग्राहकों के लिए सलाह असल में 135 साल पुराना यह नेटवर्क अपने गांवों पुणे, रायगढ़ और नासिक जिलों (मावल, मुलशी, आंबेगांव, जुन्नार, खेड़, अकोला, संगमनेर, आदि) में, गांव के मेलों और अपने ग्राम देवताओं की तीर्थयात्रा के लिए लौट रहा है। यह समय चैत्र पूर्णिमा के आसपास का होता है (जिसमें रामदेवरा मंदिर जैसी जगहों की यात्रा भी शामिल है)। इस अस्थायी रोक से लाखों दफ्तर जाने वाले लोगों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जो रोजाना घर के बने खाने के लिए इस सेवा पर निर्भर रहते हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे आखिरी समय की परेशानी से बचने के लिए खाने का कोई दूसरा इंतजाम कर लें, जैसे कि घर से खाना लाना या बाहर से खाना मंगवाना। एक अपील भी अगले छह दिनों तक टिफिन सेवा बंद रहने के बावजूद, एसोसिएशन ने ग्राहकों से गुज़ारिश की है कि वे इस ब्रेक के लिए कर्मचारियों की सैलरी न काटें। साल भर लगातार सेवा देने की बात पर ज़ोर देते हुए, एसोसिएशन ने इस अल्पकालिक छुट्टी के दौरान सहयोग की अपील की है। अपनी काबिलियत और काम में बारीकी के लिए दुनिया भर में मशहूर मुंबई के डब्बावाले शायद ही कभी अपना काम रोकते हैं। ऐसे में यह सालाना ब्रेक उन कुछेक मौकों में से एक है जो परंपरा से जुड़े हैं। ईरान युद्ध का भी असर बता दें कि पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर डब्बावाला एसोसिएशन की सेवाओं पर भी पड़ा है। यहां पर टिफिन डिलीवरी की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। गैस सिलेंडरों की कमी के कारण शहर के कई होटल और छोटे भोजनालय अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर डब्बावालों पर पड़ा है, क्योंकि उनके लगभग 30 प्रतिशत ग्राहक ऐसे ही बाहरी मेस और भोजन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। कौन हैं डब्बावाला करीब 150 साल से सक्रिय डब्बावाला सेवा को मुंबई की जीवनरेखा माना जाता है। लगभग 1,500 डब्बावाले मिलकर रोजाना करीब 80,000 ग्राहकों तक टिफिन पहुंचाते हैं, जिनमें 70 प्रतिशत ग्राहक घर का बना खाना लेते हैं, जबकि बाकी बाहरी भोजन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।

लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर, UN शांति सैनिक की मौत, हालात बिगड़े

बेरूत  ईरान से जुड़े युद्ध ने अब वैश्विक संकट का रूप ले लिया है, जहां एक तरफ तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ जमीनी और हवाई हमले भी तेज हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने परमाणु हथियार नहीं छोड़े तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द कोई समझौता हो सकता है. इसी बीच बगदाद में अमेरिकी बेस पर हमले और लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह टकराव ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जहां लाखों लोग बेघर हो चुके हैं।  तेल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है. होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर के पार पहुंच गया. कई देश अब रूस से तेल खरीदने को मजबूर हैं, जबकि कुछ देशों में फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को आम लोगों को राहत देने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त करना पड़ा है. वहीं कुवैत में पावर प्लांट पर हमले और ड्रोन-मिसाइल घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में भी डर का माहौल बना दिया है।  इसी बीच ईरान की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफकारी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने फारस की खाड़ी में किसी द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश की, तो अमेरिकी सैनिक ‘शार्क का खाना’ बन जाएंगे. उन्होंने ट्रंप पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया।  तनाव को और बढ़ाने वाला दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने किया. उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने ईरान की मदद की. उनके मुताबिक रूसी जासूसी सैटेलाइट्स ने डिएगो गार्सिया में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य अड्डे की तस्वीरें लीं और यह जानकारी ईरान को दी गई. जेलेंस्की ने कहा कि 24 और 25 मार्च को ली गई इन तस्वीरों के बाद ईरान ने वहां मिसाइल हमला करने की कोशिश की, हालांकि दोनों मिसाइल निशाने पर नहीं लगीं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है. हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का अहम सैन्य अड्डा है. ऐसे में इस पर किसी भी तरह की गतिविधि पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती है।   दबाव के बीच ईरान की कमाई बढ़ी  अमेरिका और इजरायल के दबाव के बीच ईरान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा फायदा होता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी के अंत से अब तक ईरान की रोजाना तेल आय लगभग दोगुनी हो गई है. बताया जा रहा है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों और सप्लाई संकट का फायदा उठाकर तेहरान ने अपनी रणनीति मजबूत की है।   इजरायल ने हथियारों का बड़ा सौदा किया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अपनी सैन्य तैयारी और तेज कर दी है. रक्षा मंत्रालय ने Elbit Systems के साथ 48 मिलियन डॉलर का समझौता किया है, जिसके तहत हजारों 155mm आर्टिलरी शेल खरीदे जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक यह कदम विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करने और घरेलू हथियार उत्पादन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. युद्ध के बीच सप्लाई चेन सुरक्षित रखने के लिए इजरायल लगातार अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने में जुटा है।  बेथलहम के पास आगजनी, फिलिस्तीनी वाहनों को जलाया वेस्ट बैंक के बेथलहम के पास नहालिन इलाके में इजरायली बसने वालों पर आगजनी का आरोप लगा है. फिलिस्तीनी न्यूज एजेंसी के मुताबिक हमलावरों ने इलाके में घुसकर दो फिलिस्तीनी वाहनों को आग के हवाले कर दिया और दीवारों पर नस्लीय नारे लिखे. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटना बाहरी इलाके में हुई, जहां हमलावरों ने पहले हमला किया और फिर बाकौश इलाके में इकट्ठा होकर तोड़फोड़ की।   कतर ने कुवैत पर हमले की निंदा की, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव कतर ने कुवैत के पावर स्टेशन और पानी के प्लांट पर हुए हमले को लेकर ईरान की कड़ी निंदा की है. कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर आक्रामक कार्रवाई’ बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की है और कुवैत के साथ पूरी एकजुटता जताई है. कुवैत अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हुई है और साइट पर मौजूद सर्विस बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा है।  इजरायल लिंक के आरोप में दो लोगों को फांसी  ईरान में दो लोगों को फांसी दे दी गई है, जिन पर अमेरिका और इजरायल से जुड़े विपक्षी संगठन मुजाहिदीन-ए-खलक के साथ काम करने का आरोप था. अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक दोनों पर सुरक्षा बलों पर हमले करने के आरोप भी लगाए गए थे. अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई देश की सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों के चलते की गई है।   वियतनाम भी रूसी तेल की ओर झुका  वैश्विक तेल संकट के बीच वियतनाम की बिन्ह सोन रिफाइनरी ने रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. साथ ही अफ्रीका, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया से भी सप्लाई के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिन की छूट देकर खरीद की अनुमति दी है, जिससे कई देशों को राहत मिली है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सप्लाई पर असर पड़ा है, जिसके चलते थाईलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं. वहीं चीन और भारत अब भी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं।   

सड़क पर ओवरटेक को लेकर चली गोलियां, देहरादून में रिटायर्ड ब्रिगेडियर की दर्दनाक मौत

देहरादून देहरादून में मसूरी रोड पर सोमवार सुबह-सुबह रोडरोज के बाद उपजे विवाद में गोलीकांड की घटना से हड़कंप मच गया। रिटायर्ड आर्मी ब्रिगेडियर वीके जोशी की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। मामले में बताया जा रहा है कि राजपुर रोड पर दो कार सवारों में ओवरटेकिंग को लेकर विवाद हो गया था। जिसके बाद दोनों पक्षों में गोलियां चलनी शुरू हो गई। गोली टहल रहे रिटायर्ड आर्मी अफसर को लग गई। वारदात सुबह 6:50 बजे देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र के जौहरी गांव स्थित तुला अपार्टमेंट के पास हुई। जानकारी के मुताबिक, ब्रिगेडियर वीके जोशी रोज की तरह सुबह टहलने निकले थे, तभी अचानक गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दो गाड़ियों के बीच फायरिंग, चपेट में आए ब्रिगेडियर पुलिस के अनुसार, इलाके में दो वाहनों में सवार लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। देखते ही देखते विवाद फायरिंग में बदल गया। इसी दौरान चली एक गोली ब्रिगेडियर को जा लगी, जिससे उनकी मौके पर ही जान चली गई। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, “मैं सुबह टहल रहा था, तभी गोली चलने की आवाज सुनी। जब मौके पर पहुंचा तो पता चला कि ब्रिगेडियर को गोली लगी है। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि दो गाड़ियों में सवार लोग आपस में फायरिंग कर रहे थे।” घटना के बाद इलाके में हड़कंप देहरादून के एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। हमलावरों की पहचान करने और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फिलहाल, इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मसूरी रोड पर दिल्ली नंबर की एक फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो में सवार लोगों के बीच ओवरटेक करने को लेकर कहासुनी हो गई थी। यह मामूली बहस कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार लोगों ने फॉर्च्यूनर का पीछा किया और उसे रोकने के इरादे से उसके टायरों पर गोलियां चलाईं। पेड़ से टकराई कार, फिर भी नहीं रुके हमलावर फायरिंग से बचने की कोशिश में भाग रही फॉर्च्यूनर जोहड़ी गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पास अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। हादसे के बाद भी हमलावर नहीं रुके और स्कॉर्पियो में सवार लोगों ने कार में मौजूद लोगों के साथ मारपीट की, साथ ही वाहन को भी नुकसान पहुंचाया। इस हमले में फॉर्च्यूनर में बैठे दो लोग घायल हो गए, जिन्हें उनके साथियों ने अस्पताल पहुंचाया। वारदात के बाद आरोपी फरार, पुलिस अलर्ट घटना को अंजाम देने के बाद स्कॉर्पियो सवार सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पूरे जिले में नाकेबंदी कर दी है और संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की जा रही है।