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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में ब्लास्ट, सात पुलिसकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत जिले के बेट्टानी कबीले में एक पुलिस गाड़ी के पास हुए ब्लास्ट में एसएचओ समेत कम से कम सात पुलिसकर्मी मारे गए। स्थानीय मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हुए इस धमाके में एक शख्स के घायल होने की खबर है। स्थानीय पुलिस के एक प्रवक्ता के मुताबिक, धमाका एक पुलिस मोबाइल के पास हुआ, जिसमें सात पुलिसवालों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पाकिस्तान के मीडिया आउटलेट जियो न्यूज के अनुसार, पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि घटनास्थल को सुरक्षित करने और आगे के एक्शन में मदद के लिए अन्य पुलिसवालों को तैनात किया गया था। जब से तालिबान ने काबुल में सत्ता पर कब्जा किया है, पाकिस्तान में सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में, जिनकी सीमा अफगानिस्तान से जुड़ी है, वहां ऐसी घटनाएं ज्यादातर देखने को मिलती हैं। पाकिस्तान ने आतंकवादी घटनाओं के जवाब में ऑपरेशन 'गजब लिल-हक' शुरू किया है और दावा किया है कि सीमा पर और अफगानिस्तान में किए गए हमलों में कम से कम 641 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए हैं। इस ऑपरेशन से पहले, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए थे। तालिबान ने पाकिस्तान पर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के रिहायशी इलाकों में जानलेवा हवाई हमले करने का आरोप लगाया है, जिससे कई आम लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 8 मार्च को पाकिस्तान के क्वेटा के किल्ली इस्माइल इलाके में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर अनजान हमलावरों ने गोलियां चलाईं, जिसमें उनकी मौत हो गई। पाकिस्तान मीडिया डॉन के अनुसार, पुलिस ने कहा कि इंस्पेक्टर मेथा खान, जो हाल ही में सीटीडी में शामिल हुए थे, को 8 मार्च को किल्ली इस्माइल इलाके से गुजरते समय हथियारबंद लोगों ने गोली मार दी। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार हथियारबंद लोगों ने सीटीडी अधिकारी पर गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारी ने कहा कि घटना के बाद बंदूकधारी मौके से भाग गए। पुलिस ने इलाके को घेर लिया और हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच, इस्लामाबाद के एक थिंक टैंक की रिपोर्ट से पता चला है कि फरवरी में पाकिस्तान में लड़ाई से जुड़ी मौतों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसका कारण देशभर में आत्मघाती हमलों में वृद्धि है।

ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी मजबूती, देश में कोयला उत्पादन 200 मिलियन टन के पार: केंद्र

मुंबई कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 11 मार्च तक कैप्टिव, वाणिज्यिक और अन्य कोयला खदानों ने 200 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन का मील पत्थर पार कर लिया। कुल उत्पादन में से, कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों का योगदान 194.17 एमटी रहा, जबकि अन्य खदानों का योगदान 6.06 एमटी रहा, जिससे कुल उत्पादन ऐतिहासिक 200 एमटी के आंकड़े को पार कर गया। विशेष रूप से, वित्त वर्ष 2025-26 में कोयले का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 (197.32 एमटी) के कुल उत्पादन को 7 मार्च, 2026 को ही पार कर गया, और यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 24 दिन पहले ही हासिल कर ली गई। इस क्षेत्र ने अपनी मजबूत गति को बरकरार रखते हुए इसी अवधि में वार्षिक आधार पर 10.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मंत्रालय ने कहा, “यह उपलब्धि विभिन्न केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू/एसपीएसयू) के साथ-साथ निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के सामूहिक प्रयासों और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिनके अथक परिश्रम और दृढ़ता ने देश के कोयला उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” कोयले की आपूर्ति में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो वार्षिक आधार पर 7.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 182.98 एमटी से बढ़कर 197.09 एमटी हो गया है। सरकार के अनुसार, कोयले के वितरण में यह निरंतर वृद्धि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों को विश्वसनीय कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख चालक के रूप में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।दूरदर्शी नीतियों, तकनीकी नवाचार और खनन कार्यबल के समर्पण के बल पर, यह क्षेत्र राष्ट्रीय विकास में अपना योगदान लगातार बढ़ा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि ये उपलब्धियां विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, औद्योगिक प्रगति को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को सुदृढ़ करने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि करती हैं, क्योंकि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है। इस वर्ष घरेलू कोयला उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक रही है, जिसके परिणामस्वरूप खानों और ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।

बांग्लादेश के निर्यात पर अमेरिका की नजर, जांच शुरू होने की रिपोर्ट

नई दिल्ली अमेरिका ने बताया था कि वह 16 देशों के व्यापार को लेकर जांच शुरू कर रहा है। इन देशों में भारत और चीन के अलावा बांग्लादेश का नाम भी शामिल है। ढाका की 'द मॉर्निंग स्टार' की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने बांग्लादेश में एक जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उनकी पॉलिसी और प्रोडक्शन के तरीके से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान हो सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) के ऑफिस ने यह जांच बुधवार को ट्रेड एक्ट 1974 के तहत शुरू की। यह एक पावरफुल ट्रेड एनफोर्समेंट टूल है जिसका इस्तेमाल अमेरिका द्वारा गलत विदेशी तरीकों को चुनौती देने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में यूएसटीआर के हवाले से कहा गया है कि बांग्लादेश में स्ट्रक्चरल एक्स्ट्रा कैपेसिटी और प्रोडक्शन के सबूत मौजूद हैं, जिसका अमेरिका के साथ लगभग 60 लाख 50 हजार डॉलर का गुड्स व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) है। दोनों देशों के बीच यह व्यापार अधिशेष मुख्य रूप से टेक्सटाइल सेक्टर के निर्यात से पैदा होता है, जहां सरकार घरेलू वस्त्र और चमड़ा उत्पादों सहित 43 क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है। यूएसटीआर ने कहा कि बांग्लादेश के सीमेंट उद्योग में सालों में सबसे खराब मंदी के बावजूद काफी अतिरिक्त क्षमता है। 2024 में बांग्लादेश की सीमेंट की राष्ट्रीय खपत घटकर 38 मिलियन टन रह गई, जो कुल क्षमता का 40 फीसदी से भी कम है और अगले साल इसमें और गिरावट आई। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महमूद हसन खान ने कहा, “जांच की सूची में देश का नाम देखना अच्छा नहीं है।” रिपोर्ट के अनुसार, जिन मामलों की जांच की जाएगी, जैसे उत्पादन क्षमता, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रोत्साहन, उनसे बांग्लादेश पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से वर्क ऑर्डर मिलने पर आधारित है, इसलिए ज्यादा उत्पादन मुमकिन नहीं है। इसके अलावा, बांग्लादेश ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की सिफारिशों के अनुरूप अपने श्रम कानूनों में संशोधन किया है और तीन महत्वपूर्ण आईएलओ कन्वेंशनों को भी मंजूरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस वर्ष नवंबर में सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी के तहत निर्यात प्राप्तियों पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना भी शुरू कर दिया है।

दुर्लभ खनिजों पर भारत-अमेरिका की बड़ी साझेदारी? ट्रंप के दूत ने दिए समझौते के संकेत

नई दिल्ली भारत और अमेरिका एक और समझौते पर मुहर लगाने के बेहद करीब हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को यह खुशखबरी देते हुए कहा है कि दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े अहम समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इस समझौते पर तेजी से काम कर रहे हैं। सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इस पर खुशी जताते हुए कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम क्रिटिकल मिनरल्स समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब पहुंच गए हैं। यह समझौता एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी सिस्टम और उभरती तकनीकों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में मदद करेगा। अगले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।” सर्जियो गोर ने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देश ठोस नतीजे दिखा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सरकारों में इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की मजबूत राजनीतिक इच्छा दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “हम कुछ अलग देख रहे हैं। जहां पहले रुकावटें होती थीं, अब वहां प्रगति दिखाई दे रही है। अमेरिका और भारत की साझेदारी की ताकत और गति को बढ़ाने वाली कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं।” भारत-अमेरिका के रिश्तों पर क्या बोले? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत ने यह भी कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने हाल में हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों और प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी में तीन बड़ी प्रगति हुई है। पहली व्यापार के क्षेत्र में, दूसरी भरोसे और तकनीक के क्षेत्र में और तीसरी रणनीतिक समन्वय के क्षेत्र में। उनके अनुसार यह तीनों पहलू दिखाते हैं कि अमेरिका और भारत की साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। अंतरिम समझौते पर सहमति इस दौरान अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में बोलते हुए गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार, लोगों की प्रतिभा और समाज में मौजूद उद्यमशीलता की ऊर्जा यह साफ दिखाती है कि सहयोग की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत सिर्फ गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की थी, ताकि इन अवसरों को ठोस परिणामों में बदला जा सके। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने बीते 7 फरवरी को एक अंतरिम समझौते पर सहमति जताई थी।  

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर घिरा विवाद, 193 विपक्षी सांसदों ने हटाने का प्रस्ताव लाया

नई दिल्ली विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 193 विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग नोटिस जमा किए हैं, जिसमें लोकसभा से 130 और राज्यसभा से 63 सांसद शामिल हैं। यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की ऐसी कार्रवाई की गई है। यह कदम मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में उठाया गया है, जिसमें इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां, आप और कुछ निर्दलीय सांसदों ने समर्थन दिया है। विपक्ष ने नोटिस में सीईसी के खिलाफ 7 प्रमुख आरोप लगाए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी धांधली की जांच में जानबूझकर बाधा डालना, बड़े पैमाने पर मतदाता वंचित करना (मास डिसेनफ्रैंचाइजमेंट) और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करना शामिल है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है, जिसे विपक्ष भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश बता रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि यह विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने का प्रयास है। इसी तरह बिहार और अन्य राज्यों में भी एसआईआर को लेकर विवाद हुआ था, जहां विपक्ष ने इसे चुनावी धांधली का हिस्सा बताया। ये आरोप पिछले कुछ महीनों से बढ़ते जा रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल यह विवाद संसद में तनाव का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब निष्पक्ष नहीं रही और यह सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहा है। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया गया है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाने की प्रक्रिया बताता है। महाभियोग के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जो वर्तमान में विपक्ष के पास नहीं है, लेकिन यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने और मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उछालने का प्रयास है। सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि पहले ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर को योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अयोग्य को हटाने का माध्यम बताया था। यह घटना लोकतंत्र की संस्थाओं पर सवाल उठाती है और आगामी चुनावों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्रता बचाने की लड़ाई बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक स्टंट करार दे सकता है। संसद में इस नोटिस पर चर्चा और आगे की कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। कुल मिलाकर, यह विवाद चुनाव सुधारों और संस्थागत निष्पक्षता पर बहस को जन्म देगा।  

मिड-एयर रिफ्यूलिंग के दौरान अमेरिकी विमान हादसे का शिकार, 4 लोगों की जान गई

वाशिंगटन ईरान पर मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल को भी युद्ध में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस युद्ध में अभी तक आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं और एक महंगा एयर डिफेंस सिस्टम थाड़ (THAAD) का रडार भी नष्ट हो चुका है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार को चौथे विमान के गिरने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ईंधन भरने वाले एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार 6 क्रू सदस्यों में से चार की मौत हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस विमान के गिरने में अभी तक न तो दुश्मन की गोलीबारी और न ही अपने पक्ष की तरफ से की गई फायरिंग ही शामिल थी। सेंटकॉम के मुताबिक इस पर अभी जांच की जा रही है। सेंटकॉम की तरफ से इस घटना पर ज्यादा जानकारी देते हुए बताया गया कि इस घटना में दो विमान शामिल थे। क्रैश होने वाला विमान (बोइंग KC-135) ईरान में जारी अभियानों का हिस्सा था। यह एक टैंकर विमान है, जो कि दूसरे जेट्स को हवा में ही फ्यूल उपलब्ध कराता था। घटना के बाद अभी बचाव कार्य जारी है। इस विमान के क्रैश होने के बाद दूसरा विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया है। आपस में टक्कर की आशंका सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में अमेरिका के एक दूसरे ईंधन टैंकर विमान को तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरते हुए देखा गया है। इस जहाज के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा हुआ दिख रहा है। ऐसे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह दोनों ईंधन वाहक जहाज हवा में ही एक-दूसरे से टकरा गए थे, जिसकी वजह से एक जहाज क्रैश हो गया, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रूप से लैंड कर पाया। हालांकि, इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। इस युद्ध में आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं। केसी-135 के गिरने से पहले अमेरिका के तीन एफ-15 जहाज भी कतरी वायुसेना की गलती की वजह से मार गिराए गए थे। अमेरिकी वायुसेना अभियानों के लिए खास KC-135 अमेरिका की वायुसेना के लिए इस विमान की भूमिका बहुत ही खास है। बोइंग का KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान हवा में उड़ते हुए अन्य लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता रखता है। इस विमान में चार टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं और यह अपने साथ करीब 146 टन वजन लेकर उड़ान भर सकता है। पिछले 60 सालों से यह लंबी दूरी के अमेरिकी सैन्य अभियानों में बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईरान युद्ध के दौरान भी इन विमानों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, ताकि अमेरिकी विमानों की उड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।

होर्मुज में तनाव के बीच भारत सक्रिय, जयशंकर ने फिर की ईरानी विदेश मंत्री से बात

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीफोन पर अहम बातचीत की है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। यह बातचीत ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी भारी संकट के बीच भारतीय जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर आगे बढ़े हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल के संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए हैं, जिससे अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ गई है। ईरान का रुख: आत्मरक्षा और ब्रिक्स से अपील बातचीत के दौरान, ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर को अमेरिका और 'जायोनी शासन' (इजरायल) द्वारा ईरान के खिलाफ की गई आक्रामकता और अपराधों से उत्पन्न ताजा स्थिति की विस्तार से जानकारी दी। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार, वहां की जनता और सशस्त्र बल हमलावरों के खिलाफ अपनी रक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं। अंतरराष्ट्रीय निंदा और ब्रिक्स की भूमिका उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों को ईरान के खिलाफ इस सैन्य आक्रामकता की निंदा करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'ब्रिक्स' को एक महत्वपूर्ण मंच बताया और आग्रह किया कि इस नाजुक मोड़ पर वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए ब्रिक्स को एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। भारत का रुख: शांति और सामूहिक प्रयास विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय दोनों तरह के सहयोग को और अधिक विकसित करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी स्थिरता और सुरक्षा कायम करना सबकी साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। ईरान युद्ध और तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। इस स्थिति के बीच, भारत अपने 28-30 भारतीय-ध्वज वाले मालवाहक (मर्चेंट) जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। इसी प्रयास के तहत हाल ही में तीन जहाजों ने सफलतापूर्वक होर्मुज को पार किया है। इनमें शेनलॉन्ग (जो लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज है, लेकिन इसका कप्तान भारतीय है), और दो भारतीय झंडे वाले जहाज- पुष्पक और परिमल शामिल हैं।  

अलविदा जुमा पर तेहरान में ब्लास्ट से दहशत, इजरायल विरोध प्रदर्शन के बीच अफरातफरी

तेहरान ईरान की राजधानी तेहरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच धमाका हुआ है। यह ब्लास्ट उस वक्त हुआ, जब तेहरान के फिरदौसी चौक पर हजारों लोग ईरान और अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन करने जुटे थे। आज ईद से पहले का आखिरी जुमा है, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है। इस कारण भी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस दौरान जब धमाका हुआ तो दहशत फैल गई और लोग मौके से भागते नजर आए। इस धमाके के पीछे ईरानी एजेंसियों को इजरायल का हाथ होने का शक है। अब तक धमाके की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इजरायल ने हमलों की चेतावनी दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह धमाका भी इजरायल ने ही किया है। यह धमाका ऐसे वक्त में हुआ, जब ईरान में अलविदा जुमा मनाया जा रहा है। ईद से पहले के आखिरी जुमा के दिन खूब भीड़ जुटी थी और इसी दौरान यह धमाका हुआ। यह धमाका जिस इलाके में हुआ है, वह तेहरान यूनिवर्सिटी के भी काफी करीब है। अब तक इस बारे में जानकारी नहीं मिली है कि यह धमाका किसने और क्यों किया है। लेकिन यह कहा जा रहा है कि इजरायल का इसमें हाथ हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज ही उसकी ओर से चेतावनी दी गई थी कि वह इस इलाके में हमले कर सकता है। यह संदेह इसलिए भी है क्योंकि प्रदर्शन इजरायल के खिलाफ था और इसकी फिलिस्तीन के लोगों के लिए समर्थन था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि धमाके चलते अफरातफरी मच गई थी। इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग वहां डटे रहे और डेथ टू इजरायल एवं डेथ टू अमेरिका जैसे नारे लगाते रहे। इस बीच ईरान भी ऐक्शन में ही दिख रहा है। उसने खाड़ी और अरब के देशों पर भी आज हमले किए हैं। दर्जनों ड्रोन्स से तो सऊदी अरब को ही निशाना बनाने की कोशिश की है। इसके अलावा दुबई को ईरान ने फिर से टारगेट किया है। गौरतलब है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि हम अमेरिका से बदला लेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ही कहा था कि अब ईरान से जंग खत्म होने की ओर है। लेकिन ईरान ने ही इस बात को खारिज किया था। उसका कहना है कि भले ही जंग को अमेरिका ने शुरू किया है, लेकिन इसे खत्म हम ही करेंगे। वहीं ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि हमने ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ईरान की नेवी खत्म हो गई है। एयर फोर्स बची नहीं हैं। मिसाइल, बम और ड्रोन्स आदि हमने तबाह कर दिए हैं।

होटल और रेस्तरां उद्योग को LPG संकट से राहत, सरकार का फैसला रसोई संचालन को सुरक्षित रखेगा

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जंग के कारण पैदा हुए वैश्विक गैस संकट के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसमें होटल-रेस्तरां इंडस्ट्री को राहत देने की तैयारी है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कमर्शियल एलपीजी की मौजूदा स्थिति और इसका होटल-रेस्तरां तथा पर्यटन सेक्टर पर पड़ रहे असर पर चर्चा की गई. सरकार ने हालात को संभालने के लिए तुरंत कुछ कदम उठाने का फैसला किया है. आज से व्यवसायों को हर महीने की औसत कमर्शियल LPG जरूरत का करीब 20 फीसदी कोटा दिया जाएगा, ताकि होटल और रेस्तरां की रसोई चलती रहे। इसके अलावा होटल और रेस्तरां को अतिरिक्त गैस सप्लाई देने के उपायों पर भी काम किया जा रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय आपस में मिलकर और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे, ताकि हालात पर नजर रखी जा सके और समस्याओं का जल्दी समाधान किया जा सके. सरकार का कहना है कि गैस की मौजूदा परेशानी चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुए वैश्विक संकट का हिस्सा है। होटल इंडस्ट्री परेशान दरअसल, पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत में 80-85 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी इलाके से होता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से. जहाजों की आवाजाही रुकने से देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (नीले रंग वाले) की भारी कमी हो गई है. होटल, रेस्तरां, ढाबे और पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं. कई शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली में रेस्तरां मेन्यू कम कर रहे हैं, कुछ बंद हो रहे हैं या समय कम कर रहे हैं. मुंबई में 20 प्रतिशत तक होटल-रेस्तरां बंद हो चुके हैं, और अगर हालात नहीं सुधरे तो दो-तीन दिनों में 50 प्रतिशत तक बंद हो सकते हैं. बेंगलुरु में होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि सप्लाई बंद रहने पर हजारों जगहें बंद हो जाएंगी। घरेलू सेक्टर पर जोर बैठक के बाद पुरी ने कहा कि ये समस्या वैश्विक है, जंग की वजह से पैदा हुई है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं (घरों में इस्तेमाल वाली गैस) को प्राथमिकता दे रही है. घरेलू क्षेत्र कुल खपत का 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सिर्फ 13 प्रतिशत. सरकार ने तुरंत राहत के कदम उठाए हैं. आज से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) व्यवसायों को उनकी औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी जरूरत का करीब 20 प्रतिशत कोटा देंगी. राज्य सरकारों के साथ मिलकर ये कोटा असली जरूरतमंदों को दिया जाएगा, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी न हो. ये कदम ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए है. इसके अलावा अतिरिक्त गैस सप्लाई के उपायों पर काम चल रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय मिलकर उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे।

US एयरक्राफ्ट करियर पर ईरान ने मिसाइल हमले का दावा, अमेरिका ने बताया असफल

तेहरान पश्चिम एशिया के समुद्र में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर सटीक मिसाइल और ड्रोन हमला किया है, जिससे पोत को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक असफल खतरा बताया है।  ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के अनुसार, IRGC ने ओमान के पास समुद्र में एक "सटीक ऑपरेशन" को अंजाम दिया. ईरान का दावा है कि उसके उन्नत हथियारों ने ईरानी सीमा से 340 किमी दूर इस युद्धपोत को निशाना बनाया।  IRGC के बयान में कहा गया है कि इस हमले के बाद 'लिंकन' ऑपरेशनल नहीं रहा और उसे उच्च गति के साथ क्षेत्र से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसके साथ ही ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिका के मीना सलमान नौसैनिक अड्डे पर भी दो लहरों में ड्रोन हमले करने का दावा किया है।  अमेरिका का पलटवार: ईरानी जहाज को मार गिराया दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के दावों को कोरी कल्पना बताया है. 'सीबीएस न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत के बेहद करीब आ रहे एक ईरानी जहाज को समय रहते रोक दिया।  अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पहले 'मार्क-45' गन से चेतावनी दी गई और बाद में हेलफायर मिसाइलों से लैस हेलीकॉप्टर ने उस ईरानी जहाज पर दो सटीक प्रहार किए. अमेरिका ने स्पष्ट किया कि उसका कोई भी पोत सुरक्षित है और उसने खतरे को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है।  यह सैन्य टकराव ईरान के नए क्रांतिकारी नेता मुजतबा खामेनेई के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दुश्मनों को "पछताने" वाली कार्रवाई की चेतावनी दी थी. वहीं, इराक में ईरान समर्थित गुटों द्वारा एक अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (KC-135) को मार गिराने की खबरों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है. फिलहाल, दोनों महाशक्तियां अपनी सैन्य श्रेष्ठता का दावा कर रही हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।