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सड़क किनारे रखा था धमाके का सामान, जम्मू‑कश्मीर में बड़ी आतंकी साजिश हुई नाकाम, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

श्रीनगर  देशभर में पूजा स्थलों और ऐतिहासिक इमारतों पर आतंकी हमले की साजिश के अलर्ट के बीच कश्मीर में एक बड़ा हादसा टल गया है। जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में सड़क के किनारे ही इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोजिव डिवाइस (IED) पाया गया है। कोहेस्तान कॉलोनी के पास ही गुलाब शेख मोहल्ले में इसे सड़क के किनारे एक बैग में रखा गया था। हालांकि एजेंसियों को इसकी जानकारी मिल गई और बम निरोधक दस्ते ने पहुंचकर इसे निष्क्रिय कर दिया। एक दिन पहले ही बारामुला जिले के जांबाजपोरा इलाके में आईडी पाया गया था। सेना ने आईईडी मिलने के बाद बड़ी सावधानी से इसे निष्क्रिय कर दिया। सेना का कहना है कि यह आतंकियों की साजिश है। बता दें कि घाटी में सुरक्षाबलों की सतर्कता और एजेंसियों के अलर्ट रहने की वजह से कई हादसे टाले गए हैं। दिल्ली में आतंकी साया दिल्ली में आतंकी खतरे की आशंका संबंधी खुफिया जानकारी मिलने के बाद शनिवार को लाल किले के आसपास के इलाके और चांदनी चौक के कुछ हिस्से सहित राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटीटी) ने कथित तौर पर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को हमले वाले स्थानों की सूची में रखा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के पास संभावित विस्फोट के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है, जो प्रमुख पर्यटन स्थल और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। मंदिर को भी निशाना बनाया जा सकता है सूत्रों ने बताया कि ऐसी खुफिया सूचना है कि चांदनी चौक स्थित एक मंदिर को भी निशाना बनाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि खुफिया जानकारी का सत्यापन और उनका आकलन किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर संवेदनशील धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि लश्कर-ए-तैयबा इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) आधारित हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, हमले की यह कथित साजिश आतंकी समूह द्वारा छह फरवरी को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में हुए विस्फोट का बदला लेने के प्रयासों से जुड़ी है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियां ​​और दिल्ली पुलिस की इकाइयां आपस में करीबी समन्वय बनाए हुए हैं और सीसीटीवी निगरानी, ​​वाहनों की जांच व संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती के माध्यम से निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि बम निरोधक दस्ते, खोजी दस्ते और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किए गए हैं। यह चेतावनी 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के पास हुए घातक कार विस्फोट की पृष्ठभूमि में जारी की गई है। विस्फोट में कम से कम 13 लोग मारे गए थे और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि के बारे में तुरंत पुलिस या आपातकालीन सेवाओं को सूचित करने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है और ये उपाय एहतियात के तौर पर किए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि आगे की जानकारी जुटाने और प्राप्त सूचनाओं की पुष्टि की जा रही है।

25‑50% से घटकर 18% और अब 10%: अमेरिकी टैरिफ में बदलाव, भारत को मिली राहत

नई दिल्ली अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दुनिया के तमाम देशों के खिलाफ लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया है. इसके बाद भारत को भी बड़ी राहत मिली है. इस टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य नियम के तहत तमाम देशों पर 10 फीसदी टैरिफ की घोषणा की. ऐसे में यह सवाल उठ रहा था कि भारत जैसे देश जो अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सहमति बना चुके हैं, उनके प्रोडक्ट को इस नए टैरिफ में जगह मिलेगी या नहीं. लेकिन, कुछ ही देर बाद अमेरिका प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील कर चुके या इस पर सहमति बना चुके तमाम देशों पर भी अब एक समान 10 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. इससे पहले ट्रेड डील के तहत भारतीय प्रोडक्ट पर अमेरिका ने 18 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही थी. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने हमारी सहयोगी बिजनेस न्यूज टीबी चैनल ‘सीएनबीसी’ को स्पष्ट किया कि भारत पर टैरिफ दर 18 से घटकर 10 फीसदी हो गई है. यह ट्रंप के नए 10 फीसदी वैश्विक टैरिफ की व्याख्या करता है. सीएनबीसी के संवाददाता एमॉन जावेर्स ने भारत समेत तमाम ट्रेड डील वाले देशों का 10 फीसदी टैरिफ पर विवरण दिया है. वियतनाम को सबसे ज्यादा फायदा ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने यूरोपीय संघ पर 15 फीसदी, जापान पर 15 फीसदी, ब्रिटेन पर 10 फीसदी और भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगाया था. स्विट्जरलैंड पर 15 फीसदी, दक्षिण कोरिया पर 15 फीसदी और वियतनाम पर 20 फीसदी टैरिफ की बात कही गई थी. इन सभी देशों या संघों के साथ अमेरिका ने ट्रेड डील कर ली है या फिर डील पर सहमति बन गई है. लेकिन, अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप के नए आदेश में सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ की बात कही है. ऐसे में इस आदेश का सबसे ज्यादा फायदा वियतनाम को मिलने वाला है जिसको 20 फीसदी टैरिफ देना था. भारत के प्रोडक्ट्स के खिलाफ टैरिफ 18 से घटकर 10 फीसदी पर आ गया है. भारत अब कितना टैरिफ देगा भारत की करें, तो पहले अमेरिका ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था और फिर इसे 50% किया था, लेकिन India-US Trade Deal पर बात बनते ही इसे 18% पर ला दिया गया. अब जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Trump Tariff को गैरकानूनी करार दिया है, तो ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया, ऐसे में भारत पर अब कितना टैरिफ लागू होगा, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ये 18% रहेगा, 10% होगा या फिर 13.5% आइए समझते हैं?  भारत पर ऐसे बढ़ता-घटता रहा US टैरिफ US Supreme Court द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द करने के बाद, भारत को अपने अमेरिकी निर्यात पर कितना टैरिफ देना होगा, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है. भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ता घटता रहा है. Donald Trump ने बीते साल अप्रैल में जब दुनिया पर टैरिफ अटैक (Trump Tariff Attack) की शुरुआत की थी, तो शुरुआत में भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था. इसके बाद अचानक ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए अगस्त में 50% कर दिया था और इसके पीछे कारण भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद (India Russian Oil Import) को बताया था. ऐसा करके यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद की बात कहते हुए भारत पर जुर्माने के तौर पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया था.  अमेरिका में हलचल हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत के साथ ट्रेड डील है और उसके प्रोडक्ट पर 18 फीसदी टैरिफ लगता रहेगा. लेकिन, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 10 फीसदी टैरिफ वाला नया आदेश सभी देशों पर लागू होगा. इसमें वे देश भी शामिल हैं जिनके साथ हमारा ट्रेड डील है.  डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को अवैध करार दिए जाने के बाद अमेरिका में हलचल तेज है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पूरी दुनिया के कारोबार जगह में उथल-पुथल मच गया है. पूरी रात अमेरिका से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर रिएक्शन आते रहे. अब 18%, 10% या फिर 13.5%?  अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा Trump Reciprocal Tariff को रद्द किया गया है और अदालत ने साफ कहा है कि ट्रंप करीब 50 साल पुराने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए शांति काल में टैरिफ नहीं लगा सकते. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को 18% या फिर 10% टैरिफ देना होगा. या फिर देश पर लागू US Tariff 13.5% होगा. तो बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत पर लगाए गए 18% के पारस्परिक टैरिफ का कानूनी आधार प्रभावी रूप से समाप्त हो जाता है. कानूनी फेरबदल के बाद 18% टैरिफ रद्द होने की स्थिति में भारत पर US Tariff महज 3.5% रह जाता है, जो कि ट्रंप के फैसलों से पहले भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा प्राप्त होने के कारण चुकाना पड़ रहा था. हालांकि, दूसरी ओर कोर्ट के फैसले से भड़के ट्रंप ने आनन-फानन में 10% के ग्लोबल टैरिफ को तत्काल लागू करने के लिए धारा 122 का इस्तेमाल किया, जो रद्द किए गए टैरिफ की जगह लेगा. ऐसे में देखा जाए तो 10% का अतिरिक्त टैरिफ जुड़ने के बाद ये US Tariff On India 13.5% हो जाता है.  ट्रंप ने भारत पर टैरिफ को लेकर क्या कहा?  बता दें कि Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में मिली हार के बाद जिस धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 10% Global Tariff लागू किया है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए 15% तक का शुल्क लगाने का अधिकार देती है, लेकिन इस टाइमलाइन के बाद उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है. भारत को लेकर ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि India पर टैरिफ पहले से तय ट्रेड डील के अनुसार 18% ही रहेगी, लेकिन उनके इस दावे पर व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट कर दिया कि कानूनी तौर पर फिलहाल भारत पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा.

तारिक रहमान बने बांग्लादेश PM, भारत से जुड़ा अहम फैसला और यूनुस के फरमान को किया पलट

ढाका  बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्ते को बेहतर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को भारत के लोगों के लिए वीजा सेवाएं फिर से बहाल कर दी है, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की सरकार ने करीब दो महीने पहले सस्पेंड कर दिया था. भारत-बांग्लादेश वीजा सर्विस बहाल भारतीय नागरिकों के लिए सभी कैटेगरी के वीजा बहाल कर दिए गए हैं, जिनमें मेडिकल और पर्यटन वीजा भी शामिल हैं. पिछले साल दिसंबर में बिजनेस और वर्क वीजा पर रोक नहीं लगाई गई थी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार (20 फरवरी) सुबह सेवाएं बहाल कर दी गईं. बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के तीन बाद ये फैसला लिया गया, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार का संकेत है. क्या भारत भी बहाल कर सकता है वीजा सर्विस? बांग्लादेश के सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने गुरुवार (19 फरवरी 2026) को बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भी सभी वीजा सेवाएं पूरी तरह बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. बीडी न्यूज24 के अनुसार उन्होंने कहा, 'मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा वर्तमान में जारी किए जा रहे हैं. ट्रेवल सहित अन्य कैटेगरी वीजा को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.' उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर टिकी है.' उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी प्रकार के भारतीय वीजा सामान्य रूप से जारी होने लगेंगे. बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन पर हुआ था हमला तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर गया है. बांग्लादेश में कट्टरपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था. दिसंबर 2025 में राजनयिक तनाव के मद्देनजर दोनों देशों के बीच कांसुलर और वीजा सेवाएं रोक दी गई थीं. सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत की सूचना मिलने के बाद 18 दिसंबर की रात प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप ने चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया और पत्थर फेंके थे. इसके बाद भारत ने वहां 21 दिसंबर से अगले आदेश तक कामकाज निलंबित कर दिया.  

रिस्की ऐप्स पर बड़ी कार्रवाई: AI की मदद से Google ने बचाए करोड़ों यूजर्स

नई दिल्ली गूगल ने गुरुवार को 2025 में एंड्रॉयड इकोसिस्टम को सिक्योर रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी है. अपने ऐनुअल सिक्योरिटी अपडेट में कंपनी ने बताया कि कैसे गूगल प्ले को सुरक्षित बनाने के लिए लाखों ऐप्स को ब्लॉक किया गया है. कंपनी ने लाखों ऐसे ऐप्स को ब्लॉक किया है जो मालवेयर फैला सकते थे.  इतना ही नहीं ये ऐप्स फाइनेंशियल फ्रॉड्स, छिपे हुए सब्सक्रिप्शन और प्राइवेसी में दखल के जरिए यूजर्स को नुकसान पहुंचा सकते थे. इससे पहले किसी यूजर को कोई नुकसान हो गूगल ने इन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. कंपनी ने बताया है कि उन्होंने AI टूल की मदद से ऐसे ऐप्स को पहचाना है.  17.5 लाख ऐप्स को किया ब्लॉक गूगल ने बताया कि 2025 में 17.5 लाख ऐप्स को Google Play पर पब्लिश होने से पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन किया था. कंपनी ने इसकी जानकारी 19 फरवरी को रिलीज हुए ब्लॉक में दी है. साथ ही कंपनी ने 80 हजार डेवलपर्स को भी बैन किया है, जो ऐसी एक्टिविटी से जुड़े हुए थे.  दिग्गज टेक कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्होंने 2,55,000 ऐप्स को यूजर के सेंसिटिव और गैरजरूरी डेटा तक पहुंचने से रोका है. गूगल ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को मजबूत किया है और प्राइवेसी फॉर्वर्ड डेवलपमेंट को प्रमोट करने की बात कही है.  AI कैसे कर रहा है गूगल की मदद? ऐप डिस्कवरी में लोगों के भरोसे को बनाए रखने के लिए गूगल ने एंटी-स्पैम सिस्टम को बेहतर किया है. इसकी वजह से 16 लाख स्पैम रेटिंग और रिव्यूज को ब्लॉक किया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रिव्यूज भी शामिल हैं. इसके अलावा रिव्यू बॉम्बिंग कैपेन की वजह से ऐप्स को होने वाले नुकसान को भी कम किया गया है.  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स और डेवलपर्स दोनों को फायदा हुआ है. कंपनी ने बताया है कि उसका जेनरेटिव AI पावर्ड रिव्यू सिस्टम किसी ऐप को कैसे एनालाइज करता है. ये सिस्टम किसी ऐप की अर्ली लाइफ साइकिल डेवपलमेंट को एनालाइज करने, मैलवेयर, स्पाईवेयर और फाइनेशियल स्कैम को डिटेक्ट करने में मदद करता है.

भिवंडी कोर्ट में राहुल गांधी की पेशी, RSS केस में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे

ठाणे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को ठाणे जिले के भिवंडी में मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए. राहुल ने मानहानि केस में नया जमानत दिया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को नए जमानतदार के तौर पर पेश किया. इससे पहले, भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी से केस में नया जमानत देने को कहा था, क्योंकि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल, जो उनके जमानतदार या गारंटर थे, का पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था. राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने पहले कहा था कि जज ने राहुल गांधी को खास तौर पर नए जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए खुद कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया था. क्योंकि शिवराज पाटिल चाकुरकर, जो उनके मौजूदा जमानतदार थे, की 12 दिसंबर को मौत हो गई थी. जब राहुल गांधी को इस मामले में जमानत मिली थी, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल उनकी जमानत के लिए खड़े हुए थे. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को दिखाए काले झंडे वहीं, कोर्ट में पेशी के लिए राहुल गांधी जब मुंबई पहुंचे तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने इसे एआई समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध का जवाब बताया. राहुल गांधी सुबह छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे और कोर्ट में पेश होने के लिए सड़क के रास्ते ठाणे जिले के भिवंडी गए. बीजेपी समर्थकों के एक ग्रुप ने मुलुंड टोल नाका पर विरोध प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारे लगाए. हालांकि, पुलिस ने कांग्रेस नेता के दौरे के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे ताकि भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी टकराव को रोका जा सके. पत्रकारों से बात करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का विरोध करते हैं और उन पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के हर काम का विरोध करते हैं. देश से जुड़े मुद्दों पर भी. यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने AI समिट में नारे लगाए, जिससे भारत की छवि खराब हुई. इसीलिए हमने उनके खिलाफ विरोध किया." इस बीच, कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने बीजेपी के विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. सावंत ने सत्ताधारी बीजेपी पर ड्रामा करने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में महाराष्ट्र और देश के किसानों के हितों को दांव पर लगाकर उनके भविष्य से समझौता किया है. राहुल के खिलाफ मानहानि का केस राहुल के बयानों को लेकर एक RSS कार्यकर्ता राजेश कुंते ने उनके खिलाफ मानहानि का केस किया है. राजेश कुंते ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि कांग्रेस नेता राहुल ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सोनाले गांव में एक रैली में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे संघ का हाथ था. कुंते ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत अपनी शिकायत में कहा कि इस झूठी टिप्पणी से आरएसएस की छवि धूमिल हुई है. ट्रायल के दौरान कुंते का क्रॉस-एग्जामिनेशन और पुनर्परीक्षा खत्म हो गया है. इसस पहले, सुनवाई 20 दिसंबर, 2025 को होनी थी, लेकिन नए जमानतदार की जरूरत के कारण इसे 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया था. 17 जनवरी को मजिस्ट्रेट ने मामले को 21 फरवरी तक के लिए आगे बढ़ा दिया.

भारत में घुसी ईरानी टैंकर की चालाकी, पाकिस्तानी सीमा में छुपकर हुआ था प्रवेश

मुंबई  भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 6 फरवरी को भारत के पश्चिमी तट के पास ईरान से जुड़े जिन तीन प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त किया, उनमें से एक जहाज के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है. दर्ज एफआईआर के अनुसार, इन टैंकरों में से एक जहाज एमटी एस्फाल्ट स्टार कई दिनों तक पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखे हुए था. जब्त किए गए तीन जहाजों के नाम MT Asphalt Star, MT Stellar Ruby और MT Al Jafzia हैं. इन पर ईरान से जुड़े तेल की तस्करी और अवैध गतिविधियों का आरोप है. भारतीय तटरक्षक ने 4-5 फरवरी को इन जहाजों की संदिग्ध शिप-टू-शिप ट्रांसफर गतिविधियों का पता लगाया और उन्हें मुंबई लाकर जांच के लिए रखा. कुल 55 क्रू मेंबर्स इन जहाजों पर सवार थे. रिपोर्ट के मुताबिक, 15 फरवरी को येलो गेट पुलिस स्टेशन में तटरक्षक कमांडेंट अनिरुद्ध धर्मपाल दबाश की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई. इसमें नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें तीनों जहाजों के मालिक अबू धाबी (यूएई) स्थित भारतीय नागरिक जोगिंदर सिंह बरार शामिल हैं. एस्फाल्ट स्टार के कप्तान श्याम बहादुर चौहान और एक क्रू मेंबर को तेल तस्करी तथा जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. एफआईआर के अनुसार, एमटी एस्फाल्ट स्टार के इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम (ECDIS) डेटा की जांच में पाया गया कि 20 जनवरी से 28 जनवरी तक यह जहाज पाकिस्तान की विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में प्रवेश कर गया था. 28 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS), वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (VHF) और सभी सेंसर बंद कर दिए, जिससे उसकी पहचान छिपाई गई और संदिग्ध गतिविधियां की गईं. कप्तान ने पूछताछ में कहा कि जहाज का वॉयेज डेटा रिकॉर्डर सिस्टम खराब हो गया था. तीनों जहाजों ने AIS स्पूफिंग (झूठी लोकेशन दिखाना) और फर्जी पहचान डेटा का इस्तेमाल करके जांच से बचने की कोशिश की. एफआईआर में कहा गया है कि एमटी अस्फाल्ट स्टार ने भारतीय महासागर की ईईज़ेड में बिना किसी भारतीय सरकारी अधिकारी को सूचित किए एमटी अल जफजिया को 30 मीट्रिक टन हेवी फ्यूल ऑयल ट्रांसफर किया. साथ ही, एमची स्टेलर रूबी को 5473 मीट्रिक टन बिटुमेन (सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल) ट्रांसफर किया गया. जोगिंदर सिंह बरार ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उनके जहाज संकट में फंसे अन्य जहाजों को आवश्यक आपूर्ति प्रदान कर रहे थे तथा कोई अवैध गतिविधि नहीं की गई. उन्होंने भारतीय अधिकारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है. यह कार्रवाई ईरान से जुड़े ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त जहाजों के नेटवर्क) के खिलाफ अमेरिका के प्रतिबंधों का समर्थन करने वाली भारत की बढ़ती सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही है. तटरक्षक ने भारतीय EEZ में निगरानी बढ़ा दी है और अवैध तेल व्यापार पर सख्ती बरती जा रही है. जांच जारी है और आरोपी जहाज मुंबई में लंगर डाले हुए हैं.  

दिल्ली के 12 कॉलेज फेक? UGC की नई सूची में नाम — एडमिशन लेने से पहले जरूर चेक करें

 नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पूरे भारत में 32 फेक यूनिवर्सिटी की पहचान की है और छात्रों को इनमें एडमिशन न लेने की चेतावनी दी है. इनमें सबसे ज्यादा  फेक यूनिवर्सिटी दिल्ली में पाए गए हैं. UGC के अनुसार ये फेक यूनिवर्सिटी बिना मान्यता के डिग्री देते हैं, जो नौकरी, आगे की पढ़ाई या सरकारी सेवाओं के लिए मान्य नहीं होती. पिछले दो साल में ऐसे संस्थानों की संख्या 20 से बढ़कर 32 हो गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फेक यूनिवर्सिटी मिले इस सूची में हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे नए राज्य भी शामिल हुए हैं. वहीं बेंगलुरु में “ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी” नाम से चल रहे एक संस्थान को लेकर भी खास चेतावनी जारी की गई है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फेक यूनिवर्सिटी मिले हैं. इनके अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी ऐसे संस्थान चल रहे हैं.  एडमिशन लेने से पहले करें जांच विशेषज्ञों का कहना है कि फेक यूनिवर्सिटी कम फीस, जल्दी डिग्री और आसान पढ़ाई का लालच देकर छात्रों को फंसाते हैं. इनमें सही शिक्षक, सुविधाएं या पढ़ाई का स्तर भी नहीं होता. कुछ संस्थान खुद को विदेशी यूनिवर्सिटी बताकर भी छात्रों को गुमराह करते हैं. UGC ने छात्रों और अभिभावकों से कहा है कि किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर जांच लें. आयोग का कहना है कि जागरूकता ही फर्जी विश्वविद्यालयों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है.

ट्रंप का बड़ा दांव! 10% वैश्विक टैरिफ से भारत और अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर कितनी मार?

नई दिल्ली अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर ट्रंप की जोरदार हार हुई है. US Supreme Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए Donald Trump को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इस हार के बाद ट्रंप ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ (10% Global Tariff) लगाने का ऐलान कर दिया है. आइए समझते हैं इसका भारत समेत दुनिया के तमाम देशों पर क्या असर होने वाला है और क्या अब पहले से लागू टैरिफ के बजाय सिर्फ 10% टैरिफ ही देना होगा? कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम सबसे पहले बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से US Reciprocal Tariff को अवैध करार दिए जाने के बाद ट्रंप के तेवर गर्म हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर साइन कर दिए और दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ जड़ दिया. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर भी दी है.  क्या भारत और दूसरे देशों पर सिर्फ 10% टैरिफ?  Donald Trump के टैरिफ को गैरकानूनी बताए जाने और इसके बाद ट्रंप द्वारा नए ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) का ऐलान करने के बाद बड़ा सवाल ये है कि भारत समेत तभी देशों को अब सिर्फ 10% ही टैरिफ देना होगा. तो एएनआई की रिपोर्ट में इसे लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हां, जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं किया जाता, तब तक 10% टैरिफ ही लागू रहेगा. इसका मतलब 18% नहीं, अब भारतीय सामानों के आयात पर अमेरिका में 10 फीसदी टैरिफ रह सकता है. हालांकि, यहां ट्रंप के बयान पर गौर करें, तो उन्होंने कहा था कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा.  IEEPA की जगह लेगा नया टैरिफ?  ट्रंप ने बीते साल 2025 के अप्रैल महीने में अमेरिका के लिए लिब्रेशन डे करार देते हुए टैरिफ का ऐलान किया था, जो 10 फीसदी से 50 फीसदी तक था. ये रेसिप्रोकल टैरिफ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाया था और कोर्ट ने इस संबंध में साफ किया है कि ऐसा करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है और ये सिर्फ इमरजेंसी के हालात में यूज होता है. ऐसे में अधिकारी ने साफ किया कि हां, ये IEEPA के तहत लागू किए गए टैरिफ की जगह लेगा, जब तक कोई नया सिस्टम लागू नहीं किया जाता.  कितने दिन तक लागू रहेगा नया टैरिफ?  Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में मिली टैरिफ पर हार के बाद आनन-फानन में 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश दे दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि करीब पांच महीने या 150 दिनों के लिए लागू रहेगा. क्या ट्रंप लगा सकते हैं अधिक टैरिफ?   इस सवाल का जबाव भी खुद डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10% ग्लोबल टैरिफ पर बात करते हुए संकेत दिया है कि उचित टैरिफ तय करने के लिए जरूरी जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर Tariff Hike किया जा सकता है.  ट्रंप ने क्यों लगाया नया ग्लोबल टैरिफ?  White House के अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका का नया 10% ग्लोबल टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन संबंधी समस्याओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं का समाधान करना है. इसके साथ ही उन्होंने सभी ट्रेड पार्टनर्स को Trade Deals का पालन करने की सलाह भी दी है. 

सरकारी कर्मचारियों–पेंशनर्स के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार का अहम फैसला

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के बाद भारी-भरकम बिलों के रीम्बर्समेंट के लिए सरकारी दफ्तरों की लंबी फाइलों और 'साहब' की मंजूरी का महीनों इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया है। क्या है नया नियम? (10 लाख तक की सीधी मंजूरी) 16 फरवरी, 2026 को जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के अनुसार, अब मंत्रालयों के विभाग प्रमुख (HOD) बिना किसी बाहरी वित्तीय सलाह (IFD) के 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकेंगे। पहले की सीमा: केवल 5 लाख रुपये। अब: 10 लाख रुपये तक के बिलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगा। तेजी से पैसा पाने के लिए 2 जरूरी शर्तें अगर आप चाहते हैं कि आपका क्लेम बिना किसी देरी के पास हो, तो इन दो बातों का ध्यान रखना होगा: नियमों का पालन: क्लेम में CGHS या CS(MA) के मौजूदा नियमों में किसी भी प्रकार की छूट (Relaxation) न मांगी गई हो। निर्धारित दरें: अस्पताल का बिल पूरी तरह से सरकार द्वारा तय (CGHS Rates) दरों के अनुसार होना चाहिए। नोट: यदि बिल सरकारी रेट से अधिक है और आप अतिरिक्त भुगतान के लिए छूट चाहते हैं, तो फाइल अभी भी पुरानी लंबी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी। सेटेलमेंट लिमिट में भी भारी इजाफा सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की लिमिट को भी 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनके बिल पूरी तरह सरकारी दरों पर आधारित हैं। इससे भुगतान में होने वाली तकनीकी देरी को लगभग खत्म कर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया: पेंशनभोगी ध्यान दें इलाज के बाद पैसा वापस पाने की प्रक्रिया अब बेहद सरल है। समय सीमा: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है। कहां करें आवेदन: पेंशनभोगी अपने संबंधित वेलनेस सेंटर के CMO (Chief Medical Officer) को फाइल जमा करें। जरूरी दस्तावेज की चेकलिस्ट:     भरा हुआ क्लेम फॉर्म।     डिस्चार्ज समरी और रेफरल स्लिप।     अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें।     इमरजेंसी की स्थिति में 'इमरजेंसी सर्टिफिकेट'।     CGHS कार्ड की कॉपी और कैंसिल चेक। एंबुलेंस का खर्च भी होगा वापस क्या आपको पता है कि अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस का किराया भी सरकार देती है? नियम के मुताबिक, शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तब मिलता है जब डॉक्टर यह प्रमाणित कर दे कि मरीज की हालत ऐसी थी कि उसे किसी दूसरे वाहन से ले जाना जानलेवा हो सकता था।  

तेज रफ्तार भारत: नमो भारत ट्रेन अब सराय काले खां–बेगमपुल रूट पर, प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली अभी तक दिल्ली के न्यू अशोक नगर तक पहुंच रही नमो भारत रेल अगले तीन दिनों में सराय काले खां तक पहुंचने लगेगी। इससे यात्रियों की नमो रेल के साथ भारतीय रेलवे, दिल्ली मेट्रो और बस तक सीधी पहुंच होगी। आज यानी शुक्रवार को इस ट्रेन का ट्रायल रन होगा जबकि प्रधानमंत्री मोदी दो दिन बाद 22 फरवरी को दोनों कॉरीडोर का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के साथ ही आम लोग के लिए कॉरिडोर खोल दिया जाएगा जिससे सराय काले खां मेगा ट्रांसपोर्ट हब से यात्री अपनी मंजिल के लिए आसानी से दूसरा वाहन पकड़ सकेंगे। मेरठ साउथ नमो स्टेशन से आगे बेगमपुल स्टेशन तक जाना भी संभव होगा। दरअसल, दिल्ली-मेरठ नमो कारीडोर का न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ नमो स्टेशन का करीब 55 किमी लंबा हिस्सा चालू है। शेष सेक्शन इससे जुड़ने वाले हैं। इसमें दिल्ली की तरफ सराय काले खां से न्यू अशोक नगर का करीब पांच किलोमीटर लंबा हिस्सा अब तैयार हुआ है। मेरठ साउथ से मोदिपुरम का 21 किमी का स्ट्रेच भी पूरा है। दोनों हिस्सों को आवाजाही के लिए शुरू किया जाना है। अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार पहली बार नमो रेल सरायकाले खां से बेगमपुल तक चलेगी। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीडियाकर्मी भी शामिल होंगे। मेरठ मेट्रो भी होगी शुरू अधिकारियों का कहना है कि मेरठ मेट्रो का काम भी पूरा हो गया है। 23 किमी लंबी इस मेट्रो में 13 स्टेशन हैं। इस कारीडोर का भी 22 फरवरी को उद्घाटन होगा। इससे मेरठ के भीतर और मेरठ से नमो रेल तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाएगा। यात्रियों को निजी वाहनों से नमो स्टेशन तक जाने की जरूरत नहीं रहेगी। दिल्ली मेट्रो को भी मिलेगी हरी झंडी दिल्ली मेट्रो का मजलिस पार्क–मौजपुर और दीपाली चौक–मजलिस पार्क सेक्शन तैयार है। फेज-4 के तहत बने दोनों सेक्शन पर ट्रायल रन भी पूरा होने के साथ कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी ने भी मेट्रो चलाने की अनुमति दे दी है। इनका उद्घाटन भी 22 फरवरी को होगा। दोनों कॉरिडोर की लंबाई करीब 23 किमी है। इसमें मजलिस पार्क–मौजपुर लाइन के करीब 13 किमी में आठ स्टेशन हैं। दीपाली चौक-मजलिस पार्क कॉरिडोर के जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम मार्ग कॉरिडोर का हिस्सा है। यह मजेंटा लाइन का विस्तार है। मजेंटा लाइन अभी बोटेनिकल गार्डन से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन तक चल रही है। कृष्णा पार्क से दीपाली चौक तक निर्माण कार्य जारी है। वहीं, दीपाली चौक से मजलिस पार्क करीब दस किमी लंबा हिस्सा तैयार है। दोनों कारीडोर उद्घाटन के बाद आम लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे। तीन कॉरिडोर का हो सकता शिलान्यास करीब दो किमी लंबा एरोसिटी से आईजीआई टी-1, करीब चार किमी लंबा तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज और करीब दस किमी लंबा रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ मेट्रो कारीडोर का शिलान्यास भी हो सकता है। बीते दिनों दिल्ली सरकार ने इन तीनों कॉरिडोर को कैबिनेट से मंजूरी दी थी। वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से इनको बीते साल ही मंजूरी मिल गई है। प्रधानमंत्री तीनों कॉरिडोर का शिलान्यास भी कर सकते हैं।