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रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव: अब ट्रेन टॉयलेट में नहीं होंगे चेन वाले मग

नई दिल्ली भारतीय रेलवे की ट्रेनों से हर दिन एक बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। एसी क्लास से लेकर नॉन एसी कोच तक में लोग अपने-अपने हिसाब से जाते हैं। वहीं, अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने कभी न कभी तो ट्रेन में बने टॉयलेट का भी इस्तेमाल किया होगा? यहां आपने टॉयलेट में चेन से बंधा स्टील का मग तो जरूर देखा होगा? क्योंकि ये काफी पुरानी व्यवस्था है। पर अब इस व्यवस्था को बदला जाएगा यानी अब ट्रेन में बने टॉयलेट में लगे चेन से बंधे मगों को हटाया जाएगा। इसको लेकर रेल मंत्रालय ने एक फैसला लिया है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में। अगली स्लाइड्स में आप इस नए निर्देश के बारे में जान सकते हैं… रेलवे द्वारा क्या फैसला लिया गया है?     रेल मंत्रालय की तरफ से सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया गया है कि ट्रेन के टॉयलेट में जो चेन से बंधा स्टील मग है, उस हटाया जाए     साथ ही टॉयलेट के फर्श के पास जो पानी का नल है उसे भी हटाने के निर्देश मंत्रालय द्वारा दिए गए हैं स्टील मग की जगह अब क्या होगा?     अपने निर्देश में मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि इन मग को हटाकर जेट स्प्रे लगाए जाएंगे     मंत्रालय ने सभी जोनों से कहा है कि वे अपनी चुनी हुई 19 ट्रेनों के एसी कोच में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करें     साथ ही 3 महीने बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक मांगा गया है क्यों लिया गया ये फैसला?     अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन जब स्पीड में होती है तो मग से पानी भरते समय ये फर्श पर गिर जाता है जिससे टॉयलेट का फर्श गंदा हो जाता है     फिर टॉयलेट का फर्श पूरा गीला हो जाता है और बदबू आने लगती है आदि     टॉयलेट का फर्श साफ रह सके, इसलिए जेट स्प्रे लगाए जाएंगे किन-किन कोच में मिलेगी सुविधा?     फिलहाल जेट स्प्रे एसी कोच में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाए जाएंगे     सबकुछ ठीक रहने पर माना जा रहा है कि जेट स्प्रे फिर बाकी कोचों में भी लगाए जाएंगे  

मिडल ईस्ट युद्ध से तेल संकट की आशंका, फिर भी भारत पर नहीं पड़ रहा कोई असर

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ी हुई है. ईरान लगातार दुबई, सऊदी और अन्‍य देशों पर मिसाइलें दाग रहा है. वहीं अमेरिका-इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं. कुछ अन्‍य देशों ने भी ईरान पर हमले की चेतावनी दी है. ऐसे में इस जंग के शांत होने के आसार फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता कच्‍चे तेल को लेकर है, जिसके दाम में रिकॉर्ड तेजी आने की संभावना जताई जा रही है |  सोमवार को कच्‍चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी तक की उछाल देखी गई और आगे 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो दुनियाभर में महंगाई चरम पर आ सकती है, जो ग्‍लोबल इकोनॉमी के लिए भी खतरा है |  तेल की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी आने की वजह ईरान के कंट्रोल में 'स्‍ट्रेट ऑफ होमुर्ज' गलियारा है, जहां से दुनियाभर के लिए 40 फीसदी तेल आयात होता है. इसी रास्‍ते 20 फीसदी अन्‍य गैस या एनर्जी का भी आयात किया जाता है. अकेले भारत 50 फीसदी कच्‍चे तेल का आयात करता है. इस एरिए के चोक होने की खबर है, जिसके बाद तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है |  भारत पर नहीं कच्‍चे तेल का संकट हालांकि भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं, क्‍योंकि भारत के पास रिजर्व में बहुत ज्‍यादा कच्‍चा तेल पड़ा हुआ है, जिससे भारत की जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकती हैं. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त बफर भंडार मौजूद हैं |  45 दिनों का भंडार  रणनीतिक भंडार LPG और एलएनजी की मांग को लगभग 15 दिनों तक पूरा कर सकते हैं, जबकि कच्चे तेल के भंडार आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में 45 दिनों तक चलने का अनुमान है. भारत के लिए यह  तैयारी ऐसे समय में की गई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं |  बढ़ते तनाव के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान या बंद होने की स्थिति में भी भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजारों से ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी क्षमता को बरकरार रखेगा. हालांकि निकट भविष्य में भौतिक आपूर्ति में व्यवधान की संभावना कम ही दिखती है. अभी कच्‍चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है |  कितना खास है ये मार्ग?  गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक कच्‍चे तेल का लगभग  40% और एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है |  यूरोपियन गैस की कीमतों में 22% की तेजी यूरोपियन नैचुरल गैस की कीमतों में लगभग 22% की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण, खासकर ईरान पर हाल ही में US और इजराइली मिलिट्री हमलों और होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए सप्लाई में रुकावट के डर के बाद, एनर्जी कीमतों में उछाल आई है |  2022 के गैस मार्केट में उथल-पुथल के बाद यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. डर है कि इस युद्ध से LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) और दूसरे एनर्जी शिपमेंट का फ्लो रुक सकता है या झगड़े बढ़ने पर उनका रूट बदला जा सकता है | 

डरावनी चेतावनी: 2040 तक कैंसर से हालात होंगे और भयावह, हर 2 मिनट में एक पीड़ित

कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर चुनौती बने हुए हैं। हर साल इस बीमारी के कारण लाखों लोगों की जान जा रही है। बुजुर्ग और युवा तो छोड़िए, बच्चे भी तेजी से इसका शिकार होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस गति से ये बीमारी बढ़ती जा रही है, ऐसे में अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कैंसर के कारण हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इस जानलेवा रोग के जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। आने वाले दो दशकों में कैंसर और कितना खतरनाक रूप लेने वाला है? इससे संबंधित रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो निश्चित ही काफी डराने वाली हैं। ब्रिटेन की एक जानी-मानी चैरिटी ने चेतावनी दी है कि साल 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति में इस बीमारी का निदान होने की आशंका है। वैसे तो ये रिपोर्ट केवल ब्रिटिश नागरिकों में कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर है, पर विशेषज्ञ इसे दुनियाभर के लिए बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी पर कैंसर का गहरा साया देखा जा रहा है। अगले दो दशकों में और बिगड़ सकते हैं हालात 'वन कैंसर वॉइस' नाम के 60 कैंसर संस्थानों वाले ग्रुप ने ये चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जिसमें अगले दो दशकों में अकेले ब्रिटेन में कैंसर के 63 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने शोध के दौरान पाया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लंग्स कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए वैसे तो कई कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। हालांकि मोटापे की बढ़ती दर, खराब डाइट, कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन लगवाने में कमी और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत इसके लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार है। क्या कहती हैं विशेषज्ञ? कैंसर रिसर्च यूके की चीफ एग्जीक्यूटिव मिशेल मिशेल ने चेतावनी दी है कि हममें से लगभग दो में से एक को अपनी जिंदगी में कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बीमारी का असर हर किसी पर पड़ेगा, चाहे उन्हें खुद इस बीमारी का पता चले या उनके किसी दोस्त-परिवार के सदस्य या प्रियजन को ये समस्या हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभी से कैंसर की रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इंग्लैंड में इस रोग के मामले दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।       यूके में कैंसर और इसके कारण होने वाली समय से पहले मौत का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है।     कैंसर का खतरा उम्र से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि समय के साथ बीमारी को ट्रिगर करने वाले सेल्स में डैमेज का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। कौन से कैंसर बढ़ा रहे खतरा? कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रिटेन में जिन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है उनमें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स, बाउल और मेलेनोमा स्किन कैंसर शीर्ष पांच पर हैं। ये सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी अलर्ट है। कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी रोजाना की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डियोड्रेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।  

निखिल गुप्ता को पन्नू हत्याकांड में लंबी सजा का खतरा, 29 मई को सुप्रीम कोर्ट/अदालत निर्णय

वॉशिंगटन   न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित तौर से हत्या की साजिश के मामले में निखिल गुप्ता को अमेरिकी संघीय कोर्ट में औपचारिक रूप से दोषी ठहराया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान 29 मई को निखिल की सजा तय की जाएगी। कोर्ट के जज ने सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश में निखिल की गलती मान ली है। निखिल को इस मामले में ज्यादा से ज्यादा 40 साल की जेल हो सकती है। अमेरिकी जिला जज विक्टर मारेरो ने 17 फरवरी को मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने गुप्ता की बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट देखने के बाद दोषी ठहराने का आदेश जारी किया। पिछले हफ्ते 54 साल के निखिल गुप्ता ने कोर्ट में अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने माना था कि अमेरिका में 2023 में पन्नू की हत्या करवाने के लिए हामी भरी थी। उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति को 15,000 डॉलर कैश दिए थे। पूछताछ के दौरान, उन्होंने माना कि उन्हें पता था कि जिस पर हमला होना था, वह न्यूयॉर्क में था और जिसे पेमेंट दिया गया, वह मैनहट्टन में मौजूद था। निखिल ने भाड़े पर हत्या करने और मनी लॉन्ड्रिंग करने की साजिश का गुनाह कबूल किया। जिला कोर्ट के आदेश के अनुसार, गुप्ता की सजा आधिकारिक हो गई है और केस सीधे सजा सुनाने के फेज में चला गया है। फेडरल कानून के तहत, गुप्ता को भाड़े पर मर्डर करने की साजिश के लिए 10-10 साल तक की सजा हो सकती है और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल तक की सजा हो सकती है। यानी कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा 40 साल की सजा होगी। हालांकि, संघीय सजा सिर्फ कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा सजा के बजाय एडवाइजरी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस से तय होती है। अर्जी से पहले दाखिल किए गए पिमेंटेल लेटर में गुप्ता की एडवाइजरी सजा की रेंज 235 से 293 महीने जेल आंकी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने साफ किया कि गाइडलाइंस एडवाइजरी हैं और आखिरी सजा सिर्फ जज मारेरो जांच रिपोर्ट देखने के बाद तय करेंगे। अब इस मामले में निखिल को 29 मई को सुबह 10 बजे सजा सुनाई जाएगी। गुप्ता ने कोर्ट में पुष्टि की है कि वह भारत के नागरिक हैं और उन्हें मालूम है कि दोषी मानने पर उन्हें अमेरिका से निकाल दिया जाएगा। सरकार की सजा से जुड़ी जानकारी में कहा गया है कि ऐसे अपराधों के लिए दोषी पाए गए गैर-नागरिकों को देश से हटाना जरूरी है।

खाड़ी देशों में बढ़ी बमबारी, तेल के लिए बढ़ सकती है मारामारी; भारत ने रूस जैसी तैयारी की

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 504 रुपए उछलकर 6,596 रुपए प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हमले से आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 50 फीसदी और एपीजी का हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। इसमें ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत का कच्चा तेल होता है। क्षेत्र में तनाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि भारत रूस और दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर कच्चे तेल की आपूर्ति को बरकरार रख सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा दिन बरकरार रहता है, तो इसका असर हमारी गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार दूसरी संभावनाएं भी तलाश रही है। बढ़ सकती है रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति पेट्रोलियम मंत्रालय का केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया है। मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ सरकार वैकल्पिक संभावनाओं को भी खंगाल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सुरक्षित मार्ग को तरजीह दे सकती है। ऐसे में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। अमेरिका से समझौते के बाद रूस से तेल आयात में मई 2022 के बाद भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 20 फीसदी से कम हो गया है। इसके साथ भारत के पास करीब 74 दिन का कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। ऐसे में सरकार के लिए शुरुआती तौर पर तो कोई चिंता नहीं है, पर तनाव लंबा होता है, तो रणनीतिक भंडार पर दबाव आ सकता है। इसलिए, सरकार एहतियाती तौर पर कुछ कदम उठा सकती है। ताकि, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को बरकरार रखा जाए। गैस आपूर्ति बरकरार रखने पर जोर दरअसल, जनवरी 2026 से भारत से खाड़ी देशों और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था। इसका सीधा असर रूस से कच्चे तेल के आयात पर पड़ा। रूस से आयात कम हो गया। इसी तरह खाड़ी देशों से एलपीजी आयात भी बढ़ गया। फरवरी 2026 में 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात की, इसमें से 1.66 मिलियन टन गैस खाड़ी देशों से ली गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए भी सुरक्षित मार्ग से गैस आपूर्ति की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ कीमत भी बड़ा मुद्दा है। ईरान ने कुवैत और सऊदी अरब की कई बड़ी कंपनियों पर हमला किया है। ऐसी खबर है कि सऊदी की अरामको पर हमला किया है। इससे रिफाइनरी का कामकाज प्रभावित हो सकता है। वहीं, ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है। ईरान का यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है भारत भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से जहां आयात बिल बढ़ेगा, वहीं ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक प्लस ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत इस वक्त करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है। वर्ष 2022 से पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। क्या है होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है। यह ईरान, ओमान और यूएई स्थित वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। खाड़ी देशों से तेल व गैस से जाने वाले ज्यादातर टैंकर इसी मार्ग से गुजरते हैं।

हालात को देखते हुए दुबई में भारतीय दूतावास अलर्ट, भारतीयों से कहा- बेवजह बाहर न निकलें

नई दिल्ली  दुबई में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां रहने वाले भारतीय लोगों को गैर जरूरी यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। दुबई में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अभी के इलाके के हालात को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे गैर-जरूरी यात्रा से बचें। पूरा ध्यान रखें, सतर्क रहें और यूएई अधिकारियों और एम्बेसी द्वारा जारी किए जाने वाले सुरक्षा गाइडलाइंस और एडवाइजरी का पालन करें।" "अबू धाबी में भारतीय एम्बेसी और दुबई में कॉन्सुलेट जनरल नॉर्मल तरीके से काम कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी करेंगे। किसी भी इमरजेंसी सवाल के लिए, यूएई में भारतीय नागरिक टोल फ्री नंबर: 800-46342 और व्हाट्सएप +971543090571 पर संपर्क कर सकते हैं।" रियाद में अमेरिकी दूतावास पर दो ईरानी ड्रोन हमलों के बाद आग लग गई और सामान का नुकसान हुआ। अमेरिकी दूतावास ने इसके बाद एडवाइजरी जारी की। हमले के बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान के लिए शेल्टर-इन-प्लेस एडवाइजरी जारी की। इसने इस क्षेत्र में सैन्य ठिकानों की गैर-जरूरी यात्रा पर रोक लगाने की भी घोषणा की और सऊदी अरब में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों से तुरंत पनाह लेने की अपील की। बयान में कहा गया, "सऊदी अरब में अमेरिकी मिशन इलाके के हालात पर नजर रख रहा है। हम सभी यात्रियों से कहना चाहते हैं कि वे हमारे सबसे नए सुरक्षा अलर्ट देखें। किसी भी रुकावट के मामले में अपनी यात्रा की योजना को देखें और खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए सही फैसले लें।" इसमें आगे कहा गया, "हम सभी अमेरिकी नागरिकों को एक पर्सनल सेफ्टी प्लान बनाए रखने की सलाह देते हैं। विदेश में ट्रैवल करते या रहते समय अचानक कोई मुश्किल आ सकती है, और एक अच्छा प्लान आपको संभावित हालात के बारे में सोचने और पहले से सबसे अच्छा तरीका तय करने में मदद करता है।"

ईरान संकट पर पाकिस्तान सतर्क, रक्षा मंत्री का बयान—युद्ध भड़का तो पड़ेंगे गंभीर असर

इस्लामाबाद ईरान पर हमलों का विरोध पाकिस्तान में हिंसक भी हुआ। अमेरिकी दूतावास को निशाने पर भी लिया गया, तो सांसदों ने भी विरोध के सुर बुलंद किए। संसद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के संबोधन के दौरान भी 'जाली बोर्ड ऑफ पीस से बाहर निकलो' के नारे लगे। वहीं, अब तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जंग पाकिस्तान के लिए खतरनाक है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में जायनिज्म (यहूदियों का आंदोलन) को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है और इसे मानवता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान पर चल रहा युद्ध पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के कायम होने से लेकर आज तक इस्लामी दुनिया पर जो भी बड़ी-बड़ी मुसीबतें आई हैं, जो भी युद्ध थोपे गए हैं, उनमें जायनिस्ट विचारधारा और इजरायल का सीधा हाथ दिखता है। ख्वाजा आसिफ ने ईरान के बारे में कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार था, इसके बावजूद उन पर युद्ध थोपा गया है। यह सब जायनिस्ट एजेंडा का हिस्सा है, जिसमें इजराइल का प्रभाव पाकिस्तान की सरहद तक लाने की कोशिश शामिल है। अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए। वहीं, पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने पीस बोर्ड से हटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि शरीफ सरकार को ट्रंप का गाजा बोर्ड छोड़ देना चाहिए। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रंप के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोधी ने आरोप लगाया कि "ट्रंप सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजरायली कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।"

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, United States Embassy ने जॉर्डन-यरुशलम जाने पर दी सख्त सलाह

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका दूतावास ने जॉर्डन और यरुशलम के लिए एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका ने स्थानीय खबरों पर नजर रखने और इन दोनों देशों की यात्रा करने से पहले विचार करने को कहा है। अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से जॉर्डन में 2 मार्च को गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी दूतावास के कामकाज में बदलावों को दिखाने के लिए एडवाइजरी समरी को अपडेट किया गया। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष के कारण जॉर्डन की यात्रा पर फिर से विचार करें। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को दुश्मनी शुरू होने के बाद ईरान से ड्रोन एवं मिसाइल हमलों और कमर्शियल उड़ानों में बड़ी रुकावटों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा अगर जाते हैं तो इमरजेंसी में निकलने का प्लान बनाएं जो अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न हो। क्राइसिस और इवैक्यूएशन पर हमारी जानकारी देखें। अपने आसपास का ध्यान रखें। वहीं, येरुशलम को लेकर अमेरिकी दूतावास ने कहा, "इजरायल से निकलने वाले अमेरिकियों को निकालने या सीधे मदद करने की स्थिति में नहीं है। जब आप अपनी सुरक्षा योजना बना रहे हों तो आपकी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी दी गई है। इजरायली टूरिज्म मंत्रालय ने 2 मार्च से ताबा बॉर्डर क्रॉसिंग के लिए शटल चलाना शुरू कर दिया है। शटल के लिए पैसेंजर लिस्ट में शामिल होने के लिए आपको मिनिस्ट्री के इवैक्युएशन फॉर्म के जरिए रजिस्टर करना होगा।" यूएस एंबेसी ने कहा कि अमेरिकी दूतावास पर्यटन मंत्रालय के शटल के लिए कोई सिफारिश (पक्ष या विपक्ष में) नहीं कर सकती है। अगर आप निकलने के लिए इस ऑप्शन का फायदा उठाते हैं तो अमेरिकी सरकार आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। यह जानकारी उन लोगों के लिए एक कर्टसी के तौर पर दी गई है जो इजरायल छोड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति को लगता है कि तेहरान के साथ लंबे समय तक बातचीत के बावजूद समय खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, "हमने गर्मियों में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान यूरेनियम संवर्धन फैसिलिटी को नष्ट कर दिया था।" उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का मकसद इसे कुछ समय के लिए रोकने से कहीं ज्यादा था। वेंस ने कहा, "ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के पहले तीन, चार साल तक देश को सिर्फ ईरानी न्यूक्लियर हथियार से सुरक्षित ही नहीं रखना चाहते थे, बल्कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि ईरान के पास कभी न्यूक्लियर हथियार न बना सके।" वेंस ने कहा, ट्रंप ने अंदाजा लगाया कि ईरान अपने प्रोग्राम को आगे बढ़ाने पर तुला हुआ है और हर हाल में परमाणु हथियार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर एक्शन लेने का फैसला किया।" विदेश मंत्री मार्को रुबियो की इस टिप्पणी पर कि अमेरिका आगे और कड़ा कदम उठा सकता है, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर वेंस ने अमेरिकी सेना की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाने की हमारी क्षमता कहीं अधिक है। साथ ही हम उन विभिन्न मिसाइलों को भी निशाना बना सकते हैं जो हमारे सैनिकों के लिए खतरा हैं। राष्ट्रपति के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर: ईंधन महंगा, बंदरगाहों पर अटका चावल का बड़ा स्टॉक

ईरान   ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे और जहाजों की आवाजाही पर असर ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है। कच्चे तेल और नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव के साथ-साथ भारत का बासमती चावल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। समंदर और बंदरगाहों पर अटका लाखों टन चावल ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा गया करीब 4 से 6 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में, भारतीय बंदरगाहों पर या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसा हुआ है। आम तौर पर खाड़ी देशों तक चावल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। 5-6 हजार करोड़ रुपए दांव पर फंसे हुए कंसाइनमेंट की अनुमानित वैल्यू 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। शिपिंग कंपनियों के बीमा कवर रद्द होने और जोखिम बढ़ने से कंटेनर फ्रेट दरें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ऐसे में निर्यातकों ने नई बुकिंग और पैकिंग का काम रोक दिया है और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। 70% निर्यात खाड़ी पर निर्भर भारत हर साल करीब 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 70% हिस्सा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान और यूएई को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 60.65 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 50,312 करोड़ रुपए (5.94 अरब डॉलर) रही।   फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा? ट्रेड सूत्रों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो कुछ निर्यातक 'फोर्स मेज्योर' क्लॉज का सहारा ले सकते हैं। यह प्रावधान युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में अनुबंध की शर्तों से अस्थायी राहत देता है। क्या भारत में सस्ता होगा बासमती? रिकॉर्ड पैदावार के बीच मांग घटने से बासमती की कीमतों में पहले ही करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाधित रहा तो घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से दाम और नीचे आ सकते हैं। हालांकि ट्रेडर्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय चावल का वास्तविक विकल्प नहीं है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, खाड़ी देशों से मांग दोबारा तेजी पकड़ सकती है। फिलहाल निर्यातक 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं।

ईरान पर सख्त तेवर में Benjamin Netanyahu, बोले- ‘कई साल नहीं लगेंगे, जल्द होगा फैसला’

ईरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध कई साल नहीं चलेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध शनिवार को शुरू हुआ जब यूएस और इजरायल ने हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार गिराया गया। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम हैनिटी में कहा, 'मैंने कहा था कि यह तेज और निर्णायक हो सकता है। इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह कई साल नहीं चलेगा। यह कोई अनंत युद्ध नहीं है।' बेंजामिन नेतन्याहू ने क्षेत्रीय पिछले युद्धों से अलग इसे सीमित और निर्णायक बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू में युद्ध को चार से पांच सप्ताह का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे व्यापक और खुला युद्ध सही ठहरा रहे हैं। जंग तेजी से फैल रही है। इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया पर फिर से हमले किए हैं, जबकि ईरान ने अमेरिकी आधार वाले खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए हैं। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया, जिसमें कई लक्ष्य नष्ट होने का दावा किया गया है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले हुए, जिससे आग लगी। कैसे युद्ध का हो रहा विस्तार इजरायल ने तेहरान में ईरान की स्टेट ब्रॉडकास्टर IRIB परिसर पर हमला किया और लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अधिक सैनिक तैनात किए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,250 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए और 11 ईरानी जहाज नष्ट किए। इस संघर्ष में ईरान, इजरायल, लेबनान और अन्य देशों में सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। युद्ध के कारण क्षेत्रीय अराजकता फैल गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाला विश्व का 5वां तेल व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हजारों यात्री अभी तक फंसे दुबई सहित प्रमुख खाड़ी हवाई अड्डे चौथे दिन भी बंद हैं, जिससे हजारों यात्री फंसे हुए हैं। कई उड़ानें रद्द हो गईं और एशियाई एयरलाइंस के शेयर गिरे हैं। शिपिंग दरें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन, इराक और जॉर्डन से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने का लक्ष्य बिना जमीनी सेना के हासिल किया जा सकता है, लेकिन ट्रंप किसी विकल्प को नहीं खारिज कर रहे। इजरायली अधिकारी ने कहा कि अभियान सप्ताहों तक चल सकता है, लेकिन जमीनी सेना ईरान में भेजना अभी मुश्लिकल लग रहा है।