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घर में मचा हड़कंप: बेटी की हरकत से शर्मसार हुआ परिवार, मां के फोटो वायरल होने का खतरा

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने अपनी बेटी और उसके प्रेमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महिला के आरोप हैं कि बेटी ने प्रेमी के कहने पर अपनी मां और मौसी की अश्लील तस्वीरें युवक को भेजी हैं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश की जा रही है।   जब फोन की जांच की तो चौंका परिवार रिपोर्ट के अनुसार, 49 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उन्हें बेटी के फोन में आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। परिवार ने जांचकर्ताओं को बताया है कि यह बात करीब एक महीने पहले की है, जब युवती की मां ने उसे एक युवक के साथ बात करते हुए पकड़ा था। पढ़ने के लिए मांगा फोन, खींची न्यूड फोटोज शिकायत की गई है कि बीबीए ग्रेजुएट युवती ने अपने पिता से पढ़ाई के लिए फोन की करीब एक साल पहले मांग की थी। परिवार ने मांग को पूरा कर दिया। बात तब बिगड़ी जब एक दिन घर में काम कर रही महिला अचानक बेटी के कमरे में गईं और उसे एक युवक से वीडियो कॉल करते देख लिया। मां को देखते ही युवती ने फोन काट दिया, जिससे उनका शक और गहरा गया था। गुमराह करने की कोशिश जब परिवार ने युवक को लेकर सवाल किया और पासवर्ड मांगा, तो युवती उन्हें सीधा जवाब देने से बचती रही। हालांकि, बाद में परिवार को फोन का पासवर्ड हासिल करने में सफलता मिली। रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मां के आरोप हैं कि उन्हें फोन में उनके अश्लील फोटोज मिले हैं, जो सोने के दौरान खींचे गए थे। मौसी की अश्लील तस्वीरें भी शेयर कर दीं उन्होंने आरोप लगाए कि ये फोटोज वरुण नाम के युवक के साथ शेयर किए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया है कि बेटी ने अपनी मौसी की नहाते हुए तस्वीरें भी लेकर वरुण को शेयर की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज शिकायत में बताया गया है कि युवती के फोन से मिले संदेशों से पता चला है कि वरुण ने युवती से फोटो शेयर करने के लिए कहा था। घर से भागी युवती विवाद खड़ा होने के बावजूद युवती परिवार से लगातार बहस करती रही। खबर है कि करीब एक सप्ताह पहले वह कथित तौर पर घर छोड़कर चली गई और परिवार को बताया कि वह वरुण से शादी करना चाहती है। इसके बाद परिवार ने पुलिस का रुख किया। फिलहाल, वरुण की तलाश की जा रही है।

दरवाज़ा बंद कर जज के सामने पिटाई, वकील की दलील सुन CJI भड़के

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के सामने वकील ने अपने साथ मारपीट का मुद्दा उठाया। वकील ने सीजेआई को बताया कि कोर्ट में दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और ये सब एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के सामने हुआ। इसपर सीजेआई ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही कहा कि अदालत में इस तरह का गुंडाराज नहीं चलेगा। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 'मैं ADJ हरजीत सिंह पाल की अदालत तीस हजार कोर्ट में पेश हुआ था। मैं आरोपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुआ था। शिकायतकर्ता और उसके कई गुंडों ने मुझपर हमला किया। पीटा भी। जज वहीं बैठे थे। कोर्ट के सभी सदस्य वहीं पर बैठे हुए थे।' उन्होंने आरोप लगाए हैं कि कोर्ट रूम का दरवाज बंद करके आरोपी के साथ उनके साथ मारपीट की गई थी। CJI ने शिकायत दाखिल करने कहा सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने वकील से शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत दर्ज कराई जाए और इसमें उनका नाम भी शामिल किया जाए। CJI ने कहा, 'ये सब 7 फरवरी को हुआ? क्या आपने इसकी जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी है? सीजे को लेटर लिखें और मुझे भी मार्क करें। इसपर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संज्ञान लेने दीजिए और कार्रवाई प्रशासनिक पक्ष की तरफ से की जाएगी। इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है। इसका मतलब कानून का व्यर्थ होना है। ऐसा करें और मुझे बताएं।'

कविता बनी सियासी हथियार: बंगाल SIR के खिलाफ अभिषेक बनर्जी का तीखा प्रहार

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर एक कविता लिखी, जिसमें उन्होंने लोगों पर इसके असर को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। राजनीतिक लामबंदी या दूसरे तरीकों से विरोध करने के बजाय, बनर्जी ने चुनाव आयोग के कदम के खिलाफ लोगों की तरफ से बोलने के लिए अपनी कलम की ताकत का इस्तेमाल किया। कविता की हर लाइन केंद्र सरकार द्वारा लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को दिखाती है। कविता का नाम 'आमी अस्वीकार कोरी' (मैं मानने से इनकार करता हूं) है। सोशल मीडिया पोस्ट पर कविता शेयर करते हुए बनर्जी ने कहा, "एक खतरनाक प्रक्रिया को लेकर मेरे अंदर बहुत उथल-पुथल मची हुई है, जिसने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है, और हमारे लोगों के सामूहिक दुख, दर्द और गुस्से को आवाज देते हुए, मैंने इन भावनाओं को एक छोटी सी कविता में ढाला है।" कविता की शुरुआती लाइनें हैं—'मैं 'मानने से इनकार करता हूं, यह लापरवाही, यह लिस्टों का राज, यह डर का राज। मैं मानने से इनकार करता हूं, राज्य के नाम पर खून का कर्ज। मैं मानने से इनकार करता हूं, खून पर स्याही का राज।' कविता में, हर शब्द और वाक्यांश एसआईआर से पैदा हुई हाल की स्थिति के डर और दर्द को दिखाता है। यह कविता एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लोगों पर थोपे गए नियमों के खिलाफ विरोध की आवाज उठाती है। अब तक, राज्य में एसआईआर अभ्यास शुरू होने के बाद से लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है। उस संख्या का जिक्र करते हुए, बनर्जी ने दावा किया, "यह सिर्फ एक संख्या नहीं है; यह राज्य द्वारा लगाई गई आग में लोगों की चीख है।" उन्होंने एसआईआर तरीके की व्यर्थता को निशाना बनाते हुए लिखा, "राज्य के रिकॉर्ड में, आंकड़े जिंदगी की जगह ले लेते हैं। जमीर, सच्चाई और सम्मान शासक के जूतों के नीचे कुचल दिए जाते हैं।" बनर्जी ने अपनी कविता में इतिहास का भी जिक्र किया। उनकी पंक्तियां कहती हैं, "इतिहास- वह माफ नहीं करता, वह लिस्टें नहीं पढ़ता। इतिहास याद रखता है कि किसने विरोध किया, किसने लड़ाई लड़ी, कौन अपनी जगह पर डटा रहा, किसने आग लगाई। इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता जो लोगों को छोटा समझते हैं।" इस कविता के जरिए, उन्होंने एक बार फिर एसआईआर अभ्यास के खिलाफ आवाज उठाई है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास के विरोध में 26 कविताएं लिखी थीं। अब, अभिषेक बनर्जी भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं।

भारत का US तेल आयात: पीयूष गोयल ने बताया, क्या ये ट्रेड डील का असर है?

 नई दिल्ली    भारत और अमेरिका में लंबे समय से अटकी ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर बात बन चुकी है और इसे लेकर फ्रेमवर्क भी जारी कर दिया गया है. इसके तहत भारत अमेरिका से तेल का आयात भी करेगा. इसके बाद ये सवाल उठने लगे थे कि क्या ट्रेड डील में ऐसी बाध्यता शामिल की गई है, जिसके चलते देश को US Crude Oil खरीदना होगा. इसे लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal On US Oil Import) ने बड़ा बयान दिया है और ऐसी किसी भी बात से साफ इनकार करते हुए अमेरिकी तेल की खरीदारी को पूरी तरह से रणनीतिक फैसला करार दिया है. US Oil खरीद पर पर बड़ा बयान भारत-US के बीच व्यापार समझौते को लेकर Piyush Goyal ने कहा कि अमेरिका से ऊर्जा खरीदने से भारत को तेल के सीमित सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही उन्होंने दोहराया कि इसकी वास्तविक खरीदारी बायर्स और सप्लायर्स कंपनियों द्वारा स्वतंत्र रूप से ही की जाती है. गोयल ने जोर देते हुए कहा कि ये निर्णय वाणिज्यिक विचारों से प्रेरित हैं और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) द्वारा निर्धारित नहीं हैं यानी इस समझौते में ऐसी कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. गोयल बोले- 'ये भारत के हित में…' एएनआई को दिए एक इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ढांचा यह अनिवार्य नहीं करता कि कौन क्या और कहां से खरीदेगा?, बल्कि यह सिर्फ व्यापार और अच्छी पहुंच के लिए एक आसान रास्ता मुहैया कराता है. Piyush Goyal  के मुताबिक, अमेरिका से कच्चा तेल (Crude Oil), एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) खरीदना भारत के अपने रणनीतिक हित में है, क्योंकि देश अपने ऊर्जा स्रोतों में लगातार विविधता ला रहा है.    US के साथ ट्रेड डील के ये फायदे इंटरव्यू के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि Trade Deal के तहक आज जब हमें हाई टैरिफ से काफी कम 18% Tariff मिला है, तो हमें अन्य विकासशील देशों पर वरीयता भी मिली है, जो आमतौर पर हमारे प्रतिस्पर्धी हैं. उन्होंने कहा कि ये डील तमाम सेक्टर्स को व्यापक मौके मुहैया कराएगा. इसके साथ ही हमारे युवाओं, बहनों, महिलाओं के लिए भी अपार अवसर मिलेंगे और साथ ही हमारे किसानों और मछुआरों के लिए भी ये अच्छा है.  वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हमारे MSMEs तेज रफ्तार से बढ़ेंगे और वे अमेरिका को आवश्यक कई सामग्रियों के आपूर्तिकर्ता बनेंगे. ये समझौता हमारे कपड़ा क्षेत्र, हमारा जूता और चमड़ा क्षेत्र, हमारा खिलौना क्षेत्र, हैंडक्राफ्ट सेक्टर, ऑटो कंपोनेंट्स, फर्नीचर समेत अन्य के लिए असीमित संभावनाओं से भरा हुआ है, जैसा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने भी कहा है.  दवाओं से डायमंड तक पर हटेगा टैरिफ! गौरतलब है कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में चुनिंदा भारतीय निर्यातों पर Reciprocal Tariff हटा देगा, जिसमें जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड ज्वेलरी, डायमंड और विमान के पुर्जे शामिल हैं. इसके साथ ही भारत से कुछ विमानों और विमान के पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शुल्क भी हटाए जाएंगे. इस डील के तहत भारत भी अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर वैल्यू के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, आईटी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदेगा. 

भूख लगी है तो अब ट्रेन की सीट नहीं छोड़नी पड़ेगी, IRCTC ने शुरू की शानदार सर्विस

  नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने 'ई-पैंट्री' सर्विस शुरू की है. जिसके जरिए अब यात्री 25 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में ऑनलाइन खाना और पानी पहले से बुक कर सकते हैं. खाना सीधे उनकी सीट पर पहुंचा दिया जाएगा. यह सर्विस उन ट्रेनों के लिए है, जहां टिकट में खाना शामिल नहीं होता. बता दें कि IRCTC भारतीय रेलवे का हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म विभाग है, यह कैटरिंग, टूरिज्म और ऑनलाइन टिकट बुकिंग का काम देखता है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ई-पैंट्री सेवा यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और तकनीक से यात्रा को बेहतर बनाने का हिस्सा है. ई-पैंट्री सर्विस कैसे काम करती है? ई-पैंट्री सर्विस IRCTC की टिकट बुकिंग वेबसाइट और ऐप से जुड़ी हुई है. जिन यात्रियों का टिकट कन्फर्म, RAC या आंशिक कन्फर्म है, वे टिकट बुक करते समय या बाद में "बुक टिकट हिस्ट्री" सेक्शन में जाकर स्टैंडर्ड मील और रेल नीर (पैकेज्ड पानी) पहले से ऑर्डर कर सकते हैं. ऑर्डर करने के बाद यात्री को SMS या ईमेल से कन्फर्मेशन मैसेज और मील वेरिफिकेशन कोड (MVC) मिलता है. यात्रा के दिन ट्रेन में वेंडर को MVC दिखाना होता है, फिर खाना सीट पर डिलीवर कर दिया जाता है. इन ट्रेनों में शुरू ई-पैंट्री सर्विस ई-पैंट्री सर्विस विवेक एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22503/04) पर आजमाई गई थी, जो भारत की सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेनों में से एक है. अच्छे रिस्पॉन्स के बाद अब इसे 25 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू कर दिया गया है. आइए जानते हैं किन प्रमुख ट्रेनों में ई-पैंट्री सर्विस शुरू की गई है.       स्वतंत्र सेनानी एक्सप्रेस     स्वर्णजयंती एक्सप्रेस     कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस     मंगला द्वीप एक्सप्रेस     कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस     पुष्पक एक्सप्रेस     पश्चिम एक्सप्रेस     नेत्रावती एक्सप्रेस     ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस     पूर्वा एक्सप्रेस     लिच्छवी एक्सप्रेस     आजाद हिंद एक्सप्रेस     मालवा एक्सप्रेस     अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस     पुरुषोत्तम एक्सप्रेस और अन्य कई ट्रेनें.  

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की दलीलें बेअसर, SIR पर चीफ जस्टिस की दो-टूक राज्यों को चेतावनी

नई दिल्ली देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी।

शरद पवार की तबीयत में गिरावट, अस्पताल में कराया गया भर्ती

 पुणे एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार की तबीयत सोमवार को अचानक बिगड़ गई है. शरद पवार को बारामती से पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक ले जाया जा रहा है. शरद पवार के कार्यालय ने जानकारी दी है कि उन्हें बुखार और खांसी की शिकायत है. सोमवार को बारामती तालुका के काठेवाड़ी में दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की तेरहवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है. शरद पवार और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इस समारोह में शामिल होना था, लेकिन शरद पवार की आज सुबह से ही तबीयत खराब हो गयी. इसकी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए. प्राप्त जानकारी के अनुसार शरद पवार को सुबह से ही खांसी, बुखार और जुकाम था, इसलिए डॉक्टरों की एक टीम सुबह ही बारामती के गोविंदबाग स्थित उनके आवास पर पहुंच गई थी. डॉक्टरों ने शरद पवार की नियमित जांच की. इसके बाद, डॉक्टरों की एक टीम दोपहर में शरद पवार की दोबारा जांच करने गई. पुणे के रूबी अस्पताल में किया जाएगा भर्ती शरद पवार को पुणे के रूबी अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला किया गया है. कुछ मिनट पहले शरद पवार पुणे के लिए रवाना हुए. उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ हैं. शरद पवार के काफिले में एक एम्बुलेंस भी है. शरद पवार जल्द ही पुणे पहुंचेंगे. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा. उनका आगे का इलाज पुणे के रूबी अस्पताल में होगा. परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि शरद पवार को लगातार खांसी और कफ की दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. उन्होंने प्रोटेक्टिव मास्क पहना हुआ था और मेडिकल सपोर्ट स्टैंडबाय पर था. पिछले कुछ दिनों से पवार की तबीयत ठीक नहीं माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से शरद पवार की सेहत ठीक नहीं रही है. बीमारी की वजह से वह पिछले दो-तीन महीनों से ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहे थे, लेकिन अपने भतीजे और अजीत पवार की अचानक मौत के बाद उन्होंने पार्टी वर्कर्स और आम लोगों से मिलना फिर से शुरू कर दिया. पिछले हफ्ते, उन्होंने लगातार तीन दिन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में बिताए, जहां अजीत पवार रहते थे, जहां पार्टी लीडर्स और शुभचिंतक शोक जताने के लिए इकट्ठा हुए थे. माना जा रहा है कि पिछले आठ दिनों से बारामती में लगातार आने वालों की वजह से वह थक गए थे. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य भर में डिस्ट्रिक्ट काउंसिल और पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ पॉलिटिकल एक्टिविटी बढ़ गई है.

RSS प्रमुख बनने के लिए हिंदू होने की शर्त जरूरी, मोहन भागवत ने बताया चुनाव की प्रक्रिया मोहन भागवत का बड़ा खुलासा: RSS प्रमुख बनने के लिए जरूरी है हिंदू होना, जानिए चुनाव की प्रक्रिया

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की। कैसे होता है चुनाव भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।' RSS में कैसे होता है प्रमोशन भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों। SC-ST से होगा प्रमुख? भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी उन्होंने कहा, 'अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं 'सबसे योग्य उम्मीदवार' के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।' भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन 'अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

कर्नाटक में सड़क हादसों का कहर: बीदर और कोलार में 6 लोगों की मौत

 बीदर  कर्नाटक के बीदर और कोलार जिलों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बीदर जिले के हमनाबाद तालुक में हल्लीखेड़ा के पास नागन्ना चौराहे के निकट रविवार को एक मोटरसाइकिल के पुल से टकरा जाने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान राजेश्वर गांव के निवासी वेंकट करतमाल (40), उनकी पत्नी शिल्पा (35) और उनकी बेटी रक्षिता (12) के रूप में हुई है। उनके बेटे दिगंबर (15) को गंभीर चोटें आई हैं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा, "हादसा उस समय हुआ जब ये चारों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे और चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे मोटरसाइकिल पुल से टकरा गई।" एक अन्य हादसे में, कोलार जिले के श्रीनिवासपुर में रविवार को एक कार के पलट जाने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में से दो की पहचान आंध्र प्रदेश निवासी मुनियम्मा और वेंकटप्पा के रूप में हुई है। इस दुर्घटना में 10 से अधिक अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया, "यह हादसा उस समय हुआ जब श्रमिक काम खत्म करके लौट रहे थे। श्रीनिवासपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।"

नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को नई सजा, ईरान में 44 साल की जेल की सजा का सामना

तेहरान  ईरान में महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईरानी कोर्ट ने उन्हें एक बार फिर दो अलग-अलग मामलों में कुल साढ़े सात साल की नई जेल की सजा सुनाई है. वकील ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी  नरगिस के वकील मुस्तफा नीली ने सोशल मीडिया पर बताया कि मशहद शहर की एक अदालत ने उन्हें दो बड़े आरोपों में सजा दी है. पहली सजा 6 साल की है, जो ‘गुटबाजी और साजिश’ के लिए दी गई है. दूसरी सजा डेढ़ साल की है, जो ‘सरकार के खिलाफ प्रचार’ करने के लिए मिली है. इसके अलावा, उन पर 2 साल का ट्रैवल बैन (विदेश जाने पर रोक) लगाया गया है और उन्हें देश के ही एक दूरदराज इलाके ‘खुस्फ’ में 2 साल के निर्वासन (Exile) की सजा भी दी गई है. क्यों हुई ताजा गिरफ्तारी? नरगिस (53 साल) को दिसंबर में तब गिरफ्तार किया गया था, जब वे वकील खुसरो अलीकोर्दी की शोक सभा में शामिल होने गई थीं. अलीकोर्दी अपने दफ्तर में मृत पाए गए थे. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, नरगिस ने वहां ‘भड़काऊ बातें’ की थीं. नरगिस के परिवार ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. कोर्ट को बताया ‘दिखावा’, शुरू की भूख हड़ताल नरगिस का समर्थन करने वाले ‘नरगिस फाउंडेशन’ ने शनिवार को हुई कोर्ट की इस सुनवाई को ‘दिखावा’ करार दिया है. फाउंडेशन के मुताबिक, अपनी अवैध गिरफ्तारी और जेल की खराब स्थिति के विरोध में नरगिस ने 2 फरवरी से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी. उनकी सेहत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें जेल से अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन फिर वापस जेल भेज दिया गया. परिवार का दर्द- यह फैसला क्रूर है नरगिस के पति तघी रहमानी ने बीबीसी को बताया कि यह सजा बेहद नाइंसाफी भरी और क्रूर है. उन्होंने कहा कि नरगिस ने कोर्ट में अपना बचाव करने से भी इनकार कर दिया क्योंकि वे इस न्याय व्यवस्था को सही नहीं मानतीं. उन्होंने न तो कोर्ट में एक शब्द बोला और न ही किसी कागज पर साइन किए. वहीं, पेरिस में रह रही उनकी बेटी कियाना भी अपनी मां की गिरती सेहत को लेकर काफी डरी हुई हैं. 10 साल से जेल में, बच्चों से भी नहीं मिल पाईं नरगिस मोहम्मदी पिछले एक दशक का ज्यादातर समय जेल की सलाखों के पीछे ही गुजार चुकी हैं. कुल सजा: फाउंडेशन के अनुसार, ताजा फैसले के बाद उनकी कुल सजा अब 44 साल की हो गई है. दूरी का गम: नरगिस साल 2015 से अपने जुड़वां बच्चों से नहीं मिल पाई हैं, जो पेरिस में रहते हैं. बीमारी में भी राहत नहीं: दिसंबर 2024 में उन्हें ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए 3 हफ्ते की पैरोल मिली थी, लेकिन ठीक होते ही उन्हें फिर जेल भेज दिया गया. कौन हैं नरगिस मोहम्मदी और क्यों मिला नोबेल? नरगिस को साल 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्हें यह सम्मान ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ लड़ने, मानवाधिकारों की रक्षा और फांसी की सजा (Capital Punishment) के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मिला था. जब उन्हें यह अवॉर्ड मिला, तब भी वे जेल में ही थीं और उनकी तरफ से उनके बच्चों ने यह पुरस्कार लिया था. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट  एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान दुनिया में चीन के बाद सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है. नरगिस इसी सिस्टम के खिलाफ लड़ रही हैं, जिसके कारण उन पर बार-बार ‘देश की सुरक्षा को खतरा’ पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, उनके वकील को अब भी उम्मीद है कि उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए जमानत मिल सकती है और इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी.