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तिरुपति लड्डू केस में बड़ा फैसला, जांच खत्म; स्वामी की अर्जी पर सुनवाई से इंकार

आंध्र प्रदेश तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तिरुपति मंदिर में मिलावटी घी से लड्डू बनाए जाने के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने अगर अगल से जांच करवाई है तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है। स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। पर्याप्त आधार नहीं स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिका के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एक सदस्यीय समिति और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई एसआईटी की जांच एक दूसरे को ओवरलैप नहीं कर रही हैं। दोनों जांचों का दायरा अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से जुड़ी आपराधिक प्रक्रिया में कोई टकराव नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं। एसआईटी की जांच में क्या पाया गया एसआईटी की जांच में कहा गया है कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था उसमें केमिकल और पामोलिन तेल का इस्तेमाल किया जाता था। ईडी पता लगाएगी कि इस तरह का मिलावटी घी बेचकर किसने कितने पैसे कमाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहीं भी चर्बी वाले घी की बात नहीं कही गई थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) नेताओं पर तिरुपति में लड्डू (प्रसाद) बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के मामले में दूसरों पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करने का शनिवार को आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलनाडु जिले के विनुकोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वाईएसआरसीपी नेताओं ने तिरुपति लड्डू में मिलावट की जांच में कई बाधाएं खड़ी कीं और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया। आंध्र सरकार ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है। आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की जो दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया है।  

गैस टैंकर हादसे से लगा 33 घंटे का जाम, अब सरकार देगी राहत—FASTag में वापस आएगा टोल पैसा

मुंबई मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 3 फरवरी को लगे भीषण जाम में अगर आप भी फंसे थे आपके लिए एक खुशखबरी है। कभी भी आपके अकाउंट में टोल टैक्स रिफंड हो सकता है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक गैस टैंकर दुर्घटना के बाद भीषण यातायात जाम में फंसे एक लाख से अधिक वाहन चालकों को कुल मिलाकर 5.16 करोड़ रुपये का टोल रिफंड मिलेगा। जानकारी के मुताबिक कुल 1.2 लाख यात्रियों को टोल रिफंड होगा। 33 घंटे का भीषण जाम तीन फरवरी को एक्सप्रेसवे के खोपोली खंड पर एक गैस टैंकर पलट गया, जिससे 33 घंटे तक यातायात ठप रहा और कई किलोमीटर तक यातायात अवरूद्ध रहा, जिससे कई वाहन चालकों और यात्रियों को पानी, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के बाद, प्रशासन ने टोल वसूली को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। हालांकि, तब तक कई वाहन चालकों के फास्टैग खातों से टोल शुल्क पहले ही काटे जा चुके थे। अधिकारी ने बताया, 'टोल वसूली रोकने का आदेश जारी होने के बावजूद वाहन मालिकों से वसूल की गई पूरी राशि वापस करने का निर्णय लिया गया है। 5.16 करोड़ रुपये की यह वापसी राशि एमएसआरडीसी द्वारा भुगतान की जाएगी। यह राशि अगले कुछ दिनों में, प्रभावित वाहन मालिकों के फास्टैग खातों में सीधे जमा कर दी जाएगी।' रिपोर्ट के मुताबिक आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर से फास्टैग कटौती का डेटा मांगा गया था। एमएसआरडीसी ने आईआरबी से पूछा था कि आखिर टोल कलेक्शन रोकने का आदेश होने के बाद भी टोल क्यों वसूल जा रहा था। इस भीषण ट्रैफिक जाम में सभी यात्रियों और खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को बड़ी मुसीबत उठानी पड़ी थी। कई लोग वापस जाने का विचार कर रहे थे लेकिन उनके पास गाड़ी मुड़ाने का भी ऑप्शन नहीं था। वहीं जब टोल कलेक्शन की बात सामने आई तो लोगों को गुस्सा और बढ़ गया। कब मिल सकता है टोल का रिफंड टोल रिफंड करने को लेकर कुछ नियम हैं। अगर ज्यादा लंबा जाम होता है और ज्यादा देर तक यह खुल नहीं पाता है तब टोल रिफंड किया जा सकता है। अगर फास्टैग की गड़बड़ी की वजह से गलत पैसे कटते हैं तब भी पैसे रिफंड किए जाते हैं। इसके अलावा बिना टोल प्लाजा से गुजरे ही अगर टोल कटता है तो इसे रिफंड किया जाता है। एक बार गुजरने पर दो बार डिडक्शन होने पर भी रिफंड करने का नियम है।  

वीरगंज हिंसा: धार्मिक स्थल पर विवाद भड़का, पुलिस लाठीचार्ज के बाद सेना संभालेगी मोर्चा

वीरगंज नेपाल के सीमावर्ती शहर वीरगंज में दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प और पथराव के बाद स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए परसा जिला प्रशासन ने सोमवार सुबह 9:45 बजे से अगले आदेश तक वीरगंज महानगर क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नेपाल पुलिस के साथ-साथ नेपाल सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) को सड़कों पर तैनात किया गया है। उल्लेखनीय है कि एक धार्मिक स्थल के पास विवाद से रविवार को भड़की हिंसा में आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। ​पर्सा के डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत के अनुसार, विवाद वीरगंज वार्ड नं. 11 स्थित श्रीपुर में एक धार्मिक स्थल के पास शुरू हुआ। आरोप है कि सड़क पर खड़े स्थानीय युवकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के मारपीट की गई, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई और दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। इस हिंसा में ललन महतो, अमर महतो और धीरज साह सहित करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार नारायणी अस्पताल में चल रहा है।​ पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना का मुख्य आरोपी नेकपा (एमाले) मधेस प्रदेश कमेटी के सदस्य मोहम्मद निजाम फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। प्रशासन उनकी तलाश में सघन छापेमारी कर रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम चुनाव के समय साजिश के तहत यह वाक्या हुआ,जिससे सांप्रदायिक तनाव कायम हो गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन या बैठक करना पूर्णतः वर्जित है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सुरक्षा बल सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।​ वीरगंज के हालातों का सीधा असर भारतीय सीमा पर भी पड़ा है। अचानक कर्फ्यू से लग्न और होली के बाजार प्रभावित हुआ है। दोनो ओर लोग फंस गए हैं। रक्सौल और वीरगंज के बीच मैत्री पुल के रास्ते होने वाली आम आवाजाही पूरी तरह ठप है।भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी और स्थानीय पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। बॉर्डर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ।ताकि सीमा पार से कोई अवांछित तत्व शांति भंग न कर सके।  

दाल के लिए मची अफरा-तफरी, पड़ोसी देश में सप्लाई ठप, कीमतें आसमान पर

फैसलाबाद पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की खबरें नई नहीं हैं। खस्ताहाल पाकिस्तान दुनिया की कई वैश्विक संस्थानों से कर्ज लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहा है। अब हाल ही में यह खबरें सामने आई हैं कि पाकिस्तान में दाल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान में दाल का उत्पादन लगातार घट रहा है, जिससे देश को जरूरतें पूरी करने के लिए हर साल करीब 98 करोड़ डॉलर आयात पर खर्च करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों ने इस हालात पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो आयात पर निर्भरता और बढ़ेगी। पंजाब पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्रेन मार्केट के चेयरमैन राणा मुहम्मद तैय्यब ने बताया कि 1998 से पहले पाकिस्तान दाल का प्रमुख निर्यातक देश था। लेकिन परवेज मुशर्रफ के दौर में लगाए गए निर्यात बैन के बाद किसानों का उत्साह कम हो गया, क्योंकि दाल कम मुनाफे वाली फसल बन गई। जानकारों के मुताबिक देश में हर साल करीब 16.2 लाख टन दाल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10.7 लाख टन आयात की जाती है। यानी पाकिस्तान को देश में खपत होने वाली करीब 80 प्रतिशत दाल आयात करनी पड़ती है। बारिश ने भी तरसाया तैय्यब ने जलवायु परिवर्तन के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थल जैसे वर्षा आधारित इलाकों में समय पर बारिश हो जाए तो पैदावार 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन बारिश कम होने पर भारी नुकसान होता है और किसान अगले सीजन में दाल बोने से हिचकते हैं। जानकारों ने जताई चिंता ये मुद्दे विश्व दाल दिवस के मौके पर आयूब एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के पल्सेज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक सेमिनार में उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान की सालाना जरूरत करीब 15 लाख टन है, लेकिन लोकल उत्पादन इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है। इसी कारण हर साल करीब 10 लाख टन दाल आयात करनी पड़ती है। AARI के पल्सेज सेक्शन के चीफ साइंटिस्ट खालिद हुसैन ने कहा कि दाल मानव पोषण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए जरूरी है। लेकिन सीमित मुनाफा और निर्यात बैन के कारण किसान इसकी खेती से बच रहे हैं। दाल उत्पादन बढ़ाने के मकसद से एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।  

देवेंद्र फडणवीस का भावुक बयान- अजित दादा जैसा कद दोबारा नहीं मिलेगा, अपूरणीय क्षति

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस रूप में कभी नहीं मिल पाया। उनके जाने से एक खालीपन पैदा हो गया है और अब वैक्यूम शब्द का असली मतलब समझ में आ रहा है। विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि “दादा” जैसा नेता फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। फडणवीस ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और अपनी सीट पर मौजूद रहते थे। सदन की कार्यवाही कितनी भी लंबी क्यों न चले, वह अंत तक अपनी जगह पर डटे रहते थे। यह बहुत पीड़ादायक है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। इस बार बजट पेश करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे फडणवीस ने कहा कि बजट के मामले में अजित पवार कभी भी कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर भारी आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने फैसले पर कायम रहे और यह सुनिश्चित किया कि योजना शुरू की जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब ये बातें सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।” महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके लिए गहरा व्यक्तिगत दुख भी है। उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते, चाहे कितना भी समय बीत जाए। यह वैसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक ‘खालीपन’ बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता चले जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।” मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” उन्होंने अजित पवार को ऐसा नेता बताया, जिसने अपने जीवन का हर पल काम के लिए समर्पित किया और हर काम की योजना बनाई। फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे ‘दादा’ थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले थे लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।” उन्होंने 2019 में सरकार गठन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात खुलकर रखते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में उनके वरिष्ठ नेताओं ने अपना निर्णय बदल दिया, फिर भी क्योंकि उन्होंने मुझसे वादा किया था, उन्होंने उसे निभाने का फैसला किया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन इस बात से दादा को चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस फैसले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।” फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही टाइमिंग से चूक गए। सबने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।” उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”

हालात बिगड़े, भारत की एडवाइजरी जारी: ईरान छोड़ें भारतीय नागरिक

ईरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने के बाद भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि लोग किसी भी तरह से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकल जाए। दूस्तवास ने इस संबंध में कई अन्य निर्देश भी दिए हैं। भारत सरकार ने जनवरी में जारी अपनी पिछली एडवाइजरी को दोहराया है जिसमें लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई थी। एडवाइज़री में लिखा था, “सभी भारतीय नागरिकों और PIO को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचना चाहिए, ईरान में भारतीय एम्बेसी के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी डेवलपमेंट के लिए लोकल मीडिया पर नजर रखनी चाहिए।” हेल्पलाइन नंबर भी जारी दूतावास ने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह देते हुए, उनसे अपने इमिग्रेशन और ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स अपने पास रखने और किसी भी मदद के लिए इंडियन एम्बेसी से संपर्क करने को कहा है। भारतीय दूतावास ने इस संबंध में भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। फंसे हुए नागरिक इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर मदद मांग सकते हैं: +989128109115; +989128109109, +989128109102, +989932179359। कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका गौरतलब है कि बीते महीने ईरान में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही अमेरिका खामेनेई शासन को सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दे रहा है। बीते महीने से लेकर अब तक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सप्ताह एक बार फिर यह बयान दिया है कि वह ईरान पर हमले का विचार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों के बीच परमाणु वार्ता भी जारी है। हालांकि इससे कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। अगले दौर की वार्ता कब? इन सब के बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। बद्र अल-बुसैदी ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि 'समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है'। ओमान ने इससे पहले जिनेवा में हुई वार्ता की भी मेजबानी की थी।  

गुजरात का बुलडोजर अभियान तेज़: राजकोट में 1400+ अवैध ढांचों पर कार्रवाई

राजकोट गुजरात के राजकोट में रविवार को नगर निगम के अधिकारियों ने शहर में अवैध कब्जे हटाने का एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई में 1,489 अवैध इमारतों को गिराया जाएगा। अधिकारियों ने जानकारी दी कि डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी के आदेश मिलने के बाद, राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने जंगलेश्वर इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।   क्या बोले अधिकारी? म्युनिसिपल कमिश्नर तुषार सुमेरा ने बताया कि पुलिस की मदद से जंगलेश्वर में अजी नदी के किनारे और म्युनिसिपल टाउन प्लानिंग रोड पर बनी 1,489 संपत्तियों को हटाया जाएगा। निगम ने शनिवार से ही लोगों से घर खाली करवाना शुरू कर दिया था। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम इस अभियान को पूरा करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भक्तिनगर सर्कल के पास सेठ हाई स्कूल में 2,500 से ज्यादा निगम अधिकारी और पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि कई लोग शांति से घर खाली कर रहे हैं और उन्हें अपना सामान ले जाने की छूट दी गई है। यह काम नियमों के मुताबिक ही किया जाएगा। कमिश्नर सुमेरा ने बताया कि मौके पर एक कंट्रोल रूम बनाया गया है और वे खुद पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। क्या बोले लोग? हालांकि, प्रशासन के इस कदम से वहां दशकों से रह रहे लोगों में काफी गुस्सा है। जंगलेश्वर गली नंबर तीन के रहने वाले हारुनभाई सुमरा ने बताया कि वे 43 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। वे और उनकी बहन दोनों दिव्यांग हैं और मजदूरी करके पेट पालते हैं। उन्होंने कहा, 'हमें सिर्फ दो दिन पहले बताया गया कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा। अब हम कहां जाएंगे? हमें शायद सड़कों पर रहना पड़े।' वहीं, एक अन्य निवासी हालिनबेन ने कहा कि उनका परिवार 50 साल से यहां रह रहा है और उन्हें घर खाली करने का आदेश मिला है। उन्होंने कहा, 'आठ लोगों के परिवार को कोई भी किराए पर घर देने के लिए तैयार नहीं है। हम सड़क पर रहने की तैयारी कर रहे हैं।'

हाई कोर्ट जज की सख्त टिप्पणी: गुरु का आदर न करने वालों पर तीखा प्रहार

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट के जज जीआर स्वामीनाथन नए विवाद में पड़ गए हैं। खबर है कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कह दिया कि आध्यात्मिक गुरुओं को नहीं मानने वाले दुष्ट होते हैं। मदुरै की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर 'कार्तिगई दीपम्' जलाने के मामले में जस्टिस स्वामीनाथन विवादों में आ गए थे। उन्होंने 1 दिसंबर 2025 में उन रिट याचिकाओं को स्वीकार किया था, जिसमें दीप जलाने की अनुमति मांगी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जज ने कहा, 'तमिलनाडु में कुछ लोग खुद को रेशनलिस्ट (तर्कवादी) कहते हैं। वो हमें बदमाश, मूर्ख और क्रूर कहते हैं, क्योंकि हम गुरु को भगवान के रूप में देखते हैं। मैं कहता हूं कि ऐसा कहने वाले ही बदमाश, मूर्ख और क्रूर हैं।' वह तमिलनाडु में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में पहुंचे थे और कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'मेरी सेवा चार साल की और बची है। मुझे लगता है कि मुझे आगे आना चाहिए और हिम्मत के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।' इस दौरान उन्होंने मुश्किल समय में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हिम्मत और समर्थन गुरु के आशीर्वाद से मिला है। जज बताते हैं कि वह अभी तेनकासी के पास एक योगी के संपर्क में हैं। जब वेदों को लेकर दिया बयान कुछ समय पहले जस्टिस स्वामीनाथ ने वेदों को लेकर भी बयान दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, 'अगर हम वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद हमारी रक्षा करेंगे।' इस बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगाए जा रहे थे कि जज संविधान के ऊपर धार्मिक बातों को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्या था दीप जलाने का मामला जस्टिस स्वामीनाथन ने एक दिसंबर, 2025 को उन रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था जिनमें एक दरगाह के निकट तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ 'दीपथून' पर कार्तिकई दीपम् को प्रज्वलित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो जस्टिस स्वामीनाथन ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित किया जिसमें श्रद्धालुओं को स्वयं दीपक जलाने की अनुमति दी गई और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।  

कोर्ट में बढ़ी तल्खी: अडानी-अंबानी का नाम लेते ही CJI सूर्यकांत ने वकील को चेताया

नई दिल्ली भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नाराज हो गए। खबर है कि इसकी वजह वकील की तरफ से पेश की गई दलील थी, जिसमें उन्होंने अदालत पर सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाए थे। नौबत यहां तक आ गई कि सीजेआई ने वकील को दो टूक कह दिया कि वह अदालत में पेश होने और सामग्री पेश करने के दौरान सावधान रहें। वाकया सोमवार का है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दौर चल रहा था। उस दौरान एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्पारा की बात पर सीजेआई ने आपत्ति जताई थी। लाइव लॉ के अनुसार, एडवोकेट नेदुम्पारा ने कहा अडानी और अंबानी के लिए बेंच बन रहीं हैं, लेकिन NJAC की चुनौती पर सुनवाई नहीं हो रही है। इतना कहते ही सीजेआई ने उन्हें जमकर फटकार लगाई और चेतावनी भी दे दी। सीजेआई ने कहा, 'मिस्टर नेदुम्पारा, आप जो भी मेरी कोर्ट में पेश कर रहे हैं, उसे लेकर जरा सावधान रहें। आपने मुझे चंडीगढ़ में देखा है, दिल्ली में देखा है…। मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं, सावधान रहें। ऐसा बिल्कुल भी मत सोचिएगा कि आप जिस तरह की बदतमीजी कर रहे हैं, वैसा ही करते रहेंगे। मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं।' इससे पहले एक जनहित याचिका पर जताई थी आपत्ति बीते गुरुवार को सीजेआई एक जनहित याचिका देखकर भी नाराज हुए थे। उन्होंने कहा था, 'अगर भारत के शीर्ष न्यायालय के सामने याचिकाओं का ऐसा स्तर है, तो भगवान याचिका के कानून को बचाए।' साथ ही उन्होंने इसपर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया था। इससे पहले वह वकीलों की तरफ से AI यानी आर्टिफिशिलय इंटेलिजेंस की मदद से याचिकाएं लिखने पर भी नाराज हो गए थे। आज इन मामलों पर होगी सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई होनी है। कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर विचार करेगा। इसके साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी। एक अन्य प्रमुख मामले में, अदालत मेटा और व्हाट्सएप की उन याचिकाओं पर गौर करेगी जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा उनकी गोपनीयता नीति के कारण लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी गई है।  

पाकिस्तान का दोहरा चेहरा! अफगानिस्तान में मस्जिद और मदरसे को बनाया निशाना

इस्लामाबाद पाकिस्तान अकसर इस्लाम के नाम पर पूरी दुनिया को कश्मीर मसले पर साथ लाने की कोशिश करता है। इसके अलावा फिलिस्तीन विवाद पर भी वह ऐसी ही बातें करता रहा है, लेकिन अफगानिस्तान पर हमले के दौरान उसने सारी मर्यादाएं तार-तार कर दीं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से चल रहे तनाव के बीच बमबारी की है। इस दौरान उसने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमाल जिले में बम गिराए हैं। ये बम मस्जिद और मदरसों पर भी गिरे हैं। अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान के इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन माली नुकसान काफी अधिक है। पाकिस्तान ने एक मस्जिद और मदरसे को भी निशाना बनाया है और बमबारी की है। खबर के मुताबिक अब्दुल्ला जान नाम के शख्स ने बताया, 'पाकिस्तान ने बीती रात हमला किया था। उसके लड़ाकू विमानों ने हमारे घर पर हमला किया। घर खाली था और वहां अंदर कोई नहीं था। उन्होंने घर बर्बाद कर दिया। कोई मरा नहीं है, लेकिन हमें 5 से 6 मिलियन अफगानी करेंसी का नुकसान हुआ है।' अफगानिस्तान की मुद्रा अफगानी कहलाती है। अरगोन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मिर्जा अली खान सईद ने कहा कि पहले आधी रात को हमला हुआ। फिर रात को करीब 2 बजे पाकिस्तान ने अटैक किए। इन हमलों में किसी की मौत नहीं हुआ है। लेकिन घर पूरी तरह बर्बाद हो गया। बरमाल जिले में एक मदरसे को भी टारगेट किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान का यह हमला पूरी तरह से युद्ध अपराध है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में ना ही कोई मिलिट्री बेस है और ना ही सेना की कोई मूवमेंट है। इसके बाद भी पाकिस्तान ने हमारे एयरस्पेस का उल्लंघन किया। आम नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश हुई और मजहबी ढांचे भी टारगेट हुए हैं। मौके पर रहे एक शख्स मोहम्मद जुबैर ने कहा कि हालात बहुत बुरे हैं। महिलाएं और बच्चे खौफजदा है। हवा में धूल और धुआँ फैल चुके हैं। हर जगह लोग बस यही चाहते हैं कि किसी तरह सुरक्षित ठिकाने में चले जाएं। पहले भी किए थे ऐसे हमले, 8 क्रिकेटर भी आए थे निशाने पर एक अन्य शख्स नसीम गुल ने कहा कि यह हमला बहुत भीषण और बर्बर था। हम अफगानिस्तानी लीडरशिप से कहेंगे कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। वह हमारे ऊपर ऐसे हमले कई बार कर चुका है। एक अन्य शख्स शाहिदुल्लाह ने कहा कि यह हमला क्रूर था। बच्चे चिल्ला रहे थे और यहां-वहां भाग रहे थे। घर पर कोई नहीं था, लेकिन उन्होंने खाली मकान पर भी बम बरसा दिए। दरअसल यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों को भी टारगेट किया है। 5 महीने पहले भी उसने ऐसे ही हमले किए थे। इन हमलों में 11 अफगानिस्तानी नागरिक मारे गए थे। इसके अलावा 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 8 क्रिकेट खिलाड़ी थे।