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किसानों के लिए राहत: PM मोदी जारी करेंगे PM Kisan सम्मान निधि की नई किस्त

नई दिल्ली सरकार की ओर से किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह राशि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाती है. पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त आज, 19 नवंबर को करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में ट्रांसफर की जानी है. सोशल मीडिया पर दी जानकारी एग्रीकल्चर इंडिया ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है.इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 19 नवंबर, बुधवार को दोपहर डेढ़ बजे किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का ट्रांसफर किया जाएगा. 9 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी. इससे पहले प्राकृतिक आपदा से पीड़ित राज्यों हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के किसानों के खातों में यह राशि पहले ही स्थानांतरित की जा चुकी है. शिवराज चौहान आगे बताते हैं कि आज प्रधानमंत्री मोदी किसानों को संबोधित भी करेंगे और यह दिन किसान उत्सव के रूप में मनाया जाएगा. इन किसानों को नहीं मिलेगी किसान सम्मान निधि  अगर आप किसान सम्मान निधि का लाभ लेना चाहते हैं तो इसके लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है. आप ई-केवाईसी पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या सीएससी सेंटर के माध्यम से करा सकते हैं. इस योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिल सकेगा जो पंजीकृत जमीन पर खेती करके आजीविका कमा रहे हैं.

भारतीय रेलवे की नई पहल, ट्रेन यात्रा होगी और सुरक्षित; डिब्बों में मिलेगी वायरस-फ्री हवा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे यात्रियों को संक्रमण-मुक्त और सुरक्षित यात्रा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी पहल करने जा रहा है। अब ट्रेन के कोचों की हवा पहले से कहीं अधिक स्वच्छ और रोगाणुरहित होगी। इसके लिए रेलवे वायरलेस रोबोटिक अल्ट्रावायलेट यूवी-सी कीटाणुशोधन तकनीक का उपयोग शुरू करने वाला है। इस तकनीक की मदद से ट्रेन के डिब्बों में मौजूद हानिकारक जीवाणु और वायरस निष्क्रिय हो जाएंगे, जिससे यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर हो सकेगी। दिल्ली रेल मंडल की कई प्रमुख ट्रेनों में इस तकनीक का 90 दिनों तक सफल परीक्षण किया गया। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित कंपनी मेसर्स ग्रीनस्काइज एविएशन प्रा. लि. ने यह ट्रायल किया, जिसमें जीवाणु भार में 99.99% तक कमी दर्ज हुई। परीक्षण के उत्कृष्ट परिणामों को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को यह तकनीक अपनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।   यह उन्नत रोबोटिक प्रणाली एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें मोबाइल रोबोट और यूवी-सी कीटाणुशोधन बैटन शामिल है। इसमें अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाए गए हैं, जो परिस्थिति के अनुसार स्वतः काम करते हैं। यूवी-सी किरणें 254 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य पर बैक्टीरिया और वायरस के डीएनए-आरएनए को निष्क्रिय कर देती हैं, जिससे वे जीवित नहीं रह पाते। यह प्रक्रिया पूरी तरह रसायन-मुक्त और पर्यावरण अनुकूल है, जो किसी भी प्रकार के हानिकारक अवशेष नहीं छोड़ती। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक सतहों और हवा दोनों को सुरक्षित बनाने में प्रभावी है। एनआरसी-सीएमएफआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. डीबी सिंह के अनुसार, अल्ट्रावायलेट तकनीक पानी से लेकर हवा तक में मौजूद सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है। इससे ट्रेन के वातानुकूलन, वेंटिलेशन और तापमान नियंत्रण के साथ एकीकृत होकर हवा को लगातार साफ रखा जा सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा काफी कम होगा। रेलवे बोर्ड के पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग मैनेजमेंट निदेशक अजय झा ने क्षेत्रीय रेलों को आरडीएसओ के साथ समन्वय कर एक वर्ष के लिए इस तकनीक के ट्रायल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उत्तर रेलवे से तकनीकी सहायता लेने को भी कहा गया है। ग्रीनस्काइज एविएशन के डायरेक्टर ऑपरेशंस कैप्टन पवन कुमार अरोड़ा के अनुसार, वायरलेस रोबोटिक यूवी-सी सिस्टम आईसीएमआर-सीएसआईओ प्रमाणित है और पूर्णतः हरित, टिकाऊ तथा रसायन-मुक्त समाधान प्रदान करता है, जो वैश्विक पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है।

पुणे भूमि घोटाला जांच: पार्थ पवार का नाम नहीं, तीन अधिकारियों पर गिरी गाज

पुणे    महाराष्ट्र में 300 करोड़ रुपये की विवादित जमीन डील को लेकर आखिरकार जांच रिपोर्ट सामने आ गई है. पुणे की मुंडवा स्थित सरकारी जमीन को कथित तौर पर निजी कंपनी को बेचने और स्टांप ड्यूटी में भारी छूट देने के मामले में संयुक्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन (IGR) की तीन सदस्यीय समिति ने सब रजिस्ट्रार रविंद्र तारू समेत तीन लोगों को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं, सरकार ने संबंधित कंपनी को 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की वसूली को लेकर नोटिस भेजते हुए सात दिन में जवाब मांग लिया है. संयुक्त IGR राजेंद्र मुंठे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट IGR रविंद्र बिनवाडे को सौंपी, जिन्हें इसे आगे पुणे डिविजनल कमिश्नर चंद्रकांत पुलकुंदवार को भेजना था. रिपोर्ट में बताया गया है कि पार्थ पवार का नाम किसी भी दस्तावेज में नहीं आया, इसलिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया, चूंकि पार्थ पवार का नाम पूरे सेल डीड में कहीं नहीं है, उन्हें जांच में दोषी नहीं ठहराया जा सकता. रिपोर्ट में उन तीन लोगों को जिम्मेदार बताया गया है जो सीधे तौर पर डील में शामिल थे, जिनमें निलंबित सब रजिस्ट्रार रविंद्र तारू भी शामिल हैं. किन लोगों को दोषी ठहराया गया? रिपोर्ट में जिन तीन लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें रविंद्र तारू- सब-रजिस्ट्रार (निलंबित), दिग्विजय पाटिल- पार्थ पवार के पार्टनर और रिश्तेदार, शीटल तेजवानी- सेलर्स की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक का नाम है. ये तीनों पहले से ही पुलिस द्वारा दर्ज FIR में आरोपी हैं. सरकारी जमीन कैसे बेची गई? 40 एकड़ की यह जमीन मुंडवा के पॉश इलाके में स्थित है. यह जमीन सरकारी थी, जिसे बेचा ही नहीं जा सकता था. इसके बावजूद इसे अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP को बेचा गया, जिसमें पार्थ पवार पार्टनर हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी में गलत तरीके से छूट दी गई. भविष्य में ऐसे धोखाधड़ी से बचाव के उपाय बताए जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं. जहां भी स्टांप ड्यूटी छूट मांगी जाए, कलेक्टर (स्टांप) की अनुमति अनिवार्य हो. रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 18-K के अनुसार, 7/12 एक्सट्रैक्ट एक महीने से पुराना नहीं होना चाहिए और पूरी ओनरशिप का दस्तावेज़ जरूरी है. 20 अप्रैल 2025 के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकारी जमीनों से जुड़े दस्तावेज़ों का रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार नहीं कर सकते. अभी यह नियम केवल स्पष्ट सरकारी स्वामित्व पर लागू होता है, इसे धुंधली या आंशिक सरकारी स्वामित्व वाली स्थितियों में भी लागू किया जाना चाहिए. 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी का नोटिस इसी बीच IGR दफ्तर ने अमाडिया एंटरप्राइजेज को 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की वसूली पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा है. एक अधिकारी ने बताया, कंपनी ने 15 दिन मांगे थे, लेकिन हमने उन्हें 7 दिन का ही समय दिया है. अन्य जांच रिपोर्टें भी आएंगी राजस्व विभाग और सेटलमेंट कमिश्नर की रिपोर्ट भी तैयार हो रही है. तीनों रिपोर्टें अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खर्गे को भेजी जाएंगी. वे इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बनाई गई छह सदस्यीय समिति के प्रमुख हैं. सरकार ने इस डील को पहले ही रद्द कर दिया है.

पुराने वाहन मालिकों के लिए नई तीन कैटेगरी, फ‍िटनेस शुल्क हुआ महंगा

नई दिल्ली अगर आप भी अपनी कार या कमर्श‍ियल व्‍हीकल का रज‍िस्‍ट्रेशन 10 या 15 साल के बाद एक्‍सटेंड कराने का मन बना रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, केंद्र सरकार की तरफ से व्‍हीकल फ‍िटनेस टेस्‍ट की फीस में बड़ा बदलाव किया गया है. इसमें अलग-अलग कैटेगरी के पुराने व्‍हीकल के लिए फीस को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. नए नियमों के तहत 10, 15 और 20 साल से ज्‍यादा पुराने व्‍हीकल पर अलग-अलग चार्ज ल‍िया जाएगा. केंद्र सरकार ने 18 अक्‍टूबर को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल में संशोधन करते हुए व्‍हीकल फिटनेस टेस्ट फीस में बड़ा इजाफा कर द‍िया है. कुछ कैटेगरी में यह बढ़ोतरी 10 गुना तक हो गई है. पूरी तरह बदल जाएगा फ्लैट-रेट स्ट्रक्चर नया फीस स्ट्रक्चर देशभर में तुरंत लागू कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह कदम पुराने और असुरक्षित वाहनों को सड़कों से हटाने और स्क्रैपेज पॉल‍िसी को मजबूत करने के लिए जरूरी था. पहले 15 साल से ज्‍यादा पुराने व्‍हीकल पर एक्‍स्‍ट्रा फीस लगती थी, लेक‍िन अब इसकी तीन नई कैटेगरी बना दी गई हैं. इनमें पहली कैटेगरी 10 से 15 साल, दूसरी 15 से 20 साल और तीसरी 20 साल से ज्‍यादा वाली है. हर कैटेगरी के ह‍िसाब से फीस बढ़ती चली जाएगी. नया मॉडल पहले के फ्लैट-रेट स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगा. सबसे ज्‍यादा फीस किस तरह के व्‍हीकल पर? व्‍हीकल का रज‍िस्‍ट्रेशन र‍िन्‍यू कराने पर अब पहले के मुकाबले ज्‍यादा चार्ज देना होगा. सबसे ज्यादा झटका हेवी कमर्श‍ियल व्‍हीकल को लगा है. 20 साल से ज्‍यादा पुराने ट्रक या बस का रज‍िस्‍ट्रेशन र‍िन्‍यू कराने के लि‍ए अब 25,000 रुपये देने होंगे. पहले यह चार्ज महज 2,500 रुपये था. 20 साल से ज्‍यादा पुराने मीडियम कमर्शियल व्हीकल को पहले के 1800 रुपये की बजाय 20,000 रुपये देने होंगे. यह बढ़ोतरी 10 गुने से भी ज्‍यादा है, ज‍िससे पुराने कमर्शियल व्‍हीकल को चलाना काफी महंगा हो जाएगा. सरकार की तरफ से साफ कहा गया क‍ि सड़कों से पुरानी और खतरनाक गाड़‍ियां जल्दी हटनी चाहिए. इसको ध्‍यान में रखते हुए फिटनेस फीस को इतना महंगा कर द‍िया गया है क‍ि पुरानी गाड़ी रखना घाटे का सौदा हो जाएगा. लोगों को मजबूरन नई, सुरक्षित और कम प्रदूषण वाली गाड़ी लेनी पड़ेगी या पुरानी को स्क्रैप करना होगा. सरकार की तरफ से यह कदम नेशनल व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी को आगे बढ़ाने के लि‍ए उठाया गया है.  

ग्लोबल रिपोर्ट: सड़क दुर्घटनाएँ हर वर्ष 11.90 लाख जानें लेती हैं

नई दिल्ली राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए दुनिया को एकजुट होने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र में हर वर्ष नवंबर के तीसरे रविवार को सड़क दुर्घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विश्व सड़क यातायात पीड़ित स्मृति दिवस का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी स्कूल ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एंड स्मार्ट पुलिसिंग के अंतर्गत यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र ने गुजरात परिसर में एक कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस वर्ष सभा को समन्वयक विश्व विजय राय ने संबोधित किया। इस अवसर पर उल्लेख किया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट' 2023 के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 11 लाख 90 हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं के कारण मरते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष लगभग एक लाख 70 हजार लोगों की मौत होती है।  बढ़ सकती है सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या, 2023 का आंकड़ा पार होने की आशंका  साल 2024 में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा 2023 से भी ज्यादा हो सकता है। अब तक मिले शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश के दो दर्जन से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, असम और दिल्ली में सड़क हादसों में हुई मौतें पिछले साल के मुकाबले बढ़ी हैं। मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक (जिसमें पश्चिम बंगाल शामिल नहीं है), 2024 में सड़क हादसों में करीब 1.7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। तुलना करें तो 2023 में यह संख्या 1.73 लाख थी, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। पश्चिम बंगाल में अकेले 6,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि जब बंगाल के आंकड़े जोड़ लिए जाएंगे, तो यह संख्या 2023 से ज्यादा हो जाएगी। कुछ राज्यों में राहत की झलक हालांकि, हर तरफ निराशाजनक तस्वीर नहीं है। 2024 के शुरुआती आंकड़ों में 9 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां सड़क हादसों में मौतों की संख्या कम हुई है। उदाहरण के तौर पर, केरल में 2023 में 4,080 मौतें हुई थीं, जबकि 2024 में यह घटकर 3,846 रह गईं। इसी तरह गुजरात में भी मौतों का आंकड़ा 7,854 से घटकर 7,717 हो गया। विशेषज्ञों की राय: "10 बड़े राज्यों पर फोकस जरूरी" ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक देश के 10 बड़े राज्य, जो कुल मौतों में सबसे ज्यादा हिस्सा रखते हैं, अपने आंकड़े नहीं घटाते, तब तक सड़क मौतों को आधा करने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है। पूर्व सड़क परिवहन सचिव के मुताबिक, "राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों पर हादसे और मौतें कुल मामलों के लगभग 60 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। इन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।" हादसों के आंकड़े और हकीकत में फर्क आधिकारिक आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं बताते, क्योंकि कई छोटे हादसे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते। फिर भी प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि 2024 में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4.7 लाख से अधिक सड़क हादसे हुए, जबकि 2023 में यह संख्या करीब 4.8 लाख थी। सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की नई योजना सरकार अब सड़क सुरक्षा को और सख्ती से लागू करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करने जा रहा है। प्रस्ताव है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के नियम और सख्त किए जाएं, और खराब ड्राइविंग व्यवहार पर नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू हो, जिससे चालकों का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सके।  सड़क सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती सरकारी कोशिशों के बावजूद बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। अगर आने वाले समय में सड़क सुरक्षा पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क पर जान गंवाने वालों की संख्या कम होती नहीं दिख रही। 

छह बार हुई बैठक के बाद, मंत्री ने साफ किया – समझौता होगा बराबरी का

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है. डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने बयान में यहां तक कह दिया है कि जल्‍द ही हम अच्‍छी डील लॉक करने रहे हैं. हालांकि भारत की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया था, लेकिन कमर्शियल और इंडस्‍ट्रीज मिन‍िस्‍टर पीयूष गोयल का बड़ा बयान आया है. जिनके मुताबिक, भारत बराबरी का समझौता करेगा. पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर 'आपको अच्छी खबर सुनने को मिलेगी' जब यह समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित होगा. उन्होंने कहा कि भारत इस डील में किसानों और मछुआरों के हितों की भी रक्षा करेगा.  किसानों और मछुआरों के हित में होगी डील उन्होंने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-अमेरिका आर्थिक शिखर सम्मेलन में कहा कि व्यापार समझौते के लिए बातचीत एक प्रक्रिया है और एक राष्ट्र के रूप में भारत को किसानों, मछुआरों और लघु उद्योगों के हितों को ध्यान में रखना होगा. गोयल ने कहा कि जब यह समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित हो जाएगा, तो आपको अच्छी खबर सुनने को मिलेगी.  पीयूष गोयल ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका मार्च से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. अब तक छह दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है.  नवंबर में ही हो सकती है डील डेक्कन क्रोनिकल की रविवार को आई एक रिपोर्ट में एक बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि India-US Trade Deal का ऐलान नवंबर में ही किया जा सकता है. रूसी तेल (Russian Oil) का मुद्दा पूरी तरह से सुलझ चुका है और डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत पर 25 फीसदी तक टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है.  पहला चरण पूरा होने के करीब  रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत–अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) का पहला चरण लगभग पूरा होने के करीब है. भारत और अमेरिका के बीच अब तक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है और दोनों देश 2025 तक पहला चरण पूरा करने की योजना बना रहे हैं. हालांकि आगे जटिल मुद्दों पर बातचीतहोती रहेगी. कितना रह सकता है टैरिफ?  अभी भारत पर कुछ टैरिफ 50 फीसदी है, जिसमें से 25 फीसदी टैरिफ भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया है. चूक‍ि अब भारत ने रूसी तेल खरीद को कम किया है, ऐसे में एक्‍सपर्ट मान रहे हैं कि 25 फीसदी तो टैरिफ क होना तय ही है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि आगे चलकर भारत पर अमेरिका टैरिफ को 15 फीसदी तक लेकर आएगा.

उत्तर और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड! दिल्ली, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में शीतलहर, IMD ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली  देश में मौसम का बदलाव तेज़ी से महसूस (Weather Update) किया जा रहा है। एक तरफ उत्तर भारत कड़ाके की ठंड की लपेट में है, वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। IMD ने पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा, तेलंगाना और विदर्भ में 18 से 20 नवंबर के दौरान विभिन्न स्थानों पर शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने मछुआरों को 18 से 22 नवंबर तक समुद्री क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह भी दी है।   उत्तर भारत में ठंड का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। कई शहरों में सुबह-शाम तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है और लोग दिन के समय होने वाली धूप का आनंद लेते दिख रहे हैं। वहीं, दक्षिण भारत पिछले कुछ दिनों से बारिश की मार झेल रहा है, जिससे कई इलाके जलभराव और खराब मौसम की स्थिति से जूझ रहे हैं।   मध्य प्रदेश में शीतलहर  मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में 18 नवंबर को शीत लहर से लेकर भीषण शीत लहर की स्थिति बनी रहने की संभावना है और 19-20 नवंबर को कुछ स्थानों पर शीत लहर की स्थिति बनी रहने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 18-20, विदर्भ, मराठवाड़ा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में 18 और मध्य महाराष्ट्र में 19 नवंबर को कुछ स्थानों पर शीत लहर की स्थिति बनी रहने की संभावना है।   दिल्ली-एनसीआर में मौसम  आईएमडी के अनुसार, 18 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में शीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। तापमान में और गिरावट की संभावना है। दिन का अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है।   यूपी का मौसम  उत्तर प्रदेश में भी शीतलहर का असर तेज है। प्रयागराज में सोमवार को सीजन का पहला कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग का कहना है कि पूरे प्रदेश में ठंड का यही रुख बरकरार रहेगा। 17 नवंबर को लखनऊ का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बिहार का मौसम  बिहार में 18 नवंबर से तापमान में तेज गिरावट की संभावना है। सुबह के समय कई जिलों में शीतलहर का असर महसूस हो सकता है। विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। पहाड़ी राज्यों का मौसम जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी का दौर जारी है। 18 नवंबर को इन राज्यों में तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम होने की संभावना है।

बांग्लादेश में उग्र प्रदर्शन: हसीना की सजा के विरोध में सड़कों पर बवाल, 50 घायल

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में तनाव और हिंसा फैल गई। फैसले के बाद रातभर कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, आगजनी और हमलों की रिपोर्ट आई है। कम से कम 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। अदालत का फैसला बना कारण सोमवार को ICT ने शेख हसीना को पिछले साल जुलाई में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान किए गए मानवता-विरुद्ध अपराधों के आरोपों में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही उनके दो शीर्ष सहयोगियों  पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल,पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी दोषी ठहराया गया। हालांकि मामून को अपराध की गंभीरता को देखते हुए हल्की सजा दी जाएगी।फैसले के कुछ ही घंटों बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह सड़कों पर मार्च निकाले और कुछ स्थानों पर प्रमुख हाईवे को ब्लॉक कर दिया।   ढाका में सबसे उग्र प्रदर्शन सबसे ज्यादा उग्रता ढाका के धानमंडी 32 इलाके में देखी गई। यह वही स्थान है जहां बांग्लादेश के संस्थापक और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान का घर स्थित है।ढाका ट्रिब्यून और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार:     प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार टकराव हुआ     दंगाइयों ने वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की     साउंड ग्रेनेड, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया     50 से ज्यादा लोग घायल हुए     5 जिलों में गाड़ियां जलाई गईं फैसले के बाद कम से कम पांच जिलों केरनिगंज, नारायणगंज, चिटगांव, सिराजगंज और बोγρα में वाहनों को आग लगाने की घटनाएं हुईं। सुरक्षा एजेंसियों को रातभर हालात काबू में करने के लिए तैनात रहना पड़ा। पिछले हफ्ते ही देश में 50 से ज्यादा आगजनी और देसी बम हमले हुए थे, जिनमें तीन लोगों की मौत हुई थी। अदालत के फैसले ने इस तनाव को और भड़का दिया है। हमला पूर्व राष्ट्रपति के घर तक पहुंचा किशोरगंज जिले में स्थित पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल हमीद के घर पर भी देर रात हमला किया गया।प्रथम अलो की रिपोर्ट के अनुसार:     फैसले के बाद इलाके में कुछ लोगों ने जुलूस निकाला     तभी 20–30 लोगों की भीड़ ने अचानक घर पर धावा बोल दिया     तोड़फोड़ की गई, हालांकि बड़े नुकसान से बचा लिया गया बांग्लादेश में तनाव बरकरार देश में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। सुरक्षा बलों को कई संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी है। विशेष बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि इंटरनेट सेवाएं और संचार पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।   

बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाएँ: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—स्थिति बेहद गंभीर

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने देश में बच्चों के लापता होने से संबंधित एक रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। इस पर सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इसे बेहद चिंताजनक बताया। गोद लेने की प्रक्रिया बेहद कठिन – सुप्रीम कोर्ट जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्होंने अखबार में पढ़ा है कि इतनी अधिक संख्या में बच्चे गायब हो जाते हैं, और यदि यह सच है तो स्थिति बेहद गंभीर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश में गोद लेने की प्रक्रिया इतनी कठिन और लंबी है कि लोग इसका अवैध विकल्प खोजने लगते हैं, जो स्थिति को और खराब करता है। केंद्र को 9 दिसंबर तक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से मौजूद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इतनी लंबी अवधि देने से इंकार कर दिया और 9 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश 14 अक्टूबर को अदालत ने केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लापता बच्चों के मामलों को देखने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया था। साथ ही, इन अधिकारियों के नाम और संपर्क विवरण 'मिशन वात्सल्य' पोर्टल पर उपलब्ध कराने को भी कहा गया था ताकि किसी बच्चे की गुमशुदगी की जानकारी तुरंत साझा की जा सके। लापता बच्चों के लिए अलग पोर्टल का सुझाव सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र को गृह मंत्रालय के तहत एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव दे चुकी है। अदालत का मानना है कि राज्यों के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं होने से बच्चों की तलाश में देरी होती है। एक केंद्रीकृत पोर्टल से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। NGO ने उठाया था मामला यह मामला तब सामने आया जब एनजीओ 'गुरिया स्वयंसेवी संस्थान' ने बच्चों की तस्करी और अपहरण के मामलों में कार्रवाई न होने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया। याचिका में बताया गया कि कई राज्यों में बच्चों को अपहरण के बाद बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए दूसरे राज्यों में तस्करी किया जा रहा था।  

ट्रंप की आलोचना: अमेरिकियों पर सवाल, चिप उत्पादन तक में असफल

वाशिगटन   अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक और बड़ा बयान दिया है. इस बार, उन्‍होंने अमेरिकी इंडस्‍ट्री को चिप मेकिंग्‍स को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई. इसके अलावा, उन्‍होंने एच-1बी प्रवासी श्रमिकों के प्रति अपने समर्थन का बचाव करते हुए भी कहा कि अमेरिकियों को 'माइक्रोचिप बनाना नहीं आता'.  ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका अपने घरेलू सेमीकंडक्‍टर चिप के पुननिर्माण का प्रयास कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वर्कफोर्स में सेमीकंडक्‍टर विनिर्माण के लिए आवश्‍यक तकनीक कौशल का अभाव है. यह एक महत्‍वपूर्ण उद्योग है. ट्रंप का दावा है कि इस सेक्‍टर में अमेरिका बड़े स्‍तर पर वापसी करेगा.  ताइवान के कंट्रोल में पूरी इंडस्‍ट्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ज्‍यादा चिप का निर्माण नहीं करता है, लेकिन अगर आप चिप बनाने जा रहे हैं तो हमें अपने लोगों को चिप बनाने की ट्रेनिंग देनी होगी, क्‍योंकि हमने चिप वाला कारोबार ताइवान के हाथों बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से गंवा दिया है.  जल्‍द उबरेगा अमेरिका का चिप मार्केट  ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी चिप मार्केट जल्‍द ही उबर जाएगा और उन्‍होंने कुछ और सालों के भीतर घरेलू उत्‍पादन में ग्रोथ का अनुमान लगाया है. हालांकि उन्होंने 2022 चिप्स अधिनियम को खारिज कर दिया, जिसका उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना था.  चिप बनाने में सबसे आगे होगा अमेरिका  ट्रंप ने कहा कि चिप्‍स एक्‍ट एक आपदा थी. सभी चिप बनाने वाली कंपनियां वापस आ रही हैं और शायद दुनिया में ज्‍यादातर चिप निर्माण अमेरका में ही होगा. ट्रंप का यह बयान उनके रिपब्लिकन सहयोगियों की बढ़ती आलोचना के बीच आया है. ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका में सियासत गरमा गई है. फ्लोरिडा के गवर्नर डेसेंटिस ने 13 नवंबर को एक पोस्ट कहा कि कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत में हैं और वे H1B को समाप्त करने के लिए कानून बना सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि यहां शब्दों का नहीं, बल्कि कार्यों का महत्व है.   एक और अधिकारी ने कहा कि माइक्रोचिप का आविष्कार करने का श्रेय जिन दो लोगों को दिया जाता है, उसमें जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस हैं, जो अमेरिकी इंजीनियर थे और अमेरिका की धरती पर काम कर रहे थे. फिर भी ट्रंप को अपनी इंडस्ट्री नजरिए पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, 'अच्छी खबर यह है कि सब कुछ वापस आ रहा है। यह तो हमेशा से यहीं होना चाहिए था.'