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छात्र राजनीति में ABVP का परचम, HCU चुनाव में NSUI को करारी हार

हैदराबाद दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (DUSU) में शानदार जीत दर्ज करने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) के छात्र संघ चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है। लंबे समय से वामपंथी और दलित छात्र संगठनों के प्रभाव में रही यूनिवर्सिटी में यह नतीजे एबीवीपी के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। एबीवीपी पैनल से शिवा पालेपू अध्यक्ष चुने गए हैं। उपाध्यक्ष पद देवेंद्र ने जीता, जबकि श्रुति महासचिव बनीं। संयुक्त सचिव का पद सौरभ शुक्ला को मिला, खेल सचिव ज्वाला प्रसाद और सांस्कृतिक सचिव का पद वीनस के नाम रहा। केवल पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि काउंसलर और बोर्ड सदस्य पदों पर भी एबीवीपी ने बहुमत हासिल किया। पिछले छह वर्षों से एचसीयू कैंपस में वामपंथी गुटों का वर्चस्व बना हुआ था। कांग्रेस से जुड़े एनएसयूआई और दलित संगठनों का गठजोड़ भी एबीवीपी के लिए चुनौती रहा। लेकिन इस बार नतीजे पूरी तरह से उलट गए। एबीवीपी प्रवक्ता अंतरिक्ष ने कहा, “यह जीत छात्रों की राष्ट्रवादी सोच और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट प्रयास का प्रतीक है। खासकर सोशल साइंस डिपार्टमेंट जैसे वामपंथी गढ़ों में जीत यह दिखाती है कि छात्र अब वैचारिक दबाव से मुक्त होना चाहते हैं।” एनएसयूआई की बड़ी हार सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस से जुड़ा एनएसयूआई इस बार नोटा (NOTA) से भी कम वोट ला सका। यह तब हुआ है जब राज्य में कांग्रेस की सरकार है। हालांकि, एनएसयूआई का एचसीयू में कभी भी बड़ा आधार नहीं रहा, लेकिन वामपंथी संगठनों के साथ मिलकर वह हमेशा चुनावी समीकरण का हिस्सा रहा है। एबीवीपी का कहना है कि संगठन ने कैंपस में शांति बनाए रखने, एचसीयू की जमीन की रक्षा करने और छात्र हितों को लेकर लगातार आंदोलनों में भाग लिया है। यही वजह है कि छात्रों का भरोसा इस बार बड़े पैमाने पर एबीवीपी के पक्ष में गया। एबीवीपी की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “यह जीत एचसीयू के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जिसने छात्र समुदाय के बीच एबीवीपी के प्रति बढ़ते विश्वास को साबित किया है।”  

घर से अप्लाई करें ई-पासपोर्ट: जानें प्रक्रिया और किन्हें मिलेगा फायदा

नई दिल्ली अब भारतीय नागरिकों के लिए विदेश यात्रा करना और भी आसान और सुरक्षित हो जाएगा। भारत सरकार की ओर से ई-पासपोर्ट सेवा शुरू कर दी गई है। यह एक चिप-आधारित डिजिटल पासपोर्ट है, जिसे पासपोर्ट सर्विस 2.0 प्रोग्राम के तहत जून 2025 में लॉन्च किया गया है। अब आप सामान्य पासपोर्ट की तरह ही ई-पासपोर्ट के लिए भी घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ई-पासपोर्ट क्या है? ई-पासपोर्ट एक बुकलेट की तरह ही दिखता है, लेकिन इसके एक पेज में एक खास रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन चिप लगी होती है। इस चिप में पासपोर्ट धारक की सभी बायोमेट्रिक जानकारी (जैसे फिंगरप्रिंट और फोटो) डिजिटल रूप में स्टोर होती है। यह पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों पर आधारित है, जिससे यह पूरी तरह से सुरक्षित और धोखाधड़ी-प्रूफ है। इसे केवल स्कैन करके ही धारक की पहचान की जा सकती है। ई-पासपोर्ट के फायदे यह नया पासपोर्ट कई मायनों में पुराने पासपोर्ट से बेहतर है: जालसाजी से सुरक्षा: डुप्लिकेट पासपोर्ट बनाना लगभग असंभव हो जाएगा। तेज वेरिफिकेशन: एयरपोर्ट पर लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि स्कैनिंग से कुछ ही सेकंड में वेरिफिकेशन हो जाएगा। विश्वसनीयता: यह दुनिया के सभी देशों में मान्य होगा। भविष्य की तकनीक: इसे भविष्य में एक डिजिटल आईडी के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। पर्यावरण के अनुकूल: पेपरलेस होने के कारण कागज की बचत होगी। ई-पासपोर्ट की पहचान उसके मुख्य पेज पर छपे एक छोटे से सुनहरे रंग के प्रतीक से होती है, जो इसे सामान्य पासपोर्ट से अलग करता है। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? ई-पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन करना बहुत आसान है: सबसे पहले, passportindia.gov.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करें। यूजर आईडी और पासवर्ड बनाएं और लॉग इन करें।  'न्यू पासपोर्ट' या 'री-इश्यू पासपोर्ट' पर क्लिक करें और 'ई-पासपोर्ट' चुनें। आवेदन फॉर्म भरें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। अपनी बायोमेट्रिक डिटेल्स (फोटो और फिंगरप्रिंट) अपलोड करें। अब पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) या डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) चुनें। शुल्क का भुगतान करें और अपॉइंटमेंट की तारीख और समय शेड्यूल करें। तय तारीख पर केंद्र पहुंचकर अपने ओरिजिनल डॉक्यूमेंट जमा कराएं। बायोमेट्रिक डिटेल्स सबमिट करने के बाद, पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होगी।

60 साल की सेवा के बाद मिग-21 रिटायर, भारतीय वायुसेना का ऐतिहासिक अध्याय होगा समाप्त

नई दिल्ली  मिग-21 के रिटायर होने के साथ भारतीय वायुसेना ने भारतीय सैन्य विमानन में एक ऐतिहासिक अध्याय समाप्त कर दिया है. यह विमान अपने पीछे बेजोड़ सेवा और एक ऐसी विरासत छोड़ गया है जिसे भारत द्वारा लड़ाकू विमानों की नई पीढ़ी में बदलाव के दौरान याद रखा जाएगा. भारतीय वायुसेना मिग-21 की जगह तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) मार्क 1ए को शामिल कर सकती है. भारतीय वायुसेना की रीढ़ कहे जाने वाले मिग-21 की लगभग 60 साल की सेवा भारत की वायु शक्ति को आकार देने में महत्वपूर्ण रही है. वायुसेना 26 सितंबर को मिग-21 लड़ाकू विमान को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है. भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने अपने प्रतिष्ठित मिग-21 लड़ाकू जेट को छह दशकों की शानदार सेवा का जश्न मनाते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. एक्स पर एक पोस्ट में भारतीय वायुसेना ने विमान की सराहना करते हुए कहा कि यह एक ऐसा युद्धक घोड़ा है जिसने राष्ट्र के गौरव को आसमान में पहुंचाया.' जारी वीडियो में मिग-21 के उत्कृष्ट इतिहास को दर्शाया गया है. 1963 में शामिल किया गया मिग-21 लगभग छह दशकों से सेवा दे रहा है और भारत की वायु शक्ति का आधार रहा है. चंडीगढ़ में स्थापित इसकी पहली स्क्वाड्रन, 28 स्क्वाड्रन को भारत के पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान के रूप में 'फर्स्ट सुपरसोनिक्स' उपनाम दिया गया था. मिग-21 विमान ने कई अभियानों में व्यापक भूमिका निभाई है. इनमें 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध भी शामिल है, जहाँ इसने अपनी युद्धक क्षमता साबित की. दशकों से इसने लड़ाकू पायलटों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से कई इसे चुनौतीपूर्ण और लाभप्रद मानते हैं. 1971 के युद्ध में मिग-21 विमानों ने ढाका स्थित राज्यपाल के आवास पर हमला किया था. इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान को आत्मसमर्पण करना पड़ा था. इस विमान ने दुश्मन के कई लड़ाकू विमानों को मार गिराया है. 1971 में F-104 से लेकर 2019 में F-16 तक—जिससे यह भारतीय वायुसेना के इतिहास में सबसे अधिक युद्ध-परीक्षणित जेट विमानों में से एक बन गया है. मिग-21 को कारगिल युद्ध में भी इस्तेमाल किया गया था. प्रेस ब्यूरो ऑफ इनफॉर्मेशन के अनुसार यह अक्सर कमांडरों की पहली पसंद होता था, क्योंकि इसकी उच्च चपलता, तेज गति और त्वरित वापसी जैसी अनूठी विशेषताओं के कारण यह बेजोड़ परिणाम देता था. मिग-21 के सभी प्रकारों की बहुमुखी प्रतिभा ने दशकों से भारतीय वायुसेना के संचालन दर्शन को व्यापक रूप से आकार दिया है. मिग-21 को उड़ाने और उसका रखरखाव करने वाले पायलट, इंजीनियर और तकनीशियन इसकी असाधारण युद्ध क्षमता के प्रबल समर्थक रहे हैं. प्रमुख परिचालन उपलब्धियां हासिल करने के अलावा, मिग-21 ने स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग की तकनीकी और विनिर्माण क्षमताओं में क्रांतिकारी वृद्धि भी की. मिग-21 एफएल के चरणबद्ध तरीके से बाहर होने के साथ अथक प्रदर्शन, सटीक डिलीवरी और डराने वाले प्रदर्शन का युग भी समाप्त हो जाएगा.

PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी, EPFO ने लॉन्च किया फटाफट डिटेल्स वाला नया फीचर

नई दिल्ली अगर आप भी प्राइवेट सेक्‍टर में काम करते हैं और EPF के तहत रजिस्‍टर्ड हैं तो एक नया फीचर लॉन्‍च हुआ है. EPFO ने पासबुक लाइट फीचर शुरू किया है. अब सदस्‍य बिना लॉग इन, बस एक क्लिक में पूरे PF अकाउंट का ब्‍यौरा देख सकते हैं. सीधे पोर्टल से ही अपने पीएफ अकाउंट की डिटेल देख सकेंगे. अभी तक पीएफ बैलेंस या ट्रांजेक्‍शन के देखने के लिए अलग से पासबुक पोर्टल पर लॉग इन करना पड़ता था, लेकिन नए पासबुक लाइट फीचर से यह दिक्‍कत भी समाप्‍त हो चुकी है. फोन में मैसेज नहीं आने पर भी अब आप फेसबुक लाइट के जरिए ये जानकारी ले सकते हैं कि आपके पीएफ अकाउंट में कितने रुपये डिपॉजिट हुए हैं.  क्‍या है पासबुक लाइट फीचर?  अब कर्मचारी सीधे सदस्य पोर्टल पर ही अपने योगदान, निकाला गया पैसा और कुल बैलेंस की पूरी जानकारी देख सकेंगे. इस सर्विस की जानकारी श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने एक कार्यक्रम के दौरान दी. उन्‍होंने कहा कि यह सुधार न सिर्फ PF सदस्‍यों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि मौजूदा पासबुक पोर्टल लोड भी कम करेगा.  पासबुक लाइट से क्‍या होंगे फायदे?  सबसे बड़ा फायदा होगा कि अब आपको अलग-अलग जानकारी के लिए कई जगहों पर जाने की जरूरत नहीं होगी. एक ही जगह पर पूरी जानकारी मिल जाएगी. एक स्‍क्रीशॉट लेकर भी पीएफ की सभी जानकारी रख सकते हैं. साथ ही जल्‍द डिटेल सर्च हो सकेगा, जिससे समय की बचत होगी. इसके अलावा, पासवर्ड आदि भी याद करने की झंझट भी खत्‍म होगी.  फटाफट ट्रांसफर होगा पीएफ  फॉर्म 13 के जरिए पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज होने वाली है, क्‍योंकि पुराना पीएफ ट्रांसफर करने के लिए पुराना ऑफिस Annexure K सर्टिफिकेट तैयार करता है और इस दस्तावेज को नए PF ऑफिस में भेजा जाता है ताकि पुराने खाते से पैसे सही तरीके से नए खाते में ट्रांसफर हो सके. अब ये प्रॉसेस आसान हो चुकी है. कर्मचारी सीधे मेंबर पोर्टल से Annexure K को PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं. इससे न सिर्फ ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज हो गई है, बल्कि कर्मचारियों को अपने पीएफ ट्रांसफर से जुड़ी जानकारी पर बेहतर कंट्रोल भी होगा.  फंड ट्रांसफर में भी मददगार अब कर्मचारी अपने पीएफ ट्रांसफर के स्‍टेटस को ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं, जिससे उन्हें यह पता चल सके कि उनका फंड पुराने खाते से नए खाते में सही तरीके से ट्रांसफर हुआ है या नहीं. इसके साथ ही वे यह भी देख सकते हैं कि उनके नए पीएफ खाते में बैलेंस और नौकरी का समय ठीक से अपडेट है या नहीं. 

भारत का सिंधु योजना प्लान: अब अपने राज्यों को मिलेगा ज्यादा पानी, पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ते जल संकट के बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने  एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दिए जाने वाले सिंधु जल संधि के तहत आने वाले पानी को अब दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों की ओर मोड़ा जाएगा। यह कदम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद उठाया जा रहा है, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। खट्टर ने इसे "आपदा में अवसर" बताते हुए कहा कि अगले एक से डेढ़ वर्षों में यह पानी उपलब्ध हो सकेगा। खट्टर ने  घोषणा की कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के कारण बचा पानी अगले एक से डेढ़ साल के भीतर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी के जल निकासी मास्टर प्लान की शुरुआत के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘पाकिस्तान की ओर बड़ी मात्रा में छोड़ा जाने वाला पानी अब आने वाले एक से डेढ़ साल में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा।’’ भारत ने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में दशकों पुरानी इस संधि को निलंबित करने का फैसला किया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। वर्ष 1960 से प्रभावी यह संधि भारत तथा पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी तथा उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है। प्रभावित राज्य और जल संकट की स्थिति दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्य गंभीर जल संकट का सामना करते हैं। गर्मियों में यमुना नदी का जलस्तर न्यूनतम होने से पेयजल की कमी हो जाती है। हरियाणा और राजस्थान में भी सिंचाई के लिए पानी की किल्लत होती है। खट्टर के अनुसार, सिंधु की पश्चिमी नदियों से बचने वाला पानी इन राज्यों को राहत देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को अतिरिक्त 30-40 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध करा सकता है, हालांकि इसे स्टोर करने और वितरित करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।

रेलवे का तोहफा: रेल नीर की कीमत घटी, यात्रियों को मिलेगा सस्ते में शुद्ध पानी

नई दिल्ली  ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी राहत दी है. प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में मिलने वाली रेल नीर की बोतल अब पहले से सस्ती हो गई है. पहले जहां यात्रियों को 1 लीटर की बोतल के लिए 15 रुपये चुकाने पड़ते थे, अब वही बोतल सिर्फ 14 रुपये में मिलेगी. इसी तरह आधा लीटर की बोतल अब 9 रुपये में उपलब्ध होगी, जबकि पहले इसकी कीमत 10 रुपये थी. नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी. रेलवे का बड़ा फैसला, जेब पर कम बोझ रेलवे का कहना है कि यात्रियों की जेब पर बोझ कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है. रेलवे के मुताबिक हर साल करोड़ों लोग रेल नीर खरीदते हैं और इस छोटे से बदलाव से लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी. खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए यह फैसला अहम साबित होगा. रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नई दरों के साथ बोतलों की गुणवत्ता और शुद्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यात्रियों की मांग पर लिया गया निर्णय काफी समय से यात्रियों की ओर से रेल नीर की कीमत कम करने की मांग उठ रही थी. यात्रियों का कहना था कि बाहर से पानी खरीदने पर कई बार उन्हें नकली बोतलें या ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, ऐसे में रेलवे ही उन्हें भरोसेमंद पानी उपलब्ध कराए. रेलवे ने इस मांग को ध्यान में रखते हुए कीमतों में यह कटौती की है. 22 सितंबर से हर यात्री को मिलेगा फायदा अब जब यात्री प्लेटफॉर्म या ट्रेन में रेल नीर खरीदेंगे तो उन्हें नई दरों का लाभ मिलेगा. 22 सितंबर से लागू होने वाले इस फैसले से हर दिन लाखों बोतलों की बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा. उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद और भी ज्यादा यात्री रेल नीर को प्राथमिकता देंगे. इससे रेलवे को भी यात्रियों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी.

कंडोम यूज़ में कौन है एशिया का नंबर वन – भारत या चीन? जानें दिलचस्प आंकड़े

नई दिल्ली मेडिकल स्टोर में आपने अक्सर देखा होगा कि कंडोम का पैकेट दुकान की ऐसी जगह पर रखा होता है, जहां वह आसानी से दिख जाए. वजह साफ है-'कंडोम'. ये शब्द बोलने में लोग आज भी हिचकिचाते हैं. समाज में अक्सर यह शब्द खुलकर नहीं लिया जाता. दुकानदार भी इस मनोविज्ञान को समझते हैं और इसलिए पैकेट को सामने रखते हैं ताकि लोगों को खरीदने में कम परेशानी हो. लेकिन यह वही कंडोम है, जिसका नाम लेने में लोग झिझकते हैं, और जिसका कारोबार आज दुनिया भर में अरबों का है. एशिया में तो इसका मार्केट लगातार बढ़ रहा है. आंकड़ों पर जाने से पहले ज़रूरी है कि कंडोम के इतिहास पर एक नजर डाली जाए. कंडोम का इतिहास कंडोम का जिक्र हजारों साल पुराना है. माना जाता है कि करीब 5000 साल पहले यहूदी पौराणिक कथाओं में राजा मिनोस की कहानी में बकरी के मूत्राशय का इस्तेमाल सुरक्षा के तौर पर किया गया था. प्राचीन मिस्र में भी लोग प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करते थे, जबकि प्राचीन रोम में बकरियों और भेड़ों के मूत्राशय और आंतों से बने कंडोम काफी प्रचलित थे. 1920 में आई क्रांति हालांकि असली बदलाव 1920 में लेटेक्स की खोज के साथ आया. इसके बाद कंडोम आसानी से बनने लगे, ज़्यादा टिकाऊ और सुरक्षित हो गए. यही वजह है कि आज कंडोम दुनिया का सबसे सुलभ और भरोसेमंद गर्भनिरोधक साधन माना जाता है. यह न सिर्फ यौन संचारित रोगों से बचाता है, बल्कि जनसंख्या नियंत्रण में मदद करता है और महिलाओं को आजादी देता है. एशिया का कंडोम मार्केट इंडेक्स बॉक्स एक मार्केट रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स कंपनी है.यह प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्रीज पर बाजार विश्लेषण, ट्रेंड्स, खपत, उत्पादन, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट डेटा और भविष्य के अनुमान जारी करती है. हाल ही में इंडेक्स बॉक्स ने एशिया के कंडोम मार्केट पर रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें खपत, उत्पादन, कीमतों और 2035 तक के  एनालिसिस किया है. इंडेक्स बॉक्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि एशिया का कंडोम मार्केट 2035 तक 19 अरब यूनिट्स और 405 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. साल 2024 इस उद्योग के लिए थोड़ा कमजोर रहा. खपत घटकर 14 अरब यूनिट्स और मार्केट वैल्यू घटकर 292 मिलियन डॉलर रह गई. यह लगातार दूसरा साल था जब गिरावट दर्ज की गई. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुस्ती अस्थायी है और आने वाले सालों में बाजार फिर से रफ्तार पकड़ेगा. कौन है सबसे बड़ा उपभोक्ता? रिपोर्ट के अनुसार, चीन 5.8 अरब यूनिट्स के साथ एशिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो कुल खपत का लगभग 42% है. भारत 2.4 अरब यूनिट्स के साथ दूसरे और तुर्की 701 मिलियन यूनिट्स के साथ तीसरे स्थान पर है. प्रति व्यक्ति खपत में UAE आगे कुल खपत में चीन भले ही सबसे बड़ा हो, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत के मामले में UAE सबसे आगे है. यहां हर शख्स औसतन 31 यूनिट्स सालाना इस्तेमाल करता है. इसके बाद तुर्की, वियतनाम और थाईलैंड का नंबर आता है. कीमतों और उत्पादन का हाल कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है. औसतन इम्पोर्ट कीमत 31 डॉलर प्रति हजार यूनिट्स रही, लेकिन वियतनाम में यह 48 डॉलर और मलेशिया में सिर्फ 9.6 डॉलर रही.उत्पादन की बात करें तो 2022 में 32 अरब यूनिट्स बनने के बाद, 2024 में यह घटकर 26अरब यूनिट्स रह गया. वैल्यू के लिहाज से भी उत्पादन घटकर 522 मिलियन डॉलर रह गया.निर्यात के मामले में थाईलैंड, मलेशिया और चीन सबसे आगे हैं और मिलकर एशिया के 95% एक्सपोर्ट को नियंत्रित करते हैं. आने वाले सालों की तस्वीर रिपोर्ट का अनुमान है कि 2024 से 2035 के बीच एशियाई कंडोम मार्केट औसतन 3% सालाना ग्रोथ रेट दर्ज करेगा. यानी आने वाले दशक में यह बाजार न सिर्फ पहले जैसी रफ्तार पकड़ेगा, बल्कि और बड़ी छलांग लगाएगा.

प्रधान सचिव बोले: भर्ती में योग्यता, कार्य में टीमवर्क और नैतिक मूल्य सर्वोपरि

मुंबई  प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने कहा कि अब केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्तियां डोमेन की विशेषज्ञता, योग्यता और साख के आधार पर हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मल्टी-सोर्स फीडबैक प्रणाली, मिशन कर्मयोगी और इंटरव्यू खत्म करने जैसे कदमों से नौकरशाही में पारदर्शिता बढ़ी है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने शनिवार को एक कार्यक्रम में नौकरशाही की पार्दर्शिता को लेकर कई बाते कही।उन्होंने बताया कि सरकार ने शासन में आते ही चुपचाप कई सुधार शुरू किए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार और राज्य संचालित कंपनियों में नियुक्तियों में विशेषज्ञता, योग्यता और प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्र सरकार की नियुक्तियों में अब वरिष्ठ नौकरशाहों और सार्वजनिक उपक्रमों में शीर्ष पदों पर तैनाती सिर्फ अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि डोमेन की विशेषज्ञता, योग्यता और साख को ध्यान में रखकर की जा रही है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने मुंबई स्थित आईआईएम के दीक्षांत समारोह में यह बात कही। कब शुरू हुए थे रणनीतिक बदलाव मिश्रा ने कहा कि 2014 से कर्मियों के प्रबंधन में जो रणनीतिक बदलाव शुरू हुए थे। वे अब एक नए युग की सिविल सेवा के निर्माण की दिशा में ले जा रहे हैं। इस बदलाव से वरिष्ठ पदों जैसे संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर की नियुक्तियां अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हुई हैं। मल्टी-सोर्स फीडबैक सिस्टम का इस्तेमाल उन्होंने बताया कि 2016 में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती के लिए मल्टी-सोर्स फीडबैक प्रणाली लागू की गई। इसमें वरिष्ठों, कनिष्ठों, सहकर्मियों और बाहरी हितधारकों से फीडबैक लेकर निर्णय लिए जाते हैं। इससे अधिकारियों की निर्णय लेने की क्षमता, जवाबदेही, कामकाज और ईमानदारी जैसे गुणों का आकलन किया जाता है। मिशन कर्मयोगी से प्रशिक्षण में क्रांति मिश्रा ने कहा कि मिशन कर्मयोगी ने सिविल सेवाओं के प्रशिक्षण की तस्वीर बदल दी है।आई.जीओटी प्लेटफॉर्म पर 3,300 से अधिक कोर्स मौजूद हैं और 1.3 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी इससे जुड़ चुके हैं। इनमें 50 लाख से अधिक अधिकारियों ने भूमिका-विशेष प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इसे अब वार्षिक मूल्यांकन प्रणाली से भी जोड़ा गया है। समूह बी और सी पदों पर इंटरव्यू खत्म प्रधान सचिव ने बताया कि समूह बी और सी पदों की नियुक्तियों में 2016 से इंटरव्यू खत्म कर दिए गए हैं। इससे चयन प्रक्रिया से पक्षपात और व्यक्तिपरकता हट गई है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है और टैलेंट पूल भी विस्तृत हुआ है।   बदलते दौर में टीमवर्क और नैतिकता पर जोर मिश्रा ने स्नातकों से कहा कि बदलते दौर में तकनीकी कौशल के साथ ही टीमवर्क, पारदर्शिता, विनम्रता और नैतिक मूल्यों का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सफलता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं होती बल्कि शिक्षकों, परिवार और सहकर्मियों के सहयोग से मिलती है। भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव प्रधान सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत @2047 की दृष्टि में ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ का मंत्र शामिल है। भारत आज 100 से अधिक यूनिकॉर्न और 1.9 लाख स्टार्टअप के साथ वैश्विक नवाचार शक्ति बन चुका है। सरकार ने अनुसंधान और तकनीक के लिए एक लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान राष्ट्रीय कोष, इंडियाAI मिशन और डीप टेक फंड ऑफ फंड्स जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। 

एक ओर गाजा में तबाही, दूसरी ओर यूरोप के देश फलस्तीन को मान्यता देने के कगार पर

काहिरा गाजा सिटी पर इस्राइल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई। मारे गए लोगों में छह एक ही परिवार से थे। हमलों के बीच पुर्तगाल और अन्य पश्चिमी देश फलस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की तैयारी कर रहे हैं। गाजा में 65,000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, जबकि 90% आबादी विस्थापित है। गाजा पर इस्राइल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कई पश्चिमी देश अब खुले तौर पर फलस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन सकता है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मारे गए लोगों में छह लोग एक ही परिवार से थे। इनमें शिफा अस्पताल के निदेशक मोहम्मद अबू सलमिया के रिश्तेदार भी शामिल हैं। एक अन्य हमले में शावा स्क्वायर के पास पांच लोगों की मौत हुई। राहत एजेंसियां कह रही हैं कि गाजा में हालात अकाल जैसी स्थिति तक पहुंच गए हैं। पश्चिमी देशों का रुख बदलता हुआ इस्राइल के हमलों के बीच पुर्तगाल ने घोषणा की है कि वह रविवार को आधिकारिक तौर पर फलस्तीन राज्य को मान्यता देगा। इसके अलावा ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, माल्टा, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग जैसे देश भी आने वाले दिनों में यह कदम उठा सकते हैं। पश्चिमी देशों का यह रुख इस्राइल पर बढ़ते दबाव का संकेत है। युद्ध का दायरा और बढ़ा इस्राइल की सेना का कहना है कि उसका लक्ष्य हमास की सैन्य संरचना को पूरी तरह नष्ट करना है। हालांकि इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अभियान महीनों तक चल सकता है। पिछले 23 महीनों में इस्राइली बमबारी से गाजा में 65,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब 90 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो चुकी है। मानवीय संकट गहराया गाजा सिटी में रहने वाले हजारों लोगों को दक्षिण की ओर जाने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन कई लोग या तो कमजोर हैं, या फिर उनके पास संसाधन नहीं हैं कि वे बार-बार उजड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा सकें। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियां कह रही हैं कि इस तरह की जबरन निकासी से मानवीय संकट और गंभीर होगा। बच्चों के लिए भेजी मदद लूटी गई यूनिसेफ ने शुक्रवार को खुलासा किया कि कुपोषित बच्चों के लिए भेजा गया जीवनरक्षक भोजन सशस्त्र लोगों ने लूट लिया। चार ट्रकों से यह सामान गाजा सिटी में जबरन छीना गया। इस्राइल ने इसका आरोप हमास पर लगाया है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उनके पास मदद के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े तंत्र मौजूद हैं। संघर्ष की जड़ें और आंकड़े सात अक्टूबर 2023 को हमास ने दक्षिणी इस्राइल में हमला किया था जिसमें 1200 लोग मारे गए और 251 को बंधक बनाया गया। इनमें से 48 अभी भी गाजा में हैं और आधे से भी कम के जिंदा होने की आशंका है। इसके बाद से अब तक 65,100 से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानता है। 

भारत में पहली बार: मुंबई में FIA-प्रमाणित नाइट स्ट्रीट रेसिंग सर्किट

नई दिल्ली  महाराष्ट्र खेलों की दुनिया में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। पहली बार नवी मुंबई की सड़कें रात में जगमगाते फ्लडलाइट्स के बीच हाई-स्पीड रेसिंग ट्रैक में बदलेंगी। यह नाइट रेस भारत में मोटरस्पोर्ट्स का नया इतिहास रचने वाली होगी।  मुंबई पहली बार दिसंबर 2025 में एक FIA-ग्रेड स्ट्रीट रेसिंग इवेंट की मेजबानी करने जा रही है। इसके लिए रेसिंग प्रमोशनंस प्राइवेट लिमिटेड (RPPL) (आरपीपीएल) और नवी मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (NMMC) (एनएमएमसी) के बीच समझौता हुआ है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम के साथ मुंबई को पहली बार इंडियन रेसिंग फेस्टिवल (IRF) (आईआरएफ) के कैलेंडर में शामिल किया गया है। और मुंबई को मिलेगा अपना पहला FIA-प्रमाणित स्ट्रीट सर्किट। कैसा होगा नया सर्किट यह सर्किट 3.753 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 14 टर्न्स (घुमाव) होंगे। नवी मुंबई की सड़कों को एक टेक्निकल रेसिंग ट्रैक में बदला जाएगा। खास बात ये है कि यह रेस रात में फ्लडलाइट्स के बीच होगी, ताकि ड्राइवर्स और दर्शक दोनों को शानदार एक्सपीरियंस मिले। वीकेंड पर दो बड़े चैम्पियनशिप आयोजित होंगे – इंडियन रेसिंग लीग (Indian Racing League) (IRL) और Formula 4 Indian Championship (फॉर्मूला 4 इंडियन चैंपियनशिप) (F4IC)।   कहां से गुजरेगा ट्रैक सर्किट का रूट पाम बीच रोड से शुरू होगा और चौड़ी सिटी बुलेवार्ड्स और नेरुल लेक के आसपास के इलाकों से होकर गुजरेगा। इसका डिजाइन ऐसा है कि ड्राइवर के कौशल की असली परीक्षा होगी। वहीं दर्शकों को एकदम करीब से रेस देखने का मौका मिलेगा।   सरकार की भूमिका सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हम नवी मुंबई में इंडियन रेसिंग फेस्टिवल को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं। मुंबई स्ट्रीट रेस महाराष्ट्र के मोटरस्पोर्ट्स सफर में ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह न सिर्फ पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को रेसिंग, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और इवेंट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी प्रेरित करेगा।"    आयोजन कौन करेगा इस रेस का आयोजन आरपीपीएल करेगी, जिसने पहले भी भारत के कई शहरों में स्ट्रीट रेसिंग कराई है। कंपनी का कहना है कि मुंबई का नाइट एटमॉस्फियर इस फॉर्मेट के लिए बिल्कुल फिट है और रेस को एक अलग पहचान देगा।   सितारों की मौजूदगी इस फेस्टिवल में कई बड़ी हस्तियां टीम ओनर हैं। जिनमें जॉन अब्राहम, अर्जुन कपूर, सौरव गांगुली, सुदीप किच्चा, नागा चैतन्य और डॉ. स्वेता सुनीप आनंद शामिल हैं। इनके जुड़ने से इवेंट को और ज्यादा लोकप्रियता मिलने की उम्मीद है।   इंडियन रेसिंग फेस्टिवल क्या है IRF में दो बड़े इवेंट होते हैं- IRL, जो भारत की पहली जेंडर-न्यूट्रल चार-व्हील रेसिंग लीग है, और F4IC, जो FIA-प्रमाणित चैम्पियनशिप है और खासकर युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देती है। फॉर्मूला 4 से ड्राइवर्स को सुपर लाइसेंस पॉइंट्स भी मिलते हैं। जिससे उन्हें विदेश में जाकर ट्राई करने की जरूरत नहीं पड़ती।   मुंबई की बारी मुंबई की यह रेस IRF कैलेंडर की ताजा एंट्री होगी। इससे पहले कोयंबटूर, चेन्नई, हैदराबाद और गोवा में इवेंट्स हो चुके हैं।