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रूस-फ्रांस में खलबली! तेजस Mark-1A के सामने फीके राफेल और सुखोई

नई दिल्ली तेजस Mark-1A फाइटर जेट की डिलीवरी डेट लगातार टल रही है. एचएएल यानी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने पहले इसे सितंबर में एयरफोर्स को देने की बात कही थी. अब तेजस Mark-1A की दो यूनिट अक्‍टूबर में उपलब्‍ध होगी. इंजन मिलने में देरी की वजह से डिलीवर डेट की डेडलाइन लगातार आगे खिसकती रही है. अब तो डिटेल सामने आया है, उसके अनुसार तेजस Mark-1A फाइटर जेट में ऐसे वेपन इंटीग्रेट किए जा रहे हैं, जिससे दुश्‍मनों का दम फूलना तय है. साथ ही फ्रांस और रूस जैसे फाइटर जेट सप्‍लायर देश भी भौंचक्‍का हो जाएंगे, क्‍योंकि भारत फाइटर जेट बनाने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. लंबे इंतजार के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की ओर से अगले महीने भारतीय वायुसेना (IAF) को पहले दो इंप्रूव्ड और अपग्रेड तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान सौंपने की उम्मीद है. हालांकि, यह डिलीवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी सिंगल-इंजन जेट अपने तयशुदा हथियार फायरिंग ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है या नहीं. मॉडर्न वेपन के साथ सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन सूत्रों के मुताबिक, इस महीने के अंत तक तेजस Mark-1A पर अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम की फायरिंग ट्रायल्स निर्धारित हैं. इन ट्रायल्स के जरिए यह भी परखा जाएगा कि इजरायली मूल के एल्टा ELM-2052 रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ हथियारों का इंटीग्रेशन सही ढंग से हुआ है या नहीं. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ट्रायल में असफलता के बाद तेजस Mark-1A में सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन किए गए हैं. इंजन सप्‍लाई में देरी बनी बड़ी बाधा तेजस Mark-1A परियोजना की धीमी प्रगति की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की ओर से इंजन की सप्लाई में हुई लगभग दो साल की देरी रही. HAL ने अगस्त 2021 में 99 GE-404 इंजनों की खरीद 5,375 करोड़ रुपये में की थी, लेकिन अब तक सिर्फ दो इंजन ही मिले हैं. कंपनी ने वादा किया है कि अगले साल मार्च तक 10 और इंजन, और उसके बाद हर साल 20 इंजन सप्लाई करेगी. हथियार और रडार इंटीग्रेशन में आई तकनीकी दिक्कतें भी उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. एयरफोर्स का इंतजार लंबा IAF को अब तक तेजस के शुरुआती वर्जन मार्क-1 के 40 में से 38 विमान ही मिल पाए हैं, जिनका सौदा 2006 और 2010 में कुल 8,802 करोड़ रुपये में हुआ था. वहीं, फरवरी 2021 में किए गए 46,898 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 83 तेजस मार्क-1ए में से अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है. इनकी आपूर्ति फरवरी 2024 से फरवरी 2028 के बीच पूरी होनी थी. पिछले महीने प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने तेजस के और 97 विमानों की खरीद 66,500 करोड़ रुपये में मंजूर की, जिससे कुल संख्या और बढ़ जाएगी. एयरफोर्स की चिंता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से HAL की देरी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा था कि IAF की संख्या पहले से ही बेहद कम है और लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम 40 नए विमान शामिल करने की जरूरत है. फिलहाल IAF के पास 31 स्क्वॉड्रन हैं, लेकिन 26 सितंबर को सेवा में मौजूद 36 पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी, जो अब तक का सबसे कम स्तर होगा.

ट्रंप दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जिनपिंग और किम से बातचीत की संभावना

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकार एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) व्यापार मंत्रियों की बैठक के लिए अक्टूबर में दक्षिण कोरिया की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात संभव है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर के देश चिंता में हैं। वहीं, इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बारे में गंभीर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी है। अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ग्योंगजू शहर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन को ट्रंप के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का एक अहम अवसर माना जा रहा है। पिछले महीने एक फोन कॉल में जिनपिंग ने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का निमंत्रण दिया था। इस निमंत्रण का अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया था, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका में अधिक आर्थिक निवेश हासिल करने के अवसर के रूप में भी देख रहा है। ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं सहित हालिया विदेश यात्राओं का मुख्य केंद्र यही रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, "दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगी।" अधिकारी ने बताया कि अन्य लक्ष्यों में व्यापार, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इस क्षेत्र में ट्रंप की मौजूदगी उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ एक बार फिर बातचीत करने की स्थिति में ला सकती है, हालांकि किम इसमें शामिल होंगे या नहीं, यह अभी भी सवाल है। अधिकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक के आयोजन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ बैठक के दौरान उन्हें एपेक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि यह आयोजन ट्रंप को किम से मिलने का अवसर प्रदान कर सकता है। शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किम से मिलने के इच्छुक हैं। उत्तर कोरियाई नेता के बारे में ट्रंप ने दावा किया, "मैं ऐसा करूंगा और हम बातचीत करेंगे। वह मुझसे मिलना चाहेंगे। हम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को बेहतर बनाएंगे।" अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण कोरिया की अपेक्षित यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब शी जिनपिंग और किम दोनों के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हैं। शी जिनपिंग ने इस हफ्ते बीजिंग में किम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी। जिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं। अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं। ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी।

सांसदों में टकराव: रूडी ने निशिकांत दुबे पर साधा निशाना, जताई नाराजगी

नई दिल्ली भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने साथी सांसद निशिकांत दुबे के ऊपर बड़ा हमला किया है। उन्होंने निशिकांत दुबे को अहंकारी बताया है। इतना ही नहीं, राजीव प्रताप रूडी ने यहां तक कहा कि संसद के अंदर सरकार से इतर निशिकांत दुबे खुद में सरकार हैं। लेकिन मैं उनकी सरकार का हिस्सा नहीं हूं। मैं इंडिपेंडेंट हूं। राजीव प्रताप रूडी ने यह बातें कही हैं। रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव को लेकर सवाल पूछे गए थे। सवाल के जवाब में भाजपा सांसद ने कहा कि निशिकांत दुबे अकेले दम पर ही संसद चलाना चाहते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में निशिकांत दुबे रूडी के सामने खड़े भाजपा के ही संजीव बालियान का प्रचार कर रहे थे। राजीव प्रताप रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब के चुनाव को लेकर सवाल पूछा जा रहा था। इसमें उनसे पूछा गया कि इस चुनाव में उनकी पार्टी ही उनके खिलाफ थी। आगे पूछा गया कि क्या ऐसा भी था कि गृहमंत्री अमित शाह ने उनके खिलाफ प्रचार किया? इसके जवाब में राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यह गलत सूचना एक व्यक्ति द्वारा फैलाई गई, जो सोचते हैं कि वह बतौर सांसद संसद को नियंत्रित करते हैं। वह संसद में ऐसे ही शो चलाते हैं। इन्हीं शख्स से गृहमंत्री का नाम इस मामले में उछाला था। इस पर इंटरव्यू करने वाला रूडी से पूछता है कि क्या आप निशिकांत दुबे की बात कर रहे हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि आपको कैसे पता कि मैं दुबे की बात कर रहा हूं? फिर आगे वह कहते हैं कि मुझे लगता है आप सही हैं। राजीव प्रताप रूडी आगे कहते हैं कि कभी-कभी कुछ लोग अहंकारी हो जाते हैं। फिर पूछा जाता है कि वह एक साथी सांसद हैं और आपकी ही पार्टी के हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि वह संसद में शो चलाते हैं। वह इस बात का दावा करते हैं। उन्होंने ही तय किया था कि मुझे दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब का चुनाव नहीं जीतना चाहिए। इसके आगे रूडी से पूछा जाता है कि आखिर निशिकांत दुबे को आपसे प्रॉब्लम क्या है? इसके जवाब में भाजपा सांसद कहते हैं कि उनकी समस्या है कि वह शो चलाना चाहते हैं। सरकार से इतर वह खुद में एक सरकार हैं और मैं उनकी इस सरकार का हिस्सा नहीं हूं। रूडी ने आगे कहा कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में उन्हें अमित शाह से लेकर जेपी नड्डा का पूरा समर्थन हासिल था। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करके गलत तरीके से विवाद पैदा करने की कोशिश की। इसके पीछे निशिकांत दुबे ही थे।  

डॉक्टर भी चौंके: गाय की सर्जरी में पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 कीलें बाहर निकलीं

ऊना हिमाचल प्रदेश में हैरान कर देने वाली एक घटना सामने आई है। डॉक्टरों ने सर्जरी करने के बाद एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, 41 कीलें, कपड़े और रस्सियां निकालीं। गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। हिमाचल प्रदेश के ऊना में एक सरकारी पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों ने एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 धातु की कीलें समेत अन्य चीजें निकाली हैं। यह जटिल सर्जरी शनिवार को बरनोह स्थित क्षेत्रीय पशु चिकित्सालय में अस्पताल प्रभारी डॉ. निशांत रनौत के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा की गई। गाय के पेट से निकली इतनी सारी चीजें देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। डॉ. रनौत ने कहा कि सर्जरी के बाद गाय के स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित करने के लिए वेटनरी डॉक्टर सात दिनों तक उसकी निगरानी करेंगे। गर्भवती गाय को कलरुही निवासी विपिन कुमार और अन्य स्थानीय लोग अस्पताल लाए थे। डॉ. रानौत ने बताया कि गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। शुरुआती जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट में अप्राकृतिक वस्तुएं होने का संदेह हुआ। कई जांचें की गईं और सर्जरी करने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, कपड़े, रस्सियां और 41 कीलों समेत धातु के कई टुकड़े निकाले गए। उन्होंने कहा कि अब तक इस पशु चिकित्सालय में बड़े डायाफ्रामिक हर्निया जैसी 53 जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। यहां हर प्रकार की पशु सर्जरी, रक्त जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह अस्पताल बड़े पशुओं के उपचार के लिए क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ऊना स्थित पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र पटियाल ने इस सफल ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। साथ ही लोगों से प्लास्टिक कचरा, धातु की कीलें और अन्य सामग्री खुले में न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को कचरे का उचित निपटान करना चाहिए ताकि पशुओं और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

वैज्ञानिकों का दावा: रूस की कैंसर वैक्सीन ने सभी ट्रायल में सफलता दर्ज की

रूस  रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है. वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) FMBA ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है. FMBD प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है. इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा.  वैक्सीन ने पार किए सभी ट्रायल्स रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और FMBA की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है.  वैज्ञानिकों को अब अप्रूवल का इंतजार स्कवोर्त्सोवा ने कहा, 'यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे. वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं. शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी. इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया. कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा. इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं.

जापान के PM का बड़ा फैसला: पार्टी टूटने से रोकने के लिए छोड़ा पद

टोक्यो  जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इशिबा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में फूट से बचने के लिए यह कदम उठाया। जापानी मीडिया NHK ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इशिबा की गठबंधन सरकार जुलाई में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) के चुनाव में हार गई थी। इसके लिए इशिबा ने हाल ही में माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। गौरतलब है कि चुनावी हार के बाद LDP में 'इशिबा को हटाओ' आंदोलन जोर पकड़ गया था। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद से पार्टी के भीतर विरोध और तेज हो गया था। बता दें कि ऊपरी सदन के चुनाव परिणामों ने शिगेरू इशिबा की पार्टी पर उनकी पकड़ को कमजोर कर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह अपने पद पर बने रहेंगे। उस समय जापान और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। वहीं, अमेरिका ने जापान पर टैरिफ को 25 से घटाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। गौरतलब है कि पिछले साल इशिबा की पार्टी का निचले सदन में चुनावी प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। यह पार्टी का 15 साल में सबसे खराब प्रदर्शन था। इसके बाद जुलाई में ऊपरी सदन के चुनाव हुए, जहां पार्टी को एक बार फिर खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तब इशिबा ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। ऐसे में इस चर्चा को बाधित करना बड़ी भूल हो सकती है।  

क्या गाजा युद्ध जल्द खत्म होगा? जानें इजरायल की बंधक रिहाई की मांग

गाजा इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने गाजा युद्ध को लेकर रविवार को यरुशलम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा युद्ध तब समाप्त हो सकता है, जब बंधकों को रिहा कर दिया जाए। साथ ही, फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह हमास अपने हथियार डाल दे। यह बयान हमास की ओर से अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह सभी बंधकों को रिहा कर देगा, बशर्ते इजरायल युद्ध समाप्त करने और गाजा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत हो। गिदोन सार का यह बयान इजरायल-हमास संघर्ष के बीच शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम हो सकता है, क्योंकि यह युद्ध को समाप्त करने की शर्तों को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह बयान दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी मांगों को भी उजागर करता है, क्योंकि हमास की शर्तें इजरायल की मांगों से पूरी तरह भिन्न हैं। यह बयान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर सकता है, क्योंकि इससे मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं। यह दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को भी दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है। शहर को खाली करने का निर्देश इस बीच, इजरायल की सेना ने गाजा शहर के फिलिस्तीनियों को निर्देश दिया कि वे शहर को खाली कर दें और दक्षिण स्थित मानवीय क्षेत्र में चले जाएं। इजरायल ने शनिवार को इसी के साथ शहर की बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। सहायता समूहों ने चेतावनी दी कि गाजा से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने से मानवीय संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है। खाद्य संकट के मद्देनजर दुनिया के अग्रणी संगठन ने शहर को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। अधिकांश परिवार लगभग 2 वर्ष से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध के कारण कई बार विस्थापित हो चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि इजरायली सेना ने बार-बार उन शिविरों पर बमबारी की है, जिन्हें उसने मानवीय क्षेत्र घोषित किया था।  

आपातकाल की चेतावनी! नायर अस्पताल के डीन को ईमेल के जरिए धमकी

मुंबई  रविवार को मुंबई शहर के नायर अस्पताल में बम धमाके की नई धमकी मिलने से पुलिस अलर्ट पर रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार देर रात लगभग 11 बजे अस्पताल के डीन को एक ईमेल मिला, जिसमें अस्पताल परिसर को उड़ाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। हालांकि जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और धमकी को झूठा घोषित कर दिया गया। यह घटना ठीक दो दिन बाद सामने आई है, जब एक फोन कॉल में दावा किया गया था कि 34 “ह्यूमन बम” 400 किलो आरडीएक्स के साथ मुंबई में अलग-अलग वाहनों में लगाए गए हैं। कॉल करने वाले ने खुद को लश्कर-ए-जिहादी संगठन का सदस्य बताया था। पुलिस ने उस समय भी व्यापक तलाशी ली थी, लेकिन धमकी झूठी साबित हुई। गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा को देखते हुए मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। सिर्फ मुंबई में ही 21,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हाल के महीनों में मुंबई को लगातार बम धमाकों की झूठी धमकियां मिल रही हैं। पिछले हफ्ते ठाणे के कलवा रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी देने वाले 43 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। अगस्त में गिरगांव स्थित इस्कॉन मंदिर को ईमेल के जरिए धमकी मिली, जो फर्जी निकली। जुलाई में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को लेकर भी ऐसी धमकी दी गई थी। पुलिस ने बताया कि नायर अस्पताल से जुड़ी धमकी पर भी मामला दर्ज कर जांच जारी है।  

भारी भीड़ और बिजली का खतरा: मुंबई में गणपति विसर्जन के दौरान हादसा, 5 अस्पताल में भर्ती

मुंबई  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान रविवार को एक दुखद घटना घटी। रास्ते में लटक रहा बिजली का तार मूर्ति को टच कर गया, जिससे 6 भक्त घायल हो गए और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल लाए जाने पर एक व्यक्ति को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया, जिसकी पहचान 36 वर्षीय बिनु सुकुमारन कुमरन के तौर पर हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, बाकी पांच घायल भक्तों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर सुबह करीब 10.45 बजे हुई, जब बिजली का एक तारगणपति की मूर्ति को छू गया। अधिकारी ने बताया कि 5 घायलों (सुभांशु कामत, तुषार गुप्ता, धर्मराज गुप्ता, करण कनौजिया और अनुष गुप्ता) को पैरामाउंट अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। राज्य में बड़े पैमाने पर बप्पा को विदाई देने के दौरान कुछ जगहों से हादसों की भी खबर आई। पालघर में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान तीन लोग बह गए थे। हालांकि, उन्हें बचा लिया गया। विसर्जन शोभायात्रा के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के एक हेलीकॉप्टर और मुंबई पुलिस के ड्रोन ने हवाई निगरानी बनाए रखी। गणेश मंडलों की प्रतिमाओं का विसर्जन लालबागचा राजा सहित प्रमुख सार्वजनिक गणेश मंडलों की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाए जाने की शोभायात्राएं अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शनिवार को शुरू हुईं और रात भर जारी रहीं। ये प्रतिमाएं रविवार तड़के समुद्र तट पर पहुंची जिसके बाद विसर्जन संबंधी प्रक्रिया प्रारंभ हुई। लालबागचा राजा सहित सार्वजनिक मंडलों की कम से कम आधा दर्जन गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन गिरगांव चौपाटी पर किया जा रहा है। इसके पूरा होने में कुछ समय लगने की संभावना है। लालबागचा राजा की मूर्ति को एक विशेष रूप से निर्मित मंच पर ले जाने के प्रयास जारी हैं और फिर उसे विसर्जन के लिए गहरे समुद्र में ले जाया जाएगा।  

भारतीय एजेंट जेसन मिलर ने ट्रंप से की मुलाकात, मोदी सरकार के हित में कर रहे लॉबिंग

वाशिंगटन भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के बीच जानी-मानी राजनीतिक लॉबिस्ट और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जेसन मिलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की है। मिलर वही लॉबिस्ट हैं जिन्हें कुछ महीने पहले भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन तक अपनी कूटनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए नियुक्त किया था। जेसन मिलर ने एक्स पर राष्ट्रपति ट्रंप संग अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वॉशिंगटन में शानदार सप्ताह बिताया। सबसे खास रहा हमारे राष्ट्रपति को ऐक्शन में देखने का मौका।” सार्वजनिक खुलासों के अनुसार मिलर भारतीय हितों की वकालत करने वाले रजिस्टर्ड विदेशी एजेंट हैं। भारत सरकार ने अप्रैल 2024 में उनकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी को नियुक्त किया था। इस अनुबंध के तहत भारत हर महीने फर्म को 1.5 लाख डॉलर करीब 1.25 करोड़ रुपये फीस देती है। एक साल का यह अनुबंध 1.8 मिलियन डॉलर करीब 15 करोड़ रुपये का है। फर्म को अमेरिकी सरकार, कांग्रेस, थिंक टैंक और अन्य संस्थानों के साथ भारत से जुड़े मुद्दों पर रणनीतिक सलाह और सरकारी संपर्क बढ़ाने का काम सौंपा गया है। ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी जेसन मिलर ट्रंप के पुराने राजनीतिक सहयोगी हैं और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके मुख्य मीडिया प्रवक्ता के तौर पर सुर्खियों में आए थे। उन्हें वाइट हाउस का कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बनना था, लेकिन निजी विवादों के चलते पद संभालने से पहले ही रेस से हटना पड़ा। उन पर ट्रंप कैंपेन की एक अन्य अधिकारी से संबंध और यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे। विवादों के बावजूद वे ट्रंप के करीबी बने रहे और 2020 व 2024 के चुनावों में भी अहम सलाहकार की भूमिका निभाई। मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में फिर से खींचतान बढ़ी है। दोनों देशों के बीच टैरिफ व आर्थिक रणनीतियों पर चर्चा हो रही है।