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200% दवा टैरिफ की योजना, भारत और अमेरिकियों को होंगे बड़े असर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाहर से आने वाली दवाओं पर भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने के तैयारी में हैं. इसका असर भारत जैसे तमाम उन देशों पर पड़ेगा जो अमेरिका को दवा सप्लाई करते हैं. हालांकि, अभी भारत को इससे अलग रखा गया है लेकिन आने वाले समय में इसका असर भारत पर भी देखने को मिलेगा. लेकिन अगर भारत पर भी यह टैरिफ लागू हुआ तो उसके फार्मास्युटिकल, ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण एक्सपोर्ट पर पड़ेगा. वहीं, टैरिफ से अमेरिका को भी नुकसान होगा वहां पर दवाओं की कीमत बढ़ जाएगी. स्टाक की कमी हो सकती है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने आयातित दवाओं पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है. अधिकारियों ने कुछ दवाओं पर 200 प्रतिशत तक के शुल्क सार्वजनिक रूप से लगाए हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि इस नीति से कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. भारत पर क्या होगा असर हालांकि, अभी भारत को फार्मा टैरिफ से दूर रखने की बात कही गई है. लेकिन अगर यह लागू होता है तो कभी न कभी इसका असर भारत के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है. ट्रेड इकोनॉमिक्स के डेटा के मुताबिक, इंडिया ने साल 2024 में अमेरिका को कुल 8.72 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था. इस पर भी असर पड़ सकता है. जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से असुरक्षित है। अगर अमेरिका में टैरिफ लगता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को नुकसान हो सकता है और उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल (APIs) पर बहुत फोकस कर रहा है। ट्रंप का मुख्य टार्गेट फार्मा कंपनियों को दबाव डालकर अपना प्रोडक्शनअमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करना है। उनका तर्क है कि अमेरिका में बनी दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। पहले से ही, कुछ बड़ी कंपनियों जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और रोश ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों और उद्योग समूहों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उल्टा असर हो सकता है। इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने और दवाओं की कमी पैदा होने का खतरा है। खासकर जेनेरिक (सामान्य) दवाएं, जो पहले से ही कम मुनाफे पर बिकती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 25% टैरिफ भी अमेरिकी दवा की लागत को लगभग 51 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। कई दवा कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि टैरिफ से R&D और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि कुछ निवेशकों और विश्लेषकों को संदेह है कि ट्रंप वास्तव में 200% जैसी ऊंची दर लागू करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल निगोशिएशन की एक रणनीति हो सकती है। क्यों चिंता में अमेरिकी लोग? जानकारों का मानना है कि दवाओं पर भारी-भरकम टैरिफ से एक तरफ सप्लाई चेन प्रभावित होगी तो दूसरी तरफ दवाओं की कमी का खतरा बढ़ जाएगा. ट्रंप प्रशासन अपने इस कदम को सही ठहराने के लिए ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962 की सेक्शन 232 का इस्तेमाल कर रहा है. दलील दी जा रही है कि दवाओं की कमी से बचने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, ताकि कोविड-19 जैसी स्थिति दोबारा न हो. हाल ही में अमेरिका-यूरोप व्यापारिक फैसले में कुछ यूरोपीय सामानों पर 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था, जिनमें दवाएं भी शामिल हैं. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन और ज्यादा टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. क्या होगा तत्काल असर? व्हाइट हाउस की तरफ से सुझाव दिया गया है कि हायर टैरिफ लागू करने में करीब डेढ़ साल का समय दिया जाना चाहिए. कई कंपनियां पहले ही आयात बढ़ा चुकी हैं और दवाओं के दाम बढ़ा चुकी हैं. जेफरीज के विश्लेषक डेविड विंडले ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह फैसला 2026 के आखिर या 2027 से पहले लागू नहीं हो सकता है. अल्पकालिक प्रभाव यह होगा कि दवाओं की कमी बढ़ेगी. जबकि लंबे समय में इसका सीधा असर लागत और आपूर्ति पर पड़ेगा. ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण ऑर्गेनिक केमिकल्स भारत से अमेरिका को निर्यात 2.56 बिलियन USD की तुलना में अमेरिका से भारत को आयात 3.54 बिलियन USD से अधिक रहा है. भारत वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक केमिकल्स का एक प्रमुख निर्यातक है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है. वहीं, मेडिकल उपकरण की बात करें तो भारत अमेरिका को मेडिकल उपकरण का भी काफी मात्रा में निर्यात करता है. इस पर टैरिफ का असर पड़ेगा. क्योंकि ज्यादा टैरिफ होने से सामान महंगे होंगे. हालांकि, भारत अमेरिका से करीब 5.7 बिलियन USD का आयात करता है. क्योंकि भारत अपनी हाई-एंड मेडिकल उपकरण जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भर है.  

SC ने खारिज की जावेद की बेल रद्द करने की याचिका, जानें कन्हैया लाल केस में क्या हुआ

नई दिल्ली उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के मामले एनआईए और कन्हैया के बेटे को सुप्रीम कोर्ट से मायूसी हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के कन्हैया लाल मर्डर केस के एक आरोपी की जमानत के खिलाफ एनआईए और कन्हैया के बेटे की याचिकाओं को मंगलवार को खारिज कर दिया। याचिकाओं में जमानत रद्द किए जाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मोहम्मद जावेद को जमानत देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से जावेद को जमानत देने के आदेश के खिलाफ एनआईए और कन्हैया लाल के बेटे यश तेली की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन तथ्यों पर किया गौर रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए इस तथ्य पर विचार किया कि अभियोजन पक्ष ने 170 से अधिक गवाहों में से केवल 8 से ही पूछताछ की है। अदालत ने यह भी देखा कि घटना के समय आरोपी जावेद किशोर था। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए जावेद की जमानत बरकरार रखी। यश तेली की क्या दलील? यश तेली के वकील की दलील थी कि जावेद की भूमिका गंभीर है। उसने हमलावरों को बताया था कि कन्हैया उस समय कहां था। राजस्थान हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता पर गहराई से विचार किए बिना ही फैसला दिया जो उचित नहीं था। हत्या देश भर में सांप्रदायिक रूप से उत्तेजित माहौल में की गई थी। सुनियोजित हत्या इस याचिका में दावा किया गया कि मुख्य अभियुक्त ने हत्या की साजिश रची, हथियार जुटाए, जगह की रेकी की और ठिकाने की जानकारी के लिए जावेद को लगाया। आरोपी ग्राहक बनकर कन्हैया लाल दर्जी की दुकान में घुसे। जब वह उनका नाप ले रहा था तो आरोपियों ने एक कैमरा लगा दिया साथ ही सांप्रदायिक नारे लगाए, मृतक पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी। वीडियो बना जारी किया वहीं एनआईए ने अपनी दलील में कहा कि आरोपी जावेद, कन्हैया लाल की दुकान के पास एक दुकान में काम करता था। जावेद ने ही हमलावरों को जानकारी दी थी कि कन्हैया लाल कहां मिलेगा। इस घटना की जांच एनआईए कर रही है। आरोपी मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने इस खौफनाक हत्याकांड का वीडियो बनाया और उसे ऑनलाइन साझा किया था। वीडियो पोस्ट कर ली थी जिम्मेदारी इस्लाम के खिलाफ नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट पर कन्हैया लाल की आरोपियों ने 28 जून, 2022 को उदयपुर के हाथीपोल इलाके में उसकी दुकान पर हत्या कर दी थी। 2022 की पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य अभियुक्त मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद कपड़े सिलवाने के बहाने लाल की दुकान में घुसे और चाकू से हमला कर उसका गला रेत दिया। आरोपियों ने वीडियो में जघन्य कृत्य की जिम्मेदारी भी ली थी। इसलिए की हत्या कन्हैया लाल दर्जी की दिनदहाड़े की गई हत्या, नारेबाजी और सोशल मीडिया में आरोपियों की ओर से वीडियो पोस्ट किए जाने की घटना से पूरा देश स्तब्ध था। आरोपियों ने निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में कथित पोस्ट करने पर कन्हैया लाल दर्जी की हत्या करने की बात कही थी। उदयपुर के इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस जघन्य कृत्य के खिलाफ पूरे देश में जन आक्रोश देखा गया था।  

रक्षा मंत्री का ज्ञान: बाढ़ का पानी बाल्टी में भरकर रखें, अल्लाह का तोहफा बताया

लाहौर पाकिस्तान इस समय बाढ़ और बारिश की भारी मार झेल रहा है। देश के कई हिस्सों में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण कई लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। इस संकट के बीच पाकिस्तानियों को ऐसी अजीब सलाह दी जा रही है, जिसे सुनकर लोग हैरान और परेशान हैं। दरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक अटपटा बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में ख्वाजा आसिफ कहते दिख रहे हैं कि पाकिस्तानियों को बाढ़ का पानी जमा कर लेना चाहिए। बाढ़ अल्लाह का आशीर्वाद ख्वाजा आसिफ से बाढ़ राहत के बारे में सवाल किया था। जवाब में उन्होंने कहा कि लोग इसे अल्लाह का आशीर्वाद मानें और पानी को अपने घरों में जमा करें। ख्वाजा ने कहा कि पूरी दुनिया में पानी की कमी से हाहाकार मचा है। ऐसे में पाकिस्तान में बाढ़ का आना एक सुखद संयोग है। इसे आपदा नहीं, बल्कि अल्लाह की कृपा समझना चाहिए। पानी जमा करें: ख्वाजा बाढ़ और बारिश से त्रस्त लोग सड़कों पर उतरकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सड़कें जाम कर सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। इस पर ख्वाजा ने कहा कि लोगों को पहले पानी जमा करने पर ध्यान देना चाहिए। पानी को अपने घरों में ले जाएं, इससे सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि पानी जमा करने के लिए बड़े बांधों की जरूरत है, जो अभी संभव नहीं है। इसलिए लोग अपने घरों में ही पानी जमा करें। ख्वाजा ने यह भी कहा कि बाढ़ रोकने का कोई सिस्टम सरकार के पास नहीं है। लोग बेवजह सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के लिए स्थानीय सरकार जिम्मेदार है, जो शक्तिहीन है। लोग अतिक्रमण कर रहे हैं और पानी का रास्ता बदल रहे हैं, जिससे बाढ़ आना निश्चित है। पाकिस्तान में अब तक 854 लोगों की मौत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जून से 31 अगस्त तक पाकिस्तान में मरने वालों की संख्या 854 हो गई है और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बाढ़ से पंजाब प्रांत के लगभग 20 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने कहा कि ऐसी बाढ़ पंजाब ने पहली बार देखी है। इस बार झेलम, चिनाब और रावी तीनों नदियां उफान पर हैं। पंजाब सरकार के अनुसार, बाढ़ से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि पंजाब प्रांत से 10 लाख से अधिक लोगों को उनके घरों से सुरक्षित निकाला गया है। देश चार दशकों की सबसे भयावह बाढ़ का सामना कर रहा है, जिसने सैकड़ों गांवों को तबाह कर दिया और अनाज की फसलों को डुबो दिया। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने कहा कि इस भीषण बाढ़ से 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार ने बाढ़ में फंसे 7,60,000 लोगों और 5,00,000 से अधिक पशुओं को बचाया है।  

इजरायल को लेकर ट्रंप की चिंता, बोले- गाजा में जीत तो मिल रही है पर नुकसान भारी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इजरायल गाजा का युद्ध जीत रहा है। लेकिन उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ट्रंप ने कहा कि पब्लिक रिलेशंस की दुनिया में इजरायल की लॉबी को काफी नुकसान पहुंचा है। डेली कॉलर के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस में भी कांग्रेस का नियंत्रण कम होता जा रहा है। अगर आप 20 साल पहले जाएं तो कांग्रेस में इजरायल की लॉबी काफी मजबूत थी। गौरतलब है कि इजरायली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू को अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन हासिल है। हाल ही में नेतन्याहू ने कहा था कि वह हमास के साथ समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। माना जा रहा है कि नेतन्याहू के इस फैसले को ट्रंप का समर्थन हासिल है। सात अक्टूबर पर क्या बोले ट्रंप ने कहा कि एक समय था कि अगर किसी को पॉलिटिशियन बनना है तो उसे इजरायल के बारे में बोलने से बचना होता था। इसके साथ ही उन्होंने सात अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह एक विध्वंसक दिन था। उन्होंने जोर दिया कि इजरायल को इस युद्ध से उबरना होगा। यह जेरुसलम को नुकसान पहुंचा रहा है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल से उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है, यह देश बेहद शानदार है। मैंने इजरायल के लिए सबकुछ किया इस इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी दावा किया उन्होंने जितना कुछ इजरायल के लिए किया है, उतना किसी अन्य ने नहीं किया। उन्होंने ईरान के ऊपर हालिया बम गिराए जाने का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि जिस तरह से हमने ईरान के ऊपर से वह जहाज उड़ाए, कोई और नहीं कर सकता। गौरतलब है कि ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायली परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। ब्रिटेन ने जताई थी नाराजगी इससे पहले ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी ने सोमवार को गाजा में पर्याप्त सहायता सामग्री नहीं पहुंचने देने पर इजराइल के प्रति आक्रोश जताया था। उन्होंने गाजा के लिए चिकित्सा सहायता हेतु 1.5 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त राशि की घोषणा की। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन के अधिकारी गंभीर रूप से बीमार और घायल बच्चों को गाजा से बाहर निकालकर ब्रिटेन के अस्पतालों में विशेष उपचार दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है, यह 21वीं सदी में एक मानव-निर्मित आपदा है।  

मिलिशिया भर्ती से लेकर 15 हजार सैनिकों की तैनाती तक, पड़ोसी देश की US से जंग की तैयारी?

वॉशिंगटन/काराकास  दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में स्थित कैरिबियाई देश वेनेजुएला ने अपनी सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी है और देशभर के युवाओं से मिलिशिया में शामिल होने का आह्वान किया है। वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर कैरिबियन सागर में अमेरिकी सेना उनके देश पर हमला करती है, तो वे अपने देश को 'हथियारों से लैस गणराज्य' के रूप में घोषणा कर देंगे। उनकी यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस कदम के बाद आई है, जिसके तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के करीब समंदर में अपने युद्धपोत उतार दिए हैं। वेनेज़ुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने दावा किया है कि अमेरिका ने 1,200 मिसाइलों से लैस आठ अमेरिकी सैन्य युद्धपोत उनकी देश से सटी सीमा के पास उतारे हैं, जो उनके देश के लिए खतरा हैं। उन्होंने इसे एक पूरी तरह से आपराधिक कृत्य बताया है और और इसे क्षेत्र के लिए इस सदी का सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। वेनेजुएला ने बताय खूनी खतरा मादुरो ने इस सैन्य तैनाती के बारे में कहा, "इस अत्यधिक सैन्य दबाव के मद्देनजर हमने अपने देश की रक्षा के लिए अधिकतम तैयारी की घोषणा की है।" उन्होंने अमेरिकी तैनाती को अत्यधिक अनुचित, अनैतिक और पूरी तरह से आपराधिक और खूनी खतरा बताया है। दरअसल, अमेरिका ने ड्रग कारटेल पर काबू पाने के लिए कैरिबाई सागर में न सिर्फ युद्धपोत का बेड़ा उतार रखा है बल्कि हजारों सैनिक भी तैनात कर रखे हैं। अमेरिका का हमले की योजना से इनकार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों के वेनेजुएला की धरती पर आक्रमण करने की कोई योजना नहीं है। बावजूद इसके मादुरो की सरकार ने कोलंबिया तट और सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है और युवाओं से नागरिक मिलिशिया में शामिल होने का आह्वान किया है। दोनों देशों के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध दरअसल, दोनों देशों के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। वॉशिंगटन 2019 से ही वेनेजुएला के विपक्षी नेता जुआन गुएदो का समर्थन करता रहा है और मौजूदा राष्ट्रपति मादुरो के चुनाव को मान्यता देने से इनकार करता रहा है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि वह ड्रग कारटेल से संभावित खतरों से निपटने के लिए वेनेजुएला के पास अपनी समुद्री उपस्थिति बढ़ा रही है लेकिन मादुरो को लगता है कि अमेरिकी सरकार उसके देश पर हमला करना चाहती है। मादुरो ने अमेरिका पर वेनेजुएला में शसन परिवर्तन का प्रयास करने का आरोप लगाया है और अब उसने कोलंबिया के साथ पश्चिमी सीमा पर 15,000 सैनिक तैनात कर दिए हैं। अमेरिका ने कोलंबिया के पास क्या-क्या उतारा? इस तनातनी के बीच अमेरिकी नौसेना ने गाइडेड मिसाइल क्रूजर यूएसएस लेकएरी, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली तेज़-हमलावर पनडुब्बी यूएसएस न्यूपोर्ट न्यूज़, आर्ले बर्क श्रेणी के विध्वंसक यूएसएस ग्रेवली, यूएसएस जेसन डनहम और यूएसएस सैम्पसन, तटीय लड़ाकू जहाज यूएसएस मिनियापोलिस-सेंट पॉल, समेत हमलावर जहाज यूएसएस वोजिमा, यूएसएस सैन एंटोनियो और यूएसएस फोर्ट लॉडरडेल कैरेबियन सागर में तैनात कर दिए हैं। इस बेडे में लगभग 4,500 अमेरिकी सैन्य कर्मी हैं, जिनमें 2,000 से ज़्यादा नेवी के जवान हैं। अमेरिका के मुताबिक, ये सभी कर्मी ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के प्रयास में वेनेजुएला के निकटवर्ती जलक्षेत्र में तैनात किए गए हैं। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सप्ताह स्थितियां और बिगड़ सकती हैं, जब अमेरिका के तीन उभयचर हमलावर जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।  

ट्रंप का बदलता रुख: पाकिस्तान को पुचकारा, भारत से टकराव की नई चाल?

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में बिजनेस की खातिर भारत के साथ संबंधों की बली चढ़ा दी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने सोमवार को ऐसा दावा किया है। हालांकि, मौजूदा हालात इन दावों को मजबूती भी दे रहे हैं, क्योंकि ट्रंप लगातार पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जबकि, अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने पाकिस्तान पर झूठ और धोखे के आरोप लगाए थे। पाकिस्तान के बारे में क्या सोचते थे ट्रंप साल 2018 में ट्रंप ने कहा था, 'अमेरिका ने बेवकूफों की तरह पाकिस्तान को बीते 15 सालों में 33 बिलियन डॉलर से ज्यादा की सहायता दे दी, लेकिन उन लोगों ने हमें झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया। हमारे नेताओं को बेवकूफ समझा। जिन आतंकवादियों की हम अफगानिस्तान में तलाश कर रहे थे, उन्हें पाकिस्तान में पनाह दी गई।' अब बदल गए विचार जून में पहली बार पाकिस्तानी सेना के प्रमुख को अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्योता दिया। इतना ही नहीं ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। साथ ही कहा कि दोनों ने ईरान मुद्दे पर चर्चा की, जिसे पाकिस्तान अन्य लोगों से ज्यादा बेहतर ढंग से जानता है। ट्रंप ने तब पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने भारत के साथ युद्ध खत्म करने के लिए मुनीर का धन्यवाद किया था। पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ लाभकारी व्यापारिक रिश्ते बनाने में दिलचस्पी दिखाई है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल माइकल कुरिया ने पाकिस्तान को बड़ा साझेदार करार दिया था। कुरिया ने साल 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद शरीफुल्लाह को पकड़ने और प्रत्यर्पित करने की पेशकश के लिए मुनीर की तारीफ की थी। पाकिस्तान में कौन से बिजनेस जुलाई में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेगा।' उन्होंने कहा, 'हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी। कौन जानता है, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगे!' पाकिस्तान लंबे समय से अपने अपतटीय क्षेत्र पर बड़े तेल भंडार होने का दावा करता रहा है, लेकिन इन भंडारों का दोहन करने में कोई प्रगति नहीं हुई है। वह इन भंडारों का दोहन करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। देश फिलहाल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पश्चिम एशिया से तेल आयात करता है। क्रिप्टो फैक्टर अप्रैल में पाकिस्तान ने वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल कंपनी के साथ ब्लॉकचेन तकनीक से जुड़ी शुरुआती डील की थी। खास बात है कि इस कंपनी में 60 फीसदी हिस्सेदारी ट्रंप परिवार की है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा कि अमेरिकी अधिकारियों की नजर पाकिस्तान के दुर्लभ खनिजों पर है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस के लिए बेहद अहम हैं। चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के लिए इस्लामाबाद बेहतर विकल्प हो सकता है। अप्रैल में पाकिस्तान मिनरल इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हुए थे। सुलिवन क्या बोले सुलिवन ने कहा, पर अब ट्रंप के परिवार के साथ व्यापार करने की पाकिस्तान की इच्छा के लिए ट्रंप ने भारत के साथ अपने संबंधों को नजरअंदाज कर दिया है। यह बहुत ही बड़ा रणनीतिक झटका है, क्योंकि भारत और अमेरिका के रिश्ते हमारे हित में हैं।' उन्होंने कहा, 'सोचिए कि जर्मनी, जापान या कनाडा ये सब होते हुए देख रहे हैं। और वे सोचेंगे कि ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'अगर हमारे सहयोगी इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वे किसी भी तरह से हमारे ऊपर निर्भर नहीं हो सकते, तो यह अमेरिकी लोगों के हित में नहीं है।' उन्होंने कहा, 'भारत के साथ जो हो रहा है, उसका हमारे दुनियाभर के संबंधों और रिश्तों पर सीधा असर पड़ेगा।'  

क्या है शी जिनपिंग का GGI फॉर्मूला, जिस पर भारत-रूस ने हामी भरी और अमेरिका चिंतित

 तियानजिन  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग को संबोधित करते हुए ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव (GGI) का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुपक्षीय व्यवस्था होनी चाहिए और किसी एक देश को ही सर्वशक्तिमान मानना गलत है। शी जिनपिंग ने एससीओ नेताओं को संबोधित करते हुए कहा यह बात कही, जिस पर रूस ने तत्काल सहमति जताई है। इसके अलावा भारत भी इस पर सहमत है क्योंकि लंबे समय से पीएम नरेंद्र मोदी भी यह कहते रहे हैं कि वैश्विक संबंध समानता के आधार पर तय होने चाहिए। शी जिनपिंग का यह फॉर्मूला सीधे तौर पर अमेरिका के लिए खुला चैलेंज है, जो इन दिनों तमाम देशों पर टैरिफ लगा रहा है। अमेरिका ने सबसे बड़ा टैरिफ तो भारत पर ही लगाया है। ऐसे में शी जिनपिंग का बयान अहम है। शी ने कहा, 'मैं आप लोगों के समक्ष Global Governance Initiative का प्रस्ताव रखना चाहता हूं। मैं सभी देशों के साथ काम करने के लिए तत्पर हूं। यह संबंध समानता के आधार पर होनी चाहिए और मानव सभ्यता के साझा भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग की भावना पर आधारित हो।' उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए यह जरूरी है। शी जिनपिंग ने कहा कि यह विजन वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। शी जिनपिंग ने कहा, 'सबसे पहले हमें समानता के आधार पर बात करनी होगी। हमें यह मानना होगा कि क्षेत्रफल, क्षमता, संपदा से परे सभी देशों को एक समान माना जाए। सभी को ग्लोबल गवर्नेंस में निर्णय लेने का मौका मिले तो वहीं लाभार्थी के तौर पर भी सब बराबर हों। हमें वैश्विक संबंधों में अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रोत्साहित करना होगा। इसके अलावा विकासशील देशों को भी शामिल करना होगा।' उन्होंने कहा कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों से बंधे हुए हैं, लेकिन इनका सही ढंग से और यूएन चार्टर के अनुसार पालन होना चाहिए। भारत पर अमेरिका के मोटे टैरिफ के बीच शी का प्रस्ताव शी जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को सभी पर एक समान तरीके से लागू करना चाहिए। इसमें कोई दोहरा मानदंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कुछ देश अपने ही ढंग से नियमों को चलाते हैं और उन्हें दूसरे देशों पर थोपने की कोशिश करते हैं। उन्होंने तीसरी और सबसे अहम बात करते हुए कहा कि हम सभी लोगों को बहुपक्षीय व्यवस्था की बात करनी चाहिए। हमें साथ मिलकर वैश्विक व्यवस्था की बात करनी होगी। शी जिनपिंग की यह थ्योरी भारत समेत कई देशों को सहमत करने वाली है, लेकिन अमेरिका को इससे निश्चित तौर पर चिंता होगी, जो चाहता है कि उसके टैरिफ के आगे सभी देश मनमाने समझौते करने को बाध्य हो जाएं। शी जिनपिंग के प्रस्ताप पर पुतिन बोले- हम तो राजी हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से तो शी जिनपिंग के इस प्रस्ताव पर जवाब भी आ गया है। उन्होंने कहा कि हम शी जिनपिंग की इस बात से सहमत हैं कि एक समानता आधारित व्यवस्था होनी चाहिए। यह बात ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब कुछ देश अपनी ही चीजें थोपने में जुटे हैं। चीन के इस प्रस्ताव का रूस समर्थन करता है। हम खुलकर साथ हैं। इस तरह भारत, चीन और रूस ने खुलकर अमेरिका का नाम तक नहीं लिया, लेकिन पूरी बात उसे लेकर ही कही गई।  

बड़ा झटका! शरजील इमाम-उमर खालिद और अन्य आरोपी जेल में ही रहेंगे

नई दिल्ली फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे के 10 आरोपियों को मंगलवार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा। दंगों की कथित साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में अदालत ने शरजील इमाम, उमर खालिद जैसे आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। शरजील इमाम और उमर खालिद के अलावा मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की याचिकाओं को रद्द किया गया है और फिलहाल इन्हें जेल में ही रहना होगा। एक अन्य बेंच ने आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने आदेश पारित किया। वहीं, जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जमानत के खिलाफ क्या थीं दलीलें अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए दलील थी कि यह सिर्फ और सिर्फ दंगों का मामला नहीं है बल्कि एक ऐसा मामला है जहां दंगों की साजिश पहले से ही एक भयावह मकसद और सोचे-समझे षडयंत्र के साथ बनाई गई थी। अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह वैश्विक स्तर पर भारत को बदनाम करने की एक साजिश थी और केवल लंबी कैद जमानत का आधार नहीं हो सकती। उन्होंने दलील दी थी, 'अगर आप अपने देश के खिलाफ कुछ भी करते हैं, तो बेहतर होगा कि आप बरी होने तक जेल में ही रहें।' दंगों में हुई थी 53 लोगों की मौत उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 के दंगों के कथित ‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में यूएपीए और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। लंबे समय से लंबित थी याचिका शरजील इमाम, खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं 2022 से उच्च न्यायालय में लंबित थी और समय-समय पर विभिन्न पीठों द्वारा इन पर सुनवाई की गई है।  

PM मोदी ने दिया करारा जवाब, बोले- मां राजनीति में नहीं थीं, फिर गाली क्यों?

नई दिल्ली बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के एक मंच से पीएम नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई थी। अब इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि यह देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। उन्होंने कहा, मां ही तो हमारा संसार होती है। मां ही हमारा स्वाभिमान होती है। इस समृद्ध परंपरा वाले बिहार में कुछ दिनों पहले जो हुआ, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के मंच से मेरी मां को गालियां दी गईं। ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है बल्कि ये देश की मां-बहन-बेटी का अपमान है। इसके आगे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मुझे पता है… आप सबको भी, बिहार की हर माँ को ये देख-सुनकर कितना बुरा लगा है! मैं जानता हूं, इसकी जितनी पीड़ा मेरे दिल में है, उतनी ही तकलीफ मेरे बिहार के लोगों को भी है।’ पीएम मोदी ने कहा कि मेरी मां का तो राजनीति से कोई लेना-देना भी नहीं रहा है, फिर उन्हें गालियां क्यों दी गईं। पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इतनी सारी माताओं और बहनों के आगे मैं अपना दुख साझा कर रहा हूं ताकि यह पीड़ा आप माताओं और बहनों के आशीर्वाद से झेल पाऊं। पीएम मोदी ने कहा, ‘माताओं-बहनों आज से 20 दिन बाद नवरात्रि शुरू हो रही है। उसके 50 दिन बाद छठी मैया की पूजा होगी। छठ का पर्व मनाया जाएगा। मैं बिहार की जनता के सामने मां को गाली देने वालों से कहना चाहता हूं कि मोदी तो तुम्हें एक बार माफ कर भी देगा, लेकिन भारत की धरती ने मां का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं किया है। इसलिए आरजेडी और कांग्रेस को सात बहिनी से और छठी मैया से माफी मांगनी चाहिए।’ आरजेडी और कांग्रेस के नेता जहां भी जाएं, जिस गली में जाएं। उन्हें एक ही आवाज सुनाई देनी चाहिए कि मां को गाली नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे। इज्जत पर वार नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे। गाली देने वालों की सोच है- महिलाएं कमजोर होती हैं पीएम मोदी ने कहा कि देश की नारी का सशक्तीकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके जीवन की मुश्किलें कम करने के लिए एनडीए सरकार लगातार काम कर रही है। मैं आपको वादा करता हूं कि बिना थके और बिना रुके मैं काम करता रहूंगा। पीएम मोदी ने कहा कि माताओं को गाली देने वाले लोगों का यह मानसिकता रही है कि महिलाएं कमजोर होती हैं।  

फैमिली बिजनेस के लिए ट्रंप ने भारत से दोस्ती की बलि दी: पूर्व NSA का बड़ा दावा

नई दिल्ली भारत के साथ टैरिफ वॉर छेड़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही मुल्क में घिर रहे हैं। अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन का कहना है कि ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ डील के कारण भारत से संबंधों को कुर्बान कर दिया। खास बात है कि ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है। जबकि, पाकिस्तान को राहत दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुलिवन ने कहा, 'दशकों से अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने के लिए काम किया है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जो ऐसा देश है कि जिसके साथ तकनीक, हुनर, अर्थव्यवस्था और चीन के बदलते रुख का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस मोर्चे पर पहले से ज्यादा प्रगति हुई थी। भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए किया है काम सुलिवन ने एक पॉडकास्ट में कहा, "दशकों से द्विपक्षीय आधार पर अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ अपने संबंध बनाने के लिए काम किया है। भारत एक ऐसा देश जिसके साथ हमें तकनीक, प्रतिभा, अर्थशास्त्र और कई अन्य मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए और चीन से इस रणनीतिक खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। और हम इस मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं।" ट्रंप ने परिवारिक बिजनेस के लिए भारत को किया दरकिनार उन्होंने कहा, "अब मुझे लगता है कि पाकिस्तान के ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण, ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम है क्योंकि एक मजबूत अमेरिका-भारत संबंध हमारे हितों की पूर्ति करता है। लेकिन दुनिया के हर दूसरे देश की कल्पना कीजिए, जर्मनी, जापान, कनाडा, आप उसे देखते हैं और कहते हैं कि कल हम भी ऐसा कर सकते हैं।" अमेरिका पर दोस्तों को भी भरोसा नहीं सुलिवन ने कहा कि भारत के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके इस विचार को और पुष्ट करता है कि आपको अमेरिका के खिलाफ बचाव करना होगा। उन्होंने कहा, "दुनिया भर के हमारे सभी मित्र और देश यह तय कर चुके हैं कि वे किसी भी रूप में अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते। यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है।" भारत के साथ जो हो रहा, उसका प्रत्यक्ष प्रभाव सुलिवन ने कहा, "हमारा वचन ही हमारा बंधन होना चाहिए। हमें अपनी बात पर खरा उतरना चाहिए। हमारे मित्रों को हम पर भरोसा करना चाहिए और यही हमारी हमेशा से ताकत रही है। और भारत के साथ अभी जो हो रहा है, उसका न केवल बहुत बड़ा प्रत्यक्ष प्रभाव है, बल्कि दुनिया भर में हमारे सभी रिश्तों और साझेदारियों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है।" भारत और पाकिस्तान पर टैरिफ में अंतर ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और रूसी तेल खरीद के चलते जुर्माना भी ठोका था। बाद में उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया, जिसके बाद कुल टैरिफ 50 प्रतिशत पर पहुंच गया। वह लगातार आरोप लगाते रहे कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। जबकि, भारत ने भी साफ किया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूस के साथ व्यापार करते हैं। खास बात है कि ट्रंप सरकार ने पाकिस्तान पर पहले 29 फीसदी जवाबी टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया। पारिवारिक लोभ ने इंडिया-अमेरिका के संबंधों खत्म कर दिया उन्होंने आगे कहा, "अब मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के कारण ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार कर दिया है. यह एक बड़ा रणनीतिक झटका है क्योंकि एक मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी हमारे हितों की रक्षा करता है." बता दें कि इस्लामाबाद ने न केवल ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया, बल्कि उनके परिवार और करीबी लोगों को अपनी नई पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल में भी शामिल किया है. पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद ही ट्रंप के परिवार द्वारा समर्थित वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. सुलिवन सहित कई विशेषज्ञों ने ट्रंप परिवार के पाकिस्तानी बिजनेस में शामिल होने को उनके पाकिस्तान झुकाव से जोड़कर देखा है. भारत के साथ ट्रंप के संबंधों को बिगाड़ने पर सुलिवन ने कहा, "अगर हमारे सहयोगी यह निष्कर्ष निकालते हैं कि वे किसी भी तरह, किसी भी रूप में हम पर भरोसा नहीं कर सकते, तो यह अमेरिकी लोगों के दीर्घकालिक हित में नहीं है." सुलिवन ने कहा, "भारत के साथ जो हो रहा है, उसका दुनिया भर में हमारे सभी संबंधों और साझेदारियों पर सीधा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा." ट्रंप के पाकिस्तान प्रेम की वजह समझिए बता दें कि पाकिस्तान ने 26 अप्रैल को वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल (WLF ) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल एक ऐसी कंपनी है जिसमें ट्रंप के परिवार, जिसमें उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, और दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं, की 60% हिस्सेदारी है. WLF के होमपेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति के एक भव्य चित्र के साथ "डोनाल्ड जे ट्रंप से प्रेरित" शब्द को प्रमुखता से दिखाया गया है.  वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल एक विकेन्द्रीकृत वित्तीय परियोजना और एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है जिसकी स्थापना 2024 में हुई थी. यह सौदा पाकिस्तान सरकार द्वारा क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन को कानूनी बनाने के संकेत के तुरंत बाद हुआ है. इस डील के बाद इस कंपनी के लिए पाकिस्तान में पैसे कमाने के रास्ते खुल जाएंगे. विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों का प्रयास ध्वस्त अमेरिका के ही एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने एक बार फिर से ट्रंप की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप की नीतियों ने भारत को एक बार फिर से रूस के पाले में जाने को मजबूर किया है. उन्होंने कहा है कि पश्चिम ने दशकों तक भारत को सोवियत संघ/रूस के साथ शीत युद्ध के लगाव से दूर करने की कोशिश की है और चीन से पैदा होने वाले खतरे के प्रति भारत को आगाह किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विनाशकारी टैरिफ नीति से दशकों के प्रयासों को ध्वस्त कर … Read more