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ममता बनर्जी ने कहा, PM को मेरी कुर्सी का सम्मान वैसा ही रखना चाहिए

कोलकाता  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ताजा हमला बोलते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उनसे (मोदी से) कभी यह उम्मीद नहीं थी कि वे उनकी कुर्सी का अनादर करने के साथ-साथ राज्य के लोगों को ‘चोर’ बताकर पूरे प्रांत का अपमान करेंगे। उन्होंने यह बयान पीएम मोदी की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में दिया। पूर्व बर्धमान जिले के बर्धमान शहर में लोगों के बीच सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ वितरित करने के लिए आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बनर्जी ने मोदी की टिप्पणी को पश्चिम बंगाल के लोगों का ‘अपमान’ बताया और केंद्रीय धन के आवंटन पर रोक लगाने के लिए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य के खजाने पर ‘भारी बोझ’ पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री को मेरी कुर्सी का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना मैं उनकी कुर्सी का करती हूं। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि वे पश्चिम बंगाल के लोगों को ‘चोर' कहेंगे।' बनर्जी ने दावा किया, 'सच तो यह है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार की तथाकथित ‘डबल इंजन’ वाली भाजपा सरकारों के कामकाज पर आंखें मूंद ली हैं, जहां भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।' बनर्जी ने आरोप लगाया कि हर बार जब चुनाव आता है तो मोदी प्रवासी पक्षी की तरह पश्चिम बंगाल आते हैं। बनर्जी ने दावा किया कि राज्य प्रशासन ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रीय धन के उपयोग के बारे में केंद्र सरकार के सभी प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दे दिया है। बनर्जी ने कहा, 'हमने आपके सभी प्रश्नों के उत्तर दे दिए हैं, फिर भी आप धन का वितरण रोक रहे हैं और पश्चिम बंगाल को ‘चोर’ कह रहे हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल में 186 केंद्रीय टीमें भेजीं और उन्हें कुछ नहीं मिला। एक छात्र सभी प्रश्नों के उत्तर देने के बाद शून्य अंक प्राप्त करना कैसे स्वीकार कर सकता है? हम इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।' कोलकाता में 22 अगस्त को एक जनसभा में मोदी ने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार, अपराध और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के पर्याय हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया था, 'केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा जाने वाला धन लोगों तक नहीं पहुंचता, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उसे खा जाते हैं।'  

यात्रा में हादसा: वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन से 5 लोगों की जान गई

जम्मू-श्रीनगर माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग में बड़ा हादसा हो गया है। खबर है कि भूस्खलन के चलते 5 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश का दौर जारी है। हाल ही में भारी बारिश के चलते यात्रा को अगले आदेश तक रोक दिया गया था। साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी रेड अलर्ट जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्द्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास बचावकार्य जारी है। घटना दोपहर 3 बजे घटी। खास बात है कि यात्रा को सुबह ही रोक दिया गया था, लेकिन पुराने मार्ग पर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक यह जारी थी। हालांकि, बाद में इसपर भी खराब मौसम के चलते अस्थाई रूप से रोक लगा दी गई थी। जम्मू में बीते तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक जाने वाले 12 किलोमीटर के घुमावदार रास्ते के लगभग आधे रास्ते पर यह घटना हुई। गंभीर हैं जम्मू में हालात मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि भारी बारिश के बाद जम्मू के विभिन्न हिस्सों में स्थिति काफी गंभीर है और उन्होंने प्रशासन को हाई अलर्ट बनाए रखने का निर्देश दिया। जम्मू में भारी बारिश के कारण तीन लोगों की मौत हो गई तथा दो दर्जन से अधिक मकान और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। जम्मू में लगभग सभी जलाशय खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिससे शहर और अन्य स्थानों पर कई निचले इलाके और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात स्थगित कर दिया गया है, जबकि दर्जनों पहाड़ी सड़कें भूस्खलन या अचानक आई बाढ़ के कारण अवरुद्ध हो गई हैं या क्षतिग्रस्त हो गई हैं।  

टैरिफ मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कॉल किया, PM मोदी ने फोन रिसीव नहीं किया

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के रिश्ते क्या बीते कुछ दशकों में सबसे निचले स्तर पर हैं? ऐसे कयास तेज हैं क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ट्रेड टैरिफ का भारत ने भी सख्ती से जवाब दिया है। खबर है कि इस मामले पर बात करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को 4 बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। माना जा रहा है कि भारत सरकार अब इस मामले में अमेरिका के दबाव में आने की बजाय सख्ती से ही जवाब देने की नीति पर विचार कर रही है। इसी पॉलिसी के तहत भारत ने चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया गठजोड़ खड़ा करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। शायद इसी नीति के तहत अब मोदी सरकार नहीं चाहती कि डोनाल्ड ट्रंप को ज्यादा महत्व दिया जाए। जर्मन अखबार Frankfurter Allgemeine Zeitung ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के रुख से परेशान भारत सरकार अब उनसे कोई आसान डील नहीं करना चाहती। अखबार के लिए हेंड्रिक अंकेनब्रांड, विनांड वॉन पीटर्सडॉर्फ, गुस्ताव थाइले ने लिखे अपने आर्टिकल में कहा कि यह भारत सरकार की बदली हुई नीति का प्रतीक है कि उसने उस चीन के साथ भी रिश्ते बेहतर करने शुरू किए हैं, जिससे 2020 में लद्दाख में सैन्य झड़प हुई थी और 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। अखबार में लिखा गया है, 'अब दोनों देशों के बीच संबंधों को परिभाषित करना मुश्किल है। फरवरी में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी को वाइट हाउस बुलाया था और उन्हें 'महान नेता' कहकर उनकी सराहना की थी। लेकिन जब फोटो खिंचवाने का वक्त आया तो मोदी मुस्कुराए नहीं। ट्रंप ने इस दौरान पीएम मोदी के साथ अपने रिश्तों की भी बात की, लेकिन मोदी ने इसे सिर्फ रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण यात्रा करार दिया था। यह दर्शाता है कि भारतीय नेतृत्व अमेरिकी इरादों को लेकर सतर्क रहता है।' यही नहीं अखबार का कहना है कि ट्रंप ने अमेरिका के लिए कृषि बाजारों को खोलने की मांग की, लेकिन मोदी ने इनकार कर दिया। इसके बजाय भारत ने रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदा। यहां तक कि भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों को भी नजरअंदाज कर दिया। अखबार लिखता है, ‘अमेरिका का मानना है कि चीन को अलग-थलग करने के लिए भारत को मजबूती से अपनी ओर खड़ा करना चाहिए। लेकिन भारत इससे सहमत नहीं है। भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ दोस्ती पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। भारत का मानना है कि उसे चीन के साथ संबंध बिगाड़कर अमेरिका का मोहरा नहीं बनना चाहिए।’ गौरतलब है कि अमेरिका में होने वाले कुल निर्यात भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी के करीब है। खासकर कपड़े, गहने, दवाइयाँ और ऑटो पार्ट्स। लेकिन सीमा शुल्क की वजह से अब यह व्यापार घट सकता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत के बजाय सिर्फ़ 5.5 प्रतिशत रह जाएगी। कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के अप्रत्याशित रुख को भारत सरकार ने अच्छे ढंग से नहीं लिया है। जून में ही एक सर्वे के अनुसार जर्मनी में 18% लोग ट्रंप पर भरोसा करते हैं, जबकि भारत में ट्रंप को सबसे कम भरोसेमंद राष्ट्रपति माना जाता है।  

भारी बारिश ने खैबर पख्तूनख्वा में मचाई तबाही, पाकिस्तान में हालात गंभीर

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में मानसूनी बारिश कहर बरपा रही है। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में पिछले तीन महीनों से भीषण बारिश का दौर जारी है और भारी बारिश व बाढ़ से अब तक 406 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इससे 245 लोग घायल हुए हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) के अनुसार, मृतकों में 167 महिलाएं और 108 बच्चे शामिल हैं। वहीं, घायलों में 121 पुरुष, 92 महिलाएं और 32 बच्चे हैं। ब्यूनर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 237 लोगों की मौत हुई और 128 लोग घायल हुए। इसके अलावा, विभिन्न जिलों में भी भारी तबाही दर्ज की गई है, स्वाबी में 42, शांगला में 36, मानसेहरा में 25, बाजौर में 22 और स्वात में 20 लोगों की मौत हुई है। पीडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश और बाढ़ से केपी में 2,810 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें 2,136 आंशिक और 674 पूरी तरह नष्ट हुए। केवल ब्यूनर जिले में ही 1,469 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, 324 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं, जिनमें 18 स्कूल पूरी तरह और 306 आंशिक रूप से नष्ट हुए। साथ ही, बाढ़ और बारिश से 5,916 पशुओं की मौत भी हो गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पूरे पाकिस्तान में 26 जून से अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में 200 बच्चे, 117 महिलाएं और 471 पुरुष शामिल हैं। प्रांतवार आंकड़ों में, पंजाब में 165, खैबर पख्तूनख्वा में सर्वाधिक 469, सिंध में 51, बलूचिस्तान में 24, पाकिस्तान-आकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में 45, पाकिस्तान-आकृत कश्मीर में 23 और इस्लामाबाद में आठ लोगों की मौत हुई है।

भारत-जापान के बीच खास दोस्ताना रिश्ता, पीएम मोदी ने बताया ‘मेड फॉर ईच अदर’

अहमदाबाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारत और जापान के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 'मेड फॉर ईच अदर' वाले हैं। भारत-जापान के बीच 'पीपल टू पीपल' कनेक्ट बढ़ा है। स्किल और ह्यूमन रिसोर्स से जुड़ी एक-दूसरे की जरूरतों को भी हम पूरा कर पा रहे हैं। आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज के प्रयास 2047 तक एक विकसित भारत की नींव मजबूत करेंगे। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त करते हुए समापन किया कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वह अगले हफ्ते जापान जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान के बीच संबंध सिर्फ कूटनीतिक संबंधों से कहीं आगे तक फैले हैं, यह संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित है। दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अपनी प्रगति देखते हैं। मारुति सुजुकी के साथ शुरू हुआ सफर अब बुलेट ट्रेन की गति तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की प्रमुख पहल गुजरात में शुरू हुई थी। अतीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20 साल पहले जब वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन शुरू हुआ था, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उद्योग से जुड़े नियम और कानून जापानी भाषा में छपवाए गए, ताकि उन्हें समझना आसान हो। उन्होंने गोल्फ के प्रति जापानियों के लगाव की सराहना की और बताया कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किए गए हैं। पीएम मोदी ने आगे बताया कि भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के निरंतर प्रयास भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।" उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। ओसामु सुजुकी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें मारुति सुजुकी इंडिया के लिए ओसामु सुजुकी के विजन के व्यापक विस्तार को देखकर प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि सुजुकी जापान भारत में निर्माण कर रही है और यहां उत्पादित वाहनों का निर्यात जापान को किया जा रहा है। यह न सिर्फ भारत-जापान संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के भारत में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां प्रभावी रूप से 'मेक इन इंडिया' की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं। यह उल्लेख करते हुए कि मारुति सुजुकी लगातार 4 वर्षों से भारत की सबसे बड़ी कार निर्यातक रही है, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी उसी पैमाने पर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर गर्व से 'मेड इन इंडिया' का लेबल लगा होगा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, "भारत के पास डेमोक्रेसी की मजबूती और डेमोग्राफी का लाभ है। भारत में कुशल कार्यबल का एक विशाल भंडार भी है, जो प्रत्येक भागीदार के लिए जीत की स्थिति पैदा करता है।" भारत की सफलता की कहानी के बीज 12-13 साल पहले बोए गए थे। यह याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2012 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हंसलपुर में मारुति सुजुकी को जमीन आवंटित की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय भी, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का विजन था। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती प्रयास अब देश के वर्तमान संकल्पों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के अभियान को सभी मिलकर आगे बढ़ाएं और वोकल फॉर लोकल बनें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी चीजें ही जीवन मंत्र बननी चाहिए। गर्व से स्वदेशी चीजों की तरफ चल पड़ो। उन्होंने कहा, "मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत साधारण है। पैसा किसका लगता है, उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। चाहे वह डॉलर हो, पाउंड हो या करेंसी काली हो या गोरी, इससे लेना-देना नहीं है, लेकिन जो प्रोडक्शन है, उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा। जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी। इस भाव के साथ मेरे साथ चलें और 2047 में ऐसा हिंदुस्तान बनाएं कि आने वाली पीढ़ियां आपके त्याग का गर्व करेंगी। आपके योगदान का गर्व करेंगी।" प्रधानमंत्री ने सबसे आखिरी में कहा, "आत्मनिर्भर भारत के मंत्र और स्वदेशी के मार्ग के लिए आज देशवासियों को न्योता देता हूं कि आइए, सभी चल पड़ें और 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे। दुनिया की भलाई में भारत का योगदान बढ़ाते रहेंगे।"

फिर आफत ने दिखाई सूरत, जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से घरों को खतरा, राहत कार्य जोरों पर

जम्मू-कश्मीर  जम्मू कश्मीर में एक बार फिर बादल फटने की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। मिली जानकारी के अनुसार किश्तवाड़ के बाद अब डोडा में हुई इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही के संकेत दिए हैं। इस दौरान भद्रवाह में ऐतिहासिक शिव मंदिर और पांडु गुफा मंदिर भी बाढ़ की चपेट में हैं। मंदिर के पुजारियों और अन्य सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। प्रशासन ने सभी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।   डोडा जिले में अचानक आई बाढ़ और तेज बारिश के कारण कई परिवार प्रभावित हुए हैं। नेशनल हाईवे बंद हो गया है और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। भारी बारिश का कहर जारी है। स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई हैं। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं। वहीं प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि, 2 की मौत कहारा में और 1 की मौत thathri में हुई है। वहीं कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।  इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 15 रिहायशी मकान ढह चुके हैं और 3 पैदल पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव कार्य जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर जारी है। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।  कटरा-सराज रेलवे स्टेशन के बीच सुरंग संख्या 16 पर जमीन खिसकने से रेलवे सेवाओं को फिलहाल रोक दिया गया है। पटरी पर मलबा गिरने के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। रेलवे टीमें पटरी को साफ करने और स्थिति को सामान्य करने में लगी हुई हैं। यात्रियों को अपनी ट्रेनों की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। 

भारत की ऊर्जा नीति: रूस से तेल खरीद जारी, सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

वाशिंगटन  अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में बढ़ोतरी के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा के अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने साफ कहा है कि भारत तेल वहीं से खरीदेगा जहां से "सर्वश्रेष्ठ सौदा" मिलेगा, चाहे वह रूस हो या कोई और देश। रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में राजदूत विनय कुमार ने अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम "निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों को कमजोर करता है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह फैसला "अनुचित, अविवेकपूर्ण और अनुचित" है। राजदूत की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के कुछ ही हफ्तों बाद आई है। "भारत की प्राथमिकता है ऊर्जा सुरक्षा" कुमार ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का केंद्रबिंदु देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि भारत रूस सहित कई देशों से सहयोग के जरिए वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, "भारत सरकार ऐसे सभी कदम उठाएगी जो देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करें। व्यापार एक वाणिज्यिक प्रक्रिया है और भारतीय कंपनियां वहीं से तेल खरीदेंगी जहां से उन्हें सबसे लाभकारी सौदा मिलेगा।" रूस से बढ़ा तेल आयात, अमेरिका-यूरोप भी कर रहे व्यापार भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने 2022 के बाद से रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, वह भी रियायती दरों पर। कुमार ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देश भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, इसलिए भारत की नीतियों पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा व्यापार पूरी तरह बाजार आधारित है और उद्देश्य भारत के नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"   जयशंकर ने भी जताई नाराजगी विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इससे पहले अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिका के फैसले को "अनुचित और पक्षपातपूर्ण" बताया था और कहा था कि भारत किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं करेगा। रुपया-रूबल में व्यापार से बढ़ा द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार भारत और रूस के बीच वित्तीय लेनदेन को लेकर भी बड़ी बात सामने आई है। कुमार ने कहा कि दोनों देशों ने रुपया-रूबल में व्यापार के लिए एक स्थिर प्रणाली स्थापित की है। इससे अब तेल भुगतान में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि "राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार की यह व्यवस्था रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद विकसित की गई है और इसने द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाया है।" हालांकि रूस से भारत का तेल आयात काफी बढ़ा है, लेकिन रूसी बाजार में भारत का निर्यात अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है। सरकार इस असंतुलन को भी दूर करने की दिशा में काम कर रही है।  

2025 में पाकिस्तान में पोलियो का कहर जारी, दो नई बच्चियाँ हुईं शिकार

पेशावर  पाकिस्तान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पोलियो संक्रमण के दो नये मामलों की मंगलवार को पुष्टि की है, जिससे इस वर्ष देश भर में इस घातक बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या 23 हो गई। अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है, जहां पोलियो अब भी महामारी बना हुआ है। पाकिस्तान में पोलियो संक्रमण को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों के बावजूद सुरक्षा संबंधी मुद्दे, टीकाकरण में हिचकिचाहट और गलत सूचना जैसी चुनौतियों ने इसके पूर्ण उन्मूलन की रफ्तार को धीमा कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) ने एक बयान में कहा कि टैंक और उत्तरी वजीरिस्तान जिलों में पोलियो के नये मामले में सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि दो बच्चियों को पोलियो हुआ है, जिनकी उम्र 16 महीने और दो साल है। बयान में कहा गया, ‘‘इसके साथ ही 2025 में पाकिस्तान में पोलियो के कुल मामलों की संख्या 23 हो गई है, जिनमें खैबर पख्तूनख्वा से 15, सिंध से छह और पंजाब तथा गिलगित-बाल्टिस्तान से एक-एक मामला सामने आया है।''   पोलियो एक लाइलाज बीमारी है, जो आजीवन लकवे का कारण बन सकती है। इसका एकमात्र प्रभावी बचाव हर पोलियो अभियान के दौरान पांच साल से कम उम्र के हर बच्चे को बार-बार मुंह से दी जाने वाली पोलियो की खुराक (ओपीवी) की खुराक देने के साथ-साथ सभी नियमित टीकाकरण को समय पर पूरा करना है। पाकिस्तान में 2023 में पोलियो के छह मामले और 2021 में केवल एक मामला सामने आया है। हालांकि, देश में 2024 में पोलियो के मामलों में वृद्धि हुई है, जहां 74 मामले सामने आए थे।   

मौसम ने बदल दी लद्दाख की तस्वीर, पहली बर्फबारी की खूबसूरत झलकियां

लद्दाख एक तरफ जहां भारी बारिश ने तबाही मचा रखी वहीं लद्दाख में मौसम की पहला बर्फबारी देखने को मिली है। हाल ही में मौसम के पूर्वानुमान के बाद अगस्त में लद्दाख में अप्रत्याशित बर्फबारी हुई है। मनमोहक सोरो घाटी में लोग मौसम की पहली बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं, प्रकृति की खूबसूरती बेहतरीन तरीके से निखर रही है।   गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के कई इलाकों में बर्फबारी के साथ-साथ इस क्षेत्र में भारी बारिश होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई थी। जो अब तक सही साबित हुई है। बर्फबारी और बारिश के कारण इस क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।   

अमेरिका ने जारी किया टैरिफ मसौदा, भारतीय कारोबार पर 27 अगस्त से दिखेगा असर

वाशिंगटन  अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले की गई घोषणा के अनुसार भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की योजना का विवरण देते हुए एक मसौदा नोटिस जारी किया है। ये शुल्क 27 अगस्त यानी बुधवार से लागू होंगे। गृह मंत्रालय ने सोमवार को प्रकाशित मसौदा आदेश में कहा कि बढ़ा हुआ शुल्क उन भारतीय उत्पादों पर लागू होगा जिन्हें 27 अगस्त 2025 को ‘ईस्टर्न डेलाइट टाइम' (ईडीटी) के अनुसार रात 12 बजकर एक मिनट या उसके बाद उपभोग के लिए (देश में) लाया गया है या गोदाम से निकाला गया है।'' ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने की सात अगस्त को घोषणा की थी हालांकि उन्होंने समझौते पर बातचीत के लिए 21 दिन का समय दिया था। यह शुल्क जुलाई के अंत में घोषित 25 प्रतिशत शुल्क के अलावा लगाया जाएगा। जुलाई में घोषित किया गया शुल्क सात अगस्त से लागू हुआ था। अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत पर प्रतिबंध लगाए हैं।   अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत पर रूसी तेल की खरीद के बाद उसे दोबारा बाजार में बेचकर ‘‘मुनाफा'' कमाने का आरोप लगाया है। वहीं भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों को ‘‘अनुचित और असंगत'' बताया है। भारत ने कहा है कि हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह वह भी अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।