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भारतीय यात्रियों के लिए खुशखबरी: वीज़ा फ्री देशों की संख्या बढ़कर 59 हुई

नई दिल्ली अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं, तो अब वो हकीकत में बदल सकता हैं। साल 2025 में भारतीय पासपोर्ट की ताकत में और भी बढ़ोतरी हुई है। Henley Passport Index 2025 के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक 59 देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इस साल भारत की रैंकिंग 85वें स्थान से बढ़कर 77वें स्थान पर पहुँच गई है, जो काफी बड़ी छलांग मानी जा रही है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों के लिए अब ज़्यादा देशों में यात्रा करना आसान हो गया है। मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव, मॉरीशस जैसे कई लोकप्रिय देश अब भारतीय नागरिकों को वीज़ा-फ्री एंट्री दे रहे हैं। वहीं, श्रीलंका, कतर और म्यांमार जैसे देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। यानी अब आपको लंबी वीज़ा प्रक्रिया से गुज़रने की ज़रूरत नहीं है। वीज़ा-फ्री और वीज़ा-ऑन-अराइवल: क्या है अंतर? विदेश यात्रा की योजना बनाने से पहले इन दोनों में अंतर समझना ज़रूरी है: वीज़ा-फ्री देश: इन देशों में घूमने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों को पहले से वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होती। आप सीधे फ्लाइट बुक करके वहाँ जा सकते हैं। हालाँकि, हर देश के अपने नियम होते हैं जैसे कितने दिनों तक रुक सकते हैं या किन उद्देश्यों के लिए जा सकते हैं। वीज़ा-ऑन-अराइवल : इसका मतलब है कि आप जिस देश में जा रहे हैं, वहाँ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वीज़ा ले सकते हैं। इसके लिए वहाँ के वीज़ा काउंटर पर एक फॉर्म भरना, ज़रूरी दस्तावेज़ देना और निर्धारित फीस चुकानी होती है। भारतीय अब इन 59 देशों में कर सकते हैं यात्रा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा देने वाले देशों की पूरी सूची इस प्रकार है: वीज़ा-फ्री देश (कुल 30): अंगोला, बारबाडोस, भूटान, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, कुक द्वीप समूह, डोमिनिका, फिजी, ग्रेनाडा, हैती, ईरान, जमैका, कज़ाकिस्तान, केन्या, किरिबाती, मकाओ, मेडागास्कर, मलेशिया, मॉरीशस, माइक्रोनेशिया, मोंटसेराट, नेपाल, नियू, फिलीपींस, रवांडा, सेनेगल, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, वानुअतु वीज़ा-ऑन-अराइवल देश (कुल 27): 31. बोलीविया 32. बुरुंडी 33. कंबोडिया 34. केप वर्डे द्वीप समूह 35. कोमरो द्वीप समूह 36. जिबूती 37. इथियोपिया 38. गिनी-बिसाऊ 39. इंडोनेशिया 40. जॉर्डन 41. लाओस 42. मालदीव 43. मार्शल द्वीप समूह 44. मंगोलिया 45. मोज़ाम्बिक 46. म्यांमार 47. नामीबिया 48. पलाऊ द्वीप समूह 49. कतर 50. समोआ 51. सिएरा लियोन 52. सोमालिया 53. श्रीलंका 54. सेंट लूसिया 55. तंजानिया 56. तिमोर-लेस्ते 57. तुवालु इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉरिटी वाले देश (2): 58. ज़िम्बाब्वे 59. सेशेल्स (ETA एक डिजिटल परमिट होता है जो यात्रा से पहले ऑनलाइन ही मिल जाता है।) यात्रा से पहले ज़रूरी जानकारी हर देश के अपने नियम होते हैं, जैसे रुकने की समय सीमा, ज़रूरी दस्तावेज़ या एंट्री की शर्तें। इसलिए, यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट या दूतावास से पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

Reels का जादू या जाल? सेहत पर पड़ रहा है खतरनाक असर

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर रील्स देखना आजकल युवाओं के लिए दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। खासकर रात में सोने से पहले रील्स या शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना एक सामान्य आदत बन गई है, लेकिन ये आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात को लगातार रील्स देखने से डिजिटल एंजायटी यानी इंटरनेट से जुड़ी मानसिक बेचैनी तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में 18 से 30 वर्ष के युवाओं में मानसिक परामर्श लेने वालों की संख्या में 40% तक बढ़ोतरी हुई है। इनमें ज़्यादातर छात्र, नौकरीपेशा लोग या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं, जो दिनभर की थकान मिटाने के लिए रात को मोबाइल पर रील्स देखते हैं। लेकिन यह आदत उन्हें राहत देने की बजाय और ज्यादा बेचैन कर रही है। नींद का पैटर्न हो रहा गड़बड़ मनोचिकित्सक डॉ. अतर सिंह के अनुसार, रील्स की लत धीरे-धीरे 'डूम स्क्रॉलिंग' में बदल जाती है। व्यक्ति घंटों तक मोबाइल पर स्क्रॉल करता रहता है, लेकिन उसे संतोष नहीं मिलता। इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस होती है। यह आदत धीरे-धीरे डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन का कारण भी बन सकती है। डोपामिन हिट्स से बढ़ रही बेचैनी रील्स की तेजी से बदलती क्लिप्स दिमाग को लगातार डोपामिन हिट्स देती हैं। इससे दिमाग बार-बार उसी खुशी की तलाश करता है। जब ये हिट कम होने लगती है, तो व्यक्ति बेचैन और असहज महसूस करने लगता है, जिसे विशेषज्ञ 'डिजिटल एंजायटी' कहते हैं। बचाव के उपाय मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर का सुझाव है कि सोशल मीडिया के उपयोग पर एक समय-सीमा तय करनी चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल बंद कर देना चाहिए। उसकी जगह किताब पढ़ें, धीमा संगीत सुनें या मेडिटेशन करें। अगर लगातार बेचैनी, नींद न आना या चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: घरेलू हिंसा के मामलों में गिरफ्तारी से पहले 2 माह की मोहलत

नई दिल्ली घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो साल पुराने दिशा-निर्देशों को अपनाते हुए कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत दर्ज मामलों में पुलिस आरोपियों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला अपने ससुराल वालों के खिलाफ 498A के तहत घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराए तो पुलिस वाले उसके पति या उसके रिश्तेदारों को दो महीने तक गिरफ्तार न करे। कोर्ट ने दो महीने की अवधि को शांति अवधि कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश एक महिला IPS अधिकारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने उस महिला अधिकारी को उससे अलग हुए पति और उसके रिश्तेदारों के उत्पीड़न के लिए अखबारों में माफीनामा प्रकाशित कर माफी मांगने का भी आदेश दिया है। दो माह तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2022 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, दो महीने की शांति अवधि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी सहित कोई भी कार्रवाई करने से रोकता है। HC के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज मामलों को पहले संबंधित जिले की परिवार कल्याण समिति (FWC) को निपटारे के लिए भेजा जाना चाहिए, और इस दौरान यानी पहले के दो महीनों तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मंगलवार को इन दिशानिर्देशों को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को क्रिमिनल रिवीजन नंबर 1126/2022 के विवादित फैसले में अनुच्छेद 32 से 38 के तहत 'आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग से बचाव के लिए परिवार कल्याण समितियों के गठन' के संबंध में तैयार किए गए दिशानिर्देश प्रभावी रहेंगे और उपयुक्त अधिकारियों द्वारा लागू किए जाएंगे।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले कर दिया था निरस्त बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी यह दिशानिर्देश 2017 में राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले पर आधारित हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में सोशल एक्शन फॉर मानव अधिकार बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ इसे संशोधित कर दिया था बल्कि इसे निरस्त भी कर दिया था। इस वजह से FWC निष्क्रिय हो गए थे। बहरहाल, कल के फैसले के साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का वे दिशानिर्देश अब लागू हो गए हैं। प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा मामला उन दिशा निर्देशों के मुताबिक, प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के बाद, "शांति अवधि" (जो कि प्राथमिकी या शिकायत दर्ज होने के दो महीने बाद तक है) समाप्त हुए बिना, नामजद अभियुक्तों की कोई गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस "शांति अवधि" के दौरान, मामला तुरंत प्रत्येक जिले में FWC को भेजा जाएगा। दिशा निर्देशों में कहा गया है कि केवल वही मामले FWC को भेजे जाएँगे, जिनमें IPC की धारा 498-A के साथ-साथ, कोई क्षति न पहुँचाने वाली धारा 307 और IPC की अन्य धाराएँ शामिल हैंऔर जिनमें कारावास 10 वर्ष से कम है।

अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां: अल कायदा के 4 आतंकी गिरफ्तार, बड़ा हमला टला

अहमदाबाद गुजरात एटीएस ने एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए अल कायदा इन इंडियन सबकॉंटिनेंट (AQIS) से जुड़े मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में कुल चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. गुजरात एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए चार आतंकियों में दो को गुजरात से, एक दिल्ली से और एक नोएडा (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया है. यह सभी आतंकवादी अल कायदा के AQIS से जुड़े बताए जा रहे हैं. गिरफ्तार आतंकियों की पहचान सैफुल्लाह कुरैशी (पिता: मोहम्मद रफीक), मोहम्मद फर्दीन (पिता: मोहम्मद रईस), और मोहम्मद फैक (पिता: मोहम्मद रिजवान) के रूप में हुई है. बड़ी आतंकी हमले की फिराक में थे गुजरात एटीएस द्वारा पकड़े गए चारों आतंकियों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एटीएस के मुताबिक, सभी आरोपियों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और ये भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. गुजरात एटीएस का कहना है कि इन आतंकियों को कुछ खास और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे. ये चारों आतंकी सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और जांच में यह भी सामने आया है कि इनका संपर्क सीमा पार बैठे आतंकियों से भी था. बड़े आतंकी हमले की फिराक में थे गुजरात एटीएस द्वारा पकड़े गए चारों आतंकियों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एटीएस के मुताबिक, सभी आरोपियों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और ये भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. एटीएस डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि फिलहाल मामले की गहराई से जांच की जा रही है और बहुत जल्द एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी. सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े थे गुजरात एटीएस का कहना है कि इन आतंकियों को कुछ खास और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे. ये चारों आतंकी सोशल मीडिया ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और जांच में यह भी सामने आया है कि इनका संपर्क सीमा पार बैठे आतंकियों से भी था. फंडिंग, ट्रेनिंग और विदेशी संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी ATS इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया. गुजरात एटीएस और केंद्रीय एजेंसियां अब इनके नेटवर्क, फंडिंग, ट्रेनिंग और विदेशी संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

घटती जनसंख्या की चिंता: कई देशों में गिरावट, एक देश की आबादी 10 हजार से भी कम

नई दिल्ली दुनिया की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। हजारों सालों के अंतराल में धरती पर इंसानों की आबादी एक अरब तक पहुंची थी। लेकिन फिर एक अरब से 8 अरब तक पहुंचने में महज 200 साल ही लगे। यही नहीं 1960 से अब तक यानी 65 सालों में दुनिया की आबादी 3 अरब से बढ़कर आठ अरब तक पहुंची है। लेकिन इस जोरदार ग्रोथ के बाद भी कुछ देश ऐसे हैं, जहां इंसानों की संख्या में कमी आ रही है। यही नहीं एक देश तुवालु पर तो अस्तित्व का खतरा ही मंडरा रहा है। पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर के इस द्वीपीय देश की आबादी महज 10 हजार ही है और अब उसमें भी गिरावट का दौर जारी है। वर्ष 2011 में दुनिया की आबादी 7 अरब थी और महज 14 सालों में ही आंकड़ा एक अरब और बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2030 तक विश्व की आबादी 8.6 अरब हो जाएगी। फिर 2050 तक आंकड़ा 9.8 अरब होगा और 2100 में यह 11.2 अरब हो जाएगी। लेकिन यूक्रेन, जापान और ग्रीस जैसे कई देश हैं, जिनकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। यूक्रेन में तो 2002-23 में यानी एक साल के अंदर ही आबादी में 8.10 फीसदी की गिरावट आई। इस कमी की वजह युद्ध में मौतों और बड़ी संख्या में देश से पलायन को माना जा रहा है। इसके अलावा तुवालु की आबादी में 1.80 पर्सेंट की कमी आई है। देश की आबादी ही 10 हजार है, जो अब 9 हजार से कुछ अधिक ही रह गई है। यदि संख्या इसी तरह घटती रही तो वह लुप्त होने की कगार पर होगा। तुवालु ऑस्ट्रेलिया और हवाई के बीच का एक द्वीपीय देश है। यूरोपीय देश ग्रीस की आबादी में भी कमी हो रही है और कुल 1.60 पर्सेंट की गिरावट एक दिन के अंदर ही दर्ज की गई है। वहीं सैन मारिनो की आबादी 1.10 पर्सेंट कम हुई है। कोसोवो लैंडलॉक्ड की आबादी में भी 1 फीसदी गिरावट हुई। रूस के पड़ोसी देश बेलारूस की पॉपुलेशन में 0.60 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई। बोस्निया और अलबानिया की आबादी भी इतनी ही कम हुई है। अब बात करते हैं, जापान की। यहां भी आबादी में आधे फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अन्य देशों में पलायन और कम जन्मदर के चलते आबादी घट रही है, लेकिन जापान में इसका एकमात्र कारण जन्मदर में कमी है। हालात ऐसे हैं कि जापान में तमाम इंसेटिव्स के ऐलान के बाद भी लोग बच्चे नहीं पैदा करने चाहते। यूक्रेन से तो बड़ी संख्या में लोग शरण के लिए दूसरे देशों में चले गए हैं। इसके अलावा युद्ध में भी हजारों लोग अब तक मारे जा चुके हैं। इस तरह यूक्रेन दुनिया में सबसे तेजी के साथ कम होती आबादी वाला देश है। अब यदि महाद्वीप के आधार पर बात करें तो यूरोप की आबादी तेजी से घट रही है। वह अकेला ऐसा महाद्वीप है। वहीं एशिया की आबादी में तेज इजाफा हो रहा है। चीन, भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देश एशिया में ही हैं, जिनकी आबादी सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय देश ग्रीस की बात करें तो उसकी आबादी 2100 तक एक मिलियन कम होकर 9 मिलियन ही रह जाएगी, जो फिलहाल 10 मिलियन है। बता दें कि रूस, इटली और द. कोरिया जैसे देशों पर भी घटती आबादी का खतरा मंडरा रहा है।

भारत-पाक पर ट्रंप के बयान के बहाने राहुल का हमला, कहा- सवालों से क्यों भाग रहे हैं पीएम?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम कराने के दावे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि ट्रंप ने 25वीं बार यह बयान दिया। पीएम मोदी इस पर मौन हैं। इससे लगता है दाल में कुछ काला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सवाल किया कि ट्रंप युद्ध विराम कराने वाले कौन होते हैं? प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर एक बार भी जवाब नहीं दिया है। प्रधानमंत्री कैसे बयान दे सकते हैं? वह क्या कहेंगे, ट्रंप ने संघर्ष विराम करवाया, वह ऐसा नहीं कह सकते। लेकिन यह सच्चाई है। ट्रंप ने संघर्ष विराम करवाया, पूरी दुनिया जानती है। यह वास्तविकता है। संसद भवन परिसर में  राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ संघर्ष विराम का मामला नहीं है। कई बड़ी समस्याएं हैं जिन पर हम चर्चा करना चाहते हैं। रक्षा, रक्षा उद्योग, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी समस्याएं हैं। स्थिति अच्छी नहीं है और पूरी दुनिया जानती है। जो लोग खुद को देशभक्त कहते हैं, वे भाग गए हैं। प्रधानमंत्री एक बयान भी नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप 25 बार कह चुके हैं कि मैंने संघर्ष विराम करवाया। संघर्ष विराम करवाने वाले ट्रंप कौन होते हैं? यह उनका काम नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार भी जवाब नहीं दिया। यह सच्चाई है, वह इसे छिपा नहीं सकते। सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के विदेश से लौटने पर ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करने की बात स्वीकार कर ली है। राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है और दूसरी तरफ कहा जाता है कि जीत हासिल हो गई है। या तो जीत हासिल हो गई है या ऑपरेशन सिंदूर जारी है। ट्रंप कह रहे हैं कि मैंने ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया, वह यह 25 बार कह चुके हैं। इसलिए कुछ न कुछ तो दाल में काला है। भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने हमारी विदेश नीति को नष्ट कर दिया है। किसी ने हमारा समर्थन नहीं किया। कांग्रेस ने सरकार को घेरा इससे पहले ट्रंप के दावे के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि एक ओर मोदी सरकार संसद में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर बहस की निश्चित तारीखें देने से इनकार कर रही है और प्रधानमंत्री के जवाब देने को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं दे रही है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर अपने दावों के साथ सिल्वर जुबली तक पहुंच चुके हैं। पिछले 73 दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप इस विषय पर 25 बार ढिंढोरा पीट चुके हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री अब तक पूरी तरह मौन हैं। उन्हें केवल विदेश यात्राओं और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने के लिए ही समय मिल रहा है।

बुलेट ट्रेन कब होगी तैयार? रेल मंत्री ने दिया टाइमलाइन का अपडेट

नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि वापी और साबरमती के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के गुजरात वाले हिस्से का काम दिसंबर, 2027 तक पूरा करने की योजना है और महाराष्ट्र से साबरमती सेक्शन तक पूरी परियोजना दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना (508 किलोमीटर) जापान से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ निर्माणाधीन है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी और इसके मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती में 12 स्टेशनों पर ठहराव की योजना है। गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक होगा पूरा वैष्णव ने बताया, ‘‘वापी और साबरमती के बीच कॉरिडोर का गुजरात वाला हिस्सा दिसंबर, 2027 तक पूरा होने की योजना है। पूरी परियोजना (महाराष्ट्र से साबरमती खंड) दिसंबर, 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है।’’ प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये मंत्री ने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,08,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी 81 प्रतिशत यानी 88,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण कर रही है और शेष 19 प्रतिशत यानी 20,000 करोड़ रुपये रेल मंत्रालय (50 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (25 प्रतिशत) तथा गुजरात (25 प्रतिशत) सरकारों के अंशदान के माध्यम से वित्त पोषित किए जाएंगे।

मुंबई फिर बारिश की मार में! हादसों की झड़ी और जलभराव, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले 24 घंटे से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है, जिसने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलजमाव हो गया है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेन सेवाओं में देरी की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिसने मुंबईकरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 24 घंटे में 20 मॉनसून से जुड़े हादसे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में मुंबई शहर में 47.77 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 33.1 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 53.92 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस दौरान शहर में 20 मॉनसून से जुड़े हादसे भी सामने आए हैं, जिनमें 7 शॉर्ट सर्किट की घटनाएँ, 11 पेड़ या उनकी शाखाएँ गिरने की घटनाएँ और 2 मकान के हिस्से गिरने की घटनाएँ शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि BMC ने बताया है कि इन सभी घटनाओं में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है, जिससे एक बड़ी राहत मिली है। अगले 4-5 दिन भारी बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटे में मुंबई और आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। IMD ने यह भी संभावना जताई है कि अगले 4-5 दिनों तक मुंबई और MMR (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) क्षेत्र में बारिश जारी रह सकती है। BMC की नागरिकों से अपील बिगड़ते मौसम को देखते हुए BMC ने नागरिकों से खास अपील की है कि वे केवल अत्यधिक आवश्यक होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। साथ ही, जलभराव वाले इलाकों से बचकर चलने की सलाह भी दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में, नागरिक BMC की आपात सेवा पर संपर्क कर सकते हैं, जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।