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मनाली में बाढ़ का कहर, कुल्लू-मनाली-लेह NH-3 यातायात के लिए बंद

मनाली.  हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का दौर चलातार जारी है. मौसम विभाग की तरफ से रेड अलर्ट के बाद मनाली में बीती रात को भारी बारिश हुई और अब भी जारी है. ऐसे में ब्यास नदी चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे पर बहने लगी थी. बीती रात को लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण ब्यास नदी का पानी आलू ग्राउंड तक सड़क पर आ गया और आलू ग्राउंड, वॉल्वो बस स्टैंड, ग्रीन टैक्स बैरियर डूब गए. मनाली में प्रशासन ने मंगलवार के लिए स्कूल और कॉलेज बंद करने का फैसला लिया है. उधर, बाहंग क्षेत्र के किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है. उधर, मनाली के बाहंग में कुछ दुकानें, और शेरे-ए-पंजाब होटल और घर नदी में बह गया है. बीती रात को ब्यास नदी के ऊफान में कैफे का केवल गेट ही बचा, बाकी सामान सहित सब कुछ बह गया. इसके साथ में शेड्स भी नदी में बह गए हैं. जानकारी के अनुसार, रात को आलू ग्राउंड में सब्ज़ी मंडी किसान भवन (एपीएमसी बिल्डिंग) में एपीएमसी का एक कर्मचारी दीप चंद (36, निवासी कटराई, कुल्लू भवन में फंस गया था. ब्यास नदी का पानी भवन के दोनों ओर भर गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और बाद में पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. फिर हाइड्रा क्रेन और स्थानीय कर्मचारियों की मदद से दीप चंद को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसी बीच मनाली-केलांग-लेह मार्ग पर समाहन के पास सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है. भूस्खलन और कटाव से कई जगहों पर यातायात बाधित हुआ है. प्रशासन ने कहा कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है. मनाली में ब्यास नदी की तबाही से लोगों में दहशत का माहौल है, वहीं प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी किनारे न जाएं और सावधानी बरतें. मनाली में होटल में फंसे ओम ठाकुर ने बताया कि वह टूअर लेकर स्पीति गए थे और फिर लौटते हुए तीन दिन से मनाली में फंसे हुए हैं. बीती रात से ही मनाली में बारिश हो रही है और ब्यास नदी पूरे ऊफान पर है. उधर, मनाली में ब्यास नदी के उफान और लगातार भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. मनाली–कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) ढँकार के पास क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. वहीं मनाली से कुल्लू तक राइट बैंक मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही रुक गई है. प्रशासन ने वाहनों को रायसन से लेफ्ट बैंक मार्ग होकर मनाली की ओर भेजना शुरू किया है, ताकि लोगों को राहत मिल सके. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से मनाली के कई इलाक़ों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएँ सामने आई हैं. कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. पूर्व मंत्री और विधायक गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते मनाली लेह सड़क समाहण के पास पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, ओल्ड मनाली से बुरुआ सड़क संपर्क मार्ग भी टूट चुका है. अभी मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों के साथ स्थिति का जायजा लिया।व्यास नदी और मनालसु नाले का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ हुआ है. मेरी सभी लोगों से अपील है कि नदी-नालों के पास न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें. माता हिडिंबा सबकी रक्षा करें. पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित मनाली में पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. नगर का मेन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण मनाली शहर में पानी की आपूर्ति बाधित रहेगी. प्रशासन ने जानकारी दी है कि बहाल करने का काम तभी शुरू किया जाएगा जब मनालसु नाले का जलस्तर कम होगा. पुरानी मनाली पंपिंग स्टेशन पर हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है. जल विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी और संयम के साथ करें, ताकि इस आपात स्थिति से निपटा जा सके. 2023 की याद दिलाने लगी ब्यास गौरतलब है कि 2023 में भी मनाली में भंयकर बारिश हुई थी और इस वजह से ब्यास नदी हाईवे पर आ गई थी. इस दौरान कुल्लू से मनाली तक ब्यास ने हाईवे को क्षति पहुंचाई थी.

गिरफ्तारी के डर से कानून अवैध नहीं, PM-CM हटाने वाले बिल में सरकार के पक्ष में रोहतगी

नई दिल्ली सीनियर वकील और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को उनके पद से हटाने से जुड़े बिल पर सरकार का बचाव किया है. उन्होंने कहा है कि दुरुपयोग की आशंका किसी कानून को अवैध नहीं बनाती है. विशेष साक्षात्कार में उन्होंने इन विधेयकों को देश की राजनीति और राजनेताओं को शुद्धिकरण का प्रयास बताया और कहा कि इस कानून का विरोध करना “राई का पहाड़ बनाने” के समान है.  रोहतगी ने कहा, "दुरुपयोग की आशंका कानून को अमान्य नहीं बनाती. इसे कानून द्वारा स्थापित किया जा चुका है, अब अगर यह पाया जाता है कि कुछ मामलों में सत्तारूढ़ सरकार विपक्षी मंत्रियों को जेल वगैरह में डालने की कोशिश कर रही है, तो फिर आपके पास अदालतें तो हैं न? आप अदालत जा सकते हैं और अदालत आपको जमानत दे देती है." जब उनसे विपक्ष के इस तर्क के बारे में पूछा गया कि यह विधेयक कुचलने वाला है, तो उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पद से हटाया जाना अस्थायी है और व्यक्ति जमानत पर रिहा होने पर फिर से पदभार ग्रहण कर सकता है. उन्होंने कहा, "मेरी पहली राय यह है कि यह कानून इस देश की राजनीति में शुचिता बहाल करने और भ्रष्ट राजनेताओं को दूर करने का प्रयास है. उन्होंने आगे कहा, "अब यह स्पष्ट है कि यह अकल्पनीय है कि कोई सरकार जेल से चलाई जा सकती है, वह भी एक महत्वपूर्ण मंत्री द्वारा. इसलिए, यह कानून स्वागत योग्य है." उन्होंने कहा, "इसमें बहुत ज्यादा हल्ला-गुल्ला है और मुझे नहीं लगता कि यह कोई क्रूर विधेयक है. मेरा मतलब है कि यह राई का पहाड़ बनाने जैसा है." रोहतगी ने बताया कि नया कानून वास्तव में किसी आरोपी को कानूनी लड़ाई में सशक्त बना सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि 30-दिन का नियम "उनके हाथ में एक हथियार होगा जिससे वे अदालत से जल्द से जल्द मामले पर विचार करने का अनुरोध कर सकेंगे" और जमानत प्रक्रिया में तेजी ला सकेंगे बजाय इसके कि जमानत प्रक्रिया में कई महीने लगें. उन्होंने आगे कहा, "एक बार यह 30-दिन का नियम लागू हो जाने के बाद संबंधित अदालत से संपर्क करना और मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने का अनुरोध करना उचित होगा ताकि 30-दिन की समय सीमा पार न हो. वास्तव में इससे अदालत तक पहुंचने में तेजी आएगी, बजाय इसके कि जमानत प्रक्रिया महीनों यहां तक कि छह से आठ महीनों तक खिंच जाए." मुकुल रोहतगी ने इस तर्क का भी जवाब दिया कि यह बिल 'दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष' के सिद्धांत का खंडन करता है, उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में ये एक बुनियादी खामी तो है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सजा होने में 10 से 20 साल तक लग सकता है और इस दौरान एक व्यक्ति राजनीति में सक्रिय रह सकता है.  उन्होंने कहा, "हमारे देश में समस्या यह है कि दोषसिद्धि में 10 साल लग जाते हैं और चुनाव लड़ने की अयोग्यता भी दोषी साबित होने पर ही आधारित होती है. इसलिए 10 से 20 साल तक आप सक्रिय राजनीति में बने रह सकते हैं." वरिष्ठ वकील रोहतगी ने कहा कि मौजूदा बहस आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन पर केंद्रित होनी चाहिए.

ट्रंप ने कोरियाई राष्ट्रपति के सामने जताई ताकत, कहा- चीन को बर्बाद करने की क्षमता है

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग बैठे थे. दक्षिण कोरिया और चीन तगड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. इस दरम्यान डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं अगर वे चाहें तो चीन को बर्बाद कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे. ट्रंप ने कहा कि उनके पास ऐसे-ऐसे कार्ड्स जो चीन को तबाह कर सकता है.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि अमेरिका चीन के साथ "बेहतरीन संबंध" बनाए रखेगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह ऐसे कदम नहीं उठाएंगे जो इस देश को तबाह कर दें. ट्रंप ने कहा, "चीन के साथ हमारे अच्छे संबंध होंगे… उनके पास कुछ कार्ड हैं. हमारे पास तुरुप के कई पत्ते हैं, लेकिन मैं उन कार्डों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता. अगर मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल करता हूं, तो इससे चीन बर्बाद हो जाएगा. मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल नहीं करने वाला." कभी पुचकराना, कभी दुत्कारना ट्रंप की कूटनीति कभी पुचकराने तो कभी दुत्कारने की रही है. समय-समय पर वे इसका इस्तेमाल करते रहते हैं. ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि चीन को अपना मैग्नेट अमेरिका को देना ही पड़ेगा. अगर चीन ऐसा नहीं करता है कि उसे 200 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा.  यहां मैग्नेट का अर्थ 'रेयर अर्थ मैग्नेट' या 'रेयर अर्थ एलिमेंट'से है.  ये मैग्नेट उच्च-तकनीकी और औद्योगिक प्रयोगों में महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली जैसी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं. चीन दुर्लभ 'रेयर अर्थ एलिमेंट' वैश्विक आपूर्ति में अग्रणी है, और दुनिया के लगभग 90% दुर्लभ रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन करता है. गौरतलब है कि जब से अमेरिका चीन पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहा है तब चीन ने भी रेयर अर्थ एलिमेंट के निर्यात को कंट्रोल कर दिया है. चीन ने इसे एक्सपोर्ट कंट्रोल की सूची में डाल दिया है इससे अमेरिका को इसका निर्यात बंद हो गया है और अमेरिका उद्योग प्रभावित हुए है.  उनके पास रेयर अर्थ है, हमारे पास टैरिफ राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर इस महत्वपूर्ण मैटेरियल की सप्लाई के लिए दबाव डालते हए कहा, "लेकिन हमारे पास टैरिफ जैसी बहुत शक्तिशाली चीज है. अगर हम 100% या 200% टैरिफ लगाना चाहें, तो हम चीन के साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे. और अगर ऐसा करना पड़ा तो भी ठीक होगा. लेकिन जहां तक मैग्नेट की बात है हमारे पास उनके लिए बहुत शक्ति है, और उनके पास भी हमारे खिलाफ कुछ शक्ति है." राष्ट्रपति ट्रंप ने मैग्नेट को लेकर आगे का प्लान बताते हुए कहा कि हमारे पास बहुत सारे मैग्नेट होंगे. वास्तव में इतने ज्यादा होंगे कि हमें समझ नहीं आएगा कि उनके साथ क्या करना है. मैग्नेट की कहानी बहुत दिलचस्प है. यह इसलिए हुआ क्योंकि हमारे राष्ट्रपति बिजनेसमैन नहीं थे, इसलिए उन्होंने ऐसा होने दिया, जो नहीं होना चाहिए था.  उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास बहुत बेहतर और बड़े विकल्प हैं. फिर भी मेरा मानना है कि हमारा चीन के साथ अच्छा रिश्ता है. मैंने हाल ही में राष्ट्रपति शी से बात की थी, और इस साल या उसके बाद, हम शायद चीन जाएंगे और वहां कुछ शानदार देखेंगे. यह एक महान देश है." बता दें कि अभी अमेरिका चीन से आने वाले अधिकांश वस्त्रों पर औसतन 145% टैरिफ वसूल रहा है, जबकि चीन अमेरिका से आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 125% टैरिफ लगा रहा है.  अमेरिका ने अपने सुरक्षा, ड्रग तस्करी (फेंटेनल) और तकनीकी हितों के चलते टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे व्यापक तौर पर चीनी सामान पर 145% तक का टैरिफ लागू है. चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 125% तक बढ़ा दिए हैं, खासकर एग्रीकल्चर, ऑटो पार्ट्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाए हैं. 

लिंकिंग नहीं की तो बढ़ेगी दिक्कत: DL/RC को आधार–फोन से जोड़ने के आसान कदम

नई दिल्ली क्या इन दिनों आपको भी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से कोई एसएमएस प्राप्त हुआ है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करने के लिए कहा गया हो? दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इस तरह की अपील लोगों से की जा रही है कि वह अपने ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करें। ऐसा करने के लिए parivahan.gov.in की मदद लेने के लिए कहा गया है। लोगों से ऐसा करने को इसलिए कहा जा रहा है ताकि वह परिवहन से जुड़ी सर्विस का लाभ बिना रुकावट के लेते रहें। चलिए डिटेल में समझते हैं कि आखिर इस मैसेज के क्या मायने हैं और आप किस तरह से घर बैठे अपने ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक कर सकते हैं? क्या कहा गया है मैसेज में? दरअसल जिन भी लोगों के पास गाड़ी या ड्राइविंग लाइसेंस हैं उन्हें केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से एक मैसेज भेजा जा रहा है कि वह अपने रजिस्टर्ड वाहन के लिए आधार ऑथेंटिकेशन प्रोसेस के जरिए मोबाइल नंबर को लिंक करें। इस एडवाइजरी के मुताबिक रजिस्टर्ड वाहनों को मोबाइल नंबर से लिंक करना और आधार नंबप से ऑथेंटिकेट करना जरूरी होगा। मैसेज में इस काम के लिए parivahan.gov.in की मदद लेने के लिए कहा गया है। बता दें कि इस सरकारी पोर्टल पर वाहन और सारथी नाम से दो QR कोड दिए गए हैं, जिनके जरिए यह काम किया जा सकता है। बता दें कि अब परिवहन या ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी किसी भी सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए आधार ऑथेंटिकेशन करवाना जरूरी कर दिया गया है। वाहन के लिए मोबाइल नंबर ऐसे करें अपडेट अपना मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए आपको parivahan.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद:     ​Update Mobile Number via Aadhaar के ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद आप से वाहन या ड्राइविंग लाइसेंस की डिटेल्स मांगी जाएंगी। इसमें रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म की तारीख और चेसिस नंबर जैसी जानकारी शामिल होगी।     इसके बाद आप अपने आधार नंबर के जरिए OTP वेरिफिकेशन करवा कर अपना फोन नंबर अपडेट कर सकते हैं।     इस तरह आपके वाहन के साथ आपका आधार और फोन नंबर अपडेट हो जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मोबाइल नंबर ऐसे करें अपडेट     इसके लिए भी आपको सरकारी पोर्टल parivahan.gov.in पर जाना होगा और सारथी QR कोड स्कैन करना होगा।     इसके बाद आपसे ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी डिटेल्स मांगी जाएंगी। इस जानकारी को ध्यान से और सही-सही उपलब्ध कराना जरूरी है। इसमें आप से डेट ऑफ बर्थ, आपके राज्य का नाम और कैप्चा कोड भरने को कहा जाएगा।     सारी डिटेल भरने के बाद नीचे दिखाई दे रहे सबमिट बटन पर क्लिक करके आप अपने डीएल के लिए मोबाइल नंबर को अपडेट कर पाएंगे।     इस तरह आपके डीएल के साथ आपका फोन नंबर और आधार अपडेट हो जाएगा। क्या है मकसद? सरकार की ओर से यह कदम उन लोगों को पकड़ने के लिए उठाया जा रहा है जो चालान या जुर्माने से बचने के लिए अपना पता और नंबर बदलते रहते हैं। अगर आपने अभी तक इस प्रोसेस को पूरा नहीं किया है, तो इसे जल्द से जल्द पूरा कर लें। बता दें कि अगर आपका नंबर अपडेट नहीं होगा, तो जरूरी नोटिस या जानकारी आप तक नहीं पहुंच पाएगी। इससे चालान, रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल या अन्य सेवाओं में देरी हो सकती है।

मॉनसून का कहर जारी: अगले 7 दिन कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में मॉनसून की बारिश लगातार जारी है। दिल्ली-NCR से लेकर केरल तक और उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश तक भारी बारिश हो रही है। कुछ राज्यों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। राजस्थान के कई जिलों में भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति बन गई है। एहतियातन सरकार ने 13 जिलों में आज स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भारी बारिश के अलर्ट के चलते प्रशासन ने स्कूल बंद रखने का फैसला लिया है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगले 7 दिन तक भारी बारिश की संभावना है। साथ ही 26 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में भी तेज बारिश की चेतावनी दी गई है। दिल्ली-NCR का मौसम दिल्ली-NCR में सुबह से ही कई इलाकों में बारिश हो रही है, जिससे उमस से राहत मिली है। मौसम विभाग ने आज हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया है। तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री कम रह सकता है। यूपी का मौसम पिछले दो दिनों से यूपी में लगातार बारिश हो रही है और मौसम सुहाना बना हुआ है। आज भी प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी है। हालांकि, अगले कुछ दिनों में बारिश रुकने के बाद दोबारा उमस भरी गर्मी बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने बताया है कि 29 और 30 अगस्त को राज्य में फिर से तेज बारिश हो सकती है। बिहार का मौसम बिहार में भी मॉनसून सक्रिय है। मौसम विभाग ने आज करीब 20 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। पटना, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, जहानाबाद, अरवल, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, जमुई, मुंगेर, बांका, भागलपुर और खगड़िया सहित कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, इसके बाद राज्य में मॉनसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल में तबाही उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बारिश से स्थिति गंभीर बनी हुई है। पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण कई रास्ते बंद हो गए, जिन्हें प्रशासन ने खोला। मौसम विभाग ने बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, टेहरी और उत्तरकाशी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी है।

दूल्हा-दुल्हन को मिले गिफ्ट्स पर लगेगा टैक्स! कितना और कब देना होगा?

नई दिल्ली भारत में शादी-ब्याह और त्योहारों के मौके पर लाखों रुपये के तोहफे और उपहार आम बात है. लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि किसी को शादी में 20 लाख रुपये कैश मिले तो क्या उस पर टैक्स देना होगा. आइए विस्तार से समझते हैं. शादी के तोहफे पर टैक्स: क्या कहता है कानून आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 के अनुसार:     दूल्हा और दुल्हन को शादी के मौके पर रिश्तेदारों और मित्रों से जो भी तोहफा मिलता है, वह टैक्स फ्री होता है.     चाहे वह कैश हो या कोई वस्तु, उस पर टैक्स नहीं लगेगा.     निष्कर्ष: यदि आपको शादी में 20 लाख रुपये कैश मिले हैं, तो इसे आयकर योग्य नहीं माना जाएगा. ध्यान देने योग्य बातें     छूट केवल दूल्हा और दुल्हन के लिए: अगर उनके परिवार को तोहफा मिलता है और उसकी वैल्यू ₹50,000 से ज्यादा है, तो उस पर टैक्स लगेगा.     रिश्तेदारों से उपहार: रिश्तेदारों से मिले तोहफे पर टैक्स नहीं लगता.     गैर-रिश्तेदारों से: 1 साल में ₹50,000 तक का तोहफा भी टैक्स फ्री है.     वसीयत या उत्तराधिकार: इनसे प्राप्त संपत्ति पर भी तुरंत टैक्स नहीं लगता. केवल संपत्ति बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा. ITR में कैसे दिखाएं शादी के उपहार     बड़े तोहफे या कैश लेनदेन को Income from Other Sources में दिखाना चाहिए.     भले ही टैक्स नहीं देना पड़े, लेकिन डिक्लेरेशन देना आवश्यक है.     इससे आयकर विभाग की कार्रवाई से बचा जा सकता है. कैश ट्रांजैक्शन पर विशेष नियम     कैश लेनदेन की सीमा: ₹2,00,000 तक.     ₹2,00,000 से ऊपर कैश ट्रांजैक्शन पर जुर्माना या पेनल्टी लग सकती है.     बेहतर है कि लाखों रुपये का तोहफा बैंक ट्रांसफर या ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त या भेजा जाए. सलाह और टिप्स     शादी में मिले सभी बड़े उपहार बैंक अकाउंट में जमा करें.     कैश लेनदेन का रिकॉर्ड रखें.     ITR फाइल करते समय इसे डिक्लेयर करें, भले ही टैक्स फ्री हो.     यह कदम आपको कानूनी सुरक्षा और भविष्य में विवाद से बचाव प्रदान करेगा.  

Petrol के बाद Diesel में बदलाव: Isobutanol ब्लेंडिंग से क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली  बीते कुछ हफ्तों से देश भर में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E20 Petrol) की खूब चर्चा हो रही है. पेट्रोल के आयात और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिक्स करना शुरू किया, जो इस समय देश के कई फ्यूल स्टेशन पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. जिसके बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी आने की शिकायत की. अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की तैयारी कर रही है.  हाल ही में पुणे में प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. मैं विशेष रूप से प्राज इंडस्ट्री और ARAI को धन्यवाद दूंगा कि, उन्होनें एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू किया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है. आइसोब्यूटेनॉल वैकल्पिक जैव ईंधन है."  नितिन गडकरी ने आगे कहा कि, "आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. हमारे देश में पेट्रोल के तुलना में डीजल का प्रयोग ढाई से तीन गुना ज्यादा होता है. प्रदूषण की मुख्य समस्या पेट्रोल और डीजल के कारण ज्यादा है. आने वाले समय में आइसोब्यूटेनॉल हमारे देश के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. रिसर्च, ट्रायल और स्टैंडर्ड निश्चित होने के बाद जब इसका प्रस्ताव पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को जाएगा और मंत्रालय से इसको मान्यता मिलेगी तब इसका मार्केट और भी बढ़ेगा."  क्या है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल मूल रूप से एल्केनॉल (अल्कोहल) ग्रुप से आने वाला एक कलरलेस, फ्लेमेबल ऑर्गेनिक लिक्विड है. इसका केमिकल फार्मूला (C₄H₁₀O) है. ये व्यापक रूप से पेंट और कोटिंग्स के लिए सॉलवेंट यानी विलायक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अपने हाई एनर्जी डेंसिटी और ऑक्टेन रेटिंग के कारण फ्यूल ऐडिटिव्स के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है. इसे प्रोपिलीन कार्बोनिलीकरण के माध्यम से पेट्रोलियम या बायोमास जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है. डीज़ल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग फ्यूल ब्लेंडिंग: आइसोब्यूटेनॉल को डीज़ल के साथ मिक्स कर उपयोग किया जा सकता है. यह उत्सर्जन को कम करने और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. क्लीन बर्निंग फ्यूल: इसमें सल्फर और अन्य हानिकारक तत्व कम होने के कारण डीज़ल इंजन में स्वच्छ दहन (Clean Combustion) होता है. ग्रीनहाउस गैस में कमी: आइसोब्यूटेनॉल फ्यूल से CO₂ और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है. इंजन कम्पैटिबिलिटी: शोध से पता चला है कि डीज़ल इंजनों में आइसोब्यूटेनॉल-डीज़ल मिश्रण बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. बेहतर प्रदर्शन: इससे इंजन परफॉर्मेंस बनी रहती है और ईंधन की खपत भी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि अभी डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्स्चर पर शोध जारी है. लेकिन माना जा रहा है कि, भविष्य में आने वाले नए डीजल इंजन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के ही सिद्धांत पर काम करेंगे. जो संभवतः पूरी तरह से आइसोब्यूटेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे. क्या कहते हैं अब तक हुए शोध? सोसायटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (SAE) की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 4-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर डीज़ल इंजन में 5% और 10% वॉल्यूम आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी (BTE) में वृद्धि देखी गई है. ब्रेक स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (BSFC) में सुधार हुआ है, यानी ईंधन की खपत प्रति यूनिट ऊर्जा कम हुई. कार्बन उत्सर्जन और धुएँ की तीव्रता (Smoke Opacity) में काफी कमी आई है, जबकि NOₓ उत्सर्जन में मामूली कमी देखने को मिली है. बहरहाल, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल को मिलाने को लेकर शोध अभी चल रही है. जैसा कि नितिन गडकरी ने भी बताया कि, इससे जुड़ी एजेंसियां इस पर प्रयोग कर रही हैं. यानी अभी इस डीजल ब्लेंडिंग पर अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगेगा. अभी इस बात की भी जानकारी नहीं मिली है कि, सरकार डीजल में इसका प्रयोग कब शुरू करेगी. अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और रिसर्च/प्रयोग में सफलता मिलने के बाद इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहां से इसे आखिरी मंजूरी मिलेगी.  भारत में डीजल की खपत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत की कुल कच्चे तेल की खपत में डीज़ल का योगदान लगभग 40% है. 2024-25 में डीज़ल की खपत 2% बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो जाएगी. पीपीएसी ने 2025-26 के लिए डीज़ल के उपयोग में 3% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 94.1 मिलियन टन हो जाएगा.

HC ने कहा– पीएम मोदी की डिग्री की जानकारी नहीं होगी सार्वजनिक

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक की डिग्री से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर यह फैसला सुनाया। इसी अदालत ने 27 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि नीरज नामक के शख्स की ओर से दाखिल की गई आरटीआई आवेदन के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को 1978 में बीए परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के अभिलेखों की जांच की अनुमति दी थी। इसी वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने भी यह परीक्षा पास की थी। मामला आने पर हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2017 को सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी थी। बीते बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की याचिका पर अपना फैसला टाल दिया था। याचिका में प्रधानमंत्री मोदी की स्नातक डिग्री के संबंध में सूचना का खुलासा करने के निर्देश देने वाले सीआईसी के आदेश को चुनौती दी गई थी। डीयू की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह निजता के अधिकार से ऊपर है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखी थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलील में कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग उक्त का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय अदालत को अपना रिकॉर्ड दिखा सकता है। इसमें उसे कोई आपत्ति नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय का कहना था कि केवल जिज्ञासा के आधार पर किसी को भी आरटीआई कानून के जरिए निजी जानकारी मांगने का अधिकार नहीं है। वहीं आरटीआई आवेदकों की ओर से पेश हुए वकील ने अपनी दलील में कहा था कि सूचना का अधिकार यानी आरटीआई अधिनियम में व्यापक जनहित के तहत प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में खुलासा किए जाने का प्रावधान है।

भगवान चक्रधर स्वामी की जयंती पर श्रद्धा का माहौल, शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई, महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर सोमवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भगवान चक्रधर स्वामी को नमन किया। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मुंबई राजभवन में भगवान चक्रधर स्वामी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नर्णावरे, उप सचिव एस रामामूर्ति, राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी तथा राज्य पुलिस के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महाराष्ट्र राजभवन ने जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर राजभवन, मुंबई में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, उप सचिव एस. राममूर्ति, राजभवन और राज्य पुलिस के कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित थे।” वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी भगवान चक्रधर स्वामी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने सरकारी निवास ‘वर्षा’ में चक्रधर स्वामी की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें नमन किया। सीएमओ महाराष्ट्र ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “परब्रह्म कलियुग अवतारी, श्री चक्रधर नमो नमः। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास पर भगवान सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।” इससे पहले, सीएम फडणवीस ने एक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महानुभाव पंथ के संस्थापक और प्रखर दार्शनिक भगवान श्री चक्रधर स्वामी को उनकी जयंती पर स्मरण! महानुभाव पंथचे संस्थापक, थोर तत्त्वज्ञ भगवान श्री चक्रधर स्वामी यन्ना जयंतीदिनी कोटि कोटि नमन!”  

हर साल 20,000 करोड़ गंवाने वाले 45 करोड़ भारतीय युवाओं को गेमिंग बिल से नई राह

नई दिल्ली   सरकार ने द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 लाकर देश के युवाओं को नई दिशा देने का काम किया है। इससे एक तरफ रियल-मनी गेम पर रोक लग जाएगी, तो दूसरी तरफ ई-स्पोर्ट्स और एजुकेशन प्लेटफॉर्म को बढ़ावा मिलेगा।   सरकारी अनुमान के मुताबिक, रियल-मनी गेम में करीब 45 करोड़ भारतीय हर साल 20,000 करोड़ रुपए गवां रहे थे। यह कई सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहे थे। इनमें कर्ज के कारण आत्महत्या और बच्चों द्वारा अनजाने में माता-पिता की पूरी सेविंग्स ऑनलाइन गेम में दांव पर लगाना आदि शामिल था। सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल सभी पक्षकारों की सहमति से मिलकर बनाया है। संपूर्ण दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए वित्त, खेल और आईटी मंत्रालयों के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), बैंकों, अभिभावक संगठनों और गेमिंग उद्योग से भी जानकारी ली गई। इस बिल से देश में ऑनलाइन गेम के भविष्य को सही दिशा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में मौजूदा समय में 48.8 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इस आंकड़ा 2025 के अंत तक 50 करोड़ के पार जा सकता है। वहीं, ई-स्पोर्ट्स की व्यूअरशिप 2025 के अंत तक 64 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। 2024 में गेमिंग स्टार्टअप ने 3,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया था, जो कि 2025 में 5,000 करोड़ रुपए तक जाने की उम्मीद है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पर इंडस्ट्री लीडर्स और लीगल एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि इससे देश में ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह कानून न सिर्फ ई-स्पोर्ट्स को मान्यता देता है, बल्कि एडिक्शन, वित्तीय सुरक्षा, फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे सामाजिक मुद्दों को संबोधित करता है। अर्थशास्त्र लीगल के संस्थापक सदस्य गौरव सहाय ने कहा कि यह विधेयक व्यापक है क्योंकि यह सर्विस प्रोवाइडर्स और सुविधाएं देने वालों से लेकर ऐसे खेलों को बढ़ावा देने वालों तक, सभी पर लागू होता है। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून सभी प्रकार के रियल-मनी खेलों पर प्रतिबंध लगाकर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। एस8यूएल के सह-संस्थापक और सीईओ अनिमेष अग्रवाल ने इस विधेयक को भारतीय ई-स्पोर्ट्स के लिए एक "ऐतिहासिक मोड़" बताया। उन्होंने कहा कि कौशल-आधारित गेमिंग और सट्टेबाजी के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर, यह कानून संरचित विकास के लिए जगह बनाते हुए इकोसिस्टम की अखंडता की रक्षा करता है।