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चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 18 जून को उपचुनाव

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने आज द्विवार्षिक चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दस राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं।  18 जून को होगी वोटिंग  चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा. 8 जून तक नामांकन भरा जा सकेगा. 9 जून को नामांकन की जांच होगी. 11 जून को नामांकन वापस लिया जा सकेगा. अगर जरूरी हुई तो 18 जून को वोटिंग होगी. वोटिंग सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी. 18 जून को मतगणना होगी और 20 जून तक राज्यसभा का चुनाव पूरा कर लिया जाएगा।  11 बीजेपी से और 4 कांग्रेस के सांसद हो रहे रिटायर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू आदि का कार्यकाल हो रहा है समाप्त।  कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से चार-चार सीटें होंगी खाली हो रही हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली होने जा रही हैं. मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट खाली होंगी . इनके अलावा झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एक-एक सीटों पर उपचुनाव भी हो सकता है. 22 रिटायर होने वाले सांसदों में 11 बीजेपी के हैं जबकि कांग्रेस के चार सांसद हैं।  चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके।  राजनीतिक तौर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या बल कई बड़े विधेयकों और राजनीतिक रणनीतियों पर असर डालता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न दल उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की कवायद तेज कर सकते हैं।  किस राज्य की कितनी सीटों पर चुनाव? आंध्र प्रदेश: 4 गुजरात: 4 कर्नाटक: 4 मध्य प्रदेश: 3 राजस्थान: 3 झारखंड: 2 मणिपुर: 1 मेघालय: 1 अरुणाचल प्रदेश : मिजोरम :1 नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है. केंद्रीय मंत्रियों पर तलवार लटकी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो रहा है. माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रवनीत सिंह को पार्टी दोबारा राज्य सभा भेज सकती है।  वहीं कूरियन को केरल चुनाव के मद्देनजर सरकार में लाया गया था. अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें फिर से राज्य सभा भेजती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों का बना रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फिर से राज्य सभा में आते हैं या नहीं।  खरगे और दिग्विजय का क्या होगा? कर्नाटक से संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं. इनमें से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का चुना जाना तय माना जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. हालांकि उसके पास केवल छह सरप्लस वोट हैं. ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जा सकता है. खुद दिग्विजय सिंह फिर से राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं. राज्य में दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस को मिल सकती है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन भी दौड़ में हैं. राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम चल रहा है।  गुजरात में कांग्रेस जीरो कांग्रेस को बड़ा झटका गुजरात में लगने जा रहा है. अभी गुजरात से राज्यसभा की 11 सीटों में कांग्रेस के केवल एक ही सदस्य हैं. शक्तिसिंह गोहिल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. वर्तमान में एक सीट जीतने के लिए 46 वोट चाहिए जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं. यानी कांग्रेस का गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में नहीं जीत सकता. यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य से कांग्रेस का राज्य सभा में कोई भी सदस्य नहीं होगा. हालांकि झारखंड में कांग्रेस की उम्मीदें सत्तारूढ़ जेएमएम पर टिकी हैं. पार्टी को उम्मीद है कि जेएमएम यह सीट कांग्रेस को दे देगा. इस चुनाव में एनडीए की स्थिति वर्तमान स्तर पर ही रहने की संभावना है. हालांकि टीडीपी की सीटें बढ़ सकती हैं. बीजेपी के अभी राज्य सभा में 113 सांसद हैं और एनडीए के 148 सांसद हैं. इस दौर के चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या कमोबेश इसी के आसपास रहेगा।  बीजेपी के 11 सांसद हो रहे रिटायर केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 11 बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें खाली हो रही हैं। झारखँड, तमिलनाडुऔर महाराष्ट्र की एक-एक सीटों पर उपचुनाव हो सकताहै। 11 सांसदों में से 11 बीजेपी के और चार कांग्रेस के सांसद रिटायर हो रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। फिलहाल वह राजस्थान से सांसद हैं। वहीं जॉर्च कूरियन की वापसी … Read more

ED का ताबड़तोड़ छापा, पूर्व DCP के घर में जबरन दाखिल हुए अधिकारी

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में कथित रंगदारी रैकेट की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़े पैमाने पर छापेमारी की है. मुर्शिदाबाद ज़िले के कांडी शहर में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) शांतनु सिन्हा विश्वास के आलीशान पैतृक आवास पर ईडी की टीम ने ताला तोड़कर धावा बोला. यह घर कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है और पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह बंद पड़ा था।  शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता के कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) रह चुके हैं और फिलहाल ज़मीन से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में ED की हिरासत में हैं।  शांतनु सिन्हा विश्वास का कांडी में एक आलीशान घर है जो कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है. यह घर पिछले सात दिनों से बंद पड़ा है. शांतनु सिन्हा विश्वास की बहन, गौरी सिन्हा विश्वास, फिलहाल कांडी नगर पालिका की उपाध्यक्ष हैं. छापेमारी के दौरान वह भी घर पर मौजूद नहीं थी. चूंकि घर बंद था, इसलिए ED के अधिकारियों ने घर के बाहर से ही अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी और स्थानीय लोगों से बातचीत की और इसके बाद ताला तोड़कर घर में घुसे।  सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित तौर पर ‘सोना पप्पू’ नाम से जुड़े उगाही नेटवर्क और शांतनु सिन्हा बिस्वास से संबंधित जांच के तहत की जा रही है. जानकारी के अनुसार, ED की टीमों ने सुबह करीब 6 बजे एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी।  कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर छापेमारी की गई. इसके अलावा कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी पहुंची. एजेंसी कथित उगाही, अवैध लेनदेन और पुलिस अधिकारियों से जुड़े संभावित आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है।  हालांकि ED की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का फोकस कथित जबरन वसूली गिरोह और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन पर है. जांच एजेंसी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाने में लगी हुई है।  बंगाल में एक साथ कई जगहों पर हुई इस कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

मध्य पूर्व तनाव से UAE को बड़ा झटका, पैसा छापने वाला कारोबार दूसरे देशों में शिफ्ट

दुबई ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाजार या मिडिल ईस्ट की राजनीति को ही नहीं हिलाया, बल्कि दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब की बुनियाद तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जिस UAE को पिछले कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेंटर माना जाने लगा था, वहां अब शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई विदेशी प्रोफेशनल्स दूसरे देशों में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।  मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में काम कर रहे कई वेस्टर्न एक्सपैट्स अब ग्रीस की राजधानी एथेंस और साइप्रस जैसे देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इसकी वजह यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरा, जहाजों की आवाजाही में रुकावट और युद्ध के लंबे खिंचने का डर बना हुआ है।  दरअसल, फरवरी में ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग जाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी तरह से समुद्री नियंत्रण लागू कर रहे हैं, जिसकी वजह से करीब 2000 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंस गए. हालांकि इससे ग्लोबल शिपिंग रेट्स में भारी उछाल आया है और कई टैंकर कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन UAE की अर्थव्यवस्था पर इसका उल्टा असर पड़ रहा है।  जेबेल अली पोर्ट पर कारोबार की रफ्तार धीमी दुबई का जेबेल अली पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब्स में गिना जाता है, जहां एक जहाज से सामान दूसरे जहाज में ट्रांसफर होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाता है. लेकिन युद्ध और ब्लॉकेड के कारण यहां कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूरे खाड़ी में ये पोर्ट 60% से भी ज्यादा के कार्गो को मैनेज करता है।  UAE का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट यानी तेल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शिप ओनर ने कहा कि समस्या सिर्फ बिजनेस की नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है. उनका कहना था, "अगर युद्ध बढ़ता है तो क्या दुबई से परिवार को सुरक्षित तरीके से लंदन या पेरिस भेज पाना आसान होगा? यही चिंता लोगों को परेशान कर रही है।  दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी जंग की मार युद्ध का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले महीनों में दुबई की हजारों प्रॉपर्टी एजेंसियां बंद हो सकती हैं. कई छोटी कंपनियां, जो तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट और सट्टेबाजी वाले निवेश पर निर्भर थीं, अब टिक नहीं पा रही हैं।  कोविड के बाद दुबई ने दुनिया भर के निवेशकों, क्रिप्टो कारोबारियों और अमीर प्रोफेशनल्स को आकर्षित किया था. टैक्स में छूट, आसान नियम और तेज ग्रोथ ने इसे ग्लोबल फाइनेंस हब बना दिया था. लेकिन अब ईरान जंग ने पहली बार इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है।  हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE के पास अभी भी मजबूत आर्थिक संसाधन हैं और दुबई पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, लेकिन यह साफ हो गया है कि होर्मुज संकट और क्षेत्रीय युद्ध ने खाड़ी की सबसे चमकदार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 

गिरते रुपये पर RBI का बड़ा एक्शन संभव, महंगी हो सकती है लोन EMI

नई दिल्‍ली डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गिरावट को थामने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी भी केंद्रीय बैंक कर सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में बैठकें की हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तमाम कड़े विकल्पों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।  इस सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने केंद्रीय बैंक की नींद उड़ा दी है. रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी में खूब काम आ सकती है. केंद्रीय बैंक इस विकल्प पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है. आरबीआई की अगली एमपीसी मीटिंग 5 जून से शुरू होगी, लेकिन संकट की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक तय कार्यक्रम से पहले भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर दरों में बदलाव कर सकता है. इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई तय शेड्यूल से अलग जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ा चुका है।  लोन हो जाएंगे महंगे यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज महंगा मिलेगा. नतीजा यह होगा कि कमर्शियल बैंक भी आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे, जिससे आम आदमी पर मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा।  2013 वाले फॉर्मूले की तैयारी रुपये में गिरावट की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है. हालांकि, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और बैंकिंग प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर है, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते यह मजबूती विनिमय दर (Exchange Rate) में दिखाई नहीं दे रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई साल 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान आजमाए गए फॉर्मूले को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है. उस समय भी रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय बैंकों के माध्यम से एनआरआई (NRI) जमा योजनाएं शुरू की गई थीं।  रुपये की सेहत सुधारने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आरबीआई इस बार बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की प्लानिंग कर रहा है. आरबीआई का अनुमान है कि अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष डिपॉजिट स्कीम लाकर इस बार लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं, जबकि 2013 के संकट के दौरान इसके जरिए 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे।  इन पर भी हो रहा विचार डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अतिरिक्त करेंसी स्वैप एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. संप्रभु डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार की मदद से डॉलर बॉन्ड जारी करने पर भी विचार हो रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार को लेना होगा। 

EC आंकड़ों ने खोली पोल, अपने वार्ड में भी शुभेंदु से पीछे रहीं ममता

 कोलकाता पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट के 73 नंबर वार्ड में हुए मतदान में बीजेपी ने अपना दबदबा साबित किया है. 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में इस वार्ड के अंतर्गत कुल 14,179 वोट डाले गए थे. आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी को 8,932 वोट मिले, जिनका प्रतिशत 62.99 रहा. दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस को सिर्फ 4,284 वोट यानी 30.21 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. भवानीपुर के इसी वार्ड में ममता बनर्जी का कालीघाट स्थित आवास भी आता है, जिसके कारण यह परिणाम राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला साबित हुआ है।  चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वार्ड 73 के कुल 26 बूथों (पार्ट संख्या 200 से 225) पर मतदान हुआ था. हर बूथ पर बीजेपी की पकड़ मजबूत नजर आई।  अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस और सीपीआई (एम) को बहुत कम वोट हासिल हुए. जहां कांग्रेस को सिर्फ 0.99 फीसदी वोट मिले, वहीं सीपीआई (एम) 4.02 प्रतिशत पर सिमट गई. इस वार्ड में बीजेपी की 32.78 फीसदी की भारी लीड ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार भवानीपुर के स्थानीय निवासियों का रुझान पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में रहा।  15 हजार वोटों से हारीं थीं ममता  बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता के भवानीपुर से ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था. शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15,000 वोटों के अंतर से हराया. कुल 293 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की।  'दिल्ली की सत्ता से बीजेपी को हटाया जाएगा…' हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी को जल्द ही दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा. वहीं, उनके भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह किसी भी तरह की धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।  अपने आवास पर TMC विधायकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बनी बीजेपी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों और सड़क किनारे ठेले लगाने वालों (हॉकर्स) को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है. हॉकर्स के ठेलों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है।  ममता ने सूबे के तमाम हिस्सों में हाल के दिनों में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा की घटनाओं और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा।  सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया, "यह सरकार हमारे संवैधानिक आदर्शों और मूल्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है. आने वाले दिनों में बीजेपी को दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा।  शुभेंदु के रडार पर ममता की पार्टी के कई नेता; देखें लिस्ट  पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कस गया है। राज्यभर में जारी एक अभियान के तहत टीएमसी के कई हाई-प्रोफाइल मंत्रियों, विधायकों, उनके रिश्तेदारों और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इन नेताओं पर वित्तीय हेराफेरी, जबरन वसूली, रंगदारी, अवैध हथियार रखने, चुनाव बाद हुई हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम पूर्व राज्य मंत्री और टीएमसी नेता सुजीत बोस का है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया है। वहीं, संदेशखाली के निलंबित और विवादित टीएमसी नेता शेख शाहजहां को भी कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। शाहजहां पर बड़े पैमाने पर जमीन हड़पने, महिलाओं के खिलाफ हिंसक अत्याचार करने और ईडी अधिकारियों पर हमला करने का मुख्य आरोप है। वर्तमान में वह पुलिस की गिरफ्त में है और उसके खिलाफ व्यापक स्तर पर मुकदमा चलाया जा रहा है। ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां यह कार्रवाई केवल शीर्ष नेताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिला और पंचायत स्तर पर भी भारी धरपकड़ जारी है। टीएमसी के एक विधायक के बेटे के पास विदेशी हथियार मिले हैं। दक्षिण 24 परगना जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बिश्नुपुर से टीएमसी विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक विदेशी पिस्तौल और अवैध कारतूस बरामद किए गए हैं। वहीं, मालदा के रतुआ ब्लॉक में टीएमसी द्वारा संचालित बिलाइमारी पंचायत की प्रधान स्मृतिकणा मंडल और उनके पति अनिल मंडल को एक स्थानीय सहकारी बैंक से लगभग 13 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हिंसा और रंगदारी के मामले कूचबिहार ब्लॉक नंबर 1 समिति के टीएमसी अध्यक्ष अब्दुल कादर हक को राजनीतिक विरोधियों पर हमले, तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, फाल्टा पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान, सरजीत विश्वास और राजदीप दे को भी रंगदारी और जानलेवा हमले के आरोपों में हिरासत में लिया गया है। लिस्ट में किनके नाम? इस सबके बीच कई प्रमुख टीएमसी नेता गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहे हैं। बिश्नुपुर के टीएमसी विधायक दिलीप मंडल अपने बेटे के हथियार मामले और एक अन्य आपराधिक जांच में नाम आने के बाद से लापता हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। दिनहाटा के पूर्व टीएमसी विधायक उदयन गुहा भी हालिया चुनाव के बाद से ही इलाके से गायब हैं और पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए ढूंढ रही है। इस बड़े एक्शन के बाद बंगाल के कई हिस्सों में सालों से दबा जनता का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। कई पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं और जमीनी हालात इतने बदल चुके हैं कि गुस्से को देखते हुए कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को लोगों से वसूली गई रंगदारी की रकम वापस लौटानी पड़ रही है।    

सिर्फ 3 स्टेप में मिलेगा PF का पैसा, EPFO ला रहा नई सुविधा

नई दिल्ली अगर आप नौकरी करते हैं और PF का पैसा निकालने के लिए लंबा इंतजार और झंझट से परेशान रहते हैं, तो जल्द आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। EPFO मेंबर्स जल्द UPI के जरिए सीधे अपने बैंक खाते में PF का पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। जिससे PF का पैसा बैंक अकाउंट में आसानी से ट्रांसफर हो सकेगा। माना जा रहा है कि पूरा प्रोसेस सिर्फ 3 आसान स्टेप में पूरा हो जाएगा और यूजर्स को कई दिनों तक इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। अभी PF निकालने के लिए EPFO पोर्टल पर Claim डालना पड़ता है और पैसा आने में समय लगता है। लेकिन नए UPI आधारित सिस्टम के आने के बाद Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद से पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंच सकता है। इससे खासकर उन लोगों को बड़ा फायदा होगा, जिन्हें इमरजेंसी में तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है। नई सुविधा के आने से यूजर्स को होंगे ये फायदे भी EPF सब्सक्राइबर्स अपने अकाउंट में उपलब्ध Withdrawal Balance देख सकेंगे, यानी कितना पैसा निकाल सकते हैं इसकी जानकारी सीधे मिल जाएगी। इसके बाद यूजर्स अपने बैंक अकाउंट से लिंक UPI ID और UPI PIN की मदद से ट्रांजैक्शन पूरा कर सकेंगे। इससे पैसा सुरक्षित तरीके से सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा। UPI के जरिए PF का पैसा निकालने का 3 स्टेप प्रोसेस Step 1: सबसे पहले EPFO Portal या UMANG App में अपने UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से Login करना होगा। इसके बाद KYC और बैंक डिटेल्स चेक करनी होंगी। यहां आपको UPI ID लिंक करने का ऑप्शन भी मिल सकता है। Step 2: अब PF Withdrawal या Claim सेक्शन में जाकर जितनी राशि निकालनी है, उसे चुनना होगा। इसके बाद अपनी UPI ID दर्ज करके OTP या वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरा करना पड़ सकता है। Step 3: वेरिफिकेशन और अप्रूवल पूरा होने के बाद PF का पैसा सीधे आपके UPI से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर हो सकता है। यानी Google Pay, PhonePe, Paytm या दूसरे UPI ऐप से जुड़े अकाउंट में पैसा जल्दी पहुंच सकता है। हालांकि अभी तक EPFO ने आधिकारिक तौर पर किसी खास ऐप का नाम नहीं बताया है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सुविधा करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इन बातों का रखना होगा ध्यान 1. EPFO में Aadhaar, PAN और Bank Account KYC पूरी होनी चाहिए। 2. मोबाइल नंबर UAN से लिंक होना जरूरी है। 3. UPI ID उसी बैंक अकाउंट से जुड़ी होनी चाहिए, जो EPFO में दर्ज है। 4. गलत जानकारी होने पर Claim अटक सकता है।

‘अज्ञात’ का एक और निशाना, हमजा बुरहान के बाद सामने आई आतंकियों की लंबी लिस्ट

नई दिल्ली  पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है । इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं।  पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत? भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया ।  लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला? पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था।  मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया? जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था।  पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ? साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था।  ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था।  यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट     मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा.     हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद.     जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान.     दाऊद इब्राहिम कास्कर.     वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा.     लखबीर सिंह उर्फ रोडे.     रंजीत सिंह उर्फ नीता.     परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़.     भूपिंदर सिंह भिंडा.     गुरमीत सिंह बग्गा.     गुरपतवंत सिंह पन्नून.     हरदीप सिंह निज्जर.     परमजीत सिंह उर्फ पम्मा.     साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम.     यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई.     अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की.     शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह.     फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू.     अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर.     इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ.     यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम.     शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन.     सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग.     गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद.     जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद … Read more

वैश्विक टकराव के बीच भारत पर बढ़ा दबाव, आखिर कैसे टूटेगा ये चक्रव्यूह?

नई दिल्ली भारत आर्थिक तौर पर संकट के दौर से गुजर रहा है. कारण सबको पता है, मिडिल-ईस्ट में तनाव. हालात ये हैं कि भारत के लोग सुबह उठकर सबसे पहले नजर डालते हैं कि दुनिया में कच्चा तेल और युद्ध को लेकर क्या अपडेट्स हैं।  दरअसल, दुनिया के किसी कोने में कोई मिसाइल दागता है, दो देश आपस में टकराते हैं, या कोई बड़ा देश कमजोर देश पर पाबंदियां लगाता है, तो उसकी सीधी मार भारत की जेब पर पड़ती है. यानी करे कोई, और भुगते कोई. यह सिस्टम हर भारतीय को चुभता है।  रूस-यूक्रेन का युद्ध हो, या फिलहाल अमेरिका और ईरान की जंग. तबाही का मंजर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा है? जबकि इस दौरान अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बना हुआ है, भारत का बाजार ही पस्त नहीं है, बल्कि जीडीपी की रफ्तार थमने वाली है।  अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों दुनिया की हर जंग का बिल भारत को चुकाना पड़ता है, इसके पीछे के असली कारण क्या हैं और इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता क्या है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, और इसके पीछे कोई इत्तेफाक है, मुख्यतौर पर फिलहाल 4 कारण सामने दिख रहे हैं।  1. कच्चा तेल (भारत की मजबूरी) भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी एक तरह से भारत की इकोनॉमी तेल पर टिकी है. जब भी पश्चिम एशिया में तनाव होता है, हॉर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर संकट आता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, और भारत कुछ नहीं कर पाता है।  जबकि अमेरिका का गणित अलग है. अमेरिका अब सिर्फ तेल खरीदता नहीं है, वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. जब तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होता है, यानी ऐसे संकट में भी अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता. जबकि भारत के डॉलर पानी की तरह बहने लगते हैं. इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'आयातित महंगाई' कहते हैं, यानी महंगाई बढ़ने के कारण विदेशी फैसले होते हैं।  2. डॉलर की दादागीरी दुनिया में व्यवस्था ऐसी है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो ग्लोबल इंवेस्टर्स अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए डॉलर खरीदने भागते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर पड़ जाता है. मौजूदा दौर में पिछले करीब 2 महीने से यही हो रहा है. रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है कि जो तेल दो महीने पहले महज 70-75 डॉलर प्रति बैरल में खरीद रहे थे, अब उसके लिए 100 डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है. एक तो कच्चा तेल का महंगा होना, और फिर रुपया का कमजोर पड़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरी चोट पहुंचाता है. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।  3. शेयर बाजार का गणित वैश्विक तनाव के दौरान हमेशा भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, और उसकी वजह भी विदेशी निवेशक (FII) ही होते हैं. जबकि ऐसे संकट के समय में अमेरिका बच जाता है. क्योंकि अमेरिका को दुनिया का 'सेफ हेवन' माना जाता है. जैसे ही दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, विदेशी निवेशक भारत जैसे 'इमर्जिंग मार्केट्स' से अपना मुनाफा समेटते हैं और उस पैसे को निकालकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स या अमेरिकी शेयर बाजार में लगा देते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि भारत का बाजार गिर जाता है और अमेरिका का बाजार मजबूती से डटा रहता है।  4. तनाव का एक्सपोर्ट पर सीधा असर भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजें एक्सपोर्ट करता है. लेकिन जब समुद्री रास्तों पर युद्ध का साया होता है, तो एक्सपोर्ट बाधित हो जाता है, या फिर जहाजों की आवाजाही दूसरे लंबे रूटों से करनी पड़ती है. इससे जहाजों का किराया और इंश्योरेंस का प्रीमियम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है. फिर विदेशी बाजारों में पहुंचते-पहुंचते इनमें आयात किया जाने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है, प्रोडक्ट महंगा होने की वजह से बिक्री घट जाती है. यानी कुल मिलाकर एक्सपोर्ट ठप पड़ जाता है और देश में आने वाली विदेशी करेंसी कम हो जाती है।  जब ये सारे संकट एक साथ आते हैं, तो देश की विकास दर यानी जीडीपी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि घरेलू मोर्चे पर किसी तरह का कोई संकट नहीं होता है. केवल एक तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है. जिससे सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं. फिर महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं. ब्याज दरें बढ़ते ही होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं।  फिर जब लोन महंगा होगा और जेब में पैसा कम बचेगा. आम आदमी नया घर, गाड़ी या मोबाइल चाहकर भी नहीं खरीद पाएगा. जब लोग नहीं खरीदेंगे तो फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा. फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा, तो नई नौकरियां नहीं आएंगी. जिससे जीडीपी की रफ्तार अपने आप सुस्त पड़ जाएगी।  इस चक्रव्यूह से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए? ये तो साफ है कि इस संकट के लिए दुनिया को कोसने से कुछ नहीं होगा. भारत को अगर वाकई में आत्मनिर्भर बनना है, तो कुछ मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा।  ऊर्जा पर विदेशी निर्भरता कम  जब तक हम तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहेंगे, हमारी नब्ज उनके हाथ में रहेगी, और ऐसे झटके लगते रहेंगे. हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को तेजी से कम करना होगा. गाड़ियों को इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करना और पेट्रोल में E30 यानी 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाना होगा. सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में भारत को इतनी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी कि हमें बाहर से कच्चा तेल मंगाने की जरूरत सिर्फ पेट्रोकेमिकल्स के लिए पड़े, न कि ईंधन के लिए।  इसके अलावा भारत को 'डी-डॉलरइजेशन' यानी डॉलर की दादागीरी को कम करने की दिशा में सोचना पड़ेगा. रूस, यूएई, ईरान या जिन भी देशों के साथ भारत व्यापार करता है. उनसे सीधे 'रुपया-रुबल' या 'रुपया-दिरहम' में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देना होगा. … Read more

Axis My India के प्रदीप गुप्ता का बड़ा दावा, अगले दो दशक तक BJP रहेगी ताकतवर

नई दिल्ली एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भाजपा के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर कम से कम 20 साल तक जारी रहेगा। 'द एक्सिस माई इंडिया' सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता। मालूम है कि प्रदीप गुप्ता के एक्सिस माय इंडिया के अतीत में ज्यादातर सर्वे और एग्जिट पोल्स सही साबित हुए हैं। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में उनसे चूक हो गई थी। कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है। गुप्ता ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा, ''राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।'' 'राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है BJP' उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है। उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए को अब शानदार कामकाज करना होगा।'' गुप्ता ने कहा, ''जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।'' 'कांग्रेस के लिए विरासत में मिले मुद्दों का बोझ बना हुआ है' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े 'विरासत में मिले मुद्दों' का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा, ''अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।'' गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ''जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।'' 'यूपी में शासन के प्रति संतुष्टि का स्तर अच्छा, पंजाब में मिला-जुला’ वहीं, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि जनता योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से काफी हद तक संतुष्ट है। गुप्ता ने कहा कि पंजाब में चार-कोणीय मुकाबले के उभरने के कारण सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रति जनता की संतुष्टि का स्तर ''मिला-जुला' बना हुआ है। प्रदीप गुप्ता ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन दोनों राज्यों में अपनी एजेंसी के जमीनी स्तर पर किए गए काम से प्राप्त अवलोकन साझा किए। दोनों राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित है और जिनके परिणामों का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर से टेक्नोलॉजी तक, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने खोले विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली  दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।  पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।  किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।  इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला।  UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।  भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत? करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।  क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।  पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला? प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा।  किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है? सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।  क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है।