बढ़ेगी लू, सूखेंगे खेत! अल नीनो-IOD से मौसम और अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट
नईदिल्ली इस साल गर्मी ने अभी से ही पसीना छुड़ाना शुरू कर दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं. मौसम वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि इस बार ‘एल नीन्यो’ साधारण नहीं, बल्कि ‘सुपर एल नीन्यो’ के तौर पर दस्तक दे सकता है. वैज्ञानिकों की चेतावनी सच निकली तो तय मानिए, इस बार गर्मी के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कौन है ‘एल नीन्यो’, जिसकी वजह से गर्मी का हाहाकार मचना शुरू हो गया है। दरअसल, एल नीन्यो स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है ‘छोटा बच्चा’. यह नाम स्पेनिश जरूर है, लेकिन इसका सीधा संबंध दक्षिण अमेरिका से है, जहां कभी स्पेन का हुआ करता था. लेकिन सवाल यह है कि दक्षिण अमेरिका का यह ‘बालक’ भारत में गर्मी क्यों बढ़ा रहा है? इसका जवाब छिपा है प्रशांत महासागर की हवाओं और पानी के तापमान में. आमतौर पर यहां पूर्व से पश्चिम की ओर हवाएं चलती हैं, लेकिन एल नीन्यो आने पर यह सिस्टम उलट जाता है और पूरा समुद्र गर्म होने लगता है। इस बार खतरा इसलिए ज्यादा है क्योंकि प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहा है. मध्य प्रशांत में तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और नीचे की सतह पर गर्म पानी का बड़ा भंडार जमा हो गया है. अगर यही तापमान 2 डिग्री या उससे ज्यादा हो जाता है, तो यह ‘सुपर एल नीन्यो’ कहलाएगा. पिछले 70 सालों में ऐसा केवल 1982, 1997 और 2015 में हुआ था. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार यह 150 साल का सबसे ताकतवर एल नीन्यो बन सकता है। भारत पर इसका असर यह होगा कि मानसून कमजोर पड़ेगा, बारिश कम होगी और उत्तर, मध्य व पश्चिम भारत में भयंकर लू चलेगी. ग्लोबल वार्मिंग पहले ही पृथ्वी को गर्म कर रही है, ऐसे में सुपर एल नीन्यो धरती को भट्टी बना सकता है। यहां से आया एल नीन्यो का नाम : यह नाम स्पेनिश भाषा के शब्द ‘एल नीन्यो’ से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘छोटा बच्चा’ या ‘बालक’. दरअसल, दक्षिण अमेरिका के अधिकांश देशों पर कभी स्पेन का राज था, इसलिए वहां की मुख्य भाषा स्पेनिश है. मछुआरों ने देखा कि क्रिसमस के आसपास समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता था, तो उन्होंने इसे मसीह के शिशु रूप से जोड़कर ‘एल नीन्यो’ नाम दे दिया. दिलचस्प बात यह है कि इस नाम का भारत से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इस मौसमी घटना का असर हजारों किलोमीटर दूर हमारे देश पर भी पड़ता है। यह नाम धीरे-धीरे पूरी दुनिया में मशहूर हो गया। सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर की हवाएं: सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर में ‘ट्रेड विंड्स’ नामक हवाएं पूर्व (दक्षिण अमेरिका) से पश्चिम (एशिया और ऑस्ट्रेलिया) की ओर चलती हैं. ये हवाएं समुद्र की सतह के गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलती रहती हैं. इस वजह से इंडोनेशिया, फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया के पास का पानी का तापमान लगभग 30 डिग्री तक पहुंच जाता है, जबकि दक्षिण अमेरिका के पेरू और एक्वाडोर के तट का पानी ठंडा रहता है. यहां पर इसका तापमान करीब 20 डिग्री तक रहता है. वहां ठंडा पानी नीचे से ऊपर आता रहता है. यही सामान्य स्थिति दुनिया भर के मौसम को संतुलित रखने में मदद करती है। एल नीन्यो आने पर होने वाले बदलाव: जब एल नीन्यो आता है, तो ट्रेड विंड्स यानी पूर्व से पश्चिम चलने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या रुक जाती हैं. मानो किसी ने पंखे का स्विच ऑफ कर दिया हो. अब गर्म पानी जो पश्चिम (एशिया के पास) में जमा था, वह वापस पूर्व की ओर यानी दक्षिण अमेरिका की तरफ बहने लगता है. इससे पूरे प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से 0.5 डिग्री या उससे अधिक बढ़ जाता है. यह गर्म पानी अपने ऊपर की हवा को भी गर्म करता है. गर्म हवा ऊपर उठती है, जिससे दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश होती है, लेकिन एशिया की तरफ बादल नहीं आ पाते हैं। ‘छोटा बच्चा’ करेगा भारत को गर्म : भारत का मानसून मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम हवाओं पर निर्भर करता है, जो अरब सागर और हिंद महासागर से नमी लेकर आती हैं. लेकिन एल नीन्यो होने पर प्रशांत महासागर में गर्म पानी की वजह से हवा का पूरा पैटर्न बदल जाता है. वे हवाएं जो भारत की तरफ नमी लाती हैं, कमजोर पड़ जाती हैं या अपना रास्ता बदल लेती हैं. नतीजतन, भारत के ऊपर बादल नहीं बनते, आसमान साफ रहता है. अप्रैल-जून में सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं और कोई छांव नहीं होती. यही कारण है कि उत्तर भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश जैसे इलाके भट्टी की तरह गर्म हो जाते हैं। बड़ी बला से कम नहीं ‘सुपर एल नीन्यो’: सुपर एल नीन्यो साधारण एल नीन्यो का बेहद खतरनाक रूप होता है. इसे तब कहा जाता है, जब मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का पानी सामान्य तापमान से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक गर्म हो जाए. 1950 के बाद ऐसा केवल तीन बार हुआ है. 1982, 1997 और 2015 में. हर बार इसने दुनिया भर में भीषण सूखा, बाढ़ और असहनीय गर्मी जैसी मौसमी आपदाएं पैदा कीं. इस बार वैज्ञानिक देख रहे हैं कि पानी का तापमान रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डर है कि यह 150 साल का सबसे शक्तिशाली सुपर एल नीन्यो बन सकता है। सुपर एल नीन्यो आया तो क्या होगा उसका असर कैसा है इस बार का सुपर एल नीन्यो: इस बार की खासियत यह है कि प्रशांत महासागर में न केवल सतह का पानी गर्म हो रहा है, बल्कि सतह के नीचे गर्म पानी का एक विशाल भंडार बन चुका है. यह भंडार लगातार 6 महीने से बढ़ रहा है और अब ऊपर आ रहा है. मध्य प्रशांत में साप्ताहिक तापमान पहले ही +0.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब यह नीचे का गर्म पानी पूरी तरह ऊपर आ जाएगा, तो तापमान 2 डिग्री के पार जा सकता … Read more