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आतंकियों की जमानत पर गरमाई बहस, सरकार ने SC में कसाब और हाफिज सईद का किया जिक्र

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों आतंकवाद निरोधी कानून 'UAPA' के तहत जमानत के नियमों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक बेहद कड़ा सवाल उठाया है- 'क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद जैसे खूंखार आतंकियों को भी जमानत दी जा सकती है?' इस मामले का सीधा असर भारत की न्याय प्रणाली और जेलों में बंद उन सैकड़ों विचाराधीन कैदियों पर पड़ेगा, जो सालों से UAPA के तहत बिना सजा के जेल काट रहे हैं। यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक नई लकीर खींचेगी। क्या है पूरा मामला और केंद्र की दलील? सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग बेंचों ने UAPA आरोपियों की जमानत को लेकर विपरीत राय दी है। हाल ही में एक बेंच ने कहा था कि मुकदमे (Trial) में लंबी देरी होने पर आरोपियों को जमानत मिलनी चाहिए। इसी निष्कर्ष पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में कड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल में देरी के आधार पर सभी को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता। "अजमल कसाब के मामले में बड़ी संख्या में गवाह थे, जिससे ट्रायल में देरी हुई। तो क्या आप उसे सिर्फ देरी के आधार पर जमानत दे देंगे? अगर हाफिज सईद को पाकिस्तान से लाया जाए और सबूत जुटाने के कारण ट्रायल में 5 साल लग जाएं, तो क्या उसे भी जमानत मिल जाएगी?" – एसवी राजू, ASG (सुप्रीम कोर्ट में) अपराध की गंभीरता और भूमिका है अहम ASG राजू ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और उसमें आरोपी की भूमिका को जरूर देखा जाना चाहिए। उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगा मामले का उदाहरण दिया। कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपियों को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों को उनकी गंभीर भूमिका के चलते राहत नहीं दी थी। इसे महज एक गणितीय फॉर्मूले की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की दो बेंचों में मतभेद UAPA के तहत जमानत के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ही दो बेंचों के फैसले आपस में टकरा रहे हैं। इसी वजह से यह विवाद इतना गहरा गया है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें: बेंच (जज) मामला मुख्य टिप्पणी जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां सैयद इफ्तिखार अंद्राबी केस (मई 2026) ट्रायल में लंबी देरी और जेल में लंबा समय बिताना जमानत का मजबूत आधार है। 'जेल अपवाद है, बेल नियम है' का सिद्धांत यहां भी लागू होता है। जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले दिल्ली दंगा केस / उमर खालिद (जनवरी 2026) केवल लंबी कैद को जमानत का 'गणितीय फॉर्मूला' नहीं बनाया जा सकता। आरोपी की भूमिका और अपराध की गंभीरता देखना अनिवार्य है। अब 'बड़ी बेंच' करेगी इस विवाद का फैसला  इस मतभेद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच ने 22 मई 2026 को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की एक 'बड़ी बेंच' के पास भेज दिया है। अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) इस कानूनी सवाल के लिए एक नई बेंच का गठन करेंगे। हालांकि, इस बीच कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दो अन्य आरोपियों (तस्लीम अहमद और खालिद सैफी) को मामले के निपटारे तक 6 महीने की अंतरिम जमानत दे दी है।  UAPA मामलों की टाइमलाइन इस कानूनी विवाद की जड़ें पिछले कुछ सालों के बड़े फैसलों से जुड़ी हैं। 2021 (केए नजीब केस): सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला दिया था। इसमें माना गया कि अगर ट्रायल में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, तो मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) के तहत UAPA में भी जमानत दी जा सकती है। जनवरी 2026: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका इसी आधार पर खारिज हुई कि उनका अपराध गंभीर था और केवल समय बीतने पर जमानत नहीं मिल सकती। मई 2026 (अंद्राबी केस): दूसरी बेंच ने कहा कि ट्रायल में देरी होने पर जमानत मिलनी ही चाहिए, जिससे यह मौजूदा विरोधाभास पैदा हुआ। 22 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के इस अहम मामले को अंतिम और स्पष्ट फैसले के लिए 'लार्जर बेंच' के पास रेफर कर दिया।  

ज्योति बसु और ममता सरकार में नहीं हुआ जो, क्या अब सुवेंदु अधिकारी करेंगे बड़ा फैसला?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है।  दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है।  एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल     कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था।      हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं।  30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?     एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है।      अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।  मस्जिद कमेटी ने क्या कहा? सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए।  फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए।  हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है।  सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे।  क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं।  हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार … Read more

तेल संकट की खबरों के बीच इंडियन ऑयल का बयान, जानें पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता पर क्या कहा

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने देश में पेट्रोल एवं डीजल की समग्र किल्लत से इनकार करते हुए शनिवार को कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी होने से संबंधित खबरें 'बेहद स्थानीय' और अस्थायी प्रकृति की हैं जो क्षेत्रीय मांग-आपूर्ति असंतुलन और बिक्री के प्रारूप में बदलाव का नतीजा हैं। क्या कुछ कहा है IOC ने  आईओसी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर बढ़ी हुई मांग का कारण फसल कटाई के समय डीजल की खपत में मौसमी वृद्धि, अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले निजी पेट्रोल पंपों से ग्राहकों का सरकारी क्षेत्र के पंपों की तरफ स्थानांतरण और थोक ईंधन की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप वृद्धि के कारण संस्थागत खरीद में बढ़ोतरी है। पेट्रोल की बिक्री में हुआ इजाफा पब्लिक सेक्टर की कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक से 22 मई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की बिक्री लगभग 18 प्रतिशत बढ़ी जो मांग में निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि को दर्शाता है, जिसे वह देशभर में पूरा कर रही है। आईओसी ने कहा, "हम ग्राहकों और आम जनता को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। कुछ खुदरा केंद्रों पर देखी जा रही स्थिति अत्यंत स्थानीय और अस्थायी है, जो स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन तथा चुनिंदा क्षेत्रों में बिक्री प्रवृत्ति के पुनर्संतुलन के कारण उत्पन्न हुई है।" लगभग सभी पेट्रोल पंप पर तेल : IOC बयान के मुताबिक, आईओसी के 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में बहुत ही कम जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर भंडार और आपूर्ति सामान्य एवं पर्याप्त बनी हुई है। आईओसी ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां देशभर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए हुए हैं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पन्न इन सीमित बाधाओं को दूर करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। आईओसी ने कहा, "मांग में इस निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि के बावजूद इंडियन ऑयल देशभर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रही है।" कंपनी ने उपभोक्ताओं से घबराकर खरीदारी से बचने की अपील करते हुए निर्बाध ईंधन उपलब्धता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, "इंडियन ऑयल अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार एवं आपूर्ति बनाए हुए है।"

बंगाल में सियासी तकरार तेज, ममता बनर्जी की डिजाइन की गई फुटबॉल मूर्ति हटाए जाने पर बवाल

कलकत्ता ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाने वाले सीएम शुभेंदु सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में शनिवार को ममता के कार्यकाल में बने एक स्टैच्यू को हटा दिया गया। यह स्टेच्यू साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर बनाया गया था। यह फैसला, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसीथ प्रमाणिक के बयान के बाद आया है। इस बयान में निशीथ ने स्टेडियम में सुविधाओं को बढ़ाने का ऐलान किया था। खेल मंत्री ने क्या कहा था इस दौरान प्रमाणिक ने इस स्टैच्यू की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह स्टैच्यू दिखने में अच्छा नहीं है। यह बहुत बदसूरत है। कमर के नीचे के दो पैर और उनके ऊपर रखा हुआ फुटबॉल अजीब सा लगता है। शुभेंदु सरकार में खेल मंत्री ने कहाकि यह देखने में भी बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगती, इसलिए हम इस तरह की बेतुकी और अर्थहीन बनावट को यहां नहीं रखेंगे और इसे हटा दिया जाएगा। प्रमाणिक ने कहाकि जब से यह मूर्ति लगी है, पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए । इसके बाद मेस्सी विवाद हुआ और सरकार की सत्ता भी चली गई। राजनीतिक बयान भी आए सामने इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं. बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब तोड़ दी गई है, जैसा पहले कहा गया था. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है. दरअसल, कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस प्रतिमा को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह संरचना स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है और इसे हटाने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की बात भी कही थी।  साल्ट लेक स्टेडियम देश के प्रमुख फुटबॉल मैदानों में से एक है, जहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसे बड़े मुकाबले होते रहे हैं. पिछले साल यहां फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान भी भारी भीड़ देखने को मिली थी. यह प्रतिमा साल 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी. इसे लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग राय बनी हुई थी. कुछ लोग इसे स्टेडियम की पहचान मानते थे, जबकि कुछ इसे असामान्य और विवादित बताते थे. अब इसके तोड़े जाने के बाद कोलकाता में एक बार फिर राजनीतिक और खेल दोनों ही स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।  साल 2017 में हुआ तैयार आखिर शनिवार को, स्टेडियम के पास होने वाले बदलाव के तहत इस स्टैच्यू को हटा दिया गया। साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर यह स्टैच्यू साल 2017 में बनाया गया था। उस साल अंडर-17 फीफा विश्वकप से पहले इसे वीवीआईपी गेट के पास लगाया गया था। इस मूर्ति में फुटबॉल खेलने वाले विशाल पैर दिखाए गए हैं, जो ‘विश्व बांग्ला’ लोगो में विलीन होते हुए प्रतीत होते हैं और फुटबॉल पर ‘जयी’ शब्द अंकित है। खेलमंत्री के कई ऐलान इसके अलावा खेल मंत्री प्रमाणिक ने विवेकानंद युवा भारती क्रीडांगन के आसपास फूड कोर्ट बनाने से लेकर बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का भी ऐलान किया। खेलमंत्री ने यह भी कहाकि लियोनेल मेस्सी के दौरे को लेकर हुए विवाद की फिर से जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि टिकट धारकों को पैसे वापिस मिलें। गौरलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को हराकर सरकार बनाई है। शुभेंदु सरकार यहां पर भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं।

अवैध कब्जों पर कार्रवाई जारी, बंगाल में TMC नेता के दफ्तर पर चला बुलडोजर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया।  शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था।  स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है।  टीएमसी ने लगाया 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी।  सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे।  इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया।  आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है। टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। बदले की भावना से कार्रवाई वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है। रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर बड़ी चर्चा, पीएम मोदी से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटें तक चर्चा चलती रही है. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जय शंकर के अलावा एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद रहे हैं. हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि रूबियो की दिल्ली यात्रा भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है. अपनी इस अहम कूटनीतिक यात्रा के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर रक्षा, व्यापार, इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. इस उच्च स्तरीय मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वह निमंत्रण रहा, जो रूबियो वाशिंगटन से अपने साथ लेकर आए थे. रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का विशेष न्योता दिया।  अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं. उन्होंने आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस दौरान मार्को रुबियो ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है।  बैठक काफी सकारात्मक रही- रुबियो रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि यह बैठक काफी सकारात्मक और उपयोगी रही. दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. अमेरिका ने साफ तौर पर भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।  रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न सिर्फ दोनों देशों को मजबूत करेगा, बल्कि एक मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित होगा।  बैठक के बाद पीएम मोदी ने शेयर कीं तस्वीरें प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद X पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगति पर विस्तार से बातचीत हुई. इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत और अमेरिका वैश्विक हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे. दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।  करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हुआ. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।  इन बातों पर रहेगा फोकस दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे।  पीएम मोदी ने मार्को रूबियो से मुलाकात पर दी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बैठक की अहम जानकारी साझा की है. पीएम मोदी ने रूबियो का भारत में स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और बताया कि इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में हो रही निरंतर प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दों पर भी गहरा मंथन किया. अपनी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई और साझा हितों के लिए भविष्य में भी मजबूती से एक साथ मिलकर कार्य करते रहेंगे।   भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत बनाने पर मोदी-रूबियो की चर्चा- सर्जियो गोर मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद मीडिया से बात कर बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे के करीब चली बैठक काफी सकारात्मक रही. बैठक में सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. गोर ने भारत को अमेरिका का एक अहम साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश मिलकर फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।   अब और मजबूत होगी भारत-US रणनीतिक साझेदारी, MEA ने किया जोरदार स्वागत मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है. MEA ने नई दिल्ली पहुंचने पर तस्वीर शेयर करते हुए रूबियो का हार्दिक अभिनंदन किया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ये यात्रा दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में मील का पत्थर साबित होगी. मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया … Read more

डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की थी प्लानिंग? ईरानी गार्ड्स पर बड़ा आरोप

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है. ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से ट्रेनिंग पाए एक खतरनाक आतंकवादी ने इवांका ट्रंप की जान लेने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था।'द पोस्ट' अखबार को मिली जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी छह साल पहले अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए अपने गुरु और ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था।  सुरक्षा एजेंसियों ने इवांका ट्रंप की हत्या का प्लान बना रहे आतंकी को पकड़ लिया है. उसकी पहचान 32 साल के मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी के तौर पर हुई है. वो इराकी नागरिक बताया जा रहा है।  कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था आतंकी दरअसल 6 साल पहले बगदाद में डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने एक बड़े ऑपरेशन में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था. अल-सादी इस हमले को अपने गुरु की मौत मानता था और तभी से ट्रंप परिवार को तबाह करने की फिराक में था।  आरोपी अल-सादी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार, खासकर उनकी बेटी इवांका ट्रंप को जान से मारने की कसम खाई थी. जांच के दौरान सुरक्षा बलों को अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट भी बरामद हुआ है. वो काफी समय से उनके घर की रेकी कर रहा था।  ‘हमें इवांका को मारना होगा’— मिला आलीशान घर का ब्लूप्रिंट जांच एजेंसियों को आरोपी अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट बरामद हुआ है, जिससे साफ है कि वह लंबे समय से रेकी कर रहा था। वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने बताया कि सुलेमानी की मौत के बाद अल-सादी अक्सर कहता था, “हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा और ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक करना होगा, जैसे उसने हमारे कमांडर को तबाह किया।” फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आतंकी से पूछताछ कर रही हैं। सोशल मीडिया पर दी थी खुली धमकी इवांका ट्रंप और उनके पति जेरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित 24 मिलियन डॉलर के घर की तस्वीरें और नक्शे इस आतंकी ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए थे। आतंकी ने सोशल मीडिया (X और स्नैपचैट) पर अरबी भाषा में लिखा था, 'मैं अमेरिकियों से कहता हूं, इस तस्वीर को देखो और जान लो कि न तो तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। हम अभी निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं। हमारा बदला सिर्फ समय की बात है।' अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के अनुसार, वह अक्सर स्नैपचैट पर साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भेजकर अपने टारगेट को डराता था। अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DoJ) के अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, अल-सादी कोई आम अपराधी नहीं बल्कि यूरोप और अमेरिका में हुए 18 आतंकी हमलों और नाकाम कोशिशों का मुख्य साजिशकर्ता है। उस पर मार्च में एम्स्टर्डम में 'बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन' पर फायरबम फेंकने, अप्रैल में लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से हमला करने और मार्च में ही टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी कराने के गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा वह बेल्जियम के लीज में एक सिनागॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) पर बमबारी और रॉटरडैम में आगजनी की साजिश में भी शामिल रहा है। तुर्की में हुआ गिरफ्तार, सरकारी पासपोर्ट ने चौंकाया सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जब अल-सादी को 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया, तो उसके पास से इराक का 'सर्विस पासपोर्ट' (Service Passport) मिला। अल-सादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक दौरों के नाम पर एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था, जिसकी आड़ में वह दुनिया भर में घूमकर आतंकी नेटवर्क और स्लीपर सेल्स तैयार करता था। फिलहाल, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के निर्देश पर आरोपी अल-सादी को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में कड़ी सुरक्षा के बीच एकांत कारावास (Solitary Confinement) में रखा गया है और आगे की पूछताछ जारी है। 'हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा' वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने इस आतंकी के इरादों के बारे में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद, अल-सादी लोगों से कहता फिर रहा था कि हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा. वो कहता था कि हमें ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक कर देना चाहिए, जिस तरह उसने हमारे घर (कमांडर सुलेमानी) को तबाह किया था। 

Rupee Fall पर बोले अरविंद पनगढ़िया- रुपये को गिरने देने से घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्‍ली पिछले कुछ समय से रुपये में तेज गिरावट आई है, जिसे लेकर कुछ एक्‍सपर्ट्स का दावा है कि रुपया 100 लेवल के पार जा सकता है. यह भी खबर आई है कि आरबीआई रुपये को 100 लेवल पर जाने से बचाने के लिए कई प्रयास कर रहा है।  इस बीच, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI से आग्रह किया है कि 100 लेवल पर जाने से बचाने की कोशिश ना करें. इसे अपनी नीतिगत प्रतिक्रिया निर्धारित न करने दें. 100 सिर्फ एक नंबर है जैसे 99 और 101. उनका तर्क है कि मौजूदा तेल संकट के जवाब में करेंसी का कमजोर होना ही उचित उपाय है।  इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि तेल की कमी चाहे अस्थायी साबित हो या लंबे समय तक चलने वाली, रुपये में गिरावट होने देना ही सबसे व्यावहारिक उपाय होगा. उन्होंने कहा कि अगर तेल की कमी शॉर्टटर्म (3 महीने से एक वर्ष तक) रहती है, तो रुपया अभी गिरावट पर रहेगा, लेकिन तेल आयात बिल कम होने और विदेशी पूंजी द्वारा 'सस्ते' रुपये का लाभ उठाने के लिए भारतीय निवेश की तलाश करने के बाद इसमें काफी सुधार होगा।  रुपये को बचाने की कोशिश बेकार  उन्होंने तर्क दिया कि अगर रुकावट लंबे समय तक चलता है, तो भंडार में कमी या महंगे डॉलर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से रुपये को बचाने के प्रयास विफल हो जाएंगे. पनगढ़िया ने कहा कि तेल की कमी लंबे समय तक चलने वाली है. ऐसे में गिरावट के अलावा किसी भी अन्य उपाय का सहारा लेना व्यर्थ होगा. रुपये को बचाने के प्रयास से भंडार तब तक कम होता रहेगा जब तक कि वह पूरी तरह समाप्त न हो जाए।  100 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर जाना ही होगा इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि डॉलर बांडों को जारी करना और हाई इंटरेस्‍ट वाले NRI डिपॉजिट को भी अस्‍थायी समाधान बताकर खारिज कर दिया. उन्‍होंने कहा कि 100 रुपये प्रति डॉलर का लेवल पार करना ही होगा. पनगढ़िया ने 2013 के मुद्रा संकट से इसकी तुलना की, जब भारत को हाई महंगाई और व्यापक आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ा था।  उन्होंने कहा कि यह 2013 नहीं है. साल 2013 में महंगाई दो अंकों में थी. अब ऐसा नहीं है. इसलिए, अर्थव्यवस्था अवमूल्यन के साथ आने वाले कुछ महंगाई दबाव को अवशोषित करने के लिए अच्छी स्थिति में है. उन्होंने डॉलर बांडों और उच्च ब्याज वाले एनआरआई जमाओं को 'महंगे साधन' बताया है, जो बड़े पैमाने पर लाभ को धनी प्रवासी भारतीयों तक पहुंचाते हैं।  अभी कहां है रुपया?  गौरतलब है कि ये बयान रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.95 पर पहुंचने और बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर 96.86 पर बंद होने के एक दिन बाद आई है. भू-राजनीतिक तनाव में कमी और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद गुरुवार को मुद्रा में 49 पैसे की उछाल आई और यह 96.37 पर बंद हुई। 

Super El Niño:भट्टी बनेगा भारत, भीषण गर्मी से मच सकता है हाहाकार

नई दिल्ली एक बात ये कि इस साल गर्मी ज्यादा पड़ेगी क्योंकि ‘एल नीन्यो’ असर डालेगा. ये शायद आपने सुना हो, लेकिन अब तो कह रहे हैं कि इस साल का ‘एल नीन्यो’, ‘सुपर एल नीन्यो’ होने वाला है यानी गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. तो ये सुपर एल नीन्यो क्या बला है? ज्यादातर पब्लिक तो ये भी नहीं समझती कि एल नीन्यो क्या होता है? पहले तो वही समझ लेना चाहिए, उसके बाद समझेंगे कि सुपर एल नीन्यो क्या होता है. तो एल नीन्यो स्पेनिश भाषा में छोटे बच्चे को कहते हैं. छोटे लड़के को या बालक. जी हां, ये बालक कुछ सालों में लौट कर आता रहता है और भारत में गर्मी बढ़ा जाता है. तो स्पैनिश में नाम क्यों है? स्पेन का हमारी गर्मी से क्या लेना-देना? तो वैसे तो स्पेन का एल नीन्यो से भी कोई लेना-देना नहीं है।  ये नाम एल नीन्यो इसलिए स्पेन की भाषा में है क्योंकि दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर देशों पर स्पेन का राज हुआ करता था. जैसे भारत में अंग्रेजों का राज हुआ करता था, तो यहां अंग्रेजी भाषा उनके साथ आई, लेकिन भारत में पहले से लोग रहते थे और हमारी अपनी भाषाएं भी थीं. लेकिन दक्षिण अमेरिका के बड़े से महाद्वीप पर बहुत ज्यादा आबादी नहीं थी. सारा जंगल था. कुछ मूल निवासी वहां के रहा करते थे. तो स्पेन और पुर्तगाल जैसे यूरोप के देशों के लोग वहां गए और बस गए और राज किया तो उनकी भाषाएं दक्षिण अमेरिका की भी भाषाएं हो गईं।  अभी से दिखने लगा है एल नीन्यो का असर. नामकरण जान लेते हैं जैसे ब्राजील में पुर्तगाल की भाषा बोली जाती है. लेकिन बाकी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के ज़्यादातर देशों में स्पेन की भाषा स्पैनिश बोली जाती है और स्पैनिश में छोटे लड़के को कहते हैं एल नीन्यो. ये नाम दिया गया है मौसम के एक बदलाव को. जो हर कुछ साल में वहां दक्षिण अमेरिका के पूर्व के हिस्से में होता है. अब समझने वाली बात ये है कि ये छोटा बालक अगर दक्षिण अमेरिका के पानी में उथल-पुथल मचाता है, तो भारत में गर्मी क्यों बढ़ जाती है? नक्शे से समझिए एल नीन्यो की ज्योग्राफी तो जरा नक्शा देख लेते हैं. एक तो नक्शा हमें ऐसे देखने की आदत है, जिसमें उत्तर और दक्षिण अमेरिका बाईं तरफ होते हैं यानी पश्चिम में और ऑस्ट्रेलिया और जापान दाईं तरफ होते हैं यानी पूर्व में. स्कूल से ऐसे ही देखते आ रहे हैं और इस नक्शे में दक्षिण अमेरिका भारत के पश्चिम में होता है. लेकिन, दुनिया तो गोल है. तो नक्शे को अगर ऐसे खींचे पूर्व की तरफ से तो ऑस्ट्रेलिया के और आगे जाने पर क्या आएगा? दक्षिण अमेरिका ही आ जाएगा. और दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच में है साउथ पैसिफिक ओशियन या दक्षिण प्रशांत महासागर. यानी दाहिनी तरफ पूर्व में दक्षिण अमेरिका का किनारा है – पेरू और एक्वाडोर जैसे देश. बाईं तरफ यानी पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया है. अब भारत इस नक्शे पर बाईं तरफ है यानी पश्चिम में, प्रशांत से काफी दूर, हिंद महासागर के पास।  एल नीन्यो क्यों बनता है? सामान्य दिनों में क्या होता है कि प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से यानी दक्षिण अमेरिका के पास का पानी ठंडा रहता है. वहां ठंडा पानी ऊपर आता रहता है. जबकि पश्चिमी हिस्से यानी इंडोनेशिया और फिलीपींस के पास का पानी बहुत गर्म रहता है. हवाएं चलती है पूर्व से पश्चिम की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया की चरफ. इन हवाओं को कहते हैं ट्रेड विंड्स. ये हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की तरफ धकेलती रहती हैं. यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया वाली साइड पर गर्म पानी धकेलती रहती हैं. इस वजह से पूर्व में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है, यानी प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका की तरफ ठंडा पानी ऊपर आता रहता है और गर्म पानी एशिया की तरफ जाता रहता है. लेकिन हर 2 से 7 साल में कभी-कभी ट्रेड विंड्स यानी ये वाली हलाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इसको कहते हैं एल नीन्यो।  …फिर भारत में नहीं होती है बारिश जैसे किसी ने हवा का स्विच ऑफ कर दिया हो. तो वो गर्म पानी जो पश्चिम में जमा था, एशिया की तरफ जमा था वो अब पूर्व की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका की ओर बहने लगता है. यानी पूरे प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. 0.5 डिग्री या उससे भी ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे क्या होता है कि समुद्र के ऊपर की हवा गर्म हो जाती है. गर्म हवा ऊपर उठती है, बादल बनते हैं, बारिश होती है. लेकिन ये सब वहीं दक्षिण अमेरिका के पास हो जाता है, क्योंकि हवाएं इस तरफ़ चल ही नहीं रही होतीं तो बादल एशिया की तरफ आते ही नहीं वो वहीं पर बरस जाते हैं. दक्षिण अमेरिका में बारिश ही बारिश हो जाती है।  कैसे प्रभावित होता है भारत का मौसम? अब भारत पर आइए. हमारा मॉनसून पश्चिम की तरफ से आता है. मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम हवाओं से आता है. मतलब अरब सागर और हिंद महासागर के ऊपर से हवाएं आती हैं समुद्र के पाली की नमी लेकर. और जून से सितंबर तक भारी बारिश लाती हैं. एल नीन्यो होने प्रशांत महासागर में गर्म पानी की वजह से ये हवा का पूरा पैटर्न बदल जाता है. वो हवाएं जो भारत की तरफ नम हवा लाती हैं, वे कमजोर पड़ जाती हैं या रास्ता बदल लेती हैं. तो भारत के ऊपर भी बादल कम बनते हैं. आसमान ज़्यादातर साफ रहता है. अप्रैल, मई, जून के महीनों में सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं. कोई बादल छांव नहीं देता. जमीन तेजी से गर्म होती है. खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश आदि इलाकों में।  2 साल पहले भी हुई थी घटना 2023 में भी जब एल नीन्यो मजबूत था, तो भारत के कई शहरों में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच गया था. मानसून कमजोर रहा, बारिश कम हुई, और गर्मी लंबी खिंच गई थी. यानी दूर प्रशांत महासागर में पानी गर्म होने से हवा की एक लंबी चेन चलती है जो हजारों किलोमीटर दूर भारत तक असर … Read more

ऊर्जा संकट के दौर में भारत-वेनेजुएला संबंधों पर बड़ी हलचल, अंतरिम राष्ट्रपति के दौरे की चर्चा

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनती जा रही है. इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत दौरे पर आएंगी, जहां तेल सप्लाई और ऊर्जा सहयोग को लेकर अहम बातचीत होगी।  रुबियो ने भारत रवाना होने से पहले कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत उससे "जितना चाहे उतना तेल खरीदे." उन्होंने कहा, "हम भारत को जितनी ऊर्जा चाहिए उतनी बेचने के लिए तैयार हैं. हमें लगता है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर भी बड़े मौके मौजूद हैं। . मार्को रुबियो ने आगे कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अगले हफ्ते भारत आने वाली हैं." रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है और भारत वैकल्पिक सप्लाई लाइनों की तलाश में जुटा है।  भारत तेल खरीद को कर रहा डाइवर्सिफाई भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बाद भारत लगातार सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन पर काम कर रही है. ऐसे में वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, भारत के लिए अहम विकल्प बनकर उभर रहा है।  दिलचस्प बात यह है कि जनवरी 2026 में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया गया था, जिसके बाद डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया. तब से वॉशिंगटन और कराकस के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रोड्रिगेज की कई बार तारीफ कर चुके हैं, खासकर तेल कंपनियों के साथ सहयोग को लेकर।  तेल क्षेत्र में वेनेजुएला कर रहा सुधार रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला की नई सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए तेल क्षेत्र में बड़े सुधार कर रही है. अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को ज्यादा स्वतंत्रता देने, टैक्स कम करने और पीडीवीएसए के एकाधिकार को कमजोर करने जैसे कदम उठाए गए हैं।  भारत और वेनेजुएला के रिश्तों में एक दिलचस्प सांस्कृतिक कनेक्शन भी है. डेल्सी रोड्रिगेज भारतीय आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा की अनुयायी मानी जाती हैं और उपराष्ट्रपति रहते हुए वह दक्षिण भारत स्थित उनके आश्रम का दौरा भी कर चुकी हैं।  रुबियो खुद 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत होगी. माना जा रहा है कि वेनेजुएला की राष्ट्रपति की यात्रा और रुबियो का दौरा, दोनों मिलकर भारत की ऊर्जा रणनीति में नए समीकरण पैदा कर सकते हैं।